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  • जापान का अनोखा द्वीप, जहां हर शख्स गले में रखता है गैस मास्क और सायरन बजते ही थम जाती है जिंदगी

    जापान का अनोखा द्वीप, जहां हर शख्स गले में रखता है गैस मास्क और सायरन बजते ही थम जाती है जिंदगी


    नई दिल्ली ।
    प्रशांत महासागर में स्थित जापान का मियाके-जिमा द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली जहरीली गैस के खतरे के लिए भी जाना जाता है। यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षा के विशेष उपाय अपनाने पड़ते हैं। गैस मास्क रखना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। बाजार में खरीदारी करने वाले लोग हों, सड़क पर घूमते बच्चे हों या समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरे, सभी को संभावित खतरे के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। हवा में जहरीली गैस का स्तर बढ़ने पर चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को सावधान किया जाता है।

    जापान की राजधानी टोक्यो से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित मियाके-जिमा, टोक्यो महानगर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। दूर से यह द्वीप हरी-भरी पहाड़ियों और नीले समुद्र से घिरा खूबसूरत स्थान दिखाई देता है। हालांकि, इसके बीचों-बीच स्थित माउंट ओयामा नामक सक्रिय ज्वालामुखी यहां के निवासियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस ज्वालामुखी से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो अधिक मात्रा में सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।

    मियाके-जिमा का इतिहास ज्वालामुखी विस्फोटों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2000 में माउंट ओयामा में कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिसके बाद वातावरण में बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड फैल गई। स्थिति गंभीर होने पर सितंबर 2000 में जापानी सरकार ने पूरे द्वीप को खाली कराने का आदेश दिया। वहां रहने वाले लगभग 3,600 लोगों को जहाजों और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए टोक्यो के मुख्य भूभाग पर पहुंचाया गया। इसके बाद कई वर्षों तक द्वीप पर सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा और वैज्ञानिकों तथा अनुसंधान दलों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ वहां जाने की अनुमति दी गई।

    समय के साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली गैस के स्तर और परिस्थितियों की समीक्षा की गई। इसके बाद लोगों को धीरे-धीरे द्वीप पर लौटने की अनुमति मिली। हालांकि, वापसी के साथ सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना जरूरी बना रहा। गैस मास्क रखना और चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना यहां के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

    द्वीप पर हवा में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा पर नजर रखने के लिए गैस निगरानी स्टेशन लगाए गए हैं। इनकी मदद से गैस के स्तर में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है। चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को संभावित खतरे की सूचना दी जाती है, ताकि वे समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठा सकें। गैस का स्तर खतरनाक होने पर लोगों को मास्क पहनने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की सलाह दी जाती है।

    आज मियाके-जिमा में लगभग 2,200 लोग रहते हैं। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को गैस के खतरे और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक रहना पड़ता है। घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक इमारतों में हवा को साफ रखने के लिए विशेष फिल्टरिंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोग सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते हैं।

    इस द्वीप की परिस्थितियां पर्यटकों, भूवैज्ञानिकों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का विषय हैं। यहां आने वाले लोगों को स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है। ज्वालामुखी से प्रभावित भूभाग और प्राकृतिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं।

    मियाके-जिमा की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम वाले क्षेत्रों में जीवन चलाने के लिए सतर्कता, तकनीक और तैयारी कितनी महत्वपूर्ण हैं। यहां गैस मास्क केवल सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि उस खतरे की लगातार याद दिलाने वाला साधन है, जिसके बीच स्थानीय लोग अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।

  • जापान के बोनिन द्वीप समूह में सुबह-सुबह आया 6.5 तीव्रता का भूकंप

    जापान के बोनिन द्वीप समूह में सुबह-सुबह आया 6.5 तीव्रता का भूकंप


    टोक्यो।
    जापान (Japan) के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र (Bonin Islands region) में 6.5 तीव्रता (Magnitude 6.3) का भूकंप (Earthquake) आया है. धरती के अंदर 7 प्लेट ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट जिन जगहों पर अधिक टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं।

    जापान के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र में रविवार सुबह 6.5 तीव्रता के भूकंप के तेज झटके दर्ज किए गए। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, इस भूकंप के बाद जान-माल के नुकसान या सुनामी की किसी चेतावनी से जुड़ी विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी है।

    संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि टोक्यो से लगभग 1000 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व में बोनिन द्वीप समूह, जिसे ओगासावारा द्वीप समूह भी कहा जाता है, में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया।

    भूकंप का केंद्र समुद्र में 494 किलोमीटर की गहराई में था। प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई थी, और कोई भी भौतिक क्षति या हताहत होने की सूचना नहीं थी। भूकंप फिलीपीन और प्रशांत टेक्टोनिक प्लेटों के बीच भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में आया।

    बता दें, बार-बार टकराने से प्लेट के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है कि तो प्लेट टूटने लगती हैं. इनके टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है. 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप को आमतौर पर खतरनाक माना जाता है, वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो भूकंप कहा जाता हैं, जिन्हें कई लोग महसूस भी नहीं कर पाते हैं।

    इस बीच, शनिवार को वानुआतू द्वीप में भी भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए थे. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप 24 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है।

  • कौन हैं पैरा तैराक शम्स आलम? जापान में यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार, आजीवन प्रतिबंध का खतरा

    कौन हैं पैरा तैराक शम्स आलम? जापान में यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार, आजीवन प्रतिबंध का खतरा


    नई दिल्ली। भारतीय पैरा तैराक मोहम्मद शम्स आलम शेख पर जापान में एक महिला होटल कर्मचारी के साथ कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद जापानी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें भारत वापस भेज दिया गया। 40 वर्षीय शम्स आलम को अब भारतीय पैरालंपिक समिति (PCI) की अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। उनके खिलाफ आजीवन प्रतिबंध लगाने पर जांच के बाद फैसला लिया जाएगा।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नागोया में भारतीय दल के साथ मौजूद PCI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने घटना की पुष्टि की। अधिकारी ने कथित व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी खिलाड़ी के ऐसे आचरण को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    शम्स आलम पर आजीवन प्रतिबंध की मांग
    रिपोर्ट के मुताबिक, PCI के अधिकारी ने कहा कि शम्स आलम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने भारतीय दल की छवि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का हवाला देते हुए आजीवन प्रतिबंध की मांग की। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला जांच के बाद ही लिया जाएगा।

    होटल में हाउसकीपिंग के दौरान हुई घटना
    बताया जा रहा है कि यह घटना सोमवार को नागोया के फोर पॉइंट्स बाय शेरेटन होटल में हुई, जहां भारतीय पैरा तैराकी टीम ठहरी हुई थी। आरोप है कि घटना के समय एक महिला कर्मचारी शम्स आलम के कमरे में हाउसकीपिंग का काम कर रही थी।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस उन्हें स्थानीय थाने ले गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने मामले को अदालत तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रयास किए। इसके बाद लिखित माफी और शम्स आलम को तत्काल जापान छोड़ने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है। घटना के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने होटल प्रबंधन और संबंधित महिला कर्मचारी से माफी भी मांगी।

    कौन हैं शम्स आलम शेख?
    मोहम्मद शम्स आलम शेख भारत के पैरा तैराक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पैरा स्विमिंग में उनकी पहचान एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में रही है।
    – विश्व रैंकिंग: वर्ल्ड पैरा स्विमिंग रिकॉर्ड के अनुसार, शम्स आलम पुरुषों की 100 मीटर बटरफ्लाई (S5) और 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक (SB4) स्पर्धाओं में दुनिया के नंबर-1 तैराक रह चुके हैं।
    – एशियाई पैरा गेम्स: उन्होंने 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
    – अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल रेकजाविक इंटरनेशनल गेम्स में 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में स्वर्ण पदक जीता था। इस प्रदर्शन के दौरान भारतीय और एशियाई रिकॉर्ड बनाया था।

  • मंगल के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी लाएगा जापान का मिशन, 20 अक्टूबर को एच3 रॉकेट से होगी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत

    मंगल के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी लाएगा जापान का मिशन, 20 अक्टूबर को एच3 रॉकेट से होगी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत

    नई दिल्ली । जापान मंगल ग्रह और उसके चंद्रमाओं से जुड़े रहस्यों को समझने के लिए एक महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (एमएमएक्स) नाम के इस मिशन का मुख्य उद्देश्य मंगल के चंद्रमा फोबोस की सतह से मिट्टी के नमूने एकत्र करना और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है। इसके लिए जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी का एच3 रॉकेट 20 अक्टूबर को तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से उड़ान भरने वाला है। इस मिशन को मंगल के आसपास के क्षेत्र से नमूने लाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। योजना के अनुसार, अंतरिक्ष यान मंगल तक पहुंचने के बाद फोबोस की परिक्रमा करेगा और वहां से नमूने एकत्र करके पृथ्वी की ओर लौटेगा।

    मिशन की योजना के मुताबिक, अंतरिक्ष यान को मंगल तक पहुंचने में लगभग एक वर्ष लगेगा। इसके बाद यह करीब तीन साल तक फोबोस की परिक्रमा करेगा और उसकी सतह का अध्ययन करेगा। अभियान के दौरान कम से कम 10 ग्राम मिट्टी एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। नमूनों को लेकर अंतरिक्ष यान के 2031 में पृथ्वी पर लौटने की योजना है। यदि यह अभियान निर्धारित योजना के अनुसार सफल होता है, तो वैज्ञानिकों को मंगल के चंद्रमाओं की संरचना और उनकी उत्पत्ति के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

    इस अभियान में आईडेफिक्स नाम का एक रोवर भी शामिल है। इसका नाम प्रसिद्ध फ्रांसीसी कॉमिक पात्र एस्टेरिक्स के कुत्ते के नाम पर रखा गया है। रोवर का काम फोबोस की सतह का निरीक्षण करना और लैंडिंग के लिए उपयुक्त स्थान का आकलन करने में मदद करना है। फोबोस पर गुरुत्वाकर्षण बेहद कमजोर है, इसलिए वहां सुरक्षित उतरना और सतह से नमूने एकत्र करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। इसी वजह से अंतरिक्ष यान के उतरने वाले पैरों और सतह पर स्थिर रहने की व्यवस्था विकसित करना इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

    एमएमएक्स का उद्देश्य केवल मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर लाना नहीं है। इस अभियान से वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि मंगल और उसके दोनों चंद्रमा फोबोस तथा डीमोस कैसे बने। अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर लौटने से पहले डीमोस का भी निरीक्षण करेगा, लेकिन वहां उतरने की योजना नहीं है। दोनों चंद्रमाओं की बनावट, संरचना और विशेषताओं का अध्ययन मंगल के आसपास के क्षेत्र के इतिहास को समझने में मदद कर सकता है।

    मंगल के चंद्रमाओं की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों के बीच प्रमुख रूप से दो परिकल्पनाएं चर्चा में हैं। पहली विशाल टकराव परिकल्पना के अनुसार, किसी बड़े खगोलीय पिंड के मंगल से टकराने के बाद निकले पदार्थ से उसके चंद्रमाओं का निर्माण हुआ हो सकता है। दूसरी परिकल्पना के मुताबिक, फोबोस और डीमोस मूल रूप से क्षुद्रग्रह थे, जिन्हें मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने अपनी कक्षा में खींच लिया। फोबोस से प्राप्त मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण इन दोनों संभावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    इस शोध का महत्व सौरमंडल के दूसरे हिस्सों तक भी फैला हुआ है। बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे चट्टानी ग्रहों के निर्माण और विकास को समझने से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर सकते हैं कि ग्रहों पर जीवन के अनुकूल वातावरण किन परिस्थितियों में विकसित हुआ। फोबोस की मिट्टी में मौजूद पदार्थों और खनिजों का अध्ययन इस दिशा में उपयोगी जानकारी दे सकता है।

    यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी उदाहरण है। इसमें फ्रांस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अध्ययन केंद्र, जर्मन एयरोस्पेस सेंटर, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और लगभग 20 विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी कंपनियों का सहयोग शामिल है। इस अभियान से भविष्य में मंगल की खोज और वहां मानव अभियानों की तैयारी के लिए जरूरी तकनीकों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

    जापान इससे पहले चंद्रमा पर उतरने के लिए स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून यानी स्लिम मिशन भेज चुका है। इसे मून स्नाइपर भी कहा जाता है। वर्ष 2024 में चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद यह पलट गया था, लेकिन इसके बावजूद इसने डेटा भेजना जारी रखा और चंद्रमा की कई लंबी रातों के दौरान भी सक्रिय रहा। अब एमएमएक्स मिशन के जरिए जापान मंगल के चंद्रमाओं से नमूने लाने और ग्रहों की उत्पत्ति से जुड़े सवालों के उत्तर खोजने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

  • मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती को पद से नहीं बल्कि विश्वास से बना रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के पद बदलते रहे, लेकिन उनकी मित्रता कायम रही। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन विशेष संयोग है।

    मुख्यमंत्री योगी ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।

    योगी ने दोनों नेताओं की पहली मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी साल आबे ने भारत की संसद में भारत और जापान की मजबूती को एक-दूसरे के हित से जोड़ा था। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के विश्वास में बदलती है तो उसके व्यापक प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत में राष्ट्रीय शोक रखा गया। योगी ने इसे प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते से जुड़ा कदम बताया।

    उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित बताते हुए कहा कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।

    योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखने की बात कही। यामानाशी को उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर बताया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है और इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे तथा एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की शुरुआती भेंट है। उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर विरासत के संरक्षण के साथ विकास का संदेश देते हैं।

    योगी ने कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। अकी आबे ने शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय संबंधों को याद किया और कहा कि 2015 में काशी आने के बाद उनके पति उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। उन्होंने कहा कि आबे जीवित होते तो अपने नाम पर बने स्मारक को देखकर खुश होते। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्षों की भी प्रशंसा की और बताया कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।

  • तेजस में सवार हुए भारत और जापान के एयरफोर्स चीफ, ‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखा बढ़ता रक्षा सहयोग

    तेजस में सवार हुए भारत और जापान के एयरफोर्स चीफ, ‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखा बढ़ता रक्षा सहयोग

    नई दिल्ली । भारत और जापान के बीच चल रहे संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ के दौरान दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों ने भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रविवार को जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां तेजस से जुड़ी उड़ान गतिविधि हुई।

    भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस में अकेले उड़ान भरी। वहीं जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के प्रमुख जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भी जोधपुर से भारतीय लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की यह गतिविधि संयुक्त अभ्यास के दौरान भारत और जापान के बीच हवाई सहयोग को सामने लाती है।

    ‘वीर गार्जियन 2026’ भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है। इसका आयोजन जोधपुर में 9 सितंबर से 22 सितंबर तक किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की वायुसेनाएं युद्ध जैसी परिस्थितियों में विभिन्न हवाई अभियानों और युद्धक गतिविधियों का प्रशिक्षण ले रही हैं।

    अभ्यास के तहत दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े अभियानों का भी अभ्यास किया है। इसका उद्देश्य दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त अभियानों के दौरान समन्वय को मजबूत करना है। प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों के वायु योद्धाओं को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिल रहा है।

    इस संयुक्त अभ्यास में भारतीय वायुसेना की ओर से स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस शामिल है। इसके अलावा सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान भी अभ्यास का हिस्सा हैं। जापान की ओर से एफ-2ए लड़ाकू विमानों ने इसमें भाग लिया है।

    इस बार का अभ्यास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान भारत में आयोजित ‘वीर गार्जियन’ के इस संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास में शामिल हुए हैं। इससे दोनों वायुसेनाओं को अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमानों के साथ संयुक्त अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला है।

    अभ्यास के दौरान अब तक दोनों देशों के वायु योद्धाओं ने अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों को पूरा किया है। संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में काम करने, संचालन प्रक्रियाओं को समझने और बेहतर समन्वय विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    जोधपुर के आसमान में तेजस की उड़ान ने संयुक्त अभ्यास में भारत की स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को भी प्रमुखता से सामने रखा। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की मौजूदगी ने अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। तेजस में उड़ान का अनुभव लेने की गतिविधि भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच बढ़ते व्यावहारिक सहयोग तथा आपसी समझ को मजबूत करने वाले प्रशिक्षण के तौर पर सामने आई है।

  • JPN vs IND: पहली बार भारत से टी20 इंटरनेशनल खेलेगा जापान, जानिए टीम के स्टार खिलाड़ियों और बड़े रिकॉर्ड्स की पूरी कहानी

    JPN vs IND: पहली बार भारत से टी20 इंटरनेशनल खेलेगा जापान, जानिए टीम के स्टार खिलाड़ियों और बड़े रिकॉर्ड्स की पूरी कहानी

    नई दिल्ली । क्रिकेट के मैदान पर भारत और जापान की सीनियर पुरुष टीमें पहली बार टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में आमने-सामने होने जा रही हैं। यह ऐतिहासिक मुकाबला 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला जापानी क्रिकेट के लिए बेहद खास माना जा रहा है।

    भारत और जापान इससे पहले सीनियर पुरुष टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में आमने-सामने नहीं आए हैं। ऐसे में 22 सितंबर को होने वाला मुकाबला दोनों देशों के क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा। यह मैच सुजुकी कप के तहत खेला जाएगा और एशियाई खेलों से पहले भारतीय टीम के लिए भी अहम मुकाबला होगा।

    जापान की क्रिकेट टीम भारत की तरह क्रिकेट की बड़ी ताकत नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में टीम ने टी20 क्रिकेट में लगातार अपनी स्थिति मजबूत की है। जापान ने अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मुकाबला अक्टूबर 2022 में खेला था। इसके बाद टीम ने कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान बनाई है।

    जापानी टीम में केंडल कडोवाकी-फ्लेमिंग, सबाओरिश रविचंद्रन, लैकलन यामामोटो-लेक, इब्राहिम ताकाहाशी और डेक्लान सुजुकी जैसे खिलाड़ी अहम भूमिका निभाते हैं। बल्लेबाजी की बात करें तो केंडल कडोवाकी-फ्लेमिंग जापान के टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं। उनके नाम 1760 रन दर्ज हैं।

    सबाओरिश रविचंद्रन जापान के प्रमुख ऑलराउंड खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से टीम को योगदान दिया है। टी20 इंटरनेशनल में जापान की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में भी उनका नाम सबसे ऊपर है। उनके नाम 54 विकेट दर्ज हैं।

    लैकलन यामामोटो-लेक भी जापानी क्रिकेट के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं। उनके नाम टी20 इंटरनेशनल में 825 रन दर्ज हैं। फरवरी 2024 में चीन के खिलाफ उन्होंने नाबाद 134 रन की शानदार पारी खेली थी। यह जापान की ओर से टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।

    जापान के गेंदबाजी रिकॉर्ड में रियो सकुरानो-थॉमस का नाम भी खास है। उन्होंने फरवरी 2024 में थाईलैंड के खिलाफ 26 रन देकर छह विकेट हासिल किए थे। यह जापान की ओर से टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत गेंदबाजी प्रदर्शन है।

    इब्राहिम ताकाहाशी भी टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने जापान के लिए टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 623 रन बनाए हैं और गेंदबाजी में 40 विकेट भी हासिल किए हैं। वहीं माकोटो तानियामा के नाम 38 विकेट दर्ज हैं। ऐसे में जापानी टीम के पास भारत जैसी मजबूत टीम के सामने खुद को साबित करने के लिए कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।

    भारत के खिलाफ मुकाबला जापान के खिलाड़ियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा। भारतीय टीम के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव और विश्व स्तर के खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद जापान अपने घरेलू मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा।

    यह मुकाबला भारत और जापान के बीच खेल संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों से भी इस मैच को जोड़ा गया है। इस मुकाबले के जरिए जापान में क्रिकेट को और लोकप्रिय बनाने तथा दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को मजबूत करने की कोशिश होगी।

    22 सितंबर को होने वाला भारत-जापान टी20 इंटरनेशनल मुकाबला इसलिए भी खास रहेगा क्योंकि पहली बार दोनों देशों की सीनियर पुरुष टीमें क्रिकेट के सबसे तेज लोकप्रिय प्रारूप में आमने-सामने होंगी। जापानी खिलाड़ियों के रिकॉर्ड और भारत की मजबूत टीम के बीच यह मुकाबला क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक नया और यादगार अध्याय बन सकता है।

  • दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया

    दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर (Credit rating agency JCR) ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत (India) की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि (‘Robust’ Economic Growth) और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख कारण बताया।

    जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में छह प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है। निजी खपत और निवेश के मजबूत समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में ऊंची वृद्धि दर बनाए हुए है।

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा 35 से ज्यादा वर्षों बाद भारत को फिर ‘ए’ रेटिंग मिली है। यह भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता है। इससे पहले भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मूडीज ने 1988 में ए2 दी थी। हालांकि, 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान यह रेटिंग चली गई थी।


    क्या मिलेगा फायदा

    आम आदमी को सीधे नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के जरिए फायदा मिल सकता है। बेहतर रेटिंग से कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज सस्ता होगा। इससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और कारोबार के कर्ज की ब्याज दरों पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। इससे कारखाने, नए कारोबार बढ़ने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।


    बेल्जियम से बढ़ेगा व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत की यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट दे वेवर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। ऊर्जा, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में भी कई समझौते की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के देश के रूप में बेल्जियम भारत में निवेश और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दो दशक के अंतराल के बाद हो रही है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरूआत होने की उम्मीद है। बेल्जियम उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जिसने भारत के आजाद होने के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में बेल्जियम की यात्रा की थी।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ वहां के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री भी भारत आए हैं। संभावना है कि रक्षा उद्योगों के बीच सह उत्पादन को लेकर कुछ समझौते हो सकते हैं। वहीं, बीते वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में 40 से अधिक समझौते हुए थे।


    18 अरब डॉलर का व्यापार

    भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा व्यापार 13 अरब डॉलर सालाना है। हाल में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है। इतना ही नहीं भारत में विदेशी निवेश का भी बेल्जियम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2000-2025 के दौरान बेल्जियम से 4.2 अरब डॉलर का निवेश भारत में आया। अब इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

  • जापान में पीयूष गोयल की बड़ी कारोबारी बैठकें, भारत में निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय और औद्योगिक अवसरों पर जोर

    जापान में पीयूष गोयल की बड़ी कारोबारी बैठकें, भारत में निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय और औद्योगिक अवसरों पर जोर

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के तीसरे दिन देश के प्रमुख कारोबारी और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत में निवेश बढ़ाने, व्यापारिक भागीदारी मजबूत करने और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देने से जुड़े अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    गोयल ने जापान के प्रमुख कारोबारी समूह टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन यानी एसएमबीसी ग्रुप, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप यानी एमयूएफजी तथा निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बातचीत में अलग-अलग क्षेत्रों में भारत की बढ़ती संभावनाओं और जापानी कंपनियों के लिए उपलब्ध कारोबारी अवसरों को सामने रखा गया।

    टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तोशिमित्सु इमाई के साथ बैठक में भारत में व्यापार, मोबिलिटी और औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनी की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इस दौरान भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में देश की भूमिका को मजबूत करने के अवसरों पर विशेष जोर दिया गया।

    भारत सरकार जापानी कंपनियों को देश में उत्पादन, कारोबार और निर्यात से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ऐसे में औद्योगिक और मोबिलिटी क्षेत्र में जापानी कंपनियों की भागीदारी बढ़ना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत कर सकता है।

    गोयल ने एसएमबीसी ग्रुप के डिप्टी प्रेसिडेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर योशिहिरो हयाकुतोमे के साथ भी बैठक की। इसमें बैंकिंग क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और भारत-जापान के वित्तीय संबंधों को अधिक मजबूत बनाने के अवसरों पर चर्चा हुई। भारत के तेजी से विकसित होते वित्तीय क्षेत्र को जापानी वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में पेश किया गया।

    इसके बाद गोयल ने एमयूएफजी के डिप्टी चेयरमैन यासुशी इतागाकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की। बैठक में बैंकिंग, वाणिज्यिक वित्त और निवेश के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। भारतीय बाजार की बढ़ती जरूरतों और वित्तीय क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।

    निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और ग्लोबल बिजनेस प्रमुख मिनोरू किमुरा के साथ बैठक में बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार हुआ। गोयल ने भारत के तेजी से विस्तार कर रहे बीमा बाजार में जापानी संस्थानों के लिए मौजूद संभावनाओं को रेखांकित किया।

    इन बैठकों के माध्यम से भारत ने जापान के प्रमुख कारोबारी और वित्तीय समूहों के सामने निवेश के विभिन्न अवसरों को स्पष्ट किया। व्यापार, औद्योगिक उत्पादन, मोबिलिटी, बैंकिंग, वाणिज्यिक वित्त, बीमा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी पहले से ही कई क्षेत्रों में व्यापक है। भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था, बढ़ती औद्योगिक क्षमता और वैश्विक निर्यात केंद्र बनने की दिशा में जारी प्रयास जापानी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वहीं, जापान की पूंजी, तकनीकी क्षमता और वित्तीय विशेषज्ञता भारत की विकास जरूरतों के साथ महत्वपूर्ण तालमेल बना सकती है।

    पीयूष गोयल की जापान यात्रा के दौरान हुई इन बैठकों का प्रमुख उद्देश्य कारोबारी संबंधों को मजबूत करना और जापानी निवेशकों को भारत में उपलब्ध अवसरों से जोड़ना रहा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में संवाद को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • जापान की पहली पसंद भारत…. लेकिन कारखाने थाईलैंड में ज्यादा

    जापान की पहली पसंद भारत…. लेकिन कारखाने थाईलैंड में ज्यादा


    टोक्यो।
    जापान (Japan) के लिए भारत (India) कागज पर पहली पसंद है, कारखाने के लिए थाईलैंड (Thailand)। जापानी कंपनियों (Japanese Companies) की पसंद में भारत भले 61.8% वोट के साथ पसंदीदा ठिकानों की सूची में लगातार चौथे साल शीर्ष पर है, पर जापानी कंपनियां (Japanese Companies) भारत में 1400 हैं जबकि थाईलैंड में छह हजार।

    11 साल में निवेश का लक्ष्य 3.5 लाख करोड़ येन (2.10 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर 10 लाख करोड़ येन (6 लाख करोड़ रुपये) हो गया, कंपनियों की गिनती नहीं बढ़ी। रकम के वादे काम नहीं आए, इसलिए इस बार सरकार 220 भारतीय उद्योगपतियों को सीधे जापानी कारखानों के दरवाजे पर ले जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal Japan visit) के नेतृत्व वाला यह दल सोमवार से 27 अगस्त तक जापान में रहेगा। रणनीति दौरे के नक्शे से समझ आती है। पैसा टोक्यो में है, पर कारखाना लगाने वाली कंपनियां वहां नहीं हैं।

    जापान की असली विनिर्माण ताकत आइची और कंसाई की उन हजारों मझोली कंपनियों में है, जो बड़ी कंपनियों को कलपुर्जे देती हैं। कोई जापानी कंपनी जब कहीं जाती है, तो आपूर्तिकर्ताओं का पूरा झुंड साथ ले जाती है। इसीलिए भारत पहली बार इंतजार के बजाय खुद उनके पास गया है। भारतीय दल नागोया में चुकेइरेन व नागोया चैंबर के साथ रोड शो करेगा, ओसाका व क्योटो में क्षेत्रीय उद्योग से जुड़ेगा।

    सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स व एआई पर गोलमेज बैठक
    इस कार्यक्रम में मशीन को समझने या जानने पर जोर है। सेमीकंडक्टर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स पर एक गोलमेज बैठक है, पूंजीगत वस्तुओं, मशीनरी और वाहन उद्योग पर दूसरी। दौरे का मकसद दोतरफा निवेश बढ़ाना है। इसी क्रम में भारतीय कंपनियों का जापान जाना भी अहम है, जहां अभी सिर्फ 100 भारतीय कंपनियां हैं।


    भारत सिर्फ खरीदार नहीं…

    दल में रिलायंस के औद्योगिक नगर मेट सिटी के प्रमुख हैं, जो जापानी कंपनियों को जमीन बेचते हैं। मारुति सुजुकी है, गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन है, बीमा व संपत्ति प्रबंधन कंपनियां हैं, जो जापान की सस्ती पेंशन पूंजी की तलाश में हैं, और स्टार्टअप का पूरा जत्था है, जिसके लिए टोक्यो में अलग बैठक होगी।

    दल में कौन-कौन?
    आरपीजी समूह के उपाध्यक्ष अनंत गोयनका, एसोचैम से निर्मल कुमार मिंडा, टीसीआई के विनीत अग्रवाल, रिन्यू पावर के सुमंत सिन्हा, किर्लोस्कर सिस्टम्स की गीतांजलि विक्रम किर्लोस्कर, एडवर्ब टेक के जलज दानी, कार्स24 के विक्रम चोपड़ा, गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन के राजेंद्र कुमार, मारुति सुजुकी के राहुल भारती, मोबिक्विक की उपासना टाकू, न्यूस्पेस रिसर्च के जूलियस अमृत, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट के संदीप सिक्का, रिलायंस मेट सिटी के श्रीवल्लभ गोयल, स्नैबिट के आयुष अग्रवाल, स्टार यूनियन दाई-इची लाइफ के अभय तिवारी और एसपीएफ की श्वेता राजपाल कोहली। वाहन, वाहन कलपुर्जे, अभियांत्रिकी, रसायन, पेट्रो रसायन, तकनीक और स्टार्टअप, यानी हर क्षेत्र से नाम हैं।