Tag: Lucknow

  • हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    नई दिल्ली । राजधानी के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र में यातायात पुलिस और विद्युत विभाग के कर्मियों के बीच हुआ विवाद अचानक एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल गया। समेसी उपकेंद्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का वाहन जांच के दौरान अनुपालन न करने पर छह हजार रुपये का चालान काट दिया गया था। इस कार्रवाई से नाराज विद्युत कर्मचारियों ने विभागीय बकाये के दस्तावेजों की तुरंत समीक्षा की और प्रक्रियागत नियमों का हवाला देते हुए संबंधित पुलिस परिसरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और कई घंटों तक थाने तथा आसपास की चौकियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा।

    प्राप्त विवरण के अनुसार विद्युत उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारी शाम के समय उच्च तनाव लाइन की नियमित गश्त के लिए निकले थे। इसी दौरान मार्ग पर चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते वाहन चालक कर्मचारी का भारी जुर्माना जमा करने का चालान जारी कर दिया। कर्मचारियों ने विभागीय परिचय पत्र देने का प्रयास किया लेकिन नियमों का हवाला देते हुए चालान की प्रति सौंप दी गई। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद कर्मचारियों ने दफ्तर पहुंचकर राजस्व बकाये की सूची निकाली जिसमें स्थानीय थाने और दो पुलिस बूथों पर लाखों रुपये का बिजली बिल लंबित पाया गया।

    विभाग के पुराने बकाये के आंकड़ों का आधार बनाकर शाम के समय ही नगराम थाने के साथ-साथ दो प्रमुख पुलिस चौकियों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। थाने पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक और दोनों चौकियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का राजस्व बिल बकाया दर्ज था। अचानक बिजली जाने और बैकअप व्यवस्था सीमित होने के कारण पुलिस परिसरों में अंधेरा छा गया। विभागीय कार्यों के निष्पादन में आ रही परेशानियों को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों को तत्काल पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित उपनिरीक्षक को फटकार लगाई गई और जारी किए गए चालान को नियमानुसार वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद संबंधित कर्मियों ने अपने संपर्क माध्यम बंद कर दिए थे, जिससे संवाद स्थापित करने में अधिकारियों को काफी समय लगा। प्रशासनिक स्तर पर वार्ता के बाद विद्युत उपकेंद्र से दूसरी तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने देर रात करीब साढ़े नौ बजे आपूर्ति बहाल कराई। लखनऊ में अंतर-विभागीय बकाये और चालान को लेकर इस तरह का तनाव पहले भी कई मौकों पर देखा गया है, जहां यातायात दंडात्मक कार्रवाई के जवाब में विद्युत बकाये पर तत्काल कनेक्शन काटने जैसे कदम उठाए गए। अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के निर्देश जारी किए हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    नई दिल्ली ।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद चुनाव सुधार और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने एक नई शुरुआत की है और भविष्य में यह अभियान चुनावी सुधार तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों तक भी पहुंचेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

    अखिलेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता और संघर्ष ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठी आवाज ने यह साबित किया है कि संगठित जनआंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके समर्थन में खड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी की मिसाल बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि अब संविधान में निहित अधिकारों को आधार बनाकर चुनाव सुधार और ईवीएम जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा और जनभागीदारी देखने को मिल सकती है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष भविष्य में इन विषयों को भी राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाएगा।

    अपने बयान में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    उन्होंने कानून व्यवस्था, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष इन विषयों को लगातार उठाता रहेगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के बीच विपक्ष शिक्षा, रोजगार और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों तथा चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं, न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होता है। फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान ने शिक्षा, चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में पेपर लीक की घटनाओं, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या से जोड़ते हुए केंद्र और संबंधित संस्थाओं से समयबद्ध तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण होने से स्थिति और जटिल बनती है तथा इसका सीधा असर आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं पर पड़ता है।

    मायावती ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की उम्मीदों को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि युवाओं के मन में गंभीर चिंता और असंतोष है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी और भरोसेमंद कार्रवाई के जरिए छात्रों का विश्वास बहाल करे।

    उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों का दायरा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक जनचर्चा का विषय बन गया है। उनके अनुसार, जब ऐसे मामलों पर राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से सक्रिय होते हैं तो मूल मुद्दे से ध्यान भटकने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम रखते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    बसपा प्रमुख ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवाद हों या भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियां, इन सभी के पीछे भ्रष्टाचार की समस्या एक साझा कारण के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।

    मायावती ने भ्रष्टाचार को देश की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह समाज और प्रशासन को भीतर से कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही सुशासन की सबसे बड़ी आधारशिला है। इसी संदर्भ में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के सुशासन और जवाबदेह प्रशासन संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनकी भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

    उन्होंने सरकार, प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें और जनता से जुड़े गंभीर मामलों में त्वरित तथा निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत सुधारों की भी आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    मायावती ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाने के बजाय संवाद और सहमति से समाधान खोजने का प्रयास होना चाहिए। उनका मानना है कि सड़क से लेकर संसद तक टकराव का माहौल बनने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से संयम बरतने तथा शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य, सार्वजनिक विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विषय पर संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित जवाहर भवन में सोमवार सुबह आग लगने की घटना से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सरकारी कार्यालयों वाली इस बहुमंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और राहत एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते पूरी इमारत को खाली कराया गया और सभी कर्मचारियों तथा अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। आग को फैलने से रोकने के लिए इमारत के विभिन्न हिस्सों को तत्काल खाली कराया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। राहत कार्य के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि भवन के भीतर कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए।

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटनास्थल की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि आग भवन की चौथी मंजिल पर स्थित कैंटीन क्षेत्र से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि दमकल विभाग ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

    जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सुबह लगभग 10 बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीमें बिना विलंब मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू कर दिया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन को खाली कराया गया और इमारत के अंदर मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार राहत अभियान के दौरान किसी व्यक्ति के अंदर फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई।

    फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए 10 से अधिक फायर टेंडरों की सहायता ली गई। दमकल कर्मियों ने समन्वित तरीके से काम करते हुए आग को अन्य मंजिलों तक फैलने से रोका। आग बुझने के बाद भवन के प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया गया ताकि किसी संभावित खतरे को समाप्त किया जा सके।

    घटना के बाद जवाहर भवन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और संबंधित विभागों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए। प्रशासन अब आग से प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच कराने के साथ-साथ भवन की सुरक्षा व्यवस्था का भी आकलन करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    जवाहर भवन में राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं, इसलिए घटना के बाद प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर राहत, सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया शुरू की। समय पर की गई कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के कारण एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा और आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

  • 'लखनऊ अब सिर्फ तहजीब का नहीं, मिसाइल निर्माण का भी शहर', दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

    'लखनऊ अब सिर्फ तहजीब का नहीं, मिसाइल निर्माण का भी शहर', दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ अब केवल अपनी तहजीब और मुस्कुराहट के लिए ही नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से शहर में मिसाइलों का निर्माण हो रहा है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को मजबूती मिल रही है।

    किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा, “पहले कहा जाता था, मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं। अब यहां मिसाइलें बन रही हैं। जो गड़बड़ी करेगा, उसे मुस्कुराने का मौका नहीं मिलेगा।” उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से सटीक लक्ष्य भेदा जा सकता है।

    1701 छात्रों को मिली उपाधि, 54 मेधावियों का सम्मान
    अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समारोह में 1701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं, जिनमें 975 छात्र और 726 छात्राएं शामिल रहीं। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों के 20 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 54 पदकों से सम्मानित किया गया।

    KGMU के नाम को लेकर भ्रम की बात
    समारोह में स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नाम को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है, जबकि इसके निर्माण में किंग जॉर्ज का कोई आर्थिक योगदान नहीं था।

    डॉ. एम. श्रीनिवास को मानद डीएससी
    इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को चिकित्सा प्रशासन और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डीएससी (Doctor of Science) की उपाधि प्रदान की गई। वहीं विश्वविद्यालय के कई चिकित्सकों को कुलपति एवं फैकल्टी अप्रिसिएशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    दीप्ति शर्मा ने जीते सबसे अधिक पदक
    एमबीबीएस की छात्रा दीप्ति शर्मा समारोह की सबसे सफल छात्रा रहीं। उन्होंने 16 पदक अपने नाम किए। उनके अलावा निधि सिंह, अभिलाषा घोष, अनिकेत चंद्रा सहित कुल 20 मेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

  • शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

    शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक संकेत देखने को मिल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। इस मुलाकात में सनातन, गौरक्षा और राम मंदिर से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई, जिसे राजनीतिक विश्लेषक समाजवादी पार्टी की बदलती रणनीति के रूप में देख रहे हैं। हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति पर जोर देने वाली पार्टी अब धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।

    लखनऊ में हुई इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए सनातन और समाजवाद के बीच समानता का संदेश दिया। मुलाकात के दौरान उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की ओर से इसे सामाजिक समरसता और भारतीय परंपरा के सम्मान का संदेश बताया गया।

    बैठक में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के कथित अनियमितता के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने इस विषय पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था से जुड़े विषयों को राजनीतिक लाभ या नुकसान के बजाय जनविश्वास के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कुछ समय से विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। गौरक्षा, सनातन परंपरा और अन्य धार्मिक विषयों पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल के महीनों में उनकी कई सार्वजनिक टिप्पणियों ने प्रदेश की राजनीति में भी प्रभाव डाला है। ऐसे समय में समाजवादी पार्टी नेतृत्व का उनसे लगातार संवाद राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले भी अखिलेश यादव और उनकी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव शंकराचार्य से मुलाकात कर चुके हैं। दोनों पक्षों के बीच गौरक्षा, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता रहा है। इन बैठकों ने यह संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी धार्मिक नेतृत्व के साथ संवाद बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा सकता है।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी जहां सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति को आगे बढ़ाने की बात करती रही है, वहीं अब सनातन परंपरा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय भागीदारी दिखा रही है। इससे प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।

    हालांकि इस मुलाकात के राजनीतिक प्रभाव का वास्तविक आकलन आगामी चुनावी माहौल और मतदाताओं की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता संवाद चुनावी रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है, जहां सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ राजनीतिक संदेश भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

  • लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे। उनके दौरे को वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति तथा संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

    लखनऊ पहुंचने पर नितिन नवीन का पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्ण स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनका स्वागत किया और राज्य में उनके आगमन पर शुभकामनाएं दीं। दौरे के दौरान पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है।

    भाजपा सूत्रों के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना और संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति तैयार करना है। पार्टी नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेकर भविष्य की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर भी विचार करेगा।

    अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी बैठक करेंगे। इसके अलावा उनकी प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्रियों, विधायकों तथा विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग चरणों में चर्चा प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिला इकाई प्रमुखों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ भी संवाद करेगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। भाजपा संगठन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

    दौरे के दौरान नितिन नवीन समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद का कार्यक्रम भी निर्धारित है। पार्टी का मानना है कि ऐसे संवादों से विभिन्न वर्गों के सुझाव प्राप्त होंगे और संगठन को व्यापक जनसंपर्क अभियान में मदद मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष का यह दौरा उत्तर प्रदेश में उनके हालिया दौरों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी वह राज्य के विभिन्न शहरों का दौरा कर संगठनात्मक बैठकों में भाग ले चुके हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार राज्य में संगठन की सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद पर जोर दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य होने के कारण भाजपा की चुनावी रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इन बैठकों से निकले निर्णय भाजपा की चुनावी रणनीति को और स्पष्ट कर सकते हैं।

  • उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को अपने पहले आधिकारिक दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचेंगे। हाल ही में घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला महत्वपूर्ण दौरा माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से इस प्रवास को संगठन की मजबूती, चुनावी रणनीति और सरकार-संगठन के बेहतर समन्वय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नितिन नवीन के कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा करना और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आवश्यक सुझावों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने, विभिन्न स्तरों पर संवाद को मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भाजपा नेतृत्व लंबे समय से संगठनात्मक समन्वय को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है और यह बैठक उसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी ने विभिन्न पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे के दौरान नई टीम के साथ बैठक कर संगठनात्मक कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों, संगठन मंत्रियों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से भी संवाद कर जमीनी स्तर की गतिविधियों और संगठन की सक्रियता का आकलन करेंगे।

    भाजपा नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी तैयारियों को केवल शीर्ष स्तर तक सीमित न रखकर बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर स्थानीय मुद्दों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन की कार्यप्रणाली पर फीडबैक प्राप्त करेंगे। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय और संगठित ढांचा चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के चुनावी अनुभवों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक रणनीति को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रत्येक स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा हो और संगठन के भीतर समन्वय तथा संवाद को लगातार बेहतर बनाया जाए। इसी कारण शीर्ष नेतृत्व स्वयं प्रदेश का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कर रहा है।

    नितिन नवीन के इस दौरे को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। संभावना है कि बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान, सरकार की योजनाओं के प्रभावी प्रचार और विपक्ष की राजनीतिक रणनीतियों के जवाब जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा उत्तर प्रदेश भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • बुढ़वा मंगल पर बजरंगबली को बेहद प्रिय हैं ये पांच विशेष चीजें, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत मिलने की है मान्यता

    बुढ़वा मंगल पर बजरंगबली को बेहद प्रिय हैं ये पांच विशेष चीजें, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत मिलने की है मान्यता

    नई दिल्ली । उत्तर भारत की सनातन धार्मिक परंपराओं में ज्येष्ठ महीने के मंगलवार का एक बेहद विशिष्ट और पावन महत्व माना गया है, जिन्हें आम बोलचाल में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से पुकारा जाता है। ज्येष्ठ महीना अब अपने समापन की ओर अग्रसर है और आज यानी १६ जून २०२६ को इस पावन महीने का सातवां बड़ा मंगल पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ मास के दौरान अधिकमास का विशेष संयोग बनने के कारण कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिसके चलते आज के सातवें बड़े मंगल का महत्व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कहीं अधिक बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर व्रत रखने और पूरी निष्ठा से संकटमोचन की उपासना करने से बजरंगबली अपने भक्तों पर अटूट कृपा बरसाते हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार, बड़े मंगल के दिन की गई पूजा न केवल जीवन के संकटों को टालती है, बल्कि इससे कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति भी बेहद मजबूत और शुभ होती है। इसके अतिरिक्त, जो जातक वर्तमान समय में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के बुरे दौर और कष्टों से गुजर रहे हैं, उनके लिए भी आज के दिन हनुमान जी की आराधना करना अचूक और राहत देने वाला माना गया है। इस पावन अवसर पर पूजा और आरती के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष और कल्याणकारी मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं, जिनमें सुबह ०५:४५ बजे से ०७:२५ बजे तक अमृत काल का श्रेष्ठ समय रहा, जबकि दोपहर ११:५० बजे से १२:४५ बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा और शाम को संध्या आरती के लिए ०६:३० बजे से ०७:४५ बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

    उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आस-पास के तमाम क्षेत्रों में बड़े मंगल के अवसर पर एक बहुत ही भव्य सांस्कृतिक व धार्मिक नजारा देखने को मिलता है। इस दिन जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन करने, भीषण गर्मी के इस मौसम में राहगीरों को ठंडा शरबत व पानी पिलाने तथा सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ करने की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। सुबह से ही तमाम प्रमुख हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और कीर्तन के कार्यक्रम अनवरत रूप से चल रहे हैं। धर्म-शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन बजरंगबली को उनकी कुछ बेहद प्रिय चीजें अर्पित करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

    शास्त्रों में वर्णित इन पांच प्रमुख चीजों में सबसे पहला स्थान लाल फूलों का है, जिसके तहत हनुमान जी को गुड़हल या गुलाब के लाल पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। दूसरी प्रमुख सामग्री चोला है, जिसमें चमेली के तेल में केसरिया सिंदूर मिलाकर प्रभु के चरणों से शुरुआत करते हुए चोला चढ़ाया जाता है और अंत में वही सिंदूर माथे पर लगाया जाता है। इसके अलावा, बजरंगबली को बनारसी पान पर कत्था, गुलकंद, सौंफ और इलायची रखकर मीठे पान का बीड़ा अर्पित करने से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ध्यान रहे कि इस पान में चूना या सुपारी बिल्कुल न हो। चौथी और पांचवीं चीज के रूप में हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू तथा आटे, शुद्ध घी और गुड़ से बने पारंपरिक चूरमे या मीठी रोटी का भोग लगाने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।