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  • पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल

    पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल


    नई दिल्ली । 
    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का जापान दौरा सोमवार से शुरू हो गया है। चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने, निवेश के अवसर बढ़ाने और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर रहेगा।

    पीयूष गोयल 27 अगस्त तक जापान में रहेंगे। इस दौरान वह टोक्यो, नागोया और ओसाका का दौरा करेंगे। उनके नेतृत्व में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा है, जिसमें 200 से अधिक बिजनेस प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न प्रमुख औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी शामिल हैं।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और स्टील जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के अलावा ऑटोमोटिव, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े कारोबारी भी शामिल हैं। इससे दौरे के दौरान होने वाली चर्चाओं का दायरा व्यापक रहने की उम्मीद है।

    टोक्यो पहुंचने के बाद गोयल ने जापान की प्रमुख कंपनी सुमितोमो कॉरपोरेशन के प्रेसिडेंट और सीईओ शिंगो उएनो के साथ बैठक की। दोनों पक्षों ने एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन, मोबिलिटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ कंपनी के जुड़ाव को और गहरा करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    बैठक के दौरान भारत में निवेश आधारित आर्थिक विकास और तेजी से विस्तार कर रहे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर रेखांकित किया गया। भारत की औद्योगिक क्षमता और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर रहा।

    गोयल ने मेइजी सेइका फार्मा कंपनी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर तोशियाकी नागासातो से भी मुलाकात की। इस बैठक में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने और भारत में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों का विस्तार करने के अवसरों पर बातचीत हुई।

    भारत का फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम जापानी कंपनियों के लिए बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास के अवसर उपलब्ध कराता है। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    गोयल की जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। जापान भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच तकनीक, निवेश, विनिर्माण तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

    इस दौरे के दौरान कारोबारी बैठकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। 200 से अधिक भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस यात्रा को व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। इससे भारतीय कंपनियों और जापानी उद्योग जगत के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है।

    दौरे का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को आर्थिक स्तर पर और मजबूत करना है। निवेश, तकनीक, उत्पादन और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में आगे बढ़ने से भारत-जापान संबंधों को नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं।

  • यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा, नीतियों और बुनियादी ढांचे पर गिनाईं उपलब्धियां

    यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा, नीतियों और बुनियादी ढांचे पर गिनाईं उपलब्धियां

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के प्रमुख उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ हुई राउंड टेबल मीटिंग में राज्य में निवेश की संभावनाओं को सामने रखा। यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से उत्तर प्रदेश में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेश की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी और औद्योगिक वातावरण के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। उनके अनुसार इन सुधारों के कारण राज्य में कारोबार के लिए परिस्थितियां पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हुई हैं। उन्होंने निवेशकों के सामने प्रदेश में उपलब्ध अवसरों और सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को भी रखा।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने वाली कंपनियों को सरकारी स्तर पर जरूरी सहयोग दिया जाएगा। निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर देने की बात उन्होंने कही। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को भरोसा दिया कि निवेशकों की व्यावहारिक जरूरतों और सामने आने वाली समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा।

    राउंड टेबल बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से रखे गए सुझावों और अपेक्षाओं को भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निवेशकों द्वारा उठाए गए विषयों पर सरकार की टीम ध्यान दे रही है। जिन क्षेत्रों में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आएंगी, वहां समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के लिए व्यापक मानव संसाधन उपलब्ध है। सरकार युवाओं को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। बेहतर संपर्क व्यवस्था के साथ कुशल मानव संसाधन और कारोबारी माहौल तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में लगातार सुधार से निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करना और उसका विस्तार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार और औद्योगिक वातावरण को मजबूत करने के साथ निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    इन्वेस्टमेंट मीट को मुख्यमंत्री ने सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार ऐसे आयोजनों से निवेशकों की वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। साथ ही उद्योग प्रतिनिधियों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध कारोबारी अवसरों, आधारभूत सुविधाओं और नीतिगत सहयोग की जानकारी भी मिलती है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश में प्रमुख उद्योग समूहों की बढ़ती रुचि से आने वाले समय में नए निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    नई दिल्ली । जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने कुमामोटो टेक्नोलॉजी सेंटर का परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने बताया कि प्लांट की इमारतों, उत्पादन उपकरणों और विनिर्माण लाइनों पर भूकंप के प्रभाव का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उत्पादन दोबारा कब शुरू होगा।

    कंपनी के अनुसार, मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:27 बजे भूकंप आने के तुरंत बाद किकुयो कस्बे स्थित सोनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के संयंत्र में उत्पादन रोक दिया गया था। यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित तकनीकी नुकसान का निरीक्षण करने के उद्देश्य से लिया गया। विशेषज्ञों की टीम पूरे परिसर का निरीक्षण कर रही है ताकि परिचालन फिर से शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके।

    सोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके नागासाकी, ओइता और कागोशिमा स्थित अन्य टेक्नोलॉजी सेंटर सामान्य स्थिति में हैं। इन केंद्रों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है और भूकंप के समय वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी के घायल होने की खबर भी सामने नहीं आई है। कंपनी लगातार सभी इकाइयों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई, जिसके कारण कुमामोटो और आसपास के इलाकों में व्यापक असर देखने को मिला। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिए गए। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी है, जबकि बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी में जुटे हुए हैं।

    जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बताया कि भूकंप में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज गति से चला रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

    सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस वैश्विक स्तर पर इमेज सेंसर और अन्य सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की प्रमुख निर्माता कंपनियों में शामिल है। कंपनी के उत्पादों का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरणों और कई उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में कुमामोटो प्लांट का अस्थायी रूप से बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि कंपनी ने अभी उत्पादन पर संभावित प्रभाव को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    इस घटना पर भारत ने भी संवेदना व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान में आए भूकंप पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में जापान की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने प्रभावित लोगों की सुरक्षा, शीघ्र राहत और जल्द सामान्य स्थिति बहाल होने की कामना की। फिलहाल सभी की नजरें राहत कार्यों की प्रगति और सोनी के कुमामोटो प्लांट में परिचालन दोबारा शुरू होने के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर

    16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर

    नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच आयोजित 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन को लेकर जापानी मीडिया ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग में लगातार बढ़ती साझेदारी को क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया है। विश्लेषणों में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और जापान के संबंध पहले की तुलना में अधिक व्यापक और मजबूत होते जा रहे हैं।

    शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। बातचीत में आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    जापानी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की उपलब्धता जापान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में भारत का विशाल बाजार, तेजी से विकसित होता विनिर्माण क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन जापान के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इसी कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    विश्लेषणों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को भी प्रमुख विषय बताया गया। रिपोर्टों के अनुसार जापान भारत को स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा अभ्यासों को और मजबूत करने, नौसैनिक सहयोग बढ़ाने, रक्षा उपकरणों के विकास तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों के आदान-प्रदान को गति देने पर जोर दिया। साथ ही रक्षा उत्पादन में सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई।

    बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक खनिज संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आपूर्ति में आने वाली संभावित बाधाओं से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके अलावा उच्च तकनीक आधारित संचार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों से जुड़े सहयोग को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालिया शिखर सम्मेलन से स्पष्ट संकेत मिला है कि दोनों देश रणनीतिक विश्वास, साझा हितों और दीर्घकालिक सहयोग के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में इस सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

  • आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

    आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदा
    संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।

    दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

    प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांग
    संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

    आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपील
    भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया।

    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेश
    यह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा और आर्थिक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान, व्यापारिक अनिश्चितता और मांग में कमी जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है और लगातार सुधारों के जरिए निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन कठिन परिस्थितियां ही किसी देश की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ने ऐसे समय में अपनी आर्थिक मजबूती साबित की है और आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने की पूरी क्षमता रखता है।

    उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 7.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर्ज की, जो वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की मजबूत आर्थिक नींव का संकेत है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में सरकार ने निरंतर सुधार की नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए हैं। लगातार सुधार और बेहतर नीतियों के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाया गया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कारोबार सुगमता से जुड़े नई पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनावश्यक बाधाओं को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निवेश के लिए खोल दिया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को नीति स्थिरता, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज निर्णय प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए, जिससे भारत वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सके।

    प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और आपसी विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने जापानी निवेशकों से भारत में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।

    इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष ‘जापान बिजनेस वीक’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा कारोबार सुगमता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक उद्योग एवं निवेश का और अधिक आकर्षक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान

    भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Prime Minister Sanae Takaichi) की भारत यात्रा (India Tour) को कई मायनों में महत्वूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, बुनियादी ढांचे में दीर्घकालिक निवेश, पूर्वोत्तर विकास, कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में नए ऐलान किए जा सकते हैं। साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए क्वाड को फिर से सक्रिय करने पर भी बात हो सकती है।


    भारत में भारी निवेश

    कूटनीतिक जानकारों के अनुसार भारत के विकास में जापान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि उसने बुनियादी ढांचे, ऑटोमाइबल तथा भारी उद्योग क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश किया है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी वह निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, संयुक्त उपक्रम और निवेश की जापान से अपार संभावनाएं हैं।

    जापान का मौजूदा निवेश 44 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है तथा वह सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका और नीदरलैंड के बाद पांचवा बड़ा निवेशक है। इस यात्रा के दौरान भी जापान की प्रधानमंत्री बड़े निवेश का ऐलान कर सकती हैं। भारत और जापान उभरती प्रौद्यौगिकी में 100 से अधिक परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान एआई में सहयोग को लेकर घोषणा हो सकती है।

    भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए भी जापान बेहद महत्वपूर्ण है। भारत और जापान ने 2017 में भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम बनाया है, जिसके जरिये पूर्वोत्तर के विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पिछले एक साल के दौरान जापान के उच्चस्तरीय दलों ने मेघालय, असम, मणिपुर के दौरे किए हैं, जबकि मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने जापान के दौरे किए।


    बैठक में व्यापार को मजबूत करने पर भी होगी बातचीत

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक में वैसे तो क्षेत्रीय और वैश्विक सभी मुद्दों पर दोनों राष्ट्राध्यक्ष बात करेंगे, लेकिन व्यापार को मजबूत करने पर भी बात होगी। दरअसल, भारत-जापान के बीच में 2011 से व्यापार समझौता है, लेकिन यह जापान के लिए ही फायदेमंद साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच करीब 27 अरब डॉलर का सालाना कारोबार है, जिसमें भारत का निर्यात छह अरब डॉलर और आयात 21 अरब डॉलर का है। यानी 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। भारत इस समझौते के नवीनीकरण के पक्ष में है।


    भारत में कहां सबसे ज्यादा निवेश

    पूर्वोत्तर में जापान ने भारी निवेश भी किए हैं तथा वहां के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। जापान का मानना है कि पूर्वोत्तर एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की स्वतंत्र एवं खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के दृष्टिकोण को व्यवहार में लाया जाता है।

    एक तरफ जहां आर्थिक नजरिये से जापान महत्वपूर्ण है। वहीं, क्वाड के सदस्य के रूप में भी जापान भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है। लेकिन क्वाड निष्क्रिय होता जा रहा है। इसलिए संभावना है कि मोदी के संग बैठक में जापान की प्रधानमंत्री क्वाड को सक्रिय करने पर भी बात करेंगी। दरअसल, क्वाड की शुरुआती पहल जापान की तरफ से ही की गई थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्वाड को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

  • G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता

    G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता

    फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों, चीन से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्य देशों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं भी दबाव का सामना कर रही हैं।

    जापानी प्रधानमंत्री ने जी-7 नेताओं के साथ हुई बैठकों और रात्रिभोज चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज विश्व राजनीति और वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना केवल एशियाई देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और सामरिक हितों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जापान ने चीन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर अपना दृष्टिकोण साझेदार देशों के सामने रखा है।

    ताकाइची ने कहा कि जी-7 देशों के बीच इस बात पर व्यापक सहमति बनी है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग और समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर जोर दिया। आधुनिक तकनीक, रक्षा उत्पादन और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता आज दुनिया की प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं में शामिल हो चुकी है।

    पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जापानी प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहे और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

    ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र रहा। जापान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहयोग बढ़ाने और परमाणु प्रसार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। जापान का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों के प्रसार को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।

    इसी सम्मेलन में भारत ने भी विकास साझेदारी और वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी साझेदारी की वास्तविक सफलता इस बात में है कि वह सहयोगी देशों को आत्मनिर्भर बनने में कितना सक्षम बनाती है। उन्होंने अफ्रीका में भारत की विकास परियोजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत साझेदारी के माध्यम से दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उधर, चीन के बढ़ते निर्यात को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताएं भी चर्चा का विषय बनी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी शुल्कों के बावजूद चीन का औद्योगिक उत्पादन और निर्यात क्षमता मजबूत बनी हुई है, जिससे वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा और आर्थिक संतुलन से जुड़े नए सवाल खड़े हो रहे हैं। कुल मिलाकर, जी-7 शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े मुद्दे वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रहने वाले हैं।

  • फीमेल पार्टनर से बहस के बाद कंक्रीट की सीढ़ियों पर मायूस बैठा दिखा 13 साल का गोरिल्ला

    फीमेल पार्टनर से बहस के बाद कंक्रीट की सीढ़ियों पर मायूस बैठा दिखा 13 साल का गोरिल्ला

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया के इस दौर में वन्य जीवों के कई ऐसे वीडियो सामने आते हैं जो इंसानों को हैरान कर देते हैं, लेकिन जापान के एक चिड़ियाघर से सामने आया ताजा मामला बेहद अनोखा और गुदगुदाने वाला है। यहां रहने वाले 13 साल के एक नर गोरिल्ला, जिसका नाम ‘कियोमासा’ है, का एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। इस वीडियो में गोरिल्ला अपनी फीमेल पार्टनर के साथ हुए एक घरेलू विवाद के बाद जिस तरह गहरे तनाव और दार्शनिक अंदाज में बैठा नजर आ रहा है, उसने पूरी दुनिया के सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिड़ियाघर के बाड़े में कियोमासा और उसकी मादा साथी के बीच किसी बात को लेकर जोरदार बहस हो गई थी। हालांकि, चिड़ियाघर के प्रबंधकों और अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के बीच इस तरह के छोटे-मोटे मतभेद बेहद सामान्य हैं, लेकिन कियोमासा इस मामूली झगड़े को कुछ ज्यादा ही दिल पर ले बैठा। इस नोकझोंक के तुरंत बाद का जो नजारा कैमरे में कैद हुआ, उसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक को अचंभित कर दिया है, क्योंकि गोरिल्ला का यह व्यवहार हूबहू किसी परेशान इंसान जैसा था।

    विवाद शांत होने के बाद, कियोमासा अपनी मादा साथी से दूर पिंजरे में बनी कंक्रीट की सीढ़ियों पर जाकर बिल्कुल अकेला बैठ गया। करीब 62 सेकंड के इस वायरल क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि वह किसी गहरे सदमे या आत्मचिंतन में डूबा हुआ है। सबसे मजेदार बात यह है कि उसने किसी दार्शनिक या गंभीर संकट में फंसे इंसान की तरह अपनी ठुड्डी पर हाथ रख रखा है। वह रह-रहकर अपना सिर खुजलाता है, अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ता है और शून्य में एकटक घूरने लगता है, जैसे वह अपनी जिंदगी के किसी बहुत बड़े और जटिल फैसले के बारे में विचार कर रहा हो।

    कियोमासा के इस अद्भुत और इंसानी अंदाज को देखकर इंटरनेट जगत में मजेदार टिप्पणियों और मीम्स की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को विशेष रूप से शादीशुदा पुरुषों की वास्तविक पारिवारिक परिस्थितियों और उनके आपसी वैवाहिक विवादों से जोड़कर देख रहे हैं। कई यूजर्स ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह गोरिल्ला निश्चित रूप से अपने दिमाग में उस पूरी लड़ाई को दोबारा रीप्ले कर रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर उससे ऐसी क्या गलती हो गई, जिससे उसकी पार्टनर इतनी ज्यादा नाराज हो गई। कुछ लोगों ने तो कियोमासा की इस गहरी सोच को देखते हुए उसका नया नाम ‘गोरिलियो द फिलॉस्फर’ तक रख दिया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने जीव वैज्ञानिकों को भी एक बार फिर इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित किया है कि गोरिल्ला इंसानों के कितने करीब हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गोरिल्ला को इंसानों का सबसे नजदीकी रिश्तेदार माना जाता है और उनका लगभग 98 प्रतिशत डीएनए पूरी तरह से इंसानों से मेल खाता है। वे अत्यधिक संवेदनशील और सामाजिक प्राणी होते हैं, जो इंसानों की ही तरह क्रोध, ईर्ष्या, प्रेम, दुख, अवसाद और पछतावे जैसी जटिल मानसिक भावनाओं को गहराई से महसूस करने और उन्हें अपनी शारीरिक मुद्राओं के माध्यम से प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं।

  • फिजी में QUAD का बड़ा दांव: बंदरगाह प्रोजेक्ट से इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती, भारत की भूमिका अहम

    फिजी में QUAD का बड़ा दांव: बंदरगाह प्रोजेक्ट से इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती, भारत की भूमिका अहम




    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका (QUAD) ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। चारों देशों ने फिजी में मिलकर एक आधुनिक बंदरगाह विकसित करने पर सहमति जताई है। इसे क्वाड के इतिहास में पहली बार ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा है।

    फिजी, जो प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित द्वीप राष्ट्र है, लंबे समय से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा था। अब क्वाड देशों की यह पहल चीन के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    फिजी में बंदरगाह क्यों अहम?
    फिजी भौगोलिक रूप से ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और हवाई के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के बीच आता है। इस कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में चीन ने छोटे द्वीपीय देशों में निवेश और कर्ज के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है। कई जगहों पर बंदरगाह और बुनियादी ढांचे के विकास के पीछे चीन की रणनीतिक उपस्थिति को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है। इसी पृष्ठभूमि में क्वाड का यह कदम देखा जा रहा है।

    भारत के लिए क्या है महत्व?
    फिजी में लगभग 37% आबादी भारतीय मूल की है, जिन्हें “गिरमिटिया” समुदाय के वंशज माना जाता है। भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बहुत मजबूत हैं।

    इस प्रोजेक्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपने समुद्री अनुभव, बंदरगाह विकास विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग के जरिए इस परियोजना में योगदान देगा। इसके अलावा भारत के Information Fusion Centre-IOR (गुरुग्राम) के माध्यम से समुद्री गतिविधियों की निगरानी में भी सहयोग संभव है।

    QUAD की नई रणनीति
    इस प्रोजेक्ट के साथ QUAD ने “Indo-Pacific Maritime Surveillance Cooperation” की भी शुरुआत की है, जिसके तहत समुद्री क्षेत्र में रीयल टाइम डेटा साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य अवैध मछली पकड़ने, संदिग्ध जहाजों और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर नजर रखना है।

    साथ ही “Quad-at-Sea” नाम से एक संयुक्त अभ्यास योजना भी प्रस्तावित है, जिसमें चारों देशों की कोस्ट गार्ड एक साथ समुद्री अभ्यास करेंगे।

    चीन की चिंता क्यों बढ़ी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहली बार है जब QUAD ने केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर किसी तीसरे देश में संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। इससे चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति को सीधी चुनौती मिल सकती है।

    चीन पहले से ही सोलोमन आइलैंड्स जैसे देशों में सुरक्षा समझौतों के जरिए अपनी उपस्थिति बढ़ा चुका है। ऐसे में फिजी में क्वाड की सक्रियता को बीजिंग एक रणनीतिक दबाव के रूप में देख सकता हैफिजी में प्रस्तावित यह बंदरगाह परियोजना केवल एक विकासात्मक कदम नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन बदलने की दिशा में बड़ा भू-राजनीतिक संकेत है। भारत समेत QUAD देशों की यह साझेदारी आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति में नई दिशा तय कर सकती है।