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  • सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 दिनों से जारी इस आंदोलन के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में फिल्म अभिनेता अभय देओल ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान भी उनकी मांगों और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता चुकी हैं। लगातार मिल रहे सार्वजनिक समर्थन के कारण यह आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

    अभय देओल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने किसी विस्तृत टिप्पणी के बजाय टूटे हुए दिल का प्रतीक साझा कर उनकी बिगड़ती सेहत पर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके साथ उन्होंने फिल्म 3 Idiots के चर्चित गीत का भी उल्लेख किया, जिसे कई लोगों ने सोनम वांगचुक से जुड़ी प्रेरणा की ओर संकेत के रूप में देखा। अभय देओल की यह प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई।

    इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान ने भी एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सरकार से वांगचुक की मांगों पर संवाद शुरू करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान तलाशना अधिक उचित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय कार्य करते रहे हैं और उनके योगदान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जंतर-मंतर पर जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है और वजन में भी उल्लेखनीय कमी आई है। समर्थकों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया जा रहा है। बढ़ती चिंता के बीच उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने तथा संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी इन मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

    आंदोलन से जुड़े संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। इस प्रस्तावित मार्च को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सोनम वांगचुक की सेहत, उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन की दिशा पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, सार्वजनिक हस्तियों और आम नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा लगातार राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी संभावित संवाद की संभावना पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार नौ दिनों से अनशन पर हैं, जबकि उनके समर्थन में कुछ छात्र भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने छात्रों से अनशन समाप्त कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।

    अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जिसमें वह छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। ऐसे में सभी लोगों का लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्र लगातार अनशन करते रहेंगे तो आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    दीपके ने अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलनों और अनशन का अनुभव है, इसलिए वह इस जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। वहीं छात्रों और अन्य समर्थकों को अपनी ऊर्जा आंदोलन के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल अनशन पर नहीं, बल्कि लगातार सक्रिय जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर भी निर्भर करती है।

    प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों से संयमित जीवनशैली अपनाने और प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समर्थक बारी-बारी से एक दिन का उपवास करें तो आंदोलन के प्रति एकजुटता का संदेश भी जाएगा और प्रदर्शन स्थल पर भोजन की व्यवस्था का दबाव भी कम होगा। उन्होंने भोजन में संतुलन और अनुशासन को अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।

    जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि लगातार यह भी प्रयास कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और इसमें शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    इसी उद्देश्य से अभिजीत दीपके ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय आंदोलन को अन्य माध्यमों से मजबूत करें। उनका मानना है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके सक्रिय और स्वस्थ कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के संघर्ष के लिए संयम, संगठन और सतत भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा

    लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे उनका लंबा चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन अब केवल लद्दाख के अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों तक फैल चुका है।

    इस बार वांगचुक की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की बात शामिल है। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं। इसके साथ ही वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग पर जोर दे रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    वांगचुक का आंदोलन पहली बार 2024 में लद्दाख के राज्य दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के साथ शुरू हुआ था। उस समय उन्होंने अत्यधिक ठंड में उपवास कर सरकार का ध्यान क्षेत्रीय अधिकारों और पर्यावरणीय मुद्दों की ओर आकर्षित किया था। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली तक पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    सितंबर 2024 में उनकी ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ ने आंदोलन को व्यापक पहचान दिलाई, जब उन्हें दिल्ली बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद दिल्ली में 16 दिनों के अनशन के बाद सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने पर उन्होंने उपवास समाप्त किया था। हालांकि, लद्दाख मुद्दों पर स्थायी समाधान न मिलने के कारण आंदोलन लगातार जारी रहा।

    2025 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं और वांगचुक की संस्था पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। कई महीनों की हिरासत के बाद 2026 की शुरुआत में उनकी रिहाई हुई।

    रिहाई के बाद वांगचुक ने अपने आंदोलन को नए मुद्दों से जोड़ते हुए इसे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ जुड़कर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया।

    वर्तमान चरण में उनका आंदोलन लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ देश की शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों को भी केंद्र में ला रहा है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

    इस आंदोलन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या क्षेत्रीय अधिकारों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को एक साझा मंच पर लाकर प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर लिया है। संगठन ने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर विस्तारित किया जाएगा।

    CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के बाद जारी बयान में कहा कि यह आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा और आगे इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में कई ऐसे लोग भी शामिल हुए जिन्होंने पहली बार किसी आंदोलन में हिस्सा लिया। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर समाज में गहरी चिंता मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे की रणनीति पर लगातार काम किया जाएगा।

    संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। CJP का कहना है कि यदि अगले सात दिनों में मंत्री के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    अभिजीत दीपके ने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को संबोधित करेंगे और आगे की रणनीति साझा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन को डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    CJP प्रवक्ता आशीष रांका ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह अंतिम अवसर है। उन्होंने कहा कि या तो सरकार स्वयं कार्रवाई करे या प्रधानमंत्री स्तर पर निर्णय लिया जाए। उनके अनुसार, यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

    जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कई घंटों तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चला, जिसके बाद कार्यक्रम समाप्त किया गया। हालांकि आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है।

    इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि कुछ लोग विदेश में बैठकर देश की युवा नीति और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

    यह पूरा मामला अब शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में CJP के अल्टीमेटम और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।