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  • कलकत्ता हाई कोर्ट से TMC को बड़ी राहत, फ्रीज बैंक खातों के संचालन की मिली अनुमति, निगरानी के लिए स्पेशल ऑफिसर नियुक्त

    कलकत्ता हाई कोर्ट से TMC को बड़ी राहत, फ्रीज बैंक खातों के संचालन की मिली अनुमति, निगरानी के लिए स्पेशल ऑफिसर नियुक्त

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को पार्टी फंड से जुड़े विवाद के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने पार्टी के तीन फ्रीज बैंक खातों के संचालन के लिए एक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त करने का आदेश दिया है। इस व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस अपने आवश्यक वित्तीय लेनदेन कर सकेगी, लेकिन सभी गतिविधियां अदालत द्वारा नियुक्त अधिकारी की निगरानी में संपन्न होंगी।

    यह मामला पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से जुड़ा है। संबंधित खातों पर रोक लगाए जाने के बाद पार्टी की नियमित वित्तीय और संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित होने लगी थीं। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस पहलू पर विचार करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद किसी राजनीतिक दल के नियमित प्रशासनिक और वित्तीय कार्य पूरी तरह बाधित नहीं होने चाहिए। इसी आधार पर निगरानी व्यवस्था के साथ खातों के संचालन की अनुमति दी गई।

    मामले की शुरुआत उस शिकायत से हुई थी जिसमें पार्टी फंड के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई और उसके बाद संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई की गई। इस निर्णय के कारण पार्टी के नियमित भुगतान और अन्य वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में कठिनाइयां सामने आने लगी थीं।

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में ही खातों से लेनदेन किया जाएगा। इसका उद्देश्य एक ओर जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के आवश्यक प्रशासनिक कार्यों को भी जारी रखना है। अदालत की यह व्यवस्था जांच और नियमित वित्तीय संचालन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आदेश तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रशासनिक दृष्टि से राहत लेकर आया है। पार्टी अब अपने संगठनात्मक खर्च, नियमित भुगतान और अन्य आवश्यक वित्तीय दायित्वों को अदालत की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कर सकेगी। हालांकि मामले की जांच पहले की तरह जारी रहेगी और अंतिम निष्कर्ष जांच के आधार पर ही सामने आएंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक दलों के वित्तीय प्रबंधन और फंड संचालन से जुड़े नियमों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि जांच प्रभावित हुए बिना आवश्यक वित्तीय गतिविधियां भी बाधित न हों। इससे जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों के बीच संतुलित प्रक्रिया बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस को अपने फ्रीज बैंक खातों के सीमित संचालन की अनुमति मिल गई है। अब सभी वित्तीय लेनदेन अदालत द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की देखरेख में किए जाएंगे। आने वाले समय में मामले की जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई इस पूरे विवाद की आगे की दिशा तय करेगी।

  • रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा

    रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के जाने-माने और दिग्गज अभिनेता राजेश शर्मा की तबीयत अचानक बेहद खराब होने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में व्यस्त चल रहे अभिनेता को सेट पर किसी बेहद जहरीले कीड़े ने काट लिया, जिसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इस समय डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह खतरनाक संक्रमण उनके फेफड़ों (लंग्स) तक पहुंच गया, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक और जानलेवा हो सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

    ‘भूत बंगला’, ‘भूल भुलैया 2’, ‘भूल भुलैया 3’, ‘क्रू’, ‘लक्ष्मी’ और ‘डार्लिंग्स’ जैसी कई सुपरहिट और कद्दावर फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवा चुके राजेश शर्मा को फिलहाल पश्चिम बंगाल के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में वेंटिलेशन और गहन चिकित्सा इकाई की निगरानी में रखा गया है। अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा के परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए उनके स्वास्थ्य की ताजा स्थिति (हेल्थ अपडेट) के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें किसी सांप, बिच्छू या मकड़ी में से किसने काटा है, लेकिन इस बाइट का असर पूरी बॉडी पर बेहद घातक साबित हुआ।

    यह दर्दनाक हादसा हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में हुआ, जहां राजेश शर्मा सुपरस्टार प्रभास की मुख्य भूमिका वाली एक बड़ी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग का पैकअप होने के बाद राजेश फिल्म सिटी के पास स्थित घने जंगलों से घिरे एक सुनसान इलाके में स्थानीय तकनीशियनों के साथ किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें अपने पैर में किसी जीव के काटने का तीखा अहसास हुआ। शुरुआती पलों में यह मामला बहुत गंभीर नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने सेट पर मौजूद टीम से कोई तात्कालिक मेडिकल सपोर्ट नहीं लिया और लगातार अपना काम करते रहे। उनकी यही लापरवाही बाद में उन पर भारी पड़ गई।

    हादसे के करीब 6 घंटे बीत जाने के बाद अभिनेता राजेश शर्मा को अपने दाएं पैर में असहनीय और तेज दर्द महसूस होने लगा, जिसके साथ ही उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। सेहत में आ रही इस गिरावट के बावजूद उन्होंने कोलकाता वापस लौटने के लिए फ्लाइट पकड़ी। हवाई सफर के दौरान ही उन्हें अत्यधिक तेज बुखार ने जकड़ लिया और शरीर में भारी बेचैनी होने लगी। अगले दिन सुबह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने पर उन्हें आनन-फानन में कोलकाता के ढाकुरिया स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनका तेज बुखार कम नहीं हो रहा है और उन्हें सांस लेने में भी भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश। अस्पताल से आ रही ताजा चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार, जहरीला इन्फेक्शन अब उनके दाएं पैर की उंगलियों से लेकर घुटने तक बहुत तेजी से फैल चुका है। शरीर के जिस-जिस हिस्से में यह जहर और संक्रमण पहुंच रहा है, वहां त्वचा पर बड़े-बड़े और दर्दनाक छाले पड़ गए हैं। मुख्य चिकित्सक डॉ. अविजित भट्टाचार्य और उनकी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार अभिनेता की स्थिति को स्थिर करने के प्रयास में जुटी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजेश शर्मा खतरे से पूरी तरह बाहर हैं, क्योंकि संक्रमण के चलते उनके शरीर के भीतर ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) बनने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ये ब्लड क्लॉट्स खून के बहाव के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज़्म जैसी घातक स्थिति पैदा कर सकता है जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित होती है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और उनके पारिवारिक सदस्य लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सुदीपा चटर्जी की इस भावुक पोस्ट के वायरल होने के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सह-कलाकार, निर्देशक और फैंस राजेश शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने और उनके सुरक्षित दीर्घायु जीवन के लिए लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

  • ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440.42 करोड़ रुपये की राशि के लेन-देन पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के प्रवाह की जांच के तहत उठाया गया है। समाचार लिखे जाने तक इस कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17(1-ए) के तहत की गई है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान मिले प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर संबंधित बैंक खातों में मौजूद राशि के लेन-देन को फिलहाल प्रतिबंधित किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

    जांच के क्रम में ईडी ने कोलकाता स्थित कई परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इनमें केयरवेल समूह से जुड़े कार्यालय भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित एक अन्य कंपनी को स्थानांतरित किए गए। एजेंसी इन लेन-देन की प्रकृति, उद्देश्य और वैधानिक प्रक्रिया की जांच कर रही है।

    ईडी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी ने लगभग 82.96 करोड़ रुपये एक नवगठित कंपनी को हस्तांतरित किए। एजेंसी का दावा है कि इस नई कंपनी के खातों में बड़ी मात्रा में धनराशि पहुंची, जिसके उपयोग की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर धन के पूरे प्रवाह को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग एक बिजनेस जेट और एक हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी का दावा है कि बाद में इन विमानन परिसंपत्तियों का उपयोग किराये की सेवाओं के माध्यम से किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक स्तर पर अभी पुष्टि होना बाकी है और मामले की जांच जारी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमएलए के तहत की जाने वाली ऐसी कार्रवाई जांच के प्रारंभिक चरण का हिस्सा होती है और इसका उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय संपत्तियों तथा लेन-देन को सुरक्षित रखना होता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है। इसलिए किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर ही माना जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी वित्तपोषण से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच में जुटी हुई है, जबकि सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

  • पति के दबाव में मायके की संपत्ति मांगना भी माना जाएगा दहेज की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट की कानून की अहम व्याख्या

    पति के दबाव में मायके की संपत्ति मांगना भी माना जाएगा दहेज की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट की कानून की अहम व्याख्या

    नई दिल्ली । दहेज से जुड़े मामलों की कानूनी व्याख्या को और स्पष्ट करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि किसी महिला का अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगना उसका वैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि यह मांग पति या ससुराल पक्ष के दबाव, उत्पीड़न या मजबूरी के कारण की जाती है तो इसे दहेज की मांग माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की दहेज हत्या से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।

    यह फैसला वर्ष 2014 में हुई एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की मौत से जुड़े मामले में सुनाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि महिला अपने वैवाहिक जीवन के दौरान लगातार मानसिक दबाव और आर्थिक उत्पीड़न का सामना कर रही थी। जांच और गवाहों के आधार पर यह भी सामने आया कि महिला पर मायके से धन और पैतृक संपत्ति में हिस्से की राशि लाने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था।

    अदालत ने कहा कि महिला को अपने पैतृक अधिकार का दावा करने से कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि यह उसका कानूनी अधिकार है। हालांकि यदि पति इस अधिकार का इस्तेमाल अपने आर्थिक लाभ के लिए करवाने का दबाव बनाता है और महिला को मजबूर करता है कि वह मायके से संपत्ति या धन लेकर आए, तो ऐसी स्थिति सामान्य संपत्ति विवाद नहीं रह जाती, बल्कि दहेज की मांग की श्रेणी में आती है। अदालत ने माना कि कानून की व्यापक भावना भी इसी सिद्धांत का समर्थन करती है।

    सुनवाई के दौरान पति ने तर्क दिया कि उसकी पत्नी केवल अपने वैधानिक हिस्से की मांग कर रही थी, इसलिए इसे दहेज की मांग नहीं कहा जा सकता। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि महिला के भाई ने पहले ही पैतृक संपत्ति का एक हिस्सा बेचकर उसे धनराशि दी थी, लेकिन इसके बावजूद पति लगातार शेष संपत्ति से भी पैसा लाने के लिए दबाव बना रहा था। अदालत ने माना कि यही दबाव महिला की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण कारण बना।

    मामले में प्राथमिकी दर्ज होने में हुई देरी को लेकर भी पति की ओर से सवाल उठाए गए। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि किसी परिवार में अचानक हुई दुखद मृत्यु के बाद परिजन स्वाभाविक रूप से मानसिक आघात की स्थिति में होते हैं। ऐसे समय कानूनी सलाह लेकर शिकायत दर्ज कराना असामान्य नहीं माना जा सकता। केवल देरी के आधार पर शिकायत की विश्वसनीयता पर संदेह नहीं किया जा सकता।

    साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि सास-ससुर के विरुद्ध पर्याप्त और ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं थे। गवाहों के बयानों में भी उनकी प्रत्यक्ष भूमिका सिद्ध नहीं हो सकी। इसी आधार पर उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। वहीं पति के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया।

    हालांकि अदालत ने सजा के प्रश्न पर विचार करते हुए आजीवन कारावास को संशोधित कर दस वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। अदालत ने कहा कि दहेज हत्या के मामलों में आजीवन कारावास का प्रावधान अत्यंत गंभीर और दुर्लभ परिस्थितियों में लागू किया जाना चाहिए। इस निर्णय के साथ अदालत ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं के पैतृक संपत्ति संबंधी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन यदि उन अधिकारों का उपयोग ससुराल पक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए दबाव बनाकर कराता है, तो कानून उसे दहेज की मांग के रूप में देखेगा और उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • अमित शाह के कोलकाता दौरे से पहले बढ़ा सियासी तनाव, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के चबूतरे में तोड़फोड़ से गरमाया माहौल

    अमित शाह के कोलकाता दौरे से पहले बढ़ा सियासी तनाव, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के चबूतरे में तोड़फोड़ से गरमाया माहौल


    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी में एक संवेदनशील घटना सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मध्य कोलकाता के सुखिया स्ट्रीट क्षेत्र में हाल ही में स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के चबूतरे में तोड़फोड़ पाए जाने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पूरे मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर इस प्रतिमा की स्थापना हाल ही में की गई थी। प्रतिमा के चबूतरे पर नाम पट्टिका भी लगाई जा चुकी थी और स्थापना से जुड़ा कार्य शनिवार रात तक पूरा हो गया था। रविवार सुबह स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जब स्थल का निरीक्षण किया तो चबूतरे का निचला हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि घटना आधी रात के बाद हुई हो सकती है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है ताकि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए हैं और विभिन्न तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    घटना के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे गंभीर बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से संबंधित थाने में शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक स्मारकों के साथ इस प्रकार की तोड़फोड़ लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और जिम्मेदार लोगों की जल्द पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को कोलकाता पहुंचने वाले हैं। उनका दौरा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए निर्धारित है। कार्यक्रम के दौरान वह उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और बाद में न्यू टाउन स्थित इको पार्क में प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इसके बाद उनका जयंती समारोह में भाग लेने का कार्यक्रम तय है।

    भाजपा नेताओं ने इस दौरे को संगठन के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए व्यापक तैयारियां की हैं। पार्टी का कहना है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रतिमा का अनावरण और अन्य आयोजन भी प्रस्तावित हैं।

    फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और घटना की निष्पक्ष जांच पर केंद्रित है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान के लिए उपलब्ध सभी तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, अमित शाह के प्रस्तावित दौरे और उससे जुड़े कार्यक्रमों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी और अधिक सख्त कर दी गई है।

  • कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय निर्माण कार्य जारी था और कई श्रमिक गोदाम के भीतर काम कर रहे थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    हादसा तारातला स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर ब्रेस ब्रिज के समीप हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचे का एक बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया। छत गिरते ही वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया गया। शुरुआती चरण में कई लोगों को मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिकों के अभी भी फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की सही संख्या का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी राहत कार्य में शामिल किया गया है। सेना के जवानों ने स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान की कमान संभाली है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा इकाइयों और पुलिस की विशेष टीमें लगातार मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। भारी लोहे के ढांचे और बीम हटाने के लिए क्रेन तथा अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है क्योंकि ढहे हुए हिस्से में बड़ी मात्रा में लोहे और निर्माण सामग्री का मलबा फैला हुआ है। ऐसे में फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने के लिए सावधानी बरती जा रही है। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती घंटों में बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने का प्रयास किया और राहत एजेंसियों के पहुंचने तक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

    प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्माणाधीन संरचना की छत अचानक क्यों गिरी और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है।

    फिलहाल बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे के नीचे अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए राहत कार्य देर रात तक जारी रह सकता है। इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ऋतब्रत बनर्जी को मिली राहत; ममता खेमे को झटका

    बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ऋतब्रत बनर्जी को मिली राहत; ममता खेमे को झटका

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने के निर्णय पर अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इस आदेश के साथ ही यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

    यह मामला उस समय अदालत पहुंचा था जब विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया में मूल राजनीतिक दल की अनुशंसा और संगठनात्मक स्थिति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इसी आधार पर अदालत से मांग की गई थी कि अंतिम निर्णय आने तक इस नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।

    मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी पक्षों पर विचार करने के बाद अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में नियुक्ति पर रोक लगाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। इसके परिणामस्वरूप विधानसभा अध्यक्ष का पूर्व निर्णय प्रभावी बना रहेगा।

    अदालत के आदेश से ऋतब्रत बनर्जी को बड़ी राहत मिली है। अब वे अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक विपक्ष के नेता के रूप में सदन के भीतर अपनी भूमिका जारी रख सकेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला विधानसभा की शक्ति संरचना और विपक्ष की रणनीति दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में नए समीकरण भी पैदा कर सकता है।

    हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों को विस्तृत हलफनामे और लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि अगली सुनवाई से पहले सभी संबंधित पक्ष अपने तर्क, दस्तावेज और कानूनी आधार रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। इसके बाद मामले के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी और अंतिम निर्णय की दिशा तय होगी।

    इस फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र और उनके प्रशासनिक निर्णय को भी फिलहाल कानूनी संरक्षण मिला है। अदालत के रुख से यह संकेत मिला है कि संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों में न्यायालय बिना विस्तृत सुनवाई के हस्तक्षेप करने से बचना चाहता है। यही कारण है कि अदालत ने अंतिम निर्णय से पहले यथास्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।

    राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति और विपक्षी खेमे के बीच पहले से जारी टकराव के बीच यह मामला केवल एक पद की नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियां, दलगत अधिकार, संसदीय परंपराएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई संवैधानिक प्रश्न भी शामिल हो गए हैं।

    फिलहाल सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां दोनों पक्ष अपने विस्तृत कानूनी तर्क अदालत के सामने रखेंगे। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य करते रहेंगे और विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय पूरी तरह लागू माना जाएगा।

  • ममता बनर्जी के लिए राहत या नई चुनौती? बागी सांसदों के विवाद पर 19 जून को ओम बिरला से मिलेंगे अभिषेक बनर्जी

    ममता बनर्जी के लिए राहत या नई चुनौती? बागी सांसदों के विवाद पर 19 जून को ओम बिरला से मिलेंगे अभिषेक बनर्जी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उथल-पुथल के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी में बढ़ती असहमति और बागी सांसदों के अलग रुख के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को 19 जून को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। इस मुलाकात को पार्टी के भीतर जारी संकट और उसके संभावित राजनीतिक प्रभावों के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

    हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों द्वारा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जताए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कुछ सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने का संकेत देते हुए एक अन्य क्षेत्रीय दल के साथ जुड़ने की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ाई है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

    लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अभिषेक बनर्जी को बुलाए जाने के पीछे मुख्य उद्देश्य पूरे मामले पर उनका पक्ष जानना और संसदीय स्थिति को स्पष्ट करना माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के बाद बागी सांसदों की स्थिति, संसदीय मान्यता और दलगत अधिकारों से जुड़े कई प्रश्नों पर तस्वीर साफ हो सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक दलों और पर्यवेक्षकों की नजरें अब इस मुलाकात पर टिकी हुई हैं।

    तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। संगठन के भीतर नेतृत्व शैली, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक रणनीति को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े दल में असहमति होना असामान्य नहीं है, लेकिन जब निर्वाचित जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपनाने लगें तो उसका असर संगठनात्मक एकता पर पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के मामले में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। ऐसे समय में पार्टी नेतृत्व के लिए संगठन को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन राजनीतिक दल पहले से ही अपनी रणनीतियों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में किसी भी बड़े दल के भीतर अस्थिरता विपक्षी दलों को राजनीतिक अवसर प्रदान कर सकती है।

    दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के समर्थक और नेता यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी संगठन मजबूत है और किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उनका कहना है कि नेतृत्व लगातार संवाद के जरिए स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहा है और जल्द ही सभी विवादों का समाधान निकल सकता है।

    अब राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 19 जून की बैठक के बाद स्थिति सामान्य होगी या फिर पार्टी के भीतर जारी मतभेद और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएंगे। फिलहाल सभी की निगाहें इस अहम मुलाकात और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

  • तृणमूल कांग्रेस में ऐतिहासिक बिखराव के बीच 65वें विधायक के पाला बदलने का दावा, दिल्ली से कोलकाता तक गहराया संकट

    तृणमूल कांग्रेस में ऐतिहासिक बिखराव के बीच 65वें विधायक के पाला बदलने का दावा, दिल्ली से कोलकाता तक गहराया संकट

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे गंभीर और अभूतपूर्व आंतरिक राजनीतिक संकट से जूझ रही है। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक पार्टी के भीतर मची रार अब पूरी तरह खुलकर सामने आ चुकी है। पार्टी के भीतर से शुरू हुई असंतोष की चिंगारी अब एक बड़े सियासी विस्फोट का रूप ले चुकी है, जिसने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक किले की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। विधानसभा से लेकर संसद के दोनों सदनों तक तृणमूल कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों का टूटना लगातार जारी है।

    कोलकाता से आ रही ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों की संख्या अब बढ़कर 65 के आंकड़े को छूने की तैयारी में है। इस पूरे विद्रोह की कमान संभाल रहे निष्कासित नेता रिताब्रता बनर्जी ने दावा किया है कि उनके खेमे में असंतुष्ट जनप्रतिनिधियों का आंकड़ा लगातार मजबूत हो रहा है। शुरुआत में केवल 58 विधायकों के साथ शुरू हुई यह बगावत अब धीरे-धीरे बढ़ते हुए 60 के पार जा चुकी है और हाल ही में एक और विधायक के हस्ताक्षर होने के बाद यह संख्या 65 तक पहुंच गई है। हालांकि बागी गुट ने अभी तक इस नए सदस्य के नाम का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच कोलकाता के सियासी गलियारों में उस समय हलचल काफी तेज हो गई जब ममता बनर्जी के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाने वाले कोलकाता पोर्ट से विधायक फिरहाद हाकिम ने विधानसभा परिसर में रिताब्रता बनर्जी से सीक्रेट मीटिंग की। इस मुलाकात के तुरंत बाद ही बागी गुट की तरफ से संख्या बल बढ़ने का नया दावा सामने आया। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर कयासों का दौर जारी है कि क्या हस्ताक्षर करने वाले नए नेता खुद पूर्व मेयर ही हैं या फिर पर्दे के पीछे कोई और बड़ा चेहरा मौजूद है।

    घटनाक्रम केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कड़ियों को जोड़ने पर संकट और गहरा नजर आता है। सचिवालय और विधानसभा के सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मेयर हाकिम ने इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ भी एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक के बाद जब वे विधानसभा के लिए रवाना हुए, तब उनके ठीक पीछे बागी गुट के एक अन्य निष्कासित नेता संदीपन साहा की गाड़ी भी देखी गई। दोनों नेताओं का एक साथ विधानसभा में प्रवेश करना और फिर तृणमूल कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से लंबी चर्चा करना इस बात का साफ संकेत है कि पार्टी के भीतर कुछ बहुत बड़ा पक रहा है।

    इससे पहले तृणमूल कांग्रेस को देश की राजधानी दिल्ली में भी एक बड़ा और करारा झटका लग चुका है, जहां रविवार को लोकसभा के भीतर एक बड़ी टूट देखने को मिली थी। पार्टी की तेजतर्रार नेता सायोनी घोष के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए करीब 20 बागी लोकसभा सांसदों ने एक सामूहिक फैसला लेते हुए एनसीपीआई में अपने विलय की घोषणा कर दी थी। सांसदों के इस बड़े धड़े के अलग होने से संसद के निचले सदन में पार्टी की ताकत काफी कम हो गई है।

    संसदीय संकट केवल लोकसभा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई है। पार्टी के चार प्रमुख राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, कोयल मलिक, सुखेंदु शेखर रे और प्रकाश बरेक पहले ही बगावत का रास्ता अख्तियार करते हुए पार्टी आलाकमान से अपना नाता तोड़ चुके हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है, क्योंकि कई अन्य सांसद और विधायक भी मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं।

    फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है जहां दल-बदल और गुप्त बैठकों का दौर चौबीसों घंटे चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान ने न केवल राज्य सरकार के स्थायित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आने वाले दिनों में यह कानूनी और तकनीकी रूप से भी एक बड़ी लड़ाई का रूप ले सकता है। बागी गुट जिस तेजी से अपनी संख्या बढ़ा रहा है, उससे साफ है कि वे दल-बदल कानून के दायरे से बचने के लिए जरूरी कानूनी आंकड़े को जुटाने की हरसंभव कोशिश में लगे हुए हैं।

  • अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपनी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए जाने के खिलाफ सख्त कानूनी रुख अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया पर लगातार उनके खिलाफ की जा रही अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियों से आहत होकर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। सौरव गांगुली ने कोलकाता के ठाकुरपुकुर थाने में इस संबंध में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट फैलाकर आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी साख को धूमिल करने की गहरी साजिश रची जा रही है।

    पूर्व कप्तान द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में मुख्य रूप से ‘सौरव गांगुली फैंस’ (Sourav Ganguly Fans) नाम के एक बेहद लोकप्रिय फेसबुक पेज का विशेष उल्लेख किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस फेसबुक पेज पर वर्तमान में ३६ लाख से भी अधिक फॉलोअर्स जुड़े हुए हैं और इस मंच के संचालक इसे सौरव गांगुली का आधिकारिक फैन पेज होने का दावा करते हैं। शिकायत पत्र के मुताबिक, इसी बड़े मंच का दुरुपयोग करते हुए पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे पोस्ट पब्लिश किए जा रहे हैं, जो आम लोगों के बीच गांगुली की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। गांगुली ने अपनी शिकायत के साथ इस फेसबुक पेज के लिंक्स, कुछ स्क्रीनशॉट्स और इससे जुड़ी एक खेल वेबसाइट की अहम जानकारियां भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस प्रशासन से साझा की हैं।

    सार्वजनिक जीवन में आलोचना और व्यक्तिगत मानहानि के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए सौरव गांगुली ने अपने आवेदन में बेहद गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि लोगों की अलग-अलग राय होना और आलोचनाएं मिलना सार्वजनिक जीवन का ही एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। लेकिन, किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। गांगुली ने जोर देकर कहा है कि अपनी साख की रक्षा के लिए और इस तरह की भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आरोपियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाना बेहद अनिवार्य हो गया है।

    इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष की तरफ से शिकायत मिलने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, गांगुली की लिखित अर्जी के आधार पर संबंधित फेसबुक पेज के एडमिन और उससे जुड़े संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और साइबर सेल की मदद से पूरे मामले की गहनता से तकनीकी जांच की जा रही है। इस कानूनी विवाद के बीच, हाल ही में राजनीतिक गलियारों में उड़े एक बड़े बवंडर पर भी सौरव गांगुली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांगुली के जरिए सांसद यूसुफ पठान को इस्तीफा देने का संदेश भिजवाया था।

    इस पूरे सियासी विवाद को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए सौरव गांगुली और सांसद यूसुफ पठान दोनों ने ही इसे पूरी तरह से काल्पनिक, फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। पूर्व कप्तान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें ऐसा कोई भी संदेश देने के लिए कभी नहीं कहा गया और न ही उनकी इस विषय पर यूसुफ पठान से कोई बातचीत हुई है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम और सोशल मीडिया पेज के जरिए फैलाई जा रही नकारात्मकता के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि इस प्रतिष्ठित खिलाड़ी की मानहानि करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।