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  • मुख्यमंत्री योगी का सिंगापुर और जापान दौरा संपन्न, डेढ़ लाख करोड़ का हुआ एमओयू

    मुख्यमंत्री योगी का सिंगापुर और जापान दौरा संपन्न, डेढ़ लाख करोड़ का हुआ एमओयू


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चार दिवसीय सिंगापुर व जापान दौरा पूरा हुआ। इस यात्रा के दौरान प्रदेश सरकार को 1.5 लाख करोड़ के एमओयू तथा 2.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से पांच लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और यह उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम सिद्ध होगा। गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ी पूरी जानकारी दी गयी।

    यूपी की कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता पर वैश्विक विश्वास

    जापान में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि जापान में 90 हजार करोड़ के एमओयू और लगभग 1.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार सिंगापुर में 60 हजार करोड़ के एमओयू और लगभग एक लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का कार्य इन्वेस्ट यूपी और राज्य के अन्य संबंधित विभाग समयबद्ध ढंग से करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर प्रधानमंत्री मोदी का प्रारंभ से रहा फोकस अब परिणाम दे रहा है। टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से वैश्विक निवेशकों का विश्वास अर्जित होता है और यही विश्वास दोनों देशों में उत्तर प्रदेश के प्रति दिखाई दिया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया गया है तथा रूल ऑफ लॉ के अनुरूप बेहतर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव निवेश के माहौल पर पड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यामानाशी के गवर्नर अगस्त माह में लगभग 200 जापानी सीईओ के प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर प्रदेश आने वाले हैं, जो संभावित निवेश को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसी प्रकार सिंगापुर से भी एक बड़ा बिजनेस डेलिगेशन उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आने को उत्सुक है। योगी ने कहा कि इस यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के साथ संवाद का अवसर भी मिला। सिंगापुर, टोक्यो और यामानाशी, तीनों स्थानों पर भारतीय समुदाय के साथ बड़े और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुए, जिन्होंने भारत और उत्तर प्रदेश के प्रति सकारात्मकता और विश्वास को और सुदृढ़ किया।

    पांच लाख रोजगार की संभावना

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास पर्याप्त स्केल, बड़ा लैंड बैंक और निवेश को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट सेक्टोरल पॉलिसियां हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था की सुदृढ़ स्थिति और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था निवेशकों के विश्वास को मजबूत कर रही है। यदि 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू और 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जमीनी धरातल पर उतरते हैं, तो पांच लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सिंगापुर और जापान की यह यात्रा केवल समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्किलिंग, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास की नई दिशा तय करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

    नए अवसरों की शुरुआत

    सिंगापुर व जापान के चार दिवसीय दौरे के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यात्रा का चौथा दिन है और एक प्रकार से यह यात्रा के विराम का दिन है। उन्होंने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज पूरी दुनिया में भारत के प्रति अत्यंत सकारात्मक भाव बना है। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणादायी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े आठ-नौ वर्षों में जो ठोस कदम उठाए गए हैं, उनका सकारात्मक संदेश विश्व के देशों तक पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चार दिनों में प्रतिनिधिमंडल ने अनेक विशिष्ट व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ सार्थक संवाद किया। जी2जी (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट) स्तर पर उच्चस्तरीय बैठकें संपन्न हुईं, जी2बी (गवर्नमेंट-टू-बिजनेस) स्तर पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ तथा बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) बैठकों के माध्यम से औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। दोनों देशों में इन सभी बैठकों और कार्यक्रमों को मिलाकर लगभग 60 से अधिक औपचारिक संवाद और कार्यक्रम आयोजित हुए।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दौरान तीन बड़े निवेश रोड शो आयोजित किए गए। एक सिंगापुर में, जिसमें बड़ी संख्या में निवेशक और वित्तीय संस्थानों के अध्यक्ष एवं सीईओ उपस्थित रहे तो दूसरा टोक्यो में और तीसरा आज जापान के प्रमुख प्रांत यामानाशी में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में आयोजित इन कार्यक्रमों में कुल मिलाकर लगभग 450 से 500 निवेशक, उद्योगपति तथा वित्तीय संस्थानों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए, जो उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर गंभीर और उत्साहित दिखे।

    सिंगापुर में टेक्नोलॉजी, फिनटेक से लेकर टूरिज्म तक सकारात्मक संवाद

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा के दौरान सिंगापुर में आईटी, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर, लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, टूरिज्म, फिनटेक, मेडटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों को लेकर अत्यंत सकारात्मक वार्ता हुई। अनेक निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए एमओयू किए, जबकि कई अन्य कंपनियों ने अपने निवेश प्रस्ताव भी सौंपे। उन्होंने बताया कि कई प्रमुख सिंगापुर-आधारित कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए पूरी तत्परता के साथ आने को तैयार हैं। इसके बाद टोक्यो में जी2जी (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट) और जी2बी (गवर्नमेंट-टू-बिजनेस) स्तर की बैठकें संपन्न हुईं।

    ऑटो, ग्रीन हाइड्रोजन और ‘जापान सिटी’ पर ठोस पहल

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन कंपनियों के साथ बैठकें हुईं, उनमें ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सीएनजी और सोलर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे। विशेष रूप से सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन, होंडा मोटर्स और मित्सुई जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ सार्थक चर्चा हुई। इसके अलावा उद्योग एवं वाणिज्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

    तकनीक, निवेश और स्किल साझेदारी पर सहमति

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर में प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (आईटीई) जैसे उच्च स्तरीय स्किलिंग सेंटर का निरीक्षण किया। वहां संचालित प्रशिक्षण मॉड्यूल, उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम और युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था का विस्तार से अध्ययन किया गया। उन्होंने बताया कि जापान प्रवास के दौरान ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण करने के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल ने सुपर हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन का अवलोकन किया और उसमें यात्रा का अनुभव भी प्राप्त किया।

  • जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    ताइपे। जापान की संसद में इन दिनों महिला सांसदों को शौचालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महिला सांसदों ने इसे लेकर अपनी आवाज भी उठाई है। यह मामला उस वक्त और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया, जब देश की पहली प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी इन महिला सांसदों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई।
    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जापानी संसद के मुख्य सदन के पास अभी केवल दो शौचालय क्यूबिकल हैं, जो कि 73 महिला सांसदों के लिए अपर्याप्त हैं। इसके अलावा अगर पूरे संसद भवन की बात करें तो केवल 9 महिला शौचालय हैं, जिनमें केवल 22 क्यूबिकल है। इस मामले पर प्रदर्शन का हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद यासुको कोमियामा ने फेसबुक पर डाले अपने पोस्ट में कहा कि यह समस्या सिर्फ महिला सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद परिसर में काम करने वाली महिला पत्रकार और कर्मचारी भी परेशान हैं।

    आपको बता दें जापान की संसद भवन की इमारत करीब 90 साल पुरानी है। इसका निर्माण 1936 में किया गया था। उस वक्त महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था। इस वजह से वहां पर महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है।

    फिलहाल 2024 में हुए आम चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि 73 महिला सांसद चुनकर आई हैं।

    जापानी मीडिया के मुताबिक कोमियामा ने कहा, “यदि प्रशासन सच में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है तो मुझे उम्मीद है कि इस मामले पर हम उनकी समझ और सहयोग की उम्मीद कर सकते हैं।” जापानी न्यूज आउटलेट आसाही शिंबुन के मुताबिक जापान की निचले सदन के अध्यक्ष ने अधिक महिला शौचालयों के प्रस्ताव पर विचार करने का वादा किया है।

    गौरतलब है कि जापान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लड़ाई लंबी है। कार्य स्थल पर बराबरी हासिल करने के लिए महिलाओं को एक लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा है। जापानी सरकार ने वर्ष 2020 में समाज के सभी क्षेत्रों में 30 फीसदी नेतृत्व के पदों पर महिलाओं को नियुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अंदरूनी विरोध के चलते इसे चुपचाप एक दशक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।

  • भूकंप के झटकों से हिला जापान…. 7.6 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी….

    भूकंप के झटकों से हिला जापान…. 7.6 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी….


    टोक्यो।
    जापान (Japan) में सोमवार रात धरती डोल उठी। यहां तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, रिक्टर स्केल (Richter scale) पर भूकंप (Earthquake) की तीव्रता 7.6 मापी गई है. इसके तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी तट पर 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी आने की चेतावनी (Tsunami warning) जारी की गई है. प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा है. यह चेतावनी होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों के लिए जारी की गई है, जहां खतरा सबसे ज्यादा है. भूकंप का केंद्र तट से दूर बताया जा रहा है, लेकिन इसके झटके इतने तेज थे कि लोग घरों से बाहर निकल आए।

    रात के अंधेरे में 10 फीट ऊंची लहरों का खौफ: भूकंप के झटके रात करीब 11:15 बजे महसूस किए गए. इतनी रात गए आए भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया. जेएमए ने साफ कहा है कि समुद्र में हलचल तेज है और 10 फीट तक ऊंची लहरें तट से टकरा सकती हैं. जापान के उत्तर और पूर्व के एक बड़े हिस्से में झटके महसूस किए गए. एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे समुद्र तट से दूर रहें और सुरक्षित ठिकानों पर शरण लें।

    होक्काइडो और आओमोरी में रेड अलर्ट: सुनामी की चेतावनी के बाद होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों में सायरन बजने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट मोड पर डाल दिया है. 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप बेहद खतरनाक माना जाता है. इससे इमारतों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है. फिलहाल नुकसान की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।