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  • जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर कार्यरत वर्षा पटेल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जबलपुर की रहने वाली वर्षा ने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस के शिखर पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराया। उनकी इस उपलब्धि से जबलपुर के साथ-साथ मध्य प्रदेश पुलिस का भी गौरव बढ़ा है।

    माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को हुई थी। अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ा। तेज हवाओं, कड़ाके की ठंड और बदलती मौसम परिस्थितियों के कारण टीम को शिखर अभियान के लिए अनुकूल समय का इंतजार करना पड़ा। मौसम में सुधार आने के बाद अंतिम चढ़ाई शुरू की गई और वर्षा पटेल ने निर्धारित लक्ष्य हासिल करते हुए चोटी पर तिरंगा फहराया।

    वर्षा पटेल का पर्वतारोहण से जुड़ा सफर उनकी खेल पृष्ठभूमि से भी जुड़ा हुआ है। जबलपुर के गढ़ा क्षेत्र से संबंध रखने वाली वर्षा को बचपन से खेल और साहसिक गतिविधियों में रुचि रही है। वह राष्ट्रीय स्तर की बेसबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके नाम 10 से अधिक पदक हासिल करने की जानकारी सामने आई है।

    मध्य प्रदेश पुलिस में जिम्मेदारी निभाने के साथ वर्षा ने पर्वतारोहण के अपने जुनून को भी जारी रखा। पुलिस सेवा की नियमित जिम्मेदारियों के बीच कठिन पर्वतारोहण अभियानों की तैयारी करना उनके अनुशासन और निरंतर प्रयास को दर्शाता है। माउंट एल्ब्रुस की सफलता उनके इसी अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

    इससे पहले वर्षा पटेल ने अगस्त 2024 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियास्को पर भारत का तिरंगा फहराया था। उस समय भी उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। माउंट कोजियास्को की ऊंचाई करीब 2,228 मीटर है और इसे ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है।

    माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने के बाद वर्षा पटेल का लक्ष्य अब और बड़े पर्वतारोहण अभियानों की ओर बढ़ना है। वह दुनिया के सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले सात शिखर अभियान को पूरा करना चाहती हैं। माउंट एल्ब्रुस की सफलता के बाद उनकी नजर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो पर है।

    सात शिखर अभियान को दुनिया के प्रमुख पर्वतारोहण लक्ष्यों में गिना जाता है। इसके तहत सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करने का प्रयास किया जाता है। वर्षा पटेल की मौजूदा उपलब्धि इस लंबे अभियान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

    वर्षा की यात्रा यह भी दिखाती है कि पुलिस सेवा, खेल और साहसिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी होती है। माउंट एल्ब्रुस की कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई यह सफलता उनके पर्वतारोहण अभियान को नई दिशा देती है और आने वाले अभियानों के लिए उनके अनुभव को मजबूत करती है।

    मध्य प्रदेश के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य पुलिस में कार्यरत एक महिला आरक्षक ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में अपनी पहचान बनाई है। तिरंगे के साथ मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराकर वर्षा ने अपनी सेवा और अपने राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व किया। अब उनकी अगली चुनौती माउंट किलिमंजारो और सात शिखर अभियान के अन्य पर्वतों तक पहुंचने की होगी।

  • मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश: में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस प्रकरण में न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। फैसले का असर OBC वर्ग के अभ्यर्थियों और आरक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर पड़ने की संभावना है।

    यह मामला वर्ष 2019 से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित बताया जा रहा है। करीब सात साल से चल रहे इस प्रकरण के कारण OBC वर्ग के अभ्यर्थियों के बीच लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी पक्षों की निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान OBC आरक्षण से संबंधित पक्षों ने अपनी दलीलें और तर्क न्यायालय के सामने रखे। OBC महासभा की ओर से भी इस प्रकरण को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया गया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित रहने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।

    OBC महासभा के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट में लंबित प्रकरण पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है। उनके अनुसार, OBC वर्ग से जुड़े पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने मामले में अपनी बात रखी है। अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है।

    मामले से जुड़े पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि लगभग 80 से 90 हजार OBC वर्ग के बच्चे और अभ्यर्थी इस प्रकरण से प्रभावित हैं। लंबे समय से आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी शैक्षणिक और रोजगार संबंधी संभावनाओं पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

    आरक्षण का मुद्दा मध्य प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक चर्चा का विषय रहा है। OBC वर्ग के लिए आरक्षण से संबंधित विभिन्न नियुक्तियों और शैक्षणिक अवसरों में स्थिति स्पष्ट होने को लेकर अभ्यर्थियों की नजर न्यायालय के निर्णय पर रहती है। ऐसे में फैसला सुरक्षित होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आगे की स्थिति न्यायिक निर्णय से स्पष्ट होगी।

    OBC महासभा ने न्यायालय से जल्द फैसला सुनाए जाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि मामले के लंबे समय से लंबित रहने के कारण अभ्यर्थियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। फैसला आने के बाद आरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति साफ हो सकेगी।

    फिलहाल हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा है। अदालत कब तक फैसला सुनाएगी, इसकी निश्चित तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि OBC आरक्षण से जुड़े लंबित विवाद पर न्यायालय का रुख क्या रहता है और उसका अभ्यर्थियों पर किस प्रकार प्रभाव पड़ेगा।

    करीब सात वर्षों से चल रहे इस मामले में सुनवाई पूरी होना अपने आप में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब OBC वर्ग के अभ्यर्थियों, संगठनों और संबंधित पक्षों की निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्रित हैं। निर्णय आने के बाद ही आरक्षण व्यवस्था से जुड़े आगे के कदम और प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • MP: जबलपुर में युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार महानाट्य का हुआ मंचन

    MP: जबलपुर में युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार महानाट्य का हुआ मंचन


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश के जबलपुर में संस्कृति विभाग के सहयोग से रविवार देर शाम मानस भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक ‘युगप्रवर्तक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार’ विषय पर आधारित महानाट्य मंचन हुआ। नागपुर के ‘नादब्रह्म’ संस्था के कलाकारों ने डॉ. हेडगेवार’ के जीवन के संघर्षों और विचारों को मंच पर जीवंत कर दिया।

    कार्यक्रम में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मप्र उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल, उद्योगपति एवं समाजसेवी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. कैलाश गुप्ता थे।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जैसे महान व्यक्तित्व के बारे में बोलना सौभाग्य के साथ-साथ जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के कार्यों का सही मूल्यांकन उसके विचारों और उनके दीर्घकालीन प्रभाव से होता है। डॉ. हेडगेवार ने अपने 51 वर्ष के जीवन में मात्र 15 वर्षों के संघ कार्य के माध्यम से जिस संगठन की नींव रखी, वह आज विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है।

    मंत्री सिंह ने कहा कि डॉ. हेडगेवार के मन में बचपन से ही देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प था। उन्होंने क्रांतिकारी के रूप में कार्य किया, शिक्षा के लिए कलकत्ता गए और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में देश की आजादी के लिए कार्य किया तथा वर्ष 1930 में जंगल कानून के विरोध में सत्याग्रह करने पर एक वर्ष का कठोर कारावास भी भुगता।

    उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार केवल देश की स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि स्वतंत्र भारत के निर्माण को लेकर भी चिंतित थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की और अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण तथा संगठन निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि आज संघ विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में शामिल है।

    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यदि हम डॉ. हेडगेवार के जीवन से थोड़ी भी प्रेरणा लेकर उसे अपने जीवन में अपनाएं, तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महानाट्य के माध्यम से उनके जीवन और विचारों को समझना अधिक सहज होगा तथा यह प्रस्तुति समाज और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक बनेगी।

    कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजकों ने बताया कि नागपुर के ‘नादब्रह्म’ द्वारा निर्मित ‘युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ (संघ सृजन का भव्य नाट्य आविष्कार) महानाट्य का यह 57वां मंचन है तथा इसकी 151 प्रस्तुतियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में इसका सफल मंचन हो चुका है। मध्य प्रदेश में यह इसका आठवां प्रदर्शन रहा।

    इस महानाट्य के संयोजक निखिल देशकर, संरक्षक रविजी भुसारी (ज्येष्ठ प्रचारक, रा.स्व.संघ), निर्माता पद्माकर धानोरकर, लेखक डॉ. अजय प्रधान, निर्देशक सुबोध सुर्जकर और संगीत शैलेश दाणी द्वारा तैयार किया गया था। कार्यक्रम में महाकौशल प्रांत के प्रांत संचालक , विधायक अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पाण्डेय, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, डॉ. जितेन्द्र जामदार, भाजपा के प्रदेश दिव्यांगजन प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संदीप रजक सहित गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।

  • जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट


    जबलपुर।
    शहर के स्कूलों और कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    छात्राओं को बनाया जा रहा निशाना

    जानकारी के अनुसार, कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्व और मनचले छात्राओं का पीछा करते हैं, उन पर फब्तियां कसते हैं, मोबाइल नंबर मांगते हैं और उनकी बिना अनुमति तस्वीरें भी खींचते हैं। इन घटनाओं से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं और खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेज जाना भी छोड़ दिया है। वहीं, विरोध करने पर अभिभावकों को भी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

    मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का मामला माना है।

    आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ

    इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां इंटरनेट पर डॉक्टर का संपर्क नंबर खोजने के दौरान एक व्यक्ति ठगों के जाल में फंस गया। इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन के नाम पर भेजे गए एक लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ गया। लिंक खुलते ही उसके बैंक खाते से कुल पांच लाख रुपये चार अलग-अलग लेनदेन में निकल गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, पीड़ित जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र के हथिताल इलाके का निवासी है। उसने अपनी पत्नी के त्वचा संबंधी उपचार के लिए इंटरनेट पर डॉक्टर का मोबाइल नंबर तलाशा था। सर्च के दौरान मिले एक नंबर पर उसने संपर्क किया। फोन पर हुई बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित चिकित्सा सेवा से जुड़ा बताते हुए इलाज से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही।

    आरोप है कि इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया और उसे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने के लिए कहा गया। जैसे ही उसने लिंक खोला और आगे की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया, कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से क्रमवार चार ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल पांच लाख रुपये निकल गए। बैंक खाते से राशि कटने के संदेश मिलने के बाद उसे साइबर ठगी का एहसास हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने स्थानीय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन से जुड़े तकनीकी पहलुओं, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस ने नागरिकों को इंटरनेट पर उपलब्ध किसी भी मोबाइल नंबर या लिंक की सत्यता जांचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर अस्पताल, डॉक्टर, बैंक या सरकारी सेवाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल नंबर तैयार कर लोगों को झांसे में लेते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट या सत्यापन के बहाने लिंक भेजकर बैंकिंग जानकारी या डिवाइस तक पहुंच हासिल करने का प्रयास किया जाता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है। यदि किसी सेवा के लिए ऑनलाइन भुगतान या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो तो संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम का ही उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही बैंक खाते से जुड़े ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक के माध्यम से वित्तीय जानकारी मांगी जाए तो सतर्क रहें और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने से पहले जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतकर इस प्रकार की साइबर ठगी से बचा जा सकता है, जबकि किसी भी संदिग्ध घटना की स्थिति में तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है।

  • जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

    जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसओ) ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यदि मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के अनुसार डुमना चौकी क्षेत्र के महंगवा गांव निवासी नितिन बैगा 8 जून की शाम घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में उसका शव महंगवा स्थित खाटू श्याम मंदिर के पास जंगल में बरामद हुआ। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

    भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि युवक की गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। संगठन का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाते तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। संगठन ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

    संगठन का यह भी कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि मृतक के परिवार को न्याय मिल सके। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन मृतक के परिजनों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। संगठन ने प्रशासन से मामले की हर पहलू से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

    वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच नियमानुसार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार युवक की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई थी और बाद में उसका शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है।

    पुलिस का यह भी कहना है कि परिजनों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, जिसे गंभीरता से लिया गया है। जांच के दौरान सभी तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला अब जांच के महत्वपूर्ण चरण में है और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर छात्र संगठन और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • सरकारी वकीलों की भर्ती पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, पांचवीं बार भी जवाब नहीं देने पर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

    सरकारी वकीलों की भर्ती पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, पांचवीं बार भी जवाब नहीं देने पर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

    मध्य प्रदेश में सरकारी वकीलों की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से बार-बार जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। लगातार कई अवसर दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं होने पर हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

    मामला हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में महाधिवक्ता कार्यालय के अंतर्गत 157 सरकारी लॉ ऑफिसर्स की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और नियुक्तियों में मनमानी, पक्षपात तथा पात्रता संबंधी मानकों की अनदेखी की गई। याचिकाकर्ता ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग भी की है।

    याचिका में कहा गया है कि सरकारी लॉ ऑफिसर नियुक्त किए जाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कम से कम दस वर्ष का अधिवक्ता अनुभव होना आवश्यक है। आरोप है कि नियुक्त किए गए कुछ लोगों के पास निर्धारित अनुभव उपलब्ध नहीं था, फिर भी उन्हें सरकारी वकील नियुक्त कर दिया गया। इन आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ता ने नियुक्तियों की वैधता पर प्रश्न उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।

    सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि पूर्व में जारी न्यायालय के नोटिस संबंधित पक्षों तक पहुंचाने में भी कठिनाई आई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ अवसरों पर नोटिस स्वीकार नहीं किए गए। अदालत ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की। इसके बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

    लगातार देरी पर असंतोष जताते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब मामले में और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि अब तक जवाब क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष क्या है। अदालत का यह रुख इस मामले को गंभीरता से लिए जाने का संकेत माना जा रहा है।

    मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की गई है। इस दौरान महाधिवक्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ राज्य सरकार से विस्तृत जवाब अपेक्षित रहेगा। अदालत में प्रस्तुत होने वाले उत्तर के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष के आरोपों पर न्यायालय ने अंतिम टिप्पणी नहीं की है और विवाद विचाराधीन है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकारी लॉ ऑफिसर्स राज्य सरकार की ओर से विभिन्न न्यायालयों में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी करते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता, पात्रता और नियमों के पालन को लेकर उठे प्रश्नों पर न्यायिक परीक्षण की प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने वाले जवाब पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    मध्य प्रदेश:  जबलपुर स्थित सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर मंगलवार को विवाद खड़ा हो गया। कुछ कर्मचारियों द्वारा स्कूल प्रबंधन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप लगाए जाने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता स्कूल परिसर पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और विरोध हुआ, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

    विवाद उस समय सामने आया जब स्कूल के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें नौकरी बनाए रखने के लिए धर्म बदलने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए, लेकिन धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।

    इन आरोपों की जानकारी सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान परिसर में लगे कुछ बैनर और पोस्टर भी क्षतिग्रस्त किए गए तथा बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।

    प्रदर्शन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को डर और लालच के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, शिकायत करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार किया, जिसके बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी पक्षों से प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • संपत्ति कुर्की के आदेश पड़ते ही बदले हालात, छह महीने से फरार GST अधीक्षक मुकेश बर्मन ने किया आत्मसमर्पण, CBI अब करेगी गहन पूछताछ

    संपत्ति कुर्की के आदेश पड़ते ही बदले हालात, छह महीने से फरार GST अधीक्षक मुकेश बर्मन ने किया आत्मसमर्पण, CBI अब करेगी गहन पूछताछ

    मध्य प्रदेश: के जबलपुर में सामने आए चर्चित सेंट्रल जीएसटी रिश्वतकांड में छह महीने से फरार चल रहे जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन ने आखिरकार अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे आरोपी के खिलाफ संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया शुरू होने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और उसने न्यायालय का रुख किया। अदालत ने उसे 2 जुलाई तक CBI रिमांड पर भेजते हुए जांच एजेंसी को पूछताछ की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है।

    यह मामला पिछले वर्ष दिसंबर में सामने आया था, जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने जबलपुर स्थित सेंट्रल जीएसटी डिविजन कार्यालय में छापेमारी कर कथित रिश्वतखोरी के नेटवर्क का खुलासा किया था। ट्रैप कार्रवाई के दौरान विभाग के एक सहायक आयुक्त और एक निरीक्षक को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इसी कार्रवाई के दौरान जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन फरार हो गया था और तब से उसकी तलाश लगातार जारी थी।

    जांच एजेंसी ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन वह लगातार जांच से बचता रहा। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की गई। इसी बीच आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटनाक्रम को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब एजेंसी सीधे आरोपी से पूछताछ कर पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेगी।

    पूरे मामले की शुरुआत एक होटल व्यवसायी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कर संबंधी मामले में बड़ी राशि की रिकवरी दर्शाने के बाद उसे राहत देने के नाम पर दस लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की, जिसमें चार लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार किए जाने के दौरान अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मामले ने व्यापक चर्चा बटोरी और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े हुए।

    अब मुकेश बर्मन के आत्मसमर्पण के बाद जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित रिश्वत मांगने और वसूली के इस पूरे प्रकरण में किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या यह मामला किसी संगठित भ्रष्टाचार तंत्र का हिस्सा था या फिर सीमित स्तर पर संचालित किया जा रहा था।

    जांच के दौरान आरोपी से विभागीय प्रक्रियाओं, कथित रिश्वत मांगने के तरीके, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में विस्तार से पूछताछ की जाएगी। यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल अदालत द्वारा दिए गए रिमांड के दौरान CBI पूरे घटनाक्रम की परतें खोलने और उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। मामले की आगामी सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर अब सभी की नजर बनी हुई है।

  • जबलपुर में नकली DAP खाद बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़, घर के अंदर चल रहा था अवैध कारोबार, नामचीन कंपनी के नाम पर बिक्री की थी तैयारी

    जबलपुर में नकली DAP खाद बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़, घर के अंदर चल रहा था अवैध कारोबार, नामचीन कंपनी के नाम पर बिक्री की थी तैयारी

    मध्यप्रदेश: के जबलपुर जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली डीएपी खाद बनाने के एक अवैध कारोबार का खुलासा किया है। यह पूरा मामला पाटन क्षेत्र के ग्राम करौंदी का है, जहां एक घर के भीतर ही गुपचुप तरीके से नकली खाद तैयार की जा रही थी। छापेमारी के बाद सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को संचालित कर रहा था और किसानों तक घटिया गुणवत्ता की खाद पहुंचाने की योजना बना रहा था।

    कृषि विभाग की टीम को इस संबंध में पहले से सूचना मिली थी, जिसके आधार पर अचानक मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर भारी मात्रा में नकली डीएपी खाद और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई। इसके अलावा कई प्रकार के रसायन और पैकिंग से जुड़े उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से नामचीन कंपनी के ब्रांडेड बैग की नकल तैयार करता था और उन्हीं में नकली खाद को पैक कर बाजार में सप्लाई करने की योजना बना रहा था। इसका उद्देश्य किसानों को असली खाद बताकर अधिक कीमत पर बेचना था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस तरह की गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और धीरे-धीरे इसका नेटवर्क भी फैलाया जा रहा था।

    कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार खरीफ सीजन के दौरान डीएपी खाद की मांग बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। किसान अपनी फसलों की बुवाई के लिए खाद पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में मिलावटी या नकली खाद उनकी फसल और आर्थिक स्थिति दोनों पर गंभीर असर डाल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग लगातार निगरानी और जांच अभियान चला रहा है।

    छापेमारी के दौरान जब्त किए गए सभी नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तैयार की जा रही खाद की गुणवत्ता कैसी थी और इसमें किन-किन रसायनों का उपयोग किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जाएगी।

    इस मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस भी इस बात की जांच कर रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ है।

    कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय केवल अधिकृत विक्रेताओं और प्रमाणित स्रोतों से ही सामग्री लें। साथ ही किसी भी संदिग्ध पैकेजिंग या कम कीमत वाले उत्पादों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों पर लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।