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  • एमपी कांग्रेस का बड़ा एक्शन प्लान, पार्टी लाइन से भटके नेताओं पर चलेगा अनुशासन का डंडा

    एमपी कांग्रेस का बड़ा एक्शन प्लान, पार्टी लाइन से भटके नेताओं पर चलेगा अनुशासन का डंडा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में बढ़ती अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो लगातार पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं या सोशल मीडिया के जरिए संगठन और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं। कांग्रेस का मानना है कि ऐसे नेताओं की बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है और राजनीतिक विरोधियों को हमला करने का मौका मिलता है। अब ऐसे मामलों में चेतावनी से लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार जिला कांग्रेस अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करें जो सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर पार्टी की आधिकारिक लाइन के विपरीत बयान देते हैं। इस सूची के आधार पर पहले संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यदि चेतावनी के बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं आता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई बैठकों में इस मुद्दे पर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि कुछ नेता लगातार ऐसे बयान देते हैं जिनसे संगठन की छवि प्रभावित होती है और पार्टी को अनावश्यक विवादों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से अब संगठन स्तर पर सख्ती करने का निर्णय लिया गया है ताकि अनुशासन कायम रखा जा सके।

    कांग्रेस ने केवल सार्वजनिक बयानबाजी ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया गतिविधियों को भी गंभीरता से लेने का फैसला किया है। जिला अध्यक्षों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता फेसबुक एक्स इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया मंचों पर पार्टी की नीतियों नेतृत्व या फैसलों के खिलाफ टिप्पणी करता है तो उसे भी अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी ने जिला इकाइयों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं हो वहां पूरे साक्ष्य और संबंधित दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए। प्रदेश स्तर पर जांच के बाद आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। संगठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी के भीतर रहकर सार्वजनिक रूप से संगठन की छवि को नुकसान न पहुंचाए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में कांग्रेस के कई नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर अपने ही नेतृत्व के खिलाफ दिए गए बयानों से पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों ने कई बार संगठन के भीतर मतभेदों को भी सार्वजनिक किया। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेतृत्व ने अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

    कांग्रेस का कहना है कि संगठन में विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है लेकिन इसके लिए पार्टी के आंतरिक मंच उपलब्ध हैं। सार्वजनिक रूप से पार्टी विरोधी बयान देना या सोशल मीडिया के जरिए संगठन की आलोचना करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा और सभी जिला इकाइयों से प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अब संगठनात्मक अनुशासन को लेकर पहले से कहीं अधिक सख्त नजर आने वाली है।

  • कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है।

    धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

    गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े।

    गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

    गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। 

  • कांग्रेस के मंच पर गूंजे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, CM का तंज और सांसद का बैनर वाला बचाव बना चर्चा का विषय

    कांग्रेस के मंच पर गूंजे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, CM का तंज और सांसद का बैनर वाला बचाव बना चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार का दिन बयानबाजी, विरोध और दिलचस्प घटनाओं के नाम रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, तो दूसरी ओर कांग्रेस के ही कार्यक्रम में पार्टी विरोधी नारे गूंजने लगे। वहीं मंडला में भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का बारिश से बचने के लिए बैनर का सहारा लेना भी चर्चा का विषय बन गया।

    उज्जैन के महिदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना नाम लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी पार्टी की कमान ‘नौसिखियों’ के हाथ में दे दी है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जब गाड़ी चलाने वाले ही अनुभवहीन हों तो गाड़ी आगे बढ़ने के बजाय पीछे ही जाएगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री पटवारी को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    उधर ग्वालियर में यूथ कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘रन फॉर OTF’ मैराथन कार्यक्रम में उस समय अजीब स्थिति बन गई जब कांग्रेस के मंच पर ही ‘कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद’ के नारे गूंजने लगे। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक जयवर्धन सिंह सहित कई नेता मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मैराथन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पुरस्कार नहीं मिलने से नाराज कुछ प्रतिभागियों ने मंच के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते नाराजगी नारेबाजी में बदल गई और कांग्रेस के मंच पर ही कांग्रेस विरोधी आवाजें सुनाई देने लगीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    राजनीतिक हलचल के बीच मंडला से भी एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जिले के निवास क्षेत्र के देवगांव में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति की ओर था कि अचानक तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर लगा बैनर उतार लिया और उसे सांसद के सिर के ऊपर तानकर खड़े हो गए। कुछ देर तक सांसद इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे बारिश से बचते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इसी बीच मंत्रालय से जुड़ा एक रोचक किस्सा भी चर्चा में रहा। एक पुलिस अधिकारी अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के कार्यालय पहुंचे, लेकिन महिला अधिकारी ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और कर्मचारी के माध्यम से ही कार्ड मंगवा लिया। यह घटना भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

    राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं से जुड़ी इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश की सियासत में हर दिन कुछ न कुछ ऐसा होता है, जो लोगों की चर्चा और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन जाता है।

  • मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव

    मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव


    मध्यप्रदेश । महू के मानपुर थाना क्षेत्र में रविवार को एक विवादित घटना के बाद तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari के रिश्तेदार बताए जा रहे संजय पटेल पर कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले उनकी बाइक को कार से टक्कर मारी गई और उसके बाद उन पर लाठी तथा धारदार हथियारों से हमला किया गया। घटना में गंभीर रूप से घायल संजय पटेल को उपचार के लिए इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार विष्णुप्रसाद पटेल ने आरोप लगाया है कि रविवार सुबह संजय पटेल बाइक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान पंजाबी ढाबे के पास एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टक्कर के बाद कार से उन्हें कुचलने का प्रयास किया गया। इसके बाद कार में सवार कुछ लोगों ने कथित रूप से उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार मिथुन ठाकुर, धनसिंह ठाकुर, विरेन ठाकुर और उनके अन्य साथियों ने लाठी तथा तलवार जैसे हथियारों से हमला किया। घटना में संजय पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में मानपुर थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों को कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को शांत कराया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस घटना की पृष्ठभूमि में दो पक्षों के बीच पहले से चला आ रहा विवाद भी सामने आया है। मानपुर पुलिस के मुताबिक 12 जून को नाली निर्माण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। उस समय संजय पटेल की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ घर में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट का मामला दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरे पक्ष ने भी पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप लगाते हुए प्रतिपक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

    पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और पुराने विवाद तथा ताजा घटना के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विशेष टीमें गठित की हैं।

    इस संबंध में एसडीओपी Lalit Singh Sikarwar और टीआई Mahendra Makashre ने बताया कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोप सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कुछ आरोपियों को गुंडा सूची में शामिल करने और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • कालापीपल में सियासी तनाव: बयान पर सियासत गरम, प्रदर्शन के दौरान पुलिस-कार्यकर्ता भिड़ंत

    कालापीपल में सियासी तनाव: बयान पर सियासत गरम, प्रदर्शन के दौरान पुलिस-कार्यकर्ता भिड़ंत


    कालापीपल । कालापीपल में सोमवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयान के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। यह विरोध मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर दिए गए बयान के बाद तेज हुआ।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और मुख्यमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के बयान को “अशोभनीय” बताते हुए माफी की मांग की और पुतला दहन का प्रयास किया।

    पुलिस ने रोका पुतला दहन, मौके पर बढ़ा तनाव
    स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मुख्यमंत्री का पुतला छीन लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और भीड़ को हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
    घटना के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण बना रहा, हालांकि अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के बाद स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया।

    राजनीतिक बयान से भड़की सियासत
    यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था-
    “हम तो अभिनंदन लाल हैं, तुम टपोरी लाल हो।” मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर सरकार के विकास कार्यों का विरोध करने का आरोप लगाते हुए जीतू पटवारी पर भी तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे प्रदेशाध्यक्ष पहले कभी नहीं देखे गए, जिनके कार्यकाल में चुनावी उम्मीदवार भी मैदान छोड़कर चले गए।

    कांग्रेस की प्रतिक्रिया और मांग
    कांग्रेस नेताओं ने इस बयान को अपमानजनक बताते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है।

    जमीनी हालात पर प्रशासन की नजर
    प्रशासन ने घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शांति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • रीवा घटना के विरोध में सड़क पर उतरा जैन समाज, सतना में दिखा आक्रोश

    रीवा घटना के विरोध में सड़क पर उतरा जैन समाज, सतना में दिखा आक्रोश


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के सतना में सोमवार को जैन समाज ने रीवा में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना के विरोध में मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, जिसमें समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। लोगों के हाथों में संतों की सुरक्षा से जुड़े पोस्टर थे और पूरे मार्ग में मौन रहकर श्रद्धांजलि और विरोध दर्ज कराया गया। यह जुलूस पन्नीलाल चौक से शुरू होकर सिटी कोतवाली परिसर में समाप्त हुआ।

     जीतू पटवारी समेत सर्व समाज की भागीदारी
    इस मौन जुलूस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari भी शामिल हुए। उनके साथ सर्व समाज के लोग और बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं। सभी ने मिलकर हादसे में जान गंवाने वाली साध्वियों को श्रद्धांजलि दी और न्याय की मांग उठाई। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का परिणाम है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

     राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
    प्रदर्शन के बाद सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया को सौंपा। इसमें मांग की गई कि-
    जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष नीति बनाई जाए
    रीवा हादसे की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो
    यदि साजिश की पुष्टि होती है, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए

    क्या है पूरा मामला?
    यह घटना रीवा में उस समय हुई जब पैदल विहार कर रही तीन जैन आर्यिका माताओं को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी थी। हादसे में दो साध्वियों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

    न्याय की मांग तेज
    सतना में हुए इस मौन जुलूस ने पूरे क्षेत्र में संवेदनशीलता और न्याय की मांग को और मजबूत कर दिया है। समाज का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

  • जीतू पटवारी आधी रात को विधानसभा पहुंचे, बोले-BJP के इशारे पर हो रही MLA की सदस्यता खत्म करने की साजिश

    जीतू पटवारी आधी रात को विधानसभा पहुंचे, बोले-BJP के इशारे पर हो रही MLA की सदस्यता खत्म करने की साजिश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Madhya Pradesh Congress President Jitu Patwari) गुरुवार देर रात करीब 10 बजे अचानक विधानसभा सचिवालय (Assembly Secretariat) पहुंच गए. उनके यहां पहुंचने से हड़कंप मच गया. जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Congress MLA Rajendra Bharti) की सदस्यता समाप्त करने के लिए साजिशन रात में विधानसभा सचिवालय खोला गया है।

    दरअसल जीतू पटवारी ने एक वीडियो जारी किया है. जिसमें वो रात करीब 10 बजे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे और विधानसभा के मुख्य सचिव के कमरे में चले गए. कमरे में विधानसभा के मुख्य सचिव के सामने पूर्व विधायक पीसी शर्मा (PC Sharma) पहले से ही बैठे हुए थे. जाते ही जीतू पटवारी विधानसभा के मुख्य सचिव से पूछते नज़र आ रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी के विधायक के पास तो कोर्ट का स्टे है और इस वक्त रात में विधानसभा सचिवालय खोलने का क्या औचित्य है?

    हालांकि यह बातचीत ज़्यादा लंबी नहीं चली क्योंकि विधानसभा के मुख्य सचिव थोड़ी देर बाद ही कार से रवाना हो गए. इसके बाद जीतू पटवारी विधानसभा से बाहर निकले और आरोप लगाया कि ‘कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने के लिए बीजेपी के इशारे पर रात को विधानसभा सचिवालय खोला गया।


    जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर लगाया ये आरोप

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि ‘ मोहन सरकार की हठधर्मिता एवं अलोकतांत्रिक रवैये पर जब प्रदेश कांग्रेस ने आपत्ति उठाई तो पूरा तंत्र निरुत्तर हो गया. स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में कार्यरत विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों और अधिकारियों का यह रवैया अस्वीकार्य है. हम बीजेपी की इस राजनीतिक गुंडागर्दी और विधानसभा सचिवालय के दुरुपयोग की कड़ी निंदा करते हैं. कांग्रेस राजनीतिक दुर्भावना की इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ेगी।

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को सेंधमारी के संकेत, दिग्विजय सिंह हो सकते हैं उम्मीदवार, BJP को दो सीट पक्की

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को सेंधमारी के संकेत, दिग्विजय सिंह हो सकते हैं उम्मीदवार, BJP को दो सीट पक्की


    भोपाल। मध्यप्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में रणनीति बनाने का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को तीसरी सीट पर संभावित सेंधमारी के संकेत मिले हैं जबकि दो सीटें बीजेपी के पक्के मानी जा रही हैं। हालांकि यदि कहीं कोई क्रास वोटिंग होती है तो तीसरी सीट भी बीजेपी के खाते में जा सकती है।

    इसको लेकर कांग्रेस के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि बीजेपी किसी भी हथकंडे का इस्तेमाल कर सकती है। हॉर्स ट्रेडिंग मंत्रियों के माध्यम से दबाव पैसों और ताकत का इस्तेमाल करके चुनाव प्रभावित करने का प्रयास किया जा सकता है। इसके बावजूद कांग्रेस पूरी निगाह बनाए हुए है और बीजेपी को सफलता नहीं लेने दी जाएगी।

    बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को पार्टी के अंदरूनी मतभेदों के रूप में बताया और कहा कि कमलनाथ दिग्विजय सिंह और अन्य नेताओं के बीच चल रही लड़ाई सामने आ रही है।

    कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें छोड़कर कोई भी उम्मीदवार हो सकता है और पार्टी तय करेगी कि किसे चुनाव में उतारा जाएगा। दिग्विजय सिंह के उम्मीदवार होने के सवाल पर जीतू ने कहा हो सकते हैं पार्टी निर्णय लेगी। मैं राज्यसभा चुनाव में खुद नहीं जाऊंगा। अध्यक्ष का पद गरिमा और जिम्मेदारी का है।

    हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर जीतू पटवारी ने कहा कि यह देश के लिए चिंता का विषय है। उनका आरोप है कि बीजेपी सभी एजेंसियों का दुरुपयोग करती है और उनकी सोच राजतंत्र जैसी है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे हर बार कांग्रेस पास होती आई है इस बार भी पार्टी राज्यसभा चुनाव में सफल होगी और परेशान होने की जरूरत नहीं है।

    राज्यसभा चुनाव में कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ी सियासी लड़ाई देखने को मिलने वाली है। दो सीटें बीजेपी की पक्की हैं लेकिन तीसरी सीट को लेकर मतदाता और नेताओं की रणनीति निर्णायक साबित होगी। कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक रही है ताकि हॉर्स ट्रेडिंग और दबाव के बावजूद तीसरी सीट पर जीत सुनिश्चित की जा सके।

  • मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम

    मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम



    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को जल संसाधन विभाग (WRD) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर केवल ‘ठेकेदारी और कमीशन’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस सबूतों के साथ CBI के पास जाएगी।

    पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया है, लेकिन पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”

    पांच प्रमुख आरोप
    टेंडर सिंडिकेट और गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा: पटवारी ने कहा कि बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही दिखाई देती हैं। यह रोटेशन सिस्टम है, जिसमें कभी एक कंपनी L1 (सबसे कम बोली) बनती है और कभी दूसरी। प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई है।

    दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मंत्रियों के रिश्तेदारों का दुबई में साझा व्यवसाय है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।

    फर्जी बैंक गारंटी का महाघोटाला: विभाग में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेकेदार करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।

    भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उस नागार्जुन कंपनी को दिया गया है जो भाजपा का दफ्तर बना रही है। पटवारी ने कहा, “पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन दो और फिर मर्जी से काम करो या लटका दो।”

    तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकलवाया गया।

    पटवारी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं और क्या सरकार विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराएगी।

    पटवारी ने कहा कि यदि 15 दिन में स्वतंत्र ऑडिट और जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ CBI जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिंचाई के रकबे का सरकारी आंकड़ा झूठा है और कांग्रेस खुद इसका सत्यापन कर सच सामने लाएगी।

  • विजयपुर चुनाव फैसले पर सियासी घमासान: पटवारी-सिंघार ने BJP पर साधा निशाना

    विजयपुर चुनाव फैसले पर सियासी घमासान: पटवारी-सिंघार ने BJP पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में विजयपुर को लेकर नया विवाद उभर कर सामने आया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ कहा कि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित करने के फैसले पर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। पटवारी ने न्यायपालिका का सम्मान करते हुए यह भी भरोसा जताया कि अदालत में पार्टी को न्याय मिलेगा। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसे यह स्वीकार नहीं हो रहा कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया।

    पटवारी ने भाजपा पर तंज कसते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का जिक्र किया और कहा कि अगर हिम्मत है तो उस मामले में भी निर्णय करवा कर दिखाएं। उनका कहना था कि भाजपा दबाव बनाकर फैसले करवाने की कोशिश कर रही है और यह पूरी तरह से राजनीतिक रोटेशन का हिस्सा लगता है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी राज्य सूचना आयोग में लंबित पदों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से नहीं हो पाई है और सरकार इसमें बेहद धीमी गति से काम कर रही है। सिंघार ने कहा कि सरकार सांप की तरह धीरे-धीरे रेंगती है जबकि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तुरंत होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत भी की है और दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करनी तय की गई है।

    सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले की भी याद दिलाई। उनका कहना था कि भाजपा दबाव बनाकर फैसले करवाने की कोशिश करती है और यह संभव है कि कांग्रेस की राज्यसभा सीट प्रभावित करने के लिए ऐसा किया जा रहा हो। वहीं गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई पर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि सरकार हर मामले में देर से निर्णय लेती है कोविड काल में भी देरी हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को टैक्स में कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए लेकिन वह केवल अपना खजाना भरने में लगी है।

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस पर पलटवार किया। इंदौर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और न्यायालय के फैसले पर अनावश्यक टिप्पणी करने से उनकी अज्ञानता उजागर होती है। उन्होंने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बयानों को तूल देने से भी बचने की सलाह दी।

    राजनीतिक गलियारों में यह विवाद लगातार गर्माता जा रहा है। विजयपुर विधानसभा सीट और संबंधित मामलों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच सियासी टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है जबकि बीजेपी अपने पक्ष को मजबूत रखने के लिए लगातार बयानबाजी कर रही है।