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  • सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी विचार

    सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी विचार


    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर केरल स्थित भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े बहुचर्चित मामले पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। सितंबर 2018 के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ दायर कई समीक्षा और पुनर्विचार याचिकाओं पर अब नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता समानता के अधिकार और परंपराओं की संवैधानिक वैधता जैसे अहम सवालों से जुड़ा हुआ है।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार नौ जजों की पीठ धार्मिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े सात महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों की जांच करेगी। इन सवालों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्या सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए या परंपरागत प्रतिबंध को बरकरार रखा जाए।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सोमवार को सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुनवाई की विस्तृत समय-सारिणी भी तय कर दी है। कोर्ट के अनुसार नौ न्यायाधीशों की पीठ 7 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे से कार्यवाही शुरू करेगी। पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं को 7 से 9 अप्रैल तक सुना जाएगा जबकि पुनर्विचार के विरोधियों को 14 से 16 अप्रैल तक अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। 21 अप्रैल को प्रतिवाद सुना जाएगा और 22 अप्रैल तक एमिकस क्यूरी द्वारा अंतिम और समापन दलीलें पेश की जाएंगी।

    गौरतलब है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। उस फैसले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ बहुमत में थे जबकि पीठ की एकमात्र महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने असहमति जताई थी। उन्होंने अपने मत में कहा था कि धार्मिक परंपराओं में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

    2018 के फैसले के बाद केरल में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे और दर्जनों पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले को बड़ी पीठ के समक्ष विचारार्थ रखने का निर्णय लिया था लेकिन अंतिम निर्णय नहीं दिया गया था।

    अब नौ जजों की संविधान पीठ इस जटिल संवैधानिक विवाद पर व्यापक सुनवाई कर कानूनी प्रश्नों का निर्धारण करेगी। देशभर की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं क्योंकि इसका असर न केवल सबरीमाला मंदिर की परंपराओं पर पड़ेगा बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता से जुड़े अन्य मामलों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

  • केरल के त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में लगी भीषण आग, 500 से अधिक बाइकें जलकर राख

    केरल के त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में लगी भीषण आग, 500 से अधिक बाइकें जलकर राख


    त्रिशूर।
    केरल (Kerala) के त्रिशूर में रेलवे स्टेशन (Thrissur Railway Station) के पार्किंग क्षेत्र में रविवार को आग लग जाने से सैकड़ों दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस की प्राथमिकी में कहा गया है कि लगभग 500 दोपहिया वाहन (500 Two-Wheelers Burnt) जलकर खाक हो गए, लेकिन दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) ने अपने बयान में कहा कि लगभग 250 वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि पार्किंग क्षेत्र में सुबह छह बजकर 20 मिनट पर आग लगी और इस संबंध में अग्निशमन विभाग को छह बजकर 40 मिनट पर जानकारी मिली।

    शुरू में पुलिस और दमकल कर्मियों को संदेह जताया कि बिजली के तार से निकली चिंगारी किसी ढके हुए दोपहिया वाहन पर गिरने से आग लगी होगी। हालांकि, रेलवे ने अपने बयान में दावा किया कि आग ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) या रेलवे के किसी विद्युत उपकरण से नहीं लगी थी। रेलवे ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आग खड़े दोपहिया वाहनों में से किसी एक से लगी। अधिकारियों का अनुमान है कि शेड में लगभग 500 दोपहिया वाहन खड़े थे, जिनमें से अधिकतर इस घटना में जलकर खाक हो गए।


    5 दमकल गाड़ियों ने पाया काबू

    अधिकारियों ने बताया कि पांच दमकल गाड़ियां भेजी गईं और सुबह करीब 7.45 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक आग फैलने और आगे नुकसान होने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गये। अधिकारी ने कहा कि आग जिस जगह लगी, उसके पास रेलवे पटरी पर एक इंजन खड़ा था लेकिन रेलवे ने उसे कोई बड़ा नुकसान होने की पुष्टि नहीं की। अधिकारी ने बताया कि दोपहिया वाहनों के अलावा टिन की चादरों से ढका पूरा शेड भी आग में क्षतिग्रस्त हो गया।

    दमकल अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने आग लगने के सटीक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। पार्किंग क्षेत्र सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में था। हालांकि, आग में सीसीटीवी कंट्रोल यूनिट और हार्ड डिस्क क्षतिग्रस्त हो गई, जिन्हें स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। त्रिशूर पश्चिम पुलिस ने आग लगने की घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


    बाइक के साथ कैश भी जला

    प्राथमिकी के अनुसार, रेलवे स्टेशन के पश्चिमी हिस्से में पार्किंग सुविधा संचालित करने का ठेका रखने वाली अश्वथी एंटरप्राइजेज की पार्किंग शुल्क छापने वाली मशीन समेत लगभग 500 दोपहिया वाहन आग में जलकर खाक हो गए। प्राथमिकी में यह भी बताया गया है कि अश्वथी एंटरप्राइजेज के कर्मचारियों के दो मोबाइल फोन और 10000 रुपये नकद भी आग में नष्ट हो गए।

    राज्य पुलिस प्रमुख आर ए चंद्रशेखर ने भी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस घटना के मद्देनजर केरल में सशुल्क पार्किंग सुविधाओं पर आग संबंधी ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। चंद्रशेखर ने कहा कि प्रारंभिक बयानों से संकेत मिलता है कि संभव है की एक इलेक्ट्रिक लाइन से निकली चिंगारी के कारण आग लगी लेकिन इसकी पुष्टि के लिए जांच की जरूरत है।

  • कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा



    नई दिल्ली । केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है जिसमें पुरुष श्रद्धालुओं को पूजा से पहले महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना जाता है। इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु देवी की आराधना से पहले साड़ी पहनते हैं चूड़ियां पहनते हैं बिंदी लगाते हैं और अन्य श्रृंगार सामग्री से खुद को सजाते हैं। इस अनूठी परंपरा के चलते यह मंदिर देश-विदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    परंपरा का महत्व

    कोट्टनकुलंगरा मंदिर की इस परंपरा को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे पूरे समर्पण के साथ निभाते हैं। पुरुष श्रद्धालु जब पूजा के लिए तैयार होते हैं तो वे स्वयं को पूरी तरह से सजाते हैं जैसे महिलाएं पारंपरिक रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस पूजा में श्रद्धालु देवी भाग्यवती से अच्छी नौकरी स्वास्थ्य विवाह और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा पूरी तरह से समाज में समर्पण और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देने के लिए मानी जाती है। इस परंपरा के कारण मंदिर में हर साल श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है जो इस अनुभव को एक अलग ही रूप में अपनाते हैं।

    मंदिर के आकर्षण

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर के अद्वितीय रीति-रिवाज और परंपराओं ने इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। यहां पर लोग न केवल पूजा-अर्चना करने आते हैं बल्कि इस अनोखी परंपरा का पालन करने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। मंदिर का वातावरण बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण होता है जहां पर हर किसी को अपने व्यक्तिगत आस्थाओं का पालन करने का पूरा अवसर मिलता है।

    सोलह श्रृंगार

    सोलह श्रृंगार का पालन करने से जुड़े कई महत्व हैं जो महिलाओं के सौंदर्य और आंतरिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इस परंपरा के तहत पुरुष श्रद्धालु स्वयं को साड़ी पहनकर सजाते हैं जो उन्हें पारंपरिक रूप से महिलाओं के साथ जोड़ता है और ईश्वर के साथ एक अद्वितीय संबंध स्थापित करता है। यह एक अद्भुत दृष्टिकोण है जो पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को बढ़ावा देने की कोशिश करता है साथ ही आस्था के द्वारा सभी को एकजुट करने का कार्य करता है।

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर की यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं समय के साथ बदल सकती हैं। पुरुषों द्वारा सोलह श्रृंगार करने की यह परंपरा एक नई सोच और धार्मिक समर्पण की दिशा में एक कदम है। इस मंदिर की विशेषता और परंपरा को देखकर यह कहा जा सकता है कि यहाँ आस्था और आचरण का अद्वितीय संगम है जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।