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  • भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?

    भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?


    इंदौर ।  मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के बयानों और आपसी खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार में मंत्रियों के बीच कथित खटपट को लेकर तंज कसा है। वहीं अपनी चुनावी हार को याद करते हुए उन्होंने ऐसा बयान दिया जिस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी। दूसरी ओर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भाजपा की लगातार चुनावी जीत पर हैरानी जताते हुए कांग्रेस नेताओं को एकजुट होने की जरूरत बताई है।

    इंदौर में भाजपा की कथित गुटबाजी पर निशाना साधते हुए जीतू पटवारी ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि सरकार में प्रभारी मंत्री जो मुख्यमंत्री हैं और नगरीय प्रशासन मंत्री के बीच लात-घूंसे चल रहे हैं लेकिन दिखाई नहीं दे रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दोनों के बीच गाली-गलौज भी हो रही है लेकिन सिर्फ सुनाई नहीं दे रही है। पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंदौर के भाजपा विधायक उन्हें मंत्री मानने को ही तैयार नहीं हैं। पटवारी के मुताबिक आपसी अंतर्कलह में उलझी भाजपा प्रदेश का भला नहीं कर सकती क्योंकि अहंकार में डूबे नेता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। यह पटवारी का राजनीतिक आरोप और कटाक्ष था।

    हालांकि भाजपा पर हमला करते हुए पटवारी को अपनी चुनावी हार भी याद आ गई। वे इंदौर में संगीत के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां बातचीत के दौरान उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के पुराने अंदाज का जिक्र किया। पटवारी ने कहा कि साइकिल वाला भी कैसे हारता है यह उन्होंने देखा है। उन्होंने कहा कि जब कोई उन्हें याद दिलाता है कि वे साइकिल से आते थे और भाभी-भाभी कहकर लोगों से मिलते थे फिर भी चुनाव हार गए तो उन्हें अपनी हार याद आ जाती है। इस बात को कहते हुए उन्होंने फिल्मी गाने की पंक्ति भी सुनाई कि जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है। उनके इस बयान में चुनावी हार की टीस के साथ खुद पर किया गया हल्का व्यंग्य भी नजर आया।

    इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति और भाजपा की लगातार जीत को लेकर चिंता जाहिर की। सिंगरौली में एक पत्रकार ने उनसे सड़क बिजली बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को लेकर सवाल किया था। इस पर अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में कई समस्याएं होने के बावजूद जब मतदान का समय आता है तो भाजपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी को वोट क्यों नहीं मिलते यह समझ से परे है। उन्होंने इस स्थिति को कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बताया।

    अजय सिंह इससे पहले भी पार्टी की स्थिति को लेकर चिंता जता चुके हैं। एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2028 में कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे। अगर इस बार भी पार्टी सत्ता में नहीं पहुंची तो राजनीतिक रूप से उसकी स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील भी की।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जीतू पटवारी भाजपा के भीतर कथित खींचतान को लेकर हमलावर नजर आए तो दूसरी ओर अजय सिंह ने कांग्रेस के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। दोनों नेताओं के बयान प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कांग्रेस के संगठनात्मक हालात पर भी चर्चा को सामने लाते हैं।

    रिपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में एक आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग को लेकर भी चर्चा की गई है। खबर के मुताबिक अधिकारी बड़े महानगरीय जिले में कलेक्टर बनने की उम्मीद लगाए हुए थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उन्हें एक छोटे जिले की जिम्मेदारी मिली। हालांकि अधिकारी का नाम और जिले का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते


    कटनी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के अलग अलग अंदाज चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते नजर आए तो कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व जन्म का जिक्र कर लोगों का ध्यान खींचा। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ता को खुद जूते पहनाए जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी ग्रामीणों के साथ थिरकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में जनसंपर्क और नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड

    कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

    पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।

    दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

    सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज

    बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।

    वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।

    प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।

  • वोट बचाओ रैली में MP से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य, कांग्रेस नेताओं से तैयारियों का हिसाब मांग रहे पटवारी

    वोट बचाओ रैली में MP से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य, कांग्रेस नेताओं से तैयारियों का हिसाब मांग रहे पटवारी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली वोट बचाओ देश बचाओ जन मार्च और महारैलीJitu Patwari, Madhya Pradesh Congress, Delhi Rally, Vote Chori Protest, Bhopal Political News की तैयारियां तेज कर दी हैं। एसआईआर और कथित वोट चोरी के विरोध में आयोजित होने वाली इस रैली में मध्यप्रदेश से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला अध्यक्षों जिला प्रभारियों और विधानसभा प्रभारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में केवल लोगों की संख्या ही नहीं बल्कि बसों की बुकिंग रेल टिकटों के आरक्षण और यात्रा से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली जा रही है।

    कांग्रेस की योजना के मुताबिक प्रदेश के अलग अलग जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों को जिलेवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जीतू पटवारी समीक्षा के दौरान यह पूछ रहे हैं कि किस जिले से कितने लोग दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं और अब तक कितनी बसें तथा चार पहिया वाहन बुक किए जा चुके हैं। इसके अलावा रेलवे में कितने टिकट आरक्षित कराए गए हैं और यात्रा करने वालों की सूची कितनी तैयार हुई है इसकी भी जानकारी मांगी जा रही है। पार्टी का जोर समय रहते परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने पर है।

    ग्वालियर चंबल संभाग में रैली की तैयारियों को लेकर विशेष लक्ष्य तय किया गया है। यहां जिला अध्यक्षों विधायकों पूर्व विधायकों विधानसभा प्रभारियों और जिला प्रभारियों को दो दो हजार लोगों को दिल्ली ले जाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में संबंधित पदाधिकारियों को एक एक हजार लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है। समीक्षा बैठकों में इन निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले अब तक हुई तैयारियों का आकलन किया जा रहा है। पदाधिकारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र में लोगों से संपर्क कर रहे हैं या नहीं और यात्रा की व्यवस्था किस स्तर तक पहुंची है।

    दिल्ली महारैली की तैयारियों के साथ प्रदेश कांग्रेस संगठन के कामकाज की समीक्षा भी की जा रही है। जीतू पटवारी विधानसभा प्रभारियों से उनके क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तृत ब्योरा मांग रहे हैं। इसमें बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए दो के गठन और उनके भौतिक सत्यापन की स्थिति प्रमुख है। इसके साथ ही मंडलम के गठन और सत्यापन तथा वार्ड और पंचायत समितियों के गठन से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पार्टी यह देखना चाहती है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए निर्धारित काम कितनी प्रगति पर हैं।

    विधानसभा प्रभारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि उन्होंने अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र का कितनी बार दौरा किया और हर महीने कितने दिन वहां प्रवास किया। इन जानकारियों के जरिए संगठन की वास्तविक स्थिति और स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की सक्रियता का आकलन किया जा रहा है। पार्टी की रणनीति में बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कांग्रेस की इन बैठकों में अब दो मोर्चों पर जवाबदेही तय होती दिखाई दे रही है। एक तरफ दिल्ली की महारैली में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परिवहन और यात्रियों की व्यवस्था पर जोर है तो दूसरी तरफ संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के काम की समीक्षा की जा रही है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लोगों को दिल्ली पहुंचाना और संगठन की गतिविधियों को जमीन पर आगे बढ़ाना जिला तथा विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों के लिए अहम जिम्मेदारी बन गई है।

    एक नवंबर को होने वाली महारैली में मध्यप्रदेश से वास्तविक भागीदारी कितनी रहती है यह आयोजन के दिन स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि तैयारियों में कोई कमी न रहे और जिलेवार जिम्मेदारियों के अनुसार परिवहन तथा संगठन से जुड़े काम समय पर पूरे कर लिए जाएं।

  • इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली

    इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली


    इंदौर । मध्यप्रदेश में भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध तेज करने की तैयारी कर ली है। इंदौर में 27 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से जनसंघर्ष महारैली निकाली जाएगी। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी सरकार की नीतियों आम जनता से जुड़े मुद्दों और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महारैली के माध्यम से जनता की समस्याओं को उठाने के साथ मतदाता सूची में हुए बदलावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

    इंदौर शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित इस महारैली की शुरुआत सुबह 11 बजे गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय से होगी। यहां से कार्यकर्ता और पार्टी नेता रैली के रूप में रवाना होंगे। प्रस्तावित मार्ग में पढ़ीनाथ चौराहा हरसिद्धि मंदिर और मोती तबेला शामिल हैं। रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाप्त होगी। वहां कांग्रेस नेता राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध के साथ निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दे उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाने वाली है। पार्टी उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। पार्टी इन मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए महारैली को महत्वपूर्ण कार्यक्रम मान रही है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और आधिकारिक तथ्य भी महत्वपूर्ण होंगे।

    कांग्रेस नेता देवेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर इस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से जुड़ी समस्याओं को जनता के बीच उठाने और प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।

    महारैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठन के विभिन्न स्तरों पर संपर्क शुरू किया है। सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों और प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी इंदौर शहर और जिला कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व पदाधिकारियों से भी कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की गई है। इसके साथ ही ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों को कार्यकर्ताओं को जुटाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

    युवा कांग्रेस सेवादल एनएसयूआई महिला कांग्रेस और अन्य मोर्चा संगठनों के पदाधिकारियों को भी महारैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है। वर्तमान और पूर्व पार्षदों पार्षद प्रत्याशियों तथा पंचायतों के पंच सरपंच और अन्य पदाधिकारियों से भी समर्थकों के साथ पहुंचने की अपील की गई है। पार्टी की कोशिश है कि रैली में संगठन के सभी वर्गों की भागीदारी हो और विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया जा सके।

    अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली इस महारैली पर रहेगी। कांग्रेस इसे केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाने का माध्यम बता रही है। रैली के बाद सौंपे जाने वाले ज्ञापन में उठाई गई मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया से आगे की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तंज का दौर, आरक्षण पर विधायक की फजीहत, लाड़ली बहना पर कांग्रेस की चुप्पी और भाजपा में हलचल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तंज का दौर, आरक्षण पर विधायक की फजीहत, लाड़ली बहना पर कांग्रेस की चुप्पी और भाजपा में हलचल


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी तंज और सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं भाजपा विधायक को आरक्षण के मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा तो कहीं लाड़ली बहना योजना पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के जवाब ने सवाल खड़े कर दिए। इंदौर में जल संकट को लेकर बुलाई गई बैठक में मंत्रियों और विधायकों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के युवा संवाद कार्यक्रम को कांग्रेस ने राहुल गांधी की राजनीति से जोड़कर देखा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत में बयान और जवाब के नए किस्से पैदा कर दिए हैं।
    शिवपुरी में भाजपा विधायक देवेंद्र जैन उस समय असहज स्थिति में आ गए जब उनकी ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक युवक से बहस हो गई। ओबीसी महासभा के कार्यकर्ता 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे थे। विधायक देवेंद्र जैन वहां एक बैठक के सिलसिले में पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू हो गई। एक युवक ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह ग्रेजुएट है और पढ़ा लिखा है। इस पर विधायक ने जवाब में खुद को गधा कह दिया। युवक ने भी पलटकर कह दिया कि हां आप गधे हो। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने हूटिंग शुरू कर दी और भाजपा सरकार मुर्दाबाद तथा शिवपुरी विधायक मुर्दाबाद के नारे लगाए। घटनाक्रम के दौरान विधायक ने अपने नाम पर भी मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस पूरे मामले का वीडियो सामने आने के बाद घटना चर्चा में आ गई है।
    दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लाड़ली बहना योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर चर्चा में आ गए। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन हजार रुपये देने का वादा किया गया था जबकि महिलाओं को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे वादे के अनुरूप राशि नहीं देने का मामला बताया। इसके बाद पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या लाड़ली बहना योजना जारी रहेगी और क्या राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये की जाएगी। इस सवाल पर पटवारी ने कहा कि इसका जवाब सही समय पर दिया जाएगा। उनके जवाब के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल हल्का हो गया। हालांकि योजना को लेकर कांग्रेस की भावी नीति पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
    इंदौर में जल संकट को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक में भी सियासी चर्चा तेज हो गई। बैठक में जिले के नौ विधायकों में से केवल चार के पहुंचने की जानकारी सामने आई। मंत्री तुलसी सिलावट भी बैठक में मौजूद नहीं थे। जब विजयवर्गीय से बाकी जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जो नहीं आए उनसे पूछा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शायद उनके क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं होगी। उनके इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि बैठक में कम उपस्थिति के पीछे किसी बड़े नेता की नाराजगी होने की बात को खबर में चर्चा और अटकल के रूप में ही देखा जा रहा है।
    इसी बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का युवा संवाद कार्यक्रम भी चर्चा में है। 17 अक्टूबर को अशोकनगर में उनका युवा अनप्लग्ड कॉन्सर्ट प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम के माध्यम से वे युवाओं से संवाद करेंगे और उनकी बात सुनने का प्रयास करेंगे। कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की युवाओं के बीच पहुंचने की रणनीति से जोड़कर तंज किया है। सिंधिया पहले कांग्रेस में रह चुके हैं लेकिन अब भाजपा में हैं। ऐसे में उनके युवा संवाद कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
    प्रदेश की नौकरशाही में भी हालिया तबादला सूची के बाद चर्चाएं जारी हैं। खबर के मुताबिक एक महिला आईएएस अधिकारी को उम्मीद थी कि उन्हें कलेक्टर बनाया जा सकता है। उन्होंने निमाड़ क्षेत्र के एक जिले में पदस्थापना के लिए प्रयास किए थे लेकिन जारी सूची में उस जिले की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को दे दी गई। हालांकि संबंधित अधिकारी का नाम और जिले का विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। कुल मिलाकर आरक्षण विवाद से लेकर लाड़ली बहना योजना और जल संकट की बैठक तक मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी और सियासी संकेत लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं।

  • SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद

    SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली ।  राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस मार्च से पहले मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मार्च में शामिल होने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेता और विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसी बीच दिल्ली रवाना होने की तैयारी कर रहे मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया को रविवार रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके अलावा श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर भी पुलिस पहुंची। इन घटनाओं के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी नेताओं को दिल्ली मार्च में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया दिल्ली जाने के लिए मुरैना में एक ही स्थान पर ठहरे हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे मार्च में शामिल होने की तैयारी से जोड़कर देखा है। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत में लिए जाने के कारण और कार्रवाई की अवधि को लेकर आधिकारिक पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
    इसी घटनाक्रम के बीच श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर पुलिस पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि विधायक के घर पहुंची पुलिस से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस विधायक को हिरासत में लेने में सफल हुई या नहीं इस बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस वजह से पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
    दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में प्रस्तावित मार्च में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ विधायक आरिफ मसूद झूमा सोलंकी सेना पटेल फुंदेलाल मार्को और केशव देसाई सहित कई नेता और पूर्व विधायक शामिल हैं। दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में भी कांग्रेस के विधायक और नेता मौजूद हैं। पार्टी की ओर से इस मार्च के जरिए अपनी मांगों को आगे रखने की तैयारी की गई है।
    कांग्रेस का यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। पार्टी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस की योजना मार्च के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर अपनी मांगें रखने की है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी पहले भी अपनी आपत्तियां सामने रख चुकी है।
    मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने और विधायक के घर पुलिस पहुंचने की घटनाओं ने दिल्ली मार्च से पहले राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे अपने नेताओं को रोकने की कोशिश बता रही है जबकि पुलिस की कार्रवाई के आधार पर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में मार्च के दौरान पार्टी की गतिविधियों और इस पूरे घटनाक्रम पर आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
  • MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान

    MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों संगठन से लेकर सरकार और विपक्ष तक कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के पहले दौरे के दौरान संगठन में बेहतर तालमेल और मतभेदों को लेकर दिए गए संदेश ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। देब ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया है। साथ ही पार्टी के अलग अलग स्तरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर काम करने की नसीहत दी है।

    बिप्लब देब के दौरे के दौरान पार्टी की संगठनात्मक बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नेताओं से सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने नहीं लाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े संगठन में मतभेद हो सकते हैं लेकिन इन्हें पार्टी के कामकाज पर हावी नहीं होना चाहिए। इस दौरान संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया।

    दरअसल बिप्लब देब को हाल ही में मध्यप्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया गया है। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चुनौती बताई जा रही है। उनके पहले दौरे में ही सरकार और संगठन के बीच समन्वय का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। हालांकि भाजपा नेताओं की ओर से सार्वजनिक तौर पर संगठन में एकजुटता और बेहतर तालमेल पर ही जोर दिया गया है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर भी मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई रही। राहुल गांधी ने आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। जीतू पटवारी ने भी सरकार पर तीखे आरोप लगाए।

    राहुल गांधी के दौरे के जवाब में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के पुराने शासन और मौजूदा दौरे को लेकर सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कहा कि अगर राहुल गांधी मौजूदा समस्याओं पर सवाल उठा रहे हैं तो कांग्रेस के शासनकाल का हिसाब भी उन्हें देना चाहिए।

    इसी राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसे मामलों में राजनीतिक पलटवार के दौरान नेताओं के बयानों और नामों को लेकर हुई चूक भी चर्चा का विषय बन जाती है।

    दूसरी ओर सीधी से भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के एक स्थानीय दुकान पर समोसे तलने का वीडियो भी चर्चा में रहा। रिपोर्ट के अनुसार सांसद ने दुकानदार से बातचीत की और उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान सरकारी सहायता और पीएम स्वनिधि योजना का भी जिक्र हुआ। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर संगठनात्मक बैठकों और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी संगठनात्मक फोकस बढ़ाने की बात कही है जहां उसे 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी के सामने संगठन में तालमेल मजबूत करना और जमीनी नेटवर्क को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण एजेंडा बना हुआ है।

  • कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन

    कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन


    रीवा । रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर उनके पिता की भूख हड़ताल लगातार जारी है। गुरुवार को अनशन के नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्वास्थ्य में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे हैं। कमजोरी बढ़ने के कारण उन्हें लेटकर ही अनशन करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने से उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    कल्पना मिश्रा के पिता रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पहले वे बैठकर भूख हड़ताल कर रहे थे लेकिन अब कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि उनके लिए बैठना भी मुश्किल हो गया है। परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी बातचीत करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि जब तक कल्पना को न्याय नहीं मिलता और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    कल्पना मिश्रा की मौत के बाद से ही परिवार की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। इसी को लेकर कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। परिवार की ओर से अलग अलग स्तर पर विरोध और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अब पिता की लगातार बिगड़ती सेहत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

    इधर कल्पना मिश्रा मामले को लेकर कांग्रेस का आंदोलन भी जारी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार को रीवा पहुंचे और अग्रसेन चौराहे पर पार्टी की ओर से चलाए जा रहे धरने में शामिल हुए। उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि पहले भी इस धरने में पहुंच चुके हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवालों और कल्पना मिश्रा मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।

    कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम लोगों को बेहतर इलाज और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था मिलनी चाहिए। वहीं कल्पना मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    सिरमौर चौराहे पर पिता की बिगड़ती हालत के बीच परिवार और समर्थकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। नौ दिन से चल रही भूख हड़ताल का उनके स्वास्थ्य पर साफ असर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक अनशन समाप्त नहीं करेंगे। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और परिवार की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • बंडा शराब कांड में मौतों की गिनती बनी बड़ा सवाल: सरकार के 19 आंकड़े पर पटवारी ने उठाए सवाल, बोले- सही संख्या बताएं

    बंडा शराब कांड में मौतों की गिनती बनी बड़ा सवाल: सरकार के 19 आंकड़े पर पटवारी ने उठाए सवाल, बोले- सही संख्या बताएं


    भोपाल । सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले ने अब राजनीतिक तकरार का रूप ले लिया है। त्रासदी के बाद मृतकों की संख्या को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे अलग अलग सामने आ रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने जहां 19 मृतकों के नाम सार्वजनिक कर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि इस घटना में 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। दोनों पक्षों के अलग आंकड़ों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और आधिकारिक जानकारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मंत्री प्रहलाद पटेल ने सोशल मीडिया के जरिए 19 मृतकों की सूची सार्वजनिक की। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता देने की बात कही। मंत्री के मुताबिक संबल योजना में पंजीकृत श्रमिकों के परिवारों को पात्रता के अनुसार 4 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं ऐसे परिवार जो इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं उन्हें मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान और सहायता कोष के माध्यम से आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है। सरकार की ओर से यह कदम मृतकों के परिवारों को तत्काल राहत देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और जिला प्रशासन के आंकड़ों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी का कहना है कि बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब की वजह से मरने वालों की संख्या 50 से ज्यादा है और सरकार को वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने प्रशासन की ओर से अलग अलग समय पर बताए गए आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाया। पटवारी के मुताबिक सागर जिला प्रशासन कभी 13 तो कभी 15 मौतों की जानकारी देता रहा जबकि अब सरकार के वरिष्ठ मंत्री खुद 19 मृतकों के नाम सार्वजनिक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर वास्तविक संख्या कितनी है।

    पटवारी सोमवार को प्रभावित गांवों के दौरे पर भी पहुंचे थे। उन्होंने मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया और सरकार से पीड़ितों की मदद बढ़ाने की मांग की। पटवारी ने मृतकों में बड़ी संख्या लोधी समाज के लोगों की होने का हवाला देते हुए मंत्री प्रहलाद पटेल से भी प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी सहायता करने की अपील की थी। इसके बाद मंत्री की ओर से मृतकों के नामों की सूची जारी की गई।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा अब मौतों की सही संख्या को लेकर बन गया है। एक तरफ सरकार की ओर से 19 मृतकों के नाम सार्वजनिक किए जा चुके हैं तो दूसरी तरफ विपक्ष 50 से ज्यादा मौतों का दावा कर रहा है। ऐसे में आम लोगों और प्रभावित परिवारों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी रिकॉर्ड में कितनी मौतें दर्ज हैं और वास्तविक रूप से कितने परिवार इस त्रासदी से प्रभावित हुए हैं।

    जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता की निगरानी से लेकर समय पर कार्रवाई और पीड़ितों की पहचान तक कई स्तरों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मौतों के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।

    फिलहाल मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा जारी 19 मृतकों की सूची और जीतू पटवारी के 50 से ज्यादा मौतों के दावे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने की नहीं बल्कि मौतों की वास्तविक संख्या स्पष्ट करने की भी है। जब तक आधिकारिक आंकड़ा पूरी तरह सामने नहीं आता तब तक बंडा जहरीली शराब कांड को लेकर उठ रहे सवाल और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।

  • ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप

    ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नारों और बयानों ने सियासी माहौल को अलग ही रंग दे दिया है। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वापस आओ के नारे गूंज रहे हैं तो कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को मुख्यमंत्री बनाने की आवाज उठ रही है। दूसरी तरफ मंदसौर जिले में सड़क की समस्या को लेकर भाजपा विधायक का काफिला रोकने के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विधायक प्रतिनिधि पर एक ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है।

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों का पुराना मामा वाला प्यार एक बार फिर दिखाई दिया। कार्यक्रम में लोगों ने आई लव यू मामा और मामा वापस आ जाइए जैसे नारे लगाए। जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने लोगों की ओर फ्लाइंग किस भेजे और आई लव यू टू कहकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने मंच से कहा कि वह सभी से प्यार करते हैं और यह प्यार का सिलसिला जिंदगी भर चलता रहेगा।

    इस दौरान शिवराज सिंह चौहान का एक बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री आते जाते रहते हैं लेकिन मामा परमानेंट हैं। शिवराज के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वाला संबोधन कोई नया नहीं है। लंबे समय से उनके समर्थक और आम लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते रहे हैं और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी कई कार्यक्रमों में उनके लिए मामा वापस आओ जैसे नारे सुनाई देते रहे हैं।

    उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए। देवास जिले के खातेगांव में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो के नारे लगाए। इसके बाद भोपाल में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान जीतू पटवारी जब अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में पहुंचे तो वहां भी उनके पक्ष में मुख्यमंत्री बनाने के नारे गूंजे। समर्थकों ने हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो और अगला सीएम कैसा हो जीतू भैया जैसा हो जैसे नारे लगाए।

    हालांकि मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है और मुख्यमंत्री पद की संभावनाओं पर अभी से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के भीतर भी भविष्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में आ सकते हैं। फिलहाल जीतू पटवारी के समर्थन में लग रहे नारे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं के उत्साह को जरूर दिखा रहे हैं।

    वहीं मंदसौर जिले के गरोठ में भाजपा विधायक चंदर सिंह सिसोदिया के काफिले को ग्रामीणों ने सड़क की समस्या बताने के लिए रोक लिया। आरोप है कि काफिला रोके जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें विधायक ग्रामीणों से बात करते दिखाई दे रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान विधायक प्रतिनिधि अनिल राठौर ने एक ग्रामीण को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल ले लिए गए। मामले को लेकर एक ग्रामीण ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है और अब पूरा विवाद थाने तक पहुंच गया है। आरोपों की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।

    इधर इंदौर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का एक बयान भी चर्चा में रहा। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते समय उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का पहला प्रधानमंत्री बता दिया। जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और सरदार पटेल कभी प्रधानमंत्री नहीं रहे। इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा नेता के सामान्य ज्ञान और इतिहास की जानकारी पर सवाल उठाए।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयान नारे और विवाद लगातार सुर्खियां बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के मामा परमानेंट वाले बयान से लेकर जीतू पटवारी के लिए मुख्यमंत्री के नारों और गरोठ में विधायक प्रतिनिधि पर लगे थप्पड़ के आरोप तक हर मामला राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे रहा है।