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  • सोनू निगम के बंगलूरू कॉन्सर्ट पर विवाद गहराया, कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से अनुमति रोकने की मांग की, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    सोनू निगम के बंगलूरू कॉन्सर्ट पर विवाद गहराया, कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से अनुमति रोकने की मांग की, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । गायक सोनू निगम के बंगलूरू में होने वाले कॉन्सर्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से 24 अक्तूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि अप्रैल 2025 में एक कॉलेज में आयोजित संगीत कार्यक्रम के दौरान सोनू निगम की टिप्पणी से कन्नड़ भाषियों की भावनाएं आहत हुई थीं। संगठन ने इस मुद्दे को उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कॉन्सर्ट को अनुमति दी गई, तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।

    कर्नाटक रक्षणा वेदिके के संयोजक टीए नारायण गौड़ा ने 14 अक्तूबर को बंगलूरू के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। पत्र में उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि सोनू निगम के प्रस्तावित कॉन्सर्ट को आयोजित करने की अनुमति न दी जाए। संगठन ने आशंका जताई कि कार्यक्रम को मंजूरी मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सोनू निगम का यह कार्यक्रम 24 अक्तूबर को शाम सात बजे बंगलूरू के थानिसंद्रा मेन रोड स्थित भारतीय मॉल में प्रस्तावित है। यह आयोजन ‘द रिवोल्यूशन इंडिया टूर’ के तहत किया जाना है। संगठन ने पुलिस से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए मामले में जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

    विवाद की वजह अप्रैल 2025 में बंगलूरू के एक कॉलेज में आयोजित संगीत कार्यक्रम के दौरान हुई कथित टिप्पणी बताई जा रही है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके के अनुसार, कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने सोनू निगम से कन्नड़ भाषा में गाना गाने का अनुरोध किया था। संगठन का आरोप है कि इस अनुरोध के दौरान गायक ने ऐसी टिप्पणी की, जिससे कन्नड़ भाषियों की भाषाई अस्मिता और भावनाओं को ठेस पहुंची।

    टीए नारायण गौड़ा ने पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में कहा कि किसी कलाकार से कन्नड़ भाषा में गाना गाने का अनुरोध करना कोई अपराध नहीं है। संगठन ने इसी आधार पर आगामी कॉन्सर्ट की अनुमति रोकने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में सोनू निगम की ओर से कोई प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इस विवाद को लेकर पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कर्नाटक रक्षणा वेदिके की बंगलूरू शहरी जिला इकाई के अध्यक्ष टीए धर्मराज ने 2 मई 2025 को अवलाहल्ली पुलिस थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में सोनू निगम की कथित टिप्पणी के संबंध में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

    अब संगठन ने आगामी कॉन्सर्ट को लेकर अपना विरोध दोबारा सामने रखा है। नारायण गौड़ा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस कार्यक्रम को अनुमति देती है, तो संगठन राज्यभर में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने पत्र में कहा कि कन्नड़ भाषियों के आत्मसम्मान से बढ़कर किसी कलाकार का कार्यक्रम नहीं है।
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    संगठन ने अधिकारियों से अपनी मांग पर जल्द फैसला लेने और इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में देने का भी अनुरोध किया है। फिलहाल, सोनू निगम के 24 अक्तूबर को प्रस्तावित बंगलूरू कॉन्सर्ट को अनुमति देने या रोकने के संबंध में पुलिस के निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

  • कर्नाटक चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा रिकॉर्ड कहां गया, अगली सुनवाई पर मांगा जवाब

    कर्नाटक चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा रिकॉर्ड कहां गया, अगली सुनवाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2023 में हुई मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने पर भारत निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल किया कि चुनाव कराने वाली संस्था के पास अपने ही चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कैसे गायब हो सकते हैं। पीठ ने आयोग की ओर से रिकॉर्ड नहीं मिलने की दलील पर असंतोष जताते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में लापरवाही को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई तक उपलब्ध रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।

    इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने बताया कि वर्ष 2023 की मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल पा रही है और उसे खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि चुनाव कराना आयोग का मुख्य दायित्व है और इस प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना जरूरी है। अदालत ने आयोग से उपलब्ध सभी रिकॉर्ड अगली सुनवाई के दौरान पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

    यह पूरा विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में शृंगेरी सीट के नतीजे से जुड़ा है। इस सीट पर कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा को मात्र 201 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डीएनए जीवराज ने चुनाव परिणाम को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती करने का आदेश दिया।

    इसके बाद 3 मई 2026 को जारी संशोधित परिणाम में राजेगौड़ा के मतों की संख्या कम हो गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ राजेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए विधायक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।

    राजेगौड़ा की ओर से पुनर्गणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। उनका तर्क है कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच करने का आदेश दिया था। हालांकि, उनके अनुसार चुनाव अधिकारी ने निर्धारित दायरे से बाहर जाकर 562 वैध डाक मतपत्रों का भी पुनर्मूल्यांकन कर दिया। इसी प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता से जुड़े सवालों के बीच मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    राजेगौड़ा ने मामले में पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के साथ वर्ष 2023 की मूल मतगणना और पुनर्गणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की है। इन दस्तावेजों के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि मतगणना और पुनर्गणना के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद अब निर्वाचन आयोग को अगली सुनवाई पर उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने होंगे। अदालत ने संकेत दिया है कि रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं होने की स्थिति में मामले में आयोग के विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। हालांकि, वीडियो रिकॉर्डिंग के गायब होने और पुनर्गणना की प्रक्रिया से जुड़े सभी सवालों पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। अगली सुनवाई में रिकॉर्ड की उपलब्धता और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।

  • कर्नाटक में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय महिला की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक घटनाक्रम

    कर्नाटक में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय महिला की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक घटनाक्रम

    कर्नाटक के कोप्पल जिले में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। घटना उस समय हुई, जब नजमुन्निसा बेगम अपने घर के बाहर परिसर में टहल रही थीं। इसी दौरान एक बंदर अचानक दीवार फांदकर घर के परिसर में दाखिल हुआ और तेजी से उनकी ओर बढ़ते हुए उन्हें धक्का दे दिया।

    अचानक लगे धक्के से नजमुन्निसा बेगम अपना संतुलन नहीं संभाल सकीं और कंक्रीट के फर्श पर गिर पड़ीं। गिरने के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी। घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    बताया गया कि घटना शनिवार शाम की है। नजमुन्निसा बेगम रोज की तरह अपने घर के बाहर आंगन में टहल रही थीं। इसी दौरान बाहर से कुछ आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर वह घर से बाहर आईं। तभी अचानक बंदर दीवार के ऊपर से छलांग लगाकर परिसर में पहुंच गया।

    बंदर ने परिसर में आते ही महिला की ओर छलांग लगाई और उन्हें जोरदार धक्का दे दिया। हमले से महिला जमीन पर गिर गईं। उनकी उम्र अधिक होने के कारण गिरने से उन्हें गंभीर चोट लगी। सिर में चोट लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    घटना का पूरा दृश्य घर के बाहर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। फुटेज में बंदर को महिला की ओर तेजी से आते और उन्हें धक्का देते हुए देखा जा सकता है। महिला के गिरने के बाद घर के अंदर से एक अन्य महिला बाहर आती है।

    इसके बाद बंदर उस महिला की ओर भी बढ़ता है और उस पर हमला करने की कोशिश करता दिखाई देता है। इसी दौरान आसपास के लोग मौके पर पहुंच जाते हैं। लोगों को आता देख बंदर वहां से भाग जाता है। इसके बाद घायल नजमुन्निसा बेगम को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

    नजमुन्निसा बेगम क्षेत्र के प्रसिद्ध लेखक एम.एस. सवदत्ती की पत्नी थीं। बताया गया कि वह नियमित रूप से अपने घर के परिसर में टहलती थीं। इसी दौरान अचानक बंदर के पहुंचने से यह पूरी घटना कुछ ही क्षणों में घट गई।

    इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सामान्य रूप से घर के बाहर टहल रही बुजुर्ग महिला को अचानक बंदर ने धक्का दिया और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। CCTV फुटेज में घटना का क्रम रिकॉर्ड होने से हमले के दौरान हुई गतिविधियां सामने आई हैं।

    91 वर्षीय महिला की मौत के बाद इलाके में भी इस घटना को लेकर चर्चा है। घर के परिसर में अचानक हुए इस हमले ने एक सामान्य शाम को दर्दनाक हादसे में बदल दिया। नजमुन्निसा बेगम की मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

  • भाजपा से इस्तीफे के बाद कांग्रेस में शामिल हुए नरेंद्र बाबू, पुराने नेताओं की अनदेखी को लेकर नेतृत्व पर लगाए आरोप

    भाजपा से इस्तीफे के बाद कांग्रेस में शामिल हुए नरेंद्र बाबू, पुराने नेताओं की अनदेखी को लेकर नेतृत्व पर लगाए आरोप

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के पूर्व विधायक और प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष एनएल नरेंद्र बाबू ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। भारत जोड़ो कन्वेंशन के दौरान उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई। इस मौके पर कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया।

    नरेंद्र बाबू के कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में मंत्री रामलिंगारेड्डी, एचएम रेवन्ना, पूर्व मंत्री रानी सतीश, रमेश बाबू, हनुमंतरायप्पा और पूर्व मेयर रमेश समेत कई नेताओं की मौजूदगी रही।

    नरेंद्र बाबू ने कांग्रेस में शामिल होने से कुछ दिन पहले ही भाजपा से अलग होने का अपना फैसला सार्वजनिक किया था। शुक्रवार को उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष पद से भी त्यागपत्र दे दिया था।

    भाजपा छोड़ने की घोषणा करते समय नरेंद्र बाबू ने पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा था कि उन्होंने करीब 10 साल तक भाजपा के लिए काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारी और सम्मान नहीं मिला।

    नरेंद्र बाबू कर्नाटक के तिगाला समुदाय के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। भाजपा से अलग होने के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि वह अवसर देखकर पार्टी बदलने वाली राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उनके मुताबिक, पार्टी के लिए लंबे समय तक काम करने के बावजूद उन्हें जिस तरह की जिम्मेदारी और सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।

    उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर राजाजीनगर और महालक्ष्मी लेआउट में भी अनदेखी का आरोप लगाया था। नरेंद्र बाबू का कहना था कि उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। साथ ही इन क्षेत्रों में उन्हें और उनके साथ काम करने वाले लोगों को नजरअंदाज किया गया।

    भाजपा से इस्तीफा देने के बाद नरेंद्र बाबू के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई थी। अब भारत जोड़ो कन्वेंशन के दौरान उन्होंने औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में उनका स्वागत किया गया।

    नरेंद्र बाबू का भाजपा छोड़ना ऐसे समय हुआ है जब कर्नाटक की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। हालांकि, उनके पार्टी बदलने के पीछे उन्होंने मुख्य रूप से भाजपा में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलने की बात कही है।

    कांग्रेस में शामिल होने के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। इस कार्यक्रम के साथ नरेंद्र बाबू का भाजपा से कांग्रेस तक का राजनीतिक सफर औपचारिक रूप से बदल गया है। उन्होंने भाजपा में करीब एक दशक तक काम करने के बाद अब कांग्रेस का रुख किया है।

  • कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

    कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईडी को जांच करनी है तो वह अपनी कार्रवाई कर सकती है और कांग्रेस इस तरह के कदमों से डरने वाली नहीं है।

    डीके शिवकुमार ने कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार के 100 दिन पूरे होने से ठीक पहले सतीश जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई का समय राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सतीश जारकीहोली जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि ईडी को मामले की जांच करनी है तो वह अपना काम कर सकती है। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है और इस तरह की कार्रवाई कांग्रेस को दबाव में नहीं ला सकती।

    ईडी की टीम ने सतीश जारकीहोली, उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े करीब 18 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इन परिसरों में बेंगलुरु और बेलगावी स्थित स्थान भी शामिल बताए गए हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की तैनाती भी की गई। अलग-अलग स्थानों पर चल रही तलाशी के बीच राज्य में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, ईडी की मौजूदा कार्रवाई विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के तहत दर्ज जांच से संबंधित है। यह जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के प्रावधानों के तहत की जा रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का संबंध किसी पुराने धनशोधन मामले से नहीं है।

    तलाशी अभियान के दौरान ईडी की टीम संबंधित परिसरों में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच कर रही है। जांच का केंद्र विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन से संबंधित पहलुओं पर है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई के संबंध में सतीश जारकीहोली के परिवार या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    मामले ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ में देखते हुए भाजपा पर हमला बोला, जबकि ईडी की ओर से इसे फेमा के तहत चल रही जांच का हिस्सा बताया गया है। अब इस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों और जांच के आगे बढ़ने के साथ मामले की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • जाति जनगणना पर कांग्रेस के सामने नई चुनौती, सिद्धारमैया ने कर्नाटक में 75% आरक्षण लागू करने की मांग उठाई

    जाति जनगणना पर कांग्रेस के सामने नई चुनौती, सिद्धारमैया ने कर्नाटक में 75% आरक्षण लागू करने की मांग उठाई


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के जातिगत सर्वे के निष्कर्ष लागू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दलितों, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की बात कही है। उनकी इस मांग ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

    कांग्रेस देशभर में जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। पार्टी का तर्क है कि प्रतिनिधित्व, आरक्षण और संसाधनों के बंटवारे से जुड़े फैसलों के लिए अलग-अलग समुदायों की वास्तविक संख्या का पता होना जरूरी है।

    लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस के सामने एक अलग ही सवाल खड़ा हो गया है। राज्य में जातिगत सर्वे पहले ही हो चुका है और उसकी नई रिपोर्ट नवंबर 2025 से तैयार है। ऐसे में सिद्धारमैया अब अपनी ही पार्टी की सरकार पर इस रिपोर्ट को लागू करने का दबाव बना रहे हैं।

    बेंगलुरु में 6 सितंबर को कर्नाटक स्टेट बैकवर्ड कास्ट्स फेडरेशन के सिल्वर जुबली कार्यक्रम में सिद्धारमैया ने जातिगत सर्वे लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सभी को सामाजिक न्याय देना है तो कम से कम 75 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए।

    सिद्धारमैया का कहना है कि आरक्षण अलग-अलग समुदायों की आबादी के अनुपात में होना चाहिए। उन्होंने केवल सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की बात नहीं की। उनका तर्क है कि सामाजिक और राजनीतिक समानता के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में भी प्रतिनिधित्व जाति और आबादी के अनुरूप होना चाहिए।

    कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय और समानुपातिक प्रतिनिधित्व से जोड़ रही है। पार्टी का कहना है कि विश्वसनीय जातिगत आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व से जुड़े दावे अनुमानों पर आधारित रहेंगे। लेकिन कर्नाटक में स्थिति अलग है। यहां कांग्रेस सरकार के पास पहले से ही जातिगत सर्वे की रिपोर्ट मौजूद है।

    यही वजह है कि सिद्धारमैया की मांग कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है। अगर जातिगत आंकड़े सामने आने के बाद आरक्षण और प्रतिनिधित्व में बदलाव की मांग उठती है, तो राज्य में मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

    कर्नाटक में जातिगत सर्वे की शुरुआत सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री रहते उनके पिछले कार्यकाल में हुई थी। 2015 में एच. कंठराज के नेतृत्व में यह सर्वे कराया गया और 2017 तक पूरा हो गया था। हालांकि, इसकी रिपोर्ट कभी राजनीतिक रूप से लागू नहीं हो सकी। राज्य के प्रभावशाली लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं।

    इसके बाद जेडीएस-कांग्रेस और बीजेपी की सरकारों ने भी इसे बड़े नीतिगत फैसले के आधार के तौर पर आगे बढ़ाने से परहेज किया। 2023 में सिद्धारमैया के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया। 2025 में उनकी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया, लेकिन इसके साथ आंकड़ों की विश्वसनीयता और उनकी पुरानापन को लेकर सवाल भी उठे।

    इसके बाद सिद्धारमैया ने नए सिरे से जातिगत सर्वे का आदेश दिया। नई कवायद का उद्देश्य ज्यादा मौजूदा आंकड़े तैयार करना और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के तौर पर भी देखा गया।

    मई में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है। इसके बावजूद जातिगत जनगणना और समानुपातिक आरक्षण का मुद्दा उठाकर उन्होंने कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के लिए सिद्धारमैया की मांग को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। ऐसा करने पर कांग्रेस पर यह सवाल उठ सकता है कि वह बीजेपी के खिलाफ जातिगत न्याय की बात तो करती है, लेकिन अपने शासन वाले राज्य में उसी सिद्धांत को लागू करने से पीछे क्यों हट रही है।

    दूसरी ओर, सर्वे के निष्कर्ष लागू करने की अपनी राजनीतिक कीमत भी हो सकती है। कर्नाटक में कई प्रभावशाली समुदाय आरक्षण, प्रतिनिधित्व और राज्य के संसाधनों को लेकर अलग-अलग दावे रखते हैं। ऐसे में जातिगत आंकड़ों के आधार पर बदलाव करने से कुछ समुदायों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है।

    कांग्रेस 2027 की जनगणना में जातियों की गणना को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी ने ओबीसी की संख्या दर्ज किए जाने को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा है और जनगणना के प्रश्नपत्र में ओबीसी श्रेणी को कथित तौर पर शामिल नहीं किए जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    2027 की जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की भी राष्ट्रीय स्तर पर गणना की जाएगी। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब इस तरह जातियों की गणना राष्ट्रीय स्तर पर की जाएगी। लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस के सामने 2027 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। राज्य में पहले ही जातिगत सर्वे हो चुका है और नई रिपोर्ट भी तैयार है। यही स्थिति कांग्रेस के लिए असली परीक्षा बन गई है।

  • कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा

    कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को बेंगलुरु में स्विगी इंस्टामार्ट के एक डार्क स्टोर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक्सपायर हो चुके खाने-पीने के सामान और दवाओं के भंडारण तथा बिक्री के खिलाफ राज्य में तेज किए गए अभियान का हिस्सा थी। बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग तथा औषधि सुरक्षा विभाग की ओर से यह अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, डार्क स्टोर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    इस कार्रवाई के बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने लोगों से सामान खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजें और दवाइयां खरीदने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए। ग्राहकों को किसी उत्पाद में संदिग्ध स्थिति नजर आने पर उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देने की भी अपील की गई है।

    बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में पूरे कर्नाटक में करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त की गई हैं। जब्त किए गए सामान में एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट और दवाइयां भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ ऐसे उत्पाद कथित तौर पर बिक्री के लिए स्टोर किए गए थे, जिन पर नए लेबल लगाए गए थे।

    खादर ने ग्राहकों से खाना, दवाइयां और अन्य उत्पाद खरीदते समय उनकी जानकारी अच्छी तरह जांचने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखना जरूरी है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को किसी उत्पाद में कोई छोटा सुराग या संदिग्ध बात दिखाई देती है तो उसकी रिपोर्ट करने की अपील की गई है।

    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्राहकों को उत्पादों की जांच करने में सहायता देने के लिए क्यूआर कोड और बारकोड की व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने सोशल एक्टिविस्ट से भी अपील की कि सार्वजनिक स्थानों पर इस व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि ग्राहक इसका इस्तेमाल कर सकें और उत्पादों के संबंध में अधिक जागरूक हो सकें।

    खादर के मुताबिक, ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक एक्सपायर हो चुके तथा गलत लेबल वाले खाद्य उत्पाद और दवाइयां पहुंचने से रोकने के लिए लगातार निगरानी जरूरी है। उन्होंने इस प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्पादों की जांच के साथ संदिग्ध सामान की पहचान और उसे जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने होसकोटे में हुई जांच का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को वहां डार्क स्टोर्स पर करीब 45 लाख रुपये मूल्य की दवाइयां मिलीं। उनके अनुसार, कुछ उत्पादों के लेबल बदले गए थे। इन उत्पादों को अधिकारियों ने अपनी कस्टडी में ले लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

    राज्य में चल रही कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्राहकों को भी सतर्क रहने का संदेश दिया गया है। अधिकारियों की जांच में सामने आए एक्सपायर और गलत लेबल वाले उत्पादों को लेकर लोगों से खरीदारी के समय जानकारी जांचने और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना देने की अपील की गई है। कर्नाटक सरकार की ओर से क्यूआर कोड और बारकोड के जरिए उत्पादों की जांच को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

  • यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न

    यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न


    नई दिल्ली ।
    यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की रिलीज को लेकर लंबे समय से उत्साहित प्रशंसकों ने इसे सामान्य फिल्म प्रदर्शन की तरह नहीं, बल्कि किसी उत्सव की तरह मनाया। कर्नाटक में कई सिनेमाघरों के बाहर सुबह से ही दर्शकों की भीड़ देखने को मिली। कुछ प्रशंसक तड़के करीब तीन बजे ही सिनेमाघरों में पहुंच गए और फिल्म के प्रदर्शन का इंतजार करते नजर आए।

    फिल्म की रिलीज के मौके पर प्रशंसकों का उत्साह खास तौर पर सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया। कई जगहों पर डीजे और संगीत के बीच दर्शक नाचते नजर आए। कुछ प्रशंसक झंडे लहराते हुए अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे, जबकि कुछ ने दोस्तों को कंधे पर उठाकर जश्न मनाया। सिनेमाघरों के आसपास का माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा और प्रशंसकों ने यश के प्रति अपनी दीवानगी खुलकर जाहिर की।

    कर्नाटक के एक सिनेमाघर के बाहर दर्शकों की लंबी कतार भी दिखाई दी। लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए फिल्म देखने के लिए उत्सुक नजर आए। सिनेमाघर के बाहर यश की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। कई दर्शक फिल्म के पहले शो का हिस्सा बनने के लिए सुबह-सुबह ही पहुंच गए थे।

    कुछ स्थानों पर फिल्म की रिलीज को लेकर विशेष आयोजन भी देखने को मिले। सिनेमाघर के बाहर बनाए गए मंच पर प्रशंसक संगीत की धुन पर डांस करते नजर आए। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा दर्शकों ने हिस्सा लिया। फिल्म को लेकर पहले से बने माहौल के बीच रिलीज के दिन प्रशंसकों की यह प्रतिक्रिया यश की लोकप्रियता को दर्शाती है।

    इसी बीच यश की मौजूदगी से जुड़े एक वीडियो ने भी प्रशंसकों का ध्यान खींचा। इसमें अभिनेता एक मॉल में नजर आए, जहां उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रशंसक मॉल की छत और आसपास के स्थानों से यश को देखने की कोशिश करते दिखाई दिए। अभिनेता को देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने उनके प्रति प्रशंसकों की उत्सुकता को और स्पष्ट किया।

    हालांकि फिल्म की रिलीज के साथ सभी दर्शकों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में फिल्म देखकर सिनेमाघर से बाहर निकलने वाले दर्शकों से उनकी राय पूछी गई। इनमें एक दर्शक की प्रतिक्रिया से ऐसा संकेत मिला कि वह फिल्म से प्रभावित नहीं हुआ। इससे यह भी सामने आया कि शुरुआती दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

    टॉक्सिक में यश के साथ कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और नयनतारा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को लेकर यश के प्रशंसकों के बीच पहले से काफी उत्सुकता बनी हुई थी। रिलीज के दिन सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया उत्साह इसी प्रतीक्षा का परिणाम माना जा रहा है।

    फिलहाल फिल्म को लेकर दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में उत्साह और निराशा दोनों तरह के संकेत सामने आए हैं। आने वाले दिनों में दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि टॉक्सिक कहानी और अभिनय के स्तर पर कितनी मजबूत साबित होती है और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन कैसा रहता है।

  • कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में जहरीले धतूरा फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने Amazon, Instamart और BigBasket से जुड़े फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज को मानव इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराए जाने की शिकायतों और जांच के बाद की गई।

    धतूरा एक जहरीला पौधा माना जाता है और इसके फल तथा बीज का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसकी बिक्री और वितरण को लेकर विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई। जांच के दौरान अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित पाए गए।

    जांच में कुछ ऐसे पैकेट भी सामने आए जिन पर फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। विभाग के अनुसार, धतूरा जैसे जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में स्टोर करना, बेचना या वितरित करना स्वीकार्य नहीं है। जांच के दौरान ऐसे उत्पादों के गोदामों में रखे होने की जानकारी भी सामने आई, जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को विभाग के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कंपनियों से ऑनलाइन बिक्री, उत्पादों की उपलब्धता और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे गए।

    Amazon की ओर से इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया गया। वहीं Instamart ने अपने स्तर पर की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। BigBasket ने बताया कि उसने धतूरा के फलों की ऑनलाइन बिक्री रोक दी है। कंपनी की ओर से भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग को स्पष्ट करने की बात भी कही गई।

    BigBasket ने यह भी कहा कि ऐसे उत्पादों पर मानव उपभोग के लिए नहीं होने की स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी। हालांकि, नियामक विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। विभाग का कहना है कि जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के तौर पर उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से स्वीकार्य नहीं है।

    कार्रवाई के तहत Amazon, Instamart और BigBasket के संबंधित फूड लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। लाइसेंस की बहाली आगे की सुनवाई और कंपनियों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही हो सकेगी। इस दौरान कंपनियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।

    विभाग ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धतूरा के फल और बीज की उन सभी लिस्टिंग और विज्ञापनों को तत्काल हटाने या निलंबित करने का निर्देश दिया है, जिनमें इन्हें खाद्य पदार्थ या मानव उपभोग के लिए उपलब्ध बताया गया हो। साथ ही धतूरा उत्पादों की आपूर्ति करने वाले संबंधित विक्रेताओं और सप्लायरों के लाइसेंस तथा रजिस्ट्रेशन पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    इस कार्रवाई से ऑनलाइन खाद्य बिक्री में उत्पादों की जांच, सही लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी एक बार फिर सामने आई है। विभाग की सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहरीले या मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थ खाद्य उत्पादों के रूप में उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।

  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।