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  • फीमेल पार्टनर से बहस के बाद कंक्रीट की सीढ़ियों पर मायूस बैठा दिखा 13 साल का गोरिल्ला

    फीमेल पार्टनर से बहस के बाद कंक्रीट की सीढ़ियों पर मायूस बैठा दिखा 13 साल का गोरिल्ला

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया के इस दौर में वन्य जीवों के कई ऐसे वीडियो सामने आते हैं जो इंसानों को हैरान कर देते हैं, लेकिन जापान के एक चिड़ियाघर से सामने आया ताजा मामला बेहद अनोखा और गुदगुदाने वाला है। यहां रहने वाले 13 साल के एक नर गोरिल्ला, जिसका नाम ‘कियोमासा’ है, का एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। इस वीडियो में गोरिल्ला अपनी फीमेल पार्टनर के साथ हुए एक घरेलू विवाद के बाद जिस तरह गहरे तनाव और दार्शनिक अंदाज में बैठा नजर आ रहा है, उसने पूरी दुनिया के सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिड़ियाघर के बाड़े में कियोमासा और उसकी मादा साथी के बीच किसी बात को लेकर जोरदार बहस हो गई थी। हालांकि, चिड़ियाघर के प्रबंधकों और अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के बीच इस तरह के छोटे-मोटे मतभेद बेहद सामान्य हैं, लेकिन कियोमासा इस मामूली झगड़े को कुछ ज्यादा ही दिल पर ले बैठा। इस नोकझोंक के तुरंत बाद का जो नजारा कैमरे में कैद हुआ, उसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक को अचंभित कर दिया है, क्योंकि गोरिल्ला का यह व्यवहार हूबहू किसी परेशान इंसान जैसा था।

    विवाद शांत होने के बाद, कियोमासा अपनी मादा साथी से दूर पिंजरे में बनी कंक्रीट की सीढ़ियों पर जाकर बिल्कुल अकेला बैठ गया। करीब 62 सेकंड के इस वायरल क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि वह किसी गहरे सदमे या आत्मचिंतन में डूबा हुआ है। सबसे मजेदार बात यह है कि उसने किसी दार्शनिक या गंभीर संकट में फंसे इंसान की तरह अपनी ठुड्डी पर हाथ रख रखा है। वह रह-रहकर अपना सिर खुजलाता है, अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ता है और शून्य में एकटक घूरने लगता है, जैसे वह अपनी जिंदगी के किसी बहुत बड़े और जटिल फैसले के बारे में विचार कर रहा हो।

    कियोमासा के इस अद्भुत और इंसानी अंदाज को देखकर इंटरनेट जगत में मजेदार टिप्पणियों और मीम्स की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को विशेष रूप से शादीशुदा पुरुषों की वास्तविक पारिवारिक परिस्थितियों और उनके आपसी वैवाहिक विवादों से जोड़कर देख रहे हैं। कई यूजर्स ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह गोरिल्ला निश्चित रूप से अपने दिमाग में उस पूरी लड़ाई को दोबारा रीप्ले कर रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर उससे ऐसी क्या गलती हो गई, जिससे उसकी पार्टनर इतनी ज्यादा नाराज हो गई। कुछ लोगों ने तो कियोमासा की इस गहरी सोच को देखते हुए उसका नया नाम ‘गोरिलियो द फिलॉस्फर’ तक रख दिया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने जीव वैज्ञानिकों को भी एक बार फिर इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित किया है कि गोरिल्ला इंसानों के कितने करीब हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गोरिल्ला को इंसानों का सबसे नजदीकी रिश्तेदार माना जाता है और उनका लगभग 98 प्रतिशत डीएनए पूरी तरह से इंसानों से मेल खाता है। वे अत्यधिक संवेदनशील और सामाजिक प्राणी होते हैं, जो इंसानों की ही तरह क्रोध, ईर्ष्या, प्रेम, दुख, अवसाद और पछतावे जैसी जटिल मानसिक भावनाओं को गहराई से महसूस करने और उन्हें अपनी शारीरिक मुद्राओं के माध्यम से प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं।

  • फिजी में QUAD का बड़ा दांव: बंदरगाह प्रोजेक्ट से इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती, भारत की भूमिका अहम

    फिजी में QUAD का बड़ा दांव: बंदरगाह प्रोजेक्ट से इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती, भारत की भूमिका अहम




    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका (QUAD) ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। चारों देशों ने फिजी में मिलकर एक आधुनिक बंदरगाह विकसित करने पर सहमति जताई है। इसे क्वाड के इतिहास में पहली बार ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा है।

    फिजी, जो प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित द्वीप राष्ट्र है, लंबे समय से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा था। अब क्वाड देशों की यह पहल चीन के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    फिजी में बंदरगाह क्यों अहम?
    फिजी भौगोलिक रूप से ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और हवाई के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के बीच आता है। इस कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में चीन ने छोटे द्वीपीय देशों में निवेश और कर्ज के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है। कई जगहों पर बंदरगाह और बुनियादी ढांचे के विकास के पीछे चीन की रणनीतिक उपस्थिति को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है। इसी पृष्ठभूमि में क्वाड का यह कदम देखा जा रहा है।

    भारत के लिए क्या है महत्व?
    फिजी में लगभग 37% आबादी भारतीय मूल की है, जिन्हें “गिरमिटिया” समुदाय के वंशज माना जाता है। भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बहुत मजबूत हैं।

    इस प्रोजेक्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपने समुद्री अनुभव, बंदरगाह विकास विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग के जरिए इस परियोजना में योगदान देगा। इसके अलावा भारत के Information Fusion Centre-IOR (गुरुग्राम) के माध्यम से समुद्री गतिविधियों की निगरानी में भी सहयोग संभव है।

    QUAD की नई रणनीति
    इस प्रोजेक्ट के साथ QUAD ने “Indo-Pacific Maritime Surveillance Cooperation” की भी शुरुआत की है, जिसके तहत समुद्री क्षेत्र में रीयल टाइम डेटा साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य अवैध मछली पकड़ने, संदिग्ध जहाजों और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर नजर रखना है।

    साथ ही “Quad-at-Sea” नाम से एक संयुक्त अभ्यास योजना भी प्रस्तावित है, जिसमें चारों देशों की कोस्ट गार्ड एक साथ समुद्री अभ्यास करेंगे।

    चीन की चिंता क्यों बढ़ी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहली बार है जब QUAD ने केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर किसी तीसरे देश में संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। इससे चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति को सीधी चुनौती मिल सकती है।

    चीन पहले से ही सोलोमन आइलैंड्स जैसे देशों में सुरक्षा समझौतों के जरिए अपनी उपस्थिति बढ़ा चुका है। ऐसे में फिजी में क्वाड की सक्रियता को बीजिंग एक रणनीतिक दबाव के रूप में देख सकता हैफिजी में प्रस्तावित यह बंदरगाह परियोजना केवल एक विकासात्मक कदम नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन बदलने की दिशा में बड़ा भू-राजनीतिक संकेत है। भारत समेत QUAD देशों की यह साझेदारी आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति में नई दिशा तय कर सकती है।

  • अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू

    अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ‘सेक्शन 301’ के तहत की जा रही है, जो अमेरिकी ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है और अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिकी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहे हों।

    इस कदम के पीछे पिछली घटनाओं का संदर्भ है। फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अब नई जांच के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टैरिफ का दबाव जारी रहे और ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

    यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर केंद्रित है। अगर जांच में इन देशों की नीतियां अनुचित व्यापार व्यवहार के तहत पाई गईं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

    जांच का मुख्य फोकस उन देशों पर है, जो जरूरत से अधिक उत्पादन कर अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर माल बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी देश में जूतों की फैक्ट्री सालाना 100 जूते बना सकती है, लेकिन घरेलू मांग केवल 20 जूते की है, तो शेष 80 जूते सस्ते दाम पर अमेरिका में भेज दिए जाते हैं। अमेरिका इसे मार्केट डंपिंग और अनुचित व्यापार व्यवहार मानता है।

    भारत के लिए यह चिंता का विषय है। 2024 में भारत का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में घटकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया। इस कमी के बावजूद भारत इस जांच की सूची में शामिल है। यदि भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ या प्रतिबंध लग सकते हैं।

    इसके अलावा, अमेरिका फोर्स्ड लेबर पर भी अलग जांच कर रहा है। इसका उद्देश्य है बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब यह कार्रवाई अन्य देशों पर भी लागू हो सकती है।

    जांच की टाइमलाइन भी निर्धारित कर दी गई है। 15 अप्रैल तक आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं, इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ खत्म होने से पहले नए टैरिफ प्रस्ताव और जांच के नतीजे तैयार हो जाएं।

    जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बचाना है। साथ ही ट्रेडिंग पार्टनर्स को चेतावनी दी गई है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करें, अन्यथा भारी टैक्स या प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का असर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। व्यवसायियों, निर्यातकों और आयातकों को अमेरिकी पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिकी बाजार में कीमतों और टैरिफ में बड़े बदलाव संभव हैं।

    यह कदम व्यापार के वैश्विक परिदृश्य में भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि व्यापारिक नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो अमेरिकी टैरिफ की मार व्यापार घाटे और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।

  • 52 साल बाद जापान पहुंचे ताइवान के पीएम, क्यों तिलमिलाया ड्रैगन?

    52 साल बाद जापान पहुंचे ताइवान के पीएम, क्यों तिलमिलाया ड्रैगन?

    वीजिंग। ताइवान के प्रधानमंत्री चो जुंग-ताई के जापान (Japan) दौरे को लेकर एशियाई राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। ताइवान के प्रधानमंत्री के इस दौरे पर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसके पीछे “नापाक मंशा” होने का आरोप लगाया है। बीजिंग का कहना है कि निजी यात्रा की आड़ में ताइवान की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
    रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान के प्रधानमंत्री सप्ताहांत में Japan पहुंचे थे, जहां उन्होंने World Baseball Classic में ताइवान की टीम का समर्थन किया। हालांकि ताइवान सरकार ने साफ किया कि यह पूरी तरह निजी दौरा था और इसका किसी आधिकारिक कूटनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
    1972 के बाद पहली ऐसी यात्रा
    ताइवानी मीडिया के अनुसार, 1972 में टोक्यो और ताइपे के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध टूटने के बाद यह पहला मौका है जब किसी मौजूदा ताइवानी प्रधानमंत्री ने जापान का दौरा किया है।

    चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने आरोप लगाया कि चो जुंग-ताई “चुपके और गुप्त तरीके से” स्वतंत्रता समर्थक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जापान को ऐसे “उकसावे” की कीमत चुकानी पड़ सकती है।

    जापान ने बताया निजी दौरा

    जापान ने इस पूरे मामले के राजनीतिक महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश की है। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव Minoru Kihara ने कहा कि टोक्यो इस यात्रा को निजी मानता है और इस दौरान ताइवानी प्रधानमंत्री तथा जापानी सरकारी अधिकारियों के बीच कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई।

    हालांकि जापान और Taiwan के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, लेकिन दोनों के बीच मजबूत आर्थिक, सांस्कृतिक और अनौपचारिक राजनीतिक रिश्ते मौजूद हैं।

    ताइवान का चीन को जवाब
    ताइवान ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि उसके नेताओं को अन्य देशों की यात्रा करने और उनसे संवाद करने का पूरा अधिकार है। ताइपे का कहना है कि चीन का ताइवान पर संप्रभुता का दावा निराधार है और द्वीप का भविष्य वहां की जनता तय करेगी।

    जापान से लौटने के बाद चो जुंग-ताई ने भी कहा कि उनकी यात्रा पूरी तरह निजी थी और इसका उद्देश्य ताइवान की राष्ट्रीय बेसबॉल टीम का समर्थन करना था।

    ऐतिहासिक रूप से जटिल रिश्ते

    ताइवान और जापान के रिश्ते इतिहास में काफी जटिल रहे हैं। Japan ने 1895 से लेकर 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने तक ताइवान पर उपनिवेश के रूप में शासन किया था।

    औपचारिक कूटनीतिक संबंध न होने के बावजूद दोनों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जारी है। 2022 में Lai Ching-te, जो उस समय ताइवान के उपराष्ट्रपति थे, Shinzo Abe की हत्या के बाद श्रद्धांजलि देने टोक्यो भी गए थे।

    क्यों नाराज रहता है चीन

    बीजिंग लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसकी किसी भी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का विरोध करता रहा है। चीन का कहना है कि ताइवान के नेताओं और विदेशी सरकारों के बीच अनौपचारिक या प्रतीकात्मक संपर्क भी उसके “एक चीन” सिद्धांत को कमजोर कर सकता है।

    यही वजह है कि ताइवान के नेताओं के विदेश दौरों पर चीन अक्सर कड़ी प्रतिक्रिया देता रहा है और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला।

  • वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया

    वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह की अगुवाई वाली विमानन कंपनी एयर इंडिया ने वियतनाम और जापान के लिए अपनी नई उड़ानें शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत कंपनी अपने नेटवर्क विस्तार के तहत वियतनाम के हनोई और टोक्यो के हनेडा के लिए नॉन स्टॉप सर्विस को जोड़ेगी।

    कंपनी ने बताया कि एयर इंडिया 01 मई से दिल्ली से वियतनाम के हनोई के लिए और 15 जून से मुंबई से टोक्यो के हानेडा के लिए अपनी सीधी उड़ानें शुरू करने वाली है। एयर इंडिया ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, मरीन ड्राइव के सनसेट से लेकर शिबुया की रौनक भरी रातों तक जापान अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हम 15 जून से मुंबई और टोक्यो हानेडा के बीच हफ़्ते में 4x नॉन-स्टॉप फ्लाइट की शुरुआत कर रहे हैं, जिससे यात्रियों के लिए जापान के कल्चर, एनर्जी और हमेशा रहने वाले आकर्षण का अनुभव करना आसान हो जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि बुकिंग अभी शुरू है।

  • मुख्यमंत्री योगी का सिंगापुर और जापान दौरा संपन्न, डेढ़ लाख करोड़ का हुआ एमओयू

    मुख्यमंत्री योगी का सिंगापुर और जापान दौरा संपन्न, डेढ़ लाख करोड़ का हुआ एमओयू


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चार दिवसीय सिंगापुर व जापान दौरा पूरा हुआ। इस यात्रा के दौरान प्रदेश सरकार को 1.5 लाख करोड़ के एमओयू तथा 2.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से पांच लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और यह उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम सिद्ध होगा। गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ी पूरी जानकारी दी गयी।

    यूपी की कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता पर वैश्विक विश्वास

    जापान में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि जापान में 90 हजार करोड़ के एमओयू और लगभग 1.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार सिंगापुर में 60 हजार करोड़ के एमओयू और लगभग एक लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का कार्य इन्वेस्ट यूपी और राज्य के अन्य संबंधित विभाग समयबद्ध ढंग से करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर प्रधानमंत्री मोदी का प्रारंभ से रहा फोकस अब परिणाम दे रहा है। टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से वैश्विक निवेशकों का विश्वास अर्जित होता है और यही विश्वास दोनों देशों में उत्तर प्रदेश के प्रति दिखाई दिया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया गया है तथा रूल ऑफ लॉ के अनुरूप बेहतर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव निवेश के माहौल पर पड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यामानाशी के गवर्नर अगस्त माह में लगभग 200 जापानी सीईओ के प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर प्रदेश आने वाले हैं, जो संभावित निवेश को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसी प्रकार सिंगापुर से भी एक बड़ा बिजनेस डेलिगेशन उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आने को उत्सुक है। योगी ने कहा कि इस यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के साथ संवाद का अवसर भी मिला। सिंगापुर, टोक्यो और यामानाशी, तीनों स्थानों पर भारतीय समुदाय के साथ बड़े और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुए, जिन्होंने भारत और उत्तर प्रदेश के प्रति सकारात्मकता और विश्वास को और सुदृढ़ किया।

    पांच लाख रोजगार की संभावना

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास पर्याप्त स्केल, बड़ा लैंड बैंक और निवेश को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट सेक्टोरल पॉलिसियां हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था की सुदृढ़ स्थिति और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था निवेशकों के विश्वास को मजबूत कर रही है। यदि 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू और 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जमीनी धरातल पर उतरते हैं, तो पांच लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सिंगापुर और जापान की यह यात्रा केवल समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्किलिंग, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास की नई दिशा तय करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

    नए अवसरों की शुरुआत

    सिंगापुर व जापान के चार दिवसीय दौरे के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यात्रा का चौथा दिन है और एक प्रकार से यह यात्रा के विराम का दिन है। उन्होंने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज पूरी दुनिया में भारत के प्रति अत्यंत सकारात्मक भाव बना है। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणादायी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े आठ-नौ वर्षों में जो ठोस कदम उठाए गए हैं, उनका सकारात्मक संदेश विश्व के देशों तक पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चार दिनों में प्रतिनिधिमंडल ने अनेक विशिष्ट व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ सार्थक संवाद किया। जी2जी (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट) स्तर पर उच्चस्तरीय बैठकें संपन्न हुईं, जी2बी (गवर्नमेंट-टू-बिजनेस) स्तर पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ तथा बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) बैठकों के माध्यम से औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। दोनों देशों में इन सभी बैठकों और कार्यक्रमों को मिलाकर लगभग 60 से अधिक औपचारिक संवाद और कार्यक्रम आयोजित हुए।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दौरान तीन बड़े निवेश रोड शो आयोजित किए गए। एक सिंगापुर में, जिसमें बड़ी संख्या में निवेशक और वित्तीय संस्थानों के अध्यक्ष एवं सीईओ उपस्थित रहे तो दूसरा टोक्यो में और तीसरा आज जापान के प्रमुख प्रांत यामानाशी में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में आयोजित इन कार्यक्रमों में कुल मिलाकर लगभग 450 से 500 निवेशक, उद्योगपति तथा वित्तीय संस्थानों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए, जो उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर गंभीर और उत्साहित दिखे।

    सिंगापुर में टेक्नोलॉजी, फिनटेक से लेकर टूरिज्म तक सकारात्मक संवाद

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा के दौरान सिंगापुर में आईटी, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर, लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, टूरिज्म, फिनटेक, मेडटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों को लेकर अत्यंत सकारात्मक वार्ता हुई। अनेक निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए एमओयू किए, जबकि कई अन्य कंपनियों ने अपने निवेश प्रस्ताव भी सौंपे। उन्होंने बताया कि कई प्रमुख सिंगापुर-आधारित कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए पूरी तत्परता के साथ आने को तैयार हैं। इसके बाद टोक्यो में जी2जी (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट) और जी2बी (गवर्नमेंट-टू-बिजनेस) स्तर की बैठकें संपन्न हुईं।

    ऑटो, ग्रीन हाइड्रोजन और ‘जापान सिटी’ पर ठोस पहल

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन कंपनियों के साथ बैठकें हुईं, उनमें ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सीएनजी और सोलर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे। विशेष रूप से सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन, होंडा मोटर्स और मित्सुई जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ सार्थक चर्चा हुई। इसके अलावा उद्योग एवं वाणिज्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

    तकनीक, निवेश और स्किल साझेदारी पर सहमति

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर में प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (आईटीई) जैसे उच्च स्तरीय स्किलिंग सेंटर का निरीक्षण किया। वहां संचालित प्रशिक्षण मॉड्यूल, उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम और युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था का विस्तार से अध्ययन किया गया। उन्होंने बताया कि जापान प्रवास के दौरान ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण करने के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल ने सुपर हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन का अवलोकन किया और उसमें यात्रा का अनुभव भी प्राप्त किया।

  • जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    ताइपे। जापान की संसद में इन दिनों महिला सांसदों को शौचालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महिला सांसदों ने इसे लेकर अपनी आवाज भी उठाई है। यह मामला उस वक्त और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया, जब देश की पहली प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी इन महिला सांसदों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई।
    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जापानी संसद के मुख्य सदन के पास अभी केवल दो शौचालय क्यूबिकल हैं, जो कि 73 महिला सांसदों के लिए अपर्याप्त हैं। इसके अलावा अगर पूरे संसद भवन की बात करें तो केवल 9 महिला शौचालय हैं, जिनमें केवल 22 क्यूबिकल है। इस मामले पर प्रदर्शन का हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद यासुको कोमियामा ने फेसबुक पर डाले अपने पोस्ट में कहा कि यह समस्या सिर्फ महिला सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद परिसर में काम करने वाली महिला पत्रकार और कर्मचारी भी परेशान हैं।

    आपको बता दें जापान की संसद भवन की इमारत करीब 90 साल पुरानी है। इसका निर्माण 1936 में किया गया था। उस वक्त महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था। इस वजह से वहां पर महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है।

    फिलहाल 2024 में हुए आम चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि 73 महिला सांसद चुनकर आई हैं।

    जापानी मीडिया के मुताबिक कोमियामा ने कहा, “यदि प्रशासन सच में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है तो मुझे उम्मीद है कि इस मामले पर हम उनकी समझ और सहयोग की उम्मीद कर सकते हैं।” जापानी न्यूज आउटलेट आसाही शिंबुन के मुताबिक जापान की निचले सदन के अध्यक्ष ने अधिक महिला शौचालयों के प्रस्ताव पर विचार करने का वादा किया है।

    गौरतलब है कि जापान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लड़ाई लंबी है। कार्य स्थल पर बराबरी हासिल करने के लिए महिलाओं को एक लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा है। जापानी सरकार ने वर्ष 2020 में समाज के सभी क्षेत्रों में 30 फीसदी नेतृत्व के पदों पर महिलाओं को नियुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अंदरूनी विरोध के चलते इसे चुपचाप एक दशक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।

  • भूकंप के झटकों से हिला जापान…. 7.6 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी….

    भूकंप के झटकों से हिला जापान…. 7.6 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी….


    टोक्यो।
    जापान (Japan) में सोमवार रात धरती डोल उठी। यहां तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, रिक्टर स्केल (Richter scale) पर भूकंप (Earthquake) की तीव्रता 7.6 मापी गई है. इसके तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी तट पर 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी आने की चेतावनी (Tsunami warning) जारी की गई है. प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा है. यह चेतावनी होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों के लिए जारी की गई है, जहां खतरा सबसे ज्यादा है. भूकंप का केंद्र तट से दूर बताया जा रहा है, लेकिन इसके झटके इतने तेज थे कि लोग घरों से बाहर निकल आए।

    रात के अंधेरे में 10 फीट ऊंची लहरों का खौफ: भूकंप के झटके रात करीब 11:15 बजे महसूस किए गए. इतनी रात गए आए भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया. जेएमए ने साफ कहा है कि समुद्र में हलचल तेज है और 10 फीट तक ऊंची लहरें तट से टकरा सकती हैं. जापान के उत्तर और पूर्व के एक बड़े हिस्से में झटके महसूस किए गए. एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे समुद्र तट से दूर रहें और सुरक्षित ठिकानों पर शरण लें।

    होक्काइडो और आओमोरी में रेड अलर्ट: सुनामी की चेतावनी के बाद होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों में सायरन बजने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट मोड पर डाल दिया है. 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप बेहद खतरनाक माना जाता है. इससे इमारतों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है. फिलहाल नुकसान की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।