Tag: Kashmir

  • 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी वाराणसी में स्वागत से खुश

    72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी वाराणसी में स्वागत से खुश


    वाराणसी । वाराणसी में 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का आयोजन काशी के सिगरा स्टेडियम में चल रहा है। इसमें देशभर की 58 संस्थाओं की 1,000 से ज्यादा टीमों के खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर की महिला टीम ने यहां अपने स्वागत को लेकर काफी खुशी व्यक्त की।

    जम्मू-कश्मीर महिला टीम के मुख्य कोच बलविंदर सिंह जंबाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा”सरकार और हमारी एसोसिएशन के सहयोग से जम्मू-कश्मीर में खेल को बढ़ावा मिला है। यही वजह है कि हम यहां तक पहुंचे हैं। वाराणसी में हमें जो स्वागत मिला हैवह बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नातेयह धार्मिक नगरी है और हम यहां आकर बहुत खुश हैं।

    टीम की सदस्य सदफ मंजूर ने बताया”यहां प्रतियोगिता काफी कठिन हैक्योंकि देश भर से मजबूत टीमें आई हैं। हम भी अपनी पूरी कोशिश करेंगे।” उन्होंने कहा कि यह उनका पहला मौका है जब वे वाराणसी आई हैं और यहां के लोगों ने उन्हें दिल से स्वागत कियाजिसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लड़कियों के लिए खेल के क्षेत्र में आना बहुत मुश्किल थालेकिन केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से अब जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की खेलों में भागीदारी बढ़ी है।

    सदफ ने हिजाब पहनकर खेलने पर भी चर्चा की और कहा”हम हिजाब पहनकर खेलते हैं और हमें कोई समस्या नहीं होती। हमारी संस्कृति और पहनावे का सम्मान किया जाता है।कश्मीर की आयत ने भी प्रतियोगिता की चुनौतीपूर्ण प्रकृति को स्वीकार किया और कहा”यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हैऔर हम अच्छी सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद करते हैं। हमें यहां बहुत अच्छा लगाऔर स्वागत बहुत अच्छा हुआ।

    चैंपियनशिप का आयोजन

    यह चैंपियनशिप 4 जनवरी से 11 जनवरी तक चलेगी। उद्घाटन कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअली किया जाएगा।

  • NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल

    NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल


    नई दिल्ली । चर्चित जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मामले में अपनी चार्जशीट दायर की है जिसमें सात आरोपियों का नाम शामिल है। इन आरोपियों में प्रमुख पाकिस्तानी आतंकवादी साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकवादी संगठनों का नाम भी शामिल है जो पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। चार्जशीट में यह बताया गया है कि पाकिस्तान से इस हमले की साजिश रची गई और इसमें लश्कर और TRF की भूमिका अहम रही। एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों ने धर्म आधारित टार्गेट हत्याएं की थीं और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय था।

    एनआईए द्वारा दायर 1597 पन्नों की चार्जशीट में पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी शामिल हैं जिनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। इन तीन आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षा बलों ने जुलाई में श्रीनगर के दाचीगाम में ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया था।

    कौन है साजिद जट्ट

    चार्जशीट में लश्कर के टॉप कमांडर साजिद जट्ट को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। उनका पूरा नाम सैफुल्लाह साजिद जट्ट है और वह पाकिस्तान के पंजाब राज्य के कसूर जिले का रहने वाला है। साजिद जट्ट लश्कर-ए-तैयबा का तीसरा सबसे बड़ा कमांडर माना जाता है और हाफिज सईद के बाद वह इस संगठन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक हैं।

    साजिद जट्ट को द रेजिस्टेंस फ्रंट का चीफ भी बताया जाता है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है। TRF ने ही पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था। भारत सरकार ने साल 2023 में TRF को यूएपीए के तहत बैन कर दिया था। एनआईए ने साजिद जट्ट पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।

    चार्जशीट में साजिद जट्ट के अलावा अन्य चार आतंकवादियों पर भी आरोप लगाए गए हैं जिनमें भारतीय न्याय संहिता शस्त्र अधिनियम 1959 और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम 1967 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों को आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में 22 जून को एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

    एनआईए ने अपनी जांच में यह पुष्टि की कि दोनों स्थानीय कश्मीरी आरोपियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान की और यह भी बताया कि ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इसके अलावा एनआईए ने पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है।

    इस चार्जशीट से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय सीमा में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित कर रहा है और ऐसे आतंकवादियों की मदद करने में स्थानीय कश्मीरी भी शामिल हो रहे हैं। एनआईए की यह कार्रवाई इस बात को भी उजागर करती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है।

  • NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार

    NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार


    नई दिल्ली । 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के संबंध में अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। इस चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रजिस्टेंस फ्रंट के सात प्रमुख आतंकवादियों को आरोपी ठहराया गया है। इनमें से तीन आतंकवादी मारे जा चुके हैं जबकि दो स्थानीय लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए थे जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आतंकवादी गतिविधियां और तनाव उत्पन्न हो गया था।

    चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और लश्कर-ए-तैयबा तथा के आतंकवादियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। इसके अलावा पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी इसमें शामिल हैं जिनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी का नाम शामिल है। ये तीनों आतंकवादी श्रीनगर के जंगलों में चलाए गए ऑपरेशन महादेव के दौरान भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गए थे।

    चार्जशीट में एनआईए ने भारतीय दंड संहिता के तहत आर्म्स एक्ट 1969 और यूएपीए 1967 की धारा 13 18 और 20 के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा एनआईए ने दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी आरोपी बनाया है। इन दोनों को 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें मदद पहुंचाने का आरोप है। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान के ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।

    एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों स्थानीय कश्मीरियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान भी की। इससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठनों ने इस हमले की साजिश रची थी और इसमें स्थानीय कश्मीरियों का भी सहयोग था।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमला करना शुरू कर दिया लेकिन भारतीय सेना के मजबूत डिफेंस सिस्टम के सामने पाकिस्तान की कार्रवाइयां नाकाम हो गईं। अंत में पाकिस्तान को युद्धविराम की ओर कदम बढ़ाना पड़ा।

    यह चार्जशीट आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति और पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को पनाह देने की निरंतर कोशिशों को उजागर करती है। एनआईए द्वारा किए गए इस खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और TRF जैसे आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रच रहे हैं।

    एनआईए की चार्जशीट से यह भी संदेश जाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। इस मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपी आतंकवादियों को पकड़ा जाने तक उनकी तलाश जारी रहेगी।

  • लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं

    लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

    अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव

    मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ

    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में ‘शिकारा नाव’ सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा।

    यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को भोपाल के बोट क्लब पर ‘शिकारा नाव’ सेवा को झंडी दिखाने के बाद कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। उन्हाेंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई।

    शिकारे की सैर का लिया आनंद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को झंडा दिखाने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाघ और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि राजधानी की इतनी बड़ी झील में शिकारा सेवा की शुरुआत बहुत आकर्षक है। इससे प्रदेश में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

    देश के दिल भोपाल का विशेष दर्जा है : हरियाणा वि.स. अध्यक्ष हरविंदर

    शिकारा सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल सभी भारतवासियों के दिल के करीब है, यह शहर देशभर में अलग दर्जा हासिल किए हुए है। बड़े तालाब में शिकारे चलते देखने का दृश्य अविस्मरणीय है। वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेशवासियों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव भोपाल में होगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डल झील के शिकारों के माध्यम से कश्मीर को मध्यप्रदेश ले आएं हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म की यह पहल सराहनीय है।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। शिकारों पर नौकायन का आनंद लेने के साथ पर्यटक बर्ड वाचिंग, हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स आदि भी खरीद सकेंगे।

    इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में पर्यटन प्रेमी उपस्थित थे।