Tag: Madhya Pradesh Police

  • कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय

    कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय


    इंदौर। मध्य प्रदेश को नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद पुलिस महानिदेशक DGP लाश मकवाना का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस उपलब्धि को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित अभियान का परिणाम बताया।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस रणनीतिक ढंग से कार्रवाई की गई उससे प्रदेश में नक्सल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में सफलता मिली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करना है। इन्हीं निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में अभियान को तेज किया गया।

    डीजीपी ने यह भी बताया कि जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई तब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया। लगातार सर्च ऑपरेशन संवेदनशील इलाकों में विशेष बल की तैनाती खुफिया तंत्र की मजबूती और तकनीक आधारित निगरानी से नक्सल गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार किया गया।

    कैलाश मकवाना के अनुसार इस सफलता के पीछे केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं बल्कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल भी अहम रहा। वन क्षेत्र सीमावर्ती जिलों और पहले से चिन्हित संवेदनशील इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन चलाए गए। स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली के प्रयास ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने भी नक्सल संगठनों की जड़ें कमजोर कीं।

    उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा बलों की नहीं बल्कि पूरे शासन-प्रशासन की सामूहिक कोशिश का परिणाम है। प्रदेश में जिन क्षेत्रों को पहले नक्सल प्रभावित माना जाता था वहां अब शांति का वातावरण है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब फोकस केवल नक्सल गतिविधियों को खत्म करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शांति और विकास को स्थायी बनाए रखने पर रहेगा। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी सामुदायिक पुलिसिंग और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोबारा किसी भी प्रकार की उग्र गतिविधियां पनपने न पाएं।

  • नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज

    नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज


    नीमच  /मध्यप्रदेश के नीमच जिले से पुलिस विभाग को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक हेड कॉन्स्टेबल ने ड्यूटी पर रहते हुए जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना रविवार आठ फरवरी की बताई जा रही है। मृतक हेड कॉन्स्टेबल ने मरने से पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा है जिसमें उसने अपने ही विभाग के एक आरआई पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आला अधिकारी मामले की हर पहलू से जांच की बात कह रहे हैं।

    मृतक हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह उम्र पचास वर्ष नीमच पुलिस लाइन कनावटी में रहते थे। जानकारी के अनुसार वह पिछले पांच दिनों से स्वास्थ्य कारणों के चलते अवकाश पर थे और सोमवार से दोबारा ड्यूटी जॉइन करने वाले थे। इसी बीच रविवार सुबह वह पुलिस लाइन पहुंचे और शाम के समय जिला पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे। यहीं उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जिससे उनकी हालत अचानक बिगड़ गई।कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही नीमच कैंट थाना प्रभारी नीलेश अवस्थी अन्य पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और होशियार सिंह को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि हेड कॉन्स्टेबल के पास से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है जो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह सुसाइड नोट स्वयं होशियार सिंह ने लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने विभाग के एक आरआई पर लगातार मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। पत्र में लिखा गया है कि उन्हें लंबे समय से दबाव अपमान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था जिससे वे पूरी तरह टूट चुके थे।

    सूत्रों के अनुसार विभागीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि होशियार सिंह को पूर्व में एक बार सेवा से पृथक किया जा चुका था। इसके अलावा उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान चार बार विभागीय सजा भी दी गई थी। बताया जा रहा है कि अधिकतर सजाएं बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और अन्य अनुशासनात्मक कारणों से जुड़ी थीं। पुलिस अब इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या इन्हीं कारणों से उन पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा था।

    नीमच के पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जहर खाने से हालत बिगड़ने पर प्रधान आरक्षक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों सहित पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाएगी।इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक दबाव और आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं कि सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

  • जबलपुर में सनसनी: रिटायर्ड महिला डॉक्टर के अपहरण का आरोप, करोड़ों की संपत्ति पर भू-माफिया की नजर

    जबलपुर में सनसनी: रिटायर्ड महिला डॉक्टर के अपहरण का आरोप, करोड़ों की संपत्ति पर भू-माफिया की नजर


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर के पॉश इलाके राइट टाउन से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ रहने वाली 70 वर्षीय रिटायर्ड महिला डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के अपहरण के आरोपों ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ अज्ञात लोग महिला डॉक्टर को उनके ही घर से जबरन उठाकर एक कार में बिठाकर ले गए। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ संदिग्ध लोग उन्हें ले जाते हुए नजर आ रहे हैं।

    डॉ. हेमलता की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में गहरी साजिश और अपहरण की आशंका जताई है। घटना के दौरान जब पड़ोसी डॉ. मुखर्जी ने हस्तक्षेप कर पूछताछ करने की कोशिश की, तो इन अज्ञात लोगों ने उनके साथ भी बदतमीजी की और खुद को किसी बड़े प्रसिद्ध मंदिर के ट्रस्ट से जुड़ा हुआ बताया। हालांकि, स्थानीय लोगों और चिकित्सा जगत के जानकारों का मानना है कि यह कोई धार्मिक सेवा नहीं, बल्कि महिला की करोड़ों की बेशकीमती संपत्ति को हड़पने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश है।

    पीड़ित डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की स्थिति इस समय बेहद नाजुक है। हाल ही में एक महीने पहले उनके पति का निधन हुआ है और कुछ साल पहले वे अपने इकलौते डॉक्टर बेटे को भी खो चुकी हैं। घर में अकेली रहने वाली डॉक्टर फिलहाल मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं, जिसका फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। राइट टाउन जैसे महंगे इलाके में उनके बंगले और जमीन की कीमत करोड़ों में है, जिसे कब्जाने के लिए भू-माफिया और आपराधिक तत्व सक्रिय हो गए हैं।

    IMA के हस्तक्षेप के बाद जबलपुर का मदन महल थाना पुलिस हरकत में आया है। पुलिस ने फिलहाल शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और वायरल वीडियो के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुट गई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वास्तव में वे लोग किसी मंदिर से जुड़े हैं या केवल जायदाद के दस्तावेजों पर अंगूठे लगवाने के लिए यह नाटक रचा गया है। आने वाले घंटों में पुलिस की जांच यह साफ करेगी कि डॉ. हेमलता सुरक्षित हैं या वे किसी बड़े भू-माफिया सिंडिकेट के चंगुल में फंस चुकी हैं।

  • एमपी एसटीएफ का बड़ा प्रहार: इंदौर में पकड़ी गईं 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें, खरगोन के दो तस्कर गिरफ्तार

    एमपी एसटीएफ का बड़ा प्रहार: इंदौर में पकड़ी गईं 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें, खरगोन के दो तस्कर गिरफ्तार


    भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने अवैध हथियारों के काले कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। शनिवार, 24 जनवरी को एसटीएफ इंदौर की दो विशेष टीमों ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें और मैगजीन जब्त की हैं। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, जो अवैध हथियारों की बड़ी खेप खपाने की फिराक में थे।

    यह पूरी कार्रवाई एसटीएफ इंदौर के उप पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सिंह चौहान के कुशल निर्देशन में अंजाम दी गई। एसटीएफ को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि अवैध शस्त्रों की तस्करी से जुड़े कुछ लोग शहर में सक्रिय हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए दो विशेष टीमों का गठन किया गया और संदिग्धों की घेराबंदी शुरू की गई।

    एसटीएफ की सर्जिकल स्ट्राइक

    एसटीएफ की टीमों ने बताए गए स्थान पर जाल बिछाया और दो संदिग्धों को रोककर उनकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान उनके पास से 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें मई मैगजीन बरामद हुईं।आरोपियों की पहचान: पकड़े गए दोनों आरोपी ग्राम बोराड़िया, थाना भिकनगांव जिला खरगोन के रहने वाले हैं। अवैध व्यापार जब आरोपियों से हथियारों के संबंध में दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई भी वैध लाइसेंस पेश नहीं कर सके। खरगोन का यह क्षेत्र अवैध हथियार निर्माण के लिए कुख्यात रहा है, ऐसे में एसटीएफ अब इनके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।

    टीम में शामिल जांबाज अधिकारी

    प्रथम टीम इंस्पेक्टर रमेश चौहान, प्रधान आरक्षक भूपेन्द्र गुप्ता और आरक्षक विवेक द्विवेदी।द्वितीय टीम प्रधान आरक्षक आदर्श दीक्षित, आरक्षक देवराज बघेल और आरक्षक देवेन्द्र सिंह।

    जांच के दायरे में सप्लाई नेटवर्क

    एसटीएफ अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि ये अत्याधुनिक हथियार किसे सप्लाई किए जाने थे। पुलिस को अंदेशा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था। आरोपियों से पूछताछ में उनके अंतरराज्यीय नेटवर्क और अन्य साथियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई को सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • शहडोल पुलिस लाइन में सनसनी: ड्यूटी पर तैनात आरक्षक ने सर्विस राइफल से खुद को उड़ाया, मौके पर मिला टूटा मोबाइल

    शहडोल पुलिस लाइन में सनसनी: ड्यूटी पर तैनात आरक्षक ने सर्विस राइफल से खुद को उड़ाया, मौके पर मिला टूटा मोबाइल



    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां पुलिस लाइन में नाइट ड्यूटी पर तैनात एक युवा आरक्षक ने आत्मघाती कदम उठाते हुए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रक्षित केंद्र आरएआई में पदस्थ आरक्षक शिशिर सिंह राजपूत ने अपनी ही सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और ड्यूटी के दौरान बढ़ते तनाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना उस वक्त की है जब शिशिर सिंह राजपूत नाइट ड्यूटी पर तैनात थे। वे अपनी कुर्सी पर बैठे हुए थे, तभी अचानक उन्होंने अपनी 7.62 एमएम सर्विस राइफल को अपने सिर से सटाकर ट्रिगर दबा दिया। गोली सिर के आर-पार निकल गई और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण आरक्षक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गोली की आवाज सुनते ही आसपास मौजूद अन्य कर्मचारी घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। मामले की सूचना मिलते ही एसपी रामजी श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे।

    घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने पर पुलिस को आरक्षक का मोबाइल फोन टूटा हुआ मिला है। प्रारंभिक जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि खुदकुशी जैसा खौफनाक कदम उठाने से ठीक पहले आरक्षक मोबाइल पर किसी से बात कर रहे थे। पुलिस को संदेह है कि बातचीत के दौरान शिशिर किसी गहरी मानसिक वेदना या आवेश में आ गए थे, जिसके चलते उन्होंने पहले अपना फोन तोड़ा और फिर तत्काल खुद को गोली मार ली। यह आवेश व्यक्तिगत कारणों से था या विभागीय दबाव से, इसकी गहनता से पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। एसपी रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है और मोबाइल के डेटा को रिकवर करने की कोशिश की जाएगी ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके। फिलहाल, इस घटना के बाद पुलिस लाइन में शोक की लहर व्याप्त है और सहकर्मी इस आकस्मिक क्षति से स्तब्ध हैं।

  • ग्वालियर में हैवानियत: छात्रा को सरेराह डंडे से मारकर किया बेहोश, फिर कमरे में ले जाकर किया दुष्कर्म

    ग्वालियर में हैवानियत: छात्रा को सरेराह डंडे से मारकर किया बेहोश, फिर कमरे में ले जाकर किया दुष्कर्म

    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है जिसने शहर की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्ट्रेट जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके के पास एक 20 वर्षीय छात्रा के साथ न केवल दिनदहाड़े मारपीट की गई बल्कि उसे बेहोश कर एक मकान में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की गई। यह पूरी घटना उस समय हुई जब छात्रा अपनी स्टेनोग्राफी की कोचिंग खत्म कर स्कूटी से घर लौट रही थी।

    पीड़िता के अनुसार जब वह विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र से गुजर रही थी तभी दतिया निवासी हर्ष ठाकुर ने अपने एक साथी के साथ मिलकर उसकी स्कूटी में जानबूझकर जोरदार टक्कर मार दी। जब छात्रा ने इस हरकत का विरोध किया तो आरोपी हर्ष ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उसके सिर पर डंडे से हमला कर दिया। हमले की वजह से छात्रा मौके पर ही अचेत हो गई। इसके बाद आरोपी उसे उठाकर पास ही के एक सुनसान मकान में ले गए जहाँ हर्ष ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जब छात्रा को होश आया और उसने विरोध करने की कोशिश की तो आरोपियों ने दोबारा उसके साथ मारपीट की और उसके सिर पर कांच की बोतल दे मारी जिससे वह फिर से लहूलुहान होकर बेहोश हो गई।

    वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी छात्रा को वापस उसकी स्कूटी के पास अधमरी हालत में छोड़कर फरार हो गए। कुछ समय बाद जब छात्रा को होश आया तो वह किसी तरह अपने घर पहुंची और परिजनों को आपबीती सुनाई। बदहवास हालत में परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे जहाँ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत केस दर्ज किया।

    इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि आरोपी हर्ष और पीड़िता पहले से परिचित थे। एडिशनल एसपी विदिता डागर ने बताया कि साल 2023 में भी छात्रा ने हर्ष के खिलाफ छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था जिसका मुकदमा फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। संभवतः इसी पुरानी रंजिश और कोर्ट केस का बदला लेने के लिए आरोपी ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया है।पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हर्ष ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है जबकि उसके साथी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने ग्वालियर में सनसनी फैला दी है और लोग दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।

  • भिण्ड: पेड़ पर लटकी लाश का सनसनीखेज खुलासा; आत्महत्या नहीं, पीट-पीटकर की गई थी सुखबीर की हत्या

    भिण्ड: पेड़ पर लटकी लाश का सनसनीखेज खुलासा; आत्महत्या नहीं, पीट-पीटकर की गई थी सुखबीर की हत्या


    भिण्ड । मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में पुलिस ने 11 जनवरी को हुई एक अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझा लिया है। ऊमरी थाना क्षेत्र के बजरंगगढ़ अकोड़ा गांव में पेड़ से लटके मिले 55 वर्षीय सुखबीर बघेल के शव के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी है। पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि सुखबीर ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उनकी बेरहमी से हत्या करने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को पेड़ से लटकाया गया था।

    संदिग्ध चोटों ने खोला राज 11 जनवरी को जब सुखबीर बघेल का शव गांव के पास बांध वाले खेत में एक पेड़ से फंदे पर लटका मिला तो पहली नजर में यह खुदकुशी का मामला लग रहा था। हालांकि, मौके पर पहुँची ऊमरी थाना पुलिस को मृतक के सिर हाथ और पैरों पर गहरे जख्म और चोट के निशान मिले। इन निशानों ने पुलिस के मन में संदेह पैदा कर दिया, जिसके बाद शव को बारीकी से पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुराना विवाद हाल ही में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि मृतक के शरीर पर पाए गए घाव किसी संघर्ष या मारपीट के हैं। रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम चोटों मौत से पहले की चोटें का जिक्र होने के बाद पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदल दी। परिजनों ने भी पुलिस को बताया था कि गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ सुखबीर का पुराना विवाद चल रहा था।

    चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज वैज्ञानिक साक्ष्यों और परिजनों के बयानों के आधार पर पुलिस ने गांव के ही चार संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ हत्या धारा 302 और साक्ष्य छुपाने का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पहले सुखबीर के साथ मारपीट की और जब उनकी मौत हो गई, तो मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को खेत में लगे पेड़ पर फंदे से लटका दिया। ऊमरी थाना पुलिस अब नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।

  • गर्लफ्रेंड के शौक और अय्याशी के लिए बने लुटेरे: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दंपती को लूटने वाले 6 आरोपी गिरफ्तार, 500 कैमरों ने खोला राज

    गर्लफ्रेंड के शौक और अय्याशी के लिए बने लुटेरे: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दंपती को लूटने वाले 6 आरोपी गिरफ्तार, 500 कैमरों ने खोला राज


    रतलाम। अपनी प्रेमिकाओं पर पैसे उड़ाने और शराब की लत को पूरा करने के लिए अपराध की राह चुनने वाले एक शातिर गिरोह का रतलाम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर एक दंपती के साथ डकैती की वारदात को अंजाम देने वाले छह आरोपियों को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में दो शादीशुदा हैं जबकि चार कुंवारे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लूट की रकम का बड़ा हिस्सा आरोपियों ने अपनी अय्याशी और गर्लफ्रेंड पर खर्च कर दिया। पुलिस ने इनके पास से लूटा गया कुछ माल और वारदात में इस्तेमाल बाइक जब्त की है।

    अवैध कट से पीछा कर दंपती को बनाया निशाना वारदात 5 जनवरी 2026 की है जब सांवलिया रूंडी निवासी राकेश मईड़ा अपनी पत्नी संगीता के साथ बाइक पर सवार होकर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के वालारूंडी क्षेत्र में एक अवैध कट से दाखिल हुए थे। इसी दौरान दो बाइकों पर सवार छह बदमाशों ने उनका पीछा करना शुरू किया। सुनसान जगह देखकर बदमाशों ने दंपती के आगे अपनी बाइक अड़ा दी और डरा-धमकाकर उन्हें रोक लिया। लुटेरों ने दंपती से 23 हजार 900 रुपये नकद मोबाइल फोन और चांदी की दो चूड़ियां लूट लीं और फरार हो गए। चूंकि आरोपियों की संख्या पांच से अधिक थी इसलिए पुलिस ने इसे डकैती की श्रेणी में रखते हुए मामला दर्ज किया।

    हॉस्टल में मिली सिम और 500 कैमरों का जाल एसपी अमित कुमार के निर्देशन और प्रशिक्षु डीएसपी अनीशा जैन के नेतृत्व में गठित टीम ने इस चुनौतीपूर्ण मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से लेकर भागने के रास्तों तक करीब 500 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इसी बीच पुलिस को एक अहम सुराग मिला। लूटे गए मोबाइल की सिम सागोद रोड स्थित एक हॉस्टल के पास सक्रिय पाई गई। जब पुलिस वहां पहुँची तो पता चला कि एक छात्र उस सिम का इस्तेमाल कर रहा है जिसे वह सिम सड़क पर गिरी हुई मिली थी। इस सुराग ने पुलिस को आरोपियों के हुलिए और उनके भागने की दिशा की पुष्टि कर दी।

    तालाब किनारे झोपड़ी में छिपा था गिरोह कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को पता चला कि आरोपी बांगरोद क्षेत्र में एक तालाब की पाल पर झोपड़ियां बनाकर छिपे हुए हैं। पुलिस ने दबिश देकर कैलाश फतेहसिंह उर्फ फतिया दिनेश उर्फ कालू बाबूलाल सतीश और लखन को धर दबोचा। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे लूट के पैसों से शराब पीते थे और अपनी गर्लफ्रेंड्स के महंगे शौक पूरे करते थे। पुलिस को आरोपियों के पास से महज 6,350 रुपये ही बरामद हुए क्योंकि शेष राशि वे अय्याशी में उड़ा चुके थे। गिरफ्तार आरोपियों का विवरण पुलिस ने बाजना और बांसवाड़ा राजस्थान क्षेत्र के रहने वाले आरोपियों को जेल भेज दिया है। इनमें कैलाश 24 फतेहसिंह 25 दिनेश 22 बाबूलाल 20 सतीश 24 और लखन 20 शामिल हैं। इनके पास से पुलिस ने चांदी की चूड़ियां कीमत 6 हजार और वारदात में प्रयुक्त बाइक भी बरामद की है। एसपी अमित कुमार ने इस सफलता के लिए टीम की सराहना की है।

  • मध्य प्रदेश पुलिस में पहली बार ट्रेड आरक्षक कैडर ने महाकाल के दरबार में लगाई ‘वर्दी अपमान’ की अर्जी, GD में मर्ज न होने पर बवाल

    मध्य प्रदेश पुलिस में पहली बार ट्रेड आरक्षक कैडर ने महाकाल के दरबार में लगाई ‘वर्दी अपमान’ की अर्जी, GD में मर्ज न होने पर बवाल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश पुलिस के ट्रेड आरक्षक कैडर (कुक, नाई, धोबी, मोची, स्वीपर, स्वीपर आदि) के लगभग 5500 पुलिसकर्मियों ने अब तक के सबसे बड़े कदम में उज्जैन के महाकाल मंदिर में जाकर जनरल ड्यूटी (GD) में मर्ज करने की मांग की है। यह मांग खास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन पुलिसकर्मियों ने पहली बार सरकारी आदेशों के खिलाफ सामूहिक रूप से विरोध जताया है।
    ट्रेड आरक्षक कैडर के पुलिसकर्मी बताते हैं कि वे कम से कम 7 साल सेवा के बाद फील्ड में काम करने के पात्र हो जाते हैं, लेकिन 2012 में जारी डीजीपी नंदन दुबे के आदेश (जी.ओ.पी-57/93 को बंद करना) के बाद से उनका GD में मर्ज रोक दिया गया। परिणाम यह हुआ कि प्रमोशन के बाद भी उन्हें वही ट्रेड के कामकुक, नाई, धोबी, मोची, स्वीपरके ही काम करने पड़ रहे हैं।

    वहीं, पड़ोसी राज्यों में इसी कैडर को GD में मर्ज कर बल की कमी पूरी की जा रही है। ट्रेड आरक्षकों का कहना है कि अफसरों के घरों में काम करना उनकी गरिमा और वर्दी का अपमान है। कई पुलिसकर्मी ऐसे हैं, जो सब-इंस्पेक्टर स्तर तक प्रमोशन पा चुके हैं, लेकिन अभी भी उन्हें अफसरों की निजी सेवा में ही लगे रहना पड़ता है।

    इस विरोध का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे नहीं, बल्कि बाबा महाकाल के दरबार में अर्जी देकर अपनी गुहार लगाई है। ट्रेड आरक्षकों ने महाकाल को पत्र में लिखा कि उनकी वर्दी “अपमान से झुकी हुई” है और वे चाहते हैं कि सरकार 12 साल से रुके GD मर्ज को फिर से लागू करे।

    इसी बीच खरगोन में एक और पुलिस विवाद सामने आया है, जिसमें रिजर्व इंस्पेक्टर (आरआई) पर कॉन्स्टेबल की पिटाई करने का आरोप लगा है। मामला 23 अगस्त का है, जब एक पालतू कुत्ता गुम हो गया था और आरआई इस बात से नाराज हो गए। पीड़ित कॉन्स्टेबल राहुल चौहान ने आरोप लगाया कि आरआई और उनकी पत्नी ने जातिसूचक अपशब्द कहे और बेल्ट से पिटाई की।

  • सीएम मोहन यादव ने किया आईपीएस सर्विस मीट का शुभारंभ, कहा- मध्य प्रदेश को आंतरिक सुरक्षा का आदर्श प्रदेश बनाएंगे

    सीएम मोहन यादव ने किया आईपीएस सर्विस मीट का शुभारंभ, कहा- मध्य प्रदेश को आंतरिक सुरक्षा का आदर्श प्रदेश बनाएंगे


    भोपाल।  मध्य प्रदेश में संगठित अपराध के लिए कोई स्थान नहीं होगा और प्रदेश को आंतरिक सुरक्षा का आदर्श प्रदेश बनाने का लक्ष्य सरकार का प्रमुख एजेंडा है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित आईपीएस सर्विस मीट के शुभारंभ अवसर पर कही।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश पुलिस को जल्द ही पदोन्नति (प्रमोशन) की स्वीकृति का समाचार मिलेगा और पुलिस विभाग में पर्याप्त भर्तियां की जाएंगी। उन्होंने पुलिसकर्मियों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की ड्यूटी में अनेक चुनौतियां हैं, फिर भी वे अपनी जिम्मेदारियों को निष्ठापूर्वक निभाते हैं।

    सर्विस मीट का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना और भारतीय पुलिस सेवा संघ के अध्यक्ष चंचल शेखर ने पुष्प गुच्छ और पौधा भेंट कर स्वागत किया। डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्वागत उद्बोधन भी दिया।

    डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश सरकार और पुलिस ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश की पुलिस देश के लिए आदर्श उदाहरण बन चुकी है और नए कानूनों के क्रियान्वयन में सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि नशा विरोधी अभियान में प्रदेश पुलिस निरंतर सफल रही है और संगठित अपराधियों और गिरोहों पर अंकुश लगाया जा रहा है।

    उन्होंने नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए पुलिस अधिकारियों को बधाई दी और देशभक्ति व जन सेवा की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश पुलिस हर कदम पर सरकार के साथ खड़ी है और लोकतंत्र तथा कानून व्यवस्था की मजबूती में अहम भूमिका निभा रही है। उनका यह संदेश है कि मध्यप्रदेश को सुरक्षित और आदर्श प्रदेश बनाए रखना हर अधिकारी और पुलिसकर्मी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।