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  • ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात मध्य प्रदेश में शुरू हुई जी राम जी स्कीम 125 दिन रोजगार की गारंटी और मजदूरी में देरी पर मुआवजा

    ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात मध्य प्रदेश में शुरू हुई जी राम जी स्कीम 125 दिन रोजगार की गारंटी और मजदूरी में देरी पर मुआवजा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गांवों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक जुलाई से जी राम जी योजना लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन के अकुशल रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह अवधि मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों की तुलना में 25 दिन अधिक है। योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं बल्कि गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है।

    योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि कोई पात्र व्यक्ति रोजगार के लिए आवेदन करता है तो उसे 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में रोजगार नहीं दिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले 30 दिनों तक मजदूरी दर का 25 प्रतिशत और इसके बाद 50 प्रतिशत तक भत्ता देने की व्यवस्था की गई है। इससे रोजगार की कानूनी गारंटी को और मजबूत बनाया गया है।

    सरकार ने मजदूरी भुगतान को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं। योजना में काम करने वाले श्रमिकों को साप्ताहिक आधार पर भुगतान किया जाएगा और किसी भी स्थिति में काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी देना अनिवार्य होगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो 16वें दिन से बकाया मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा भी दिया जाएगा। इससे समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और श्रमिकों को आर्थिक नुकसान से बचाने का प्रयास किया गया है।

    रोजगार प्राप्त करने के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी सरल बनाई गई है। पात्र व्यक्ति मौखिक लिखित या डिजिटल माध्यम से आवेदन कर सकेगा। आवेदन ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य कार्यक्रम अधिकारी अथवा अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा। आवेदन करने पर रसीद देना भी अनिवार्य होगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

    योजना का लाभ केवल उन्हीं ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिनका पंजीकरण होगा और जिनके वयस्क सदस्यों का नाम रोजगार गारंटी कार्ड में दर्ज होगा। परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य रोजगार के लिए आवेदन कर सकेगा। सरकार ने वंचित और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देने का भी प्रावधान किया है ताकि रोजगार का लाभ सबसे पहले उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

    जी राम जी योजना के तहत जल संरक्षण सिंचाई ग्रामीण सड़कें आजीविका बढ़ाने वाले कार्य आधारभूत ग्रामीण अधोसंरचना और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विकास कार्य कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करना है जिनका लाभ गांवों को लंबे समय तक मिलता रहे। साथ ही विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से पंचायत स्तर की योजनाओं को जिला राज्य और राष्ट्रीय विकास योजनाओं से जोड़ने की भी तैयारी की गई है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। जीपीएस आधारित निगरानी मोबाइल उपस्थिति प्रणाली रियल टाइम डैशबोर्ड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के जरिए कार्यों की निगरानी होगी। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने पारदर्शिता बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    इस योजना के वित्तीय मॉडल में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के साथ गांवों के स्थायी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • मध्यप्रदेश सरकार ने की 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की शुरुआत

    मध्यप्रदेश सरकार ने की 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की शुरुआत


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत कर दी है। मध्यप्रदेश, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दावोस में की गई घोषणा के अनुरूप प्रदेश, 24 घंटे हरित ऊर्जा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए, मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित प्री-बिड मीटिंग को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली में हुई बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव तथा विभिन्न कपंनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    मध्यप्रदेश का ट्रैक रिकॉर्ड सबसे बेहतर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में सबसे कम सौर टैरिफ स्थापित कर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। शाजापुर-नीमच सोलर पार्कों ने 2.14 रूपए प्रति यूनिट का प्रदेश में सबसे कम टैरिफ अर्जित किया। हाल ही में मुरैना की 4 घंटे की स्टोरेज प्लस परियोजना के लिए 2.70 रूपए प्रति यूनिट पर पीपीए हुआ, यह देश की सबसे प्रतिस्पर्धी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में से एक है।

    मध्यप्रदेश है देश का सबसे निवेश मित्र राज्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतियाँ, त्वरित निर्णय और उत्कृष्ट अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों से मध्यप्रदेश की ऊर्जा क्रांति के सहभागी बनने का अनुरोध किया।

    ऊर्जा में आत्मनिर्भरता है हमारा लक्ष्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल परियोजनाएँ स्थापित करना नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाना राज्य सरकार का उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना और सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयास से 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगी। नई दिल्ली की प्री-बिड मीटिंग में टाटा पॉवर, रिलायंस एनर्जी, टोरेंट पॉवर, जिंदल रिन्युएबल, एन.टी.पी.सी., अडानी ग्रीन्स, हिन्दुस्तान पॉवर, महिंद्रा सिस्टम आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

    सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

     
    मध्यप्रदेश । उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी महापर्व को विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताते हुए सभी विभागों को अभी से व्यापक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में अधोसंरचना विकास से लेकर यातायात, आवास, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं तक हर व्यवस्था को समय रहते मजबूत करना होगा।

    मुख्यमंत्री शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने सिंहस्थ-2016 का संकल्प सिंहस्थ-2028 का संकल्प विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में वर्ष 2016 के सिंहस्थ के दौरान जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और आगामी आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुझाव दिए। उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और विकास कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौती यातायात और भीड़ प्रबंधन रही थी। कई स्थानों पर लंबा जाम लगने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े राज्यों के साथ पहले से समन्वय स्थापित करना होगा ताकि विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 की तुलना में अब उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क और रेल नेटवर्क काफी बेहतर हो चुका है। फतेहाबाद रेलवे ट्रैक शुरू हो चुका है और अधिकांश प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण भी पूरा हो गया है। इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ केवल क्षिप्रा नदी में स्नान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि श्रद्धालु पूरे उज्जैन के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन भी करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव मिल सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित ढाबों, होटलों और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जाए। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं को पर्याप्त आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी इंतजामों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि सरकार का प्रयास रहेगा कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से सिंहस्थ-2028 को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सभी तैयारियां तय समय सीमा में पूरी करने का आह्वान किया।

  • खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला

    खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार अब प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात, अन्य राज्यों या विदेश यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य अधिकारियों को राज्य से बाहर की शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव से मंजूरी लेनी होगी।

    सरकार का मानना है कि अनावश्यक यात्राओं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों को अधिकतम डिजिटल माध्यमों के जरिए आयोजित किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो और समय व धन दोनों की बचत हो सके। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    ऊर्जा बचत पर सरकार का विशेष फोकस
    राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराने, बिजली खपत की निगरानी करने तथा शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बंद रखने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है।

    प्राकृतिक खेती और हरित विकास को प्रोत्साहन
    कृषि विभाग को प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों को फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का अधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना है।

    PNG और LPG कनेक्शनों की होगी जांच
    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर कार्रवाई करने का अभियान भी चलाया जाएगा।

    फूड ऑयल के कम उपयोग पर चलेगा अभियान
    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित हो सके।

    90 दिन का जन-जागरूकता अभियान
    जनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर 90 दिनों का व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों के पालन की मासिक रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के लिए भी कहा है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

  • . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल

    . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल


    नई दिल्ली। भोपाल प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब मध्यप्रदेश सरकार में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने वीवीआईपी काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या घटाकर बड़ा संदेश दिया है। अब मुख्यमंत्री के काफिले में पहले की तरह 13 गाड़ियां नहीं, बल्कि सिर्फ 7 वाहन ही नजर आए।
    बुधवार को जब मुख्यमंत्री भोपाल से नरसिंहपुर के लिए रवाना हुए, तब वीआईपी रोड और एयरपोर्ट रोड पर उनका छोटा काफिला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सरकार ने इसे ईंधन संरक्षण और सादगी की दिशा में अहम कदम बताया है।
    सीएम के इस फैसले के बाद प्रदेश सरकार के अन्य मंत्री और अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। डिप्टी सीएम Rajendra Shukla ने भी अपने काफिले में न्यूनतम वाहनों के उपयोग का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचत हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और विभागीय गतिविधियों में अनावश्यक वाहन उपयोग से बचा जाएगा।
    डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण के साथ पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी जरूरी है, क्योंकि इससे आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और स्वास्थ्य के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
    इधर, खेल एवं सहकारिता मंत्री Vishvas Sarang ने भी अपने सुरक्षा काफिले में बदलाव किया। वे केवल एक कार में स्टाफ के साथ मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
    मंत्री सारंग ने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह पेट्रोल-डीजल की खपत कम करे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी अपील की कि अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाएं।
    प्रदेश सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सादगी और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इसे पीएम मोदी की अपील पर तेज और प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला… 489 मदिरा दुकानों के संचालन के लिए बनेगा निगम-मंडल

    मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला… 489 मदिरा दुकानों के संचालन के लिए बनेगा निगम-मंडल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति की शुक्रवार को हुई वर्चुअल बैठक में 12 दौर की नीलामी प्रक्रिया के बाद शेष बची दुकानों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नीलामी के बाद शेष 489 दुकानों के संचालन के लिए आबकारी विभाग स्वयं एक निगम/मंडल गठित कर इन दुकानों के संचालन की संभावना पर विचार करेगा।

    मंत्री-मंडल समिति में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना मौजूद रहे।

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में नीलामी के बाद शेष बची 489 मदिरा दुकानों को सीधे निगम/मंडल के माध्यम से संचालित करने के विकल्प पर चर्चा की गई। यह कदम शेष शराब दुकानों का निस्तारण करने और राजस्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

  • मध्यप्रदेश शासन और पीएम मोदी के प्रयास से स्व. गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर भारत लाया गया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प अर्पित किए

    मध्यप्रदेश शासन और पीएम मोदी के प्रयास से स्व. गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर भारत लाया गया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प अर्पित किए


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन प्रवास के दौरान स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गुरकीरत सिंह मनोचा की कनाडा में हुए दुखद दुर्घटना में मृत्यु ने पूरे प्रदेश और उनके परिवार को शोक में डुबो दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन प्रदेशवासियों के सुख-दुख में हमेशा उनके साथ है और इस कठिन समय में मनोचा परिवार के साथ संवेदनाएँ साझा करता है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार और मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त प्रयासों से स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर कनाडा से भारत लाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान बाबा श्री महाकाल से प्रार्थना की कि परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यह समय परिवार और समाज के लिए बहुत कठिन है, लेकिन राज्य सरकार हर संभव मदद प्रदान करने के लिए तत्पर है।

    श्रद्धांजलि अर्पित करने के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया और विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा भी उपस्थित थे। सभी ने स्व. श्री मनोचा को पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रयासों से इस दुखद समय में परिवार को उचित सहायता दी जाएगी और उनके अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से की जाएँगी। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के दुखद हादसे समाज और सरकार को यह याद दिलाते हैं कि जीवन अनिश्चित है और हमें आपसी सहयोग और संवेदनशीलता के साथ ऐसे समय में खड़ा होना चाहिए।

    स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के निधन ने उनके परिवार, मित्र और प्रदेशवासियों को गहरे शोक में डाल दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके योगदान और यादों को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा और उनके परिवार के साथ शासन हर संभव मदद करेगा।

    इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया और भावपूर्ण तरीके से अपने श्रद्धा और संवेदनाएँ व्यक्त कीं। यह कार्यक्रम उज्जैन में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के रूप में याद रखा जाएगा।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत


    भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर सीएम ने पीएम मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। पीएम मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया।

    सीएम डॉ. यादव ने कहा “प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के बताए मार्ग के अनुसार चार श्रेणियों किसान महिला गरीब और युवा के लिए काम कर रही है। करीब 16 विभागों को जोड़कर कृषि पशुपालन मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में अच्छी पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे काम को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया है।

    नई दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने संसद भवन का भ्रमण भी किया और विभिन्न सांसदों से मुलाकात कर मध्यप्रदेश के विकास केंद्र राज्य समन्वय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के हित में विकास कार्यों को और गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।  सीएम ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वय से प्रदेश में निवेश रोजगार और किसान कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल होंगी।

  • अप्रैल में पैक्स से 10 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने दिए सदस्यता अभियान के निर्देश

    अप्रैल में पैक्स से 10 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने दिए सदस्यता अभियान के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सहकारिता संस्थाओं को मजबूत बनाने और किसानों को अधिक से अधिक संस्थागत सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार बड़े स्तर पर पहल करने जा रही है। इसी कड़ी में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर वर्तमान गतिविधियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में उन्होंने प्रदेशभर में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों पैक्स और विपणन सहकारी समितियों को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

    बैठक में मंत्री ने निर्देश दिए कि पैक्स और विपणन सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी सहकारी संस्थाओं की वर्तमान स्थिति का अध्ययन करेगी और उनके संचालन, संरचना तथा कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देगी। साथ ही कमेटी को 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

    सहकारिता मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। ऐसे में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि वर्ष को ध्यान में रखते हुए सहकारिता संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाए, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

    उन्होंने कहा कि पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत इकाई के रूप में विकसित करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से अप्रैल माह में पूरे प्रदेश में वृहद सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत लगभग 10 लाख किसानों को सहकारिता संस्थाओं से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अधिक से अधिक किसानों को सहकारिता से जोड़ने से ग्रामीण स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को ऋण, खाद, बीज और अन्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

    बैठक में खाद वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मंत्री विश्वास कैलाश सारंगने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डबल लॉक की स्थिति में नगद भुगतान के माध्यम से पैक्स के जरिए खाद वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। इससे किसानों को समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी तथा सुव्यवस्थित बनेगी।इस समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता डी. पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028: 3,000 करोड़ का बजट, 128 प्रोजेक्ट में से कई अधूरे, प्रशासन पर समय की चुनौती

    उज्जैन सिंहस्थ 2028: 3,000 करोड़ का बजट, 128 प्रोजेक्ट में से कई अधूरे, प्रशासन पर समय की चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए अब तक कुल 5,570 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिसमें हाल ही में पेश 3,060 करोड़ रुपए की राशि पिछले बजट की तुलना में 1,055 करोड़ अधिक है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के अनुसार, सिंहस्थ आयोजन के लिए पहले से ही 13,851 करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं और विभिन्न विभागों में काम जारी है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण और विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि घाटों की मरम्मत, पुल और सड़कों के अपग्रेडेशन, पेयजल और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के काम अभी भी अधूरे हैं।

    सिंहस्थ आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब-कमेटी ने 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनकी अनुमानित लागत 13,752 करोड़ है। इनमें से 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं, लेकिन केवल 33 प्रोजेक्ट पर ही धरातल पर काम शुरू हो पाया है। शेष 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी फाइलों में अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़क चौड़ीकरण, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक सुधार और श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

    जल और शिप्रा नदी का शुद्धिकरण राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जल संसाधन विभाग पांच बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिनमें कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट ₹914 करोड़ केवल 52% पूरा हुआ है। उज्जैन और देवास में बैराज निर्माण, शिप्रा को प्रवाहमान बनाने और घाट निर्माण के प्रोजेक्ट भी केवल 15% से 62% तक ही पूरे हुए हैं। इन प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन 2027-2028 तक है, इसलिए प्रशासन पर समय की बड़ी चुनौती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में प्रोजेक्ट की समीक्षा कर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने पिछले तीन वर्षों से केंद्र से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है और उम्मीद जताई है कि 6,000-7,000 करोड़ रुपए की केंद्र सहायता किश्तों में उपलब्ध हो सकेगी।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। विभाग के 42 प्रोजेक्ट में से 33 पर काम चल रहा है, लेकिन 9 प्रोजेक्ट अभी अधूरे हैं। पेयजल, सीवरेज और घाट निर्माण जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी, समय की कमी और भारी वित्तीय बोझ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।

    सिंहस्थ की सफलता राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक क्षमता का परीक्षण होगी। हालांकि बजट और परियोजनाओं की संख्या प्रभावशाली दिखती है, लेकिन धरातल पर तेजी से काम न होने से आयोजन में संभावित जोखिम बरकरार हैं।