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  • केरल के इस्लामिक स्कॉलर का विवादित बयान, ‘महिलाओं के मंच पर आने से मचेगी तबाही, घरों में रहें’

    केरल के इस्लामिक स्कॉलर का विवादित बयान, ‘महिलाओं के मंच पर आने से मचेगी तबाही, घरों में रहें’


    नई दिल्ली। केरल में महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर पुरुषों के साथ मौजूद रहने को लेकर जारी विवाद अब और बढ़ गया है। इस बीच इस्लामिक स्कॉलर कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने महिलाओं को घरों तक सीमित रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘बड़ी तबाही’ हो सकती है और इसी वजह से इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है।

    कंथापुरम ने रविवार को कोच्चि में आयोजित एक इस्लामिक सम्मेलन में यह बयान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब समस्थ केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट के एक सर्कुलर को लेकर पहले ही विवाद चल रहा है।

    महिलाओं के पुरुषों के साथ मंच साझा करने पर रोक
    समस्थ केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट ने पिछले सप्ताह धार्मिक समारोहों और कार्यक्रमों को निर्धारित सीमाओं के भीतर आयोजित करने की बात कही थी। संगठन के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि महिलाएं पुरुषों के साथ मंच साझा न करें और सार्वजनिक स्थानों पर पुरुषों के साथ नजर न आएं। इस निर्देश के बाद विवाद शुरू हो गया था। कई महिला राजनीतिक नेताओं ने भी इसका विरोध किया था।

    ‘महिलाओं को घरों तक सीमित रहना चाहिए’
    रविवार को सम्मेलन में कंथापुरम ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर आने से बड़ी तबाही हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, ‘पवित्र कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को अपने घरों तक सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए।’ कंथापुरम ने दावा किया कि इस तरह की शिक्षा पिछले 100 वर्षों से धार्मिक विद्वानों, विशेष रूप से समस्थ के नेताओं की ओर से दी जाती रही है।

    ‘विरोध के बावजूद बोलते रहेंगे’
    कंथापुरम ने कहा कि धार्मिक मामलों का अध्ययन करने वाले विद्वानों की इस विषय पर अपनी बात रखने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विरोध या सवाल उठाए जाने के बावजूद वे अपने विचार व्यक्त करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य संगठन या समस्थ के नेता उनके रुख का विरोध करते हैं, तब भी वे अपनी बात कहेंगे। कंथापुरम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हम इसे कहेंगे और कहते रहेंगे। कोई हमें रोक नहीं सकता।’ उनके इस बयान के बाद महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और धार्मिक संगठनों के निर्देशों को लेकर केरल में बहस और तेज होने की संभावना है।

  • Miss Universe India 2026 का खिताब केरल की केजिया लिज मेजो ने जीता, वैष्णवी गणेश और अनुश्री सातवलेकर बनीं रनर-अप

    Miss Universe India 2026 का खिताब केरल की केजिया लिज मेजो ने जीता, वैष्णवी गणेश और अनुश्री सातवलेकर बनीं रनर-अप

    नई दिल्ली ।केरल की 19 वर्षीय केजिया लिज मेजो ने मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया है। जयपुर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में देशभर से आईं प्रतिभागियों के बीच मुकाबले के बाद केजिया को विजेता घोषित किया गया। मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 की विजेता मनिका विश्वकर्मा ने उन्हें ताज पहनाया। खिताब जीतने के बाद केजिया भावुक नजर आईं और उन्होंने इस उपलब्धि को अपने लिए बड़ी जिम्मेदारी बताया।

    जयपुर के जी-स्टूडियो में रविवार देर रात आयोजित फिनाले में प्रतिभागियों ने टैलेंट, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और मंच पर अपनी प्रस्तुति के जरिए निर्णायकों को प्रभावित किया। प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंची सुंदरियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अंतिम दौर में पहुंचीं प्रतिभागियों में केजिया लिज मेजो, वैष्णवी गणेश, तेजस्विनी श्रीवास्तव, अनुश्री सातवलेकर और अनुभा वशिष्ठ शामिल थीं।

    अंतिम परिणाम में तमिलनाडु की वैष्णवी गणेश ने फर्स्ट रनर-अप का स्थान हासिल किया। गुजरात की अनुश्री सातवलेकर सेकंड रनर-अप रहीं। इसके साथ ही केरल की केजिया लिज मेजो ने प्रतियोगिता का विजेता खिताब हासिल किया। इस जीत के साथ अब केजिया इस साल होने वाली 75वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

    खिताब जीतने के बाद केजिया ने कहा कि यह ताज उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने को गर्व और सम्मान का अवसर बताया। केजिया का कहना है कि वह इस मंच के माध्यम से भारत की विविधता, संस्कृति, प्रतिभा और नई पीढ़ी की शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहती हैं।

    केजिया लिज मेजो की पहचान सिर्फ ब्यूटी पेजेंट तक सीमित नहीं है। वह कानून की छात्रा हैं और मॉडलिंग के साथ क्लासिकल डांस से भी जुड़ी हुई हैं। वह फिलहाल बेंगलुरु में कानून की पढ़ाई कर रही हैं और उनका संबंध कोच्चि से है। उनके माता-पिता के नाम मेजो अब्राहम और सुजा मेजो बताए गए हैं।

    केजिया ने वर्ष 2026 में मिस यूनिवर्स केरल का खिताब भी जीता था। इससे पहले वह मिस टीन इंटरनेशनल 2025 में फर्स्ट रनर-अप रह चुकी हैं। उन्होंने मिस टीन इंडिया का खिताब भी अपने नाम किया था और अंतरराष्ट्रीय टीन ब्यूटी पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। कम उम्र में लगातार मिल रही सफलताओं ने उन्हें ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई है।

    केजिया सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं। वह इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। इसके अलावा वह मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों पर भी अपनी बात रखती हैं। सोशल मीडिया पर उनके हजारों फॉलोअर्स हैं और उनकी ऑनलाइन मौजूदगी लगातार चर्चा में रहती है।

    मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का ताज मिलने के बाद केजिया के सामने अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की चुनौती है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता के बाद वह भारत की ओर से मिस यूनिवर्स के वैश्विक मंच पर उतरेंगी। देशभर में अब उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह मंगलवार से पूर्ण निर्यात-आयात संचालन के साथ अपने विकास के नए चरण में प्रवेश करेगा। भारत के पहले गहरे पानी वाले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के रूप में विकसित किए गए विझिंजम में अब ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों के साथ प्रत्यक्ष वाणिज्यिक व्यापार संचालन भी शुरू होगा। इसे केरल की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    पूर्ण निर्यात-आयात संचालन की शुरुआत के अवसर पर सुबह 10:45 बजे पहले निर्यात कंटेनर को रवाना किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस शुरुआत के साथ केरल के निर्यातकों को अपने माल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए दूसरे ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

    अब तक विझिंजम मुख्य रूप से ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर विकसित किया गया है। नई व्यवस्था के बाद यहां से केरल और देश के अन्य हिस्सों के निर्यातक सीधे विदेशी बाजारों के लिए कंटेनर भेज सकेंगे। इससे कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे पारंपरिक ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के जरिए माल भेजने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है। इसका असर परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    विझिंजम की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी प्राकृतिक समुद्री गहराई और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति शामिल है। बंदरगाह में करीब 20 से 24 मीटर की प्राकृतिक गहराई है, जिससे यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित हुई है। यह अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग कॉरिडोर से लगभग 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार के प्रमुख मार्गों तक इसकी पहुंच मजबूत होती है।

    परीक्षण संचालन के दौरान स्पेन के वालेंसिया भेजा गया पहला निर्यात कंटेनर इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। अब नियमित निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद कृषि उत्पाद, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, हथकरघा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

    बंदरगाह के विस्तार का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सहायक सुविधाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

    राज्य सरकार इस अवसर के साथ बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास को गति देने के लिए मिशन समुद्र शुरू कर रही है। इसके तहत विझिंजम मैरीटाइम इकोनॉमिक रीजन विकसित करने की योजना है। इसमें आठ औद्योगिक क्लस्टर और तीन नए शहरों को विकसित करने के साथ केरल की करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने इस पहल के लिए 400 करोड़ रुपये का कैटेलिटिक फंड निर्धारित किया है। इसका इस्तेमाल बंदरगाह और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक क्लस्टर, नए शहरों, कार्यक्रम प्रबंधन और क्षमता निर्माण से जुड़ी 14 उप-योजनाओं में किया जाएगा। वर्ष 2031 तक निजी निवेश के जरिए सार्वजनिक निवेश की तुलना में कई गुना अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा करने की उम्मीद जताई गई है।

    विझिंजम के संचालन का जिम्मा अदाणी पोर्ट्स के पास है। मजबूत सड़क और रेल संपर्क के साथ बंदरगाह के विस्तार से केरल के विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। पूर्ण निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद विझिंजम केवल ट्रांसशिपमेंट केंद्र नहीं, बल्कि केरल के लिए वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास का प्रमुख द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • बारिश से जूझते केरल में राजनीतिक घमासान, CPIM सांसद ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

    बारिश से जूझते केरल में राजनीतिक घमासान, CPIM सांसद ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।केरल में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। राज्य के अनेक हिस्सों में जलभराव, बाढ़ जैसी स्थिति और भूस्खलन की आशंका के बीच प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। इसी बीच राज्य की राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। माकपा के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आपदा की इस घड़ी में उन्हें राहत कार्यों का नेतृत्व करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए था।

    राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री मलप्पुरम जिले के पोन्नानी क्षेत्र में यूथ लीग के एक नेता के घर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ए.ए. रहीम ने कहा कि जब राज्य के कई जिले प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं और हजारों लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तब मुख्यमंत्री की उपस्थिति ऐसे कार्यक्रम में उचित संदेश नहीं देती।

    रहीम ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी जिम्मेदारी राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी समन्वय करना है। उनके अनुसार ऐसे समय में प्रशासनिक नेतृत्व का सक्रिय रूप से मैदान में दिखाई देना लोगों के बीच भरोसा पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा की गंभीर स्थिति के दौरान निजी कार्यक्रमों में शामिल होना जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब पूरा राज्य भारी बारिश, बाढ़ और अनिश्चितता के माहौल से गुजर रहा हो, तब सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और बचाव अभियान को तेज करने पर होना चाहिए। रहीम ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे अन्य सभी गतिविधियों को पीछे छोड़कर राज्य में चल रहे राहत कार्यों की निगरानी स्वयं करें ताकि प्रभावित लोगों तक सहायता तेजी से पहुंच सके।

    दूसरी ओर, केरल में लगातार हो रही वर्षा के कारण कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में जलभराव और कुछ स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं ने प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए है और मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहा है।

    अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि छह अन्य लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न जिलों में कुल 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 1400 से अधिक लोगों को सुरक्षित ठहराया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत उपाय भी लागू किए जाएंगे। इस बीच, आपदा के बीच शुरू हुआ राजनीतिक विवाद भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • फीफा फाइनल का जुनून, केरल में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद; छात्रों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला

    फीफा फाइनल का जुनून, केरल में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद; छात्रों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले से पहले केरल में फुटबॉल का जुनून अपने चरम पर पहुंच गया है। स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले खिताबी मुकाबले को लेकर राज्यभर में ऐसा माहौल है, मानो कोई बड़ा त्योहार मनाया जा रहा हो। फुटबॉल प्रेमियों के इसी उत्साह को देखते हुए केरल सरकार ने सोमवार को सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया है।

    मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन के निर्देश पर लिया गया यह फैसला छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद सामने आया। सोशल मीडिया पर हजारों छात्रों ने देर रात होने वाले फाइनल मुकाबले के कारण अगले दिन छुट्टी देने की अपील की थी। सरकार ने छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया, ताकि वे बिना किसी चिंता के विश्व कप फाइनल का आनंद ले सकें और अगली सुबह कक्षाओं में उपस्थित होने की परेशानी न झेलें।

    भारतीय समयानुसार स्पेन और अर्जेंटीना के बीच विश्व कप फाइनल सोमवार तड़के 12:30 बजे शुरू होगा। इसी वजह से सरकार ने जनरल एजुकेशन विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों और हायर एजुकेशन विभाग के सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा प्रोफेशनल संस्थानों में अवकाश घोषित किया है।

    उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुविधा और खेल के प्रति उनके उत्साह को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं, सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में लिखा, “अब खुश हो, बच्चों?” इस संदेश के साथ उन्होंने छुट्टी की आधिकारिक घोषणा भी की।

    केरल में फुटबॉल की लोकप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। राज्य के शहरों और गांवों में स्पेन और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के विशाल कटआउट लगाए गए हैं। सड़कों और चौराहों पर दोनों टीमों के झंडे, बैनर और सजावटी तोरण द्वार नजर आ रहे हैं। विभिन्न फैन क्लबों ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग, एलईडी स्क्रीन, रैलियों और जश्न के विशेष कार्यक्रमों की तैयारियां भी पूरी कर ली हैं। पूरे राज्य में विश्व कप फाइनल को लेकर उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

    सरकारी घोषणा से पहले एर्नाकुलम सहित कई जिलों के कुछ निजी और सरकारी स्कूल छात्रों तथा अभिभावकों की मांग पर पहले ही छुट्टी घोषित कर चुके थे। राज्य सरकार के फैसले के बाद पूरे केरल में एक समान व्यवस्था लागू हो गई, जिससे किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति भी समाप्त हो गई।

    फीफा विश्व कप फाइनल को लेकर केरल में दिख रहा यह उत्साह एक बार फिर साबित करता है कि यहां फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लोगों की संस्कृति, भावना और पहचान का अहम हिस्सा है। लाखों फुटबॉल प्रेमी अब देर रात होने वाले इस महामुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • राहुल गांधी के कथित ऑडियो से INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल, पिनाराई विजयन पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस-सीपीएम आमने-सामने

    राहुल गांधी के कथित ऑडियो से INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल, पिनाराई विजयन पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस-सीपीएम आमने-सामने

    नई दिल्ली । विपक्षी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर INDIA गठबंधन की आंतरिक एकजुटता चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के बीच राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। ऑडियो में राहुल गांधी को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए सुना जा रहा है, जिसके बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर नई बहस शुरू हो गई है।

    बताया जा रहा है कि यह कथित ऑडियो 8 जून को आयोजित INDIA गठबंधन की एक बैठक से जुड़ा है। इसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह पिनाराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई चल रही है। कथित बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों को नजरअंदाज कर केवल प्रतीकात्मक निकटता दिखाना उनके लिए संभव नहीं है। ऑडियो सार्वजनिक होने के बाद यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

    इस घटनाक्रम के बाद वामपंथी दलों के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। सीपीएम के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन सहयोगी दलों के नेताओं के प्रति सार्वजनिक सम्मान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पार्टी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार की व्यक्तिगत निकटता की अपेक्षा नहीं है, लेकिन गठबंधन राजनीति में संवाद और सम्मान का वातावरण आवश्यक माना जाता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे केरल की जमीनी राजनीति का लंबा इतिहास भी जुड़ा हुआ है। राज्य में कांग्रेस और सीपीएम दशकों से एक-दूसरे की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं। चुनावी मुकाबलों में दोनों दल लगातार आमने-सामने रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की राजनीति में एक-दूसरे के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता माने जाते हैं।

    हालिया विधानसभा चुनावों में भी दोनों दलों के बीच तीखा मुकाबला देखने को मिला था। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे की नीतियों और कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए थे। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एक ही विपक्षी मंच का हिस्सा होने के बावजूद राज्य स्तर की प्रतिस्पर्धा अक्सर दोनों दलों के रिश्तों को प्रभावित करती रही है।

    वर्तमान विवाद ने INDIA गठबंधन के भीतर मौजूद वैचारिक और राजनीतिक चुनौतियों को भी उजागर किया है। गठबंधन में शामिल कई दल विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि राष्ट्रीय राजनीति में वे साझा रणनीति के तहत साथ काम करते हैं। यही कारण है कि कई बार राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना नेतृत्व के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होता है।

    हालांकि अब तक कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन के प्रमुख दल इस विवाद को किस तरह संभालते हैं और क्या यह घटनाक्रम विपक्षी एकजुटता पर कोई प्रभाव डालता है। फिलहाल यह मामला केवल एक ऑडियो क्लिप से आगे बढ़कर विपक्षी राजनीति के अंदरूनी समीकरणों और आपसी संबंधों पर केंद्रित बहस का रूप ले चुका है।

  • दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कौन सा है? जानिए अरबों के खजाने और रहस्यमयी तहखानों की पूरी कहानी

    दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कौन सा है? जानिए अरबों के खजाने और रहस्यमयी तहखानों की पूरी कहानी


    नई दिल्ली । भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक विरासत की भूमि कहा जाता है। देश में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं जो अपनी भव्य वास्तुकला, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन जब बात दुनिया के सबसे अमीर मंदिर की आती है, तो सबसे पहले नाम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित Sree Padmanabhaswamy Temple का लिया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ अपार संपत्ति और रहस्यमयी खजाने के लिए भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

    यह मंदिर सदियों पुराना है और इसकी देखरेख परंपरागत रूप से Travancore Royal Family द्वारा की जाती रही है। द्रविड़ शैली में निर्मित इस मंदिर की भव्यता और कलात्मकता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके भूमिगत तहखानों में छिपे खजाने को लेकर है।

    साल 2011 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मंदिर के कुछ गुप्त तहखानों का निरीक्षण किया गया। इन तहखानों को वॉल्ट या नेत्रकल कहा जाता है। जब इनमें से कुछ कक्ष खोले गए तो वहां से सोने की मूर्तियां, स्वर्ण आभूषण, दुर्लभ हीरे-जवाहरात, प्राचीन सिक्के, स्वर्ण मुकुट और अनेक ऐतिहासिक कलाकृतियां बरामद हुईं। इन वस्तुओं की अनुमानित कीमत उस समय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी।

    विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि यह केवल आर्थिक मूल्यांकन है। वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इस खजाने की कीमत का सही अनुमान लगाना लगभग असंभव है। कई वस्तुएं सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं और उनका ऐतिहासिक महत्व उन्हें अनमोल बनाता है।

    मंदिर में कुल छह प्रमुख तहखाने बताए जाते हैं, जिन्हें ए, बी, सी, डी, ई और एफ नाम दिया गया है। इनमें सबसे अधिक चर्चा वॉल्ट बी को लेकर होती है। यह तहखाना आज भी पूरी तरह नहीं खोला गया है। इसके बारे में कई तरह की लोककथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इस कक्ष को विशेष धार्मिक विधियों के माध्यम से सील किया गया था और इसे खोलना शुभ नहीं माना जाता। हालांकि इन दावों की कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    वॉल्ट बी को लेकर फैली रहस्यमयी कहानियों ने मंदिर को और अधिक चर्चित बना दिया है। यही वजह है कि दुनियाभर के इतिहासकार, शोधकर्ता और पर्यटक इस मंदिर के बारे में जानने में विशेष रुचि रखते हैं। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इसकी सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। यहां चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाती है।

    श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केवल धन-संपत्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर में सुरक्षित खजाना भारतीय इतिहास के अनेक अध्यायों को अपने भीतर समेटे हुए है। यही कारण है कि यह मंदिर आज भी श्रद्धा, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम बना हुआ है।

  • केरल में सरकारी निगम को बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा लेना पड़ा महंगा…देने पड़े 25 हजार

    केरल में सरकारी निगम को बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा लेना पड़ा महंगा…देने पड़े 25 हजार


    कोच्चि।
    अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल (Kerala) में एक ग्राहक से बीयर की बोतल (Beer bottle Price Case) पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

    क्या है पूरा मामला?
    केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया।

    जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की।


    शराब निगम ने दी ये दलील

    कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी सेस’ (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए। निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

    निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया।


    कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी

    पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

    किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019’ के तहत ‘सर्विस में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है।


    क्या सुनाया गया फैसला?

    अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

  • भारतीय जड़ों से जुड़ी नित्या रमन ने बढ़ाया भारत का गौरव, लॉस एंजिलिस मेयर चुनाव के रनऑफ में बनाई जगह

    भारतीय जड़ों से जुड़ी नित्या रमन ने बढ़ाया भारत का गौरव, लॉस एंजिलिस मेयर चुनाव के रनऑफ में बनाई जगह

    नई दिल्ली । अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर की राजनीति में भारतीय मूल की नेता नित्या रमन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। मेयर पद की दौड़ में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए उन्होंने रनऑफ चुनाव में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। इस उपलब्धि के बाद नवंबर में उनका मुकाबला मौजूदा मेयर करेन बैस से होगा। नित्या रमन की राजनीतिक सफलता को भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती वैश्विक पहचान के रूप में भी देखा जा रहा है।

    44 वर्षीय नित्या रमन का जन्म भारत के केरल राज्य में हुआ था। हालांकि उनका पारिवारिक संबंध तमिल समुदाय से है और उनके माता-पिता तमिल मूल के थे। बचपन में ही उनका परिवार अमेरिका चला गया, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा और पेशेवर जीवन की शुरुआत की। अमेरिका में पली-बढ़ीं नित्या ने शिक्षा, सामाजिक विकास और शहरी नियोजन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

    उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने अर्बन प्लानिंग के क्षेत्र में काम किया और सामाजिक मुद्दों से जुड़े अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक यात्रा की मजबूत नींव बना।

    नित्या रमन पहली बार व्यापक चर्चा में तब आईं जब उन्होंने वर्ष 2020 में लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल चुनाव में एक स्थापित नेता को हराकर जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें शहर की राजनीति में एक नए और प्रभावशाली चेहरे के रूप में स्थापित किया। वर्ष 2024 में उन्होंने दोबारा चुनाव जीतकर अपनी लोकप्रियता और जनसमर्थन को मजबूत किया।

    मेयर पद की मौजूदा दौड़ में नित्या ने फरवरी 2026 में अंतिम समय पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला जोखिम भरा माना जा रहा था, क्योंकि उनके सामने मौजूदा मेयर करेन बैस जैसी अनुभवी नेता थीं। इसके बावजूद नित्या ने अपने अभियान को आवास, शहरी विकास, बेघर लोगों की समस्या और सार्वजनिक सेवाओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित रखा, जिससे उन्हें व्यापक समर्थन मिला।

    उनकी राजनीतिक पहचान एक प्रगतिशील और सुधारवादी नेता के रूप में बन चुकी है। वे लंबे समय से आवास संकट, सामाजिक असमानता और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। लॉस एंजिलिस में बेघर लोगों की बढ़ती संख्या और आवास की उपलब्धता को लेकर उनके विचारों को बड़ी संख्या में मतदाताओं का समर्थन मिला है।

    नित्या रमन का निजी जीवन भी भारतीय मूल से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पति वली चंद्रशेखरन भारतीय मूल के टीवी निर्माता और पटकथा लेखक हैं। दोनों के जुड़वां बच्चे हैं और परिवार लंबे समय से अमेरिका में रह रहा है। भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक दृष्टिकोण के मेल ने उनकी सार्वजनिक छवि को और मजबूत बनाया है।

    अब नवंबर में होने वाला चुनाव लॉस एंजिलिस की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर में बेघर लोगों की समस्या, आर्थिक चुनौतियां, सार्वजनिक सुरक्षा, हॉलीवुड उद्योग के पुनरुद्धार और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहेंगे। नित्या रमन इन विषयों पर लगातार मुखर रही हैं और खुद को बदलाव तथा नई सोच का प्रतिनिधि चेहरा बता रही हैं।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि रनऑफ चुनाव में उनकी मौजूदगी केवल एक स्थानीय राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भागीदारी और प्रभाव का भी संकेत है। आने वाले महीनों में उनकी चुनावी रणनीति और जनसमर्थन लॉस एंजिलिस की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • शूटिंग के दौरान गई जान: केरल की खदान में डूबे दिल्ली के मॉडल दिव्यांशु जोशी, दोस्तों के सामने हुआ हादसा

    शूटिंग के दौरान गई जान: केरल की खदान में डूबे दिल्ली के मॉडल दिव्यांशु जोशी, दोस्तों के सामने हुआ हादसा

    नई दिल्ली। दिल्ली के युवा मॉडल दिव्यांशु जोशी की केरल में एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार वह एक विज्ञापन शूट के सिलसिले में केरल गए हुए थे, जहां एक बंद पड़ी खदान में फोटो और वीडियो शूटिंग के दौरान पानी में डूबने से उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद मॉडलिंग और फैशन जगत में शोक की लहर फैल गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की और मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के समय दिव्यांशु के साथ उनकी शूटिंग टीम और एक करीबी दोस्त भी मौजूद थे।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार दिव्यांशु जोशी एक कपड़ों के ब्रांड के कमर्शियल शूट के लिए कोच्चि पहुंचे थे। शूटिंग का एक हिस्सा एर्नाकुलम जिले के शांत पेट्टमाला क्षेत्र में स्थित एक पुरानी और बंद पड़ी खदान के आसपास होना था। बताया जा रहा है कि शूटिंग पूरी करने के बाद टीम वहां लोकेशन का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान दिव्यांशु पानी से भरी खदान के भीतर उतरे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले वह सुरक्षित बाहर आ गए थे, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा पानी में उतर गए। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में चले गए।

    हादसे के वक्त उनका एक दोस्त वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। जब दिव्यांशु पानी में डूबने लगे तो उसने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को मदद के लिए आवाज लगाई। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए प्रशासन और बचाव दल को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही अग्निशमन एवं बचाव विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। काफी प्रयासों के बाद बचावकर्मियों ने लगभग 30 फीट की गहराई से दिव्यांशु को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल पेरुम्बावूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिस खदान में यह हादसा हुआ, वह करीब दो दशक से अधिक समय से बंद पड़ी हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक यह इलाका पहले भी कई हादसों के कारण संवेदनशील और खतरनाक माना जाता रहा है। खदान के कुछ हिस्सों में पानी की गहराई लगभग 100 फीट तक बताई जाती है। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों पहले यहां दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा गेट लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद लोग समय-समय पर वहां पहुंच जाते हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शूटिंग के लिए संबंधित स्थान पर किसी प्रकार की औपचारिक अनुमति लिए जाने की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    जांच के दौरान सामने आया है कि दिव्यांशु और उनकी टीम विज्ञापन शूट से जुड़े कार्य के सिलसिले में उस स्थान पर पहुंचे थे। प्राथमिकी में दर्ज विवरण के अनुसार टीम ने पहले लोकेशन का निरीक्षण किया और इसके बाद कुछ दृश्य रिकॉर्ड करने की तैयारी की जा रही थी। बताया गया कि टीम के सदस्यों ने यह भी सुनिश्चित किया था कि दिव्यांशु को तैरना आता है। हालांकि पानी की वास्तविक गहराई और वहां मौजूद जोखिम का सही आकलन नहीं हो सका, जिसके कारण यह दुखद घटना घट गई।

    पुलिस ने मृतक के साथ मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा केवल दुर्घटना था या सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी इसमें शामिल रही। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर खतरनाक और असुरक्षित स्थानों पर होने वाली शूटिंग को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।