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  • मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने पर राजनाथ सिंह ने सवाल टाला, कारसेवकों पर गोलीबारी का भी उठा मुद्दा

    मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने पर राजनाथ सिंह ने सवाल टाला, कारसेवकों पर गोलीबारी का भी उठा मुद्दा

    नई दिल्ली ।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता की। इस दौरान उनसे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने के संबंध में सवाल पूछा गया। राजनाथ सिंह ने इस सवाल पर विस्तार से कुछ कहने के बजाय संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी और बातचीत समाप्त करते हुए धन्यवाद कहा।

    प्रेस वार्ता के आखिरी कुछ मिनटों में एक पत्रकार ने राजनाथ सिंह से सवाल किया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले व्यक्ति को पद्म पुरस्कार क्यों दिया गया। उस समय रक्षा मंत्री प्रेस वार्ता समाप्त कर वहां से निकलने की तैयारी में थे। हालांकि, सवाल सुनने के बाद वह दोबारा बैठ गए और पूरी बात सुनी। उन्होंने अपने पास बैठे उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से एक मिनट रुकने के लिए कहा।

    इसके बाद मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से जुड़े सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा, “चलिए देखते हैं। उसके कई कारण थे। बहुत-बहुत धन्यवाद।” उन्होंने पुरस्कार दिए जाने के कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। इस तरह प्रेस वार्ता में उनसे पूछा गया सवाल संक्षिप्त जवाब के साथ समाप्त हो गया।

    दरअसल, इसी प्रेस वार्ता में राजनाथ सिंह ने वर्ष 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े तीन घटनाक्रमों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल, वर्ष 1984 में सिख समुदाय के लोगों के नरसंहार और वर्ष 1990 में रामभक्तों पर गोली चलाए जाने के मुद्दे का जिक्र किया।

    राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 1990 में रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले को समर्थन देकर सरकार बचाई गई थी। उनका यह बयान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच पुराने राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में आया। इसी पृष्ठभूमि में मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से संबंधित सवाल भी प्रेस वार्ता के दौरान उठा।

    वर्ष 2008 में भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लेकर केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार संकट में आ गई थी। उस समय वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 22 जुलाई 2008 को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को समर्थन दिया।

    इस समर्थन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विश्वास मत हासिल करने में सफल रही।विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में 275 मत पड़े थे, जबकि विपक्ष को 256 मत मिले थे। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के समर्थन को केंद्र सरकार बचाने में महत्वपूर्ण माना गया था।

    उस समय मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस नीत गठबंधन की सरकार को समर्थन देने के पीछे भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को देशहित में बताया था। उन्होंने कहा था कि तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें समझौते के देश के हित में होने की जानकारी दी थी। इसी आधार पर समाजवादी पार्टी ने सरकार का समर्थन किया था।

    मुलायम सिंह यादव को वर्ष 2023 में सार्वजनिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके बेटे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान ग्रहण किया था। अब लखनऊ में राजनाथ सिंह से इसी सम्मान को लेकर पूछे गए सवाल ने मुलायम सिंह यादव, कारसेवकों पर गोलीबारी के पुराने विवाद और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • Ind vs WI : पहला टी-20 आज लखनऊ में…. टीम में संजू सैमसन को फिर मौका, वैभव सूर्यवंशी बाहर

    Ind vs WI : पहला टी-20 आज लखनऊ में…. टीम में संजू सैमसन को फिर मौका, वैभव सूर्यवंशी बाहर


    लखनऊ।
    आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 (Aichi-Nagoya Asian Games 2026) में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब टीम इंडिया (Team India) की नजरें वेस्टइंडीज (West Indies) के खिलाफ टी20 सीरीज (T20 Series) पर हैं. दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर (मंगलवार) को लखनऊ (Lucknow) के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से शुरू होगा।

    भारतीय टीम ने हाल ही में एशियन गेम्स के मेन्स क्रिकेट फाइनल में पाकिस्तान को हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. फाइनल में अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा ने बल्ले से अहम योगदान दिया था. वहीं शिवम दुबे ने ऑलराउंड खेल दिखाया था।


    कप्तान श्रेयस अय्यर पर बड़ी जिम्मेदारी

    टी20 सीरीज में श्रेयस अय्यर भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे. एशियन गेम्स में भी अय्यर की अगुवाई में भारत ने गोल्ड जीता था. अब उनकी कोशिश वेस्टइंडीज के खिलाफ भी जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने की होगी. हालांकि, वेस्टइंडीज को हल्के में नहीं लिया जा सकता. वनडे सीरीज में भारत ने 2-1 से जीत दर्ज की, लेकिन तीसरे वनडे में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी जीत हासिल की थी. ऐसे में कैरेबियाई टीम टी20 सीरीज में मजबूत वापसी करना चाहेगी।


    संजू-अभिषेक कर सकते हैं ओपनिंग

    पहले टी20 के लिए संभावित प्लेइंग-11 में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है. नंबर-3 पर ईशान किशन उतर सकते हैं. इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर और तिलक वर्मा मध्यक्रम को मजबूती देंगे. एशियन गेम्स के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करने वाले अभिषेक और तिलक पर एक बार फिर नजरें रहेंगी।


    शिवम दुबे और नीतीश रेड्डी देंगे ऑलराउंड विकल्प

    मध्यक्रम में शिवम दुबे और नीतीश कुमार रेड्डी टीम को बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी का विकल्प भी देंगे. वहीं अक्षर पटेल स्पिन ऑलराउंडर की भूमिका में नजर आ सकते हैं. गेंदबाजी में कुलदीप यादव मुख्य स्पिनर होंगे, जबकि तेज गेंदबाजी की कमान अर्शदीप सिंह संभाल सकते हैं. दूसरे तेज गेंदबाज के तौर पर प्रिंस यादव को मौका मिलने की संभावना है।


    कोच गंभीर का वैभव पर बड़ा बयान

    टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी के बारे में कहा, ‘वैभव बहुत प्रतिभाशाली हैं और अच्छी फॉर्म में हैं, लेकिन कभी-कभी आपको अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है क्योंकि हम ड्रेसिंग रूम में वह सुरक्षा का माहौल बनाना चाहते हैं।


    गोल्ड के बाद अब टी20 सीरीज पर नजर

    एशियन गेम्स में पाकिस्तान को हराकर गोल्ड जीतने के बाद टीम इंडिया के सामने अब नई चुनौती वेस्टइंडीज की है. लखनऊ में होने वाला पहला टी20 ना सिर्फ पांच मैचों की सीरीज का आगाज होगा, बल्कि गोल्ड मेडल मैच के बाद भारतीय टीम के नए अभियान की शुरुआत भी करेगा।


    पहले टी20 में भारत की संभावित प्लेइंग-11:
    संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव.


    पहले टी20 में वेस्टस्टइंडीज की संभावित प्लेइंग-11:
    शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), रोस्टन चेज, मैथ्यू फोर्ड, शिमरॉन हेटमायर, अकील हुसैन, गुडाकेश मोती, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, क्वेंटिन सैम्पसन, रोमारियो शेफर्ड और शमर स्प्रिंगर.

    भारत का फुल स्क्वॉड: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, नमन धीर, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और मयंक यादव।


    वेस्टइंडीज का स्क्वॉड:
    शाई होप (कप्तान), रोस्टन चेज, मैथ्यू फोर्ड, शिमरॉन हेटमायर, अकील हुसैन, आमिर जंगू, शमर जोसेफ, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल, कामिल पूरन, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, क्वेंटिन सैम्पसन, रोमारियो शेफर्ड और शमर स्प्रिंगर।


    टी20 सीरीज का फुल शेड्यूल

    पहला टी20: 6 अक्टूबर 2026 (लखनऊ)
    दूसरा टी20: 9 अक्टूबर 2026 (रांची)
    तीसरा टी20: 11 अक्टूबर 2026 (इंदौर)
    चौथा टी20: 14 अक्टूबर 2026 (हैदराबाद)
    पांचवां टी20: 17 अक्टूबर 2026 (बेंगलुरु)

  • मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका

    मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका


    नई दिल्ली ।
    बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों की पार्टी में भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है।

    मायावती ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपने अनुभवों और पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके मुताबिक राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए व्यक्ति को अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उनके अनुसार शोषित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाकर उसके हित और कल्याण को सुनिश्चित करना उनका प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य है। इसी उद्देश्य के तहत वह जरूरत पड़ने पर अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।

    आकाश आनंद को लेकर मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों को लेकर उन्होंने असहमति जताई। मायावती ने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण आकाश को कुछ समय पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।

    मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की संभावना से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें दोबारा पार्टी में जिम्मेदारी देना संगठन के हित में उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक आकाश और उनकी बहन दीपिका को अब पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में बदलाव नहीं किया जाएगा।

    दीपिका को लेकर मायावती ने कहा कि पहले उनके परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाने को लेकर उनके मन में दुविधा थी। लेकिन भविष्य में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण संगठन के सामने किसी तरह की परेशानी पैदा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीपिका को भी पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है।

    इसके स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई है। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से अब केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने भविष्य में कोई गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधि की, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी पार्टी में छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय संगठन में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी समर्पित और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

    अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और अपना जीवन बहुजन समाज के हित के लिए समर्पित किया।

    मायावती ने डॉ. आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पत्र में सार्वजनिक संपत्ति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के मामले में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर नियम और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है।

    मायावती ने बताया कि देश, जनहित और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन के काम में पूरी मजबूती और निष्ठा के साथ जुटने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • 2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख

    2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भविष्य की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि 2027 के चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की भूमिका क्या होगी और क्या वह राष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है।

    एक इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि 2027 के बाद वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में कहां देखते हैं और क्या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए जिम्मेदारी और देशहित सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी है, जिसे वह बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने पर है। उन्होंने राज्य के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। उनके जवाब में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी तरह की दावेदारी सामने नहीं आई। मुख्यमंत्री ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी को ही केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की सेवा और बेहतर शासन पर जोर दिया।

    2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर भी उनसे सवाल किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फैसला संगठन से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा समाज के हर वर्ग, जिले और परिवार तक पहुंचना जरूरी है। उनके अनुसार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग का विकास होना चाहिए और लोग राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकें, यह भी महत्वपूर्ण है।

    इंटरव्यू के दौरान अयोध्या के बाद काशी और मथुरा पर ध्यान केंद्रित किए जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा उत्तर प्रदेश की विरासत का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक विरासत का संरक्षण और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2021 में इसके उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। उनके अनुसार इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। नाव चलाने वालों, दुकानदारों, पुजारियों, ऑटो चालकों, होटल संचालकों और होम स्टे से जुड़े लोगों को इससे काम मिलने की बात उन्होंने कही।

    योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों के विकास को केवल आस्था से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि विरासत को संरक्षित करने के साथ विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    2027 के चुनाव से पहले योगी की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने भविष्य की किसी भूमिका का दावा नहीं किया। उन्होंने फिलहाल उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी, विकास और शासन व्यवस्था को ही अपनी प्राथमिकता बताया।

    इस तरह 2027 के बाद उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच योगी आदित्यनाथ का मौजूदा रुख उत्तर प्रदेश की सेवा और राज्य को आर्थिक, सामाजिक तथा प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

  • सांसद प्रिया सरोज से शादी करेंगे क्रिकेटर रिंकू सिंह…. लखनऊ में इस तारीख को लेंगे सात फेरे…

    सांसद प्रिया सरोज से शादी करेंगे क्रिकेटर रिंकू सिंह…. लखनऊ में इस तारीख को लेंगे सात फेरे…


    लखनऊ।
    क्रिकेटर रिंकू सिंह (Cricketer Rinku Singh) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सांसद प्रिया सरोज (MP Priya Saroj) की शादी की तारीख और स्थान तय हो गया है। इसके साथ ही शादी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर भी विराम लग गया है। खेल और राजनीति (Sports and Politics) के इस हाई प्रोफाइल गठबंधन का लंबे समय से प्रशंसकों और समर्थकों को इंतजार था। रिंकू और प्रिया सरोज लखनऊ में 4 दिसंबर को सात फेरे लेंगे। दोनों की सगाई भी लखनऊ में ही हुई थी। उस समय चर्चा थी कि शादी वाराणसी के होटल ताज में होगी। प्रिया सरोज के संसदीय क्षेत्र मछली शहर में वाराणसी जिले का पिंडरा विधानसभा क्षेत्र भी आता है।


    लखनऊ के होटल रमाडा में होगा आयोजन

    प्रिया के पिता जौनपुर के केराकत से विधायक और पूर्व सांसद तूफानी सरोज ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति से तारीख और स्थल तय कर लिया गया है। लखनऊ के रमाडा होटल में चार दिसंबर को भव्य आयोजन होगा। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। बनारस में करखियांव (कठेरवा) स्थित प्रिया के गांव में बने घर को सजाया संवारा जा रहा है।दोनों की सगाई भी लखनऊ के ही द सेंट्रम होटल में हुई थी।

    बताया जा रहा है कि दोनों परिवारों में शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। वीवीआईपी वेडिंग में क्रिकेट और राजनीति से जुड़े दिग्गजों के जमावड़े की उम्मीद है। प्रिया सरोज समाजवादी पार्टी की सांसद हैं तो उसके सभी सांसदों-विधायकों के रहने की तो पहले से ही उम्मीद है। रिंकू सिंह जिस कोलकाता राइडर के साथ खेलते हैं उस टीम के मेंबर के अलावा भारतीय टीम के भी तमाम खिलाड़ियों को न्योता देने की उम्मीद है।


    वाराणसी के बजाय क्यों लखनऊ

    रिंकू और प्रिया सरोज की सगाई राजधानी लखनऊ में ही हुई थी। ऐसे में उस समय चर्चा की थी शादी का आयोजन प्रिया सरोज के संसदीय क्षेत्र से जुड़ी धार्मिक नगरी वाराणसी में होगा। यहां के होटल ताज का नाम भी फाइनल बताया जा रहा था। लेकिन अब लखनऊ के होटल में आयोजन पर मुहर लग रही है। इसके पीछे क्रिकेट और राजनीति से जुड़ी हस्तियों के आने-जाने और सुरक्षा को प्राथमिकता को कारण बताया जा रहा है।


    यूपी के ही अलीगढ़ के रहने वाले हैं रिंकू सिंह

    क्रिकेटर रिंकू सिंह और प्रिया सरोज दोनों की यूपी के रहने वाले हैं। रिंकू सिंह अलीगढ़ के एक मध्यम परिवार से आते हैं। अपनी कड़ी मेहनत प्रतिभा के बल पर रिंकू सिंह ने भारतीय क्रिकेट टीम में जगह पक्की की और पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। उनकी गिनती शानदार फिनिशर के रूप में होती है। आईपीएल में हाथ से निकलते मैच में कोलाकाता नाईट राइडर के लिए एक ओवर में पांच लगातार छक्के मारकर रिंकू सिंह ने इतिहास रचा था।

    वहीं, प्रिया सरोज जौनपुर की केराकत सीट से तीन बार विधायक और मछली शहर से सांसद रहे तूफानी सरोज की बेटी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा ने प्रिया को मछली शहर से टिकट दिया और वह जीत हासिल कर सबसे कम उम्र की सांसदों में शामिल हो गईं।

  • इंडिगो उड़ान 6ई321 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरी, सीआईएसएफ जांच के बाद बम धमकी फर्जी निकली

    इंडिगो उड़ान 6ई321 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरी, सीआईएसएफ जांच के बाद बम धमकी फर्जी निकली

    नई दिल्ली ।लखनऊ से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की उड़ान 6ई321 में बम की धमकी मिलने से बुधवार को सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। विमान के बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इस धमकी की जानकारी सामने आई। इसके बाद तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान की व्यापक जांच की गई।

    फ्लाइट के बेंगलुरु पहुंचने के बाद विमान को सुरक्षित तरीके से उतारा गया और ग्राउंड स्टाफ की सहायता से सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने विमान की गहन तलाशी शुरू की।

    जांच प्रक्रिया में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और संबंधित सुरक्षा अधिकारियों ने विमान के विभिन्न हिस्सों की बारीकी से जांच की। सुरक्षा जांच के दौरान किसी तरह की संदिग्ध वस्तु अथवा विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके बाद बम की धमकी को फर्जी पाया गया।

    जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई। इस घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की। किसी भी संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए विमान और उससे जुड़े सामान की जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।

    महत्वपूर्ण बात यह रही कि धमकी का मामला लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान के रवाना होने के समय सामने नहीं आया था। यह जानकारी बेंगलुरु एयरपोर्ट पर विमान के पहुंचने के बाद मिली। इसलिए इस घटना का लखनऊ एयरपोर्ट के संचालन अथवा वहां की सुरक्षा व्यवस्था से सीधा संबंध नहीं बताया गया है।

    विमान में बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता यात्रियों और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। जांच के दौरान किसी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक के नहीं मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई और विमान को आगे की प्रक्रिया के लिए मंजूरी प्रदान की गई।

    विमानन क्षेत्र में बम की झूठी धमकियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती हैं। ऐसी सूचना मिलने पर वास्तविक खतरे की पुष्टि होने तक सुरक्षा एजेंसियों को निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इसके कारण यात्रियों और विमान संचालन पर अस्थायी असर पड़ सकता है।

    इससे पहले 18 अगस्त को भी इंडिगो की हैदराबाद से विशाखापत्तनम जाने वाली उड़ान 208 को बम की धमकी मिली थी। ईमेल के जरिए मिली सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुई थीं और विमान की व्यापक तलाशी ली गई थी। उस जांच में भी कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली थी।

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 पर भी बम संबंधी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी। एक यात्री द्वारा अपने बैग में बम होने की बात कहे जाने के बाद दिल्ली जाने वाली इंडिगो उड़ान को उड़ान भरने से पहले रोक दिया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने यात्री को विमान से उतारकर हिरासत में लिया था।

    लखनऊ-बेंगलुरु उड़ान की ताजा घटना में जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिलने से यात्रियों और विमान की सुरक्षा को लेकर तत्काल खतरा समाप्त हो गया। सुरक्षा एजेंसियां अब धमकी की सूचना के स्रोत और परिस्थितियों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

  • कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समझाई जिम्मेदारी

    कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समझाई जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार को लखनऊ स्थित अपने पुराने विद्यालय कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे। कभी जिस संस्थान में उन्होंने विद्यार्थी के रूप में शिक्षा हासिल की थी, वहीं लौटकर उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उनका अंदाज शिक्षक जैसा रहा और उन्होंने छात्रों को लोकतंत्र, चुनाव, मताधिकार तथा जिम्मेदार नागरिकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान हासिल करने की जगह नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उनके अनुसार, अच्छे शिक्षक, अनुशासन और विद्यालय का वातावरण विद्यार्थियों के सोचने और आगे बढ़ने के तरीके को प्रभावित करते हैं। उन्होंने अपने जीवन में विद्यालय से मिली सीख को भी याद किया।

    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूल और कॉलेज का समय जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में शामिल होता है। इसी दौरान व्यक्ति के विचार, व्यवहार और भविष्य की दिशा तय होने लगती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों की बातों और विद्यालय में मिलने वाले अनुभवों को गंभीरता से लें और उनसे सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें।

    विद्यार्थियों के साथ बातचीत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदान केवल संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी का माध्यम भी है। जागरूक और जिम्मेदार मतदाता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    ज्ञानेश कुमार ने विद्यार्थियों को मताधिकार से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले कई विद्यार्थी आने वाले वर्षों में पहली बार मतदान करने की उम्र में पहुंचेंगे। ऐसे में उनके लिए अभी से चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करना उपयोगी होगा।

    संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता बनने की पात्रता, मतदान और निष्पक्ष चुनाव से जुड़े सवाल पूछे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है।

    कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचने पर ज्ञानेश कुमार ने अपने पुराने दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उनका पुराना और गहरा संबंध रहा है। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया और अब लंबे अंतराल के बाद उसी विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच लौटना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।

    उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि जीवन के अलग-अलग चरण व्यक्ति को अलग-अलग अनुभव देते हैं। वर्तमान समय उनके लिए सीखने और अपने भविष्य की नींव मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विद्यालय से मिलने वाली शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, चुनौतियों का सामना करने का साहस और सही विचारों को अपनाने की क्षमता भी विकसित करती है।

    इस मुलाकात को ज्ञानेश कुमार ने अतीत और वर्तमान के बीच संवाद जैसा अनुभव बताया। एक समय वह स्वयं इसी विद्यालय के विद्यार्थी थे और अब उसी परिसर में विद्यार्थियों को लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में बता रहे थे। कार्यक्रम में चुनावी साक्षरता और जागरूक मतदाता बनने का संदेश प्रमुख रहा। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए युवा विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाने की यह पहल विशेष महत्व रखती है।

  • सीएम योगी ने जनता दर्शन में सुनीं लोगों की समस्याएं, गोपालन के लिए महिला को मदद और दिव्यांग को न्याय का भरोसा

    सीएम योगी ने जनता दर्शन में सुनीं लोगों की समस्याएं, गोपालन के लिए महिला को मदद और दिव्यांग को न्याय का भरोसा

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आयोजित जनता दर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनके समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान सीतापुर की रहने वाली पूनम देवी ने मुख्यमंत्री के सामने गोपालन के जरिए आत्मनिर्भर बनने की इच्छा जताई। उनकी मांग पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    सीतापुर के गुरुदेव नगर हरगांव की निवासी पूनम देवी ने जनता दर्शन में मुख्यमंत्री को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह गोपालन के माध्यम से अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहती हैं। उनके पास पहले से पांच गाय हैं और उन्होंने बताया कि अन्य गोवंश रखने के लिए उनके पास पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध है। उन्होंने सरकार से अतिरिक्त गाय उपलब्ध कराने की मांग रखी, ताकि दूध और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाई जा सके।

    पूनम देवी की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर मुख्य सचिव पशुधन को निर्देश दिया कि उन्हें नियमानुसार निराश्रित गाय उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। साथ ही मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोवंश की देखभाल के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी दिलाने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने महिला की गोपालन के प्रति रुचि और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।

    जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों से एक-एक करके उनकी समस्याएं पूछीं और प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। पूनम देवी से बातचीत के दौरान उन्होंने गोसेवा के महत्व का उल्लेख किया और कहा कि सरकार की ओर से उन्हें नियमानुसार योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। महिला ने अपनी मांग पर तत्काल संज्ञान लिए जाने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी जताया।

    इसी दौरान जनता दर्शन में पहुंचे एक दिव्यांग व्यक्ति ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री के सामने रखी। पीड़ित ने बताया कि उसकी जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है, जिसके कारण उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जमीन की जांच कराने और नियमानुसार समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता दर्शन में आने वाले लोगों की शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों की समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। जनता दर्शन में सामने आए मामलों में सरकारी योजनाओं का लाभ, भूमि विवाद और अन्य स्थानीय समस्याएं शामिल रहीं।

    इस दौरान मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में अनावश्यक देरी न हो और शिकायतों का समाधान संबंधित विभागों के स्तर पर प्रभावी ढंग से किया जाए। महिला की गोपालन संबंधी मांग और दिव्यांग की भूमि से जुड़े मामले में तत्काल निर्देश दिए जाने से जनता दर्शन में शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया पर प्रशासनिक सक्रियता का संदेश गया।

  • यूपी चुनाव से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दो दिवसीय दौरा, युवाओं और अधिकारियों के साथ होगी अहम चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दो दिवसीय दौरा, युवाओं और अधिकारियों के साथ होगी अहम चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां तेज होने लगी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल सोमवार से दो दिनों के लिए उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेगा। इस दौरान चुनावी व्यवस्था की तैयारियों को समझने के साथ मतदाताओं और युवाओं को मतदान प्रक्रिया की जानकारी देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दौरे के दौरान चुनाव से जुड़े अधिकारी भी निर्वाचन व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लखनऊ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इनमें छात्रों के साथ संवाद से लेकर चुनावी अधिकारियों के साथ बैठक और बूथ स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों से सीधी बातचीत शामिल है। कार्यक्रमों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ आम लोगों और विशेष रूप से युवा मतदाताओं को मतदान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है।

    ज्ञानेश कुमार लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई इसी कॉलेज से की थी। छात्रों के साथ संवाद के दौरान मतदान के महत्व, मतदाता बनने की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की जाएगी।

    इसके बाद इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चुनावी जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें ईएलसी 2.0 और ईसीआईनेट के बारे में जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 20 जिलों से चुनाव से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। इनमें लखनऊ के अलावा अयोध्या, कानपुर, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव सहित अन्य जिले भी शामिल हैं।

    ईएलसी यानी इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब की शुरुआत युवाओं को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी देने के उद्देश्य से की गई थी। अब इसके नए स्वरूप ईएलसी 2.0 के माध्यम से स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को चुनाव से जुड़ी जानकारी और अधिक आसान तरीके से उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल मतदान करने के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को समझाना भी है।

    लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में लाइव डेमो के माध्यम से मतदाता बनने, मतदान करने और मतगणना की प्रक्रिया समझाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए तीन स्टॉल लगाए जाएंगे। इनके जरिए विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी चुनाव की अलग-अलग प्रक्रियाओं को व्यावहारिक तरीके से समझ सकेंगे। ईएलसी को पूरे वर्ष सक्रिय रखने की योजना भी है, ताकि युवाओं को चुनावी जानकारी लगातार मिलती रहे।

    दौरे के दूसरे दिन 25 अगस्त को ज्ञानेश कुमार करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ से सीधे बातचीत करेंगे। बीएलओ मतदाता सूची से जुड़े काम, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाताओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके साथ संवाद के दौरान जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों और निर्वाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हो सकती है।

    इस दौरे में 20 जिलों के डिप्टी जिला चुनाव अधिकारी भी शामिल होंगे। इससे राज्य में चुनावी तैयारियों को लेकर विभिन्न स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत करने का अवसर मिलेगा। छात्रों, नए मतदाताओं और चुनावी कर्मचारियों के साथ संवाद के जरिए निर्वाचन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुगम और सहभागी बनाने पर जोर रहेगा।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की यह गतिविधि युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने और बूथ स्तर की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खास तौर पर ईएलसी 2.0 के माध्यम से नई पीढ़ी को मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं करीब 500 बीएलओ के साथ सीधा संवाद जमीनी स्तर की तैयारियों को समझने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

  • योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री और पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के पीडीए की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समय के साथ राजनीतिक रंग बदलने वाले लोग ‘पी’ की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले ‘पी’ को पिछड़े से जोड़ा गया, फिर पंडित से जोड़ा गया और एक दिन ऐसे लोग ‘पी’ की परिभाषा पाकिस्तान से भी करने लगेंगे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति और उसके पीडीए के दावे पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ विचार और परिभाषाएं बदलने वाले लोगों को जनता समझती है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के जीवन और सार्वजनिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का महत्व केवल उसके पद से निर्धारित नहीं होता। व्यक्ति अपनी सोच, कर्म, सिद्धांत और समाज के प्रति योगदान से बड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि अतरौली के सामान्य किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने संघर्ष और मेहनत के बल पर सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई।

    योगी ने बताया कि कल्याण सिंह ने किसान और शिक्षक के रूप में काम करने के बाद विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने उनके जीवन को सादगी, संघर्ष, तप और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में दबाव के बावजूद अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।

    मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के उस कथन को भी याद किया कि वह टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में इस विचार को व्यवहार में उतारा और गलत कार्यों के लिए किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया।

    राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन किया और ऐसी परिस्थितियों में भी अपने राजनीतिक निर्णयों पर कायम रहे, जब उन्हें सत्ता गंवाने का जोखिम उठाना पड़ा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कल्याण सिंह का योगदान और अधिक याद आता है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों की भूमिका रही और कल्याण सिंह भी इस आंदोलन के महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे।

    योगी ने कल्याण सिंह के निधन के समय की परिस्थितियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मौजूदगी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी थी, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की ओर से प्रत्यक्ष रूप से श्रद्धांजलि देने या संवेदना व्यक्त करने की पहल नहीं की गई। योगी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कल्याण सिंह का जीवन सामाजिक मूल्यों, सिद्धांतों और सनातन परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।