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  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई


    मध्य प्रदेश:
    हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने जमानत अर्जियों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए सात विशेष पीठों का गठन किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित जमानत मामलों पर सुनवाई करना और उनके जल्द निराकरण की प्रक्रिया को गति देना है। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, ये विशेष पीठें 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक नियमित न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से सुनवाई करेंगी।

    नई व्यवस्था उन वकीलों और पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी जमानत अर्जियां निर्धारित अवधि के दौरान सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। संबंधित मामलों में अब विशेष पीठों के तय कार्यक्रम के अनुसार कार्यवाही होगी। इस पहल से लंबित अर्जियों को सुनवाई के लिए अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी मामले में जमानत मिलने या उसके अंतिम निराकरण का निर्णय संबंधित पीठ सुनवाई के दौरान उपलब्ध तथ्यों, दलीलों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगी।

    जमानत अर्जियों की सुनवाई के लिए गठित सात एकल पीठों में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक खोट, न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा के नाम शामिल हैं। जारी जानकारी में इन विशेष सुनवाई सत्रों के लिए न्यायाधीशों को जिम्मेदारी सौंपे जाने का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सातों पीठों के गठन के बावजूद छह न्यायाधीशों के नाम ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

    विशेष पीठों के गठन के पीछे लंबित जमानत अर्जियों पर समयबद्ध सुनवाई की आवश्यकता प्रमुख मानी जा रही है। अदालतों में विभिन्न प्रकार के मामलों के बीच जमानत अर्जियों के लिए अलग समय निर्धारित होने से संबंधित प्रकरणों को सुनने की प्रक्रिया व्यवस्थित हो सकती है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित अवधि में सूचीबद्ध अर्जियों पर सुनवाई की जाएगी। पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं को अपने मामले की सूची और निर्धारित समय के संबंध में हाईकोर्ट की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना होगा।

    जमानत अर्जियों के अलावा विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। इसके तहत न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की एकल पीठ गठित की गई है, जो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विविध अपीलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इस तरह हाईकोर्ट प्रशासन ने जमानत मामलों के साथ विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी न्यायिक कार्यवाही को व्यवस्थित करने का कदम उठाया है।

    विशेष पीठों की यह व्यवस्था 6 नवंबर तक निर्धारित है। इस दौरान नियमित न्यायिक कार्यवाही समाप्त होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। जिन पक्षकारों की अर्जियां इस अवधि में सूचीबद्ध हैं, उनके लिए सुनवाई की तारीख और पीठ की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। वकीलों को भी निर्धारित सूची के अनुसार तैयारी करनी होगी, ताकि अदालत के सामने आवश्यक दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत की जा सकें।

    हाईकोर्ट प्रशासन की इस पहल से लंबित जमानत अर्जियों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित अवधि में कितने मामलों की सुनवाई पूरी होती है और उनमें क्या आदेश पारित किए जाते हैं। फिलहाल, जबलपुर मुख्य पीठ में 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक चलने वाले विशेष सुनवाई कार्यक्रम पर संबंधित पक्षकारों और अधिवक्ताओं की नजर रहेगी।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सीबीआई और राज्य सरकार ने उनकी जमानत का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फिलहाल गिरिबाला सिंह को जमानत मिलेगी या नहीं, इस पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जांच के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। यह आरोप भी लगाया गया कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सीबीआई और राज्य सरकार ने आशंका जताई कि यदि उन्हें जमानत मिलती है, तो मामले के गवाहों और साक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकारी पक्ष ने याचिका खारिज करने की मांग की।

    सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से संबंधित रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। सरकारी पक्ष के अनुसार, इन रिपोर्टों से जांच को आगे बढ़ाने और मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट लंबित होने का मुद्दा भी जमानत का विरोध करते समय उठाया गया।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश बचाव पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की। उनके वकील ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, बीमारियों और करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला भी दिया। इसके अलावा यह तर्क रखा गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ दहेज अधिनियम की धाराओं में चालान पेश नहीं किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

    यह मामला भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या तथा दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना के बाद मामले की जांच और जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।

    गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए थे। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

    मामले में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका में सीबीआई, गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को प्रतिवादी बनाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।

    अब हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें टिकी हैं। जमानत के पक्ष में बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य, उम्र और हिरासत की अवधि से जुड़े तर्क रखे हैं, जबकि सीबीआई और राज्य सरकार ने जांच की स्थिति तथा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका के आधार पर विरोध किया है। अदालत का अंतिम आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना होगा।

  • भेड़ाघाट नर्मदा महोत्सव में अरुणिता और ऋचा शर्मा की गायकी ने बांधा समां, ढोल-ताशा की गूंज से झूमे दर्शक

    भेड़ाघाट नर्मदा महोत्सव में अरुणिता और ऋचा शर्मा की गायकी ने बांधा समां, ढोल-ताशा की गूंज से झूमे दर्शक


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित भेड़ाघाट में आयोजित दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव का समापन रविवार को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। महोत्सव की अंतिम शाम में गायिका अरुणिता कांजीलाल और पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने अपने गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, महाराष्ट्र से आए कलाकारों की पारंपरिक ढोल-ताशा प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी और भेड़ाघाट की संगमरमरी चट्टानों के बीच आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में भक्ति संगीत, शास्त्रीय नृत्य और फिल्मी गीतों का संगम देखने को मिला।

    कार्यक्रम की शुरुआत मां नर्मदा के पूजन से हुई। इसके बाद जबलपुर की त्रिभंग कला अकादमी की कलाकार कौतुकी उपाध्याय ने कथक शैली में शिव स्तुति प्रस्तुत की। शास्त्रीय नृत्य की इस प्रस्तुति के बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने पारंपरिक ढोल-ताशा वादन किया। कलाकारों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा और सांस्कृतिक संध्या का माहौल उत्साहपूर्ण बना दिया।

    महोत्सव की प्रमुख प्रस्तुतियों में अरुणिता कांजीलाल का गायन शामिल रहा। इंडियन आइडल सीजन-12 की प्रथम उपविजेता अरुणिता ने ‘अई गिरि नंदिनी’ स्तोत्र से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘राम सियाराम’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘हीरे मोती मैं न चाहूं’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ जैसे गीत सुनाए। उनके गायन में भक्ति और लोकप्रिय संगीत का मेल देखने को मिला।

    अरुणिता ने मां नर्मदा को समर्पित भजन ‘मां रेवा थारो पानी निर्मल’ भी प्रस्तुत किया। इस भजन ने कार्यक्रम में भक्तिमय वातावरण बनाया। नर्मदा महोत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के बीच यह प्रस्तुति शाम के खास हिस्सों में शामिल रही।

    इसके बाद पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने मंच संभाला। उन्होंने ‘सोनिया वे रांझणा वे’, ‘जिंदगी में कभी कोई आए न रब्बा’ और ‘माही वे’ जैसे लोकप्रिय फिल्मी गीत प्रस्तुत किए। उनकी गायकी के दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह जताया। ऋचा शर्मा की प्रस्तुति के साथ महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।

    शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक भेड़ाघाट पहुंचते हैं। यहां की संगमरमरी चट्टानें, नर्मदा तट का प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को विशेष पहचान देते हैं। इस बार भी कथक, भजन, फिल्मी गीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विविध रंग दिए।

    समापन समारोह में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि विधायक नीरज सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी वर्चुअल माध्यम से समारोह से जुड़े। उन्होंने नर्मदा महोत्सव को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया। साथ ही आयोजन को और भव्य बनाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने की बात कही। महोत्सव के समापन के साथ भेड़ाघाट की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन महत्व एक बार फिर सामने आया।

  • जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू

    जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग पर काबू पाने के लिए आठ से अधिक दमकल गाड़ियों को लगाया गया है। घटनास्थल पर आग बुझाने के साथ बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फिलहाल किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

    यह घटना आधारताल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में हुई। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने के प्रयास में जुटे हैं। आग की स्थिति को देखते हुए बचाव अभियान भी जारी रखा गया है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पाने और घटनास्थल की स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से मिली शुरुआती जानकारी में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसे आग लगने की पुष्ट वजह नहीं माना गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष भारद्वाज ने बताया कि फिलहाल घटना में किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। आग लगने की वजह की पुष्टि के लिए जांच जरूरी है। इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल की टीम की जांच और आकलन महत्वपूर्ण होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इसके पीछे क्या कारण रहे।

    फैक्ट्री में आग लगने की घटना के बाद वहां हुए नुकसान का आकलन भी किया जाना बाकी है। आग से भवन, मशीनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। दमकलकर्मियों के आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही नुकसान की स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा।

    औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद फिलहाल प्राथमिकता आग बुझाने और बचाव कार्य पूरा करने की है। पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर मौजूद हैं। आग के कारणों की जांच के साथ यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किस तरह शुरू हुई और किन परिस्थितियों में फैली। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है, लेकिन जांच से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।

    फिलहाल, जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में आग बुझाने का अभियान जारी है। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है। आग पर पूरी तरह नियंत्रण, संभावित नुकसान और घटना के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच

    जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच


    मध्य प्रदेश।
    के जबलपुर हाईकोर्ट में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट बंद किए जाने के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि विवाद का संबंध सीधे तौर पर व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच है तथा इसमें मेटा की कोई भूमिका नहीं है। अदालत ने व्हाट्सऐप कंपनी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

    सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच के समक्ष हुई। मेटा की ओर से अधिवक्ता मयंक उपाध्याय अदालत में पेश हुए, जबकि वरुण पाठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुए। मेटा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में विवाद व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच का है। वहीं, भारत संघ की ओर से अधिवक्ता सचिन जैन मौजूद रहे। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता गुंचा रसूल ने पक्ष रखा।

    याचिका के अनुसार, मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट 23 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया था। उनका कहना है कि अकाउंट बंद करने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही इसकी वजह बताई गई। सिंह के मुताबिक, वह कई वर्षों से इस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे। उनके पेशे से जुड़े कई जरूरी काम इसी अकाउंट के माध्यम से किए जाते थे। इनमें कानूनी कामकाज, मामलों का प्रबंधन, मुवक्किलों से बातचीत और केस से संबंधित दस्तावेजों का आदान-प्रदान शामिल था।

    मृगेंद्र सिंह ने याचिका में बताया कि अकाउंट बंद होने वाले दिन ही उन्होंने ऐप के माध्यम से इसकी समीक्षा करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उनके अनुसार इस प्रक्रिया से कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि अकाउंट बंद होने से उनके नियमित पेशेवर कामकाज पर असर पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत देने की मांग की है। उनका पक्ष है कि डिजिटल माध्यम से होने वाला संवाद बाधित होने से कानूनी कार्यों को संचालित करने में परेशानी होती है।

    याचिकाकर्ता ने अकाउंट बंद किए जाने को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के पालन में भी कथित चूक का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के निपटारे के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और मामले में अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।

    मेटा और व्हाट्सऐप के संबंधों का मुद्दा भी इस मामले में सामने आया। मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक ने वर्ष 2014 में व्हाट्सऐप के अधिग्रहण की घोषणा की थी और उसी वर्ष यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। व्हाट्सऐप एलएलसी मेटा की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इसके बावजूद सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि मौजूदा विवाद में उसकी सीधी भूमिका नहीं है।

    हाईकोर्ट ने फिलहाल व्हाट्सऐप को अपना जवाब पेश करने का अवसर दिया है। मृगेंद्र सिंह ने याचिका में अपना अकाउंट बहाल करने, राहत प्रदान करने और कथित नियम उल्लंघन के संबंध में भारत संघ को उचित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। अब 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कंपनी का पक्ष सामने आने की उम्मीद है।

  • जबलपुर में होटल में पति को दूसरी महिला संग देख भड़की पत्नी, मोबाइल चैट से मिला था मिलने का सुराग; जमकर थप्पड़बाजी

    जबलपुर में होटल में पति को दूसरी महिला संग देख भड़की पत्नी, मोबाइल चैट से मिला था मिलने का सुराग; जमकर थप्पड़बाजी


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश के जबलपुर में पति को दूसरी महिला के साथ होटल के कमरे में देखकर पत्नी का गुस्सा फूट पड़ा। शारदा चौक स्थित होटल बैलेंसिंग रॉक में पत्नी ने कमरा खुलवाया तो अंदर पति और महिला को साथ देखकर हंगामा शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद कहासुनी से थप्पड़बाजी तक पहुंच गया। होटल में अफरा-तफरी मचने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल किसी भी पक्ष ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

    मोबाइल चैट से मिला होटल में मिलने का सुराग

    जानकारी के मुताबिक, सविता यादव को अपने पति अरुण यादव और ज्योति कोरी के बीच संबंध होने का शक था। सविता का आरोप है कि दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसी दौरान मोबाइल चैट के जरिए उसे कथित तौर पर पता चला कि अरुण और ज्योति होटल में मिलने वाले हैं।

    इसके बाद सविता ने पति का पीछा किया और शारदा चौक स्थित होटल बैलेंसिंग रॉक पहुंच गई। पत्नी के मुताबिक, होटल के कमरा नंबर 103 में अरुण और ज्योति कोरी मौजूद थे।

    कमरा खुलते ही भड़की पत्नी, शुरू हुई थप्पड़बाजी

    सविता ने जब कमरे का दरवाजा खुलवाया और पति को दूसरी महिला के साथ देखा तो वह अपना आपा खो बैठी। इसके बाद कमरे के अंदर ही तीनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर सविता ने कथित तौर पर पति और ज्योति को थप्पड़ मारने शुरू कर दिए।

    होटल में हंगामा बढ़ता देख वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद होटल में चल रहा विवाद शांत हुआ।

    पति पर दूरी बनाने और महिला पर ब्लैकमेलिंग का आरोप

    सविता ने आरोप लगाया कि अरुण और ज्योति के बीच लंबे समय से संबंध थे। उसका दावा है कि दूसरी महिला के करीब आने के बाद पति उससे दूरी बनाने लगा था। पत्नी ने ज्योति कोरी पर अरुण को ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगाया है।

    हालांकि, संबंधों और ब्लैकमेलिंग को लेकर लगाए गए ये आरोप फिलहाल सविता के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी इन आरोपों की पुष्टि किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    पुलिस बोली- अभी किसी ने शिकायत नहीं की

    घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच विवाद शांत कराया। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल, होटल के कमरे में पति और दूसरी महिला की मौजूदगी को लेकर शुरू हुआ विवाद पुलिस तक पहुंच गया है। लेकिन औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

  • जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा

    जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा


    मध्य प्रदेश:   में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच जबलपुर का बरगी बांध पानी से लबालब भर गया है। बांध के कैचमेंट क्षेत्र मंडला और डिंडोरी में लगातार बारिश होने से जलस्तर तेजी से बढ़ा। स्थिति को देखते हुए बांध के 17 गेट खोलकर नर्मदा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में भी असर दिखाई देने लगा है।

    बरगी बांध के 17 गेट करीब 2.38 मीटर की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों के जरिए लगभग 6,121 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। बांध में पानी का भराव इतना अधिक है कि कई गेटों से पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकल रहा है। जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर नर्मदा नदी के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ा है।

    नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जबलपुर और आसपास के प्रमुख घाटों में पानी भर गया है। नदी के बढ़ते बहाव के चलते घाटों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। लगातार बारिश और बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

    नर्मदा के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे बसे गांवों के आवागमन पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार बरगी नगर, बिजौरा, बांदरकोला, खापा, बसा, दुर्गा नगर और प्रेम नगर समेत आसपास के करीब 10 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। पानी बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से डूब क्षेत्र और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने तथा नदी और घाटों के आसपास नहीं जाने की अपील की गई है।

    नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

    भारी बारिश का असर केवल बरगी बांध तक सीमित नहीं है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार पानी आने से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। 17 गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के बहाव में भी तेजी आई है।

    प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से जलमग्न घाटों और नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से बचने को कहा गया है। लगातार बारिश के बीच बांध और नदी के जलस्तर पर निगरानी जारी है।

    फिलहाल बरगी बांध से पानी की निकासी जारी है और नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। करीब 10 गांवों का संपर्क प्रभावित होने तथा घाटों के जलमग्न होने के कारण स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • जबलपुर में बिना नंबर की कार से अंग्रेजी शराब की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने 251 बोतलों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा

    जबलपुर में बिना नंबर की कार से अंग्रेजी शराब की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने 251 बोतलों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा

    जबलपुर: के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बिना नंबर की कार से बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की है। मंगलवार रात मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ग्राम बसा क्षेत्र में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 251 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद हुई, जबकि शराब और वाहन की कीमत लाखों रुपये बताई गई है।

    माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार के अनुसार पुलिस को मंगलवार रात सूचना मिली थी कि ग्राम बसा इलाके में प्रियांश अग्निहोत्री के घर के सामने सड़क पर खड़ी बिना नंबर की कार में अवैध रूप से बड़ी मात्रा में शराब रखी गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी की और कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस टीम को अपने पास आता देखकर दो संदिग्ध युवक कार के पास से भागने की कोशिश में थे। पुलिसकर्मियों ने दोनों को घेर लिया और मौके पर ही पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान प्रियांश अग्निहोत्री निवासी ग्राम बसा और आशुतोष उर्फ चुंगा यादव निवासी ग्राम मड़ई, रांझी के रूप में हुई।

    इसके बाद पुलिस ने मौके पर मौजूद बिना नंबर की सफेद रंग की सुजुकी फ्रोन्स कार की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से 19 कार्टून बरामद किए गए। इन कार्टूनों को खोलने पर कुल 251 बोतल अंग्रेजी शराब मिली। पुलिस ने शराब को जब्त कर वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस को प्रियांश के घर के पोर्च में रखा एक बड़ा काला थैला भी मिला। इसमें भी शराब भरी हुई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी इस शराब को कार में लोड करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि करीब 10 दिन पहले बिक्री के लिए ग्वारीघाट निवासी अर्जुन केवट से 25 पेटी अंग्रेजी शराब मंगाई गई थी। उनके अनुसार आशुतोष उर्फ चुंगा यादव शराब को अर्जुन केवट की बिना नंबर वाली सफेद कार से प्रियांश के घर लेकर आया था।

    आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि पुलिस की गश्त और लगातार निगरानी के कारण वे शराब को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान माढ़ोताल पुलिस को इसकी सूचना मिल गई और टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर दी।

    पुलिस ने बरामद शराब और वाहन को जब्त करने के साथ दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब मामले की आगे जांच कर रही है। पूछताछ के आधार पर अवैध शराब की आपूर्ति और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी तलाश की जा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 25 पेटी शराब कहां से लाई गई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस जांच के आधार पर अवैध शराब के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI ने मांगा एक सप्ताह का समय

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI ने मांगा एक सप्ताह का समय


    जबलपुर:
     एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। करीब तीन सप्ताह से लंबित याचिका पर अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।

    गिरिबाला सिंह फिलहाल जेल में बंद हैं। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए नियमित जमानत की मांग की है। मंगलवार की सुनवाई में उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने गिरिबाला सिंह की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत दिए जाने की दलील रखी।

    गिरिबाला सिंह के वकील के मुताबिक, उनकी मुवक्किल की ओर से ऐसा कोई कृत्य नहीं किया गया है, जिसके आधार पर उन्हें अपराध में संलिप्त माना जाए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि ट्विशा शर्मा ने आत्महत्या की थी। वकील ने गिरिबाला सिंह की ओर से किसी तरह की गलती किए जाने से इनकार किया।

    सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। एजेंसी ने कहा कि वह मामले की केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना चाहती है और जमानत याचिका पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराना चाहती है। इसके लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया।

    अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। फिलहाल गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनकी जमानत का निर्णय अगली सुनवाई में CBI के जवाब और मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगा।

    मामले के अनुसार, ट्विशा शर्मा 12 मई को अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और गिरिबाला सिंह तथा उनके बेटे समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

    फिलहाल गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह जेल में हैं। इसी मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया गया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में बचाव पक्ष ने उम्र और स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों को जमानत के पक्ष में रखा, जबकि CBI ने जवाब और केस डायरी प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।

    अदालत द्वारा अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिए जाने के बाद अब मामले में CBI का जवाब महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद अदालत जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलों और जांच से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आगे सुनवाई करेगी। अभी पूर्व जज गिरिबाला सिंह को जमानत नहीं मिली है और वह न्यायिक हिरासत में हैं।

  • मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल, तीन दिन प्रभावित रहेगा कामकाज; नकदी, चेक क्लीयरेंस और लोन सेवाएं

    मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल, तीन दिन प्रभावित रहेगा कामकाज; नकदी, चेक क्लीयरेंस और लोन सेवाएं


    मध्य प्रदेश : बैंक कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर मध्य प्रदेश में बैंकिंग सेवाओं पर पड़ा है। जबलपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक कर्मचारियों के आंदोलन के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है। हड़ताल के चलते शुक्रवार से रविवार तक लगातार तीन दिन बैंकिंग सेवाओं पर असर रहेगा।

    इस दौरान नकदी से जुड़े लेन-देन, चेक क्लीयरेंस, लोन से संबंधित कार्य और अन्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। बैंक कर्मचारियों के संगठनों ने लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मांगों पर अपेक्षित स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

    बैंक कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन कामकाज लागू करना शामिल है। कर्मचारी चाहते हैं कि शनिवार और रविवार को अवकाश रखते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा पेंशन के अपडेट और उसमें जरूरी सुधार की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

    कर्मचारियों की एक अन्य मांग महंगाई भत्ते यानी DA की समान गणना से जुड़ी है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना यानी OPS का विकल्प दिए जाने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मुद्दों पर लंबे समय से उनकी ओर से मांग रखी जा रही है।

    हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी शिवांगी राय खरे ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, लगातार मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

    बैंक कर्मचारी संजय खरे ने भी सरकार और बैंक प्रबंधन से कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि कर्मचारियों की ओर से उठाई जा रही मांगों पर जल्द समाधान किया जाना चाहिए।

    तीन दिनों तक बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहने के कारण बैंक ग्राहकों को अपनी जरूरतों के लिए एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। हालांकि, हड़ताल का मुख्य असर बैंक शाखाओं में होने वाले नियमित कामकाज पर पड़ रहा है।

    जबलपुर सहित प्रदेश में बैंक कर्मचारियों के आंदोलन के कारण शाखाओं में होने वाले कई जरूरी काम प्रभावित होने की स्थिति है। नकदी लेन-देन, चेक क्लीयरेंस और लोन से जुड़े कामों के साथ अन्य बैंकिंग गतिविधियों पर भी हड़ताल का असर पड़ रहा है।

    बैंक कर्मचारियों का यह आंदोलन उनकी लंबित मांगों को लेकर है। कर्मचारी संगठनों की ओर से पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, पेंशन अपडेट, महंगाई भत्ते की समान गणना और पुरानी पेंशन योजना का विकल्प दिए जाने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं।

    शुक्रवार से शुरू हुआ यह तीन दिवसीय बैंक बंदी का दौर रविवार तक जारी रहेगा। लगातार तीन दिन बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज प्रभावित होने से बैंक ग्राहकों को अपने जरूरी कामों की योजना उसी के अनुसार बनानी होगी। कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन से उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला लेने की मांग की है।