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  • मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद

    मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि कहीं मौसम की मार किसानों की तैयार फसलों को तबाह कर रही है। शुक्रवार को खरगोन और बड़वानी से सामने आई तस्वीरों ने किसानों की परेशानी को और उजागर कर दिया।

    खरगोन जिले में जल संकट से परेशान किसानों ने नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-बड़ौदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 11:30 बजे 200 से अधिक किसान बैलगाड़ियां लेकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की वेदा, कुंदा और खारक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। अधिकांश किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

    दूसरी ओर बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने दो किसान भाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज आंधी और बारिश के कारण अंबाराम और गंगाराम की करीब 9 एकड़ में लगी केले की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार लगभग 1500 केले के पौधे जमीन पर गिर गए।

    किसानों के अनुसार इस फसल पर करीब 14 लाख रुपए की लागत आई थी, जबकि कुल नुकसान 36 लाख रुपए तक पहुंच गया है। अचानक हुए इस भारी नुकसान का सदमा किसान अंबाराम सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    प्रदेश में कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सफल बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में बोवनी करने से बचना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

    मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

  • खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य

    खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य


    खरगोन। जिले में कपास की खेती इस बार तेज रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। प्री-मानसून गतिविधियों और अनुकूल मौसम के चलते अब तक 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है, जो कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 51 प्रतिशत है। नर्मदा क्षेत्र के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह इलाकों में सबसे अधिक बुवाई दर्ज की गई है, जहां किसान तेजी से खेतों में काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में कपास उत्पादन के प्रमुख जिलों में शामिल खरगोन इस बार भी अग्रणी बना हुआ है। इस वर्ष जिले के लिए 2.09 लाख हेक्टेयर (209800 हेक्टेयर) का बुवाई लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के लगभग समान है। हालांकि, पिछले साल हुई अच्छी सरकारी खरीदी के कारण इस बार कपास के रकबे में हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

    सरकारी खरीदी का असर, किसानों का बढ़ा रुझान
    कृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष कपास की मजबूत सरकारी खरीदी ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका सीधा असर इस साल की बुवाई पर दिख रहा है। अनुमान है कि इस बार कपास का रकबा करीब 300 हेक्टेयर तक बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि बेहतर समर्थन मूल्य और खरीद व्यवस्था के चलते कपास की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है, जिससे वे अन्य फसलों की तुलना में कपास को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    प्री-मानसून बारिश से मिला फायदा
    जिले में हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश ने खेती के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो कपास की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। मौसम में नमी और हल्की बारिश के कारण खेतों में नमी बनी हुई है, जिससे बुवाई कार्य में तेजी आई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो आने वाले दिनों में बुवाई का आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।

    नर्मदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा बुवाई
    जिले के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह क्षेत्रों में कपास की बुवाई सबसे अधिक दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में सिंचाई के बेहतर साधन उपलब्ध होने के कारण किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं। सहायक संचालक कृषि प्रकाश ठाकुर ने बताया कि जिले में लू का असर कम हो गया है और यह समय कपास की बुवाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है। उन्होंने पुष्टि की कि इस वर्ष का लक्ष्य 2.09 लाख हेक्टेयर तय किया गया है और विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    आने वाले दिनों में और बढ़ेगा रकबा
    कृषि विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे मानसून करीब आएगा, वैसे-वैसे कपास की बुवाई में और तेजी आएगी। फिलहाल किसान अनुकूल मौसम का पूरा फायदा उठा रहे हैं और खेतों में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

  • खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी


    खरगोन। जिले के कसरावद और झिरन्या क्षेत्र के वनग्रामों में किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फार्मर आईडी जनरेट न होने के कारण बड़ी संख्या में वन अधिकार पट्टाधारी किसान रासायनिक खाद से वंचित रह गए हैं। खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले खाद वितरण व्यवस्था बाधित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

    किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों द्वारा अब खाद का वितरण फार्मर आईडी आधारित टोकन सिस्टम से किया जा रहा है, लेकिन वनग्रामों के अधिकांश किसानों की फार्मर आईडी अब तक नहीं बन पाई है। ऐसे में वे सिस्टम से बाहर हो गए हैं और जरूरी खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।

    वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की बढ़ी मुश्किलें
    झिरन्या क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र पूरी तरह आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत है, जहां अधिकांश किसानों को वन अधिकार पट्टे प्राप्त हैं। वर्षों से ये किसान इन्हीं भूमि पर खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था के कारण वे खाद जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले उनके दस्तावेज और फार्मर आईडी अपडेट नहीं की गई, जिससे पूरा वनग्राम सिस्टम से बाहर हो गया है।

    तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन, समाधान की मांग
    इस समस्या को लेकर समाजसेवी गजेंद्र पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने तहसीलदार नरेंद्र मुवेल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की फार्मर आईडी तत्काल बनाई जाए और उन्हें खाद वितरण के लिए टोकन जारी किए जाएं।किसानों ने साफ कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

    खरीफ सीजन की बुवाई पर संकट
    किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय बेहद नजदीक है और इस समय खाद का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। बारिश शुरू होने के साथ ही खेती का कार्य तेज हो जाता है, लेकिन खाद न मिलने से पूरी कृषि तैयारी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद नहीं मिला तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

    प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तकनीकी और दस्तावेजी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान निकाला जाए। साथ ही वनग्राम के सभी पात्र किसानों को सिस्टम में शामिल कर उन्हें खाद वितरण की सुविधा सुनिश्चित की जाए। फिलहाल क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है और किसान प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

  • खरगोन में बड़ा अग्निकांड: कपड़े, ज्वेलरी और फर्नीचर जलकर खाक, दमकल ने दो घंटे बाद पाया काबू

    खरगोन में बड़ा अग्निकांड: कपड़े, ज्वेलरी और फर्नीचर जलकर खाक, दमकल ने दो घंटे बाद पाया काबू


    खरगोन । खरगोन शहर के गायत्री मंदिर क्षेत्र स्थित एक शॉपिंग मॉल में शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक कपड़ा शोरूम से अचानक धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और शोरूम में रखा लाखों रुपये का सामान उसकी चपेट में आ गया। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

    जानकारी के अनुसार आग गायत्री मंदिर क्षेत्र स्थित शॉपिंग मॉल के मल्टी मार्ट कपड़ा शोरूम में लगी। सुबह के समय जब अधिकांश दुकानें बंद थीं, तभी शोरूम की ऊपरी मंजिल से धुआं निकलता दिखाई दिया। मेन रोड से गुजर रहे लोगों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए तत्काल शोरूम संचालक अब्दुल लतीफ और नगरपालिका के फायर ब्रिगेड विभाग को सूचना दी। कुछ ही मिनटों में मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। शोरूम संचालक अब्दुल लतीफ का कहना है कि अलसुबह किसी विद्युत खराबी के कारण आग भड़की होगी, जिसने धीरे-धीरे पूरे शोरूम को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही शोरूम में रखे रेडीमेड कपड़े, पैकिंग कार्टून, प्लास्टिक का सामान, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, फर्नीचर और अन्य सामग्री जलने लगी। आग के साथ उठ रहे घने धुएं ने राहत कार्य को और कठिन बना दिया।

    दमकल कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शोरूम में प्रवेश करने की थी। भवन में इमरजेंसी गेट की व्यवस्था नहीं होने के कारण अंदर पहुंचना मुश्किल हो गया। ऐसे में दमकल दल ने जेसीबी मशीन की मदद से पहली मंजिल के कांच तोड़कर भीतर जाने का रास्ता बनाया। इसके बाद फायर फाइटर्स ने लगातार पानी की बौछार कर आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया।

    करीब दो घंटे तक चले अभियान के दौरान दमकलकर्मियों ने आग को अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने में सफलता हासिल की। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो यह आसपास की दुकानों और पूरे मॉल को भी अपनी चपेट में ले सकती थी। राहत की बात यह रही कि घटना सुबह के समय हुई, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस अग्निकांड में लगभग 10 लाख रुपये के नुकसान की आशंका है। शोरूम में रखा अधिकांश माल पूरी तरह जलकर राख हो गया है। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों ने भी भवनों में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई है।

    यह हादसा एक बार फिर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी उपायों की आवश्यकता को उजागर करता है। इमरजेंसी गेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव न केवल राहत कार्य में बाधा बनता है, बल्कि किसी बड़े हादसे की स्थिति में जान-माल का नुकसान भी बढ़ा सकता है। फिलहाल प्रशासन और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुटे हैं।

  • सरकारी खरीदी से पहले ही मंडी में मूंग की धूम: खरगोन में 55 हजार क्विंटल बिक्री का अनुमान

    सरकारी खरीदी से पहले ही मंडी में मूंग की धूम: खरगोन में 55 हजार क्विंटल बिक्री का अनुमान


    खरगोन। खरगोन जिले में गर्मी की मूंग फसल की सरकारी खरीदी शुरू होने से पहले ही किसान अपनी उपज मंडी और खुले बाजार में बेचने लगे हैं। अनुमान है कि 15 जून के बाद सरकारी खरीदी शुरू होने तक करीब 55 हजार क्विंटल मूंग बाजार में पहुंच चुकी होगी। मंगलवार को मंडी में एक ही दिन में लगभग 1500 क्विंटल मूंग की आवक दर्ज की गई। मंडी में बढ़ती आवक यह साफ संकेत दे रही है कि किसान सरकारी खरीदी प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय सीधे बाजार में बिक्री को ज्यादा बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

    मंडी में 6666 से 7551 रुपये तक पहुंचा भाव
    मंगलवार को खरगोन मंडी में मूंग का भाव 6666 से 7551 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा। लगातार बढ़ती आवक के बीच दामों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वर्तमान में मंडी में मूंग का औसत भाव 6800 से 7600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना हुआ है। अनाज मंडी के आंकड़ों के अनुसार 10 मई के बाद मूंग की आवक में तेजी आई है और अब प्रतिदिन 1200 से 1500 क्विंटल मूंग मंडी में पहुंच रही है।

    सरकारी खरीदी प्रक्रिया में देरी से परेशान किसान
    किसानों का कहना है कि सरकारी खरीदी प्रक्रिया काफी धीमी होती है। पंजीयन, गिरदावरी और भुगतान में कई बार एक महीने तक का समय लग जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। किसान आत्माराम भाई ने बताया कि अनिश्चितता के कारण उन्होंने इस बार अपनी मूंग 6000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर मंडी में बेच दी, ताकि समय पर भुगतान मिल सके।

    18,500 हेक्टेयर में हुई मूंग की खेती
    इस वर्ष खरगोन जिले में लगभग 18,500 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की खेती की गई है। कृषि उत्पादन के लिहाज से यह खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों में से एक मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर बढ़ती आवक और बाजार में सक्रिय बिक्री यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में मंडी में मूंग की सप्लाई और भी बढ़ सकती है।

  • खरगोन में अवैध शराब पर सख्ती, करोड़ों की जब्ती नष्ट कराई गई

    खरगोन में अवैध शराब पर सख्ती, करोड़ों की जब्ती नष्ट कराई गई


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 25 लाख रुपये मूल्य की लगभग 9 हजार लीटर देशी और विदेशी शराब को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई शुक्रवार सुबह ट्रेचिंग ग्राउंड क्षेत्र में जेसीबी मशीन और रोलर की मदद से की गई।

    यह पूरी प्रक्रिया पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा की मौजूदगी में संपन्न हुई। कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे। पुलिस ने कोर्ट के आदेशों के बाद गठित विशेष समिति की निगरानी में शराब नष्ट करने की यह प्रक्रिया पूरी की।

    जानकारी के अनुसार, यह शराब जिले के 14 अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज कुल 64 मामलों में जब्त की गई थी। यह माल लंबे समय से थानों में सुरक्षित रखा गया था, जिसे अब विधिवत प्रक्रिया के तहत नष्ट किया गया।

    एसपी रविन्द्र वर्मा ने बताया कि अवैध शराब के मामलों में जब्त की गई सामग्री को न्यायालय की अनुमति और समिति की देखरेख में नष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाई जा सके। बड़ी मात्रा में शराब पर की गई इस कार्रवाई से जिले में अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है।

  • अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    भोपाल/खरगोन । मध्यप्रदेश में किसान कल्याण को लेकर सरकार की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली जब Mohan Yadav ने अपने ही बयान को अगले ही दिन जमीन पर उतार दिया। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं और 30 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसे सच कर दिखाया। मुख्यमंत्री अचानक Khargone जिले के कतरगांव स्थित खरीदी केंद्र पहुंच गए जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद किया

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल उपार्जन की प्रक्रिया को देखा बल्कि किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि जमीनी हकीकत को समझने और सुधार की दिशा तय करने का प्रयास था

    दरअसल मुख्यमंत्री इससे एक दिन पहले महेश्वर में रात्रि विश्राम पर थे और वहीं से उन्होंने संकेत दिए थे कि वे कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। उनके इस कदम ने यह साफ कर दिया कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि क्रियान्वयन पर भी उतना ही जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े

    सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई अहम बदलाव भी किए हैं। तौल में देरी से बचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और जरूरत के अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्यता सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे अधिक किसानों को राहत मिल सके। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है

    खरीदी केंद्रों पर बारदाना तौल कांटे हम्माल तुलावटी सिलाई मशीन कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सके

    यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। अब तक प्रदेश में 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं जबकि 5 लाख से अधिक किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष जहां 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस बार सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है

    मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी रख रही है ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंच सके

  • खरगोन में हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ से बवाल, आरोपी गिरफ्तार, गांव में पुलिस बल तैनात

    खरगोन में हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ से बवाल, आरोपी गिरफ्तार, गांव में पुलिस बल तैनात

    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के झिरन्या क्षेत्र में हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ और मूर्ति खंडित करने की घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया, जिससे स्थिति संवेदनशील हो गई।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी से पूछताछ जारी है ताकि घटना के पीछे के कारणों और संभावित साजिश का पता लगाया जा सके।

    घटना के बाद से ही गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर पहचान कर आरोपी को तेजी से पकड़ा गया ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    एसपी ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि माहौल खराब न हो।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

  • डिजिटल सिस्टम से धर्मांतरण का खेल उजागर, खरगोन में बाइबिल लैपटॉप ,और प्रोजेक्टर बरामद

    डिजिटल सिस्टम से धर्मांतरण का खेल उजागर, खरगोन में बाइबिल लैपटॉप ,और प्रोजेक्टर बरामद


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक कथित धर्मांतरण नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है जहां डिजिटल उपकरणों के जरिए प्रार्थना सभा के नाम पर गतिविधियां संचालित किए जाने की बात सामने आई है यह मामला ग्राम बमनाला का है जहां सेल्दा रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के पीछे खेत में बने एक मकान में यह गतिविधियां चल रही थीं

    सूचना मिलने पर पुलिस ने बुधवार को मौके पर दबिश दी और कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया पुलिस ने मौके से बाइबिल धार्मिक साहित्य लैपटॉप प्रोजेक्टर और साउंड सिस्टम सहित कई उपकरण जब्त किए हैं जिनका उपयोग कथित रूप से लोगों को एकत्र कर धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए किया जा रहा था

    बमनाला चौकी प्रभारी राजेंद्र आवास्या के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस टीम मौके पर पहुंची जहां से 13 बाइबिल 7 ईसाई साहित्य की पुस्तकें एक लैपटॉप एक प्रोजेक्टर और साउंड सिस्टम बरामद किया गया प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इन डिजिटल साधनों के माध्यम से लोगों को प्रार्थना के लिए बुलाया जाता था और उन्हें कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को बीमारी दूर होने और चमत्कारिक लाभ का दावा करके प्रार्थना सभा में शामिल किया जाता था इसके साथ ही हिंदू रीति रिवाज छोड़ने और ईसाई धर्म अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाता था

    पुलिस ने इस मामले में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धाराओं 3 और 5 के तहत केस दर्ज किया है और सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है गिरफ्तार आरोपियों में गांव के राजू बड़ोले बबलू जमरे उमरिया झाबुआ निवासी सेतु मेड़ा और कल्यापुरा निवासी पंकज बारिया शामिल हैं पुलिस के अनुसार बबलू जमरे ने लगभग दो से तीन साल पहले ही खेत में यह मकान बनवाया था जहां से यह गतिविधियां संचालित की जा रही थीं

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तलाशी के दौरान कुछ गोपनीय दस्तावेज भी जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क के पीछे और कौन लोग जुड़े हैं और यह गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है

  • खरगोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने पर डॉक्टर नर्स निलंबित

    खरगोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने पर डॉक्टर नर्स निलंबित


    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई गंभीर लापरवाही के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। जांच के बाद प्रसूता के पेट में सर्जिकल नैपकिन छूट जाने की घटना को गंभीर चिकित्सा चूक मानते हुए संबंधित डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार यह मामला जिला अस्पताल खरगोन में डिलीवरी के दौरान सामने आया था, जब प्रसूता के ऑपरेशन के बाद उसके पेट में सर्जिकल नैपकिन रह जाने की बात उजागर हुई। इस घटना के बाद मरीज की हालत को लेकर चिंता बढ़ गई और पूरे मामले की जांच शुरू की गई।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दौलत सिंह चौहान ने बताया कि आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं इंदौर संभाग द्वारा नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा को भी निलंबित किया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार यह मामला चिकित्सा प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का संकेत देता है, जहां ऑपरेशन के दौरान मानक सावधानियों का पालन नहीं किया गया। ऐसी घटनाएं न केवल मरीज की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।

    प्रशासन ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि आगे किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अस्पतालों में सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जिससे भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत और अधिक बढ़ गई है।