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  • जबलपुर में देर रात घर पर बमबाजी से दहशत, होटल विवाद के बाद बदला लेने पहुंचे युवक; CCTV में कैद हुई वारदात

    जबलपुर में देर रात घर पर बमबाजी से दहशत, होटल विवाद के बाद बदला लेने पहुंचे युवक; CCTV में कैद हुई वारदात


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में गुरुवार देर रात हुई बमबाजी की एक घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। रांझी थाना क्षेत्र के रिछाई स्थित अंजलि कॉलोनी में कुछ युवकों ने एक घर को निशाना बनाकर कथित रूप से बम फेंके। हालांकि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन तेज धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना की पृष्ठभूमि एक होटल में हुए विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार, गुरुवार शाम सिविल लाइन क्षेत्र स्थित एक होटल में कुछ युवक ठहरे हुए थे। आरोप है कि वे नशे की हालत में हंगामा कर रहे थे और अभद्र व्यवहार कर रहे थे। होटल कर्मचारी मट्टू समद ने जब उन्हें शांत रहने के लिए कहा, तो उसके साथ मारपीट की गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि होटल कर्मचारियों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित करते हुए संबंधित युवकों को होटल से बाहर निकाला।

    होटल प्रबंधन के अनुसार, विवाद के दौरान कर्मचारी को कथित रूप से धमकियां भी दी गईं। इसके बाद मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस इस विवाद के पहलुओं की भी जांच कर रही है।

    बताया जा रहा है कि रात करीब साढ़े 11 बजे कर्मचारी मट्टू समद अपने घर पहुंचा था। कुछ समय बाद सफेद रंग की एक स्कूटी पर सवार चार युवक अंजलि कॉलोनी पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने घर के बाहर एक के बाद एक कई बम फेंके। हालांकि बम कर्मचारी के घर पर नहीं लगे और पास में रहने वाले अधिवक्ता संतोष भारती के मकान परिसर में जाकर गिरे। धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सड़क पर धुआं फैल गया।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध युवक कैमरों में दिखाई दिए। पुलिस का कहना है कि फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है।

    रांझी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, घटना में शामिल बताए जा रहे युवकों की तलाश के लिए टीमों का गठन किया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है।

  • बिजली खंभे की स्टे तार में उतरे करंट से 6 वर्षीय मासूम की मौत, गांव में आक्रोश

    बिजली खंभे की स्टे तार में उतरे करंट से 6 वर्षीय मासूम की मौत, गांव में आक्रोश


    मध्यप्रदेश। जबलपुर जिले के ग्राम कुड़रिया में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। घर के पास लगे बिजली खंभे की स्टे तार में कथित रूप से करंट आने से छह वर्षीय बालक की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली व्यवस्था में लंबे समय से खामियां थीं, जिनकी शिकायतें संबंधित विभाग तक पहुंचाई गई थीं, लेकिन समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।

    जानकारी के अनुसार ग्राम कुड़रिया निवासी संदीप काछी का छह वर्षीय पुत्र श्लोक काछी मंगलवार को घर के बाहर गया था। इसी दौरान वह बिजली खंभे के पास पहुंचा, जहां खंभे को सहारा देने वाली स्टे तार में कथित रूप से करंट प्रवाहित हो रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तार के संपर्क में आते ही बच्चा गंभीर रूप से झुलस गया।

    काफी समय तक बच्चे के घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई और उसकी तलाश शुरू की गई। इसी बीच ग्रामीणों ने बच्चे को बिजली खंभे के पास अचेत अवस्था में पड़ा देखा। सूचना मिलते ही परिजन और गांव के लोग मौके पर पहुंचे तथा तत्काल उसे अस्पताल ले जाया गया। हालांकि चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीणों ने घटना के लिए बिजली विभाग की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि संबंधित खंभे और विद्युत लाइन में पहले भी तकनीकी समस्या की शिकायत की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार कई बार विभागीय कर्मचारियों और लाइनमैन को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में कई स्थानों पर बिजली के तार और उपकरण जर्जर स्थिति में हैं। बरसात और तेज हवाओं के बाद यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा संबंधी समस्याओं की अनदेखी के कारण यह दुखद हादसा हुआ। घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी है और वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि विद्युत व्यवस्था में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी या लापरवाही थी या नहीं।

    हादसे के बाद ग्रामीण क्षेत्र में बिजली सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गांव में विद्युत लाइनों और खंभों का व्यापक निरीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल पूरे गांव की संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं और सभी की नजर जांच रिपोर्ट तथा आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • नमकीन-ड्राई फ्रूट पैकेटों में छिपाकर हो रही थी डोडा चूरा तस्करी, जबलपुर पुलिस ने किया बड़े नेटवर्क का खुलासा

    नमकीन-ड्राई फ्रूट पैकेटों में छिपाकर हो रही थी डोडा चूरा तस्करी, जबलपुर पुलिस ने किया बड़े नेटवर्क का खुलासा


    मध्यप्रदेश। जबलपुर में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में डोडा चूरा तस्करी के एक कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार आरोपी मादक पदार्थ की तस्करी के लिए बेहद अनोखा तरीका अपनाते थे। वे नमकीन और ड्राई फ्रूट के पैकेटों में डोडा चूरा भरकर उसकी सप्लाई करते थे ताकि सामान्य जांच के दौरान किसी को संदेह न हो। इस मामले में एक महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उन्हें सूचना मिली थी कि मालवा क्षेत्र से डोडा चूरा लाकर महाकौशल क्षेत्र के विभिन्न जिलों में सप्लाई किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। इसी दौरान 8 जून को कटंगी थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव में वाहन चेकिंग के दौरान एक ट्रक को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस का दावा है कि ट्रक चालक स्टॉपर तोड़कर भाग निकला, जिसके बाद टीम ने उसका पीछा किया और करीब पांच किलोमीटर दूर वाहन को रोक लिया।

    पुलिस के अनुसार ट्रक चालक ने प्रारंभिक पूछताछ में वाहन में रासायनिक खाद भरी होने की जानकारी दी थी। हालांकि तलाशी के दौरान ट्रक के केबिन में रखी कुछ बोरियों ने पुलिस का ध्यान आकर्षित किया। जब इन बोरियों की जांच की गई तो उनमें नमकीन और ड्राई फ्रूट के पैकेट मिले। पैकेटों को खोलने पर कथित तौर पर उनके भीतर डोडा चूरा बरामद हुआ।

    पुलिस ने ट्रक से कुल 73 पैकेट जब्त किए, जिनमें लगभग 18 किलो 130 ग्राम डोडा चूरा मिला। बरामद सामग्री के संबंध में पूछताछ के दौरान ट्रक चालक और उसके सहयोगी ने कुछ अन्य लोगों के नाम बताए। इसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर शहर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की।

    जांच के क्रम में पुलिस एक संदिग्ध के घर पहुंची। घर की तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, लेकिन बाहर खड़ी कार की जांच के दौरान उसी तरह के पैकेट बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि कार से 6 किलो 628 ग्राम डोडा चूरा, 50 हजार रुपए नकद और एक तौल मशीन जब्त की गई। अधिकारियों का मानना है कि तौल मशीन का उपयोग कथित तौर पर मादक पदार्थ की पैकिंग और बिक्री में किया जाता था।

    इसके बाद पुलिस ने एक महिला आरोपी के घर भी दबिश दी, जहां से कथित रूप से डोडा चूरा बरामद हुआ। पूछताछ में महिला ने पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिनके आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं एक अन्य संदिग्ध, जिसे पुलिस इस नेटवर्क का प्रमुख सदस्य मान रही है, अभी फरार बताया जा रहा है। उसकी तलाश के लिए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था तथा इसकी पहुंच किन-किन क्षेत्रों तक थी। साथ ही अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस का दावा है कि महाकौशल क्षेत्र में डोडा चूरा तस्करी के खिलाफ यह अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक है। हालांकि मामले से जुड़े सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज

    नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज


    मध्यप्रदेश। जबलपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सदर शाखा से जुड़ा एक बड़ा बैंकिंग फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर्स सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर उसे असली बताने की रिपोर्ट तैयार की गई और उसके आधार पर करीब 43 लाख रुपए का गोल्ड लोन स्वीकृत करा लिया गया। मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और गोल्ड लोन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस के अनुसार यह कथित फर्जीवाड़ा दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच किया गया। शिकायत में कहा गया है कि बैंक द्वारा अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर ने कुछ ग्राहकों के साथ मिलकर नकली आभूषणों को असली सोना प्रमाणित किया। बैंक ने वैल्यूअर की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिया और संबंधित आभूषण बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख दिए गए।

    जानकारी के मुताबिक बैंक ने न्यू रामनगर स्थित एक ज्वेलरी कारोबारी को गोल्ड वैल्यूअर के रूप में अधिकृत किया था। आरोप है कि उन्होंने बैंक में आए कई ग्राहकों के नकली सोने को अपनी जांच रिपोर्ट में असली बताया, जिसके आधार पर लोन स्वीकृत हुए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक अन्य अधिकृत वैल्यूअर ने भी एक मामले में कथित रूप से नकली आभूषणों को असली प्रमाणित किया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब गोल्ड लोन लेने वाले कई खाताधारकों ने निर्धारित अवधि के बाद भी अपनी किस्तें जमा नहीं कीं। बैंक की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद लॉकर में रखे गए गिरवी आभूषणों की दोबारा जांच कराई गई। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि जिन आभूषणों के आधार पर लोन स्वीकृत किए गए थे, उनमें से कई नकली थे।

    इसके बाद बैंक प्रबंधन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू की और फरवरी 2026 में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

    कैंट थाना पुलिस के मुताबिक शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा बैंक को हुए नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं।

    बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन प्रक्रिया में वैल्यूअर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला माना जाएगा। हालांकि मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। बैंक प्रबंधन भी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहा है। पूरे घटनाक्रम पर अब जांच एजेंसियों और बैंक अधिकारियों की नजर बनी हुई है।

  • लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर

    लालच का वायरस, बना कारण जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग में 59 लाख की गड़बड़ी उजागर


    जबलपुर । जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर चर्चा में है, जहां करीब 59 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

    यह मामला संजीवनी क्लीनिकों के कायाकल्प और NQAS सर्टिफिकेशन की तैयारियों के लिए जारी की गई राशि से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 58 संजीवनी क्लीनिकों को एक-एक लाख रुपये की राशि दी गई थी, ताकि रंगाई-पुताई और आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें, लेकिन आरोप है कि यह काम प्रस्तावित तरीके से पूरा नहीं हुआ।

    मामले के सामने आने के बाद यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्धारित कार्यों के बिना ही पूरी राशि का उपयोग कर लिया गया। इसके चलते संजीवनी अस्पतालों और क्लीनिकों के सुधार कार्य अधूरे रह गए, जबकि सरकारी फंड खर्च हो चुका था।

    इस वित्तीय अनियमितता के उजागर होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और लेखा प्रबंधक रेखा साहू शामिल हैं।

    अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगर तय मानकों के अनुसार NQAS सर्टिफिकेशन प्राप्त नहीं हुआ, तो संबंधित राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

  • जबलपुर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 96 मामलों में 6 करोड़ का जुर्माना, प्रशासन का सख्त रुख

    जबलपुर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 96 मामलों में 6 करोड़ का जुर्माना, प्रशासन का सख्त रुख


    मध्यप्रदेश
    के जबलपुर जिले में अवैध उत्खनन और खनिजों के अनधिकृत परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त और व्यापक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है, जिसमें जिला प्रशासन ने 96 मामलों में सुनवाई के बाद कुल 6 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई कलेक्टर न्यायालय के माध्यम से की गई, जहां खनिज विभाग द्वारा दर्ज किए गए प्रकरणों की विस्तृत जांच और सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया गया। प्रशासन के इस कदम को जिले में अवैध खनन गतिविधियों पर लगाम कसने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे खनिज संसाधनों के अनियंत्रित दोहन पर सख्त संदेश गया है। जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला वर्ष 2022 से लंबित था, जब खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और परिवहन से जुड़े कई मामलों को दर्ज कराया था, जिन पर समय-समय पर कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। लंबी प्रक्रिया के बाद अब इन मामलों में एक साथ बड़ा फैसला सुनाया गया है, जिससे प्रशासनिक सख्ती और कानूनी कार्रवाई की गंभीरता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    इस फैसले के तहत सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि एक अकेले प्रकरण में ही 40 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया, जो इस कार्रवाई की गंभीरता और पैमाने को दर्शाता है। अभिलाष तिवारी सहित अन्य संबंधित मामलों में यह कठोर निर्णय लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अवैध खनन और परिवहन में शामिल किसी भी व्यक्ति या समूह को अब राहत नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने यह कार्रवाई ऐसे समय में की है जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ क्षेत्रों में खनिज संसाधनों का अवैध रूप से दोहन किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

    जिला प्रशासन के इस निर्णय को खनिज माफियाओं के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय बताए जाते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सख्त आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कम होगी। इसके साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस निर्णय के बाद खनिज परिवहन और उत्खनन से जुड़े नियमों का पालन अधिक सख्ती से किया जाएगा।

    इस पूरी कार्रवाई को प्रशासन की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अवैध गतिविधियों पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। लंबे समय से लंबित मामलों पर एक साथ निर्णय आने से यह भी स्पष्ट हुआ है कि अब प्रशासन इस तरह के मामलों में देरी के बजाय कठोर और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कुल मिलाकर यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जिले में खनिज संसाधनों के संरक्षण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी माना जा रहा है।

  • न्यायिक सख्ती: बरगी डैम क्रूज त्रासदी में जिम्मेदारों पर कार्रवाई के आदेश…

    न्यायिक सख्ती: बरगी डैम क्रूज त्रासदी में जिम्मेदारों पर कार्रवाई के आदेश…

    जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 अप्रैल को हुए इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक और आक्रोश में डाल दिया था। घटना के कई दिन बाद अब इस मामले में न्यायिक स्तर पर सख्त कदम उठाए गए हैं।

    मामले में अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि क्रूज के संचालन में शामिल पायलट और स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। अदालत का मानना है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का परिणाम हो सकती है, जिसकी जांच जरूरी है।

    अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि क्रूज संचालन के दौरान जिम्मेदार लोगों को स्थिति की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई। हादसे के समय जो स्थिति बनी, उसमें कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

    सबसे गंभीर पहलू यह माना गया कि दुर्घटना के दौरान कुछ जिम्मेदार लोग यात्रियों की मदद करने के बजाय स्वयं सुरक्षित स्थान पर चले गए। इस व्यवहार को गंभीर कर्तव्य लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई न होने से भविष्य में भी इसी तरह की लापरवाही की आशंका बनी रहती है।

    न्यायालय ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि दो दिनों के भीतर इस मामले में एफआईआर दर्ज कर इसकी जानकारी अदालत को दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच को केवल औपचारिकता न बनाकर गंभीरता से आगे बढ़ाया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    इस बीच हादसे के बाद की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घटना के तुरंत बाद क्रूज को अलग-अलग हिस्सों में काट दिया गया था, जिससे जांच के लिए जरूरी सबूतों के प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई। बाद में इन हिस्सों को सुरक्षित कर लिया गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    यह हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बन चुका है। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि अगर समय पर सही कदम उठाए जाते तो इतनी बड़ी जानमाल की हानि को रोका जा सकता था।

    फिलहाल पूरा मामला न्यायिक निगरानी में है और आने वाले दिनों में इस पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। बरगी डैम क्रूज हादसा अब एक ऐसी घटना बन गया है जो लापरवाही, जवाबदेही और सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।

  • MP: जबलपुर के बरगी डैम में डूबा पर्यटकों से भरा क्रूज…. 6 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

    MP: जबलपुर के बरगी डैम में डूबा पर्यटकों से भरा क्रूज…. 6 शव बरामद, रेस्क्यू जारी


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) के प्रमुख पर्यटन स्थल बरगी डैम (Bargi Dam) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां नर्मदा नदी (Narmada River) के बैकवाटर में पर्यटकों से भरा एक क्रूज अचानक डूब गया. हादसे के वक्त क्रूज पर करीब 30 लोग सवार बताए जा रहे हैं।

    जब क्रूज नर्मदा के गहरे बैकवाटर में था, तभी अचानक मौसम बदला और तेज हवाएं चलने लगीं. पानी की ऊंची लहरों और तेज हवा के दबाव के कारण क्रूज अपना संतुलन खो बैठा और देखते ही देखते पानी में समा गया।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय नाविकों और प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू किया. अब तक करीब 15 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया है। राहत और बचाव दल ने 6 शव बरामद किए हैं. अभी भी कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए गोताखोर और SDRF की टीमें जुटी हुई हैं।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अचानक आए तूफान की वजह से क्रूज चालक को संभलने का मौका नहीं मिला. फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढने की है।

    CM मोहन यादव की हादसे पर नजर

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस हादसे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. सूबे के मुखिया ने लिखा, ”आज जबलपुर में तेज आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में हुए दुखद क्रूज हादसे को लेकर स्थानीय प्रशासन एवं रेस्क्यू फोर्स का ऑपरेशन लगातार जारी है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह , पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी , संभाग प्रभारी एसीएस, एडीजी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। त्वरित बचाव कार्य से 15 नागरिकों को सकुशल बचा लिया गया है. जो लापता हैं, उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है।


    4-4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस हादसे में जो जनहानि हुई है, वह अत्यंत पीड़ादायक है. शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. मृतकों के परिवारजनों को राज्य शासन की ओर से 4-4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।


    29 यात्रियों के टिकट किए गए थे जारी

    सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि बरगी बांध में क्रूज में कुल 29 यात्रियों के टिकट जारी किए गए थे. इनमें से 15 व्यक्तियों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 6 व्यक्तियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है. शेष व्यक्तियों की तलाश एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है घटनास्थल पर जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ SDRF समेत अन्य बचाव दल मौजूद हैं और राहत व बचाव कार्य सतत रूप से संचालित किए जा रहे हैं।


    प्रशासन की लापरवाही उजागर

    बरगी डैम हादसे में प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है. दरअसल, मौसम विभाग ने जबलपुर में तेज हवाओं के चलने का येलो अलर्ट जारी किया था. 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के चलने का अलर्ट था. इसके बावजूद नर्मदा नदी में क्रूज चलाने दिया गया. क्रूज जब नर्मदा नदी में था तब भी तेज हवायें चल रही थीं, इसके बावजूद क्रूज का संचालन जारी रहा. यही हादसे का कारण बना।


    लापता लोगों की तलाश जारी: मंत्री

    घटनास्थल पर पहुंचे BJP सरकार के मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि कलेक्टर समेत स्थानीय प्रशासन से चर्चा कर राहत और बचाव कार्य संबंधी आवश्यक निर्देश दिए हैं. एसडीआरएफ की टीम भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मौके पर पहुंच चुकी है. इस मुश्किल घड़ी में हम सभी प्रभावित परिजनों के साथ हैं।


    कांग्रेस ने BJP सरकार को घेरा

    इस घटना के बाद मध्य प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, ”जबलपुर के बर्गी डैम में क्रूज पलटने से 4 लोगों की मौत की खबर बेहद दुखद और हृदयविदारक है. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. मैं ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं, शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।


    23 को बचाया, लापता का कोई सटीक आंकड़ा नहीं: IG

    बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे पर जानकारी देते हुए जबलपुर संभाग के आईजी प्रमोद वर्मा ने बताया कि अब तक कुल 23 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 4 शव बरामद हुए हैं. लापता लोगों का अभी कोई सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि 10 से 12 लोग अभी भी लापता हो सकते हैं।

    हैदराबाद से एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच रही है, जिसके पास रात के अंधेरे में भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. भोपाल से भी एक टीम रात 10:30 बजे तक मौके पर पहुंच जाएगी. इसके अतिरिक्त, सेना की एक टुकड़ी भी बुलाई गई है ताकि बचाव कार्य रात भर जारी रखा जा सके।

    आईजी ने बताया कि रेस्क्यू टीम ने क्रूज के मलबे को काटकर एक व्यक्ति को जिंदा बाहर निकाला है. वर्तमान में SDRF और होमगार्ड की टीमें मौके पर तैनात हैं, वहीं NDRF की टीम भी जल्द पहुंचने वाली है. बचाए गए 22 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं।

  • पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी

    पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी


    जबलपुर। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने कहा कि संघ की स्थापना एक निश्चित उद्देश्य के साथ हुई थी और शताब्दी मनाना उसका मूल लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का प्राचीन दर्शन और संस्कृति विश्व के लिए कल्याणकारी है, जिसे पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का कार्य तब तक चलता रहेगा, जब तक समाज और संघ में पूर्ण एकरूपता नहीं आ जाती।

    यह बातें सुरेश सोनी ने गत दिवस शनिवार को राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जबलपुर महानगर के तत्वावधान में श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में साहित्यकार एवं इतिहासकार श्रेणी की प्रमुख जन गोष्ठी तथा ‘संघिका’ पुस्तक के प्रथम भाग का लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कही। कार्यक्रम में शरदचंद पालन मुख्य अतिथि एवं विभाग संघ चालक कैलाश गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की पूजा-अर्चना एवं ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ। अतिथियों का परिचय डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी ने दिया। इस अवसर पर डॉ. आनंद सिंह राणा द्वारा लिखित महाकौशल प्रांत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘संघिका’ के प्रथम भाग का विमोचन किया गया। पुस्तक का परिचय एवं समीक्षा दीपक द्विवेदी ने प्रस्तुत की, जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना अल्केश चतुर्वेदी ने रखी।


    सुरेश सोनी ने बताया कि शताब्दी वर्ष के निमित्त देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जिसके तहत 10 करोड़ से अधिक परिवारों से संपर्क और संवाद स्थापित किया गया तथा 60 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हुआ। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति निर्माण, समाज को एकसूत्र में बांधना और राष्ट्र के प्रति जागरूकता पैदा करना आवश्यक है। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने इन विचारों को व्यवहारिक रूप दिया।

    उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं क्रांतिकारी, अहिंसक और सैन्य का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ के संस्थापक ने इन सभी आयामों को समझकर समाज निर्माण का कार्य किया। सुरेश सोनी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज का मूल दोष आत्मकेंद्रित होना है, जबकि भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत पर आधारित है। संघ का स्वयंसेवक भाषा, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि मानता है और निस्वार्थ सेवा उसका आधार है।

    उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ को समाज परिवर्तन का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि इसमें कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी जीवन शैली, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य बोध शामिल हैं। उन्होंने परिवार व्यवस्था को भारतीय समाज की मूल इकाई बताते हुए इसे सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक ऐसा विचार है जो वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकता है। भारतीय परंपरा में समस्त सृष्टि को एक मानने की भावना निहित है, जो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

    मुख्य अतिथि शरदचंद पालन ने अपने संबोधन में शताब्दी वर्ष के संदर्भ में राष्ट्र निर्माण में साहित्यकारों और इतिहासकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम में नूपुर देशकर ने एकल गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा-समाधान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सुरेश सोनी ने साहित्यकारों एवं इतिहासकारों के प्रश्नों के उत्तर दिए। इस गोष्ठी में लगभग 250 साहित्यकार एवं इतिहासकार शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आनंद सिंह राणा ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

  • आयुर्वेदिक दवाओं के बहाने तांत्रिक बनकर लाखों की ठगी पुलिस जांच में जुटी

    आयुर्वेदिक दवाओं के बहाने तांत्रिक बनकर लाखों की ठगी पुलिस जांच में जुटी


    जबलपुर । जबलपुर जिले में ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां शातिर ठगों ने खुद को तांत्रिक बताकर एक युवक से बड़ी रकम ऐंठ ली। यह पूरा मामला पारिवारिक समस्याओं के समाधान के नाम पर की गई धोखाधड़ी से जुड़ा है। पीड़ित चंद्रकांत सोनी सिवनी घंसौर क्षेत्र के निवासी हैं जिनके साथ यह वारदात हुई।

    जानकारी के अनुसार दो जालसाजों ने खुद को तांत्रिक बताकर युवक को यह विश्वास दिलाया कि उसकी पारिवारिक समस्याओं का समाधान विशेष आयुर्वेदिक दवाओं और अनुष्ठानों से संभव है। इसी झांसे में लेकर उन्होंने अलग अलग जगहों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया। ठगों ने योजना बनाकर दवा दुकानों से सीधे बड़ी मात्रा में आयुर्वेदिक उत्पाद मंगवाए और भुगतान पीड़ित से कराया।

    दमोह नाका स्थित एक आयुर्वेदिक दवा दुकान से लगभग 5 लाख 25 हजार रुपये की दवाएं खरीदी गईं। इसके बाद नागपुर स्थित एक अन्य दवा दुकान से लगभग साढ़े 12 लाख रुपये की दवाएं मंगवाई गईं। इस तरह कुल रकम साढ़े 17 लाख रुपये तक पहुंच गई।

    ठगों ने यहां तक दावा किया कि यदि इन दवाओं का उपयोग और अनुष्ठान विधिवत किया जाए तो पारिवारिक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। इसी विश्वास के आधार पर पीड़ित लगातार उनके जाल में फंसता गया।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब प्रयागराज से भी दवाएं मंगवाने की बात कही गई। इसी दौरान पीड़ित को संदेह हुआ और उसे महसूस हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। शक गहराने पर उसने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।

    कोतवाली थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक सुनियोजित ठगी का मामला है जिसमें तांत्रिक बनकर लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया।

    पुलिस अब दवा दुकानों से जुड़े लेनदेन और आरोपियों के बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग इस तरह के फर्जी तांत्रिकों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं।