अधिकारियों के अनुसार, मामले में आरोपी बनाए गए सभी पांच लोगों ने अदालत से जमानत की मांग की है। इनमें श्यामकानु महंता और अमृतप्रभा महंता के नाम प्रमुख हैं। आरोपियों का कहना है कि वे जांच एजेंसियों के साथ लगातार सहयोग कर रहे हैं और अब जांच लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें न्यायिक हिरासत में बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
चार्जशीट में गंभीर आरोप
एसआईटी की चार्जशीट ने इस केस को और गंभीर बना दिया है। चार्जशीट में दिवंगत गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और उनके बैंडमेट शेखरज्योति गोस्वामी पर हत्या का आरोप लगाया गया है। वहीं, जुबीन गर्ग के कजिन और निलंबित असम पुलिस अधिकारी संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
एसआईटी ने चार्जशीट में घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र करते हुए यह बताने की कोशिश की है कि जुबीन गर्ग की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच के लिए असम पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया था, जिसने गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर से मिली जानकारियों के आधार पर अभियोजन पक्ष का केस तैयार किया।
सिंगापुर पुलिस की रिपोर्ट से बदली बहस
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि सिंगापुर पुलिस की रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दिया है। सिंगापुर पुलिस ने अदालत को बताया कि उनकी जांच में जुबीन गर्ग की मौत में किसी तरह की साजिश या आपराधिक मंशा के संकेत नहीं मिले।
रिपोर्ट के मुताबिक, गायक की मौत डूबने से हुई और इसमें किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका साबित नहीं हो सकी। घटना से पहले जुबीन गर्ग कथित तौर पर नशे की हालत में थे और एक यॉट पर मौजूद थे, जहां उन्होंने काफी मात्रा में शराब का सेवन किया था।
मेडिकल और फॉरेंसिक पहलू
जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि जुबीन गर्ग पहले पानी में तैरने गए थे और वापस आकर थकान की बात कही थी। कुछ देर बाद वह दोबारा पानी में उतरे। उनकी मेडिकल हिस्ट्री में हाई ब्लड प्रेशर और मिर्गी की बीमारी सामने आई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में उनके खून में इन बीमारियों से जुड़ी दवाओं के अंश मिले, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्होंने घटना वाले दिन मिर्गी की दवा ली थी या नहीं।
यॉट के कैप्टन ने भी गवाही में बताया कि जुबीन गर्ग को यॉट पर चढ़ते समय दो दोस्तों का सहारा लेना पड़ा था और उन्हें बिना लाइफ जैकेट पानी में उतरने से रोका गया था।
