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  • लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे। उनके दौरे को वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति तथा संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

    लखनऊ पहुंचने पर नितिन नवीन का पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्ण स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनका स्वागत किया और राज्य में उनके आगमन पर शुभकामनाएं दीं। दौरे के दौरान पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है।

    भाजपा सूत्रों के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना और संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति तैयार करना है। पार्टी नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेकर भविष्य की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर भी विचार करेगा।

    अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी बैठक करेंगे। इसके अलावा उनकी प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्रियों, विधायकों तथा विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग चरणों में चर्चा प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिला इकाई प्रमुखों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ भी संवाद करेगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। भाजपा संगठन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

    दौरे के दौरान नितिन नवीन समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद का कार्यक्रम भी निर्धारित है। पार्टी का मानना है कि ऐसे संवादों से विभिन्न वर्गों के सुझाव प्राप्त होंगे और संगठन को व्यापक जनसंपर्क अभियान में मदद मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष का यह दौरा उत्तर प्रदेश में उनके हालिया दौरों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी वह राज्य के विभिन्न शहरों का दौरा कर संगठनात्मक बैठकों में भाग ले चुके हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार राज्य में संगठन की सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद पर जोर दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य होने के कारण भाजपा की चुनावी रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इन बैठकों से निकले निर्णय भाजपा की चुनावी रणनीति को और स्पष्ट कर सकते हैं।

  • उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को अपने पहले आधिकारिक दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचेंगे। हाल ही में घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला महत्वपूर्ण दौरा माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से इस प्रवास को संगठन की मजबूती, चुनावी रणनीति और सरकार-संगठन के बेहतर समन्वय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नितिन नवीन के कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा करना और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आवश्यक सुझावों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने, विभिन्न स्तरों पर संवाद को मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भाजपा नेतृत्व लंबे समय से संगठनात्मक समन्वय को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है और यह बैठक उसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी ने विभिन्न पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे के दौरान नई टीम के साथ बैठक कर संगठनात्मक कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों, संगठन मंत्रियों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से भी संवाद कर जमीनी स्तर की गतिविधियों और संगठन की सक्रियता का आकलन करेंगे।

    भाजपा नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी तैयारियों को केवल शीर्ष स्तर तक सीमित न रखकर बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर स्थानीय मुद्दों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन की कार्यप्रणाली पर फीडबैक प्राप्त करेंगे। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय और संगठित ढांचा चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के चुनावी अनुभवों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक रणनीति को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रत्येक स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा हो और संगठन के भीतर समन्वय तथा संवाद को लगातार बेहतर बनाया जाए। इसी कारण शीर्ष नेतृत्व स्वयं प्रदेश का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कर रहा है।

    नितिन नवीन के इस दौरे को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। संभावना है कि बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान, सरकार की योजनाओं के प्रभावी प्रचार और विपक्ष की राजनीतिक रणनीतियों के जवाब जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा उत्तर प्रदेश भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • बुढ़वा मंगल पर बजरंगबली को बेहद प्रिय हैं ये पांच विशेष चीजें, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत मिलने की है मान्यता

    बुढ़वा मंगल पर बजरंगबली को बेहद प्रिय हैं ये पांच विशेष चीजें, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत मिलने की है मान्यता

    नई दिल्ली । उत्तर भारत की सनातन धार्मिक परंपराओं में ज्येष्ठ महीने के मंगलवार का एक बेहद विशिष्ट और पावन महत्व माना गया है, जिन्हें आम बोलचाल में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से पुकारा जाता है। ज्येष्ठ महीना अब अपने समापन की ओर अग्रसर है और आज यानी १६ जून २०२६ को इस पावन महीने का सातवां बड़ा मंगल पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ मास के दौरान अधिकमास का विशेष संयोग बनने के कारण कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिसके चलते आज के सातवें बड़े मंगल का महत्व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कहीं अधिक बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर व्रत रखने और पूरी निष्ठा से संकटमोचन की उपासना करने से बजरंगबली अपने भक्तों पर अटूट कृपा बरसाते हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार, बड़े मंगल के दिन की गई पूजा न केवल जीवन के संकटों को टालती है, बल्कि इससे कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति भी बेहद मजबूत और शुभ होती है। इसके अतिरिक्त, जो जातक वर्तमान समय में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के बुरे दौर और कष्टों से गुजर रहे हैं, उनके लिए भी आज के दिन हनुमान जी की आराधना करना अचूक और राहत देने वाला माना गया है। इस पावन अवसर पर पूजा और आरती के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष और कल्याणकारी मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं, जिनमें सुबह ०५:४५ बजे से ०७:२५ बजे तक अमृत काल का श्रेष्ठ समय रहा, जबकि दोपहर ११:५० बजे से १२:४५ बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा और शाम को संध्या आरती के लिए ०६:३० बजे से ०७:४५ बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

    उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आस-पास के तमाम क्षेत्रों में बड़े मंगल के अवसर पर एक बहुत ही भव्य सांस्कृतिक व धार्मिक नजारा देखने को मिलता है। इस दिन जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन करने, भीषण गर्मी के इस मौसम में राहगीरों को ठंडा शरबत व पानी पिलाने तथा सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ करने की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। सुबह से ही तमाम प्रमुख हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और कीर्तन के कार्यक्रम अनवरत रूप से चल रहे हैं। धर्म-शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन बजरंगबली को उनकी कुछ बेहद प्रिय चीजें अर्पित करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

    शास्त्रों में वर्णित इन पांच प्रमुख चीजों में सबसे पहला स्थान लाल फूलों का है, जिसके तहत हनुमान जी को गुड़हल या गुलाब के लाल पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। दूसरी प्रमुख सामग्री चोला है, जिसमें चमेली के तेल में केसरिया सिंदूर मिलाकर प्रभु के चरणों से शुरुआत करते हुए चोला चढ़ाया जाता है और अंत में वही सिंदूर माथे पर लगाया जाता है। इसके अलावा, बजरंगबली को बनारसी पान पर कत्था, गुलकंद, सौंफ और इलायची रखकर मीठे पान का बीड़ा अर्पित करने से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ध्यान रहे कि इस पान में चूना या सुपारी बिल्कुल न हो। चौथी और पांचवीं चीज के रूप में हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू तथा आटे, शुद्ध घी और गुड़ से बने पारंपरिक चूरमे या मीठी रोटी का भोग लगाने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

  • UP में भी ट्विशा जैसा मामला…. लखनऊ में फांसी पर फंदे पर लटकी मिली नवविवाहिता …

    UP में भी ट्विशा जैसा मामला…. लखनऊ में फांसी पर फंदे पर लटकी मिली नवविवाहिता …


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से दिल दहला देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां ठाकुरगंज इलाके (Thakurganj area) में एक 29 साल की नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. सोमवार सुबह ससुराल में श्वेता सिंह नाम की महिला का शव फंदे से लटका मिला. घटना के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या का गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस ने मामले में पति, सास-ससुर समेत 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


    बीमार मां के देखकर गई थी श्वेता

    ठाकुरगंज के विश्वनगर मल्हाई टोला की रहने वाली श्वेता सिंह की शादी 22 नवंबर 2025 को काशी विहार निवासी शिवम सिंह उर्फ भूपेंद्र सिंह से हुई थी. भूपेंद्र एक लैब में काम करता है. श्वेता की मां सविता सिंह एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्हें देखने शनिवार रात श्वेता मायके आई थी और फिर ससुराल लौट गई. रविवार सुबह करीब 11 बजे अचानक मायके वालों को फोन आया कि श्वेता ने खुदकुशी कर ली है. भाई का कहना है कि जब तक वे मौके पर पहुंचे, ससुराल वाले शव को फंदे से उतारकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर ले जा चुके थे।


    विदाई में दामाद ने ससुर से पकड़वाए थे पैर

    श्वेता तीन बहनों में सबसे छोटी और सबकी लाडली थी. बहनों ने रोते हुए बताया कि अपनी हैसियत से बढ़कर धूमधाम से शादी की थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि 6 महीने में ही यह हश्र होगा. बड़ी बहन ने आरोप लगाया कि शादी के दिन ही दूल्हे भूपेंद्र ने दहेज की बड़ी मांग रख दी थी. जब मांग पूरी नहीं हो सकी, तो वह इतना नाराज हुआ कि विदाई के दौरान श्वेता को किसी से मिलने तक नहीं दिया. उस वक्त दामाद को समझाने के लिए श्वेता के बुजुर्ग पिता ने उसके पैर तक पकड़ लिए थे, लेकिन उसकी बेरहमी कम नहीं हुई।


    स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग कर रहे थे ससुराल वाले

    परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले लगातार श्वेता को कम दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे. पति भूपेंद्र लगातार मायके से मिले सोफे और बेड की निंदा करता था और दहेज में स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग कर रहा था।

    बहन ने बताया, 24 मई को जब श्वेता से मुलाकात हुई थी, तो उसके शरीर पर कोई चोट नहीं थी. लेकिन ट्रॉमा सेंटर में जब हमने उसकी लाश देखी, तो उसके पैरों पर गंभीर चोट और खून के निशान थे.” श्वेता की बहनों ने बताया कि सास और ननद भी उसे लगातार ताने देती थीं. जब श्वेता यह बातें बताती, तो परिजनों ने इसे आम घरेलू अनबन समझकर एडजस्ट करने को कहा, जिसका उन्हें अब बेहद अफसोस है।


    ननद लगाती थी ताने वाले स्टेटस

    श्वेता की बहनों ने ससुराल वालों की क्रूरता की कई और परतें खोलीं. उन्होंने बताया कि भूपेंद्र को श्वेता का जॉब करना पसंद नहीं था और शादी के दौरान उसने श्वेता की नौकरी छुड़वा दी थी. हालांकि, श्वेता दोबारा नौकरी करना चाहती थी ताकि अपने पैरों पर खड़ी हो सके. इसके अलावा, घर में जब भी विवाद होता, तो श्वेता की ननद व्हाट्सएप स्टेटस लगाकर उसे और उसके परिवार को नीचा दिखाती थी. छोटी बहन ने ननद के उन विवादित व्हाट्सएप स्टेटस के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं, जिसमें लिखा था- ‘जो खुद सूअर और सूअर जैसे खानदान में रही हो, उसे सब वैसे ही नजर आते हैं.’ एक अन्य स्टेटस में ननद ने लिखा था कि ‘जिन लड़कियों को सास-ससुर या ननद पसंद नहीं, वे अनाथालय में शादी करें।

    पति, सास-ससुर और देवर ननद पर मामला दर्ज
    इस पूरे मामले पर पुलिस एक्शन में आ गई है. डीसीपी पश्चिम कमलेश कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर और गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है. डीसीपी कमलेश कुमार ने बताया कि मृतका के परिवार के आरोपों पर पति भूपेंद्र सिंह, ससुर कौशलेंद्र सिंह, सास रचना सिंह, देवर बंटी सिंह और ननद प्रिया सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और जांच के बाद आगे की सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।

  • लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद

    लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद



    नई दिल्ली। एक बार फिर तनाव का कारण बन गया है। स्थानीय स्तर पर इस स्थल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिनकी वजह से इलाके में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाते हुए किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी है और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कुछ संगठनों ने इस विवादित स्थल पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन का ऐलान किया था। वहीं दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में बकरीद की नमाज को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बन गई थी। दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई और तत्काल प्रभाव से दोनों धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    स्थानीय स्तर पर यह विवाद काफी पुराना बताया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से एक प्राचीन किले का हिस्सा रहा है, जिसे बाद में धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया गया। वहीं दूसरी ओर कुछ समुदायों का दावा है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के कारण यहां समय-समय पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होती रही है।

    पिछले दिनों इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पासी समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने इसे महाराजा कंस पासी का प्राचीन किला बताते हुए ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में पुराने गजेटियर और स्थानीय परंपराओं का भी हवाला दिया। इसके बाद क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और प्रतीकात्मक आयोजनों को लेकर माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

    इसी विवाद के चलते पुलिस ने ‘लाखन आर्मी’ नामक संगठन के कुछ सदस्यों पर मामला दर्ज किया था, जिसके बाद संगठन ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन के प्रमुख ने आरोप लगाया है कि उनके समुदाय की ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और खुफिया इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना है और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि को रोकना है। साथ ही दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश भी की जा रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

    कसमंडी कला का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद न रहकर संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर प्रशासन की नजर लगातार बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी था।

  • मलिहाबाद आंधी-बारिश से दशहरी आम की पैदावार 60% घटी, इस साल ₹100-120 किलो तक पहुंचेंगे दाम

    मलिहाबाद आंधी-बारिश से दशहरी आम की पैदावार 60% घटी, इस साल ₹100-120 किलो तक पहुंचेंगे दाम




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र में इस साल मशहूर दशहरी आम की पैदावार पर मौसम की मार पड़ी है। आंधी और बेमौसम बारिश के कारण आम की फसल लगभग 60% तक कम हो गई है, जिससे बाजार में इस बार आम के दाम बढ़ने की संभावना है।

    किसानों के अनुसार इस बार केवल 40% पेड़ों पर ही फल आए हैं। पिछले साल जहां दशहरी आम 50-60 रुपए प्रति किलो तक बिकता था, वहीं इस साल इसके 100 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही आम का साइज भी सामान्य से छोटा रहने की संभावना है।

    किसानों को बड़ा नुकसान, एक्सपोर्ट पर भी असर
    मलिहाबाद के किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन कम होने के कारण वे विदेशों में आम निर्यात नहीं कर पाएंगे और केवल स्थानीय मंडियों में ही बिक्री करनी पड़ेगी। आमतौर पर यहां से 500 टन से अधिक आम दुबई, अमेरिका, जापान और अन्य देशों में भेजा जाता है, लेकिन इस बार निर्यात लगभग रुक गया है।

    किसानों का कहना है कि बागों में कई पेड़ों पर आम नहीं आए हैं। कुछ किसानों के अनुसार यह स्थिति हर साल रोटेशन के कारण भी होती है, जबकि कई बागों में रोग और मौसम की वजह से भी नुकसान हुआ है।

    ‘गोल्डन मैंगो’ बनाने के लिए विशेष पैकिंग
    कई बागों में आमों को विशेष लिफाफों से ढका जा रहा है, जिससे फल का रंग बेहतर आता है और बाजार में इसे ‘गोल्डन मैंगो’ के नाम से बेचा जाता है। हालांकि इससे लागत भी बढ़ गई है।

    वैज्ञानिकों ने बताई मौसम की वजह
    सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार बौर आने के समय कोहरा और उसके बाद हुई बेमौसम बारिश ने फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया। फूलों में नमी बैठने और सड़न की वजह से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

    कुछ क्षेत्रों में बेहतर फसल
    हालांकि मलिहाबाद में नुकसान के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों जैसे मेरठ और अमरोहा में चौसा और लंगड़ा आम की अच्छी पैदावार दर्ज की गई है।

    कुल मिलाकर इस साल दशहरी आम की कम आपूर्ति के कारण बाजार में दाम बढ़ना तय माना जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को महंगा आम खरीदना पड़ सकता है और किसानों को मिश्रित नुकसान-लाभ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

  • कोर्ट की सख्ती के बाद लखनऊ में सपा पार्षद को मिली शपथ, मेयर के अधिकार सीमित होने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज


    नई दिल्ली। लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे पार्षद शपथ विवाद का अंत आखिरकार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हो गया। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम प्रशासन ने सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को औपचारिक रूप से शपथ दिलाई। यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का भी बड़ा विषय बन गया था, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब निकाय चुनाव के परिणामों के बाद विजयी घोषित सपा पार्षद को शपथ दिलाने में देरी की गई। लगभग पांच महीने तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण मामला धीरे-धीरे अदालत तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जानबूझकर शपथ ग्रहण में देरी की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। मामला पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए।

    हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल शपथ दिलाने का आदेश दिया, बल्कि लखनऊ नगर निगम के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारों पर भी सख्ती दिखाई। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना जाएगा। इसी आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

    शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा पार्षद को पद की शपथ दिलाई। यह कदम न्यायालय के आदेश के अनुपालन के रूप में देखा गया, जिससे यह संदेश भी गया कि संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना संभव नहीं है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर चल रहे प्रशासनिक तनाव और राजनीतिक खींचतान को भी उजागर कर दिया है।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि 2023 के निकाय चुनावों से जुड़ी हुई है, जहां एक सीट पर चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अदालत ने अंतिम रूप से सपा प्रत्याशी को विजयी घोषित किया, लेकिन शपथ ग्रहण में देरी के कारण मामला फिर से विवादों में आ गया। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन दोनों पर प्रभाव डाला है।

    अब शपथ ग्रहण के बाद यह मामला औपचारिक रूप से समाप्त माना जा रहा है, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या हस्तक्षेप न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

  • लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि



    लखनऊ । लखनऊ में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी धार्मिक व प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। शहर में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जो 19 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कई तरह की गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेंगे और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बकरीद, बड़ा मंगल, मोहर्रम जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आने वाली प्रवेश परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
    लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
    आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
    निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
    लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
    ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • लखनऊ सैलून मैनेजर सुसाइड केस: रत्ना सिंह मामले में बड़ा एक्शन, मालिक की पत्नी मुंबई से गिरफ्तार

    लखनऊ सैलून मैनेजर सुसाइड केस: रत्ना सिंह मामले में बड़ा एक्शन, मालिक की पत्नी मुंबई से गिरफ्तार


    नई दिल्ली। लखनऊ में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह आत्महत्या मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया है। इस मामले में लगातार नए खुलासे और पुलिस कार्रवाई सामने आ रही है। गोरखपुर की रहने वाली 32 वर्षीय रत्ना सिंह लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित मानसून सैलून में मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी।

    आत्महत्या से पहले रत्ना सिंह ने 26 सेकंड का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने सैलून मालिक शरद सिंह, उनकी पत्नी पल्लवी जोशी समेत कुछ अन्य लोगों पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि रत्ना सिंह को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गईं और उन्होंने यह कदम उठाया। घटना के बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर न्याय की मांग की, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया।

    मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी शरद सिंह सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उनकी पत्नी पल्लवी जोशी को मुंबई से हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की पुष्टि की है और जांच जारी है।

    कार्रवाई के तहत संबंधित सैलून और उससे जुड़े प्रतिष्ठानों पर प्रशासन ने सीलिंग की कार्रवाई की है। साथ ही आरोपियों की संपत्तियों पर भी बुलडोजर एक्शन लिया गया है, जिससे पूरे इलाके में हलचल मच गई है।

    पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रत्ना सिंह पर लंबे समय से दबाव बनाया जा रहा था। वहीं अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस मामले में एक होटल मैनेजर को पहले ही देवरिया से गिरफ्तार किया जा चुका था।

    रत्ना सिंह के पिता रेलवे कर्मचारी हैं और परिवार का राजनीतिक व सामाजिक जुड़ाव भी बताया जा रहा है। परिजनों ने सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि उनकी बेटी को न्याय मिलना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है और सभी डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। यह मामला न केवल लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।