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  • जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर निवेशकों की नजरें अब शेयर बाजार में होने वाली लिस्टिंग पर टिकी हैं। कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। अब निवेशक शेयरों के अलॉटमेंट, ग्रे मार्केट प्रीमियम और बाजार में संभावित शुरुआती कीमत को लेकर उत्सुक हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे।

    24 अक्टूबर को शाम पांच बजे उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी करीब 248 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। ऊपरी प्राइस बैंड में 248 रुपये का प्रीमियम जोड़ने पर अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,367 रुपये बनती है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 22.16 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत देता है।

    हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत नहीं माना जा सकता। यह अनौपचारिक बाजार में चल रही खरीद-बिक्री से मिलने वाला संकेत है। इसमें लिस्टिंग से पहले बदलाव हो सकता है। शेयर बाजार में कंपनी के शेयर किस भाव पर कारोबार शुरू करेंगे, यह वास्तविक मांग, निवेशकों के व्यवहार और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए मौजूदा जीएमपी को संभावित संकेत के रूप में ही देखना जरूरी है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को निर्धारित है। कारोबार शुरू होने से पहले सुबह नौ बजे से 9:45 बजे तक विशेष प्री-ओपन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में निवेशक अपने ऑर्डर दे सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द भी कर सकेंगे। इसके बाद शेयर का शुरुआती भाव निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह दस बजे कारोबार शुरू होना है।

    आईपीओ के अलॉटमेंट की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को पूरी होने की उम्मीद है। जिन आवेदकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके रिफंड की प्रक्रिया 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। इसी दिन सफल आवेदकों के डीमैट खातों में शेयर जमा किए जाने की भी उम्मीद है। अलॉटमेंट पूरा होने के बाद निवेशक बीएसई, एनएसई या आईपीओ रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे। इसके लिए पैन नंबर या आवेदन से संबंधित विवरण की जरूरत पड़ सकती है।

    इस आईपीओ का कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम 13,428 रुपये का निवेश जरूरी था।

    सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के अनुसार, योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में आईपीओ 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में यह आंकड़ा 14 गुना रहा, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल मिलाकर इश्यू को 22.19 गुना आवेदन प्राप्त हुए।

    लिस्टिंग से पहले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट की स्थिति और बाजार में बन रहे संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, केवल जीएमपी के आधार पर मुनाफे का अनुमान लगाना उचित नहीं है। वास्तविक लिस्टिंग कीमत अनुमान से कम या अधिक हो सकती है। निवेश संबंधी निर्णय लेते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति, आईपीओ से जुड़ी जानकारी और अपनी जोखिम सहने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है।

  • शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    नई दिल्ली ।भारतीय कंपनियों ने वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के माध्यम से रिकॉर्ड 12.5 अरब डॉलर जुटाए हैं। जनवरी से सितंबर तक जुटाई गई यह राशि 1980 से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि का अब तक का सबसे बड़ा फंड जुटाव है। खास बात यह है कि आईपीओ बाजार में यह मजबूती ऐसे समय देखने को मिली, जब व्यापक शेयर बाजार दबाव में रहा और निफ्टी में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम के जरिए पूंजी जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।

    जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान कुल 220 आईपीओ बाजार में आए। पिछले वर्ष की समान अवधि में 268 आईपीओ जारी किए गए थे। इस तरह निर्गमों की संख्या में लगभग 17.9 प्रतिशत की कमी आई। इसके बावजूद कंपनियों ने कुल मिलाकर पिछले वर्ष की तुलना में 11.3 प्रतिशत अधिक राशि जुटाई। इसका प्रमुख कारण बड़े आकार के आईपीओ का बाजार में आना रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, औसत आईपीओ का आकार बढ़कर लगभग 5.7 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यह करीब 4.2 करोड़ डॉलर था। कुल जुटाई गई राशि का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा कुछ चुनिंदा बड़े निर्गमों से आया।

    सितंबर का महीना आईपीओ बाजार के लिए विशेष रूप से मजबूत रहा। इस महीने 34 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए लगभग 39,380 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह 2026 में किसी एक महीने के दौरान जुटाई गई सबसे बड़ी राशि रही। हालांकि, इस रकम का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के माध्यम से आया। ओएफएस में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं, इसलिए इससे प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा सीधे कंपनियों के खाते में जाने के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलता है। इस वजह से कुल आईपीओ राशि और कंपनियों को वास्तव में मिलने वाली नई पूंजी के बीच अंतर बना रहा।

    आईपीओ बाजार की मजबूती के विपरीत, व्यापक इक्विटी पूंजी बाजार में कुल फंड जुटाव कमजोर हुआ। फॉलो-ऑन ऑफरिंग्स और ब्लॉक डील्स सहित कुल इक्विटी कैपिटल मार्केट फंड जुटाव 1.7 प्रतिशत घटकर 40.8 अरब डॉलर रह गया। यह पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया गया है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने जनवरी से सितंबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से अनुमानित 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बावजूद घरेलू बाजार में उपलब्ध तरलता ने आईपीओ गतिविधियों को समर्थन दिया।

    लिस्टिंग के बाद निवेशकों को मिलने वाले लाभ में हालांकि कमी के संकेत सामने आए। सितंबर में आईपीओ का औसत लिस्टिंग प्रीमियम 15.1 प्रतिशत रहा, जबकि अगस्त में यह 24.4 प्रतिशत था। इसी तरह मीडियन लिस्टिंग लाभ अगस्त के 21.3 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 5.9 प्रतिशत रह गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ से पूंजी जुटाने की गतिविधि मजबूत रहने के बावजूद शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद मिलने वाला शुरुआती लाभ कम हुआ है। इससे नए निर्गमों में निवेश करने वाले लोगों के लिए लिस्टिंग प्रदर्शन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो गया है।

    निवेश बैंकिंग उद्योग के आंकड़ों में भी मिली-जुली तस्वीर सामने आई। इक्विटी अंडरराइटिंग से मिलने वाली फीस नौ प्रतिशत घटकर 415.6 मिलियन डॉलर रह गई। इसके विपरीत, विलय और अधिग्रहण यानी एमएंडए से जुड़ी मजबूत गतिविधियों के कारण कुल निवेश बैंकिंग फीस दो प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई। आगे आईपीओ बाजार की दिशा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निवेशकों की भागीदारी और लिस्टिंग से मिलने वाला लाभ किस स्तर पर बना रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 130 से अधिक कंपनियों के पास भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी है। ऐसे में आने वाले महीनों में नए निर्गमों की गतिविधियों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की Jio Platforms करीब 3.8 अरब डॉलर का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है। प्रस्तावित IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है और इसके बाद कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। यदि IPO इसी आकार के साथ आता है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Hyundai Motor India के पास है, जिसने 2024 में करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO पेश किया था। Jio Platforms के प्रस्तावित IPO से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम कारोबार से जुड़े कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किए जाने की योजना है।

    प्रस्तावित IPO के जरिए कंपनी करीब 3.8 अरब डॉलर की रकम जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। IPO के बाद 28 अक्टूबर को Jio Platforms के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग होने की उम्मीद जताई जा रही है। IPO का अंतिम आकार और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रस्तावित तारीख और रकम के आधार पर यह भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा सार्वजनिक निर्गम माना जा रहा है।

    यदि Jio Platforms का IPO करीब 3.8 अरब डॉलर के आकार में आता है तो यह देश के अब तक के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। वर्तमान में Hyundai Motor India का करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO इस मामले में सबसे आगे है। इसके बाद NSE का करीब 2.3 अरब डॉलर का IPO रहा है। NSE ने पिछले महीने शेयर बाजार में अपनी शुरुआत की थी। प्रस्तावित आकार के साथ Jio Platforms का IPO इन दोनों बड़े IPO से आगे निकल सकता है और भारतीय IPO बाजार में नया रिकॉर्ड बना सकता है।

    IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम डिविजन का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। Jio Platforms का कारोबार केवल टेलीकॉम तक सीमित नहीं है। कंपनी AI क्लाउड और एंटरप्राइज नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी काम करती है। इन क्षेत्रों में विस्तार के साथ कंपनी का कारोबार टेलीकॉम से आगे बढ़ा है। IPO के जरिए जुटाई जाने वाली रकम से कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। कंपनी में Meta और Google जैसे बड़े विदेशी निवेशकों की भी हिस्सेदारी है, जो इसके प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल हैं।

    भारतीय IPO बाजार में आने वाले समय में कई बड़े निर्गम देखने को मिल सकते हैं। इनमें डेनमार्क की बीयर कंपनी Carlsberg का भारत कारोबार और होटल एग्रीगेटर Oyo की पैरेंट कंपनी Prism भी शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब 250 कंपनियां कुल 4.65 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। ऐसे में Jio Platforms का प्रस्तावित IPO भारतीय IPO बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, 21 अक्टूबर को IPO खुलने, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग और करीब 3.8 अरब डॉलर जुटाने से जुड़ी अंतिम जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयरों में लिस्टिंग के अगले ही दिन शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के बाद शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव दिखाई दिया। कारोबार के दौरान एनएसई का शेयर करीब 1.6 प्रतिशत फिसलकर 1,790 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में यह करीब 1,796 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 1.20 प्रतिशत नीचे था।

    एनएसई के शेयर गुरुवार को अपने इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग वाले दिन शुरुआती कारोबार अपेक्षाकृत सीमित रहा, लेकिन बाद में शेयर में तेजी आई और दिन के दौरान इसमें 5 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था। इसके बाद अगले कारोबारी दिन कुछ निवेशकों ने शुरुआती तेजी का लाभ उठाते हुए मुनाफावसूली की।

    एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। एनएसई के आईपीओ को भी निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी।

    17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले इस आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 22,568.94 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले करीब 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस मजबूत मांग के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग को लेकर बाजार में काफी दिलचस्पी बनी हुई थी।

    लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस मूल्यांकन के साथ कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो गई। बाजार मूल्य के लिहाज से एनएसई ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर एनएसई से ऊपर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां हैं। इस तरह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के तुरंत बाद एनएसई का मूल्यांकन देश की बड़ी कंपनियों की सूची में महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।

    लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट को अल्पकालिक मुनाफावसूली के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती कारोबार में तेजी के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा बुक किए जाने से शेयर पर दबाव बढ़ा। हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और एनएसई की बाजार में मजबूत स्थिति के कारण कंपनी को लेकर निवेशकों की दीर्घकालिक दिलचस्पी बनी रहने की बात कही गई है।

    एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों को ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

    कंपनी की आय में ट्रांजैक्शन शुल्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया था। यह आंकड़ा कंपनी के मौजूदा कारोबार मॉडल में लेनदेन आधारित आय के महत्व को दर्शाता है। लिस्टिंग के बाद शेयर में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बीच अब बाजार की नजर कंपनी के कारोबार और भविष्य के प्रदर्शन पर बनी हुई है।

  • NSE IPO में 20 निवेश बैंकरों की बड़ी कमाई, फीस और कमीशन से मिले 186 करोड़ रुपये

    NSE IPO में 20 निवेश बैंकरों की बड़ी कमाई, फीस और कमीशन से मिले 186 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को पूरा कराने में शामिल 20 निवेश बैंकरों ने फीस और कमीशन के रूप में कुल 186.20 करोड़ रुपये कमाए हैं। एक्सचेंज से जुड़ी हालिया फाइलिंग में आईपीओ की प्रक्रिया पर हुए खर्च और अलग-अलग मदों में भुगतान की जानकारी सामने आई है।

    NSE का 22,561.5 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी OFS 17 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक निवेशकों के लिए खुला था। इस आईपीओ की लिस्टिंग 24 सितंबर 2026 को निर्धारित है। पूरे ऑफर को पूरा करने में कुल अनुमानित खर्च 392.12 करोड़ रुपये रहा, जो इश्यू के कुल आकार का करीब 1.74 प्रतिशत है।

    आईपीओ प्रक्रिया से जुड़े कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा निवेश बैंकरों की फीस का रहा। 20 मर्चेंट बैंकर्स को कुल 186.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह रकम आईपीओ से जुड़े कुल खर्च का 47.49 प्रतिशत है। वहीं, पूरे 22,561.5 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले यह खर्च करीब 0.82 प्रतिशत बैठता है।

    आईपीओ की पूरी प्रक्रिया में कई तरह के खर्च शामिल होते हैं। इनमें सेबी के पास जमा किए जाने वाले ड्राफ्ट पेपर तैयार करने से लेकर निवेशकों तक आईपीओ की जानकारी पहुंचाने, आवेदन प्रक्रिया को संभालने और विभिन्न पेशेवर सेवाओं के भुगतान तक की लागत शामिल होती है।

    कुल 392.12 करोड़ रुपये के खर्च में बैंकरों की फीस निकालने के बाद 205.92 करोड़ रुपये अन्य मदों में खर्च हुए। यह कुल खर्च का लगभग 52.51 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें नियामकीय शुल्क, स्टॉक एक्सचेंजों से जुड़े खर्च, विज्ञापन और मार्केटिंग, कानूनी सलाहकारों की फीस, रजिस्ट्रार का खर्च और स्टांप ड्यूटी जैसी लागत शामिल है।

    NSE के आईपीओ के लिए नियुक्त 20 मर्चेंट बैंकर्स में कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स और एचएसबीसी सिक्योरिटीज शामिल हैं। इनके अलावा जेपी मॉर्गन इंडिया, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस कैपिटल भी इस सिंडिकेट का हिस्सा रहे।

    इस सूची में मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, एवेन्डस कैपिटल और आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स भी शामिल हैं। 360 वन वैम, आनंद राठी एडवाइजर्स, डैम कैपिटल एडवाइजर्स, पंतोमथ कैपिटल और एक्विरेस कैपिटल भी आईपीओ प्रक्रिया में नियुक्त मर्चेंट बैंकर्स में शामिल रहे।

    मेनबोर्ड सेगमेंट के किसी आईपीओ के लिए 20 मर्चेंट बैंकर्स का इतना बड़ा सिंडिकेट भारतीय कॉर्पोरेट बाजार में एक उल्लेखनीय व्यवस्था रही। इतने बड़े नेटवर्क के जरिए अलग-अलग श्रेणी के संस्थागत निवेशकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की गई।

    इसमें सॉवरेन वेल्थ फंड्स, वैश्विक पेंशन फंड्स और बड़े म्यूचुअल फंड्स जैसे संस्थागत निवेशक शामिल रहे। आईपीओ की पूरी प्रक्रिया में बैंकरों की भूमिका निवेशकों तक पहुंच, इश्यू प्रबंधन और अन्य संबंधित गतिविधियों को संभालने से जुड़ी रही।

    NSE के इस आईपीओ में कुल 392.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत में से करीब आधा हिस्सा अकेले 20 निवेश बैंकरों की फीस और कमीशन पर खर्च हुआ। बाकी राशि नियामकीय शुल्क, मार्केटिंग, कानूनी सेवाओं और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं से जुड़े खर्चों में गई।

  • एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ में निवेश के लिए सोमवार को आखिरी मौका है। सब्सक्रिप्शन के अंतिम दिन इश्यू के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौजूदा स्थिति में जीएमपी 60 रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 59 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 3.31 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है।

    एनएसई के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कमजोरी देखने को मिली है। 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद जीएमपी करीब 218 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को जब आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, तब ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर या करीब 7.96 प्रतिशत था।

    अब अंतिम दिन तक जीएमपी घटकर 59 रुपये रह गया है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधिकारिक बाजार संकेतक नहीं माना जाता है। यह आईपीओ के इश्यू प्राइस से ऊपर अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। इसलिए जीएमपी का मौजूदा स्तर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।

    एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। इस आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी। ऐसे में आईपीओ के जरिए कंपनी के कारोबार में सीधे नई पूंजी का प्रवेश नहीं होगा।

    निवेशकों के बीच एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा है। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से कंपनी की आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। समीक्षा अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट है।

    आईपीओ के अंतिम दिन जीएमपी में आई कमी और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में दर्ज गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। इश्यू की अंतिम स्थिति और आगे शेयर की बाजार में लिस्टिंग का प्रदर्शन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर

    एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर


    नई दिल्ली ।लंबे समय से प्रतीक्षित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ गुरुवार से आम निवेशकों के लिए खुल गया। हालांकि, आईपीओ के बाजार में आने के साथ ही इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान एनएसई के जीएमपी में करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब केवल संभावित लिस्टिंग पर ही नहीं, बल्कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी बनी हुई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 11 सितंबर को एनएसई के आईपीओ का जीएमपी 218 रुपये प्रति शेयर था। इसके बाद 12 सितंबर को यह 208 रुपये, 13 सितंबर को 210 रुपये और 14 सितंबर को 208 रुपये रहा। 15 सितंबर को जीएमपी घटकर 160 रुपये और 16 सितंबर को 145 रुपये पर आ गया। 17 सितंबर को यह 125 रुपये बताया गया, जबकि दोपहर तीन बजे के आसपास यह 148 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। एक सप्ताह के दौरान इस स्तर पर कुल मिलाकर करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी आईपीओ के शेयरों के लिए अनौपचारिक बाजार में इश्यू प्राइस के ऊपर चल रहे प्रीमियम को दर्शाता है। हालांकि, जीएमपी आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं होता और इसके आधार पर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं दी जा सकती। आईपीओ की लिस्टिंग के समय बाजार की परिस्थितियां, निवेशकों की मांग और अन्य कारक वास्तविक कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।

    एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक आम निवेशकों के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी मूल्य सीमा के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के रूप में है। इसका मतलब है कि आईपीओ के तहत पेश किए जा रहे शेयर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी से संबंधित हैं। इसलिए इश्यू से मिलने वाली राशि कंपनी के कारोबार में नई पूंजी के रूप में सीधे नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    एनएसई के आईपीओ को लेकर निवेशकों के लिए कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ऑपरेशन से आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार समीक्षा अवधि में यह आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यानी इसमें सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    आईपीओ खुलने के साथ अब निवेशकों के सामने कंपनी के मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन, इश्यू प्राइस और बाजार में संभावित मांग जैसे कई पहलू हैं। वहीं जीएमपी में आई हालिया गिरावट ने संभावित लिस्टिंग प्रीमियम को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव का संकेत दिया है। हालांकि अंतिम लिस्टिंग कीमत का निर्धारण आधिकारिक बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद ही होगा।

  • टाटा संस का IPO होगा लॉन्च…. RBI ने खारिज किया एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन

    टाटा संस का IPO होगा लॉन्च…. RBI ने खारिज किया एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन


    नई दिल्ली।
    अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही टाटा ग्रुप (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons ) का आईपीओ (IPO) लॉन्च होगा। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने टाटा संस को प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इससे टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी हो गया है। कानूनी विशेषज्ञ एचपी रानीना और कॉरपोरेट गवर्नेंस विश्लेषक श्रीराम सुब्रमणियन ने कहा कि रिजर्व बैंक के फैसले के बाद टाटा संस के सामने लागू लिस्टिंग नियमों का पालन करने का विकल्प बचता है।


    रिटेल निवेशकों को क्या फायदा?

    टाटा संस के आईपीओ आने से इसमें रिटेल निवेशक हिस्सेदारी खरीद सकेंगे। अभी आम निवेशक टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा मोटर्स, TCS, टाटा स्टील, टाटा केमिकल्स जैसी अलग-अलग लिस्टेड टाटा कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं लेकिन टाटा संस में सीधे निवेश नहीं कर सकते क्योंकि यह अनलिस्टेड है। अब अगर लिस्टिंग होती है तो शेयरों की खरीद-बिक्री की जा सकेगी।


    टाटा संस की कैसे बढ़ीं मुश्किलें

    दरअसल, आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।


    जून 2026 में आरबीआई ने बदले नियम

    जून 2026 से आरबीआई ने कुछ नियमों में बदलाव किए। इसके तहत 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट्स वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की परिसंपत्तियां दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

    शेयरधारकों में मतभेद
    हालांकि, टाटा संस के आईपीओ की राह में कई दिक्कतें भी हैं। सूत्रों की मानें तो सूचीबद्धता को लेकर टाटा संस के शेयरधारकों के बीच भी मतभेद हैं। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वह सूचीबद्धता का विरोध करता रहा है। दूसरी ओर, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में रहा है और इससे अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने की बात करता रहा है।


    चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति नहीं होने का भी कारण

    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब टाटा संस में नेतृत्व और निदेशक मंडल को लेकर मतभेद की खबरें हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अगले साल फरवरी में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। ऐसी खबरें हैं कि टाटा संस की सूचीबद्धता का मुद्दा उन कारणों में भी शामिल था जिनकी वजह से नोएल टाटा ने चेयरमैन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया था। रतन टाटा के सौतेले भाई और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा टाटा संस के निदेशक मंडल के सदस्य भी हैं।

    चर्चा है कि वह चंद्रशेखरन से यह आश्वासन चाहते थे कि टाटा संस को सूचीबद्ध होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। वहीं, चंद्रशेखरन ने कथित तौर पर कहा था कि किसी नियामकीय या कानूनी मामले के नतीजे को पहले से तय नहीं माना जा सकता। नोएल टाटा ने समूह के कुछ अन्य कारोबार में हो रहे घाटे का मुद्दा भी उठाया था। इनमें टाटा डिजिटल और एयर इंडिया शामिल हैं, जिन्हें चंद्रशेखरन के करीब एक दशक के कार्यकाल में शुरू या अधिग्रहीत किया गया था।

  • एनएसई आईपीओ से पहले इक्विटी ऑप्शंस में मार्केट शेयर घटा, सख्त डेरिवेटिव्स नियमों से कारोबार और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

    एनएसई आईपीओ से पहले इक्विटी ऑप्शंस में मार्केट शेयर घटा, सख्त डेरिवेटिव्स नियमों से कारोबार और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ ऐसे समय में आने जा रहा है, जब एक्सचेंज के सामने इक्विटी ऑप्शंस कारोबार में घटती बाजार हिस्सेदारी, डेरिवेटिव्स से जुड़े सख्त नियम और सीमित विकास के अवसर जैसी चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों का असर एक्सचेंज के कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है।

    एनएसई की ओर से रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में दी गई जानकारी के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस के प्रीमियम वैल्यू सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 96.9 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71 प्रतिशत रह गई।

    इस तरह तीन वित्त वर्षों में इक्विटी ऑप्शंस के प्रीमियम वैल्यू सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 22.2 प्रतिशत कम हुई है। हालांकि, अन्य सेगमेंट में एक्सचेंज की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

    कैश इक्विटी सेगमेंट इसका प्रमुख उदाहरण है। वित्त वर्ष 2023-24 में इस सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 92.7 प्रतिशत थी। अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर 93.6 प्रतिशत हुई और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत रही।

    कैश सेगमेंट में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एनएसई की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। हालांकि, इतनी ऊंची हिस्सेदारी होने के कारण इस क्षेत्र में आगे बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। इसलिए ऑप्शंस और डेरिवेटिव्स कारोबार में होने वाले बदलाव एनएसई के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

    डेरिवेटिव्स कारोबार पर सख्त होते नियम भी एक्सचेंज के लिए चुनौती बढ़ा रहे हैं। निवेशकों को इस सेगमेंट में हुए बड़े नुकसान के बाद पिछले कुछ वर्षों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी बढ़ाना और मार्जिन से जुड़े कदम शामिल हैं।

    इसके साथ ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी की ओर से भी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को लेकर निवेशकों में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। इन उपायों का उद्देश्य डेरिवेटिव्स कारोबार में निवेशकों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

    खुदरा निवेशकों की संख्या में आई गिरावट भी इसी चुनौती को सामने रखती है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, एफएंडओ सेगमेंट में विशिष्ट खुदरा निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या 98.1 लाख थी।

    खुदरा निवेशकों की संख्या घटने से एफएंडओ बाजार की गतिविधियों और वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि एनएसई ने अपने आरएचपी में खुद इस जोखिम का उल्लेख किया है।

    एनएसई के अनुसार, डेरिवेटिव्स, खासकर एफएंडओ बाजार में वॉल्यूम में कमी आने से उसके कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वॉल्यूम घटने का असर आगे उसके मुनाफे पर भी पड़ सकता है।

    इस तरह एनएसई के सामने चुनौती का मुख्य कारण इक्विटी ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी और डेरिवेटिव्स कारोबार को नियंत्रित करने वाले सख्त होते नियम हैं। इसका संभावित असर एफएंडओ गतिविधियों और वॉल्यूम में कमी के रूप में सामने आ सकता है, जिससे कारोबार और मुनाफे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

    आईपीओ से पहले एनएसई की कैश इक्विटी में मजबूत पकड़ बनी हुई है, लेकिन इक्विटी ऑप्शंस में बाजार हिस्सेदारी की गिरावट और डेरिवेटिव्स कारोबार से जुड़े नियामकीय बदलाव एक्सचेंज के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी चुनौतियां बने हुए हैं।

  • Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    नई दिल्ली ।रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी Jio Platforms के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब इसकी संभावित लॉन्च तारीख पर है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 37,800 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम ला सकती है। यदि यह इश्यू तय योजना के मुताबिक बाजार में आता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

    कंपनी के आईपीओ के अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में आने की संभावना जताई जा रही है। संभावित समय को लेकर नवरात्रि और दिवाली के आसपास का दौर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवरात्रि 11 से 20 अक्टूबर तक है, जबकि दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। हालांकि अंतिम तारीख की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

    कंपनी की ओर से आईपीओ की तारीख तय होने के बाद निवेशकों तक पहुंच बनाने के लिए रोड शो और प्रचार अभियान शुरू किए जाने की योजना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार विदेशों में करीब तीन सप्ताह और भारत में लगभग दो सप्ताह तक रोड शो आयोजित किए जा सकते हैं। तारीख जल्दी तय होने पर विदेश और घरेलू निवेशकों के साथ बातचीत का अभियान भी जल्द शुरू हो सकता है।

    Jio Platforms ने आईपीओ की दिशा में महत्वपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया पूरी कर ली है। कंपनी ने जून में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था। इसके बाद 28 अगस्त को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ को मंजूरी मिल गई। इससे कंपनी के लिए सार्वजनिक निर्गम की राह आगे बढ़ी है।

    प्रस्तावित आईपीओ का आकार करीब 37,800 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह रकम जुटने पर Jio का इश्यू अब तक के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। फिलहाल पूरा हो चुका सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया का करीब 27,000 करोड़ रुपये का है। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार यानी NSE का लगभग 31,000 करोड़ रुपये का आईपीओ अभी बाजार में आना बाकी है।

    Jio Platforms के प्रस्तावित इश्यू में करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 2.9 प्रतिशत हिस्सा होगा। खास बात यह है कि इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारकों की ओर से Offer for Sale यानी OFS के जरिए शेयर बेचने का प्रस्ताव नहीं है।

    यह रिलायंस समूह से करीब दो दशक बाद आने वाला बड़ा आईपीओ भी होगा। इससे पहले 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम का आईपीओ आया था। ऐसे में Jio का सार्वजनिक निर्गम समूह और भारतीय पूंजी बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये Jio की ऑपरेटिंग कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम यानी RJIL के कर्ज को समय से पहले चुकाने के लिए लगाए जा सकते हैं। शेष राशि का इस्तेमाल कंपनी की अन्य जरूरतों के लिए किया जाएगा।

    Jio Platforms अपनी सहायक कंपनी RJIL को जरूरत के अनुसार शेयर, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर या कर्ज के माध्यम से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इससे आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग समूह के टेलीकॉम कारोबार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी किया जा सकता है।

    Jio Platforms में कई बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख निवेशकों के पास कंपनी की करीब 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनमें मेटा से जुड़ी जाधू होल्डिंग्स की लगभग 9.98 प्रतिशत और गूगल इंटरनेशनल की करीब 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    इसके अलावा सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक, केकेआर और अबू धाबी की निवेश एजेंसी ADIA भी Jio Platforms में निवेश कर चुके हैं। प्रस्तावित आईपीओ के आकार और वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी के कारण बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर खास दिलचस्पी बनी हुई है।