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  • भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता

    भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रविवार को नशे के खिलाफ जनजागरूकता का बड़ा संदेश देते हुए रन फॉर लाइफ मैराथन का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी महाअभियान नशे से दूरी है जरूरी 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं खिलाड़ियों पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुलिस और सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त पहल से आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन की शुरुआत सुबह टीटी नगर स्टेडियम से हुई। प्रतिभागियों के लिए दो किलोमीटर वॉकथॉन पांच किलोमीटर हाफ मैराथन और दस किलोमीटर मैराथन जैसी अलग अलग श्रेणियां रखी गई थीं ताकि हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान से जुड़ सकें। तिरंगा हाथों में लेकर दौड़ते युवाओं ने नशामुक्त समाज का संदेश दिया और पूरे आयोजन में देशभक्ति तथा सामाजिक जिम्मेदारी का उत्साह दिखाई दिया।

    कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नशे के खिलाफ यह केवल एक प्रतीकात्मक दौड़ नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    इस अवसर पर एडीजी नारकोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है और नशे से दूर रहकर ही बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इसलिए सभी नागरिकों को से नो टू ड्रग्स का संकल्प लेकर समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देना चाहिए।

    एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस मुख्यालय एवं अपराध डॉ मोनिका शुक्ला ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी दोनों पीढ़ियों को मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    मैराथन के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने इस अभियान को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि खेल और फिटनेस की गतिविधियां युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता अभियानों को लगातार जारी रखने का भरोसा दिलाया।

    मध्य प्रदेश पुलिस का नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान प्रदेशभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति की मजबूत संस्कृति विकसित करना है। भोपाल में आयोजित रन फॉर लाइफ मैराथन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिसने युवाओं को सामाजिक बदलाव की मुहिम से जोड़ने का प्रभावी संदेश दिया।

  • क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

    क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल


    भोपाल । भोपाल के चर्चित अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निलंबन के बाद अब केवल उनके खिलाफ लगे आरोप ही चर्चा का विषय नहीं हैं, बल्कि पुलिस विभाग की पोस्टिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुनील शर्मा के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें राजधानी भोपाल के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों में गिने जाने वाले अरेरा हिल्स थाने का प्रभारी बनाया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

    पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवक ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया कि अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के उसकी पत्नी से अनैतिक संबंध हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने में पदस्थ आरक्षक नंदकिशोर इस पूरे मामले में टीआई का सहयोग कर रहा था और महिला पर दबाव बनाने में उसकी भूमिका थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को निलंबित कर दिया।

    मामले की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुनील शर्मा के खिलाफ गुना कोतवाली में पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें भोपाल जैसे संवेदनशील जिले के वीआईपी थाने का प्रभार सौंपा गया, जिसने विभागीय प्रक्रिया और नियमों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस मुख्यालय ने वर्षों पहले ही ऐसे मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 15 अक्टूबर 2014 को जारी आदेश में कहा गया था कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच, भ्रष्टाचार अथवा लोकायुक्त संबंधी प्रकरण लंबित हों, उन्हें थानों या अन्य संवेदनशील पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके बाद 17 जून 2025 को भी पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को दोबारा निर्देश जारी कर कहा था कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, नैतिक अधःपतन या अवैध निरोध जैसे गंभीर आरोप लंबित हों, उन्हें थानों, क्राइम ब्रांच या किसी महत्वपूर्ण कार्यालय में पदस्थ नहीं किया जाए।

    इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुनील शर्मा की नियुक्ति ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टिंग से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच की गई थी। यदि जांच हुई थी तो नियमों के बावजूद उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। वहीं यदि जांच नहीं हुई तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ी चूक मानी जा सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पोस्टिंग नियमों के विपरीत हुई है तो क्या केवल संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी जिन्होंने नियमों के बावजूद यह पदस्थापना की।

    डीसीपी जोन-3 विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला केवल एक थाना प्रभारी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग की पारदर्शिता, पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।

  • पुलिस अधिकारियों को मिला बड़ा तोहफा मध्य प्रदेश में 301 निरीक्षकों का डीएसपी पद पर हुआ प्रमोशन

    पुलिस अधिकारियों को मिला बड़ा तोहफा मध्य प्रदेश में 301 निरीक्षकों का डीएसपी पद पर हुआ प्रमोशन


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को बड़ी सौगात देते हुए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा में कार्यरत 301 निरीक्षकों को पदोन्नत कर उप पुलिस अधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। 13 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में खुशी का माहौल है और इसे विभाग के सबसे बड़े प्रमोशन आदेशों में से एक माना जा रहा है।

    गृह विभाग की ओर से मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल से जारी आदेश के अनुसार चयनित निरीक्षकों को छठे वेतनमान के ग्रेड पे 5400 से सातवें वेतनमान के लेवल 12 के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है। सरकार के इस फैसले से उन अधिकारियों को राहत मिली है जो कई वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे। विभागीय वरिष्ठता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत तैयार की गई सूची के आधार पर यह पदोन्नति दी गई है।

    पुलिस विभाग में निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक बनना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। डीएसपी के रूप में अधिकारियों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में काफी बढ़ जाती हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराध नियंत्रण विशेष अभियानों की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करने जैसी अहम जिम्मेदारियां अब इन अधिकारियों के कंधों पर होंगी। इससे पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के इस फैसले का असर केवल अधिकारियों के पदनाम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका सीधा लाभ पुलिस व्यवस्था को भी मिलेगा। बड़ी संख्या में नए डीएसपी मिलने से विभिन्न जिलों और इकाइयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने में मदद मिलेगी। इससे पुलिसिंग की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आने की संभावना है।

    पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों के लिए यह फैसला उनके लंबे अनुभव और सेवा का सम्मान माना जा रहा है। वर्षों तक थाना स्तर पर कानून व्यवस्था संभालने वाले इन अधिकारियों को अब उच्च प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलेगा। इससे विभाग के भीतर कार्य करने वाले अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा तथा उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।

    मध्य प्रदेश सरकार लगातार प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विभागों में पदोन्नति और नियुक्ति संबंधी फैसले ले रही है। हाल के महीनों में कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। पुलिस विभाग में 301 निरीक्षकों को एक साथ डीएसपी बनाना भी इसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।

    अब पदोन्नति के बाद इन अधिकारियों की नई पदस्थापना की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होने की संभावना है। नई जिम्मेदारियां संभालने के बाद उनसे बेहतर नेतृत्व प्रभावी कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है। सरकार का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को नेतृत्व की भूमिका देने से राज्य की पुलिस व्यवस्था और अधिक सशक्त तथा प्रभावी बनेगी।

  • इंदौर हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा: प्रेमी नहीं, मां और भाई पर हत्या का केस, ऑडियो रिकॉर्डिंग से पलटी जांच

    इंदौर हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा: प्रेमी नहीं, मां और भाई पर हत्या का केस, ऑडियो रिकॉर्डिंग से पलटी जांच


    इंदौर । इंदौर के हीरानगर क्षेत्र में रहने वाली युवती ज्योति अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस जांच ने बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जिस मामले में शुरुआत में युवती के प्रेमी को मुख्य आरोपी बताया गया था, उसी मामले में अब पुलिस ने मृतका की मां शीतल अग्रवाल और भाई प्रकाश के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान मिले ऑडियो रिकॉर्डिंग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पूरी कहानी बदल दी।

    पुलिस के अनुसार तीन अप्रैल को ज्योति की मौत हुई थी, जबकि उससे एक दिन पहले घर में उसकी मां और भाई के साथ विवाद हुआ था। जांच में सामने आया कि दोनों ने उसके साथ मारपीट की थी। बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल की स्थिति बदली गई और घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी डिलीट कर दी गई ताकि सच्चाई सामने न आ सके। हालांकि पुलिस अभी तक डिलीट फुटेज को रिकवर करने का प्रयास कर रही है।

    मामले की शुरुआत में मृतका की मां और भाई ने पुलिस को बताया था कि ज्योति के प्रेमी मयंक साहू के पास उसका निजी वीडियो था और वह उसी के आधार पर ब्लैकमेल कर रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मयंक उससे लाखों रुपये ले चुका था। लेकिन पूछताछ के दौरान मयंक ने इन आरोपों से इनकार करते हुए बताया कि पैसों का संबंध व्यापारिक लेनदेन से था और बाद में उसने ज्योति को सोना खरीदकर भी दिया था।

    जांच की दिशा उस समय पूरी तरह बदल गई जब मयंक ने पुलिस को दो अप्रैल की रात की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपी। रिकॉर्डिंग में ज्योति अपने मित्र से बातचीत के दौरान बता रही थी कि उसकी मां और भाई उसके साथ मारपीट कर रहे हैं तथा पुलिस को सूचना देने की बात कह रही है। हालांकि उस समय पुलिस को सूचना नहीं दी गई, लेकिन अगले ही दिन ज्योति की मौत की खबर सामने आ गई। इसी रिकॉर्डिंग ने पुलिस को नए सिरे से पूरे मामले की जांच करने के लिए मजबूर कर दिया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस का शक और गहरा गया। रिपोर्ट में युवती के सिर पर गंभीर चोटों के साथ शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान मिले। जब इन चोटों के बारे में मां और भाई से पूछताछ की गई तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। वहीं सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने की वजह भी स्पष्ट नहीं कर पाए। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह भी संकेत मिले हैं कि मारपीट के बाद युवती की तबीयत बिगड़ने पर उसे जबरन जहरीला पदार्थ पिलाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि ज्योति और मयंक एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। दोनों ने भविष्य के लिए आर्थिक तैयारी भी कर रखी थी। फिलहाल पुलिस ने मां और भाई के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और आगे और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

  • मध्य प्रदेश पुलिस में देर रात बड़ा बदलाव, भोपाल ग्रामीण से सागर-नर्मदापुरम तक नए आईजी की तैनाती

    मध्य प्रदेश पुलिस में देर रात बड़ा बदलाव, भोपाल ग्रामीण से सागर-नर्मदापुरम तक नए आईजी की तैनाती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए 9 भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। गृह विभाग की ओर से देर रात जारी आदेशों में कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस प्रशासनिक बदलाव के तहत शाजापुर और शहडोल जैसे अहम जिलों को नए पुलिस अधीक्षक मिले हैं जबकि भोपाल ग्रामीण सागर और नर्मदापुरम रेंज में भी नए पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी की तैनाती की गई है। माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।

    तबादला सूची के अनुसार संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है जबकि प्रियंका शुक्ला को शाजापुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों अधिकारियों को ऐसे समय नई जिम्मेदारी मिली है जब प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार लगातार सक्रिय नजर आ रही है।

    प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब तक पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन के पद पर कार्यरत रुचि वर्धन मिश्रा को भोपाल ग्रामीण जोन का नया आईजी बनाया गया है। उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें राजधानी से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं मिथिलेश शुक्ला को सागर रेंज का आईजी बनाया गया है। वे अब तक नर्मदापुरम जोन के आईजी थे और सागर रेंज का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। हिमानी खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के रूप में संचालित हो रहा था जिसे अब नियमित नियुक्ति मिल गई है।

    इसी क्रम में चंद्रशेखर सोलंकी को नर्मदापुरम जोन का नया आईजी नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले इंदौर एसएएफ रेंज में पदस्थ थे। वहीं हरि नारायणचारी मिश्रा को आईजी प्रशासन पुलिस मुख्यालय की जिम्मेदारी दी गई है। वे अभी तक आईजी एससीआरबी के पद पर कार्यरत थे।

    तबादला सूची में अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां मिली हैं। सिमाला प्रसाद को डीआईजी खरगोन रेंज बनाया गया है। यशपाल सिंह राजपूत को शाजापुर एसपी के पद से हटाकर पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर भेजा गया है जबकि रामजी श्रीवास्तव को शहडोल एसपी से एआईजी पुलिस अकादमी भौंरी पदस्थ किया गया है।

    सरकार ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन आदर्श कटियार को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ स्पेशल डीजी दूरसंचार पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं आईजी इंदौर ग्रामीण जोन अनुराग को आईजी एसएएफ इंदौर रेंज और आईजी आरएपीटीसी इंदौर की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विभागीय तबादलों के लिए समय सीमा तय की थी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद देर रात गृह विभाग ने यह आदेश जारी किए। माना जा रहा है कि आगामी प्रशासनिक चुनौतियों और कानून व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए यह व्यापक फेरबदल किया गया है। नई नियुक्तियों से प्रदेश के विभिन्न जिलों और रेंज में पुलिस कार्यप्रणाली को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट

    एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सूचना सामने आई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों, पुलिस अधीक्षकों और यूनिट प्रभारी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे उन पुलिसकर्मियों को तत्काल जानकारी दें, जिनके वेतन खाते एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और केनरा बैंक में संचालित हैं। कारण यह है कि इन बैंकों के साथ पुलिस विभाग के सैलरी पैकेज संबंधी अनुबंध समाप्त हो चुके हैं।

    पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन बैंकों के साथ हुए समझौतों के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कई विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती थीं। इनमें दुर्घटना बीमा, सामान्य मृत्यु पर आर्थिक सहायता, विशेष बैंकिंग लाभ, प्रीमियम सेवाएं और अन्य वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं शामिल थीं। अनुबंध समाप्त होने के बाद इन सुविधाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।

    पुलिस मुख्यालय के कल्याण प्रकोष्ठ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित बैंक अब पूर्व अनुबंध के आधार पर सुविधाएं प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसलिए कर्मचारियों को इस स्थिति से अवगत कराना जरूरी है ताकि वे भविष्य में किसी भी भ्रम या वित्तीय नुकसान से बच सकें।

    दस्तावेजों के अनुसार एक्सिस बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को किया गया अनुबंध 22 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया था। इसी प्रकार एचडीएफसी बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को हुआ समझौता 22 अप्रैल 2024 तक प्रभावी रहा और उसके बाद समाप्त हो गया। वहीं केनरा बैंक के साथ 19 फरवरी 2024 को हुआ अनुबंध 18 फरवरी 2025 को समाप्त हो चुका है।

    हालांकि पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन बैंकों के साथ समझौतों के नवीनीकरण के प्रयास लगातार जारी हैं। कल्याण शाखा की ओर से बैंक प्रबंधन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है और अनुबंधों को दोबारा लागू कराने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। जब तक नए समझौते नहीं हो जाते, तब तक कर्मचारियों को सैलरी पैकेज के अंतर्गत मिलने वाले अतिरिक्त लाभों की उपलब्धता को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पुलिस मुख्यालय का मानना है कि बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन बैंकों की सैलरी पैकेज योजनाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अनुबंध समाप्त होने की जानकारी समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी अपनी बैंकिंग और बीमा संबंधी योजनाओं की समीक्षा कर सकें।

    सूत्रों के अनुसार यदि भविष्य में नए सिरे से समझौते होते हैं तो कर्मचारियों को फिर से विशेष बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। फिलहाल पुलिस विभाग की सभी इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे इस सूचना को संबंधित कर्मचारियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाएं।

    यह आदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल के कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से जारी किया गया है और इसे पूरे प्रदेश की पुलिस इकाइयों में लागू किया जा रहा है।

  • थाली में पानी गिरने से शुरू हुआ विवाद, मारपीट में महिला घायल: टांके लगे, 5 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं, एसपी ऑफिस के चक्कर लगा रही पीड़िता

    थाली में पानी गिरने से शुरू हुआ विवाद, मारपीट में महिला घायल: टांके लगे, 5 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं, एसपी ऑफिस के चक्कर लगा रही पीड़िता


    मध्‍य प्रदेश । शिवपुरी जिले के सीहोर थाना क्षेत्र के ग्राम गनियार में एक मामूली-सी बात ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया, जो अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सवालों के घेरे में है। गांव निवासी सीमा कुशवाह ने दो पड़ोसी भाइयों पर गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद से वह लगातार न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है।

    घटना 7 जून की सुबह की बताई जा रही है, जब सीमा कुशवाह अपने घर में खाना खा रही थीं। इसी दौरान पड़ोसी दौलत सिंह कुशवाह ने कथित रूप से अपने घर की पाइपलाइन चालू कर दी, जिससे पानी बहकर उनकी थाली में गिर गया। इस बात को लेकर सीमा ने विरोध जताया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।

    पीड़िता का आरोप है कि विवाद के दौरान दौलत सिंह ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनके चेहरे और नाक के पास गंभीर चोटें आईं। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने टांके लगाए। इसी दौरान दूसरे आरोपी सतेन्द्र कुशवाह भी मौके पर पहुंच गया और दोनों भाइयों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। जब पीड़िता के पति बीच-बचाव करने आए, तो उनके साथ भी मारपीट की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

    घटना के बाद पीड़िता ने सीहोर थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। सीमा कुशवाह के अनुसार, एसपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था और उन्हें थाने भेजा गया, लेकिन वहां भी FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्हें वापस एसपी कार्यालय भेज दिया गया, जिससे वे लगातार चक्कर काटने को मजबूर हैं।

    पीड़िता का कहना है कि वह पिछले पांच दिनों से न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने एक बार फिर एसपी कार्यालय पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, जांच कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    यह मामला न केवल एक घरेलू विवाद से शुरू होकर गंभीर मारपीट तक पहुंच गया, बल्कि पुलिस कार्रवाई की धीमी गति को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। पीड़िता लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं, जबकि मामला अभी तक दर्ज नहीं हो सका है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कब तक कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।

  • कांग्रेस आईटी सेल केस में बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट ने CCTV सुरक्षित ,रखने के दिए निर्देश


    जबलपुर । जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े एक मामले में भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सख्त रुख अपनाया है यह मामला उन तीन युवकों से जुड़ा है जिन्हें हिरासत में लेकर बिना किसी न्यायिक आदेश और ट्रांजिट रिमांड के राजस्थान पुलिस को सौंप दिए जाने का आरोप है

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे राज्य की पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक और न्यायिक आदेशों के अनुसार होनी चाहिए लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई है जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है

    कोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए

    इसके अलावा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए गिरफ्तारी स्थल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को कहा है कोर्ट ने विशेष रूप से 20 अप्रैल की रात 2 बजे से लेकर 21 अप्रैल की शाम 5 बजे तक के सभी सीसीटीवी रिकॉर्ड सुरक्षित करने के आदेश दिए हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके

    मामले में कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी जिसमें कहा गया था कि प्रक्रिया के पालन के बिना ही युवकों को राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया जानकारी के अनुसार तीनों युवक बिलाल निखिल और इनाम पर आरोप है कि उन्होंने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया से जुड़े महिला आरक्षण के एक कथित फर्जी पत्र को वायरल किया था इस मामले में राजस्थान के जयपुर स्थित ज्योति नगर थाने में केस दर्ज किया गया है

    राजस्थान पुलिस इन तीनों युवकों को जयपुर ले जा चुकी है लेकिन अब इस पूरे घटनाक्रम ने कानूनी प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि तीनों युवकों को 27 अप्रैल को हर हाल में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका पर निगाहें और तेज हो गई हैं

  • भोपाल में एनएसजी का शक्ति प्रदर्शन, सीएम बोले- देश की सुरक्षा की गारंटी हैं ब्लैक कैट कमांडो

    भोपाल में एनएसजी का शक्ति प्रदर्शन, सीएम बोले- देश की सुरक्षा की गारंटी हैं ब्लैक कैट कमांडो


    भोपाल । भोपाल में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को देश का अभेद्य सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि एनएसजी की मौजूदगी से देश हर परिस्थिति में सुरक्षित महसूस करता है लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी शो में उन्होंने समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का शुभारंभ किया

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति जहां सबके कल्याण की बात करती है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने यह भी साबित किया है कि यदि कोई राष्ट्र को चुनौती देता है तो उसे उसी भाषा में जवाब दिया जाता है उन्होंने कहा कि अतिवादी ताकतें देश के विकास में बाधक हैं और उनसे पूरी मजबूती से निपटना आवश्यक है

    कार्यक्रम में एनएसजी कमांडो ने मॉक टेररिस्ट अटैक का जीवंत प्रदर्शन किया जिसमें आतंकवादी हमलों से निपटने की पूरी रणनीति और कार्रवाई को दर्शाया गया इस दौरान कमांडो द्वारा हवा में किए गए साहसिक करतब और सटीक ऑपरेशन ने उपस्थित लोगों को रोमांचित कर दिया मुख्यमंत्री ने इसे पराक्रम और साहस की पराकाष्ठा बताया

    मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की उन्होंने बताया कि काउंटर टेररिस्ट ग्रुप के आधुनिकीकरण के लिए 200 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है और जल्द ही इस पर कार्य शुरू किया जाएगा साथ ही भोपाल जिले की हुजूर तहसील के ग्राम तूमड़ा में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा जहां सुरक्षा बलों को आतंकवाद और आकस्मिक आपदाओं से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के केंद्र में स्थित है इसलिए यहां इस तरह का प्रशिक्षण केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित होगा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की एटीएस और सीटीजी यूनिट आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस होकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना रही हैं

    मुख्यमंत्री ने देश के सशस्त्र बलों के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया के सशक्त देशों में अपनी पहचान बना चुका है उन्होंने एनएसजी के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि 1984 में स्थापित यह बल आज अपनी पेशेवर दक्षता और अनुशासन के लिए विश्वभर में जाना जाता है

    कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने जानकारी दी कि एनएसजी और मध्यप्रदेश पुलिस का संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम एक माह तक चलेगा जिसमें काउंटर टेररिज्म से जुड़े आठ प्रमुख विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा इस दौरान पुलिस जवान अपनी तकनीकी दक्षता और ऑपरेशनल क्षमता को और बेहतर बनाएंगे

    एनएसजी के महानिदेशक बी श्रीनिवासन ने कहा कि देशभर में हजारों जवानों को प्रशिक्षण देकर उनकी क्षमता का विकास किया गया है और मध्यप्रदेश की एटीएस तथा सीटीजी इकाइयां भी बेहतर कार्य कर रही हैं कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने पुलिस जवानों के साथ समूह चित्र खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सुरक्षा बलों की तत्परता और साहस ही देश की सबसे बड़ी ताकत है

  • अनूपपुर में अवैध कोयले पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3 टन कोयला जब्त, ड्राइवर गिरफ्तार

    अनूपपुर में अवैध कोयले पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3 टन कोयला जब्त, ड्राइवर गिरफ्तार


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में भालूमाड़ा पुलिस ने अवैध कोयला तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार रात करीब तीन टन चोरी का कोयला जब्त किया। इस दौरान एक मालवाहक वाहन को भी पकड़ा गया और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से 49 हजार रुपए नकद भी बरामद किए हैं।

    नाकाबंदी कर पकड़ा गया अवैध कोयला

    थाना प्रभारी विपुल शुक्ला के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि एक मालवाहक वाहन में चोरी का कोयला ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ग्राम पयारी नंबर 02 में ठाकुर बाबा के पास नाकाबंदी की। जांच के दौरान पिकअप वाहन (क्रमांक CG 10 BK 0962) को रोका गया, जिसमें अवैध कोयला लोड पाया गया।

    ड्राइवर गिरफ्तार, नकदी भी बरामद

    जब्त किए गए कोयले का वजन लगभग तीन टन है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस ने वाहन के ड्राइवर संतोष कुमार चौधरी (42 वर्ष), निवासी मुंडा, थाना जैतहरी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से 49 हजार रुपए नकद भी बरामद हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि यह राशि पहले बेचे गए कोयले से संबंधित हो सकती है।

    आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज

    पुलिस ने जब्त वाहन को थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। उसे मंगलवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

    पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

    गौरतलब है कि तीन दिन पहले 27 मार्च को भी भालूमाड़ा पुलिस ने एक ऑटो से करीब सात क्विंटल चोरी का कोयला जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह कोयला आसपास के गांवों से गुजरने वाली मालगाड़ियों से चोरी किया जाता है और बाद में ईंट भट्ठों या होटल संचालकों को बेच दिया जाता है।