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  • जब अपनी ही फिल्म के फ्लॉप होने की दुआ मांगने लगे थे किशोर कुमार किस्मत ने बना दिया सुपरहिट

    जब अपनी ही फिल्म के फ्लॉप होने की दुआ मांगने लगे थे किशोर कुमार किस्मत ने बना दिया सुपरहिट


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के महान गायक अभिनेता और निर्माता किशोर कुमार अपनी शानदार गायकी के साथ साथ अपने अनोखे स्वभाव और मजेदार किस्सों के लिए भी जाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा उनकी सुपरहिट फिल्म चलती का नाम गाड़ी से जुड़ा है। कहा जाता है कि इस फिल्म के निर्माण के दौरान किशोर कुमार चाहते थे कि उनकी अपनी ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो जाए। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और यही फिल्म बाद में उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई।

    बताया जाता है कि वर्ष 1958 के दौरान किशोर कुमार आयकर से जुड़े मामलों में उलझे हुए थे। उन पर टैक्स का बड़ा बकाया था और इसी परेशानी से निकलने के लिए उन्होंने एक अलग ही योजना बनाई। उनका विचार था कि यदि वह एक ऐसी फिल्म बनाएंगे जो बॉक्स ऑफिस पर असफल हो जाएगी तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। इस नुकसान को आय में समायोजित करके टैक्स का बोझ कम किया जा सकेगा।

    इसी सोच के साथ उन्होंने निर्देशक सत्येन बोस के साथ मिलकर चलती का नाम गाड़ी का निर्माण शुरू किया। फिल्म में मधुबाला को मुख्य भूमिका दी गई जबकि किशोर कुमार अपने भाइयों के साथ पर्दे पर नजर आए। इस फिल्म का निर्माण हिंदी के साथ साथ बंगाली भाषा में भी किया गया जहां इसे लुकचुरी नाम से रिलीज किया गया।

    कहा जाता है कि किशोर कुमार मन ही मन यही चाहते थे कि फिल्म दर्शकों को पसंद न आए और उनकी योजना सफल हो जाए। लेकिन रिलीज के बाद कहानी पूरी तरह बदल गई। फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला और यह उस दौर की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई। अपनी शानदार कॉमेडी दमदार अभिनय और यादगार गीतों की वजह से फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और लंबे समय तक सिनेमाघरों में चलती रही।

    करीब 35 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगभग एक करोड़ पच्चीस लाख रुपये का कारोबार किया जबकि दुनिया भर में इसकी कमाई करीब ढाई करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उस समय के हिसाब से यह बेहद बड़ी सफलता मानी गई। फिल्म की अप्रत्याशित कामयाबी ने किशोर कुमार की टैक्स बचाने की पूरी योजना पर पानी फेर दिया क्योंकि नुकसान दिखाने की जगह उन्हें बड़ा मुनाफा हो गया।

    बताया जाता है कि आयकर से जुड़ा उनका मामला लंबे समय तक अदालतों में चलता रहा। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का सकारात्मक पहलू यह रहा कि भारतीय सिनेमा को एक ऐसी क्लासिक कॉमेडी फिल्म मिली जिसे आज भी दर्शक पूरे परिवार के साथ देखना पसंद करते हैं। चलती का नाम गाड़ी समय के साथ एक यादगार फिल्म बन गई और इसके गीत तथा किरदार आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। यही वजह है कि किशोर कुमार का यह अनोखा किस्सा आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच मुस्कान बिखेर देता है।

  • किशोर कुमार का सबसे विवादित गाना: 8 महिला गायिकाओं के बीच अकेले गाया गीत, अश्लीलता के आरोप में हुआ था बैन

    किशोर कुमार का सबसे विवादित गाना: 8 महिला गायिकाओं के बीच अकेले गाया गीत, अश्लीलता के आरोप में हुआ था बैन


    नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं, जिन्होंने अपनी लोकप्रियता के साथ-साथ विवादों के कारण भी खास पहचान बनाई। ऐसा ही एक गीत था फिल्म ‘विधाता’ का ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी, फरियाद सुनाए घड़ी-घड़ी’, जिसे महान गायक किशोर कुमार ने आठ महिला गायिकाओं के साथ मिलकर गाया था। यह गीत अपने समय में इतना चर्चित हुआ कि इसके कुछ बोलों को लेकर विवाद खड़ा हो गया और बाद में इसे दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

    वर्ष 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘विधाता’ उस दौर की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार, संजीव कुमार, शम्मी कपूर, संजय दत्त और अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे जैसे सितारे नजर आए थे। प्रसिद्ध फिल्मकार सुभाष घई द्वारा निर्देशित इस फिल्म का संगीत भी दर्शकों को खूब पसंद आया। फिल्म के सभी गीत सुपरहिट रहे, लेकिन ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी’ ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं।

    इस गीत की खास बात यह थी कि इसमें किशोर कुमार अकेले पुरुष गायक थे, जबकि उनके साथ आठ महिला गायिकाओं ने अपनी आवाज दी थी। इनमें हेमलता, कंचन, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम, अलका याज्ञनिक, पद्मिनी कोल्हापुरे, उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे और शक्ति कपूर की पत्नी शिवांगी कपूर शामिल थीं। बताया जाता है कि जब किशोर कुमार रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे और वहां एक साथ इतनी महिला गायिकाओं को देखा तो वे चौंक गए। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि वे तो फंस गए हैं। हालांकि संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी और अभिनेता शम्मी कपूर के समझाने पर उन्होंने यह गीत रिकॉर्ड किया।

    गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बक्शी ने लिखे थे। रिकॉर्डिंग के बाद इसे फिल्माया गया और दर्शकों के सामने पेश किया गया। लेकिन रिलीज के बाद गीत के कुछ अंतरों को लेकर आपत्ति जताई गई। आलोचकों ने इसे अश्लील बताया और इसके प्रसारण पर सवाल उठाए। विवाद इतना बढ़ा कि ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने इस गीत के प्रसारण पर रोक लगा दी। हालांकि फिल्म की लोकप्रियता पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।

    दिलचस्प बात यह रही कि जिस गीत को कभी अश्लील बताकर बैन किया गया था, वही समय के साथ हिंदी फिल्म संगीत की चर्चित धरोहर बन गया। आज भी संगीत प्रेमी इस गीत को याद करते हैं और इसे किशोर कुमार के सबसे अनोखे और दुर्लभ गीतों में गिना जाता है। यह गीत न केवल अपनी धुन और प्रस्तुति के लिए बल्कि एक साथ इतनी महिला गायिकाओं के साथ रिकॉर्ड होने के कारण भी संगीत इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

  • जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना

    जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना


    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो कलाकारों की प्रतिभा और उनके जुनून को नई पहचान देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा महान गायक किशोर कुमार और फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा हुआ है। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं।

    साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘शराबी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और उनके किरदार की भावनाओं को दर्शाने के लिए गीतकार अंजान ने एक बेहतरीन गीत लिखा था। संगीतकार बप्पी लहरी ने इस गीत को मधुर धुन से सजाया। अब जरूरत थी ऐसी आवाज की, जो इस गीत की आत्मा को जीवंत कर सके, और इसके लिए चुना गया नाम था किशोर कुमार।

    जब किशोर कुमार के सामने यह गीत रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भाव को गहराई से समझा। उन्हें बताया गया कि पर्दे पर अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो शराब के नशे में है और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है।

    यहीं से किशोर कुमार की रचनात्मकता सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि इस गीत में एक शराबी का वास्तविक एहसास पैदा करना है, तो वह इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गाएंगे। उनकी शर्त थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेटने दिया जाए ताकि वे उस मानसिक और शारीरिक स्थिति को महसूस कर सकें, जिसमें फिल्म का पात्र दिखाई देगा।

    स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी यह बात सुनकर चौंक गए। हालांकि, किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में एक बड़ी टेबल मंगवाई गई। किशोर कुमार उस पर लेट गए, माइक को उसी हिसाब से सेट किया गया और फिर रिकॉर्डिंग शुरू हुई।

    इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आशा भोसले के साथ किशोर कुमार ने ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ को अपनी आवाज दी और गीत में ऐसा जादू भर दिया कि वह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे अंदाज को देखकर हैरान रह गई थीं।

    यह गीत न केवल फिल्म ‘शराबी’ की पहचान बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता उसी उत्साह और भावनाओं के साथ इसे सुनते हैं। किशोर कुमार की यही विशेषता थी कि वह केवल गीत नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज और उनके गाए गीत आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं।

  • गाने ने बदल दिया इतिहास, किशोर कुमार की बात आखिरकार साबित हुई सही

    गाने ने बदल दिया इतिहास, किशोर कुमार की बात आखिरकार साबित हुई सही


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज पार्श्वगायक किशोर कुमार अपनी बेहतरीन आवाज और बहुआयामी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हजारों गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। उनके एक खास गाने “मेरे ये गीत याद रखना” को लेकर एक बेहद भावुक किस्सा जुड़ा है, जिसे फिल्म चलते-चलते के लिए रिकॉर्ड किया गया था।

    गाते-गाते भावुक हो उठे थे किशोर कुमार
    कहा जाता है कि जब किशोर कुमार इस गाने को रिकॉर्ड कर रहे थे, तब वह बार-बार भावुक हो जाते थे। गीत के बोल और संगीत ने उनकी निजी यादों को ताजा कर दिया, जिससे उनकी आंखें नम हो जाती थीं। रिकॉर्डिंग के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि उन्हें खुद को संभालना पड़ा, क्योंकि गाने की भावनात्मक गहराई उन्हें भीतर तक छू रही थी।

    ‘ये गाना हिट होगा’ किशोर कुमार की भविष्यवाणी
    इस गाने को लेकर एक दिलचस्प बात यह भी कही जाती है कि किशोर कुमार ने इसके रिकॉर्डिंग के दौरान ही कह दिया था कि यह गीत दर्शकों के दिलों में जगह बनाएगा। उनकी यह बात आगे चलकर सही साबित हुई और यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय माना जाता है।

    संगीत और फिल्म की यादगार टीम
    यह गीत फिल्म चलते-चलते का हिस्सा था, जिसमें कलाकारों की भूमिका भी बेहद यादगार रही। इसके बोल लेखक अमित खन्ना ने लिखे थे, जबकि संगीत निर्देशन बप्पी लाहिड़ी ने किया था। बप्पी लाहिड़ी ने इस गीत के लिए ऐसी धुन तैयार की थी जो सीधे दिल को छू जाए, और यही इसकी सफलता का बड़ा कारण बनी।

    किशोर कुमार की विरासत
    किशोर कुमार सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि अभिनेता, निर्देशक और निर्माता भी थे। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए और कई सुपरस्टार्स के लिए अपनी आवाज दी। उनकी गायकी की खासियत यह थी कि वह हर तरह के गीत रोमांटिक, दर्दभरे, भजन या मस्तीभरे सबमें समान रूप से जान डाल देते थे।

    एक अमर कलाकार की अमर कहानी
    किशोर कुमार का नाम भारतीय संगीत इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनकी आवाज, उनका अंदाज और उनके गीत आज भी लोगों को भावनाओं से जोड़ते हैं। यह किस्सा उनके उसी जादू को याद दिलाता है, जो उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है।

  • फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

    फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक और अभिनेता Kishore Kumar अपने शानदार गीतों के साथ-साथ अपनी अनोखी आदतों और मजाकिया स्वभाव के लिए भी खूब पहचाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले कलाकार और फिल्मकार अक्सर उनके अलग अंदाज और अप्रत्याशित व्यवहार के बारे में बातें करते रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा एक बड़ी फिल्म से जुड़ा है, जिसने बाद में हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह बनाई।

    दोस्ती और दुविधा के बीच फंसे थे किशोर कुमार

    उस दौर में मशहूर फिल्म निर्देशक Hrishikesh Mukherjee और किशोर कुमार के बीच गहरी दोस्ती थी। निर्देशक अपनी नई फिल्म के लिए ऐसे कलाकार की तलाश में थे जो मुख्य किरदार को जीवंत बना सके। उनकी पसंद किशोर कुमार थे और वे चाहते थे कि वही फिल्म के नायक बनें। लेकिन दूसरी तरफ किशोर कुमार इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं थे। परेशानी यह थी कि गहरी दोस्ती के कारण वह सीधे तौर पर मना भी नहीं कर पा रहे थे।

    फिल्म से बचने के लिए अपनाया अनोखा तरीका
    काफी सोच-विचार के बाद किशोर कुमार ने एक अलग रास्ता चुना। फिल्म शुरू होने से पहले जब उन्हें लुक और कॉस्ट्यूम को लेकर चर्चा के लिए बुलाया गया तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर चौंक गए। वह पूरी तरह गंजे होकर पहुंचे थे। इतना ही नहीं, वह पूरे ऑफिस में घूमते हुए मजाकिया अंदाज में नाचते और गाते रहे। उनका यह रूप देखकर सभी हैरान रह गए।

    एक फैसले ने बदल दी पूरी कहानी
    निर्देशक के लिए यह दृश्य अप्रत्याशित था। फिल्म के मुख्य किरदार के लिए जिस छवि की कल्पना की गई थी, उसके विपरीत किशोर कुमार का यह अंदाज था। आखिरकार बात इतनी आगे बढ़ी कि उन्हें फिल्म से अलग कर दिया गया। बाद में उसी किरदार के लिए दूसरे कलाकार को चुना गया और फिल्म ने आगे चलकर बड़ी सफलता हासिल की।

    फिल्म इतिहास का यादगार अध्याय
    बाद में यह फिल्म बनी Anand, जिसमें मुख्य भूमिका Rajesh Khanna ने निभाई और उनके साथ Amitabh Bachchan भी नजर आए। फिल्म की कहानी और अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है।

    इस घटना ने यह भी साबित किया कि किशोर कुमार केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि उनका जीवन अनोखे और दिलचस्प किस्सों से भी भरा हुआ था, जिनकी चर्चा आज भी उतनी ही दिलचस्पी से होती है।

  • बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी

    बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुनहरे दौर में जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज गायक एक साथ किसी गाने में अपनी आवाज देते थे, तो वह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि इतिहास बन जाता था। ऐसा ही एक यादगार किस्सा फिल्म दोस्ताना (1980) से जुड़ा है, जिसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य भूमिकाओं में थे।

    इस फिल्म के मशहूर डुएट गीत “सलामत रहे दोस्ताना हमारा” की रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो में एक दिलचस्प माहौल देखने को मिला। बताया जाता है कि मोहम्मद रफी समय पर स्टूडियो पहुंच गए थे और उन्होंने गाने की रिहर्सल भी पूरी तैयारी के साथ की थी। उनकी क्लासिकल और मधुर आवाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित कर दिया था।

    लेकिन जब किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे तो उन्होंने माहौल को गंभीर बनाने के बजाय हल्का-फुल्का कर दिया। वे रफी साहब के साथ मजाक-मस्ती करने लगे, जिससे कई लोगों को लगा कि वह गाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। उस समय कई लोगों को लगा कि रफी साहब अपनी परफॉर्मेंस से बाजी मार लेंगे।

    हालांकि, जैसे ही रिकॉर्डिंग शुरू हुई, पूरा माहौल बदल गया। पहले मोहम्मद रफी ने अपने हिस्से को बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ गाया। लेकिन जब किशोर कुमार की बारी आई, तो उनकी आवाज ने स्टूडियो में मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया। उनकी गायकी में जो ऊर्जा, भाव और सहजता थी, उसने गाने को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

    संगीतकार पंडित रोनू मजुमदार के अनुसार, उस दिन दोनों ही दिग्गजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन किशोर कुमार की आवाज में एक अलग तरह का जादू था, जिसने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी परफॉर्मेंस को कई लोग उस दौर की सबसे यादगार रिकॉर्डिंग्स में से एक मानते हैं।

    फिल्म दोस्ताना के अन्य गीत भी सुपरहिट साबित हुए और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन यह डुएट गाना आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसमें दो महान गायकों की अद्भुत टक्कर और संगीत की असली ताकत देखने को मिली।

  • ऋषि कपूर की ‘कर्ज’: फ्लॉप फिल्म, लेकिन सुपरहिट म्यूजिक और मानसिक तनाव की सच्ची कहानी

    ऋषि कपूर की ‘कर्ज’: फ्लॉप फिल्म, लेकिन सुपरहिट म्यूजिक और मानसिक तनाव की सच्ची कहानी



    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर की 1980 में आई फिल्म कर्ज आज भले ही एक कल्ट क्लासिक मानी जाती है, लेकिन रिलीज के समय यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की असफलता नहीं, बल्कि उसके गानों की भारी सफलता ने उस दौर में ऋषि कपूर को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया था।

    क्या थी फिल्म की खासियत?
    फिल्म का निर्देशन सुभाष घई ने किया था और यह एक म्यूजिकल थ्रिलर के रूप में बनाई गई थी। कहानी के साथ-साथ इसके संगीत पर खास फोकस किया गया था।इस फिल्म के संगीत को तैयार किया था लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल की जोड़ी ने, और गानों को आवाज दी थी किशोर कुमार और मोहम्मद रफ़ी जैसे महान गायकों ने।

    सुपरहिट हुए गाने
    फिल्म के गाने जैसे
    ओम शांति ओम
    एक हसीना थी
    पैसा ये पैसा
    दर्द-ए-दिलइतने लोकप्रिय हुए कि वे आज भी याद किए जाते हैं।

    बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप
    जहां फिल्म का संगीत सुपरहिट रहा, वहीं सिनेमाघरों में फिल्म दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाई और फ्लॉप हो गई। शुरुआती हफ्तों के बाद इसकी कमाई तेजी से गिर गई।इसके कुछ समय बाद रिलीज हुई कुर्बानी ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और कर्ज पीछे छूट गई।

    क्यों परेशान हुए ऋषि कपूर?
    रिपोर्ट्स और ऋषि कपूर की आत्मकथा के अनुसार, उन्हें इस बात का मानसिक दबाव महसूस हुआ कि उनकी फिल्म भले ही असफल रही, लेकिन उसके गाने हर जगह लोकप्रिय हो रहे थे। इस वजह से वे भावनात्मक तनाव में आ गए थे।कई रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख मिलता है कि वे उस समय काफी परेशान रहे और यह दौर उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

    आज क्या है स्थिति?
    समय के साथ कर्ज को दर्शकों ने एक आइकॉनिक फिल्म के रूप में स्वीकार किया और आज इसे बॉलीवुड की सबसे यादगार म्यूजिकल फिल्मों में गिना जाता है।

  • क्यों लीजेंडरी किशोर कुमार ने डैनी डेंजोंगपा से गवाए थे ट्राइबल गीत?

    क्यों लीजेंडरी किशोर कुमार ने डैनी डेंजोंगपा से गवाए थे ट्राइबल गीत?

    नई दिल्ली।भारतीय संगीत जगत के बेताज बादशाह किशोर कुमार अपनी गायकी के साथ-साथ अपने काम के प्रति अनोखे जुनून के लिए भी जाने जाते थे। उनके जीवन का एक बेहद दिलचस्प और प्रेरक किस्सा अभिनेता डैनी डेंजोंगपा से जुड़ा है, जो यह दर्शाता है कि किशोर दा किसी भी अभिनेता के लिए अपनी आवाज को ढालने के लिए किस हद तक मेहनत करते थे। बात साल 1977 की है जब फिल्म ‘अभी तो जी लें’ का निर्माण हो रहा था। इस फिल्म में डैनी डेंजोंगपा एक अहम भूमिका निभा रहे थे और संगीतकार जगमोहन बक्शी व सपन सेनगुप्ता ने किशोर कुमार को डैनी के लिए एक गीत गाने का प्रस्ताव दिया। जैसे ही किशोर कुमार को पता चला कि उन्हें डैनी के लिए अपनी आवाज देनी है, उन्होंने तुरंत अभिनेता को अपने घर आने का न्यौता भेज दिया।

    उस समय डैनी फिल्म जगत में एक उभरते हुए कलाकार थे और किशोर कुमार जैसे महान गायक का बुलावा पाकर वह काफी घबरा गए थे। जब डैनी उनके घर पहुंचे, तो किशोर कुमार ने उनके सामने एक अजीब सी फरमाइश रख दी। उन्होंने डैनी से कहा कि वह उन्हें अपनी आवाज में कुछ नेपाली और असमी लोकगीत सुनाएं। डैनी काफी हैरान थे कि आखिर एक महान गायक उनसे गाने क्यों सुनना चाहता है, लेकिन उन्होंने हिचकते हुए किशोर दा को अपनी मातृभाषा के कुछ पारंपरिक गीत सुनाए। डैनी वहां से यह सोचकर चले गए कि शायद किशोर दा महज मनोरंजन के लिए गाने सुन रहे थे, लेकिन असल में उस महान कलाकार के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।

    दरअसल, किशोर कुमार केवल गाने नहीं सुन रहे थे, बल्कि वह डैनी की आवाज की बनावट, उनके चेहरे के हाव-भाव, गाना गाते समय उनके गले की हरकतों और उनके उच्चारण के लहजे को बहुत गहराई से समझ रहे थे। डैनी के जाने के बाद किशोर कुमार ने कई अन्य नेपाली और ट्राइबल गीतों का अध्ययन किया ताकि वह डैनी की आवाज के करीब पहुंच सकें। इसी कड़ी मेहनत का परिणाम था फिल्म का सुपरहिट गाना ‘तू लाली है सवेरे वाली’। जब यह गाना रिलीज हुआ, तो लोग अपनी कानों पर यकीन नहीं कर पाए। पर्दे पर डैनी को लिप-सिंकिंग करते देख ऐसा लग रहा था मानो वह खुद गा रहे हों। किशोर कुमार ने अपनी मूल आवाज को इस तरह बदला था कि उसमें डैनी का व्यक्तित्व पूरी तरह समा गया था।

    इतिहास गवाह है कि यह गाना न केवल उस समय हिट हुआ बल्कि आज भी किशोर कुमार के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है। डैनी खुद भी बाद में इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि किशोर दा की उस लगन ने उन्हें अचंभित कर दिया था। इसके बाद किशोर कुमार ने डैनी के लिए एक बंगाली गाना भी गाया, जिसमें फिर से वही जादू देखने को मिला। किशोर कुमार का यह अंदाज साबित करता है कि वह महज एक गायक नहीं बल्कि एक बेहतरीन अभिनेता भी थे, जो माइक के पीछे रहकर पर्दे पर दिखने वाले कलाकार की आत्मा को अपनी आवाज में उतार लेते थे। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन डैनी और किशोर कुमार का यह अनूठा संगम संगीत प्रेमियों के लिए हमेशा एक अनमोल धरोहर बना रहेगा।

  • जब दिग्गज गायक ने एक नए अभिनेता के लिए अपनी फीस से किया था बड़ा समझौता..

    जब दिग्गज गायक ने एक नए अभिनेता के लिए अपनी फीस से किया था बड़ा समझौता..

    नई दिल्ली। अस्सी के दशक में जब बॉलीवुड की गलियों में एक नया लड़का अपनी थिरकन और मासूमियत से पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा सितारा उसके लिए अपनी शर्तें बदल देगा। यह कहानी है ‘चीची’ यानी गोविंदा और किशोर कुमार के उस अनकहे रिश्ते की, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के नए मायने लिखे। साल 1986 में जब गोविंदा ने फिल्म ‘लव 86’ और ‘इल्जाम’ के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, तब वह महज एक उभरते हुए कलाकार थे। उनके पास टैलेंट तो था, लेकिन उस समय के सबसे महंगे और दिग्गज गायक किशोर कुमार की आवाज पाना उनके लिए एक सुनहरे सपने जैसा था।

    फिल्म ‘ड्यूटी’ गोविंदा के शुरुआती करियर की एक ऐसी फिल्म थी, जिसका बजट बेहद सीमित था। फिल्म के निर्देशक रविकांत नगैच और संगीतकार बाबला शाह इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि इतने कम बजट में फिल्म को बड़े स्तर पर कैसे प्रमोट किया जाए। इसी बीच गोविंदा ने एक ऐसी मांग रख दी जिसने मेकर्स के पसीने छुड़ा दिए। गोविंदा चाहते थे कि फिल्म के दो महत्वपूर्ण गानों को केवल किशोर कुमार ही अपनी आवाज दें। गोविंदा का मानना था कि यदि किशोर दा जैसा बड़ा नाम उनके साथ जुड़ जाएगा, तो न केवल फिल्म की वैल्यू बढ़ जाएगी, बल्कि एक नए अभिनेता के तौर पर उन्हें इंडस्ट्री में वह गंभीरता मिलेगी जिसकी उन्हें तलाश थी।

    चुनौती यह थी कि किशोर कुमार उस दौर के सबसे व्यस्त और महंगे गायक थे। फिल्म का बजट इतना कम था कि निर्माता एक बड़े विलेन तक को कास्ट नहीं कर पा रहे थे, ऐसे में किशोर कुमार की भारी-भरकम फीस चुकाना नामुमकिन लग रहा था। जब संगीत निर्देशक बाबला शाह ने यह बात कल्याणजी-आनंदजी को बताई, तो कहानी में एक नया मोड़ आया। दरअसल, बाबला शाह दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के छोटे भाई थे। अपने भाई के भविष्य और गोविंदा के जुनून को देखते हुए कल्याणजी-आनंदजी ने किशोर कुमार से खास सिफारिश की। किशोर दा के संबंध इस जोड़ी से बेहद मधुर थे, इसलिए उन्होंने मित्रता और सम्मान के खातिर अपनी फीस काफी कम कर दी और गानों के लिए हामी भर दी।

    किशोर कुमार ने इस फिल्म के लिए ‘जिस महफिल में आता हूं’ और ‘तुम जिसे चाहो’ जैसे दो शानदार गाने गाए। इन गानों के रिलीज होते ही संगीत प्रेमियों के बीच तहलका मच गया। किशोर दा की जादुई आवाज और पर्दे पर गोविंदा के बेहतरीन डांस मूव्स ने वह जादू पैदा किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इन गानों की सफलता ने गोविंदा को रातों-रात सुपरस्टार्स की कतार में खड़ा कर दिया। इसके बाद गोविंदा और किशोर कुमार की जोड़ी ने कई यादगार नगमे दिए, लेकिन फिल्म ‘ड्यूटी’ के वे दो गाने हमेशा इस बात के गवाह रहेंगे कि कैसे एक दिग्गज कलाकार ने अपनी दरियादिली से एक उभरते हुए सितारे की तकदीर बदल दी थी।

  • पंचम दा का म्यूजिक मैजिक: कैसे साधारण कंघी ने ‘पड़ोसन’ के गाने को बनाया सुपरहिट

    पंचम दा का म्यूजिक मैजिक: कैसे साधारण कंघी ने ‘पड़ोसन’ के गाने को बनाया सुपरहिट


    नई दिल्ली।भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में अगर किसी संगीतकार को सबसे ज्यादा प्रयोगधर्मी और क्रिएटिव कहा जाता है तो वह हैं Rahul Dev Burman जिन्हें दुनिया प्यार से पंचम दा के नाम से जानती है। आरडी बर्मन को लोग यूं ही मैड जीनियस नहीं कहते थे। उनके संगीत में ऐसी अनोखी कल्पनाशीलता थी जिसे आज भी दोहराना आसान नहीं है। पंचम दा जब भी किसी गाने की रिकॉर्डिंग करते थे तो सिर्फ पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर निर्भर नहीं रहते थे बल्कि रोजमर्रा की चीजों से भी ऐसी आवाजें निकाल लेते थे जो गाने में नई जान भर देती थीं।

    उनकी इसी क्रिएटिव सोच का एक दिलचस्प उदाहरण 1968 में आई फिल्म Padosan के सुपरहिट गाने Mere Samne Wali Khidki Mein में देखने को मिलता है। यह गाना उस दौर में जितना लोकप्रिय था उतना ही आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। अक्सर लोग इस गाने को गुनगुनाते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने में एक खास साउंड किसी म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट से नहीं बल्कि एक साधारण कंघी से निकाला गया था।

    दरअसल फिल्म में Sunil Dutt एक शरारती पड़ोसी की भूमिका निभाते हैं जो सामने वाली खिड़की में रहने वाली लड़की को अपने अंदाज में रिझाने की कोशिश करता है। गाने का माहौल भी हल्का फुल्का और शरारत से भरा हुआ है। जब इस गाने की रिकॉर्डिंग की तैयारी चल रही थी तब पंचम दा को लग रहा था कि गाने में कुछ ऐसा होना चाहिए जो उसकी मस्ती और शरारत को और ज्यादा उभार सके। स्टूडियो में उस समय बड़े बड़े संगीतकार मौजूद थे। वायलिन, गिटार और कई अन्य वाद्ययंत्र तैयार थे लेकिन पंचम दा को कुछ अलग चाहिए था।

    बताया जाता है कि काफी देर सोचने के बाद अचानक पंचम दा ने अपनी जेब में हाथ डाला और एक साधारण प्लास्टिक की कंघी निकाल ली। इसके बाद उन्होंने उस कंघी को एक खुरदुरी सतह पर रगड़ना शुरू किया। जैसे ही उससे कर्र कर्र जैसी आवाज निकली पंचम दा के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्हें लगा कि यही वह साउंड है जो गाने के शरारती मूड को और दिलचस्प बना सकता है।

    स्टूडियो में मौजूद लोग पहले तो यह देखकर हैरान रह गए कि एक मशहूर संगीतकार रिकॉर्डिंग के दौरान कंघी से आवाज निकालने की कोशिश कर रहा है। खासतौर पर गायक Kishore Kumar को यह दृश्य काफी मजेदार लगा। उन्होंने पंचम दा को देखकर मजाक किया और सिर पकड़ लिया। लेकिन जब रिकॉर्डिंग पूरी हुई और गाना तैयार हुआ तो हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो गया।

    गाने की शुरुआत और बैकग्राउंड में जो हल्की क्रिक क्रिक जैसी आवाज सुनाई देती है वह असल में उसी कंघी से पैदा की गई थी। यह छोटी सी ध्वनि गाने में एक अलग तरह की मस्ती और चुलबुलापन जोड़ देती है। यही वजह है कि आज भी यह गाना सुनते समय श्रोताओं को अलग आनंद मिलता है भले ही वे उस साउंड के पीछे की कहानी से अनजान हों।

    आरडी बर्मन की खासियत यही थी कि वे संगीत को सिर्फ सुर और ताल तक सीमित नहीं रखते थे बल्कि रोजमर्रा की चीजों को भी संगीत का हिस्सा बना देते थे। कभी पानी की छपाक, कभी कांच की बोतल की टनकार और कभी चम्मच और ग्लास की आवाजें उनके गानों में सुनाई देती थीं। उनकी यही प्रयोगधर्मिता उन्हें बाकी संगीतकारों से अलग बनाती है।

    आज जब लोग इस गाने को ध्यान से सुनते हैं और कंघी से निकली उस आवाज़ को पहचानने की कोशिश करते हैं तो उन्हें एहसास होता है कि पंचम दा की क्रिएटिविटी कितनी अनोखी थी। यही कारण है कि दशकों बाद भी आरडी बर्मन का संगीत उतना ही ताजा और दिलचस्प लगता है जितना अपने दौर में था।