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  • JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन विधानसभा घेराव के बाद और तेज हो गया है। 10 अगस्त को रांची में विधानसभा की ओर मार्च के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें लगभग 100 लोग नामजद हैं, जबकि करीब 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया है।

    छात्र संगठन लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े थे। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी।

    स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया और स्थिति को हिंसक बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    हंगामे के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद लोगों के अलावा बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब उपलब्ध CCTV फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो के आधार पर प्रदर्शन में कथित तौर पर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस की जांच का मुख्य आधार घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे और उपलब्ध वीडियो फुटेज हैं। अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र संगठनों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराना है। प्रदर्शनकारी विवादित परीक्षाओं की समीक्षा या उन्हें रद्द करने, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन कई सप्ताह से जारी है और विधानसभा घेराव के बाद सरकार तथा प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच विवाद और बढ़ गया है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का असर न पड़े।

    FIR दर्ज होने के बावजूद छात्र आंदोलन के पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारी 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए रांची प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री आवास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। प्रशासन के सामने अब एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के आरोपों और मांगों को लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

    JPSC और JSSC से जुड़ा विवाद अब परीक्षा संबंधी शिकायतों से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शन और जांच की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।

  • देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से मांगी छुट्टी, जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा मुद्दे पर आंदोलन स्थल लौटने की जताई इच्छा

    देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से मांगी छुट्टी, जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा मुद्दे पर आंदोलन स्थल लौटने की जताई इच्छा


    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की है। अनशन के 12वें दिन उन्होंने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर अस्पताल से डिस्चार्ज करने का आग्रह किया है। महतो का कहना है कि वह इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनका मन लगातार आंदोलन स्थल पर लगा हुआ है।

    देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों को लेकर चल रहा है। वह सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में छात्र और युवा भी आंदोलन में शामिल हैं।

    10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में महतो को चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। तब से उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। दूसरी ओर, उनके साथी प्रदर्शन स्थल पर आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    अस्पताल से छुट्टी की मांग करते हुए लिखे पत्र में महतो ने अपने साथियों से दूर रहने को लेकर परेशानी जताई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उनके शरीर का इलाज हो रहा है, लेकिन उनका मन आंदोलन स्थल पर है। उनके मुताबिक, उनके साथी लगातार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे समय में उनका अस्पताल में रहना उन्हें भीतर से परेशान कर रहा है।

    महतो ने चिकित्सकों से आग्रह किया है कि उन्हें अस्पताल से जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे प्रदर्शन में वापस पहुंच सकें। उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलती है, तो वह डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए उपचार जारी रखेंगे।

    छात्र नेता ने अपने आंदोलन को केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बताया है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र और युवा परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर उनके साथ खड़े हैं। ऐसे में वह खुद को आंदोलन से जुड़े छात्रों के प्रति जिम्मेदार मानते हैं। उनका मानना है कि जब छात्र अपनी मांगों के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, तब उनका उनसे अलग रहना उचित नहीं लग रहा।

    जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच यह आंदोलन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार से जवाब की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर प्रदर्शन का सिलसिला जारी है।

    फिलहाल देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल में भर्ती हैं और उनका अनशन भी जारी है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। यदि उन्हें छुट्टी मिलती है, तो वह अपने साथियों के बीच प्रदर्शन स्थल पर लौट सकते हैं। इस बीच आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।

  • झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को राजधानी रांची में बड़े प्रदर्शन में बदल गया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव मार्च के लिए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव की स्थिति बनी और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिशों के बीच पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए।

    विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शन का तरीका भी कई जगह अलग-अलग नजर आया। कुछ छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ते दिखाई दिए। कई स्थानों पर कंटीले तार लगाए गए थे, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने उन्हें भी पार करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के बीच बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग प्रतीकों और तरीकों का इस्तेमाल किया। एक छात्र हाथ में गुलाब और तिरंगा लेकर पहुंचा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का संदेश देता दिखाई दिया। दूसरी ओर कुछ प्रदर्शनकारियों ने लोकप्रिय फिल्मों और किरदारों से प्रेरित अंदाज अपनाकर भी अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।

    प्रदर्शन के दौरान एक युवक पुष्पा राज के अंदाज में नजर आया। बताया गया कि वह महाराष्ट्र से कुल्हाड़ी लेकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचा था। इसके अलावा एक छात्र स्पाइडरमैन की पोशाक में दिखाई दिया। इन अलग-अलग रूपों ने प्रदर्शन के दृश्य को चर्चा का विषय बना दिया।

    छात्रों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए रचनात्मक तरीकों का भी सहारा लिया। परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उजागर करने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी नौकरी को तौलकर बेचने जैसी प्रस्तुति करते दिखाई दिए। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों की नाराजगी और सवालों को प्रतीकात्मक तरीके से सामने रखना था।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। इसके बावजूद कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच नाचते और विरोध जताते दिखाई दिए। इस दौरान प्रदर्शन का माहौल कुछ समय के लिए अलग रूप लेता नजर आया, लेकिन छात्रों की मुख्य मांगें भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई से जुड़ी रहीं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। बाद में लाठीचार्ज की कार्रवाई किए जाने और कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा वहां से ले जाने की जानकारी सामने आई।

    छात्रों ने कई जगह फ्लैश लाइट और तिरंगा मार्च भी निकाला। भारत माता की जय के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। कुछ छात्र भगत सिंह के पोस्टर लेकर भी आंदोलन में शामिल हुए। इन गतिविधियों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर अपनी मांगों को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया।

    JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। रांची में हुए विधानसभा मार्च के दौरान सामने आए अलग-अलग दृश्य यह दिखाते हैं कि छात्रों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए पारंपरिक विरोध के साथ कई रचनात्मक तरीकों का भी इस्तेमाल किया।

  • झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय तेज हो गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेड पार किए और कई जगह उन्हें हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

    आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक आठ बैरिकेड तोड़ दिए। मुख्य सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने के बाद कई छात्र कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड खींचकर रास्ते से हटाए और फिर समूह के साथ आगे बढ़ते रहे।

    आंदोलन की अगुवाई जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मोर्चा के स्वयंसेवकों ने की। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा के गेट की तरफ आगे नहीं बढ़ने की अपील की। उन्होंने छात्रों से जगन्नाथ मंदिर तक मार्च करने और वहीं धरना जारी रखने का आग्रह किया। भीड़ में किसी असामाजिक तत्व की मौजूदगी की जानकारी देने की अपील भी की गई।

    प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों और कुछ छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसके बाद आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए तीन स्तर की मानव शृंखला बनाई गई। बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन स्थल पर वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे भी सुनाई दिए।

    इस आंदोलन में नौ दिनों से अनशन कर रहे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की मौजूदगी भी खास रही। जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन पर बैठे महतो को उनके समर्थक कपड़े और डंडों से तैयार पालकी में कंधों पर लेकर विधानसभा के करीब पहुंचे। इससे पहले एंबुलेंस से विधानसभा की ओर जाते समय उन्हें जगन्नाथ मंदिर के पास रोक दिया गया था।

    रोक दिए जाने के बाद समर्थकों ने महतो को कंधों पर उठा लिया और कुछ दूरी तक उन्हें इसी तरह आगे ले गए। बाद में वह पालकी पर बैठकर धरना स्थल तक पहुंचे। इस दौरान उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। महतो की मौजूदगी ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन का भी संकेत दिया।

    सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के बाद जेएलकेएम के विधायक भी प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों से विधानसभा के गेट तक नहीं जाने और उससे पहले ही रुकने की अपील की। विधायक ने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने का आग्रह किया और प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने को कहा।

    प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तर पर बैरिकेडिंग की थी। वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और ड्रोन के जरिए प्रदर्शन की निगरानी तथा रिकॉर्डिंग भी की गई।

    प्रदर्शन के दौरान विरोध का अलग अंदाज भी देखने को मिला। कुछ छात्र स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में पहुंचे और अपने हाथों में संदेश लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। भीड़ में फिल्म पुष्पा के किरदार जैसी वेशभूषा में भी एक प्रदर्शनकारी नजर आया।

    छात्रों का यह आंदोलन अब विधानसभा के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं। वहीं प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर की ओर आगे बढ़ने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित रखने में जुटा है।

  • JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया

    JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया


    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को विधानसभा मार्च तक पहुंच गया। राज्य के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे और विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।

    सुबह से ही विधानसभा की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस की ओर से छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। छात्रों का कहना था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और वे सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना चाहते हैं।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर बैरिकेड टूटने की स्थिति भी सामने आई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार कर लिए और नई विधानसभा की दिशा में बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

    वॉटर कैनन के इस्तेमाल के दौरान भी कुछ छात्रों ने विरोध जारी रखा। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने नाचते और गाते हुए पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कुछ समय बाद पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया।

    लाठीचार्ज के बाद छात्रों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे और इसके बावजूद उन पर लाठियां बरसाई गईं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि चोटें हाथ, सिर और चेहरे पर भी लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य सरकार पर निशाना साधा और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।

    इस बीच डुमरी के विधायक जयराम महतो भी विधानसभा से बाहर निकलकर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों के समर्थन की बात कही और कहा कि उनकी आवाज को विधानसभा के भीतर और सड़क पर भी उठाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जयराम महतो का समर्थन करते हुए उन्हें अपने बीच शामिल किया।

    छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और अब सरकार को उनकी शिकायतों पर स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से यह भी कहा गया कि यदि पुलिस उन्हें विधानसभा जाने से रोकती है तो वे शांतिपूर्वक वहीं रुकने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि बल प्रयोग की जरूरत नहीं है और वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी बीजेपी नेताओं ने कथित भर्ती अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ बीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया। इस तरह छात्रों के विधानसभा मार्च के साथ राजनीतिक विरोध भी तेज दिखाई दिया।

    फिलहाल रांची में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मुख्य मांग JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट

    JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट


    नई दिल्ली । 
    झारखंड में JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। रांची में सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पुरानी परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने के संकेत मिले हैं।

    बैठक में सबसे अहम मुद्दा परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का रहा। सरकार वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने के लिए तैयार बताई जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

    छात्रों की प्रमुख मांगों में कुछ पुरानी परीक्षाओं को रद्द करना भी शामिल रहा है। बातचीत के दौरान JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की बात रखी गई। इन परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। सरकार की ओर से इन तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति की बात सामने आने के बाद बातचीत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली TDPL एजेंसी की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से TDPL एजेंसी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच करने की बात कही गई है। इससे परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, उससे जुड़े निर्णयों और संभावित अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है।

    छात्रों की मांग केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग भी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार JPSC और JSSC की परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में बदलाव की दिशा में भी काम करने की तैयारी में है।

    सरकार की ओर से भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके लिए IIM और XISS जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी युवाओं की चिंताओं को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी वजहों के कारण ही युवा आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी को सरकार ने संज्ञान में लिया है और गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अपनी बात बिना किसी डर के सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। सरकार और छात्रों के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित फैसलों को किस रूप में लागू किया जाता है। तीन परीक्षाओं को रद्द करने, वित्तीय लेनदेन की जांच और भर्ती व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई छात्र आंदोलन की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

  • JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    नई दिल्ली । रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। बातचीत के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किए जाने की संभावना भी सामने आई है।

    सरकार और छात्र संगठनों के बीच संभावित सहमति के तहत 2023 और 2025 की बैकलॉग सीटों को नहीं भरने का प्रस्ताव भी शामिल है। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से जांच और व्यवस्था में सुधार से जुड़े कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    प्रस्तावित फॉर्मूले में CID जांच को 90 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई है। जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने की संभावना भी जताई गई है। इससे परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

    परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ प्रमुख संस्थानों के इंजीनियरों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलावों की पहचान करना होगा।

    इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL की ओर से कराई गई परीक्षाओं से जुड़े पैसों के लेनदेन की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार किया जा सकता है।

    इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के प्रदर्शन और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर बयान दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है और सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ज्यादा उम्र के नहीं हैं और युवाओं की परेशानियों को समझते हैं। उन्होंने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा पर गोलियों की जरूरत हो सकती है, लेकिन यहां उसकी जरूरत नहीं है। उनका संकेत था कि युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।

    हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि देशभर में अलग-अलग राजनीतिक दल विभिन्न तरीकों से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, सच और झूठ को मिलाकर युवाओं को गुमराह करने की रणनीति अपनाई जा रही है और इस प्रक्रिया में पढ़े-लिखे तथा जानकार लोग भी शामिल हो सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे युवाओं के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई के कारण युवाओं में गलत काम को सामने लाने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं को न्याय मिलेगा और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल छात्र संगठनों और सरकार के बीच बातचीत जारी है। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा, बैकलॉग पदों, जांच की समयसीमा और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का विरोध प्रदर्शन लगातार गहराता जा रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इस बीच, प्रसिद्ध अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा ने आंदोलन स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का प्रत्यक्ष समर्थन किया।

    रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे पीयूष मिश्रा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के संघर्ष और पीड़ा को देखकर वे उनके साथ खड़े होने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि छात्रों की तकलीफों और उनके आंसुओं को देखकर वे इस आंदोलन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए वे अपनी ओर से हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के दौरान अभिनेता ने अपनी चर्चित फिल्म का क्रांतिकारी गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ भी गाया, जिससे पूरे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। यह गीत अपने प्रेरणादायक और संघर्षशील बोलों के लिए जाना जाता है। पीयूष मिश्रा ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन, तिरपाल और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, ताकि उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि झारखंड में वर्ष 2019 के बाद आयोजित हुई कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र बेहद असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई और पीजीटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में व्यापक पैमाने पर धांधली और लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में विवादित परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना, पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो से निष्पक्ष जांच कराया जाना और इसमें संलिप्त दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना शामिल है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।

    प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा है। युवाओं के इस विरोध-प्रदर्शन ने राज्य में प्रशासनिक एवं परीक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। शुक्रवार रात से शुरू हुई बातचीत शनिवार को भी आगे बढ़ी। छात्रों ने बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन साफ कर दिया कि अभी उनकी किसी प्रमुख मांग पर ठोस फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में आंदोलन समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया गया है।

    देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले JPSC-JSSC न्याय गुट के आठ छात्रों ने राज्य अतिथि गृह में सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। जानकारी के अनुसार बैठक शनिवार सुबह करीब 11 बजकर 20 मिनट पर शुरू हुई। बातचीत के बाद छात्र वापस प्रदर्शन स्थल पर लौट आए। छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा और उनकी बातों को सुना गया, लेकिन केवल बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन के बजाय अपनी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहिए।

    छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों ने जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की समिति गठित करने की मांग रखी है। इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है।

    बातचीत के बाद झारखंड सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार अलग-अलग छात्र समूहों और संबंधित लोगों से लगातार बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों के सुझाव लिए जाएंगे ताकि मामले को समझकर आगे की कार्रवाई की जा सके। सरकार की ओर से लोगों से अपनी बात और सुझाव साझा करने के लिए ईमेल के माध्यम से जानकारी देने की व्यवस्था भी किए जाने की बात सामने आई है।

    छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता उनके भविष्य से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए वे कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।

    आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक उनकी मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया, तो 10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च किया जाएगा। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने से समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता निकल पाता है।

  • झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच अनशन कर रहे छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।

    भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि राज्य में छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई आधिकारिक बुलावा नहीं भेजा गया है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की टीम से कराई जाए। इसके अलावा छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।

    भर्ती परीक्षा विवाद का असर झारखंड विधानसभा में भी दिखाई दिया। विपक्षी विधायकों ने छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग करने लगे। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले से सामने आए पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

    फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन का मामला और संवेदनशील हो गया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से होने वाली किसी औपचारिक बातचीत पर है। वहीं सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।