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  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • दिल्ली और बंगाल के बाद BJP के सामने बचे ये 3 बड़े राजनीतिक किले, अब असली परीक्षा शुरू

    दिल्ली और बंगाल के बाद BJP के सामने बचे ये 3 बड़े राजनीतिक किले, अब असली परीक्षा शुरू

    नई दिल्ली। हाल के चुनावी नतीजों और रुझानों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। दिल्ली में जीत और पश्चिम बंगाल में बढ़त के बाद भाजपा का राजनीतिक प्रभाव लगातार विस्तार करता दिख रहा है। हालांकि इस सफलता के बीच भी देश में कुछ ऐसे राज्य हैं, जहां पार्टी के लिए स्थिति अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इन राज्यों को राजनीतिक रूप से सबसे कठिन क्षेत्र माना जाता है, जहां जीत हासिल करना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है।

    पंजाब इस सूची में सबसे ऊपर आता है। यहां राजनीति लंबे समय से क्षेत्रीय भावनाओं, किसान मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राज्य में मतदाता काफी जागरूक और मुद्दा-आधारित वोटिंग के लिए जाने जाते हैं। यहां शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों की राजनीतिक सोच अलग-अलग है, जिससे किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए स्थायी पकड़ बनाना आसान नहीं होता। हालांकि भाजपा लगातार अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगी है, लेकिन जमीन पर व्यापक समर्थन हासिल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

    दूसरा राज्य केरल है, जहां राजनीति पूरी तरह वैचारिक और संगठित ढांचे पर आधारित मानी जाती है। यहां दशकों से दो प्रमुख राजनीतिक ध्रुवों के बीच मुकाबला चलता आ रहा है। मतदाता वर्ग में शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता का स्तर काफी ऊंचा है, जिससे चुनावी निर्णय अधिक सोच-समझकर लिए जाते हैं। भाजपा यहां धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, खासकर कुछ शहरी क्षेत्रों और स्थानीय निकायों में, लेकिन राज्य स्तर पर बड़ी सफलता अभी दूर नजर आती है।

    तीसरा और सबसे जटिल राजनीतिक मैदान तमिलनाडु है। यहां राजनीति की नींव मजबूत क्षेत्रीय पहचान, भाषा और सांस्कृतिक विचारधारा पर टिकी हुई है। द्रविड़ आंदोलन का प्रभाव आज भी यहां की राजनीति में गहराई से देखा जा सकता है। स्थानीय दलों की मजबूत पकड़ और सामाजिक समीकरणों के कारण यहां बाहरी राजनीतिक दलों के लिए विस्तार करना बेहद कठिन माना जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में राजनीतिक परिदृश्य में कुछ नए बदलाव देखने को मिले हैं, जिससे भविष्य में समीकरण बदलने की संभावना को भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

    इन तीनों राज्यों की एक खास बात यह है कि यहां राष्ट्रीय राजनीति की तुलना में स्थानीय मुद्दे कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि यहां किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए स्थायी आधार बनाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद भाजपा लगातार संगठन विस्तार, जमीनी संपर्क और स्थानीय नेताओं के साथ तालमेल के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में सफलता हासिल करना केवल चुनावी जीत नहीं होगी, बल्कि यह संगठनात्मक क्षमता और रणनीतिक धैर्य की भी बड़ी परीक्षा होगी। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इन राज्यों की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प हो सकती है।

    कुल मिलाकर, दिल्ली और बंगाल की बढ़त के बाद भाजपा का सफर आसान नहीं है, क्योंकि असली चुनौती अभी बाकी है और वह इन तीन मजबूत राजनीतिक किलों में अपनी पकड़ बनाना है।

  • कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत

    कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत


    कोचीन।
    कुवैत (Kuwait) में अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले 20 भारतीय नागरिकों (20 Indian citizens) के पार्थिव शरीर बुधवार को केरल (Kerala) के कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Cochin International Airport) पहुंचे.

    अधिकारियों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण इन शवों की स्वदेश वापसी में देरी हुई थी. इन मृतकों में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुथुकुलाथुर निवासी 37 वर्षीय संतनसेल्वम कृष्णन भी शामिल हैं, जिनकी मौत कुवैत में एक पानी के डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए ड्रोन हमले में हो गई थी. बाकी 19 भारतीय नागरिकों की मौत अलग-अलग हादसों और प्राकृतिक कारणों से हुई थी, लेकिन खाड़ी देशों पर ईरान के ताबड़तोड़ हमलों के चलते उनके पार्थिव शरीर भारत लाने में डेरी हुई.

    इस बीच, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही अब तक कुल 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है. खाड़ी मामलों को देखने वाले विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि कुवैत स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुंचाए जा सकें.

    असीम महाजन ने कहा, ‘हाल ही में एक भारतीय नागरिक की हमले में मौत हो गई, जो बेहद दुखद है. हम शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. भारतीय दूतावास परिवार के संपर्क में है और हर संभव मदद सुनिश्चित कर रहा है।

    कुवैत में भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है. दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि डीसैलिनेशन सुविधा पर हुए हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता दी जा रही है.

    उधर, कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि रविवार शाम हुए हमले में एक प्रमुख पावर और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई. अधिकारियों ने इस हमले के पीछे ईरान की कार्रवाई होने की आशंका जताई है.

    गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है. भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने की कोशिश कर रहे हैं.

  • केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान

    केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान


    नई दिल्ली। केरल अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा। मोदी कैबिनेट ने मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केरल का नाम बदलने की मांग लंबे समय से राज्य और स्थानीय भाषा प्रेमियों के बीच उठती रही है, और अब इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है। इस कदम को राज्य विधानसभा में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल कर दिया जाएगा।

    केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को पारित करने का रास्ता पहले ही साफ कर दिया था। 24 जून, 2024 को विधानसभा ने आम सहमति से केंद्र सरकार को राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक प्रस्ताव में कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। इसके बाद दूसरी बार प्रस्ताव पारित किया गया और अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में राज्य के हित में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि मलयालम भाषा के महत्व को भी उजागर करेगा।

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी राज्य का नाम बदलने का लंबे समय से समर्थन किया था। उनका कहना था कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और स्थानीय संस्कृति की गहनता को दर्शाता है और इससे राज्य की पहचान और गौरव बढ़ेगा। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस साल के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम बदलने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और राज्य की असली पहचान को दर्शाता है।

    नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित इस बैठक में केरल का नाम बदलने के अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस कदम से राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल में भी एक नया उत्साह देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन न केवल औपचारिकता है, बल्कि यह राज्यवासियों के लिए सांस्कृतिक गर्व और भाषाई सम्मान का प्रतीक है।

    केरल का यह नाम परिवर्तन देश के अन्य राज्यों में भी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है। राज्य में स्थानीय भाषा, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए यह एक मजबूत संदेश है। अब केरलम के नाम से राज्य की पहचान और भी व्यापक होगी, और यह राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

    संक्षेप में कहा जाए तो मोदी कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने वाला निर्णय है। अब इसे अंतिम रूप देने के लिए राज्य विधानसभा में विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके बाद यह नाम संविधान की आठवीं अनुसूची में भी दर्ज होगा। इस कदम से केरलम की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलेगी और राज्यवासियों में गर्व की भावना और बढ़ेगी।

  • Kerala: 10 माह की बच्ची ने 5 लोगों को दी नई जिंदगी… हादसे में मौत के बाद पैरेंट्स ने किया अंगदान

    Kerala: 10 माह की बच्ची ने 5 लोगों को दी नई जिंदगी… हादसे में मौत के बाद पैरेंट्स ने किया अंगदान


    तिरुवनंतपुरम।
    केरल (Kerala) से एक बेहद भावुक करने वाली कहानी सामने आई है। यहां पर हादसे में 10 महीने की एक बच्ची (10 Months Girl) बुरी तरह से घायल हो गई। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद उसके पैरेंट्स ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके मुरीद प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) समेत तमाम सेलेब्स भी हो गए हैं। बच्ची के माता-पिता ने उसका अंगदान करने का फैसला किया। उनके इस फैसले की बदौलत पांच लोगों को नई जिंदगी मिली है। इस बच्ची का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी मौजूद रहे।


    कौन थी आलिन शेरिन

    जिस बच्ची का अंगदान किया गया, उसका नाम आलिन शेरिन है। उसके माता-पिता का नाम अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन है। यह लोग केरल के पाथनमथिट्टा जिले के रहने वाले हैं। पांच फरवरी को आलिन अपनी मां और दादा-दादी के साथ यात्रा कर रही थी। इसी दौरान गलत दिशा से आ रही कार ने उनके वाहन में टक्कर मार दी। इस हादसे में आलिन को बेहद गंभीर चोटें आईं। वहीं, उसकी मां और दादा-दादी भी गंभीर रूप से घायल हैं। शुरुआत में आलिन को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए कोच्चि ले जाया गया। बहुत कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और डॉक्टरों ने 12 फरवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।


    बताया गया ग्रीन कॉरिडोर

    महज दस महीने की बेटी को खोकर आलिन के माता-पिता गहरे दुख में थे। लेकिन इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जो नजीर बन गया। दोनों ने तय किया कि वह अपनी बच्ची का अंगदान करेंगे। इसके बाद हेल्थकेयर सिस्टम, पुलिस और आम लोगों ने गजब का तालमेल दिखाया। चूंकि सिविल एविएशन रूल्स के चलते रात में हेलिकॉप्टर ट्रांसफर संभव नहीं था। इसलिए केरल सरकार ने एंबुलेंस के जरिए अंगों को भेजने का फैसला किया। आनन-फानन में कोच्चि से तिरुवनंतपुरम के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।


    किसे दिए गए अंग

    इसके लिए कड़े ट्रैफिक प्रतिबंध लागू किए गए। पूरे रास्ते में मैनुअल सिग्नलिंग की व्यवस्था की गई। इसके जरिए 230 किलोमीटर की दूरी मात्र 3 घंटे और 20 मिनट में तय हुई। इसके बाद सुरक्षित तरीके सभी अंग गंतव्य तक पहुंचे। यहां पर एक निजी अस्पताल में छह साल की बच्ची को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं, किडनी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक 10 साल के बच्चे को लगाया गया। हार्ट वॉल्व तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज कैंपस को ट्रांसफर किया गया, जबकि कॉर्निया एक निजी अस्पताल के आई बैंक को डोनेट कर दिया गया।


    सबने की तारीफ

    महज 10 महीने की उम्र में बच्ची की दु:खद मौत और उसके माता-पिता द्वारा अंगदान के फैसले की केरल समेत तमाम जगहों पर तारीफ हुई। केरल के राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर ने कहाकि वह बच्ची के माता-पिता के इस फैसले बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे दूसरों को जीवन मिला है। अभिनेता कमल हासन ने भी पैरेंट्स को संबोधित एक भावुक संदेश लिखा। इस संदेश में उन्होंने लिखा कि बेबी आलिन पांच बच्चों को जिंदगी देकर गई है। अभिनेता मोहनलाल ने भी आलिन को लिटिल एंजेल कहा।

  • सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी विचार

    सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी विचार


    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर केरल स्थित भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े बहुचर्चित मामले पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। सितंबर 2018 के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ दायर कई समीक्षा और पुनर्विचार याचिकाओं पर अब नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता समानता के अधिकार और परंपराओं की संवैधानिक वैधता जैसे अहम सवालों से जुड़ा हुआ है।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार नौ जजों की पीठ धार्मिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े सात महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों की जांच करेगी। इन सवालों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्या सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए या परंपरागत प्रतिबंध को बरकरार रखा जाए।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सोमवार को सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुनवाई की विस्तृत समय-सारिणी भी तय कर दी है। कोर्ट के अनुसार नौ न्यायाधीशों की पीठ 7 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे से कार्यवाही शुरू करेगी। पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं को 7 से 9 अप्रैल तक सुना जाएगा जबकि पुनर्विचार के विरोधियों को 14 से 16 अप्रैल तक अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। 21 अप्रैल को प्रतिवाद सुना जाएगा और 22 अप्रैल तक एमिकस क्यूरी द्वारा अंतिम और समापन दलीलें पेश की जाएंगी।

    गौरतलब है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। उस फैसले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ बहुमत में थे जबकि पीठ की एकमात्र महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने असहमति जताई थी। उन्होंने अपने मत में कहा था कि धार्मिक परंपराओं में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

    2018 के फैसले के बाद केरल में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे और दर्जनों पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले को बड़ी पीठ के समक्ष विचारार्थ रखने का निर्णय लिया था लेकिन अंतिम निर्णय नहीं दिया गया था।

    अब नौ जजों की संविधान पीठ इस जटिल संवैधानिक विवाद पर व्यापक सुनवाई कर कानूनी प्रश्नों का निर्धारण करेगी। देशभर की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं क्योंकि इसका असर न केवल सबरीमाला मंदिर की परंपराओं पर पड़ेगा बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता से जुड़े अन्य मामलों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

  • केरल के त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में लगी भीषण आग, 500 से अधिक बाइकें जलकर राख

    केरल के त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में लगी भीषण आग, 500 से अधिक बाइकें जलकर राख


    त्रिशूर।
    केरल (Kerala) के त्रिशूर में रेलवे स्टेशन (Thrissur Railway Station) के पार्किंग क्षेत्र में रविवार को आग लग जाने से सैकड़ों दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस की प्राथमिकी में कहा गया है कि लगभग 500 दोपहिया वाहन (500 Two-Wheelers Burnt) जलकर खाक हो गए, लेकिन दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) ने अपने बयान में कहा कि लगभग 250 वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि पार्किंग क्षेत्र में सुबह छह बजकर 20 मिनट पर आग लगी और इस संबंध में अग्निशमन विभाग को छह बजकर 40 मिनट पर जानकारी मिली।

    शुरू में पुलिस और दमकल कर्मियों को संदेह जताया कि बिजली के तार से निकली चिंगारी किसी ढके हुए दोपहिया वाहन पर गिरने से आग लगी होगी। हालांकि, रेलवे ने अपने बयान में दावा किया कि आग ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) या रेलवे के किसी विद्युत उपकरण से नहीं लगी थी। रेलवे ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आग खड़े दोपहिया वाहनों में से किसी एक से लगी। अधिकारियों का अनुमान है कि शेड में लगभग 500 दोपहिया वाहन खड़े थे, जिनमें से अधिकतर इस घटना में जलकर खाक हो गए।


    5 दमकल गाड़ियों ने पाया काबू

    अधिकारियों ने बताया कि पांच दमकल गाड़ियां भेजी गईं और सुबह करीब 7.45 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक आग फैलने और आगे नुकसान होने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गये। अधिकारी ने कहा कि आग जिस जगह लगी, उसके पास रेलवे पटरी पर एक इंजन खड़ा था लेकिन रेलवे ने उसे कोई बड़ा नुकसान होने की पुष्टि नहीं की। अधिकारी ने बताया कि दोपहिया वाहनों के अलावा टिन की चादरों से ढका पूरा शेड भी आग में क्षतिग्रस्त हो गया।

    दमकल अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने आग लगने के सटीक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। पार्किंग क्षेत्र सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में था। हालांकि, आग में सीसीटीवी कंट्रोल यूनिट और हार्ड डिस्क क्षतिग्रस्त हो गई, जिन्हें स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। त्रिशूर पश्चिम पुलिस ने आग लगने की घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


    बाइक के साथ कैश भी जला

    प्राथमिकी के अनुसार, रेलवे स्टेशन के पश्चिमी हिस्से में पार्किंग सुविधा संचालित करने का ठेका रखने वाली अश्वथी एंटरप्राइजेज की पार्किंग शुल्क छापने वाली मशीन समेत लगभग 500 दोपहिया वाहन आग में जलकर खाक हो गए। प्राथमिकी में यह भी बताया गया है कि अश्वथी एंटरप्राइजेज के कर्मचारियों के दो मोबाइल फोन और 10000 रुपये नकद भी आग में नष्ट हो गए।

    राज्य पुलिस प्रमुख आर ए चंद्रशेखर ने भी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस घटना के मद्देनजर केरल में सशुल्क पार्किंग सुविधाओं पर आग संबंधी ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। चंद्रशेखर ने कहा कि प्रारंभिक बयानों से संकेत मिलता है कि संभव है की एक इलेक्ट्रिक लाइन से निकली चिंगारी के कारण आग लगी लेकिन इसकी पुष्टि के लिए जांच की जरूरत है।

  • कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा



    नई दिल्ली । केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है जिसमें पुरुष श्रद्धालुओं को पूजा से पहले महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना जाता है। इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु देवी की आराधना से पहले साड़ी पहनते हैं चूड़ियां पहनते हैं बिंदी लगाते हैं और अन्य श्रृंगार सामग्री से खुद को सजाते हैं। इस अनूठी परंपरा के चलते यह मंदिर देश-विदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    परंपरा का महत्व

    कोट्टनकुलंगरा मंदिर की इस परंपरा को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे पूरे समर्पण के साथ निभाते हैं। पुरुष श्रद्धालु जब पूजा के लिए तैयार होते हैं तो वे स्वयं को पूरी तरह से सजाते हैं जैसे महिलाएं पारंपरिक रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस पूजा में श्रद्धालु देवी भाग्यवती से अच्छी नौकरी स्वास्थ्य विवाह और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा पूरी तरह से समाज में समर्पण और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देने के लिए मानी जाती है। इस परंपरा के कारण मंदिर में हर साल श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है जो इस अनुभव को एक अलग ही रूप में अपनाते हैं।

    मंदिर के आकर्षण

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर के अद्वितीय रीति-रिवाज और परंपराओं ने इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। यहां पर लोग न केवल पूजा-अर्चना करने आते हैं बल्कि इस अनोखी परंपरा का पालन करने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। मंदिर का वातावरण बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण होता है जहां पर हर किसी को अपने व्यक्तिगत आस्थाओं का पालन करने का पूरा अवसर मिलता है।

    सोलह श्रृंगार

    सोलह श्रृंगार का पालन करने से जुड़े कई महत्व हैं जो महिलाओं के सौंदर्य और आंतरिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इस परंपरा के तहत पुरुष श्रद्धालु स्वयं को साड़ी पहनकर सजाते हैं जो उन्हें पारंपरिक रूप से महिलाओं के साथ जोड़ता है और ईश्वर के साथ एक अद्वितीय संबंध स्थापित करता है। यह एक अद्भुत दृष्टिकोण है जो पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को बढ़ावा देने की कोशिश करता है साथ ही आस्था के द्वारा सभी को एकजुट करने का कार्य करता है।

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर की यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं समय के साथ बदल सकती हैं। पुरुषों द्वारा सोलह श्रृंगार करने की यह परंपरा एक नई सोच और धार्मिक समर्पण की दिशा में एक कदम है। इस मंदिर की विशेषता और परंपरा को देखकर यह कहा जा सकता है कि यहाँ आस्था और आचरण का अद्वितीय संगम है जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।