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  • शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला

    शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 876.37 अंक यानी 1.17 प्रतिशत टूटकर 73,852.90 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 257.20 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।

    सोमवार के कारोबार में बाजार के ज्यादातर प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी रही। निजी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एफएमसीजी और आईटी शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली का असर बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के सूचकांकों पर भी पड़ा। बाजार में व्यापक गिरावट से संकेत मिला कि निवेशक वैश्विक परिस्थितियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा। यह 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.44 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.28 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी सर्विसेज 1.25 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.20 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 1.05 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी इंडिया डिफेंस में भी 0.94 प्रतिशत की गिरावट रही।

    बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच निफ्टी पीएसयू बैंक एकमात्र ऐसा प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा, जिसने तेजी दर्ज की। यह 2.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मार्जिन और एसेट क्वालिटी स्थिर रहने की उम्मीदों से समर्थन मिला। इसके विपरीत, निजी बैंकों में तिमाही नतीजों और मुनाफे के मार्जिन को लेकर चिंताओं के कारण दबाव बना रहा।

    बड़ी कंपनियों के अलावा मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 641.80 अंक यानी 1.09 प्रतिशत टूटकर 58,487.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 194.05 अंक यानी 1.01 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,935.75 पर आ गया। इससे स्पष्ट हुआ कि बिकवाली का असर बाजार के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी और इंडिगो बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एनटीपीसी और एचडीएफसी बैंक समेत कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, टाइटन, टेक महिंद्रा, एमएंडएम और पावर ग्रिड भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अमेरिका की ओर से रूस से जुड़े प्रमुख प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने की बात कही गई। इससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, निजी बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली तथा तिमाही नतीजों को लेकर बनी चिंताओं के बीच बाजार दबाव में रहा। निफ्टी का 23,000 से नीचे बंद होना और मिडकैप-स्मॉलकैप में गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।

  • एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने कहा- अभी कुछ कहना जल्दबाजी, वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू

    एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने कहा- अभी कुछ कहना जल्दबाजी, वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । 
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर कहा कि फिलहाल इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि अगले केंद्रीय बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और अभी यह तय करने का समय नहीं है कि सरकार किन मुद्दों पर विचार करेगी। वित्त मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब निवेशक पूंजीगत लाभ पर लगने वाले कर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में संभावित बदलाव को लेकर अपनी राय सामने रख रहे हैं।

    एक कार्यक्रम में बोलते हुए निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि भारत और विदेशों के निवेशक एलटीसीजी टैक्स को लेकर अपने विचार रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर मिलने वाले सुझावों और विचारों को गंभीरता से सुनेगी। वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस चर्चा में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का विषय भी जुड़ा हुआ है। बाजार से जुड़े प्रतिभागियों ने यह सवाल उठाया है कि क्या अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों के साथ कर व्यवस्था में समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

    सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के केंद्रीय बजट की तैयारी कर रही है। इसे 1 फरवरी 2027 को पेश किया जाना है। एलटीसीजी टैक्स में संभावित बदलाव को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि बजट से पहले इस विषय पर निवेशकों और बाजार के अन्य प्रतिभागियों की राय सामने आ रही है, लेकिन सरकार की ओर से किसी प्रस्तावित बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है।

    मौजूदा नियमों के अनुसार, एक साल से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत कर लगता है। हालांकि, एक वित्त वर्ष में ऐसे लाभ के 1.25 लाख रुपये तक के हिस्से पर कर छूट उपलब्ध है। इस व्यवस्था में जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट के दौरान बदलाव किया गया था। उस समय एलटीसीजी टैक्स की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी गई थी। साथ ही, कर छूट की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई थी।

    बजट 2026 के दौरान बाजार के कुछ वर्गों को उम्मीद थी कि पूंजीगत लाभ कर की दर घटाई जा सकती है या कर छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, उस बजट में मौजूदा पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था को बरकरार रखा गया था। दूसरी ओर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी एफएंडओ कारोबार पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी। इस कारण पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर से जुड़े मुद्दे बाजार की चर्चाओं में बने हुए हैं।

    उद्योग संगठनों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कई बार यह दलील दी है कि भारत की पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था घरेलू शेयर बाजारों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकती है और निवेश के प्रवाह पर असर डाल सकती है। इसी बीच, इस वर्ष विदेशी निवेशक लंबे समय तक भारतीय इक्विटी बाजारों में शुद्ध बिकवाल बने रहे हैं। इन परिस्थितियों में कर व्यवस्था से जुड़े संभावित बदलावों पर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    वित्त मंत्री की टिप्पणियों के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, एलटीसीजी टैक्स में बदलाव को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। आगामी बजट प्रक्रिया के दौरान इस विषय पर मिलने वाले सुझावों और सरकार के रुख पर नजर रहेगी।

  • शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लगातार दो कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद तेजी लौटी। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 288.65 अंक यानी 1.30 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी की प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। हाल की गिरावट के बाद शेयरों के आकर्षक मूल्य स्तर पर खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को सहारा मिला।

    शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसमें लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कमोडिटीज भी बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का दायरा आईटी शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार में मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 904.80 अंक यानी 1.56 प्रतिशत चढ़कर 58,787.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 103.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 19,153.70 पर बंद हुआ। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक खरीदारी हुई। सेंसेक्स में शामिल आईटीसी, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड बढ़त के साथ बंद हुए। मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, इंडिगो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी तेजी रही। सेंसेक्स पैक में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग की, जबकि शॉर्ट पोजिशन बंद किए जाने से भी बाजार को मजबूती मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के शुरुआती संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी आय की संभावनाओं को लेकर बढ़ते भरोसे ने आईटी कंपनियों के शेयरों को समर्थन दिया। आईटी क्षेत्र में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की तेजी में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की। ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कम होने के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे निवेशकों की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    हालांकि, बाजार में आई तेजी के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी पर दबाव डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी चरणबद्ध सख्ती वाले रुख के बाद निवेशक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर अधिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संदर्भ में सोमवार को जारी होने वाले घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी। महंगाई के ये आंकड़े निवेशकों की उम्मीदों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी अहम रहेंगे। कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन तय करेगा कि शुक्रवार को आई तेजी आगे भी कायम रह पाती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ता है।

  • शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    नई दिल्ली ।भारतीय कंपनियों ने वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के माध्यम से रिकॉर्ड 12.5 अरब डॉलर जुटाए हैं। जनवरी से सितंबर तक जुटाई गई यह राशि 1980 से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि का अब तक का सबसे बड़ा फंड जुटाव है। खास बात यह है कि आईपीओ बाजार में यह मजबूती ऐसे समय देखने को मिली, जब व्यापक शेयर बाजार दबाव में रहा और निफ्टी में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम के जरिए पूंजी जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।

    जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान कुल 220 आईपीओ बाजार में आए। पिछले वर्ष की समान अवधि में 268 आईपीओ जारी किए गए थे। इस तरह निर्गमों की संख्या में लगभग 17.9 प्रतिशत की कमी आई। इसके बावजूद कंपनियों ने कुल मिलाकर पिछले वर्ष की तुलना में 11.3 प्रतिशत अधिक राशि जुटाई। इसका प्रमुख कारण बड़े आकार के आईपीओ का बाजार में आना रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, औसत आईपीओ का आकार बढ़कर लगभग 5.7 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यह करीब 4.2 करोड़ डॉलर था। कुल जुटाई गई राशि का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा कुछ चुनिंदा बड़े निर्गमों से आया।

    सितंबर का महीना आईपीओ बाजार के लिए विशेष रूप से मजबूत रहा। इस महीने 34 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए लगभग 39,380 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह 2026 में किसी एक महीने के दौरान जुटाई गई सबसे बड़ी राशि रही। हालांकि, इस रकम का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के माध्यम से आया। ओएफएस में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं, इसलिए इससे प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा सीधे कंपनियों के खाते में जाने के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलता है। इस वजह से कुल आईपीओ राशि और कंपनियों को वास्तव में मिलने वाली नई पूंजी के बीच अंतर बना रहा।

    आईपीओ बाजार की मजबूती के विपरीत, व्यापक इक्विटी पूंजी बाजार में कुल फंड जुटाव कमजोर हुआ। फॉलो-ऑन ऑफरिंग्स और ब्लॉक डील्स सहित कुल इक्विटी कैपिटल मार्केट फंड जुटाव 1.7 प्रतिशत घटकर 40.8 अरब डॉलर रह गया। यह पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया गया है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने जनवरी से सितंबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से अनुमानित 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बावजूद घरेलू बाजार में उपलब्ध तरलता ने आईपीओ गतिविधियों को समर्थन दिया।

    लिस्टिंग के बाद निवेशकों को मिलने वाले लाभ में हालांकि कमी के संकेत सामने आए। सितंबर में आईपीओ का औसत लिस्टिंग प्रीमियम 15.1 प्रतिशत रहा, जबकि अगस्त में यह 24.4 प्रतिशत था। इसी तरह मीडियन लिस्टिंग लाभ अगस्त के 21.3 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 5.9 प्रतिशत रह गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ से पूंजी जुटाने की गतिविधि मजबूत रहने के बावजूद शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद मिलने वाला शुरुआती लाभ कम हुआ है। इससे नए निर्गमों में निवेश करने वाले लोगों के लिए लिस्टिंग प्रदर्शन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो गया है।

    निवेश बैंकिंग उद्योग के आंकड़ों में भी मिली-जुली तस्वीर सामने आई। इक्विटी अंडरराइटिंग से मिलने वाली फीस नौ प्रतिशत घटकर 415.6 मिलियन डॉलर रह गई। इसके विपरीत, विलय और अधिग्रहण यानी एमएंडए से जुड़ी मजबूत गतिविधियों के कारण कुल निवेश बैंकिंग फीस दो प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई। आगे आईपीओ बाजार की दिशा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निवेशकों की भागीदारी और लिस्टिंग से मिलने वाला लाभ किस स्तर पर बना रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 130 से अधिक कंपनियों के पास भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी है। ऐसे में आने वाले महीनों में नए निर्गमों की गतिविधियों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांकों में कुछ सुधार देखने को मिला।

    साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को निफ्टी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह सेंसेक्स में शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी आई और यह 73,895 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह के आधार पर सेंसेक्स में 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। इसके बाद शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से बाजार में सीमित सुधार आया। हालांकि, सप्ताहभर के दबाव को पूरी तरह दूर करने में यह तेजी सफल नहीं रही।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के स्तर पर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं ने तेल कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा। सप्ताह के अंत में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर संभावित दबाव को लेकर चिंता कुछ कम हुई।

    अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बढ़ी यील्ड भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती हैं और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने 11,490 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। यह लगातार छठा सप्ताह रहा, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी और सप्ताह के दौरान 16,398 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू निवेश से बाजार में गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद मिली।

    सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक 18,531 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 52,617 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से करीब 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

    आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक संकेतों से प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और अमेरिका के दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। तकनीकी स्तर पर 23,000 को निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट क्षेत्र और 23,200 को निकटतम रेजिस्टेंस स्तर माना जा रहा है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम और निवेश प्रवाह बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाए रख सकते हैं।

  • लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयरों में लिस्टिंग के अगले ही दिन शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के बाद शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव दिखाई दिया। कारोबार के दौरान एनएसई का शेयर करीब 1.6 प्रतिशत फिसलकर 1,790 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में यह करीब 1,796 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 1.20 प्रतिशत नीचे था।

    एनएसई के शेयर गुरुवार को अपने इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग वाले दिन शुरुआती कारोबार अपेक्षाकृत सीमित रहा, लेकिन बाद में शेयर में तेजी आई और दिन के दौरान इसमें 5 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था। इसके बाद अगले कारोबारी दिन कुछ निवेशकों ने शुरुआती तेजी का लाभ उठाते हुए मुनाफावसूली की।

    एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। एनएसई के आईपीओ को भी निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी।

    17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले इस आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 22,568.94 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले करीब 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस मजबूत मांग के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग को लेकर बाजार में काफी दिलचस्पी बनी हुई थी।

    लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस मूल्यांकन के साथ कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो गई। बाजार मूल्य के लिहाज से एनएसई ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर एनएसई से ऊपर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां हैं। इस तरह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के तुरंत बाद एनएसई का मूल्यांकन देश की बड़ी कंपनियों की सूची में महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।

    लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट को अल्पकालिक मुनाफावसूली के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती कारोबार में तेजी के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा बुक किए जाने से शेयर पर दबाव बढ़ा। हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और एनएसई की बाजार में मजबूत स्थिति के कारण कंपनी को लेकर निवेशकों की दीर्घकालिक दिलचस्पी बनी रहने की बात कही गई है।

    एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों को ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

    कंपनी की आय में ट्रांजैक्शन शुल्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया था। यह आंकड़ा कंपनी के मौजूदा कारोबार मॉडल में लेनदेन आधारित आय के महत्व को दर्शाता है। लिस्टिंग के बाद शेयर में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बीच अब बाजार की नजर कंपनी के कारोबार और भविष्य के प्रदर्शन पर बनी हुई है।

  • SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले

    SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स (PMS) के निवेश का दायरा बढ़ेगा। अब विदेशी लिस्टेड शेयर, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज जैसे विकल्प भी उनके निवेश दायरे में आ सकेंगे। इसके साथ ही IPO, प्राइमरी मार्केट डेट, FPI, REIT-InvIT, विज्ञापन और सेटलमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। SEBI ने 2026 के नए PMS रेगुलेशन को मंजूरी दी है।

    PMS के जरिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे
    SEBI ने 2020 के पुराने नियमों की जगह 2026 के नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन को मंजूरी दी है। इसके बाद PMS के लिए निवेश के विकल्प बढ़ जाएंगे। तय नियमों और सीमाओं के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे।

    क्लाइंट की मंजूरी मिलने पर पोर्टफोलियो मैनेजर उसके कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज में भी लगा सकेगा।

    IPO और प्राइमरी मार्केट में भी निवेश
    नए नियमों के तहत PMS के लिए IPO और प्राइमरी मार्केट डेट में निवेश का रास्ता भी खुला है। इसका मतलब है कि PMS के जरिए अपना पैसा मैनेज कराने वाले निवेशकों के लिए नए शेयर जारी होने के समय निवेश का विकल्प उपलब्ध होगा।

    भारतीय म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान स्कीमों में निवेश की भी अनुमति दी गई है। इनमें ETF, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड शामिल हैं। इस सुविधा के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपए रखी गई है।

    PMS के नियमों का आकार भी हुआ छोटा
    SEBI ने निवेश के विकल्प बढ़ाने के साथ नियमों को आसान बनाने पर भी जोर दिया है। नए PMS नियमों का दस्तावेज 70 पेज से घटाकर 33 पेज कर दिया गया है। SEBI के मुताबिक, इसमें शब्दों की संख्या भी करीब 42% कम की गई है।

    इसके अलावा इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर का नया कॉन्सेप्ट भी मंजूर किया गया है। ऐसे फंड मैनेजर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर क्लाइंट का पोर्टफोलियो संभाल सकेंगे। हालांकि, उनके काम की जिम्मेदारी और देनदारी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की ही रहेगी।

    प्रिंसिपल ऑफिसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में भी राहत दी गई है। वहीं, 100 करोड़ रुपए से कम AUM वाले पोर्टफोलियो मैनेजर्स को डीलिंग रूम की अनिवार्य शर्त से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें ऑडिट ट्रेल और मजबूत इंटरनल कंट्रोल बनाए रखना होगा।

    FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में नया विकल्प
    SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए भी निवेश का दायरा बढ़ाया है। अब FPI फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे।

    इनमें ऐसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस शामिल होते हैं, जिनका अंतर्निहित मूल्य कृषि उत्पादों के बजाय अन्य कच्चे माल, धातुओं या ऊर्जा स्रोतों से जुड़ा होता है। हालांकि, इसके लिए समयसीमा तय की गई है। FPI को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले और एक्सपायरी से कम से कम तीन दिन पहले अपनी पोजिशन खत्म करनी होगी।

    5 करोड़ की संपत्ति वाले व्यक्ति भी बन सकेंगे Accredited Investor
    SEBI ने Accredited Investor की कैटेगरी का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिक्योरिटीज मार्केट में 5 करोड़ रुपए की संपत्ति रखने वाले व्यक्तिगत निवेशक और 20 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले बॉडी कॉरपोरेट्स भी कुछ मौजूदा आय और नेटवर्थ शर्तें पूरी करने पर इस कैटेगरी में शामिल हो सकेंगे।

    Accredited Investor ऐसे निवेशकों की श्रेणी है, जिन्हें कुछ विशेष निवेश विकल्पों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता वाला माना जाता है। SEBI ने अगस्त 2026 में इस फ्रेमवर्क की समीक्षा से जुड़ा कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया था।

    सेलिब्रिटी के वित्तीय विज्ञापनों पर नए नियम
    वित्तीय कंपनियों और मार्केट इंटरमीडियरी के विज्ञापनों में सेलिब्रिटी की भूमिका को लेकर भी नियम बदले गए हैं। SEBI ने Common Advertisement Code को मंजूरी दी है।

    इसके तहत कोई सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या कंपनी का प्रचार कर सकता है, लेकिन किसी खास वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस को सीधे एंडोर्स नहीं कर सकेगा। यानी वह किसी कंपनी के विज्ञापन में नजर आ सकता है, लेकिन निवेशकों से किसी विशेष वित्तीय प्रोडक्ट को खरीदने या उसमें पैसा लगाने की अपील नहीं कर सकेगा। इस विषय पर SEBI ने जून 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया था।

    10 लाख रुपए तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट
    शेयर बाजार से जुड़े विवादों और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट प्रक्रिया को भी बदला गया है। SEBI ने सेटलमेंट अमाउंट तय करने का नया फॉर्मूला मंजूर किया है।

    10 लाख रुपए तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट का रास्ता होगा। गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली अलग से तय होगी। नए फॉर्मूले का उद्देश्य सेटलमेंट राशि तय करते समय एक ही नुकसान या रकम की दो बार गणना की समस्या को दूर करना है।

    SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY24-25 में सेटलमेंट के 703 आवेदन आए थे। FY25-26 में 439 आवेदन आए और 170 मामलों का निपटारा हुआ। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच BSE के इलिक्विड स्टॉक ऑप्शंस में गैर-असली ट्रेड से जुड़े मामलों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम, 2026 को भी मंजूरी दी गई है।

    REIT और InvIT के लिए विदेशी फंड जुटाने का रास्ता
    SEBI ने REIT और पब्लिकली लिस्टेड InvIT से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब ये मंजूर विदेशी बाजारों में डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी कर सकेंगे। इससे इन साधनों के लिए विदेशी निवेश जुटाने का एक नया माध्यम उपलब्ध हो सकता है। REIT और InvIT से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए SEBI ने अगस्त 2026 में अलग-अलग कंसल्टेशन पेपर भी जारी किए थे।

    वोटिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 75% आउटस्टैंडिंग यूनिट्स की जगह डाले गए वोट्स का 75% होना पर्याप्त होगा। स्पॉन्सर बदलने की स्थिति में एग्जिट ऑफर के नियमों में भी बदलाव किया गया है और असहमत यूनिटहोल्डर्स के साथ व्यवहार को स्पष्ट किया गया है।

    रिसर्च एनालिस्ट और वॉल्ट मैनेजर के नियमों में बदलाव
    SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च एंटिटीज के लिए कुछ कंप्लायंस नियमों को भी आसान किया है। संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग रखने से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।

    वहीं, वॉल्ट मैनेजर्स के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा 50 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपए कर दी गई है। नए नियमों में स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया गया है। वॉल्ट मैनेजर्स के नियमों में गोल्ड और सिल्वर ETF तथा बुलियन डेरिवेटिव्स से जुड़े बुलियन को भी शामिल किया गया है।

    इस तरह SEBI के हालिया फैसलों में एक तरफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स और कुछ निवेशकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाए गए हैं, वहीं विज्ञापन, सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है।

  • सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू

    सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू


    नई दिल्ली।
    सहारा समूह (Sahara Group) की चार सहकारी समितियों (Four Cooperative Societies) में फंसे पैसे के रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों (Millions Investors) के लिए राहत भरी जरूरी खबर है। केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को फिर से एक्टिव कर दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटके करीब 20 लाख क्लेम की जांच और प्रोसेसिंग दोबारा शुरू हो गई है। पोर्टल के मुताबिक सत्यापित और पात्र क्लेम पर ₹10 लाख तक रिफंड दिया जा रहा है। इससे पहले इसकी लिमिट केवल ₹50,000 तक थी।


    9,267 करोड़ रुपये रिफंड

    सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 41.56 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को करीब 9,267 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। यह राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। अब लंबित आवेदनों की जांच कर पात्र निवेशकों को रिफंड देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    क्यों बंद हुई थी रिफंड की प्रकिया?
    सरकार के अनुसार नवंबर 2025 के बाद पोर्टल की IT इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइसेंस, हार्डवेयर, AMC और कर्मचारियों से जुड़ी कुछ समस्याओं के कारण क्लेम की प्रोसेसिंग प्रभावित हुई थी। अब इन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर पोर्टल बहाल किया गया है।


    45 दिन में पैसा आएगा?

    रिफंड व्यवस्था में पात्र क्लेम पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया को सामान्य तौर पर 45 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रावधान बताया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अप्लाई करते ही 45 दिन में पैसा खाते में आना तय है।

    पहले Aadhaar e-KYC, बैंक खाते की जानकारी, सदस्यता/जमा रिकॉर्ड और संबंधित सहकारी समिति के रिकॉर्ड का सत्यापन होता है। किसी तरह की कमी मिलने पर क्लेम अटक सकता है।


    क्लेम रिजेक्ट या Deficiency में गया है तो क्या करें?

    जिन निवेशकों के आवेदन में कमी बताई गई है, उनके लिए Resubmission Portal की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे निवेशकों को बताई गई कमी दूर करके अपना दावा दोबारा जमा करना चाहिए। ध्यान रखें कि रिफंड के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति या वेबसाइट को OTP, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी न दें। आवेदन और स्टेटस के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।


    31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी प्रक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद सहारा समितियों के जमाकर्ताओं को रिफंड देने की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में लंबित क्लेम की प्रोसेसिंग और भुगतान महत्वपूर्ण रहेगा।


    किसी भी सहायता के लिए नीचे दिए नंबरों पर करें कॉल
    पोर्टल हेल्प डेस्क नंबर:

    01120909044 / 01120909045
    सोसायटी के नंबर:
    0522 6937100
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    0522 6931000
    08069208210
    संपर्क का समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर)

  • दुबई में सीएम मोहन यादव ने वैश्विक उद्योगपतियों से की मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के लिए रखे कई प्रस्ताव

    दुबई में सीएम मोहन यादव ने वैश्विक उद्योगपतियों से की मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के लिए रखे कई प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग के तीसरे दिन 8 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन बैठकों में मध्य प्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, तकनीक, ग्रीन एनर्जी और नगरीय विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए आमंत्रित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों के सामने मध्य प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को रखते हुए कहा कि राज्य देश के मध्य में स्थित होने के कारण सड़क, रेल और हवाई संपर्क के लिहाज से सुविधाजनक स्थिति में है। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा और कुशल मानव संसाधन को निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार मध्य प्रदेश से देश के विभिन्न हिस्सों तक उत्पादों की पहुंच सुगम और त्वरित है।

    क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बद्र जाफर के साथ बैठक में वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने की बात कही। जाफर ने शहरी अधोसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और तकनीक हस्तांतरण में दीर्घकालिक निवेश में रुचि दिखाई। ऊर्जा और तकनीक में नवाचार पर भी चर्चा हुई।

    डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार के साथ बैठक में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना बताई। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन सुविधाओं के माध्यम से किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों को बेहतर व्यापार तथा निर्यात सहायता देने पर चर्चा हुई।

    राणा होल्डिंग्स के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा के साथ बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और कृषि मशीनरी में निवेश संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की के साथ बैठक में शिक्षा क्षेत्र में निवेश पर विचार हुआ। कंपनी ने मध्य प्रदेश के प्रमुख और विकासशील शहरों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रुचि दिखाई। इन संस्थानों में विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ स्थानीय जरूरतों और भविष्य की शिक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम लागू करने की योजना पर चर्चा हुई।

    ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, तकनीक और ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की इच्छा जताई।

    शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर के साथ शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर चर्चा हुई। इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में रेल-साइडिंग वाले लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार हुआ। इसमें 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश और करीब 300 से 600 रोजगार अवसरों की संभावना बताई गई।

    वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर के साथ वीजा सेवाओं, पर्यटन, रोजगार और युवाओं के कौशल विकास पर चर्चा हुई। भोपाल और इंदौर में वीजा आवेदन सेवाओं का विस्तार करने तथा युवाओं के लिए यात्रा, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विचार किया गया।

    चोइथराम समूह के अध्यक्ष एल.टी. पगरानी के साथ आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना और रिटेल क्षेत्र में निवेश पर चर्चा हुई। समूह मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में सुपरमार्केट और आधुनिक किराना रिटेल केंद्र स्थापित करने का इच्छुक है। साथ ही स्थानीय किसानों और उत्पादकों से कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खरीद, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निजी लेबल विनिर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

  • बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे

    बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे


    पटना।
    बिहार (Bihar) आज भी निवेश (Investment) आकर्षित करने की कसौटी पर सबसे पिछड़ा राज्य है। आधारभूत संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, कारोबारी माहौल और जमीन आवंटन की जटिलता के मोर्चे पर राज्य आज भी पिछड़ा है। नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रैकिंग रिपोर्ट (Ranking Report) में बिहार देश के बड़े 17 राज्यों में सबसे नीचे 17वें स्थान पर और 36 राज्यों में 26वें स्थान पर है। नीति आयोग द्वारा जुलाई 2026 में जारी निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार को देश के तीसरे श्रेणी के राज्यों में शामिल किया गया है।

    रिपोर्ट में राज्य को सौ अंकों में कुल 41.2 अंक ही प्राप्त हुए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में मानकों के अनुरूप राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। तीसरी श्रेणी (40 से 45 अंक) में बिहार के साथ झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुदुचेरी शामिल हैं। वहीं, उच्च प्रदर्शन (50 से अधिक अंक) वाले पांच राज्यों में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तामिलनाडु शामिल हैं।


    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में निचले पायदान पर

    निवेश अनुकूल सूचकांक में बताया गया है कि बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सिर्फ 0.16 मिलियन डॉलर रहा जबकि इसी वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र में 15,116 मिलियन डॉलर, दिल्ली में 6523.43 मिलियन डॉलर और कर्नाटक में 6571 मिलियन डॉलर रहा। कुल एफडीआई का 85 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तामिलनाडु को मिल जाता है। इसी तरह पेटेंट के मामले में भी बिहार फिसड्डी रहा। रिपोर्ट के अनुसार बिहार से वित्तीय वर्ष 2023 में कंपनियों द्वारा कुल दाखिल पेटेंट का 0.48 प्रतिशत ही दाखिल हो सका।

    जबकि देश के बड़े राज्यों का औसत पेटेंट दाखिल करने की दर 3.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में राज्य में समर्पित(डेडिकेटेड) औद्योगिक पार्क, औद्योगिक आधारभूत संरचना के अलावा निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा की दिशा में काम करने की सलाह दी गई है। आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियां, विनियामक सुगमता, वित्तीय सेहत, संस्थागत वातावरण (इंस्टीटयूशनल इन्वायरमेंट) और पर्यावरणीय लचीलापन की बात भी कही गई।


    दूरगामी रणनीति अपनानाी होगी

    अर्थशास्त्री और नालंदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर सुधांशु कुमार के अनुसार निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार की खराब स्थिति चिंता का विषय है। बड़े राज्यों में सबसे नीचे बिहार की स्थिति राज्य की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करती है जो पहले भी कई अध्ययनों में सामने आती रही हैं। नवाचार और एमएसएमई आधार दोनों ही पिछड़े हैं, जबकि सुरक्षा, भूमि आवंटन और रोजगार की कमी निवेशकों को रोकती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति जीएसडीपी बड़े राज्यों के औसत से 72 फीसदी कम है। निर्णायक दृष्टि और समयबद्ध दूरगामी रणनीति अपनाकर बिहार निम्न विकास के जाल से बाहर निकल सकता है और एक सशक्त आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ सकता है।


    क्या है निवेश अनुकूल सूचकांक

    निवेश अनुकूल सूचकांक के तहत देश के विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में निवेशक और व्यवसाय के लिए कितना अनुकूल माहौल है। इसका मूल्यांकन किया गया है। नीति आयोग ने देश में पहली बार राज्यों की निवेश तैयारियों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट और रैंकिंग जुलाई 2026 में जारी की है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश में मजबूत निवेश पारिस्थितिकी तंत्र(इकोसिस्टम) विकसित कर देश को 2047 तक विकसित देश बनाने के उद्देश्य से इस सूचकांक को जारी किया गया है। इसमें देश के सभी 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश को विभिन्न श्रेणियों के तहत शामिल किया गया है।


    कमियां गिनाईं, सुझाव दिये

    1. बिहार में भूमि आवंटन प्रक्रिया जटिल और उलझाऊ है
    2. रोजगार के अवसर सीमित हैं।
    3. राज्य के द्वितीय और तृतीय श्रेणी वाले शहरों में वायु संपर्कता कम है
    4. बिजली की निर्बाध उपलब्धता के लिए अभी और काम करने की जरूरत है
    5. निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा पर फोकस करने की जरुरत