Tag: Jitu Patwari

  • राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    भोपाल । उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश की सियासत में भी जोर पकड़ चुका है। राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दलितों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान का आरोप लगाया जा रहा है उसमें दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    जीतू पटवारी ने बीजेपी की विचारधारा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद सभा स्थल का शुद्धिकरण कराया गया। पटवारी के मुताबिक जब राहुल गांधी ने इस कथित घटना और छुआछूत के मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया तो उनके खिलाफ ही FIR दर्ज करा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के सिस्टम में दलितों के लिए जगह नहीं है और आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी और आरएसएस की दलित विरोधी सोच से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मामले में बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कार्रवाई को चोरी और सीनाजोरी करार देते हुए कहा कि पहले दलित नेता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम उठाया गया और जब उसका विरोध किया गया तो विरोध करने वाले नेता के खिलाफ ही गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम को लेकर दलित समाज में नाराजगी पैदा हुई है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

    दरअसल विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा आयोजित हुई थी। आरोप है कि रैली समाप्त होने के कुछ दिन बाद श्री राम सेना नाम के संगठन से जुड़े लोगों ने मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ और हवन किया। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए विरोध जताया। कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद सार्वजनिक स्थान को शुद्ध करने की जरूरत पड़ती है।

    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

    राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन हल्द्वानी में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने से विवाद और गहरा गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह मामला वाल्मीकि समाज से जुड़े अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत में दावा किया गया कि मैदान में केवल साफ सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान हुआ था तथा इसका किसी जाति या मल्लिकार्जुन खड़गे से संबंध नहीं था। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी पर धार्मिक आयोजन को छुआछूत से जोड़कर जातिगत तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।

    पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और धारा 299 के साथ SC-ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। FIR के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस का विरोध सामने आने से यह विवाद अब उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज होने के साथ मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

  • भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार

    भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। भोपाल के बुधवारा चौराहे पर आजादी के पखवाड़े के समापन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की यूसीसी नीति पर जमकर हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। इसी मंच से उमंग सिंघार ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में कांग्रेस की सरकार बनती है तो यूसीसी को खत्म किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विधानसभा में बहुमत के बल पर इस कानून को पारित कराया है।

    विधायक आरिफ मसूद की ओर से आयोजित जंग ए आजादी में उलमा की कुर्बानी कार्यक्रम के समापन समारोह में यूसीसी को लेकर कांग्रेस का रुख खुलकर सामने आया। उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा इस कानून को गांव गांव तक लागू करने की है। उन्होंने इसे काला कानून बताते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने बहुमत का इस्तेमाल करके इसे पास करा लिया है लेकिन सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस इसे खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी। उनके इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत में यूसीसी को लेकर नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है।

    कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक आरिफ मसूद की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफरत का माहौल होने की बात कही जा रही है तब आजादी का पखवाड़ा आयोजित कर उन्होंने राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान के विचार को आगे बढ़ाने का काम किया है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

    मध्यप्रदेश में यूसीसी के प्रावधानों को लेकर सरकार की ओर से समान नागरिक व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके तहत विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रावधान है। बहुविवाह पर रोक के साथ विवाह और विवाह विच्छेद के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी पंजीकरण और सूचना से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। समर्थकों का तर्क है कि इन प्रावधानों से वैवाहिक अधिकारों में समानता आएगी और महिलाओं तथा बच्चों के कानूनी अधिकार मजबूत होंगे।

    उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में भी समान अधिकार का प्रावधान यूसीसी की प्रमुख विशेषताओं में बताया गया है। बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों और भरण पोषण से जुड़े प्रावधानों को भी अधिक समान बनाने की कोशिश की गई है। कानून में विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी कुछ पारंपरिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि इन प्रावधानों को लेकर अलग अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की राय अलग रही है।

    यूसीसी के दायरे को लेकर जनजातीय समाज को विशेष छूट का प्रावधान भी चर्चा में रहा है। अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कानून के कुछ प्रावधानों से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। सरकार इसे सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण से जोड़ती है जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसके कई प्रावधानों और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

    भोपाल के इस कार्यक्रम के बाद यूसीसी एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। उमंग सिंघार के सरकार बनने पर कानून खत्म करने वाले बयान ने आगामी राजनीतिक बहस को और धार दे दी है। अब यह मुद्दा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित न रहकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का नया आधार बन सकता है।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह से जुड़ा कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की है। पटवारी ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल द्वारा मांगी गई अभियोजन की मंजूरी को राज्य सरकार ने कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मंत्री विजय शाह को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि सेना की गरिमा से जुड़ा मामला है। पटवारी ने कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों का राष्ट्रीय स्वाभिमान है। इसी आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए उनसे इस मामले में स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।

    पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग भी की है। उनका आरोप है कि यदि सरकार किसी मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया में अभियोजन की मंजूरी रोकती है तो इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को कानून से अलग कोई संरक्षण हासिल है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का शर्मनाक अध्याय बताते हुए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

    इस विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हुए हलमा कार्यक्रम के दौरान हुई थी। यहां जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उनके बयान को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विरोध हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल यानी SIT के जरिए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच के बाद मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर राज्य सरकार के सामने मामला पहुंचा।

    अब राज्य सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के आरोप ने विवाद को फिर हवा दे दी है। कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की कार्रवाई के बावजूद सरकार का रुख कई सवाल खड़े करता है। वहीं मामले में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की बात भी सामने आई है।

    मामले में अब सरकार के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यदि अभियोजन की मंजूरी दी जाती है तो सरकार को इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देनी होगी और इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने की स्थिति में भी मामला पूरी तरह खत्म नहीं होता। मंत्री पद से हटने के बाद विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं रहने की स्थिति बन सकती है।

    ऐसे में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले जीतू पटवारी की राष्ट्रपति को चिट्ठी ने इस मामले को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे सेना के सम्मान और संवैधानिक जवाबदेही से जोड़ रही है वहीं अब सबकी नजर राज्य सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।

  • दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी

    दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी


    भोपाल। दतिया उपचुनाव के नतीजों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज कर न केवल अपना कब्जा बरकरार रखा बल्कि लंबे समय बाद कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भी भर दिया। जीत का जश्न भी कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में मनाया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई की जगह मेलोडी टॉफी बांटकर जीत की खुशियां साझा कीं और राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश की। दतिया से लेकर भोपाल तक कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और जीत का उत्सव मनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस जनादेश को मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव का संकेत बताते हुए इसे जनता की सकारात्मक सोच की जीत बताया और दतिया की जनता का आभार व्यक्त किया।

    दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जीत का भरोसा जताने वाले नेताओं के सुर नतीजे आने के बाद बदल गए। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि दतिया पहले भी कांग्रेस की सीट थी और अब भी कांग्रेस के पास ही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा को इस बार करीब सत्रह सौ वोट अधिक मिले हैं। वहीं नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उपचुनाव भले ही आम चुनाव जितने महत्वपूर्ण नहीं होते लेकिन हार को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा भी चर्चा के केंद्र में आ गए। चुनाव प्रचार के दौरान उनका भावुक होना काफी चर्चा में रहा था। हार के बाद विपक्ष ने भीतरघात के आरोप लगाए और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि टिकट नहीं मिलने की नाराजगी का असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कहा कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी पार्टी के कार्यकर्ता थे और आगे भी कार्यकर्ता ही रहेंगे। उनकी केवल एक अभिलाषा है कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी दे उसे पूरी निष्ठा से निभाने का अवसर मिले। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा नेतृत्व भविष्य में उन्हें कौन सी भूमिका सौंपता है।

    भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने हार स्वीकार करते हुए जनादेश का सम्मान किया। मीडिया से बातचीत के दौरान वे भावुक भी नजर आए। भीतरघात से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी ने पार्टी के खिलाफ काम किया है तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए क्योंकि भाजपा को मां मानने वाले कार्यकर्ता से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि पार्टी की पहचान अनुशासन और सेवा भाव से है इसलिए व्यक्तिगत नाराजगी को संगठन से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे चुनाव की समीक्षा करेगी और यदि कोई कार्यकर्ता अनुशासनहीनता या भीतरघात का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    **सूत्रों के अनुसार भाजपा ने चुनाव के दौरान हुई गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए हैं और उन्हें संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक भेजा गया है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होने के बाद दतिया से ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और रणनीतियों की शुरुआत माना जा रहा है। कांग्रेस जहां इस जीत से उत्साहित होकर इसे आगामी राजनीतिक लड़ाइयों का आधार बना रही है वहीं भाजपा हार के कारणों का विश्लेषण कर संगठन को और मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गई है। दोनों दलों के लिए यह परिणाम आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग

    दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग


    भोपाल । दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया सियासी संदेश सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर सरकार से नई राजनीतिक परंपरा शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दतिया का जनादेश केवल एक सीट का चुनाव परिणाम नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता की सोच और अपेक्षाओं का संकेत है। जनता अब केवल घोषणाएं और वादे नहीं बल्कि पारदर्शी शासन जवाबदेही और ठोस परिणाम चाहती है। यही समय है जब सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएं।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है और यह विश्वास तभी कायम रह सकता है जब सरकार अपने कामकाज का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखे। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में श्वेत पत्र जारी करने की नई परंपरा शुरू की जाए ताकि सरकार की उपलब्धियां चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ जनता तक पहुंच सकें। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और जनता को सही जानकारी भी मिलेगी।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार बिजली और पेयजल व्यवस्था शिक्षा स्वास्थ्य किसानों की स्थिति कृषि क्षेत्र युवाओं के रोजगार कानून व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा आदिवासी समाज और दलित पिछड़ा वर्ग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमवार श्वेत पत्र जारी करे। इन दस्तावेजों में वर्तमान स्थिति अब तक हुए कार्य भविष्य की योजनाएं और चुनौतियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए ताकि जनता वास्तविक तस्वीर देख सके और सरकार की जवाबदेही भी तय हो सके।

    पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि दतिया का परिणाम इस बात का संकेत है कि लोग अब राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप से आगे बढ़कर विकास और परिणाम आधारित राजनीति देखना चाहते हैं। प्रदेश की जनता चाहती है कि राजनीतिक दल केवल एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय समस्याओं के समाधान पर चर्चा करें। ऐसे में सरकार यदि श्वेत पत्र जारी करती है तो इससे जनता के बीच पारदर्शिता का संदेश जाएगा और लोकतांत्रिक संवाद को भी मजबूती मिलेगी।

    जीतू पटवारी ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस भी इस पहल में पूरी जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस सरकार के सामने तथ्य आधारित सुझाव और अपने विचार रखेगी। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस का आधार आंकड़े और तथ्य होने चाहिए न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी। यदि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई और सकारात्मक शुरुआत होगी।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दतिया के जनादेश को केवल चुनावी जीत या हार के नजरिए से न देखा जाए बल्कि इसे प्रदेश की जनता की उम्मीदों और बदलते राजनीतिक संदेश के रूप में स्वीकार किया जाए। यदि सरकार और विपक्ष दोनों जनहित के मुद्दों पर खुलकर संवाद करेंगे तो इससे शासन व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी और प्रदेश के विकास को भी नई दिशा मिलेगी। कांग्रेस का मानना है कि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और अब मध्य प्रदेश की राजनीति को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

  • कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला

    कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों की आज सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है। पिछले वर्ष अगस्त में लंबी प्रक्रिया के बाद बनाए गए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा के लिए कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक के नतीजे प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकते हैं और खराब प्रदर्शन करने वाले कई जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी भी छिन सकती है।

    दिल्ली में आयोजित इस समीक्षा बैठक की कमान कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल संभालेंगे। बैठक दो चरणों में आयोजित होगी। पहले चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी के साथ संगठन की स्थिति और जिलों की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में विभिन्न जिलाध्यक्षों से सीधे संवाद कर उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों को उनके कामकाज और संगठन विस्तार के आधार पर चार श्रेणियों ए बी सी और डी में विभाजित किया है। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ए श्रेणी के जिलाध्यक्षों को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन जिलाध्यक्षों ने संगठन निर्माण अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। इन्हें भविष्य में अलग से दिल्ली बुलाकर राहुल गांधी स्वयं संवाद करेंगे और आगामी रणनीति में उनकी भूमिका तय की जाएगी।

    बी श्रेणी में शामिल जिलाध्यक्षों को आज की बैठक में शामिल किया गया है। इनसे उनके संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और यह बताया जाएगा कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार कर ए श्रेणी तक पहुंचना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि इन जिलों में संगठन और अधिक मजबूत हो तथा आगामी चुनावों के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई जाए।

    सी श्रेणी में आने वाले जिलाध्यक्षों को अंतिम अवसर दिया जाएगा। समीक्षा के बाद उन्हें निश्चित समय सीमा में संगठनात्मक प्रदर्शन सुधारने के निर्देश मिलेंगे। यदि निर्धारित अवधि में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो भविष्य में उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

    सबसे अधिक निगाहें डी श्रेणी के जिलाध्यक्षों पर टिकी हैं। इन्हें कमजोर प्रदर्शन करने वाला माना गया है और ऐसे करीब दस जिलाध्यक्षों को बैठक के बाद पद से हटाया जा सकता है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होते ही इनके स्थान पर नए चेहरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी ताकि संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी दृष्टि से मजबूत बनाया जा सके।

    हाल ही में दतिया निकाय चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस नेतृत्व संगठन को और मजबूत करने के मूड में है। पार्टी अब केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर जोर दे रही है। यही वजह है कि संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है और प्रदर्शन को ही आगे की जिम्मेदारी का आधार बनाया जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली यह समीक्षा बैठक मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इससे न केवल संगठन में नई ऊर्जा आएगी बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति भी इसी के आधार पर तैयार की जाएगी। बैठक के बाद होने वाले फैसलों पर प्रदेशभर के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं।

  • बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा

    बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाओं ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। दतिया उपचुनाव के प्रचार से लेकर भोपाल में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और रीवा के थाने तक, कई घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं ने चुनावी आचार संहिता, राजनीतिक अनुशासन और पुलिस व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वे छोटे बच्चों से कांग्रेस के समर्थन में चुनावी नारे लगवाते नजर आ रहे हैं। बच्चों से “जात पे न पात पे, मुहर लगेगी हाथ पे” और “जीतेगा भाई जीतेगा, हाथ का पंजा जीतेगा” जैसे नारे लगवाने के बाद पटवारी ने उनसे पूछा कि उनकी बात सही है या गलत। इस पर बच्चों ने मासूमियत से “गलत” कह दिया। हालांकि उन्होंने इसे नजरअंदाज कर भाषण जारी रखा, लेकिन अब इस वीडियो को लेकर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    उधर राजधानी भोपाल में भाजपा कार्यालय तक निकाले गए कांग्रेस के पैदल मार्च के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने एक युवक को जेबकतरा बताकर बीच सड़क पर पीटना शुरू कर दिया। युवक को दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूंसों से मारा गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल पहुंचाया। घायल युवक माज कुरैशी ने दावा किया कि वह कांग्रेस कार्यकर्ता है और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। घटना ने कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इधर रीवा के अमहिया थाने से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की छवि को झटका दिया है। वीडियो में प्रधान आरक्षक अच्छेलाल शराब के नशे में थाने के भीतर हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। वह खुद को “पुलिस लाइन का गुंडा” बताते हुए खुलेआम शराब पीने की बात स्वीकार करता नजर आया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पुलिस विभाग प्रदेशभर में “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चला रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन घटना ने पुलिस व्यवस्था और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच राज्य के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि अंतिम समय तक कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस पद के लिए जोर-आजमाइश चलती रही। नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बाद भी नौकरशाही में इसे लेकर चर्चाएं थमती नजर नहीं आ रही हैं।

  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

  • पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला

    पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सोमवार से इंदौर से भोपाल तक 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन यात्रा शुरू कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा राहुल गांधी के छात्रों की गूंज अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। दो दिन तक चलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता छात्र और युवा शामिल हो रहे हैं। रास्ते में देवास सीहोर और भोपाल सहित कई जिलों से भी सैकड़ों लोग इस अभियान से जुड़ेंगे।

    यात्रा के दौरान देवास पहुंचे जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आए हर पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हर पेपर लीक मामले के पीछे भाजपा से जुड़े माफिया का नाम ही क्यों सामने आता है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरी है। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार देश के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने का मुद्दा उठा रहे हैं और यह यात्रा उसी अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संवेदनशील नहीं है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह मगरमच्छ की मोटी चमड़ी वाली सरकार है जिस पर जनता की समस्याओं का शायद कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा का प्रभाव आम जनता पर जरूर पड़ेगा और आने वाले समय में जनता बदलाव का फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।

    यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। जगह जगह स्वागत पंडाल लगाए गए और साइकिल यात्रा में स्थानीय लोगों ने भी भागीदारी निभाई। पूर्व कृषि मंत्री और विधायक सचिन यादव ने भी यात्रा में हिस्सा लिया और करीब 36 किलोमीटर साइकिल चलाकर देवास पहुंचे। उन्होंने भी परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री में नैतिकता है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    इस बीच इंदौर में यात्रा के दौरान गांधी प्रतिमा के सामने कचरा फैलने का मामला भी सामने आया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी के नाम दो हजार रुपये का स्पॉट फाइन लगाया। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना की जबकि कांग्रेस ने यात्रा को छात्रों और युवाओं की आवाज से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की बात कही।

    कांग्रेस की यह साइक्लोथॉन अब भोपाल की ओर बढ़ रही है जहां यात्रा के समापन पर छात्रों बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा संदेश देने की तैयारी की जा रही है।