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  • मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने

    मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन शून्य घोषित होने के फैसले को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए विश्वास जताया कि वहां न्याय मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले में दबाव बनाकर निर्णय करवाना चाहती है, क्योंकि उन्हें यह स्वीकार नहीं है कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया।

    पटवारी ने भाजपा को चुनौती देते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है तो इस मामले में भी निर्णय कराए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य में सूचना आयोग के खाली पदों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है और सरकार इस मामले में बेहद धीमी गति से काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत कर दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग भी की।

    सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले और गैस सिलेंडर की कमी एवं महंगाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि भाजपा हर मामले में देर से निर्णय लेती है और जनता को राहत देने के बजाय केवल खजाना भरने में लगी है।

    वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और अनावश्यक टिप्पणियों से उनकी अज्ञानता उजागर होती है।

    यह राजनीतिक वार्ता मध्य प्रदेश में आगामी चुनाव और राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ते तनाव की झलक देती है। विपक्ष और सरकार के बीच जारी इस बहस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं।

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  • कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल

    कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में किसानों के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। Jitu Patwari ने प्रदेश सरकार के “कृषक कल्याण वर्ष” पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav पर तीखा हमला बोला। भोपाल स्थित Madhya Pradesh Congress Committee कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों के कल्याण की बात कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनके साथ इस दौरान Mukesh Nayak, Abhay Dubey और Sukhdev Panse भी मौजूद थे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि शुरुआती दिनों में डॉ. मोहन यादव पहलवानी करते थे और Ujjain में उन्हें पहलवान के नाम से जाना जाता था। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि जब कोई अधिकारी उनके सामने “पहलवानी का दांव” चलता है तो मुख्यमंत्री खुद ही चित हो जाते हैं। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग हर महीने देखने को मिलती है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों को लेकर भाजपा की चुनावी गारंटियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों से वादा किया गया था कि गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी जाएगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि Ujjain Mandi में गेहूं का भाव करीब 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र की मंडी की है, जिससे साफ है कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वीडियो भी जारी किया था, जिसमें मंडी में किसानों को कम दाम पर गेहूं बेचते देखा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ किसानों के हित की बात करती है, लेकिन बाजार में किसानों को उनकी उपज का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे पिछले 20 साल की नहीं बल्कि केवल पिछले एक साल की उपलब्धियों का हिसाब प्रदेश की जनता के सामने रखें। पटवारी के अनुसार अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम कर रही है तो उसे अपने कामकाज का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कृषि तंत्र की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि से जुड़े विभागों में भारी संख्या में पद खाली पड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कृषि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद रिक्त हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद खाली हैं, जबकि उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद रिक्त पड़े हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद खाली होने से किसानों से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं।

    पटवारी ने कहा कि जब कृषि से जुड़े विभागों में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी ही नहीं हैं तो सरकार किसानों के कल्याण की बात किस आधार पर कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द इन रिक्त पदों को भरे और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि प्रदेश के किसान आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।

  • खाली कुर्सियों से कैसे होगा किसान कल्याण, जीतू पटवारी का पीएम मोदी को पत्र, MP के कृषि विभाग में हजारों पद खाली

    खाली कुर्सियों से कैसे होगा किसान कल्याण, जीतू पटवारी का पीएम मोदी को पत्र, MP के कृषि विभाग में हजारों पद खाली


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में कृषि व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर राज्य के कृषि और उससे जुड़े विभागों में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया है। पटवारी ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किए जाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है, तब केवल घोषणाओं से किसानों का भला संभव नहीं है।

    अपने पत्र में पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी उदासीनता के कारण प्रदेश का कृषि तंत्र कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जो प्रशासनिक ढांचा होना चाहिए, वह ही अधूरा पड़ा है। ऐसे में “कृषक कल्याण वर्ष” जैसी घोषणाएं जमीन पर प्रभावी साबित नहीं होंगी।

    पटवारी ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में कुल 14,537 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 8,468 पद खाली पड़े हैं। यानी विभाग का लगभग 60 प्रतिशत स्टाफ मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पद रिक्त होने से किसानों तक सरकारी योजनाएं सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं।

    उन्होंने खास तौर पर ‘ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी’ जैसे अहम पदों का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी कमी के कारण खेत स्तर पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। साथ ही फसल नुकसान का सर्वे, मृदा परीक्षण और Soil Health Card Scheme जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हो रहा है।

    पटवारी ने अपने पत्र में कृषि से जुड़े अन्य विभागों की स्थिति भी सामने रखी।

    उनके अनुसार उद्यानिकी विभाग में 3,079 पदों में से 1,459 पद खाली हैं, जो लगभग 47 प्रतिशत हैं। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 पदों में से 722 पद रिक्त हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 पदों में से 1,797 पद खाली बताए गए हैं। इसके अलावा खाद्य विभाग के जिला कार्यालयों में 598 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 245 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं कृषि अभियांत्रिकी विभाग में 1,065 पदों में से 557 पद खाली पड़े हैं।

    इस मुद्दे पर पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चौहान लंबे समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संस्थागत ढांचे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

    पटवारी के अनुसार वर्तमान सरकार भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी व्यवस्था कमजोर बनी हुई है।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि मध्य प्रदेश के कृषि और उससे जुड़े विभागों में खाली पदों की तत्काल समीक्षा कराई जाए और राज्य सरकार को जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर संस्थागत क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की भी मांग की।

    पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि मध्य प्रदेश का किसान पहले ही मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों में खाली पदों की वजह से उसे आवश्यक सेवाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और किसानों के हित में ठोस कदम उठाएगी।

    पटवारी द्वारा भेजे गए इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी भेजी गई है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में कृषि व्यवस्था और सरकारी भर्तियों को लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • इंदौर-भोपाल घटनाक्रम पर गरमाई सियासत, PCC चीफ जीतू पटवारी ने CS को लिखा पत्र

    इंदौर-भोपाल घटनाक्रम पर गरमाई सियासत, PCC चीफ जीतू पटवारी ने CS को लिखा पत्र


    भोपाल । भोपाल और इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट और पार्टी कार्यालयों पर हुए कथित हमलों को लेकर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी आपत्ति जताते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखा है।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि भोपाल, इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यालयों पर संगठित रूप से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर जानलेवा हमले का प्रयास किया गया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बनी रही। पटवारी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है।

    उन्होंने कहा कि पीसीसी कार्यालय पर हुए प्रदर्शन ने गुंडागर्दी का रूप ले लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और कार्यालयों में तोड़फोड़ की कोशिश की गई। उनके अनुसार, यह घटनाएं प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होंगी।

    पत्र में पटवारी ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी भी स्तर पर राजनीतिक संरक्षण या सहमति की भूमिका पाई जाती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता का कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर विश्वास कायम रह सके। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

    इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

  • मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ

    मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, काटने और सुधार की प्रक्रिया 23 जनवरी को खत्म हो रही है। इसी बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है।कांग्रेस का दावा है कि सिर्फ 10 दिनों में लगभग 11 लाख वोटरों के नाम काटने के लिए बीजेपी ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 उपलब्ध कराए हैं।

    कांग्रेस का मुख्य आरोप: “प्रिंटेड फॉर्म-7” से वोटर हटाए जा रहे हैं
    कांग्रेस का कहना है कि जिन फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं, वे प्री-प्रिंटेड (पहले से भरे हुए) हैं।

    इन फॉर्मों में विधानसभा क्रमांक,विधानसभा का नाम,हटाने वाले मतदाता का नाम और विवरण पहले से दर्ज है।
    लेकिन आवेदक का नाम और हस्ताक्षर कहीं नहीं है।कांग्रेस इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उल्लंघन और लोकतंत्र पर हमला करार दे रही है।

    जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, बीजेपी चुनाव हारने के डर से मैदान में नहीं, वोटर लिस्ट में खेल रही है।
    बिना आवेदक के नाम और हस्ताक्षर वाले प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण हैं।
    SC, ST, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मताधिकार को छीनने की यह सोची-समझी साजिश है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर अदालत तक यह मुद्दा ले जाएगी।हम एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटने नहीं देंगे।

    कांग्रेस की मांग: EC तुरंत कार्रवाई करे
    कांग्रेस ने चुनाव आयोग से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है
    सभी प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 की तुरंत जांच
    बिना वैध आवेदन और हस्ताक्षर वाले फॉर्मों को निरस्त
    दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई
    कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और मताधिकार की रक्षा का मामला है।

    एक व्यक्ति ने 25-25 आपत्तियां”कांग्रेस का नया आरोप
    पटवारी ने कहा कि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति केवल एक ही आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक ही व्यक्ति द्वारा 25-25 आपत्तियां दर्ज कराई हैं।उन्होंने कहा कि इसके प्रमाण चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं।

    BLO को चेतावनी: अनियमितता मिली तो FIR
    पटवारी ने BLOs को चेतावनी दी कि, यदि किसी भी बूथ पर अनियमितता पाई गई, तो संबंधित BLO के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
    उन्होंने कहा कि कुछ BLO ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सर्विस रिकॉर्ड (CR) खराब हो सकती है।

    फर्जी आपत्तियों का आरोप
    पटवारी ने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को जानकारी तक नहीं है, और उनके नाम से ऑनलाइन फर्जी आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं।

    यह खासकर अल्पसंख्यक और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहा है।उन्होंने कहा:वोट चोरी करके चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री विश्वास सारंग पर भी सवाल
    पटवारी ने कहा कि मंत्री विश्वास सारंग पिछले चुनाव हार चुके थे।
    उनकी सीट और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों से करीब एक-एक लाख वोट कम हुए हैं, जहाँ जीत-हार का अंतर अक्सर इतना ही रहता है।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की कि इन गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर भारी आरोप लगाए हैं और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि 23 जनवरी तक समय बहुत कम है।

  • फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा

    फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा



    इंदौर। इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सवाल पूछने वाले एक पत्रकार से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बदसलूकी और अपशब्दों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे इंदौर को शर्मसार करने वाला बताते हुए विजयवर्गीय से तत्काल इस्तीफा लेने की मांग की है।

    पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

    जो जिम्मेदारी सरकार की थी, वह मीडिया ने निभाई। उन्होंने पत्रकारों का आभार जताते हुए कहा कि मंत्री ने मुफ्त इलाज के दावे किए, लेकिन जब उसी पर एक पत्रकार ने सवाल पूछा तो उसे गालियां दी गईं। कांग्रेस उस पत्रकार के साथ खड़ी है और उसके सम्मान में कोई कमी नहीं आने देगी।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि पहले 25 बच्चों की मौत हुई, अब 13 और लोगों की जान चली गई, लेकिन आज तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली।

    पटवारी ने भाजपा सरकार को हत्यारी सरकार बताते हुए कहा कि जिस इंदौर को जनता ने स्वच्छता का तमगा दिलाया, उसी शहर की जनता को जहर मिला पानी पिलाया गया।

    कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए दो पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। पटवारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और घायलों को बेहतर व निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।

    इस बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में गलती मानने की बजाय चोरी और सीनाजोरी की जाती है। हर घटना का ठीकरा विपक्ष या पुराने नेताओं पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने देशभर में बढ़ती हिंसा और कथित घोटालों का जिक्र करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

    घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    दरअसल, बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक रिपोर्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज खर्च के रिफंड को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कहा, फोकट सवाल मत पूछो। रिपोर्टर के विरोध करने पर विजयवर्गीय ने आपा खोते हुए अपशब्द कह दिए। हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने शब्दों को लेकर खेद भी जताया, लेकिन तब तक यह मामला सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका था।