Tag: Lucknow

  • उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जननी सुरक्षा योजना के तहत सात लाख से अधिक प्रसव

    उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जननी सुरक्षा योजना के तहत सात लाख से अधिक प्रसव

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चल रही जननी सुरक्षा योजना का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से नौ अगस्त तक प्रदेश में 7,17,736 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं। योजना का उद्देश्य महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।

    जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सहायता 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये निर्धारित है। इस आर्थिक सहयोग का उद्देश्य प्रसव से जुड़े खर्चों में सहायता देना और महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक अप्रैल से नौ अगस्त के बीच दर्ज कुल 7,17,736 संस्थागत प्रसवों में से 5,43,661 लाभार्थियों को योजना की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इस तरह बड़ी संख्या में महिलाओं तक योजना का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा है। विभाग का जोर अब बाकी पात्र लाभार्थियों का भुगतान जल्द पूरा करने पर है।

    प्रदेश के कई जिलों में योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों को भुगतान पहुंचाने में बेहतर प्रदर्शन सामने आया है। हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, बागपत, जौनपुर, अम्बेडकरनगर और सोनभद्र में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान किया जा चुका है।

    पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में योजना की प्रगति से यह संकेत मिलता है कि संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, सुरक्षित प्रसव और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    सुरक्षित मातृत्व के लिए केवल अस्पताल में प्रसव कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रसव के दौरान जरूरी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध होना भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवाएं, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाएं जरूरत के अनुसार मिल सकती हैं। प्रसव के दौरान किसी जटिलता की स्थिति में समय पर पहचान और उपचार से मां तथा नवजात दोनों के स्वास्थ्य जोखिम को कम किया जा सकता है।

    इस व्यवस्था को मजबूत करने में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ये कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच के लिए प्रेरित करने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सिद्धार्थनगर, बहराइच और अलीगढ़ में लाभार्थियों के भुगतान की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। इन जिलों में 50 प्रतिशत या उससे कम भुगतान होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों को भुगतान में आ रही बाधाओं को दूर कर पात्र लाभार्थियों को शत प्रतिशत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की यह पहल मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। अस्पतालों में प्रसव बढ़ने से जटिल मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य योजना की पहुंच को और व्यापक बनाते हुए भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाना और सुरक्षित प्रसव की सुविधा को अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाना है।

  • नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना की, बोले पुलिस की आधुनिकता से लोगों का भरोसा और सुरक्षा बढ़ी

    नई दिल्ली । प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि इतने बड़े तथा विविधताओं वाले राज्य में प्रभावी कानून व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है।

    नाना पाटेकर ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। इसके लिए स्पष्ट नीति, मजबूत नेतृत्व और निर्णय लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति भी जरूरी है। उनके मुताबिक कानून व्यवस्था को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल किए जाने के सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पिछले कई दशकों के दौरान उत्तर प्रदेश को बदलते हुए देखा है। उनके अनुसार प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों के विश्वास में वृद्धि हुई है। प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव दिखाई देता है और सरकार के कामकाज में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है।

    नाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस को आधुनिक संसाधन और नई तकनीक उपलब्ध कराने के साथ उसके आत्मविश्वास को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस बदलती परिस्थितियों में अपराध से निपटने में अधिक सक्षम हो सकती है।

    उन्होंने पुलिस और नागरिकों की संयुक्त भूमिका पर भी जोर दिया। नाना पाटेकर ने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक और सक्षम होगी, नागरिकों की सुरक्षा उतनी बेहतर होगी। वहीं जागरूक नागरिक अपराधियों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। उन्होंने खासतौर पर साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को गंभीर चुनौती बताया।

    अभिनेता ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करके फोन अथवा वीडियो कॉल पर डराने की कोशिश करे और पैसे की मांग करे, तो लोगों को सावधान हो जाना चाहिए।

    नाना पाटेकर ने कहा कि साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत केवल तकनीक नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा किया गया डर है। इसी डर का फायदा उठाकर ठग लोगों से उनकी मेहनत की कमाई हासिल करने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो बातचीत में दबाव में आकर आर्थिक लेनदेन नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए तैयार की गई फिल्म की भी सराहना की। उनका कहना था कि अगर कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सके या किसी बुजुर्ग को साइबर ठगी का शिकार होने से रोका जा सके, तो यह समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा।

    नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। उनके पास फिल्मों की तरह गलती सुधारने या दोबारा प्रयास करने का अवसर नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश पुलिस आगे भी जनता के विश्वास को मजबूत बनाए रखेगी और प्रदेश को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी। उनके बयान के दौरान कानून व्यवस्था के साथ साइबर सुरक्षा और नागरिक जागरूकता को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा गया।

  • सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई खत्म, यूपी सरकार के अनुमति रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई खत्म, यूपी सरकार के अनुमति रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ी मानहानि शिकायत के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने लखनऊ की निचली अदालत से राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही मानहानि शिकायत और उससे जुड़े निचली अदालत के पुराने आदेशों को भी समाप्त कर दिया गया है।

    यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में दाखिल किए गए हलफनामे के बाद आया। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड उसके पास उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इसी तथ्य को कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार माना।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार का हलफनामा पीठ के सामने रखा गया। इसमें मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति के रिकॉर्ड के उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब आवश्यक अनुमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है, तो इस आधार पर निचली अदालत में आगे की आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा। इसके बाद पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन के साथ शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पहले पारित किए गए आदेशों को भी रद्द कर दिया।

    यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए एक बयान से संबंधित है। 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला जिले में यात्रा के दौरान आयोजित एक जनसभा में राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद इस मामले को लेकर विवाद खड़ा हुआ और उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दाखिल की गई।

    शिकायतकर्ता वकील नृपेंद्र पांडे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर के बारे में टिप्पणी कर उनका जानबूझकर अपमान किया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद लखनऊ की अदालत में मामले की कार्यवाही आगे बढ़ी और राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया गया।

    राहुल गांधी ने निचली अदालत की कार्रवाई और समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनके बयान को लेकर नाराजगी जताते हुए सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, उसी दौरान निचली अदालत से जारी समन पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दी गई थी।

    अब उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में आवश्यक अनुमति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की बुनियादी कानूनी स्थिति पर विचार किया। अदालत के ताजा आदेश के बाद इस शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ अदालत में चल रही संबंधित कार्यवाही समाप्त हो गई है।

    सावरकर से जुड़े बयानों को लेकर राहुल गांधी पहले भी राजनीतिक और कानूनी विवादों का सामना करते रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। हालांकि, अदालत की कार्रवाई का आधार राजनीतिक विवाद के बजाय मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित रिकॉर्ड का उपलब्ध नहीं होना रहा।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की घटनाएं सामने आने के बाद मरम्मत कार्य लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती 18 दिनों के भीतर कुल 84 स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की सतह बैठने, दरारें आने और पैचवर्क की आवश्यकता पड़ने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी सड़क दोबारा प्रभावित होने की जानकारी मिली है। कुछ हिस्सों में जलभराव और सड़क किनारे बने शोल्डर के धंसने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इसके चलते संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी और सुधार कार्य में लगी हुई हैं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने कंपनी को गैर-प्रदर्शन श्रेणी में रखते हुए उसके कुछ अधिकारियों को परियोजना से हटाने का निर्णय लिया है। साथ ही परियोजना की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी।

    सड़क निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक्सप्रेसवे पर इतने कम समय में बार-बार सड़क धंसने जैसी स्थिति सामने आती है तो निर्माण प्रक्रिया, मिट्टी की तैयारी, जल निकासी व्यवस्था और आधार परत की गुणवत्ता की गहन जांच आवश्यक हो जाती है। उनका कहना है कि यदि मूल संरचना में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी और प्रभावित हिस्सों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।

    यह एक्सप्रेसवे राज्य की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसकी कुल लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह प्रदेश की सबसे महंगी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस मार्ग के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करने तथा यातायात को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि शुरुआती दिनों में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    परियोजना का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा किया गया है। इस कंपनी को लेकर पहले भी विभिन्न मामलों में चर्चा होती रही है। हालांकि मौजूदा मामले में जांच का मुख्य केंद्र सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सड़क धंसने के पीछे निर्माण संबंधी कमी, मौसम, जल निकासी व्यवस्था या अन्य कोई तकनीकी कारण जिम्मेदार है।

    फिलहाल एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत कार्य जारी है और कुछ स्थानों पर यातायात को डायवर्जन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिल सके।

  • रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों की पहचान केवल युद्ध के मैदान में उनके साहस और पराक्रम से नहीं होती, बल्कि मानवीय सहायता, आपदा राहत और सेवा भावना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिक हमेशा लोगों की सहायता के लिए सबसे आगे रहते हैं। उनके अनुसार देश की सुरक्षा के साथ-साथ मानवता की सेवा भी भारतीय सेनाओं की मूल पहचान का हिस्सा है।

    रक्षा मंत्री ने लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल में देश के पहले समर्पित ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ की स्थापना के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। सियाचिन की अत्यधिक बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों की भीषण गर्मी तक, जवानों को अनेक प्रकार की शारीरिक और चिकित्सीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि कठिन तैनाती के दौरान सैनिकों को संक्रामक रोगों, अत्यधिक गर्मी और ठंड से होने वाली चोटों, अधिक ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों, थकान, पोषण संबंधी समस्याओं, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जूझना पड़ता है। उनका विश्वास है कि नया विभाग इन परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा, जिससे सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गई हैं। रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल खतरों जैसे नए जोखिम लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह विभाग इन उभरती चुनौतियों पर अनुसंधान और विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैन्य चिकित्सा सेवाओं की प्रतिष्ठा केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों में प्रमुख सैन्य योगदान देने वाले देशों में शामिल है। विदेशों में तैनात भारतीय सैन्य चिकित्सकों को भी विभिन्न प्रकार की चिकित्सा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे अनुभवों के आधार पर विकसित होने वाला यह विभाग भविष्य में वैश्विक स्तर पर भी सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान देने में सक्षम होगा।

    उन्होंने कहा कि कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ लंबे समय से सैन्य चिकित्सा, अनुसंधान और अनुशासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां के चिकित्सकों ने ‘ऑपरेशन विजय’ और कारगिल युद्ध जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। अब इसी संस्थान में स्थापित हो रहा ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूत करेगा।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला केवल आर्थिक और सामाजिक प्रगति नहीं होती, बल्कि उसकी सैन्य शक्ति और सैनिकों का मनोबल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जब कोई सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करता है, तो उसके पीछे ऐसा मजबूत स्वास्थ्य तंत्र होना चाहिए जो हर परिस्थिति में उसका साथ दे। उनके अनुसार यह नया विभाग इसी विश्वास को और मजबूत करेगा तथा सशस्त्र बलों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।

  • हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    नई दिल्ली । राजधानी के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र में यातायात पुलिस और विद्युत विभाग के कर्मियों के बीच हुआ विवाद अचानक एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल गया। समेसी उपकेंद्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का वाहन जांच के दौरान अनुपालन न करने पर छह हजार रुपये का चालान काट दिया गया था। इस कार्रवाई से नाराज विद्युत कर्मचारियों ने विभागीय बकाये के दस्तावेजों की तुरंत समीक्षा की और प्रक्रियागत नियमों का हवाला देते हुए संबंधित पुलिस परिसरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और कई घंटों तक थाने तथा आसपास की चौकियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा।

    प्राप्त विवरण के अनुसार विद्युत उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारी शाम के समय उच्च तनाव लाइन की नियमित गश्त के लिए निकले थे। इसी दौरान मार्ग पर चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते वाहन चालक कर्मचारी का भारी जुर्माना जमा करने का चालान जारी कर दिया। कर्मचारियों ने विभागीय परिचय पत्र देने का प्रयास किया लेकिन नियमों का हवाला देते हुए चालान की प्रति सौंप दी गई। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद कर्मचारियों ने दफ्तर पहुंचकर राजस्व बकाये की सूची निकाली जिसमें स्थानीय थाने और दो पुलिस बूथों पर लाखों रुपये का बिजली बिल लंबित पाया गया।

    विभाग के पुराने बकाये के आंकड़ों का आधार बनाकर शाम के समय ही नगराम थाने के साथ-साथ दो प्रमुख पुलिस चौकियों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। थाने पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक और दोनों चौकियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का राजस्व बिल बकाया दर्ज था। अचानक बिजली जाने और बैकअप व्यवस्था सीमित होने के कारण पुलिस परिसरों में अंधेरा छा गया। विभागीय कार्यों के निष्पादन में आ रही परेशानियों को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों को तत्काल पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित उपनिरीक्षक को फटकार लगाई गई और जारी किए गए चालान को नियमानुसार वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद संबंधित कर्मियों ने अपने संपर्क माध्यम बंद कर दिए थे, जिससे संवाद स्थापित करने में अधिकारियों को काफी समय लगा। प्रशासनिक स्तर पर वार्ता के बाद विद्युत उपकेंद्र से दूसरी तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने देर रात करीब साढ़े नौ बजे आपूर्ति बहाल कराई। लखनऊ में अंतर-विभागीय बकाये और चालान को लेकर इस तरह का तनाव पहले भी कई मौकों पर देखा गया है, जहां यातायात दंडात्मक कार्रवाई के जवाब में विद्युत बकाये पर तत्काल कनेक्शन काटने जैसे कदम उठाए गए। अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के निर्देश जारी किए हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    नई दिल्ली ।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद चुनाव सुधार और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने एक नई शुरुआत की है और भविष्य में यह अभियान चुनावी सुधार तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों तक भी पहुंचेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

    अखिलेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता और संघर्ष ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठी आवाज ने यह साबित किया है कि संगठित जनआंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके समर्थन में खड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी की मिसाल बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि अब संविधान में निहित अधिकारों को आधार बनाकर चुनाव सुधार और ईवीएम जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा और जनभागीदारी देखने को मिल सकती है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष भविष्य में इन विषयों को भी राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाएगा।

    अपने बयान में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    उन्होंने कानून व्यवस्था, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष इन विषयों को लगातार उठाता रहेगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के बीच विपक्ष शिक्षा, रोजगार और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों तथा चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं, न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होता है। फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान ने शिक्षा, चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में पेपर लीक की घटनाओं, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या से जोड़ते हुए केंद्र और संबंधित संस्थाओं से समयबद्ध तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण होने से स्थिति और जटिल बनती है तथा इसका सीधा असर आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं पर पड़ता है।

    मायावती ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की उम्मीदों को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि युवाओं के मन में गंभीर चिंता और असंतोष है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी और भरोसेमंद कार्रवाई के जरिए छात्रों का विश्वास बहाल करे।

    उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों का दायरा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक जनचर्चा का विषय बन गया है। उनके अनुसार, जब ऐसे मामलों पर राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से सक्रिय होते हैं तो मूल मुद्दे से ध्यान भटकने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम रखते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    बसपा प्रमुख ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवाद हों या भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियां, इन सभी के पीछे भ्रष्टाचार की समस्या एक साझा कारण के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।

    मायावती ने भ्रष्टाचार को देश की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह समाज और प्रशासन को भीतर से कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही सुशासन की सबसे बड़ी आधारशिला है। इसी संदर्भ में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के सुशासन और जवाबदेह प्रशासन संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनकी भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

    उन्होंने सरकार, प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें और जनता से जुड़े गंभीर मामलों में त्वरित तथा निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत सुधारों की भी आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    मायावती ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाने के बजाय संवाद और सहमति से समाधान खोजने का प्रयास होना चाहिए। उनका मानना है कि सड़क से लेकर संसद तक टकराव का माहौल बनने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से संयम बरतने तथा शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य, सार्वजनिक विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विषय पर संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित जवाहर भवन में सोमवार सुबह आग लगने की घटना से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सरकारी कार्यालयों वाली इस बहुमंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और राहत एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते पूरी इमारत को खाली कराया गया और सभी कर्मचारियों तथा अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। आग को फैलने से रोकने के लिए इमारत के विभिन्न हिस्सों को तत्काल खाली कराया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। राहत कार्य के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि भवन के भीतर कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए।

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटनास्थल की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि आग भवन की चौथी मंजिल पर स्थित कैंटीन क्षेत्र से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि दमकल विभाग ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

    जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सुबह लगभग 10 बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीमें बिना विलंब मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू कर दिया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन को खाली कराया गया और इमारत के अंदर मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार राहत अभियान के दौरान किसी व्यक्ति के अंदर फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई।

    फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए 10 से अधिक फायर टेंडरों की सहायता ली गई। दमकल कर्मियों ने समन्वित तरीके से काम करते हुए आग को अन्य मंजिलों तक फैलने से रोका। आग बुझने के बाद भवन के प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया गया ताकि किसी संभावित खतरे को समाप्त किया जा सके।

    घटना के बाद जवाहर भवन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और संबंधित विभागों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए। प्रशासन अब आग से प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच कराने के साथ-साथ भवन की सुरक्षा व्यवस्था का भी आकलन करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    जवाहर भवन में राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं, इसलिए घटना के बाद प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर राहत, सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया शुरू की। समय पर की गई कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के कारण एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा और आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।