MP में बदला मौसम, 72 घंटे से बारिश-ओले का कहर, 42 जिलों में असर, आज 14 जिलों में फिर अलर्ट


भोपाल। मध्यप्रदेश में बीते 72 घंटों से मौसम लगातार बिगड़ा हुआ है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के एक्टिव रहने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत 42 से अधिक जिलों में बारिश, ओले और तेज आंधी का असर देखने को मिला है।

शनिवार को भी यह सिस्टम खासतौर पर पूर्वी हिस्से में सक्रिय रहेगा। रीवा और सिंगरौली सहित 14 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। तेज हवाएं (करीब 74 किमी प्रति घंटा) और ओलावृष्टि के कारण कई इलाकों में गेहूं, केला, पपीता और संतरे की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार, 18 मार्च से प्रदेश में मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय है। मौसम विभाग के मुताबिक, तीन ट्रफ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से शुक्रवार को भी मौसम अस्थिर रहा। शनिवार को यह सिस्टम आगे बढ़ेगा और पूर्वी जिलों में असर दिखाएगा।

पिछले 24 घंटों में 42 जिलों के करीब 112 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इनमें इंदौर, धार, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, बुरहानपुर, खंडवा, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, उज्जैन, सागर, छतरपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी सहित कई जिले शामिल हैं। धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ा डोंगरी में सबसे ज्यादा करीब पौन इंच बारिश हुई। वहीं, कई जगहों पर आधा इंच या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई।

ओलावृष्टि की बात करें तो आलीराजपुर, बड़वानी, विदिशा, बैतूल, झाबुआ, खंडवा, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, दमोह और सिवनी समेत कई जिलों में ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।

बारिश और बादलों के कारण प्रदेशभर में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन में 10.6 डिग्री तक गिर गया। यहां दिन और रात के तापमान में सिर्फ 4.7 डिग्री का अंतर रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री दर्ज किया गया।

खजुराहो में सबसे ज्यादा 10.9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, जहां तापमान 38.3 से घटकर 27.4 डिग्री पर पहुंच गया। सतना और ग्वालियर में भी तापमान करीब 10 डिग्री तक गिरा। ग्वालियर, दतिया, सतना, रीवा, खजुराहो, पचमढ़ी, श्योपुर, उमरिया, भोपाल, सीधी और जबलपुर जैसे शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम 21 मार्च तक सक्रिय रहेगा। इसके बाद 22 मार्च से एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर-पश्चिम भारत में असर दिखा सकता है, हालांकि इसका प्रभाव कमजोर रहने की संभावना है। वहीं, 26 मार्च को एक और नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर बारिश की स्थिति बन सकती है।