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  • रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान

    रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी लगातार नए इतिहास रच रहे हैं। काबो वर्डे के खिलाफ खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में मेसी ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम करते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना का वर्षों पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

    इस मुकाबले में मेसी ने अपना नौवां विश्व कप असिस्ट दर्ज किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड डिएगो माराडोना के नाम था जिन्होंने अपने विश्व कप करियर में आठ असिस्ट किए थे। मेसी अब नौ असिस्ट के साथ इस सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं और एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ गोल करने वाले खिलाड़ी ही नहीं बल्कि अपनी टीम के लिए मौके तैयार करने में भी सबसे आगे हैं।

    मेसी ने काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29वें मिनट में अर्जेंटीना के लिए पहला गोल भी दागा। लिसेंड्रो मार्टिनेज के बेहतरीन पास को उन्होंने शानदार तरीके से गोल में बदलकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। यह विश्व कप में उनके करियर का 20वां गोल भी रहा। इस उपलब्धि के साथ वह पहले ही विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के रूप में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

    मेसी ने इस टूर्नामेंट में एक और खास उपलब्धि भी हासिल की। वह फीफा विश्व कप इतिहास के पहले खिलाड़ी बन गए जिन्होंने लगातार आठ मुकाबलों में गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा वह दो अलग अलग विश्व कप संस्करणों में सात सात गोल करने वाले पहले फुटबॉलर भी बन चुके हैं। विश्व कप 2026 में भी वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे छह गोल के साथ उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी हैं।

    काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबला अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर थीं और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया। अतिरिक्त समय में मेसी के एक आक्रमण को रोकने की कोशिश में काबो वर्डे के खिलाड़ी डिने बोर्गस से आत्मघाती गोल हो गया जिसने मुकाबले का रुख बदल दिया। इसी गोल की बदौलत अर्जेंटीना ने रोमांचक मुकाबला 3-2 से जीतकर अगले दौर में जगह बनाई।

    विश्व फुटबॉल में लियोनेल मेसी का यह शानदार प्रदर्शन एक बार फिर उनकी महानता की पुष्टि करता है। लगातार रिकॉर्ड तोड़ते हुए वह न केवल अर्जेंटीना बल्कि विश्व फुटबॉल के इतिहास में अपने नाम को और अधिक सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा रहे हैं।

  • फीफा विश्व कप 2026 में एल्डोर शोमुरोदोव का बड़ा धमाका ग्रुप स्टेज के बेस्ट गोल की रेस में मेसी और विनीसियस को छोड़ा पीछे

    फीफा विश्व कप 2026 में एल्डोर शोमुरोदोव का बड़ा धमाका ग्रुप स्टेज के बेस्ट गोल की रेस में मेसी और विनीसियस को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में जहां दुनिया की नजरें लियोनेल मेसी किलियन एमबाप्पे एरलिंग हालंद और विनीसियस जूनियर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी हुई हैं वहीं उज्बेकिस्तान के कप्तान एल्डोर शोमुरोदोव ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया है। भले ही उज्बेकिस्तान की टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी लेकिन उसके कप्तान ने ऐसा गोल दागा जिसने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया। फीफा की ओर से आयोजित ग्रुप स्टेज गोल ऑफ द टूर्नामेंट की शुरुआती वोटिंग में शोमुरोदोव का गोल सबसे अधिक पसंद किया गया और उन्होंने मेसी तथा विनीसियस जूनियर जैसे सुपरस्टार खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया।

    डीआर कांगो के खिलाफ ग्रुप स्टेज के आखिरी मुकाबले में शोमुरोदोव ने बेहद कठिन कोण से शानदार लॉब शॉट लगाकर ऐसा गोल किया जिसे पूरे टूर्नामेंट के सबसे खूबसूरत गोलों में शामिल किया जा रहा है। इस गोल को फैंस से 36 प्रतिशत वोट मिले और वह पहले स्थान पर रहे। हैती के विल्सन इसिडोर 26.5 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि बोस्निया और हर्जेगोविना के केरिम अलाजबेगोविच को 24.9 प्रतिशत वोट मिले। इस नतीजे ने यह साबित कर दिया कि शानदार प्रदर्शन किसी बड़े नाम का मोहताज नहीं होता।

    31 वर्षीय एल्डोर शोमुरोदोव का जन्म उज्बेकिस्तान के छोटे से कस्बे जारकुरगान में हुआ था। विश्व कप से पहले उन्होंने कहा था कि वह इस टूर्नामेंट में अपने देश को नई पहचान दिलाना चाहते हैं। भले ही टीम नॉकआउट चरण तक नहीं पहुंच सकी लेकिन उनके इस शानदार गोल ने उज्बेकिस्तान को वैश्विक फुटबॉल मंच पर नई पहचान दिला दी है।

    फीफा ने गोल ऑफ द टूर्नामेंट चुनने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई है। सबसे पहले ग्रुप स्टेज के गोलों पर 48 घंटे तक फैंस से वोटिंग कराई गई। इसके बाद राउंड ऑफ 32 राउंड ऑफ 16 क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल के बाद भी इसी तरह मतदान होगा। टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद अंतिम वोटिंग के आधार पर पूरे विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ गोल चुना जाएगा।

    दूसरी ओर विश्व कप के 20वें दिन भी कई बड़े सितारों ने अपनी चमक बिखेरी। नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालंद ने आइवरी कोस्ट के खिलाफ निर्णायक गोल कर अपनी टीम को 2-1 से जीत दिलाई। इस जीत के साथ नॉर्वे पहली बार विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में जीत दर्ज कर राउंड ऑफ 16 में पहुंच गया जहां उसका सामना ब्राजील से होगा। हालंद ने इस टूर्नामेंट में अब तक हर मैच में गोल करने का अपना शानदार रिकॉर्ड भी कायम रखा है।

    उधर फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने स्वीडन के खिलाफ दो गोल दागकर अपनी टीम को 3-0 की शानदार जीत दिलाई। एमबाप्पे के विश्व कप करियर में अब 18 गोल हो चुके हैं और वह लियोनेल मेसी के 19 गोल के रिकॉर्ड से सिर्फ एक कदम दूर हैं। इसके साथ ही वह मौजूदा विश्व कप में गोल्डन बूट की दौड़ में भी सबसे आगे निकल चुके हैं। विश्व कप 2026 लगातार नए रिकॉर्ड शानदार मुकाबलों और यादगार गोलों का गवाह बन रहा है और एल्डोर शोमुरोदोव का यह गोल लंबे समय तक फुटबॉल प्रेमियों की यादों में दर्ज रहेगा।

  • 'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ

    'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। जर्मनी के पूर्व कप्तान और दिग्गज गोलकीपर ओलिवर कान का मानना है कि फुटबॉल इतिहास में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता दोबारा देखने को मिलना बेहद मुश्किल है। उनके अनुसार दोनों खिलाड़ियों ने लगभग दो दशकों तक लगातार एक-दूसरे को बेहतर बनने की प्रेरणा दी और अपने शानदार प्रदर्शन से विश्व फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कान ने कहा कि उनकी प्रतिस्पर्धा केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही बल्कि मैदान पर प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के दम पर इतिहास रचा गया।

    फीफा विश्व कप 2026 के दौरान विशेषज्ञ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे ओलिवर कान ने कहा कि मेसी और रोनाल्डो ने हर सीजन में एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा किया। यही वजह है कि दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों की सूची में अपना दबदबा बनाए रखा। कान के मुताबिक उनकी प्रतिद्वंदिता व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं आगे थी क्योंकि इसने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रशंसकों को लंबे समय तक रोमांचित किया।

    उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता लेकिन मेसी और रोनाल्डो ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से यह कर दिखाया। दोनों ने क्लब फुटबॉल में कई रिकॉर्ड बनाए और एक-दूसरे को लगातार चुनौती देते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए। कान का मानना है कि इसी कारण यह प्रतिद्वंदिता खेल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिस्पर्धाओं में गिनी जाएगी।

    ओलिवर कान ने अपने करियर के सबसे यादगार पल के रूप में 2002 फीफा विश्व कप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस टूर्नामेंट में जर्मनी को फाइनल तक पहुंचाना उनके जीवन का सबसे बड़ा अनुभव था। हालांकि फाइनल में हार का दर्द आज भी उनके मन में है क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप जीतना होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि गोलकीपर के रूप में गोल्डन बॉल जीतना उनके लिए गर्व की बात थी लेकिन यदि मौका मिले तो वह इस व्यक्तिगत सम्मान के बदले विश्व कप ट्रॉफी लेना पसंद करेंगे।

    दिग्गज गोलकीपर ने मौजूदा विश्व कप में खेल रहे युवा खिलाड़ियों और खासकर गोलकीपरों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। खिलाड़ियों को लगातार अपने खेल में सुधार करते रहना चाहिए और बड़े मंच पर दबाव से घबराने के बजाय उसका आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार विश्व कप ऐसा मंच है जहां पूरी दुनिया की नजर खिलाड़ियों पर होती है और कई बार एक पल या एक फैसला पूरे टूर्नामेंट का भविष्य तय कर देता है। इसलिए हर खिलाड़ी को हर क्षण पूरी एकाग्रता के साथ खेलना चाहिए।

    मेसी और रोनाल्डो को आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने क्लब फुटबॉल में वर्षों तक शानदार मुकाबले खेले और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए। हालांकि विश्व कप में दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ सके। माना जा रहा है कि फीफा विश्व कप 2026 दोनों दिग्गजों का आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजर एक बार फिर इन दोनों खिलाड़ियों पर रहेगी, जो अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर यादगार प्रदर्शन कर इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना सबसे धमाकेदार टूर्नामेंट 59वें मैच में टूटा सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अभी कई मुकाबले बाकी

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना सबसे धमाकेदार टूर्नामेंट 59वें मैच में टूटा सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अभी कई मुकाबले बाकी


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 ने गोलों के मामले में नया इतिहास रच दिया है। अमेरिका कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट ने अभी आधा सफर भी पूरा नहीं किया है लेकिन एक संस्करण में सबसे ज्यादा गोल होने का रिकॉर्ड पहले ही टूट चुका है। नए 48 टीमों वाले प्रारूप ने विश्व कप को पहले से अधिक रोमांचक बना दिया है और मैदान पर गोलों की लगातार बारिश देखने को मिल रही है।

    टूर्नामेंट के 59वें मुकाबले में अमेरिका और तुर्किये के बीच खेले गए मैच के दौरान विश्व कप का 173वां गोल दर्ज हुआ। इसके साथ ही कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में बने 172 गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया गया। इसके बाद गोलों की संख्या लगातार बढ़ती रही और अब तक कुल 177 गोल हो चुके हैं। खास बात यह है कि नॉकआउट चरण के कई बड़े मुकाबले अभी बाकी हैं जिससे यह आंकड़ा और आगे जाने की पूरी संभावना है।

    इस रिकॉर्ड के पीछे सबसे बड़ा कारण विश्व कप का नया प्रारूप माना जा रहा है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमों को शामिल किया गया है। इससे पहले 1930 से 2022 तक विश्व कप में 32 टीमें हिस्सा लेती थीं और कुल 64 मुकाबले खेले जाते थे। अब मैचों की संख्या बढ़कर 104 हो गई है जिससे खिलाड़ियों को गोल करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं और दर्शकों को अधिक रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं।

    इस विश्व कप में कई स्टार खिलाड़ियों ने भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पुर्तगाल के दिग्गज क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने उज्बेकिस्तान के खिलाफ गोल कर लगातार छह अलग अलग विश्व कप में गोल करने वाले पहले पुरुष फुटबॉलर बनने का गौरव हासिल किया। 41 वर्ष की उम्र में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी है।

    फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे ने भी अपनी शानदार फॉर्म बरकरार रखते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक छह बार किसी मैच में दो या उससे अधिक गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनके कुल विश्व कप गोलों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। वहीं अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी 18 गोल के साथ बेहतरीन लय में बने हुए हैं।

    ब्राजील के विनिसियस जूनियर भी गोल्डन बूट की दौड़ में मजबूती से शामिल हो गए हैं। स्कॉटलैंड के खिलाफ उनके दो गोलों ने ब्राजील को अगले दौर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नए प्रारूप के तहत हर टीम को ग्रुप चरण में कम से कम तीन मैच मिलने से खिलाड़ियों के पास बेहतर प्रदर्शन और अधिक गोल करने के अवसर भी बढ़ गए हैं।

    विश्व कप के इतिहास पर नजर डालें तो 1930 के पहले टूर्नामेंट में कुल 70 गोल हुए थे। इसके बाद 1998 और 2014 में 171 गोल तथा 2022 में 172 गोल का रिकॉर्ड बना था। अब 2026 विश्व कप ने इन सभी उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो फाइनल तक कुल गोलों की संख्या 200 के आंकड़े को भी पार कर सकती है। इससे यह विश्व कप गोलों और रोमांच दोनों के लिहाज से अब तक का सबसे यादगार संस्करण बनने की ओर बढ़ रहा है।

  • मिरोस्लाव क्लोस के सर्वकालिक महान रिकॉर्ड की मेसी ने की बराबरी, केन्सास सिटी में अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत के साथ फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज

    मिरोस्लाव क्लोस के सर्वकालिक महान रिकॉर्ड की मेसी ने की बराबरी, केन्सास सिटी में अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत के साथ फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज

    नई दिल्ली । वैश्विक फुटबॉल के महाकुंभ फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने एक नया और अभूतपूर्व इतिहास रच दिया है। अमेरिका के केन्सास सिटी में अल्जीरिया के खिलाफ खेले गए एक बेहद रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना के कप्तान ने अपने जादुई खेल का प्रदर्शन करते हुए शानदार हैट्रिक जमाई। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के दम पर अर्जेंटीना ने मुकाबले में 3-0 की एकतरफा और मजबूत बढ़त हासिल की। इसके साथ ही 37 वर्षीय दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के नाम अब फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में कुल 16 गोल दर्ज हो गए हैं, जो खेल जगत के सबसे बड़े मंच पर एक महारिकॉर्ड के रूप में स्थापित हो गया है।

    इस शानदार और अविस्मरणीय हैट्रिक के साथ ही लियोनेल मेसी ने जर्मनी के पूर्व दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोस के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है, जो लंबे समय से अटूट माना जा रहा था। क्लोस ने साल 2002 से 2014 के बीच चार विश्व कप संस्करणों के कुल 24 मैचों में 16 गोल दागे थे। अब मेसी और क्लोस संयुक्त रूप से फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस सूची में ब्राजील के महान खिलाड़ी रोनाल्डो 15 गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि जर्मनी के गेर्ड मुलर और फ्रांस के युवा स्टार किलियन एमबाप्पे 14-14 गोल के साथ क्रमशः अगले पायदानों पर काबिज हैं।

    यह मेसी के लंबे और सुनहरे अंतरराष्ट्रीय करियर का एक अनूठा मोड़ है, क्योंकि उनके पांच विश्व कप संस्करणों के सफर में यह पहली बार है जब उन्होंने विश्व कप के किसी एकल मैच में हैट्रिक लगाई है। इसके साथ ही मेसी दुनिया के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं जिन्होंने पांच अलग-अलग विश्व कप टूर्नामेंटों में गोल करने का गौरव हासिल किया है। इस मामले में उन्होंने पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो के रिकॉर्ड की बराबरी की है। मैच के दौरान मेसी का दबदबा इस कदर था कि विरोधी टीम के गोलकीपर लुका जिदान उनके प्रहारों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए।

    मैच में मेसी के गोल करने का सिलसिला एक बेहद सटीक और पावरफुल शॉट के साथ शुरू हुआ, जिसे रोकने में विपक्षी गोलकीपर नाकाम रहे। इसके बाद दूसरा गोल तब देखने को मिला जब एलेक्सिस मैक एलिस्टर के एक जोरदार शॉट को अल्जीरियाई गोलकीपर नियंत्रित नहीं कर सके और रिबाउंड पर मुस्तैद खड़े मेसी ने गेंद को जाल में धकेलने में कोई चूक नहीं की। हैट्रिक को पूरा करने वाला तीसरा गोल पूरी तरह से मेसी के पारंपरिक और सिग्नेचर स्टाइल का नमूना था। पेनल्टी एरिया के कोने पर निको गोंजालेज से मिले पास को इंटर मियामी के इस स्टार खिलाड़ी ने अपने बाएं पैर के बाहरी हिस्से से नियंत्रित किया और बॉक्स के बाहर से एक ऐसा घुमावदार शॉट लगाया कि गेंद सीधे गोलपोस्ट के निचले बाएं कोने में समा गई।

    इस शानदार प्रदर्शन के बाद जब मैच के 79वें मिनट में कोच ने रणनीति के तहत लियोनेल मेसी को मैदान से बाहर बुलाने का निर्णय लिया, तो स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से अपने चहेते खिलाड़ी का अभिवादन किया। साल 2006 में अपने विश्व कप सफर की शुरुआत करने वाले मेसी अब तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 27 मैच खेलने वाले खिलाड़ी भी बन चुके हैं। अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में जन्मे और बचपन से ही फुटबॉल को अपनी जिंदगी मानने वाले मेसी अब इतिहास का इकलौता सबसे सफल विश्व कप फुटबॉलर बनने के वैश्विक रिकॉर्ड से महज एक गोल दूर हैं। आने वाले मैचों में एक और गोल करते ही वे क्लोस को पीछे छोड़कर फुटबॉल के स्वर्णिम इतिहास में अकेले शीर्ष पर विराजमान हो जाएंगे।

  • फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बॉल की जंग में मेसी, एमबाप्पे और यमाल आमने-सामने, कौन बनेगा टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी?

    फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बॉल की जंग में मेसी, एमबाप्पे और यमाल आमने-सामने, कौन बनेगा टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी?


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 का आगाज होते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें सिर्फ ट्रॉफी पर ही नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत सम्मान ‘गोल्डन बॉल’ पर भी टिक गई हैं। यह पुरस्कार विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है और इसके लिए हर बार दुनिया के सबसे बड़े सितारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। इस बार भी अनुभवी दिग्गजों और युवा प्रतिभाओं के बीच रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है।

    गोल्डन बॉल के प्रमुख दावेदारों में सबसे चर्चित नाम अर्जेंटीना के कप्तान लियोनल मेसी का है। 39 वर्षीय मेसी पहले ही दो बार यह सम्मान जीतकर इतिहास रच चुके हैं। 2022 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर अर्जेंटीना को चैंपियन बनाने वाले मेसी अब अपने करियर के अंतिम विश्व कप में एक और यादगार उपलब्धि हासिल करने की कोशिश करेंगे। क्लब फुटबॉल में भी उनकी फॉर्म प्रभावशाली रही है, जिससे उनके समर्थकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

    स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल को इस विश्व कप का सबसे बड़ा उभरता चेहरा माना जा रहा है। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रमण में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता उन्हें गोल्डन बॉल की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाती है। यदि स्पेन टूर्नामेंट में गहरी छाप छोड़ता है, तो यमाल इतिहास रच सकते हैं।

    फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे भी इस सूची में बेहद मजबूत दावेदार हैं। 2022 विश्व कप फाइनल में हैट्रिक लगाने वाले एमबाप्पे पहले ही विश्व कप इतिहास के सबसे खतरनाक गोल स्कोररों में गिने जाने लगे हैं। उनकी गति, तकनीक और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें हर टूर्नामेंट में खास बनाती है।

    इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन भी बेहतरीन फॉर्म में विश्व कप में उतर रहे हैं। क्लब स्तर पर लगातार गोल करने वाले केन के कंधों पर इंग्लैंड को लंबे समय बाद विश्व चैंपियन बनाने की जिम्मेदारी होगी। यदि इंग्लैंड खिताब जीतने में सफल रहता है तो केन का नाम गोल्डन बॉल की दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे सकता है।

    ब्राजील के स्टार विंगर विनीसियस जूनियर से भी काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। क्लब फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह अभी तक विश्व मंच पर अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा सके हैं। हालांकि नए माहौल और अनुभवी मार्गदर्शन में वह ब्राजील के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

    वहीं, पुर्तगाल के महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 41 वर्ष की उम्र में अपने छठे विश्व कप में हिस्सा लेने जा रहे रोनाल्डो के पास इतिहास रचने का अवसर है। यदि वह पुर्तगाल को पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में सफल रहते हैं, तो यह फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक होगी।

    इन छह बड़े नामों के अलावा एरलिंग हालंद, केविन डी ब्रुइन, जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज, लुइस डियाज और माइकल ओलिसे जैसे खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन से गोल्डन बॉल की दौड़ को रोमांचक बना सकते हैं। कुल मिलाकर विश्व कप 2026 में न केवल खिताब की लड़ाई दिलचस्प होगी, बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने की प्रतिस्पर्धा भी प्रशंसकों को रोमांचित करेगी।

  • FIFA World Cup के सबसे घातक स्ट्राइकर, जिनके गोल आज भी रिकॉर्ड हैं

    FIFA World Cup के सबसे घातक स्ट्राइकर, जिनके गोल आज भी रिकॉर्ड हैं


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन 11 जून से USA, कनाडा और मैक्सिको में संयुक्त रूप से होने जा रहा है। यह टूर्नामेंट फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े आयोजनों में से एक होगा, जहां एक बार फिर दुनिया की नजरें दिग्गज खिलाड़ियों पर होंगी।

    लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के इस वर्ल्ड कप को आखिरी माना जा रहा है, जिससे टूर्नामेंट और भी ऐतिहासिक बन जाता है। वहीं डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना एक बार फिर खिताब बचाने उतरेगी।

    1. मिरोस्लाव क्लोस – 16 गोल (सबसे ऊपर)
    जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोस वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2002 से 2014 के बीच 4 वर्ल्ड कप में 24 मैच खेलकर 16 गोल किए। उनकी खासियत रही लगातार प्रदर्शन, जिसमें 2002 और 2006 में 5-5 गोल शामिल हैं। यह रिकॉर्ड अब तक कोई नहीं तोड़ सका है।

    2. रोनाल्डो (ब्राजील) – 15 गोल
    रोनाल्डो, जिन्हें “फेनोमेनन” कहा जाता है, ने 1994 से 2006 के बीच 19 मैचों में 15 गोल किए। 2002 का वर्ल्ड कप उनके करियर का स्वर्णिम अध्याय रहा, जहां उन्होंने 8 गोल दागकर ब्राजील को चैंपियन बनाया।

    3. जस्ट फॉन्टेन – 13 गोल (एक टूर्नामेंट में रिकॉर्ड)
    जस्ट फॉन्टेन ने 1958 वर्ल्ड कप में इतिहास रच दिया। उन्होंने सिर्फ 6 मैचों में 13 गोल दागे, जो किसी एक संस्करण में सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड है। यह उपलब्धि आज भी लगभग अटूट मानी जाती है।

    4. लियोनेल मेसी – 13 गोल
    लियोनेल मेसी ने 2006 से 2022 तक वर्ल्ड कप में 13 गोल किए। 2022 का वर्ल्ड कप उनके करियर का सबसे यादगार टूर्नामेंट रहा, जहां उन्होंने 7 गोल करते हुए अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया।

    5. किलियन एमबाप्पे – 12 गोल (और बढ़ रहा है)
    किलियन एमबाप्पे ने अब तक सिर्फ 14 मैचों में 12 गोल दागे हैं। 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन शानदार रहा, खासकर 2022 में उन्होंने 8 गोल कर गोल्डन बूट अपने नाम किया और फाइनल में हैट्रिक लगाई।

     गोलों की रफ्तार ही बनाती है दिग्गज
    वर्ल्ड कप इतिहास में ये खिलाड़ी सिर्फ गोल स्कोरर नहीं बल्कि मैच विनर रहे हैं। 2026 वर्ल्ड कप में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एमबाप्पे या कोई नया स्टार इस रिकॉर्ड लिस्ट को बदल पाता है या नहीं।

  • लियोनेल मेसी के इंडिया टूर पर हुआ 100 करोड़ रुपये खर्च आयोजक ने खोला खर्च का पूरा विवरण

    लियोनेल मेसी के इंडिया टूर पर हुआ 100 करोड़ रुपये खर्च आयोजक ने खोला खर्च का पूरा विवरण


    कोलकाता । अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के हाल ही में भारत दौरे पर 100 करोड़ रुपये का खर्च हुआ जिसे लेकर अब कई अहम खुलासे हुए हैं। इस खर्च में से 89 करोड़ रुपये मेसी की फीस थी जबकि 11 करोड़ रुपये भारत सरकार को टैक्स के रूप में दिए गए। इस राशि को लेकर आयोजक सताद्रू दत्ता ने जांच एजेंसियों के सामने कई अहम बातें साझा की हैं।

    न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दत्ता ने एसआईटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को बताया कि मेसी के इंडिया टूर के दौरान कुल 100 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस रकम में से 30 प्रतिशत स्पॉन्सर से मिला जबकि बाकी 30 प्रतिशत टिकटों की बिक्री से जुटाए गए थे। एसआईटी द्वारा दत्ता के बैंक खातों की जांच के बाद उनके अकाउंट में 20 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिली जो कथित तौर पर कोलकाता और हैदराबाद में आयोजित मेसी के इवेंट के टिकटों की बिक्री और स्पॉन्सरशिप से आई थी।

    सताद्रू दत्ता जो मेसी के इवेंट्स के प्रमुख आयोजक थे को गिरफ्तार कर लिया गया था। एसआईटी के अधिकारियों ने शुक्रवार को दत्ता के घर पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। दत्ता ने जांचकर्ताओं से कहा कि इवेंट के दौरान मेसी के प्रति सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए गए थे लेकिन बावजूद इसके भीड़ के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हुईं।

    कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में जब मेसी की उपस्थिति के दौरान हजारों दर्शक इवेंट में पहुंचे थे तब अफरातफरी का माहौल बन गया। फैंस की भीड़ इतनी बढ़ गई कि कई लोग मेसी के चारों ओर जमा हो गए जिससे वह गैलरी से मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। इसके परिणामस्वरूप कई दर्शकों ने स्टेडियम के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की। इस घटना ने पुलिस और आयोजकों को एक बड़ी चुनौती दी और सुरक्षा में चूक को लेकर कई सवाल उठाए।

    एसआईटी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस घटना की पूरी जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक टीम गठित की जिसमें पीयूष पांडे जावेद शमीम सुप्रतिम सरकार और मुरलीधर शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान यह देखा जा रहा है कि सुरक्षा में चूक आयोजकों की भूमिका और एक्सेस नियमों के उल्लंघन के पीछे कौन जिम्मेदार है।

    मेसी की सुरक्षा को लेकर दत्ता ने भी बयान दिया कि मेसी को छुआ या गले लगाया जाना पसंद नहीं आया और यह बात उनके सुरक्षा अधिकारियों ने आयोजकों को पहले ही बता दी थी। मेसी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेशी सुरक्षा अधिकारियों ने भी कई बार चेतावनी दी थी। दत्ता ने कहा भीड़ को रोकने के लिए कई बार पब्लिक अनाउंसमेंट किए गए लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। मेसी को इस तरह घेरने और गले लगाने का तरीका उनके लिए बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं था।

    इस दौरान एसआईटी अधिकारियों ने यह भी बताया कि दत्ता के बैंक खातों से जुड़ी रकम की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह रकम इवेंट्स से सही तरीके से जुटाई गई थी या इसमें कोई अनियमितता थी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से आयोजकों की जिम्मेदारी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • लियोनल मेसी ने GOAT इंडिया टूर के समापन पर भारत को धन्यवाद कहा फुटबॉल के भविष्य के प्रति जताई उम्मीद

    लियोनल मेसी ने GOAT इंडिया टूर के समापन पर भारत को धन्यवाद कहा फुटबॉल के भविष्य के प्रति जताई उम्मीद


    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के महानतम खिलाड़ियों में शामिल लियोनल मेसी ने अपने भारत दौरे के समापन पर एक भावुक संदेश साझा किया। अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर ने भारत के विभिन्न शहरों में अपने शानदार अनुभवों को साझा करते हुए देशवासियों का आभार व्यक्त किया। “नमस्ते इंडिया इस शब्द के साथ मेसी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश की शुरुआत की और भारत में बिताए गए समय को अविस्मरणीय बताया।

    दौरे की खासियतें

    लियोनल मेसी का GOAT इंडिया टूर भारत के चार प्रमुख शहरों – दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता में हुआ। इस दौरे ने भारत में फुटबॉल प्रेमियों के बीच एक नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। इन शहरों में मेसी को जहां जबरदस्त स्वागत मिला, वहीं उनकी यात्रा ने क्रिकेट और फुटबॉल के बीच एक अनोखा संबंध भी स्थापित किया। मेसी ने अपने दौरे के दौरान भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों से भी मुलाकात की, जिनमें क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव जय शाह और भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री शामिल थे। इन मुलाकातों ने मेसी के इस दौरे को और भी खास बना दिया।

    भारत में फुटबॉल का भविष्य

    मेसी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत में फुटबॉल के प्रति बढ़ता प्यार और फुटबॉल के प्रति लोगों का जुनून देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने भारत के फुटबॉल प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा यहां मिले प्यार और समर्थन को कभी नहीं भूलूंगा। मुझे यकीन है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

    भारत में फुटबॉल का महत्व

    भारत में फुटबॉल का इतिहास काफी लंबा और समृद्ध है लेकिन हाल के वर्षों में इस खेल के प्रति लोगों की रुचि में तेजी से वृद्धि हुई है। मेसी का दौरा इस बात का प्रतीक था कि भारत में फुटबॉल अब सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून बन चुका है। भारतीय फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह और मेसी के प्रति प्यार इसे साबित करता है। मेसी ने इस दौरे के दौरान भारतीय फुटबॉल का समर्थन करने और इसे बढ़ावा देने का वादा किया।

    भारत की मेहमाननवाजी ने किया भावुक

    मेसी ने अपनी यात्रा को एक व्यक्तिगत अनुभव के रूप में भी देखा, जहां उन्हें न सिर्फ फुटबॉल के प्रति भारतीयों का प्यार मिला बल्कि भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाजी का भी खास अनुभव हुआ। उन्होंने कहा, भारत में जितना प्यार और अपनापन मुझे मिला, वह किसी और देश में नहीं मिला। यह मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहेगा।

    लियोनल मेसी का GOAT इंडिया टूर भारत के फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना बन गया। मेसी का भारत में आना न केवल फुटबॉल के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कारण बना बल्कि इसने फुटबॉल और क्रिकेट के बीच की दूरी को भी खत्म किया। मेसी के इस दौरे से यह स्पष्ट है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य मजबूत और उज्ज्वल है और अब भारत में इस खेल को लेकर और भी ज्यादा उत्साह देखने को मिलेगा।

  • मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने हाल ही में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के GOAT टूर कार्यक्रम से जुड़ी घटनाओं को लेकर इस्तीफा दे दिया। मेसी के कार्यक्रम में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अराजकता और तोड़फोड़ के बाद बिस्वास पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने खुद को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया।

    बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

    इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।

    इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।