Tag: Jordan

  • लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, जॉर्डन में US सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी

    लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, जॉर्डन में US सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी


    नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर दो सैन्य लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमले में कई ईरानी सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए तथा घायल हुए हैं।

    अमेरिका ने लारक द्वीप पर दो लॉन्चरों को बनाया निशाना

    अमेरिकी सेना ने रविवार को लारक द्वीप पर दो ईरानी लॉन्चरों पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, IRGC के जवान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री खदानें बिछाने के लिए रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।

    यह जुलाई के अंत के बाद ईरान के भीतर अमेरिका का पहला ज्ञात हमला बताया जा रहा है। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े दो सप्ताह के अमेरिकी सैन्य अभियान को रोक दिया था।

    एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस और बाद में रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सेना ने दो ईरानी लॉन्चरों को निशाना बनाया। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना इलाके पर करीबी नजर रख रही है और जलडमरूमध्य से होकर व्यापार के मुक्त प्रवाह की सुरक्षा के लिए तैयार है।

    समुद्री खदानों को लेकर अमेरिका की जीरो टॉलरेंस नीति

    अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी सेना ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य शिपिंग रूट से समुद्री खदानें हटाने का अभियान पूरा किया था।

    इसके बाद ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि समुद्री खदानें बिछाने में शामिल किसी भी जहाज या नाव को तुरंत और व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा था कि समुद्री खदानें बिछाने को लेकर अमेरिका की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है।

    ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया

    लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में IRGC ने सोमवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन में किंग हुसैन और अल-अज्रक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी मीडिया ने इसकी जानकारी दी।

    इससे पहले IRGC ने कहा था कि अमेरिकी हमले का जवाब ईरान के लोग देंगे और हमलावर को इसकी कीमत चुकानी होगी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमले में कई ईरानी सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए तथा घायल हुए हैं।

    IRGC के एक प्रवक्ता ने कहा कि लारक द्वीप पर हमले की कीमत अमेरिका को आर्थिक और सैन्य, दोनों मोर्चों पर चुकानी होगी।

    ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत का भी दावा

    IRGC से जुड़े तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अलग से दावा किया कि हमले में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के मुताबिक, इसमें दो लोगों की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए हैं।

    ईरान की ताजा जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव और बढ़ने की आशंका है। अमेरिका अब सीधे बमबारी अभियान के साथ-साथ ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। यह संघर्ष अब सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है।

  • सब्स्टीट्यूट बनकर उतरे मेसी ने फिर दिखाया जादू, अर्जेंटीना की जीत के साथ विश्व कप में बनाया नया रिकॉर्ड

    सब्स्टीट्यूट बनकर उतरे मेसी ने फिर दिखाया जादू, अर्जेंटीना की जीत के साथ विश्व कप में बनाया नया रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने अपने शानदार अभियान को जारी रखते हुए ग्रुप चरण के अंतिम मुकाबले में जॉर्डन को 3-1 से हराकर नॉकआउट दौर में मजबूत अंदाज में प्रवेश किया। डलास में खेले गए इस मुकाबले में अर्जेंटीना ने पूरे मैच के दौरान गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए अपनी श्रेष्ठता साबित की। जीत के साथ टीम ने ग्रुप चरण का समापन अजेय रहते हुए किया।

    अर्जेंटीना के मुख्य कोच ने इस मुकाबले में टीम संयोजन में कई बदलाव किए और कप्तान लियोनेल मेसी को शुरुआती एकादश में शामिल नहीं किया। उन्हें दूसरे हाफ में बतौर स्थानापन्न मैदान पर उतारा गया। इसके बावजूद टीम के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा और शुरुआती मिनटों से ही अर्जेंटीना ने लगातार जॉर्डन के रक्षापंक्ति पर दबाव बनाए रखा।

    मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना को एक गोल मिला, लेकिन ऑफसाइड के कारण उसे मान्यता नहीं मिली। इसके बाद टीम ने आक्रमण जारी रखा और 19वें मिनट में जियोवानी लो सेल्सो ने शानदार बाएं पैर के शॉट से गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई। पहले गोल के बाद अर्जेंटीना का आत्मविश्वास और बढ़ गया तथा उसने लगातार मौके बनाना जारी रखा।

    पहले हाफ के दौरान अर्जेंटीना को पेनल्टी भी मिली, जिसे लाउतारो मार्टिनेज ने बिना किसी गलती के गोल में बदल दिया। इस गोल के साथ अर्जेंटीना ने 2-0 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली और जॉर्डन पर दबाव और बढ़ गया।

    दूसरे हाफ में जॉर्डन ने संघर्ष का परिचय देते हुए एक शानदार मूव तैयार किया और अल-तमारी ने बेहतरीन गोल कर स्कोर 2-1 कर दिया। इस गोल के बाद कुछ समय के लिए मुकाबला रोमांचक नजर आया, लेकिन अर्जेंटीना ने अपनी लय नहीं खोई और लगातार गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा।

    मैच के अंतिम चरण में मैदान पर उतरे लियोनेल मेसी ने एक बार फिर अपनी क्लास दिखाई। उन्होंने फ्री किक पर शानदार गोल करते हुए अर्जेंटीना की बढ़त 3-1 कर दी और टीम की जीत पर मुहर लगा दी। उनके गोल के बाद जॉर्डन के लिए वापसी की सभी संभावनाएं समाप्त हो गईं।

    इस मुकाबले के साथ मेसी ने विश्व कप 2026 में अपना छठा गोल दर्ज किया। इसके अलावा उन्होंने लगातार सात विश्व कप मैच जीतने वाले पहले खिलाड़ी बनने की उपलब्धि भी हासिल की। विश्व कप इतिहास में उनके कुल गोलों की संख्या अब 19 हो गई है, जो उनके शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    ग्रुप चरण में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद अर्जेंटीना अब नॉकआउट मुकाबलों में भी खिताब बचाने के मजबूत दावेदारों में शामिल है। टीम का संतुलित खेल, मजबूत आक्रमण और अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन उसे आगामी दौर में भी खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाता है।

  • पैगंबर के वंशज की हुकूमत, फिर भी ईरान से टकराव क्यों? जॉर्डन की रणनीतिक भूमिका बनी विवाद की वजह

    पैगंबर के वंशज की हुकूमत, फिर भी ईरान से टकराव क्यों? जॉर्डन की रणनीतिक भूमिका बनी विवाद की वजह

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच जॉर्डन एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष के केंद्र में आ गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जॉर्डन की रणनीतिक स्थिति और पश्चिमी देशों के साथ उसके मजबूत संबंध उसे लंबे समय से ईरान समर्थित आलोचनाओं और हमलों का संभावित लक्ष्य बनाते रहे हैं।

    हालिया घटनाक्रम में ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान ने जॉर्डन में स्थित एक महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइल हमले का दावा किया है। हालांकि हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इस दावे ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। जॉर्डन लंबे समय से अमेरिका का करीबी सुरक्षा साझेदार रहा है और उसके कई सैन्य अड्डों का उपयोग क्षेत्रीय अभियानों में किया जाता रहा है।

    विशेष रूप से अल-अजराक एयर बेस को क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का अहम केंद्र माना जाता है। यह सैन्य अड्डा जॉर्डन की राजधानी अम्मान से पूर्व दिशा में स्थित है और विभिन्न सुरक्षा अभियानों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ईरान का आरोप रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी उसके राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करती है। इसी कारण ऐसे सैन्य ठिकाने अक्सर ईरानी बयानबाजी और रणनीतिक विरोध का हिस्सा बनते रहे हैं।

    जॉर्डन और ईरान के बीच तनाव केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। जॉर्डन ने वर्षों से अमेरिका और इजरायल के साथ संतुलित लेकिन घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं। दूसरी ओर ईरान स्वयं को क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल की नीतियों का प्रमुख विरोधी मानता है। ऐसे में जॉर्डन को अक्सर उस राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे का हिस्सा माना जाता है जिसका ईरान विरोध करता है।

    विश्लेषकों के अनुसार इजरायल की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जॉर्डन की भूमिका भी दोनों देशों के बीच अविश्वास को बढ़ाती रही है। क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान कई बार ऐसी स्थितियां बनी हैं जब जॉर्डन के हवाई क्षेत्र और सुरक्षा तंत्र का उपयोग संभावित खतरों को रोकने के लिए किया गया। इससे ईरान समर्थक समूहों के बीच जॉर्डन की छवि पश्चिम समर्थक देश के रूप में और मजबूत हुई है।

    जॉर्डन के शासक किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर मोहम्मद का वंशज माना जाता है और उनका परिवार लंबे समय से इस ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा रहा है। इसके बावजूद क्षेत्रीय राजनीति में धार्मिक पहचान से अधिक महत्व रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का रहा है। यही कारण है कि धार्मिक विरासत के बावजूद जॉर्डन और ईरान के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार बने हुए हैं।

    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है और हवाई यातायात पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। जॉर्डन, कुवैत और बहरीन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों पर बढ़ता दबाव इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है।

    मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों में जॉर्डन की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने, सुरक्षा सहयोग जारी रखने और बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने की चुनौती उसके सामने पहले से अधिक गंभीर रूप में मौजूद है।