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  • तेज रफ्तार टैंकर ने ट्रैक्टर को मारी टक्कर, पुल से नीचे गिरे वाहन; एक बच्चे समेत 7 की मौके पर मौत

    तेज रफ्तार टैंकर ने ट्रैक्टर को मारी टक्कर, पुल से नीचे गिरे वाहन; एक बच्चे समेत 7 की मौके पर मौत

    नई दिल्ली । विजयनगर जिले में गुरुवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के सात लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल बताया जा रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्य धार्मिक यात्रा पर निकले थे और मंदिर में दर्शन करने के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे एक टैंकर ने पीछे से उनके ट्रैक्टर को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर और टैंकर दोनों नियंत्रण खोकर पुल से नीचे जा गिरे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    स्थानीय लोगों ने घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को बाहर निकालने की कोशिश की और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए। गंभीर रूप से घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कई घायलों की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है।

    हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग एक ही परिवार से जुड़े थे, जिससे पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल फैल गया है। परिवार धार्मिक आस्था के तहत मंदिर दर्शन के लिए गया था, लेकिन लौटते समय यह यात्रा दर्दनाक हादसे में बदल गई। गांव में जैसे ही घटना की खबर पहुंची, लोगों में मातम छा गया और कई परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

    प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी ताकि हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। लगातार हो रहे सड़क हादसों के बावजूद नियमों की अनदेखी और लापरवाही की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस दर्दनाक दुर्घटना ने कई परिवारों की खुशियां एक पल में छीन लीं और पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया।

  • Karnataka: तुमकुरु जिले में H5N1 बर्ड फ्लू वायरस से 44 मोरों की मौत… क्षेत्र में दहशत

    Karnataka: तुमकुरु जिले में H5N1 बर्ड फ्लू वायरस से 44 मोरों की मौत… क्षेत्र में दहशत


    तुमकुरु।
    कर्नाटक (Karnataka) के तुमकुरु जिले (Tumakuru district) में 44 मोरों की मौत हो गई है। इनके H5N1 बर्ड फ्लू वायरस (H5N1 Bird flu virus) से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि यह घटना सबसे पहले 16 अप्रैल को सामने आई थी और एक हफ्ते के भीतर तुमकुरु तालुका में अलग-अलग जगहों पर रहस्यमय परिस्थितियों में 44 मोर मृत पाए गए।

    वन विभाग के अनुसार, केसरामाडु, हिरेहल्लि और गुलूर ग्राम पंचायतों के खेतों में सर्च ऑपरेशन के दौरान इन मोरों के शव मिले। मृत पक्षियों के सैंपल भोपाल स्थित आईसीएआर (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीजेस) भेजे गए थे, जहां जांच में H5N1 वायरस को मौत का कारण बताया गया। हालांकि 23 अप्रैल के बाद से तुमकुरु तालुक में कोई नई मौत दर्ज नहीं की गई है।


    10 किमी दायरे में कंटेनमेंट जोन घोषित

    वन्यजीव के मुख्य वन संरक्षक कुमार पुष्कर ने बताया कि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन व पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है और सभी पोल्ट्री फार्मों को सतर्क कर दिया गया है। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों को ILI (इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण) और SARI (गंभीर श्वसन संक्रमण) के मामलों की निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही PPE किट, ट्रिपल-लेयर मास्क, ओसेल्टामिविर दवा, वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम और थ्रोट स्वैब किट का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने को कहा गया है।


    H5N1 बर्ड फ्लू संक्रमण क्या है

    H5N1 बर्ड फ्लू बेहद संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है। लेकिन, कभी-कभी मनुष्यों में भी संक्रमण फैला सकता है। यह इन्फ्लुएंजा A वायरस का एक प्रकार है, जो विशेष रूप से मुर्गियों, बतखों और जंगली पक्षियों में पाया जाता है। संक्रमित पक्षियों के संपर्क, उनके मल, लार या दूषित वातावरण से यह वायरस फैलता है। मनुष्यों में इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई शामिल हो सकते हैं, जो गंभीर होने पर जानलेवा भी हो सकते हैं।

  • हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन

    हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन


    नई दिल्ली।
    हिंदी भाषा (Hindi Language) को लेकर अकसर ही देश में एक वर्ग नॉर्थ बनाम साउथ की डिबेट (North vs. South debate) चलाता रहा है। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Chief Minister MK Stalin) तो कई बार केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि हिंदी थोपने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह भी सच है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी स्वाभाविक रूप से बड़ी आबादी द्वारा ना सिर्फ स्वीकार की जा रही है बल्कि उसके महत्व को समझते हुए सीखने के प्रयास भी हो रहे हैं। इसका उदाहरण कर्नाटक स्टेट बोर्ड के नतीजों ने भी प्रस्तुत किया है। कर्नाटक स्कूल बोर्ड के छात्रों में से कुल 93 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्होंने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया।

    नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया है। इसके अनुसार छात्र अंग्रेजी सीखेंगे। इसके अलावा एक स्थानीय भाषा वे अपने अनुसार चुन सकते हैं। फिर वे तीसरी भाषा के तौर पर अन्य किसी भी भाषा को स्वीकार कर सकते हैं। कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना है। कर्नाटक बोर्ड में कुल 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा को चुना है और इनमें से 7.5 लाख लोगों ने हिंदी का ही विकल्प पसंद किया है। कोंकणी, मराठी, उर्दू, अरबी जैसी भाषाओं को भी कुछ छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में चुना है। इस आंकड़े ने हिंदी भाषा की लोकप्रियता को स्थापित किया है।

    हिंदी को लेकर अमित शाह ने जब कहा था कि यह देश की संपर्क भाषा है और इसका विस्तार जरूरी है तो तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विरोध किया था। उनका कहना था कि हिंदी को थोपा जा रहा है, जबकि देश में तमिल सबसे पुरानी भाषा है। तमिलनाडु के लोगों का मानना है कि उनकी भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है।


    त्रिभाषा नीति से विरोध खत्म करने की कोशिश, सबको मिलेगा महत्व

    त्रिभाषा नीति के जरिए सरकार ने इसी विरोधाभास को खत्म करने का प्रयास किया है। इसके अलावा भाषा के चलते पैदा होने वाले विवादों में भी इससे कमी आएगी। इस नीति के तहत सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। ऐसे में यदि कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी भाषा को तीसरे विकल्प के तौर पर चुना तो यह अच्छी खबर है। पहले जब होम मिनिस्टर अमित शाह ने हिंदी भाषा को लेकर बयान दिया था तो एमके स्टालिन ने आपत्ति जताई थी। हालांकि कुछ सर्वे दावा करते रहे हैं कि तमिलनाडु में भी हिंदी का तेजी से प्रसार हो रहा है।

  • LPG संकट: कर्नाटक में 300 से ज्यादा पंप हुए बंद…. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बढ़ाई सप्लाई

    LPG संकट: कर्नाटक में 300 से ज्यादा पंप हुए बंद…. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बढ़ाई सप्लाई


    बंगलूरू।
    कर्नाटक (Karnataka ) में इन दिनों ऑटो एलपीजी (Auto LPG.) की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि बंगलूरू और राज्य के कई हिस्सों में 300 से ज्यादा निजी एलपीजी पंप बंद (Over 300 Pumps Shut Down) हो गए हैं या आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (इंडियन ऑयल) (Indian Oil Corporation ) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने पूरे कर्नाटक में ऑटो एलपीजी की सप्लाई काफी बढ़ा दी है, ताकि ऑटो रिक्शा और एलपीजी से चलने वाली गाड़ियों को ईंधन की कमी न हो।

    कंपनी के मुताबिक, अभी वह अपने 55 ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशनों (ALDS) के जरिए राज्य में जरूरत पूरी कर रही है। निजी पंप बंद होने के कारण अब ज्यादा लोग सरकारी पंपों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे यहां दबाव भी काफी बढ़ गया है। इंडियन ऑयल के अधिकारी वी. वेत्रिसेल्वाक्कुमार ने बताया कि कंपनी ने हालात को संभालने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि सप्लाई लगातार जारी रहे और लोगों को परेशानी न हो।


    क्या कहता है आंकड़ा, समझिए

    आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में इंडियन ऑयल के पंपों पर रोजाना बिक्री बढ़कर करीब 59.53 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह औसतन 43.4 मीट्रिक टन थी। यानी मांग में काफी बड़ा उछाल आया है।

    कंपनी ने दिलाया भरोसा
    इसके साथ ही कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सभी क्षेत्रों में ईंधन की बराबर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। कुल मिलाकर, निजी पंपों के बंद होने से बनी स्थिति को संभालने के लिए इंडियन ऑयल पूरी तरह सक्रिय हो गया है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो।

  • कर्नाटक के विजयपुरा में निजी जेट हादसा, खेत में गिरा विमान; दो लोग गंभीर रूप से घायल, तकनीकी खराबी की आशंका

    कर्नाटक के विजयपुरा में निजी जेट हादसा, खेत में गिरा विमान; दो लोग गंभीर रूप से घायल, तकनीकी खराबी की आशंका


    नई दिल्ली। विजयपुरा (कर्नाटक)। कर्नाटक के विजयपुरा जिले में रविवार दोपहर एक निजी जेट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। रेड बर्ड कंपनी का यह प्राइवेट जेट बालेश्वर तालुका के मैंगलोर गांव के पास एक खेत में गिरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    घटना के बाद आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है, जबकि शुरुआती जानकारी में तकनीकी खराबी और संतुलन बिगड़ने की बात सामने आई है।

    खेत में गिरा विमान, मची भगदड़

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय आसमान में तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही क्षणों में विमान तेजी से नीचे आता दिखाई दिया। देखते ही देखते वह मैंगलोर गांव के पास एक खेत में जा गिरा। टक्कर के साथ तेज धमाके जैसी आवाज हुई, जिससे आसपास के लोग घबरा गए और घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

    गांव के लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायल यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। स्थानीय लोगों की तत्परता से दोनों घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका, जिससे उनकी जान बचने की उम्मीद बढ़ गई।

    दो लोग गंभीर रूप से घायल

    विमान में सवार दोनों लोग इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसे के तुरंत बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। प्रशासन की ओर से अभी तक घायलों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

    चिकित्सकों के अनुसार, दोनों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। हालांकि समय पर इलाज मिलने से उनकी स्थिति स्थिर करने की कोशिश की जा रही है।

    तकनीकी खराबी बनी हादसे की वजह?

    शुरुआती जांच में सामने आया है कि विमान कालबुर्गी के पास उड़ान के दौरान संतुलन खोने लगा था। पायलट ने विमान को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वह सफल नहीं हो पाया। नियंत्रण खोने के बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा और अंततः मैंगलोर गांव के पास खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विमान आबादी वाले इलाके में गिरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। खेत में गिरने के कारण किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है।

    मौके पर पहुंचा प्रशासन, जांच शुरू

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पूरे इलाके को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि कोई भी व्यक्ति मलबे के पास न जा सके। तकनीकी टीम को भी बुलाया गया है, जो विमान के अवशेषों की जांच कर दुर्घटना के असली कारणों का पता लगाएगी।

    प्रशासन ने बताया कि विमान किस रूट पर था और उसका अंतिम गंतव्य क्या था, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही कंपनी से जुड़े अधिकारियों से भी संपर्क किया जा रहा है।

    बाल-बाल बची बड़ी त्रासदी

    जिस स्थान पर विमान गिरा, वहां आसपास खेती का काम चल रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विमान कुछ मीटर इधर-उधर गिरता, तो कई लोगों की जान जा सकती थी। खेत में गिरने के कारण बड़ी जनहानि टल गई।इस हादसे ने स्थानीय लोगों को हिला कर रख दिया है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहली बार इतने करीब से किसी विमान दुर्घटना को देखा।

    सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

    इस घटना के बाद निजी विमानों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मानवीय भूल या किसी अन्य कारण से हुई।

    फिलहाल प्राथमिकता घायलों के इलाज और हादसे की विस्तृत जांच पर है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।इस हादसे ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय प्रशासन और विमानन से जुड़े विभाग अब हर पहलू की गहन जांच कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

  • कर्नाटक में झारखंड के मजदूर को बांग्लादेशी होने के शक में पीटा, महिला ने बचाया; 4 आरोपियों पर मामला दर्ज

    कर्नाटक में झारखंड के मजदूर को बांग्लादेशी होने के शक में पीटा, महिला ने बचाया; 4 आरोपियों पर मामला दर्ज


    झारखंड । कर्नाटक के मंगलुरु में एक झारखंड के प्रवासी मजदूर को कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक होने के शक में चार लोगों ने बेरहमी से पीटा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना रविवार को मंगलुरु के बाहरी इलाके कुलूर में हुई, जहां आरोपियों ने मजदूर से उसकी नागरिकता को लेकर सवाल किए और पहचान पत्र दिखाने की मांग की। झारखंड के दिलजान अंसारी पिछले 10 से 15 वर्षों से काम की तलाश में मंगलुरु में रह रहे थे। वह हर साल चार से छह महीने शहर में काम करते हैं।
    अंसारी ने आरोपियों को बार-बार बताया कि वह भारतीय नागरिक हैं, लेकिन आरोपियों ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया और उन्हें बांग्लादेशी समझते हुए लगातार परेशान किया। आरोपी अपने शक के आधार पर अंसारी के साथ अपमानजनक व्यवहार करते रहे। इस दौरान एक स्थानीय महिला ने उनकी मदद की और उन्हें आरोपियों के चंगुल से बचाया हालांकि, डर के कारण अंसारी ने शुरू में पुलिस से संपर्क नहीं किया और बिना शिकायत के घर लौट गए। लेकिन बाद में स्थानीय नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया।
    मंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने बताया कि सत्यापन के बाद यह पुष्टि हुई कि दिलजान अंसारी भारतीय नागरिक हैं और काम के सिलसिले में मंगलुरु आए थे। पुलिस ने कुलूर के निवासी सागर, धनुष, लालू उर्फ रतीश और मोहन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं और जांच जारी है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि देश में प्रवासी श्रमिकों के प्रति भेदभाव और असहिष्णुता का क्या स्तर है, खासकर उन पर जो बाहरी राज्य से आकर काम करते हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आगे से ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।

  • कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे

    कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे




    बेंगलुरु।
    कर्नाटक कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।कर्नाटक सरकार का कहना है कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे।
    निवासियों की आपत्ति
    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

    विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल
    इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ।

    दलित संघर्ष समिति और कई अन्य संगठन भी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

    केरल सरकार की निंदा
    पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया और कहा कि यह इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है।

    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब
    कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

  • कर्नाटक में भीषण हादसा… ट्रक से टक्कर के बाद स्लीपर कोच बस में लगी आग… 10 लोगों की मौत

    कर्नाटक में भीषण हादसा… ट्रक से टक्कर के बाद स्लीपर कोच बस में लगी आग… 10 लोगों की मौत


    चित्रदुर्ग ।
    कर्नाटक (Karnataka) में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे (Road Accident ) में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले (Chitradurga district) में एक ट्रक से टक्कर (Collision with a truck) के बाद निजी स्लीपर कोच बस (Sleeper coach bus) में आग लगने से कम से कम 10 लोगों की जलकर मौत हो गई।

    पुलिस ने बताया कि बेंगलुरु से गोकर्ण जा रही निजी स्लीपर कोच बस को एक ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी और उसमें तुरंत आग लग गई। पुलिस ने बताया कि चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर तालुक में गोरलाथु क्रॉस के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर यह सड़क दुर्घटना हुई।


    डिवाइडर पार कर बस से टकराया ट्रक

    पुलिस ने बताया कि हिरियूर से बेंगलुरु की ओर जा रहा एक ट्रक डिवाइडर को पार कर गया और बेंगलुरु से शिवमोगा जा रही एक बस से टकरा गया। पुलिस का कहना है कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका पास के ही अस्पताल में इलाज जारी है।


    शुरुआती जांच में सामने आई ट्रक चालक की लापरवाही

    पुलिस की शुरुआती जांच में ट्रक चालक की लापरवाही की बात सामने आई है। ट्रक से हुई भीषण टक्कर के चलते बस में तुरंत ही आग लग गई थी और वह पूरी तरह जलकर खाक हो गई। इसकी वजह से पुलिस को बचाव कार्य करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस हादसे में स्लीपर कोच में आग लग गई, जिससे कई यात्री अंदर फंस गए थे।


    पीएम मोदी ने हादसे पर जताया दुख

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में हुए सड़क हादसे पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में हुई दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से गहरा दुःख हुआ है। अपनों को खोने वालों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।’

    एक रिपोर्ट के मुताबिक चित्रदुर्ग के पुलिस अधीक्षक रंजीत ने घटनास्थल का दौरा किया और जांच की निगरानी कर रहे हैं। हिरियूर ग्रामीण पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पुलिस ने शक जताया है कि ट्रक चालक गाड़ी चलाते समय सो गया होगा।

  • कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक(Karnataka) में मुख्यमंत्री पद को लेकर मची खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। हाई कमान के निर्देश पर मुख्यमंत्री के घर हुए दोनों नेताओं के नाश्ते के बाद ऐसा दावा किया जा रहा था कि अब सब ठीक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों की तरफ से की जा रही बयान बाजी के बाद यह साफ है कि कुछ ठीक नहीं है। हिन्दुस्तान (Hindustan)टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसी खींचतान को लेकर अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(Siddaramaiah) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार(DK Shivakumar) 14 दिसंबर को नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

    कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

    कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, “सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।” सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी।

    गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका।

  • कर्नाटक में टीपू जयंती को लेकर फिर सियासी विवाद, कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में मनाने की मांग रखी

    कर्नाटक में टीपू जयंती को लेकर फिर सियासी विवाद, कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में मनाने की मांग रखी


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक में टीपू की जयंती को लेकर विवाद फिर भड़क गया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक शिवानंद कशप्पनवार ने 18वीं सदी के मैसुरू शासक की जयंती के आयोजन को लेकर कर्नाटक विधानसभा में ध्यानार्षण प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान सिद्धरमैया ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। हालांकि, इस मुद्दे पर कोडागु समेत विभिन्न स्थानों पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद इस परंपरा पर विराम लगा दिया गया था। कोडागु में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में पुलिस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों के बाद टीपू की जयंती बेहद सादगी से मनाई गई और बाद में धीरे-धीरे इसे स्थगित कर दिया गया।

    अब हुंगुंड विधायक ने एक बार फिर इसे तूल दिया है। कशप्पनवर चाहते हैं कि सरकार टीपू की जयंती को प्रायोजित करे, जिस पर विपक्षी भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने कहा है कि वह इसका कड़ा विरोध करेगी। कशप्पनवर ने कहा कि उन्होंने टीपू की जयंती के आयोजन को लेकर प्रस्ताव दिया है। हमें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा ने खुद टीपू की तरह पोशाक धारण की और जयंती समारोह में शामिल हुए।

    कांग्रेस विधायक का क्या है तर्क
    कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘जब उन्हें जरूरत थी तब उन्होंने इसे मनाया, लेकिन अब वे नहीं चाहते कि टीपू जयंती को मनाया जाए, लेकिन हम चाहते हैं कि इसका आयोजन हो।’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने पत्रकारों से कहा, ‘वे चाहे टीपू जयंती मनाए, ओसामा बिन लादेन का जन्मदिन और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस मनाए। यह उनकी सरकार है। जनता को पता चल जाएगा कि उनका झुकाव किसकी तरफ है।’

    किस तरह की आई प्रतिक्रिया
    कर्नाटक के वक्फ और आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा कि वह टीपू जयंती का आयोजन करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘देश भर में टीपू अनुयायी टीपू जयंती का आयोजन करते आ रहे हैं। हमने भी पिछले महीने इसका आयोजन किया था। सिद्धारमैया इसे विधान सौध के बैंक्वेट हॉल में आयोजित किया करते थे, जिसे अब रोक दिया गया है। जब वहां इसका आयोजन बंद कर दिया गया है, क्या हमें इसे कहीं और आयोजित नहीं करना चाहिए।’