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  • यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न

    यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न


    नई दिल्ली ।
    यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की रिलीज को लेकर लंबे समय से उत्साहित प्रशंसकों ने इसे सामान्य फिल्म प्रदर्शन की तरह नहीं, बल्कि किसी उत्सव की तरह मनाया। कर्नाटक में कई सिनेमाघरों के बाहर सुबह से ही दर्शकों की भीड़ देखने को मिली। कुछ प्रशंसक तड़के करीब तीन बजे ही सिनेमाघरों में पहुंच गए और फिल्म के प्रदर्शन का इंतजार करते नजर आए।

    फिल्म की रिलीज के मौके पर प्रशंसकों का उत्साह खास तौर पर सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया। कई जगहों पर डीजे और संगीत के बीच दर्शक नाचते नजर आए। कुछ प्रशंसक झंडे लहराते हुए अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे, जबकि कुछ ने दोस्तों को कंधे पर उठाकर जश्न मनाया। सिनेमाघरों के आसपास का माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा और प्रशंसकों ने यश के प्रति अपनी दीवानगी खुलकर जाहिर की।

    कर्नाटक के एक सिनेमाघर के बाहर दर्शकों की लंबी कतार भी दिखाई दी। लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए फिल्म देखने के लिए उत्सुक नजर आए। सिनेमाघर के बाहर यश की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। कई दर्शक फिल्म के पहले शो का हिस्सा बनने के लिए सुबह-सुबह ही पहुंच गए थे।

    कुछ स्थानों पर फिल्म की रिलीज को लेकर विशेष आयोजन भी देखने को मिले। सिनेमाघर के बाहर बनाए गए मंच पर प्रशंसक संगीत की धुन पर डांस करते नजर आए। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा दर्शकों ने हिस्सा लिया। फिल्म को लेकर पहले से बने माहौल के बीच रिलीज के दिन प्रशंसकों की यह प्रतिक्रिया यश की लोकप्रियता को दर्शाती है।

    इसी बीच यश की मौजूदगी से जुड़े एक वीडियो ने भी प्रशंसकों का ध्यान खींचा। इसमें अभिनेता एक मॉल में नजर आए, जहां उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रशंसक मॉल की छत और आसपास के स्थानों से यश को देखने की कोशिश करते दिखाई दिए। अभिनेता को देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने उनके प्रति प्रशंसकों की उत्सुकता को और स्पष्ट किया।

    हालांकि फिल्म की रिलीज के साथ सभी दर्शकों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में फिल्म देखकर सिनेमाघर से बाहर निकलने वाले दर्शकों से उनकी राय पूछी गई। इनमें एक दर्शक की प्रतिक्रिया से ऐसा संकेत मिला कि वह फिल्म से प्रभावित नहीं हुआ। इससे यह भी सामने आया कि शुरुआती दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

    टॉक्सिक में यश के साथ कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और नयनतारा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को लेकर यश के प्रशंसकों के बीच पहले से काफी उत्सुकता बनी हुई थी। रिलीज के दिन सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया उत्साह इसी प्रतीक्षा का परिणाम माना जा रहा है।

    फिलहाल फिल्म को लेकर दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में उत्साह और निराशा दोनों तरह के संकेत सामने आए हैं। आने वाले दिनों में दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि टॉक्सिक कहानी और अभिनय के स्तर पर कितनी मजबूत साबित होती है और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन कैसा रहता है।

  • कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में जहरीले धतूरा फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने Amazon, Instamart और BigBasket से जुड़े फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज को मानव इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराए जाने की शिकायतों और जांच के बाद की गई।

    धतूरा एक जहरीला पौधा माना जाता है और इसके फल तथा बीज का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसकी बिक्री और वितरण को लेकर विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई। जांच के दौरान अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित पाए गए।

    जांच में कुछ ऐसे पैकेट भी सामने आए जिन पर फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। विभाग के अनुसार, धतूरा जैसे जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में स्टोर करना, बेचना या वितरित करना स्वीकार्य नहीं है। जांच के दौरान ऐसे उत्पादों के गोदामों में रखे होने की जानकारी भी सामने आई, जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को विभाग के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कंपनियों से ऑनलाइन बिक्री, उत्पादों की उपलब्धता और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे गए।

    Amazon की ओर से इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया गया। वहीं Instamart ने अपने स्तर पर की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। BigBasket ने बताया कि उसने धतूरा के फलों की ऑनलाइन बिक्री रोक दी है। कंपनी की ओर से भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग को स्पष्ट करने की बात भी कही गई।

    BigBasket ने यह भी कहा कि ऐसे उत्पादों पर मानव उपभोग के लिए नहीं होने की स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी। हालांकि, नियामक विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। विभाग का कहना है कि जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के तौर पर उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से स्वीकार्य नहीं है।

    कार्रवाई के तहत Amazon, Instamart और BigBasket के संबंधित फूड लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। लाइसेंस की बहाली आगे की सुनवाई और कंपनियों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही हो सकेगी। इस दौरान कंपनियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।

    विभाग ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धतूरा के फल और बीज की उन सभी लिस्टिंग और विज्ञापनों को तत्काल हटाने या निलंबित करने का निर्देश दिया है, जिनमें इन्हें खाद्य पदार्थ या मानव उपभोग के लिए उपलब्ध बताया गया हो। साथ ही धतूरा उत्पादों की आपूर्ति करने वाले संबंधित विक्रेताओं और सप्लायरों के लाइसेंस तथा रजिस्ट्रेशन पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    इस कार्रवाई से ऑनलाइन खाद्य बिक्री में उत्पादों की जांच, सही लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी एक बार फिर सामने आई है। विभाग की सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहरीले या मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थ खाद्य उत्पादों के रूप में उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।

  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • वंदे मातरम पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का बयान, बोले दो छंद ही गाऊंगा जेल या फांसी मंजूर

    वंदे मातरम पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का बयान, बोले दो छंद ही गाऊंगा जेल या फांसी मंजूर

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम के पूरे गायन को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह वंदे मातरम के केवल दो छंद ही गाएंगे। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें जेल भेज दिया जाए या फांसी दे दी जाए, लेकिन वह पूरा वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    हरिप्रसाद का बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रगीत के गायन को लेकर भी विवाद सामने आया था। इस दौरान गीत के पूरे गायन और कार्यक्रम में उसके प्रस्तुतीकरण को लेकर अलग अलग दावे किए गए।

    इसके बाद गोवा में आयोजित कांग्रेस की बैठक में भी वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद गाए जाने का मामला सामने आया। इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। दो छंदों तक सीमित गायन को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठे और पार्टी के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई।

    इसी बीच बीके हरिप्रसाद के बयान ने इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वह वंदे मातरम के दो छंद ही गाएंगे। उनके बयान में जेल और फांसी का उल्लेख किए जाने से राजनीतिक प्रतिक्रिया और तीखी होने की संभावना बढ़ गई है।

    वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके सम्मान और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा होती रही है। राष्ट्रगीत के कुछ हिस्सों को लेकर ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों पर भी अलग अलग राजनीतिक विचार सामने आते रहे हैं।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं से भी जोड़ा जाता है। खरगे ने यह सवाल भी उठाया कि यदि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के नेताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो ऐतिहासिक रूप से इससे जुड़े अन्य नेताओं के रुख पर भी चर्चा होनी चाहिए।

    खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश के राष्ट्रीय गीतों से संबंधित विषयों पर अपने ऐतिहासिक निर्णय पहले ही लिए थे। उनका तर्क है कि किसी एक राजनीतिक दल या सरकार के कहने मात्र से राष्ट्रीय मानक निर्धारित नहीं किए जा सकते।

    वहीं केंद्र सरकार की ओर से वंदे मातरम के सम्मान को लेकर हाल में कड़े प्रावधान किए जाने की चर्चा है। जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने से जुड़े मामलों में कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है।

    स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के कार्यक्रम में पूरे वंदे मातरम के गायन को भी इस विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बीके हरिप्रसाद का बयान केवल व्यक्तिगत रुख तक सीमित नहीं रहने वाला है और इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    अब इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और अन्य राजनीतिक दल किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर नजर रहेगी। वंदे मातरम को लेकर सामने आया ताजा विवाद राष्ट्रगीत, ऐतिहासिक परंपरा और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

  • कर्नाटक में तीन तमिलों की कथित मुठभेड़ पर विवाद गहराया, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच और बढ़े मुआवजे की मांग की

    कर्नाटक में तीन तमिलों की कथित मुठभेड़ पर विवाद गहराया, विपक्ष ने निष्पक्ष जांच और बढ़े मुआवजे की मांग की


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के चामराजनगर और मैसूर क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ कथित मुठभेड़ में तीन तमिल लोगों की मौत के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। घटना को लेकर तमिलनाडु के राजनीतिक दलों और नेताओं ने सवाल उठाए हैं। मृतकों के परिवारों के लिए घोषित मुआवजे को बढ़ाने के साथ ही मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है।

    बताया गया है कि वन क्षेत्र में तीन लोगों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी। इसमें तीनों लोगों की मौत हो गई। शुरुआती तौर पर उन्हें शिकारी होने के संदेह से जोड़ा गया। हालांकि घटना के बाद सामने आए आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने पूरे मामले की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना के बाद चामराजनगर के हनूर क्षेत्र में मृतकों के परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामले को लेकर तमिलनाडु में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हुई।

    तमिलनाडु के कई नेताओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कर्नाटक सरकार से विस्तृत जांच कराने की मांग की है। कुछ नेताओं ने कथित मुठभेड़ को फर्जी मुठभेड़ करार देते हुए मृतकों के परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।

    तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए हत्या का मामला दर्ज करने और पारदर्शी तथा निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी।

    पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी ने भी मामले को लेकर कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाए और केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों के लिए घोषित पांच लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने वन विभाग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को अस्वीकार्य बताते हुए मामले में गंभीर जांच की जरूरत बताई। उनके अनुसार, घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आनी चाहिए और मृतकों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।

    दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विरोध बढ़ने के बाद मजिस्ट्रेट जांच का निर्णय भी लिया गया है। जांच का उद्देश्य घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, मुठभेड़ की परिस्थितियां क्या थीं और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका क्या रही, जैसे सवालों का जवाब तलाशना है।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रही मांग है। एक तरफ वन विभाग की ओर से घटना को मुठभेड़ की परिस्थितियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिवार और राजनीतिक दल इसे गंभीर संदेह के साथ देख रहे हैं।

    अब निगाह मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि तीनों लोगों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी। फिलहाल मुआवजा बढ़ाने, जिम्मेदारी तय करने और स्वतंत्र जांच की मांग के कारण यह मामला कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • कर्नाटक सरकार ने तंबाकू सेवन पर लगाम कसने के लिए गुटखा और प्रतिबंधित निकोटिन उत्पादों के निर्माण-बिक्री पर लगाई पाबंदी

    कर्नाटक सरकार ने तंबाकू सेवन पर लगाम कसने के लिए गुटखा और प्रतिबंधित निकोटिन उत्पादों के निर्माण-बिक्री पर लगाई पाबंदी


    नई दिल्ली ।कर्नाटक सरकार ने राज्य में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटिन युक्त प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए एक साल के लिए रोक लगा दी है। सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस संबंध में 10 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी की। अधिसूचना जारी होने के साथ ही पूरे राज्य में यह प्रतिबंध प्रभावी हो गया है और अगले एक साल तक लागू रहेगा।

    नए आदेश के तहत तंबाकू और या निकोटिन वाले गुटखा, पान मसाला तथा अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी। इसका मतलब है कि ऐसे उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए राज्य में तंबाकू की लत को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

    कर्नाटक सरकार ने प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए विशेष निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान भी शुरू किया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की उपलब्धता तथा बिक्री पर नजर रखेंगी। दुकानों और अन्य स्थानों पर जांच के दौरान यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार की अधिसूचना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) और खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों के तहत निर्धारित प्रावधानों के आधार पर जारी की गई है। संबंधित विभाग को खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए ऐसे उत्पादों की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार प्राप्त है।

    राज्य सरकार के इस फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य तंबाकू और निकोटिन की लत को नियंत्रित करना है। गुटखा और तंबाकू उत्पादों का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। सरकार का मानना है कि इन उत्पादों की उपलब्धता सीमित करने से इनके इस्तेमाल को रोकने और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।

    प्रतिबंध के साथ ही प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी स्थान पर प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटिन उत्पादों के निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जानी चाहिए। इससे प्रवर्तन अभियान को प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कर्नाटक में लागू यह पाबंदी ऐसे समय में आई है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर तंबाकू सेवन को नियंत्रित करना सरकारों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की निगरानी और जांच अभियान यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि प्रतिबंधित उत्पाद बाजार में दोबारा उपलब्ध न हों।

    सरकार ने इस फैसले को स्वस्थ और नशा-मुक्त कर्नाटक की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। आने वाले महीनों में प्रतिबंध के पालन को लेकर बाजारों, दुकानों और आपूर्ति से जुड़े स्थानों पर निरीक्षण जारी रहने की संभावना है। एक साल की अवधि में प्रशासन की कार्रवाई और आम लोगों की भागीदारी इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण होगी।

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात

    कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और संभावित छोटे बदलावों को लेकर चर्चा की।

    डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले शिवकुमार ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी चर्चा की। इन बैठकों को कर्नाटक मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद बने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कर्नाटक सरकार में इस महीने की शुरुआत में बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई। हालांकि, नए मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले कुछ विधायक अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने इन नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कुछ मंत्रियों ने ऐसे विधायकों से बातचीत भी की है। इसका उद्देश्य नाराजगी को कम करना और संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा एक या दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में एक महिला को शामिल किया जाना चाहिए और इस दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्दबाजी से बचने की बात कही। इससे माना जा रहा है कि कैबिनेट में संभावित बदलाव केवल विभागों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रह सकते हैं।

    कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आवश्यक बदलाव पूरे कर लिए जाएं। इससे सरकार को सदन में एकजुटता के साथ काम करने में मदद मिल सकती है और मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ काम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

    उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर कहा है कि इसमें कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभागों के आवंटन को लेकर अंतिम चरण की प्रक्रिया में है।

    कर्नाटक कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ नए मंत्रियों को विभाग देकर सरकार के कामकाज को व्यवस्थित करना है, वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल से बाहर रह गए विधायकों की नाराजगी को संभालना है। ऐसे में खड़गे और वेणुगोपाल के साथ डीके शिवकुमार की बैठकों को पार्टी के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, संभावित फेरबदल को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। विभागों के बंटवारे और मंत्रियों में बदलाव से जुड़ी तस्वीर विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की नाराजगी दूर करने और सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से इन 3 राशियों पर मंडराया संकट, जानिए किसे रहना होगा सबसे ज्यादा सावधान

    12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से इन 3 राशियों पर मंडराया संकट, जानिए किसे रहना होगा सबसे ज्यादा सावधान

    नई दिल्ली । वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण आगामी 12 अगस्त को घटित होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस खगोलीय घटना को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है। गणना के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। इस ग्रहण के प्रभाव से राशि चक्र की तीन प्रमुख राशियों सिंह, धनु और कुंभ के त्रिक भाव सक्रिय हो रहे हैं, जिसके कारण इन राशियों के जातकों को स्वास्थ्य, करियर और आर्थिक मामलों में अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिष शास्त्र में छठे, आठवें और बारहवें भाव को त्रिक भाव कहा जाता है, जिन्हें सामान्यतः संघर्ष, व्यय और बाधाओं का कारक माना जाता है। ग्रहण के प्रभाव से सिंह राशि के जातकों के 12वें भाव पर असर पड़ेगा, जो अनियंत्रित खर्चों और आर्थिक नुकसान का संकेत देता है। इस अवधि में सिंह राशि के लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है और पारिवारिक स्तर पर वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। विशेष रूप से विदेश से जुड़ा व्यापार करने वालों और सेहत के प्रति लापरवाह रहने वालों को सावधान रहने की जरूरत है।

    धनु राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण आठवें भाव में घटित हो रहा है, जो अचानक आने वाली रुकावटों और संकटों से संबंधित माना जाता है। इस दौरान बने-बनाए कार्यों में अड़चनें आ सकती हैं। ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, धनु राशि वाले इस समय किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय निवेश या जोखिम भरे फैसलों से बचें। यात्रा के दौरान सामान की सुरक्षा और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए ग्रहण का प्रभाव छठे भाव में देखने को मिलेगा, जिसे रोग और प्रतिस्पर्धियों का भाव माना जाता है। इस दौरान कार्यस्थल पर गुप्त शत्रुओं की सक्रियता बढ़ सकती है, जो कार्यों में रुकावट डालने का प्रयास कर सकते हैं। व्यापार से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करने और सहकर्मियों के साथ संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पेट और रक्त से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति भी सचेत रहना होगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस खगोलीय घटना के प्रभाव से बचने के लिए संबंधित राशि के जातकों को ईश्वर आराधना और नियमित मंत्र जाप करने का परामर्श दिया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस ग्रहण को लेकर धार्मिक और आध्यात्मिक तैयारियां भी की जा रही हैं।

  • समुद्र किनारे स्थित इस पौराणिक शिवधाम का रावण से क्या है गहरा संबंध, जानिए 123 फीट ऊंची प्रतिमा का रहस्य

    समुद्र किनारे स्थित इस पौराणिक शिवधाम का रावण से क्या है गहरा संबंध, जानिए 123 फीट ऊंची प्रतिमा का रहस्य

    नई दिल्ली ।कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के अंतर्गत आने वाले भटकल तालुका में स्थित मुरुदेश्वर मंदिर देश के सबसे प्रमुख और भव्य धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। अरब सागर के तट पर कंदुका पहाड़ी पर स्थित यह पावन धाम अपनी अटूट धार्मिक आस्था, अद्वितीय वास्तुकला और मनोरम प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। तीन तरफ से नीले समुद्र से घिरे होने के कारण इस मंदिर परिसर की छटा अत्यंत आकर्षक और अद्भुत दिखाई देती है।

    मुरुदेश्वर मंदिर का पौराणिक इतिहास लंकापति रावण और भगवान शिव के परम पवित्र आत्मलिंग की कथा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंकाधिपति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से अत्यंत कठोर तपस्या की थी। रावण की इस कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे अपना आत्मलिंग प्रदान किया था, लेकिन इसके साथ एक विशेष शर्त भी रखी गई थी कि इसे रास्ते में कहीं भी भूमि पर नहीं रखा जाना चाहिए।

    पौराणिक प्रसंगों के मुताबिक, जब रावण उस दिव्य आत्मलिंग को लेकर अपनी राजधानी लंका की ओर बढ़ रहा था, तब देवताओं ने विशेष परिस्थितियां निर्मित कर दीं। इन्हीं परिस्थितियों के प्रभाव में आकर रावण ने अनजाने में आत्मलिंग को एक स्थान पर जमीन पर रख दिया। इसके बाद लाख कोशिशों के बावजूद वह उस शिवलिंग को दोबारा भूमि से नहीं उठा सका। माना जाता है कि इसी प्रक्रिया में आत्मलिंग के कुछ अंश जिन-जिन पवित्र स्थानों पर गिरे, उनमें मुरुदेश्वर की भूमि भी शामिल थी।

    इस ऐतिहासिक और धार्मिक परिसर की सबसे बड़ी और मुख्य विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव की अत्यंत विशाल प्रतिमा है। खुले आकाश के नीचे निर्मित यह प्रतिमा ध्यान मुद्रा में बैठी हुई अवस्था में स्थापित की गई है, जिसकी कुल ऊंचाई 123 फीट बताई जाती है। अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण यह भव्य प्रतिमा काफी दूर से ही श्रद्धालुओं को स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती है। सूर्य की किरणों के बीच समुद्र की उठती लहरों के साथ इस प्रतिमा का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला और वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में बना विशाल एवं बहुमंजिला गोपुरम, जिसे ‘राजा गोपुरा’ कहा जाता है, यहां की प्रमुख संरचनात्मक पहचान है। श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए इस विशाल गोपुरम की ऊपरी मंजिलों तक जाने की व्यवस्था की गई है, जहां से पूरे मंदिर परिसर, विशाल शिव प्रतिमा और दूर तक फैले अरब सागर का विहंगम दृश्य साफ देखा जा सकता है।

    मंदिर की पारंपरिक नक्काशी और भव्य बनावट में दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की गहरी छाप नजर आती है। समुद्र, पहाड़ी और मंदिर का यह विहंगम संयोजन यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक नया और आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले तीर्थयात्री भी इस पवित्र स्थल के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

    आज के समय में मुरुदेश्वर एक बहुत बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। साल भर यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने आते हैं। महाशिवरात्रि जैसे पावन और बड़े धार्मिक पर्वों पर तो यहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां का शांत समुद्री तट और प्राकृतिक नजारे भी पर्यटकों को निरंतर अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

    संक्षेप में कहा जाए तो मुरुदेश्वर धाम पौराणिक कथाओं, प्राचीन मान्यताओं, दक्षिण भारतीय वास्तुकला और समुद्री सौंदर्य का एक दुर्लभ एवं अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। 123 फीट ऊंची विशालकाय शिव प्रतिमा इस पावन स्थल को एक विशिष्ट पहचान देती है, वहीं रावण और आत्मलिंग से जुड़ी पौराणिक गाथा इसके धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को और अधिक मजबूत बनाती है।

  • कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने दिया इस्तीफा, बोले- कांग्रेस ने क्यों हटाया इसकी जानकारी नहीं

    कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने दिया इस्तीफा, बोले- कांग्रेस ने क्यों हटाया इसकी जानकारी नहीं


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। होरत्ती ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि उनसे पद छोड़ने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कांग्रेस सरकार ने उनसे इस्तीफा क्यों मांगा। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    बसवराज होरत्ती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं पता कि कांग्रेस सरकार ने उनसे इस्तीफा देने के लिए क्यों कहा। उन्होंने बताया कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। होरत्ती ने कहा कि वह सम्मानपूर्वक अपने पद से हटना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बिना किसी विवाद के इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम से उन्हें काफी दुख पहुंचा है।

    इससे पहले होरत्ती ने संकेत दिया था कि अगर उन्होंने पद छोड़ने से इनकार किया तो डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। उन्होंने कहा था कि सत्ताधारी दल चाहता है कि वह पद से हट जाएं। मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें इस संबंध में जानकारी दी गई थी। होरत्ती के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उनसे फोन पर दो बार बातचीत की और व्यक्तिगत मुलाकात के दौरान बताया कि पार्टी आलाकमान ने उनसे इस्तीफा मांगने का निर्देश दिया है।

    होरत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने उन्हें बताया कि उन्हें हटाने का फैसला पार्टी हाईकमान का है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। लेकिन जब यह राय बन गई कि उन्हें अब इस पद पर नहीं रहना चाहिए तो उन्होंने पद पर बने रहना उचित नहीं समझा।

    बसवराज होरत्ती ने कहा कि वह सदन में इस मुद्दे को उठाने के बाद इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब किसी पद को लेकर सहमति नहीं रहती तो जिम्मेदारी के साथ फैसला लेना जरूरी होता है।

    वहीं, इस घटनाक्रम के पीछे कांग्रेस संगठन की नई रणनीति को भी देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक में विधान परिषद के चेयरमैन पद के लिए सलीम अहमद और डिप्टी चेयरमैन पद के लिए उमाश्री के नाम को मंजूरी दी है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए जीएस पाटिल और डिप्टी स्पीकर पद के लिए एएस पोन्नाना के नामों पर भी सहमति दी गई है।

    बसवराज होरत्ती लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और विधान परिषद में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनके इस्तीफे के बाद अब परिषद के नए अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बदलाव को लेकर अभी विस्तृत कारण सामने नहीं रखा गया है। दूसरी ओर, होरत्ती के बयान ने इस पूरे मामले को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में इस बदलाव का असर देखने को मिल सकता है।