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  • ईरान के लिए ‘परमाणु हथियार’ जैसा है होर्मुज, पूर्व अमेरिकी जनरल ने बताया-इसे खोलना क्यों आसान नहीं

    ईरान के लिए ‘परमाणु हथियार’ जैसा है होर्मुज, पूर्व अमेरिकी जनरल ने बताया-इसे खोलना क्यों आसान नहीं

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब बातचीत के दौर में पहुंच चुका है, लेकिन Strait of Hormuz को लेकर हालात अब भी बेहद जटिल बने हुए हैं। Iran ने इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण सख्त कर रखा है, जबकि United States ने ईरानी जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी कर दी है।

    इस बीच पूर्व अमेरिकी जनरल और नाटो के सुप्रीम अलाइड कमांडर रह चुके Wesley Clark ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जबरन होर्मुज को खोलने की कोशिश करता है, तो यह उसके लिए बेहद महंगा और लंबा सैन्य अभियान साबित हो सकता है।

    CNN से बातचीत में क्लार्क ने कहा कि मौजूदा हालात 1980 के दशक के “टैंकर युद्ध” से बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने साफ किया कि आज का ईरान पहले से कहीं ज्यादा तैयार और रणनीतिक रूप से मजबूत है। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई की कीमत बहुत भारी हो सकती है।

    ‘ईरान का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है होर्मुज’

    क्लार्क ने होर्मुज की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तेहरान के लिए किसी परमाणु बम से कम नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग का इस्तेमाल केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव के तौर पर भी कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के सामने कई तरह के खतरे मौजूद हैं-समुद्री बारूदी सुरंगें, तेज रफ्तार हमलावर नौकाएं, मिसाइलें और आधुनिक ड्रोन। ये सभी मिलकर किसी भी ऑपरेशन को बेहद जोखिमभरा बना देते हैं।

    ‘किले में तब्दील हो चुका है यह रास्ता’

    क्लार्क के अनुसार, ईरान ने दशकों में होर्मुज को एक किलेबंद क्षेत्र में बदल दिया है। संकरे समुद्री मार्ग और आसपास की पहाड़ियों का फायदा उठाते हुए ईरानी सेना यहां हर गतिविधि पर नजर रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को उन्नत तकनीकी सहयोग, खासकर China से, उसकी सैन्य क्षमता को और मजबूत बनाता है।

    खोलना ही नहीं, सुरक्षित रखना भी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका किसी तरह इस समुद्री मार्ग को खोल भी ले, तब भी इसे सुरक्षित बनाए रखना आसान नहीं होगा। हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि ईरान ने सीमित हमलों के जरिए ही व्यापारिक जहाजों पर दबाव बना दिया, जिसके बाद कई जहाजों ने खुद ही उसके साथ तालमेल बैठा लिया।

    असल चुनौती यही है कि जब तक ईरान की सहमति न हो, तब तक Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से चालू रखना लगभग असंभव माना जा रहा है।

  • होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी

    होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान (Iran) को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान (Lebanon.) में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान (Iran) ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए।

    होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।”

    इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, “जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।”

    शनिवार सुबह होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को अपने देश और दुनिया के सामने रखते हुए ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि होर्मुज पर वापस नियंत्रण हासिल कर लिया गया है। ईरान की तरफ से होर्मुज पर नियंत्रण हासिल करने के प्रयास में ही दो भारतीय तेल टैंकरों के ऊपर गोलीबारी की खबर सामने आई है। इस घटना को लेकर सरकार ने ईरानी राजदूत को भी समन किया है।

    बता दें, 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने पूरे विश्व को ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। हमले के कुछ दिन बाद ही ईरान ने होर्मुज के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पांच हफ्तों की लड़ाई के बाद अमेरिका और ईरान ने सीजफायर की घोषणा कर दी, लेकिन इजरायल ने लेबनान पर हमला करना जारी रखा। इसकी वजह से ईरान ने होर्मुज को खोलने से इनकार कर दिया। अमेरिकी और ईरान के बीच हुई वार्ता के बाद इजरायल ने भी लेबनान के साथ सीजफायर का ऐलान कर दिया। इसके बाद ईरान ने शुक्रवार को सीजफायर की अवधि तक होर्मुज के रास्ते व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिए। लेकिन फिर ट्रंप के बायन के बाद व्यवस्था बिगड़ गई।

  • चीन के 4 कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे…. हथियार भेजने का दावा

    चीन के 4 कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे…. हथियार भेजने का दावा


    तेहरान।
    मध्य एशिया (Central Asia) में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल (Commentator Mario Nofal.) ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान (Four Cargo Planes) ईरान (Iran) में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे।

    अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है।

    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो।

    जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

    वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच ईरान ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध….

    पश्चिम एशिया संकट के बीच ईरान ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध….


    तेहरान।
    इजरायल (Israel) द्वारा ईरान (Iran) के प्रमुख औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर किए गए सटीक हमलों की श्रृंखला के बाद ईरानी सरकार ने घरेलू आपूर्ति (Household Supplies) की सुरक्षा के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात (Petrochemical Products export) पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete ban) लगा दिया है। राष्ट्रीय पेट्रोकेमिकल कंपनी के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को जारी निर्देश में सभी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को अगले आदेश तक निर्यात निलंबित करने का आदेश दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इस्लामी गणराज्य हालिया संघर्षों से उत्पन्न उत्पादन व्यवधानों से अपने घरेलू विनिर्माण आधार को बचाने की कोशिश कर रहा है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य हालिया हमलों से हुए नुकसान के बाद घरेलू बाजारों को स्थिर करना और विभिन्न उद्योगों को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। तेहरान उम्मीद कर रहा है कि इन सामग्रियों के अंतरराष्ट्रीय निर्यात को रोककर वह घरेलू स्तर पर औद्योगिक संकट को रोकेगा। दरअसल, हाल के हफ्तों में इजरायल ने ईरान के असलुयेह (साउथ पार्स) और महशहर स्थित प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाया। इन हमलों में विशेष रूप से पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को बिजली, पानी और ऑक्सीजन जैसी उपयोगिताएं प्रदान करने वाली कंपनियों पर हमला किया गया, जिससे उत्पादन बुरी तरह बाधित हो गया।

    इस आंतरिक उत्पादन संकट को और गंभीर बनाने वाला कारक समुद्री क्षेत्र में बढ़ता नाकाबंदी का दबाव भी है। अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए अभियान शुरू किया है, जिसका मकसद ईरान के निर्यात राजस्व को कम करना और तेहरान पर दबाव बढ़ाना है। दोनों पक्ष मौजूदा युद्धविराम के दौरान शांति वार्ता के अगले दौर पर विचार कर रहे हैं। क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद ईरानी सरकार आंतरिक स्थिरता की छवि पेश करने का प्रयास कर रही है। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोकेमिकल और संबंधित उत्पादों की घरेलू कीमतें संघर्ष से पहले के स्तर पर बरकरार हैं। यह नीति स्थानीय उपभोक्ताओं और कारखानों को मुद्रास्फीति के झटके से बचाने के लिए अपनाई गई है।

    हालांकि, इस रोक का ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान प्रतिवर्ष लगभग 29 मिलियन टन पेट्रोकेमिकल उत्पादों का निर्यात करता है, जिससे करीब 13 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है। विदेशी मुद्रा के इस बड़े नुकसान के बावजूद सरकार ने घरेलू जरूरतों और अस्तित्व को प्राथमिकता देते हुए निर्यात निलंबित करने का फैसला लिया है।

  • बातचीत चाहते हैं, दबाव नहीं सहेंगे: ईरानी राष्ट्रपति की अमेरिका इजरायल को कड़ी चेतावनी

    बातचीत चाहते हैं, दबाव नहीं सहेंगे: ईरानी राष्ट्रपति की अमेरिका इजरायल को कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ किया है कि ईरान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने अमेरिका और इजरायल को सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी भी तरह का दबाव या शर्तें थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा ईरान

    ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश कभी भी टकराव या अस्थिरता का समर्थक नहीं रहा है। लेकिन यदि किसी ने ईरान को झुकाने या उस पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की तो वह पूरी तरह विफल होगी। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपनी संप्रभुता से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेगा।

    नागरिकों पर हमलों पर उठाए सवाल

    ईरानी न्यूज एजेंसी के हवाले से राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत नागरिकों बच्चों और बौद्धिक वर्ग को निशाना बनाना साथ ही स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों को नुकसान पहुंचाना किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    संवाद ही रास्ता लेकिन दबाव नहीं

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान का रुख हमेशा से संवाद और सहयोग का रहा है। उन्होंने कहा कि देश न तो युद्ध चाहता है और न ही अस्थिरता लेकिन अगर उसकी संप्रभुता पर दबाव बनाया गया तो ईरानी जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को झुकाने या सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की हर कोशिश नाकाम रहेगी।

    गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इस दौरान तेहरान सहित कई बड़े शहरों पर हमले हुए। इसके जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इजरायल के ठिकानों और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।

    इस्लामाबाद वार्ता रहीं बेनतीजा

    तनाव कम करने के लिए 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत हुई। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने नेतृत्व किया जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। दोनों पक्षों ने माना कि कई अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं जिससे दीर्घकालिक समाधान फिलहाल संभव नहीं हो पाया है।

  • ईरान अपने रुख पर कायम… संसद अध्यक्ष बोले- 'ट्रंप की धमकियों से नहीं पड़ता कोई असर

    ईरान अपने रुख पर कायम… संसद अध्यक्ष बोले- 'ट्रंप की धमकियों से नहीं पड़ता कोई असर


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के संसद अध्यक्ष (Parliament Speaker) मोहम्मद बाकेर गालिबाफ (Mohammad Baqer Ghalibaf) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, ये धमकियां बेअसर हैं और ईरान अपने रुख पर मजबूत रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हो रही है।

    ईरानी सरकारी मीडिया और अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने बातचीत के दौरान ‘बहुत अच्छे प्रस्ताव’ दिए हैं, जिससे बातचीत आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा, ट्रंप की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं है।

    हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे: गालिबाफ
    उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा, अगर आप लड़ेंगे तो हम भी लड़ेंगे और अगर आप समझदारी से आएंगे तो हम भी समझदारी से बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा, हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। उन्हें हमारी इच्छाशक्ति को फिर से परखने दीजिए, ताकि हम उन्हें बड़ा सबक सिखा सकें।

    बातचीत की मैच पर वापस आएगा ईरान: ट्रंप
    इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान आखिरकार अमेरिका की शर्तें मान लेगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान वापस बातचीत की मेज पर आएगा। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि वे हमें सब कुछ दें। ईरान के पास कोई ताकत नहीं बची है। उनके पास कोई बढ़त नहीं हैं।

    उन्होंने अपनी हालिया सख्त बयानबाजी का बचाव भी किया और कहा कि यही बातचीत शुरू होने की वजह बनी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगते हैं, इसलिए कड़ा जवाब जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक टिप्पणी ने ही ईरान को बातचीत की मेज पर ला दिया और वह अभी भी वहीं मौजूद हैं।

  • ईरान की छह अरब डॉलर की संपत्ति फ्रीज…. होर्मुज खोलने के लिए US के समक्ष रखी ये शर्त

    ईरान की छह अरब डॉलर की संपत्ति फ्रीज…. होर्मुज खोलने के लिए US के समक्ष रखी ये शर्त


    वॉशिंगटन।
    पाकिस्तान (Pakistan) में अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच वार्ता में तेहरान की फ्रीज छह अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करना अहम मुद्दा है। यह संपत्ति अभी कतर में जमा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक ईरानी सूत्र ने बताया कि कतर समेत विदेश में फ्रीज संपत्तियों को जारी करना होर्मुज (Strait of Hormuz ) से सुरक्षित आवाजाही तय करने से सीधे तौर पर जुड़ा है। छह अरब डॉलर की यह राशि सबसे पहले 2018 में रोकी गई थी। वाशिंगटन तथा तेहरान के बीच कैदियों की अदला-बदली के समझौते के तहत इसे 2023 में जारी किया जाना था, पर सात अक्तूबर, 2023 को इस्राइल पर हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद उसके ईरान से संबंधों को देखते हुए बाइडन प्रशासन ने संपत्तियों को फिर से फ्रीज कर दिया।

    तब अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि तेहरान को इस पैसे तक अनिश्चितकाल के लिए पहुंच नहीं दी जाएगी और वाशिंगटन के पास इन निधियों को पूरी तरह से रोक देने का अधिकार सुरक्षित है। यह पैसा दक्षिण कोरिया को किए गए ईरानी कच्चे तेल के निर्यात से आया था। 2018 में जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था और प्रतिबंध लागू कर दिए थे, तो यह पैसा दक्षिण कोरियाई बैंकिंग चैनलों में फंस गया था।


    अमेरिका-ईरान वार्ता के मुख्य चर्चा के बिंदु

    ईरान चाहता है कि अमेरिका उसकी संपत्तियों पर लगी रोक हटा ले और उन प्रतिबंधों को खत्म कर दे, जिन्होंने वर्षों से उसकी अर्थव्यवस्था को पंगु बना रखा है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह प्रतिबंधों में बड़ी राहत देने को तैयार है, लेकिन वह केवल परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में रियायतें के बदले में ही करेगा।

    ईरान होर्मुज मार्ग पर अपने अधिकार की मान्यता चाहता है। ईरान का मकसद होर्मुज में शुल्क वसूलना और पहुंच को नियंत्रित करना है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग तेल टैंकरों और अन्य यातायात के लिए बिना किसी रोक-टोक के खुला रहे, जिसमें टोल शुल्क भी शामिल है। ईरान युद्ध के दौरान हुए सभी नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है।

    ईरान यूरेनियम संवर्धन की अनुमति चाहता है, जिसे वाशिंगटन ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस्राइल-अमेरिका, दोनों ही चाहते हैं कि ईरान की मिसाइल क्षमताओं में भारी कटौती की जाए। तेहरान ने कहा है कि उसका मिसाइल जखीरा वार्ता का विषय नहीं है। ईरान इस क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी, सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति चाहता है। ट्रंप ने कहा है कि जब तक कोई शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक वह पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेंगे।


    विरोधाभासी दावे भी

    बातचीत शुरू होने के साथ ही दोनों पक्षों की ओर से विरोधाभासी बयान भी सामने आए। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका कतर और अन्य विदेशी बैंकों में ईरान की जब्त 6 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने पर सहमत हो गया। बदले में ईरान होर्मुज मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। लेकिन व्हाइट हाउस ने मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया। कतर की ओर से भी इस संबंध में कोई बयान नहीं आया।

    अमेरिकी टीम के सामने मजबूती से डटे हैं : ईरान
    शांति वार्ता के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि इस्लामाबाद में वार्ता में ईरान के नेता मजबूती से डटे हैं व पुरजोर तरीके से अपने हितों की रक्षा करते हुए बहादुरी से बातचीत कर रहे हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ वार्ता में ईरान जिन प्रमुख बिंदुओं पर बातचीत चाहता है, उसमें लेबनान में संघर्षविराम प्रमुख है। लड़ाई शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित हिजबुल्ला लड़ाकों पर इस्राइली हमलों में करीब 2,000 लोग मारे जा चुके हैं। इस्राइल-अमेरिका का कहना है कि लेबनान अभियान संघर्षविराम का हिस्सा नहीं है।


    मोजतबा के चेहरे पैर पर गंभीर चोट का दावा

    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामनेई के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा दावा किया गया है। सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मुजतबा खामनेई 28 फरवरी हुए उस हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनके पिता (अली खामनेई) की मृत्यु हुई थी। हमले में उनके चेहरे पर गहरी चोटें आई हैं, जिससे चेहरा विकृत हो गया है। उनके पैरों में भी गंभीर घाव हैं। कुछ खुफिया आकलनों के अनुसार उन्होंने अपना एक पैर भी खो दिया है। 8 मार्च को सर्वोच्च नेता बनने के बाद से 56 वर्षीय मोजतबा जनता के सामने नहीं आए हैं। उनकी कोई फोटो या वीडियाे भी जारी नहीं किया गया है। पिछले दिनों मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उनका कुम शहर में इलाज चल रहा है।

    रूस की नसीहत, इस्लामाबाद बातचीत खतरे में न पड़ने दें
    रूस ने इस्लामाबाद बातचीत में हिस्सा लेने वालों से कहा है कि वे ऐसे किसी भी कदम से परहेज करें, जिससे यह मौका खतरे में पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर एक बयान में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, हम पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों से जिम्मेदारी से काम करने और ऐसे किसी भी कदम से बचने की अपील करते हैं जिससे यह मौका खतरे में पड़ सकता है। वहीं, दूसरी तरफ चीन ने भी पाकिस्तान में हो रही इस अहम वार्ता पर बारीकी से नजरें बना रखी है। मालूम हो कि संघर्ष के दौरान चीन और रूस ईरान के बड़े मददगार रहे हैं।

  • पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, ईरान ने इस्लामाबाद भेजे कई नकली विमान?

    पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, ईरान ने इस्लामाबाद भेजे कई नकली विमान?


    इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान आतंकवाद का प्रयाय बन चुका है। यही कारण है कि ईरान जैसे मुस्लिम देश को भी भरोसा नहीं है। पाकिस्तान भले ही अमेरिका के साथ ईरान की शांति वार्ता का केंद्र होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को पाकिस्तान में हवाई हमले का डर सता रहा था। इसलिए ईरान ने अपने वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद के लिए कई नकली विमान भेजे, जिनमें से केवल एक में ही प्रतिनिधिमंडल सवार था।
    आपको बता दें कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ कर रहे हैं जो हाल ही में ईरानी सरकार में एक प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं।

    इस्लामाबाद जाते समय गालिबफ ने अपने विमान की अगली कतारों को खाली रखा। इन खाली सीटों पर मीनाब स्कूल स्ट्राइक (Minab school strike) में मारे गए बच्चों और पीड़ितों की तस्वीरें और उनका सामान (स्कूल बैग, जूते, कपड़े) रखे गए थे।

    यह हमला हाल ही में ईरान के मीनाब क्षेत्र में हुआ था, जिसे तेहरान अमेरिकी-इजरायली हमला बताता है। इसमें कई स्कूली बच्चों की जान गई थी। इस विजुअल स्टेटमेंट के जरिए ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह बातचीत की मेज पर केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने उन निर्दोष नागरिकों के दर्द के साथ जा रहा है जिन्होंने इस युद्ध की कीमत चुकाई है।

    वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है, जिसमें ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। अमेरिकी वार्ताकारों के साथ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, विदेश विभाग और पेंटागन के विशेषज्ञ भी हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ अप्रैल की रात को घोषणा की थी कि ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर समझौता हो गया है। बाद में खबर आई कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए वार्ता शनिवार को पाकिस्तान में होगी।
    लेबनान पर जारी है तकरार

    यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

    कुछ खबरों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल तभी वार्ता में हिस्सा लेगा, जब युद्धविराम समझौते में तय शर्तें पूरी होंगी।

    ईरान की अर्ध-सरकारी ‘तसनीम’ समाचार एजेंसी ने खबर दी थी कि ”पहले रखी गई शर्तें” पूरी होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी। यह बात इस्लामाबाद रवाना होने से पहले गालिबफ द्वारा ‘एक्स’ पर दिए गए संदेश से भी मेल खाती है।

    गालिबफ ने ‘एक्स’ पर कहा था, ”दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो कदम अभी लागू नहीं हुए हैं- लेबनान में युद्धविराम और वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की संपत्तियों पर लगी रोक हटाना।”

  • होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब

    होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क वसूलने की संभावित योजना को लेकर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। खबरों के अनुसार ईरान की संसद में मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 लाख डॉलर तक का टोल लगाया जा सकता है।

    भारत-ईरान टोल चर्चा पर सरकार का स्पष्ट बयान
    इस मुद्दे पर भारत सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ईरान के साथ इस तरह के किसी टोल टैक्स को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    होर्मुज में आंशिक संचालन की तैयारी

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को ईरानी अधिकारी ने संकेत दिए कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। यह मार्ग युद्ध के दौरान लगभग छह सप्ताह तक बाधित रहा था, हालांकि कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था।

    20 लाख डॉलर तक हो सकता है शुल्क

    सूत्रों के अनुसार ईरान स्थायी शांति व्यवस्था के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि यह शुल्क लगभग 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट तक हो सकता है, जो मौजूदा शिपिंग लागत के बराबर माना जा रहा है।

    ईरान और ओमान दोनों की भूमिका
    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिल सकता है। इस आय का उपयोग क्षेत्रीय पुनर्निर्माण और आर्थिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है।

    भारत को पहले मिली थी राहत
    युद्ध के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी शामिल रहा। उस समय कई भारतीय जहाज जैसे एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ और अन्य वेसल्स सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे थे।

    वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर नजर
    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का नया शुल्क या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा

    ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा


    तेहरान।
     ईरान ने अमेरिका  के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी नौसेना ने कहा है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस अहम समुद्री मार्ग में प्रवेश करने वाले किसी भी पोत को नष्ट कर दिया जाएगा।

    रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के आसपास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सेपाह) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चेतावनी में कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को “उड़ा दिया जाएगा।”

    The Wall Street Journal की रिपोर्ट में चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि इस चेतावनी के बाद कई जहाज फिलहाल होर्मुज के आसपास रुके हुए हैं। फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमानों की तैनाती भी जारी बताई गई है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
    ईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग करीब 34 किलोमीटर चौड़ा है और खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।

    दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा
    डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज मार्ग “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” तरीके से खुला रहे। उन्होंने बताया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रस्ताव के बाद लिया गया।

    ईरान का संदेश—यह युद्ध का अंत नहीं

    दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी पक्ष कोई गलती करता है तो “पूर्ण शक्ति” से जवाब दिया जाएगा।

    बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि, होर्मुज में बढ़ी सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और संवेदनशील बना हुआ है।