फिल्म ‘ड्यूटी’ गोविंदा के शुरुआती करियर की एक ऐसी फिल्म थी, जिसका बजट बेहद सीमित था। फिल्म के निर्देशक रविकांत नगैच और संगीतकार बाबला शाह इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि इतने कम बजट में फिल्म को बड़े स्तर पर कैसे प्रमोट किया जाए। इसी बीच गोविंदा ने एक ऐसी मांग रख दी जिसने मेकर्स के पसीने छुड़ा दिए। गोविंदा चाहते थे कि फिल्म के दो महत्वपूर्ण गानों को केवल किशोर कुमार ही अपनी आवाज दें। गोविंदा का मानना था कि यदि किशोर दा जैसा बड़ा नाम उनके साथ जुड़ जाएगा, तो न केवल फिल्म की वैल्यू बढ़ जाएगी, बल्कि एक नए अभिनेता के तौर पर उन्हें इंडस्ट्री में वह गंभीरता मिलेगी जिसकी उन्हें तलाश थी।
चुनौती यह थी कि किशोर कुमार उस दौर के सबसे व्यस्त और महंगे गायक थे। फिल्म का बजट इतना कम था कि निर्माता एक बड़े विलेन तक को कास्ट नहीं कर पा रहे थे, ऐसे में किशोर कुमार की भारी-भरकम फीस चुकाना नामुमकिन लग रहा था। जब संगीत निर्देशक बाबला शाह ने यह बात कल्याणजी-आनंदजी को बताई, तो कहानी में एक नया मोड़ आया। दरअसल, बाबला शाह दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के छोटे भाई थे। अपने भाई के भविष्य और गोविंदा के जुनून को देखते हुए कल्याणजी-आनंदजी ने किशोर कुमार से खास सिफारिश की। किशोर दा के संबंध इस जोड़ी से बेहद मधुर थे, इसलिए उन्होंने मित्रता और सम्मान के खातिर अपनी फीस काफी कम कर दी और गानों के लिए हामी भर दी।
किशोर कुमार ने इस फिल्म के लिए ‘जिस महफिल में आता हूं’ और ‘तुम जिसे चाहो’ जैसे दो शानदार गाने गाए। इन गानों के रिलीज होते ही संगीत प्रेमियों के बीच तहलका मच गया। किशोर दा की जादुई आवाज और पर्दे पर गोविंदा के बेहतरीन डांस मूव्स ने वह जादू पैदा किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इन गानों की सफलता ने गोविंदा को रातों-रात सुपरस्टार्स की कतार में खड़ा कर दिया। इसके बाद गोविंदा और किशोर कुमार की जोड़ी ने कई यादगार नगमे दिए, लेकिन फिल्म ‘ड्यूटी’ के वे दो गाने हमेशा इस बात के गवाह रहेंगे कि कैसे एक दिग्गज कलाकार ने अपनी दरियादिली से एक उभरते हुए सितारे की तकदीर बदल दी थी।
