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  • झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच अनशन कर रहे छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।

    भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि राज्य में छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई आधिकारिक बुलावा नहीं भेजा गया है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की टीम से कराई जाए। इसके अलावा छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।

    भर्ती परीक्षा विवाद का असर झारखंड विधानसभा में भी दिखाई दिया। विपक्षी विधायकों ने छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग करने लगे। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले से सामने आए पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

    फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन का मामला और संवेदनशील हो गया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से होने वाली किसी औपचारिक बातचीत पर है। वहीं सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • जेपीएससी भर्ती विवाद पर छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा बयान, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल रहेगी जारी

    जेपीएससी भर्ती विवाद पर छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा बयान, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल रहेगी जारी

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने स्पष्ट किया है कि उनका अनशन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर उनके अनशन खत्म करने की खबरें चलाई जा रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्होंने केवल सलाह के बाद पानी पीना शुरू किया है। उनका कहना है कि भूख हड़ताल पहले की तरह जारी रहेगी और मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।

    देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने समाजसेवी सोनम वांगचुक की सलाह का सम्मान करते हुए केवल पानी ग्रहण किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने छात्रों और आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़ी गलत या भ्रामक जानकारी साझा न करें, क्योंकि इससे छात्रों के संघर्ष पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

    भूख हड़ताल के पांचवें दिन देवेंद्र महतो की तबीयत में गिरावट भी देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि लगातार उपवास के कारण शरीर में कमजोरी बढ़ गई है और अधिक देर तक बोलने पर सीने में तकलीफ महसूस होती है। उठने-बैठने में भी उन्हें सहारे की आवश्यकता पड़ रही है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है। जांच के दौरान उनके रक्तचाप की स्थिति पहले की तुलना में कुछ बेहतर बताई गई है, लेकिन शारीरिक कमजोरी अभी भी बनी हुई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका मनोबल पूरी तरह मजबूत है और वह छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

    छात्र संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार को 16 मांगों का प्रस्ताव सौंपा है। इनमें प्रमुख मांग विवादित परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष जांच कराना, भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और सरकारी व्यवस्था के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया संचालित करना शामिल है। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी मांग की है कि चयन प्रक्रिया के सभी चरण पहले से स्पष्ट किए जाएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    छात्रों ने आयोगों में निष्पक्ष और स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है। आंदोलन में शामिल छात्रों का दावा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच पूरे राज्य में इस आंदोलन को लेकर व्यापक चर्चा बनी हुई है और बड़ी संख्या में छात्र लगातार प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

  • रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    नई दिल्ली । झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई तेज कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच वार्ता के रास्ते तलाशने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी ने इस प्रकरण में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    इस हालिया कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के कार्यालय में तैनात कर्मचारी, कुछ अभ्यर्थी और बिचौलिए पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और जब्त दस्तावेजों के आधार पर यह गिरफ्तारियां की गई हैं। सीआईडी की टीमें पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आंदोलनकारी छात्रों से संवाद की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी जायज मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

    दूसरी ओर, आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बंद कमरे में वार्ता के पक्षधर नहीं हैं। छात्रों की मांग है कि बातचीत किसी सार्वजनिक मंच पर हो या फिर पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे। कुछ छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को स्वयं अनशन स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए और तुरंत समाधान की घोषणा करनी चाहिए।

    प्रदर्शन स्थल पर अनशन पर बैठे छात्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से विवादित परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के छात्र संगठन भी झारखंड के इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।

    संभावित विधानसभा घेराव और प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बने इस गतिरोध का नतीजा क्या निकलता है, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।