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  • भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत

    भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत


    नई दिल्ली । भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। 18 अगस्त को राजधानी में बारिश के आसार बने हुए हैं और आसमान में बादलों की आवाजाही देखने को मिल सकती है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को भोपाल में हल्की बारिश की संभावना है जबकि तापमान अपेक्षाकृत सामान्य रहने की उम्मीद है। सोमवार शाम तक भोपाल में बादल छाए हुए थे और मौसम में नमी बनी हुई थी।

    मौसम विभाग और उपलब्ध पूर्वानुमानों के संकेतों को देखें तो मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ी हैं। राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और अगले कुछ दिनों में इसका प्रभाव अलग अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। भोपाल भी उन इलाकों में शामिल है जहां हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में शहरवासियों को आने वाले दिनों में मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

    18 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। बीच बीच में बारिश होने से मौसम सुहावना रह सकता है। बारिश के कारण तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। उपलब्ध पूर्वानुमान में मंगलवार को अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    भोपाल में लगातार बारिश के दौरान शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है। सड़क पर निकलने वाले लोगों को मौसम की स्थिति देखकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों के लिए बारिश के दौरान विशेष सावधानी जरूरी होगी क्योंकि गीली सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है। तेज बारिश होने की स्थिति में खुले इलाकों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना भी बेहतर रहेगा।

    मानसून के दौरान भोपाल की झीलों और आसपास के इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिलता है। बारिश के बाद शहर का तापमान कम होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। हालांकि लगातार बारिश के कारण यातायात प्रभावित होने और कुछ इलाकों में पानी जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

    18 अगस्त के बाद भी भोपाल में बारिश की संभावना बनी रहने के संकेत हैं। उपलब्ध साप्ताहिक पूर्वानुमान में 19 अगस्त को भी छिटपुट बारिश और 20 अगस्त को जोरदार बौछारों की संभावना दिखाई गई है। इसके बाद भी सप्ताह के बाकी दिनों में बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर भोपाल में 18 अगस्त का मौसम राहत देने वाला रह सकता है। बादलों की मौजूदगी और हल्की बारिश से तापमान नियंत्रित रहने की संभावना है। हालांकि मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए किसी भी यात्रा या जरूरी काम से पहले ताजा मौसम अपडेट देखना सबसे बेहतर रहेगा।

  • आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान

    आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान


    भोपाल । सोमवार 17 अगस्त से वर्षा मघा नक्षत्र में प्रवेश करेगी और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव 31 अगस्त तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिष मठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम के अनुसार सिंह राशि में आने वाला मघा नक्षत्र बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में मध्यप्रदेश समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश के योग बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि मघा नक्षत्र में वर्षा के स्वामी मंगल माने जाते हैं और इसके चलते बारिश का स्वरूप कई जगह अलग अलग हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में खंड वर्षा देखने को मिल सकती है जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने के योग बन सकते हैं।

    ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मघा नक्षत्र का वाहन चातक यानी पपीहा माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र को वर्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभाव से कई स्थानों पर पर्याप्त बारिश होने के साथ कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा भी हो सकती है। खास बात यह है कि जिन क्षेत्रों में अब तक अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है वहां भी इस अवधि में वर्षा के योग बनने की बात कही गई है। ऐसे में मघा नक्षत्र का यह दौर किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मघा नक्षत्र को लेकर प्रचलित लोक कहावत ‘मघा देगा अघा’ भी बारिश की इसी विशेषता की ओर संकेत करती है। इसका अर्थ माना जाता है कि मघा नक्षत्र में होने वाली बारिश से तालाब ताल तलैया और अन्य जलस्रोत पानी से भर सकते हैं। पंडित विनोद गौतम ने एक अन्य लोक कहावत ‘मघा न बरसे भरे ना खेत माता न परसे भरे ना पेट’ का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय लोक परंपरा में मघा की बारिश का संबंध सीधे खेती और जल उपलब्धता से जोड़ा गया है। इस दौरान होने वाली बारिश का असर खेतों और जलस्रोतों पर दिखाई देने की मान्यता है।

    हालांकि बारिश के स्वरूप को लेकर ज्योतिषीय अनुमान एक समान नहीं होते। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य रह सकती है जबकि कुछ जगहों पर तेज वर्षा के दौर बन सकते हैं। इसलिए मघा नक्षत्र के दौरान अलग अलग स्थानों पर बारिश की स्थिति में अंतर रहने की संभावना बताई गई है। मौसम की वास्तविक स्थिति के लिए वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान और मौसम विभाग की चेतावनियों को प्राथमिक आधार माना जाना चाहिए।

    पंडित गौतम ने 28 अगस्त को होने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार एक पखवाड़े के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना ज्योतिषीय दृष्टि से प्राकृतिक घटनाओं और भूकंप जैसी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण के प्रभाव से देश और दुनिया में प्राकृतिक घटनाओं की आशंका के योग बताए हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और परंपरागत गणनाओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मौसम या भूकंप पूर्वानुमान नहीं माना जाता है।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त से शुरू हो रहा मघा नक्षत्र 31 अगस्त तक बारिश के लिहाज से चर्चा में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में कई स्थानों पर अच्छी और कहीं तेज बारिश के योग बन सकते हैं। वहीं किसानों और आम लोगों के लिए वास्तविक बारिश की स्थिति जानने के लिए स्थानीय मौसम विभाग के अपडेट और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखना अधिक उपयोगी रहेगा।

  • इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी

    इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी


    इंदौर। इंदौर में शुक्रवार सुबह से मौसम ने करवट ली और शहर के आसमान पर घने बादल छा गए। कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। लंबे समय से रुक रुककर हो रही बारिश के बीच अब मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा मौसम पूर्वानुमान में भी इंदौर के लिए आने वाले दिनों में बादल और बारिश का दौर बने रहने के संकेत हैं।

    इस मानसून सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। हालांकि अगस्त की शुरुआत से अब तक बारिश का जोर बहुत ज्यादा नहीं रहा है। शहर में कई दिनों से कभी बूंदाबांदी तो कभी हल्की बारिश का सिलसिला जारी है लेकिन किसी दिन भी बारिश ने लंबा और तेज दौर नहीं बनाया। ऐसे में मौसम के जानकारों की नजर अब मानसून के बचे करीब डेढ़ महीने पर है। अगर आने वाले दिनों में सक्रिय सिस्टम बनते रहे तो इंदौर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर जाने की संभावना बन सकती है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 12 अगस्त को उत्तर बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों के पास निम्न दबाव का क्षेत्र बना था। इसके बाद यह सिस्टम और सक्रिय हुआ। इसके प्रभाव से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना बनी है।

    इस मौसम सिस्टम का असर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा दिखाई दे सकता है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इंदौर में इसका असर बादल छाने और बारिश के दौर के रूप में देखने को मिल सकता है। मौजूदा पूर्वानुमान में इंदौर में 14 अगस्त से आगे भी बादल और बारिश की संभावना बनी हुई है।

    अगस्त का महीना इंदौर के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर में इस महीने औसतन करीब 10 से 11 इंच बारिश होती है और कई दिनों तक बारिश का दौर देखने को मिलता है। इतिहास में अगस्त के दौरान इससे कहीं ज्यादा बारिश भी दर्ज हो चुकी है। वर्ष 1944 में अगस्त महीने में करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड बताया जाता है। वहीं 22 अगस्त 2020 को 24 घंटे के दौरान करीब साढ़े 10 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    इस लिहाज से अगस्त के बाकी दिनों में बनने वाले मौसम सिस्टम इंदौर के लिए काफी अहम रहेंगे। यदि बंगाल की खाड़ी से लगातार सिस्टम बनते रहे और मानसून ट्रफ सक्रिय रही तो शहर में बारिश का जोर बढ़ सकता है। इससे न केवल मौजूदा बारिश के आंकड़े में सुधार होगा बल्कि पूरे सीजन की कुल बारिश भी औसत के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती है।

    फिलहाल शुक्रवार सुबह घने बादलों और बूंदाबांदी ने शहरवासियों को एक बार फिर तेज बारिश की उम्मीद दी है। हालांकि किसी एक दिन के मौसम को देखकर पूरे सीजन की स्थिति तय नहीं की जा सकती। आने वाले दिनों में सिस्टम की दिशा और उसकी सक्रियता यह तय करेगी कि इंदौर में बारिश कितनी तेज और कितने लंबे दौर तक होती है। फिलहाल मौसम का बदला मिजाज मानसून के लिए राहत भरे संकेत जरूर दे रहा है।

  • मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल

    मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनने से शुक्रवार को जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में प्रदेश के 12 जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है। वहीं भोपाल इंदौर समेत कई अन्य जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। लगातार कुछ दिनों तक बारिश से दूरी बनी रहने के बाद गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में पानी गिरा जिससे उमस से परेशान लोगों को राहत मिली।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर 4 इंच से अधिक पानी गिरने का अनुमान है। इसके अलावा भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन देवास रतलाम ग्वालियर रीवा सतना छिंदवाड़ा सिवनी पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ था जो 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। यह सिस्टम उत्तर पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।

    गुरुवार को करीब सात दिन बाद प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लंबे समय से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। हालांकि बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम केंद्र के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक करीब 524.8 मिलीमीटर यानी 20.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 597 मिलीमीटर यानी 23.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में बारिश करीब 12 प्रतिशत कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा है। जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला नरसिंहपुर पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि भोपाल गुना सीहोर राजगढ़ ग्वालियर अनूपपुर भिंड बुरहानपुर देवास बड़वानी खंडवा और खरगोन में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    इस मानसून सीजन में जून के दौरान प्रदेश में बारिश करीब 14 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति कुछ सुधरी लेकिन इसके बाद मानसून ने दो बार ब्रेक लिया। कई दिनों तक बारिश नहीं होने से आंकड़ा फिर सामान्य से नीचे चला गया। जुलाई में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय हुए सिस्टम से उम्मीद है कि प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होगी।

    राजधानी भोपाल में अगस्त महीने में भारी बारिश का इतिहास रहा है। अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज हुई थी। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी रहा है। इंदौर में अगस्त महीने में सर्वाधिक करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1944 में दर्ज हुआ था। ग्वालियर में 24 घंटे में करीब साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1927 का है। जबलपुर में अगस्त 1923 में करीब 44 इंच बारिश दर्ज होने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। उज्जैन में भी अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का रुख देखते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान नदी नालों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखना और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना बेहतर रहेगा।

  • मानसून फिर दिखाएगा अपना असर, 11 अगस्त को MP समेत कई राज्यों में बारिश के आसार, जलभराव से बढ़ सकती है परेशानी

    मानसून फिर दिखाएगा अपना असर, 11 अगस्त को MP समेत कई राज्यों में बारिश के आसार, जलभराव से बढ़ सकती है परेशानी


    मध्य प्रदेश। 11 अगस्त 2026 को देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने के आसार हैं। मौसम के बदलते मिजाज के बीच मध्य भारत समेत कई राज्यों में बादल छाए रहने और बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है जबकि कई स्थानों पर तेज बौछारों के साथ गरज चमक की स्थिति भी बन सकती है। लगातार बारिश वाले इलाकों में निचले क्षेत्रों में जलभराव की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मध्य प्रदेश में भी मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रहने की संभावना है। राजधानी भोपाल समेत इंदौर उज्जैन जबलपुर और ग्वालियर सहित कई शहरों में बादल छाए रहने के साथ बारिश हो सकती है। कुछ जिलों में गरज चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के कारण कई स्थानों पर तापमान में गिरावट आ सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि लगातार बारिश होने की स्थिति में सड़कों पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।

    उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी मौसम करवट ले सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है जबकि पश्चिमी हिस्सों में भी बादल छाए रह सकते हैं। राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। बारिश के कारण तापमान में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

    बिहार झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी मानसून के सक्रिय रहने का अनुमान है। कई इलाकों में बारिश के साथ गरज चमक हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने से स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। लोगों को निचले इलाकों और पानी से भरे रास्तों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान भूस्खलन सड़क बाधित होने और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

    महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बारिश का प्रभाव देखने को मिल सकता है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना बनी रह सकती है। दक्षिण भारत में भी मानसूनी गतिविधियां कई इलाकों में जारी रह सकती हैं। केरल कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश होने के आसार हैं।

    बारिश का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका प्रभाव यातायात बाजार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ता है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। किसानों के लिए बारिश राहत लेकर आ सकती है क्योंकि इससे खरीफ फसलों को पर्याप्त पानी मिल सकता है लेकिन अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान का खतरा भी बढ़ सकता है।

    कुल मिलाकर 11 अगस्त को देश के कई हिस्सों में मानसून का असर दिखाई देने की संभावना है। कहीं हल्की बारिश तो कहीं तेज बौछारों के साथ गरज चमक देखने को मिल सकती है। मौसम की स्थानीय स्थिति तेजी से बदल सकती है इसलिए घर से निकलने से पहले अपने क्षेत्र का ताजा मौसम अपडेट देखना और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना बेहतर रहेगा।

  • भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग

    भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग


    भोपाल । भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। रविवार को शहर में बादल छाए रहने के बाद सोमवार से बारिश का दौर बढ़ने के आसार हैं। मौसम के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 10 अगस्त को भोपाल में रुक रुककर बारिश हो सकती है। इसके बाद मंगलवार को भी बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि बुधवार को हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। यानी राजधानी में आने वाले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ रहने के बजाय बादलों और बारिश के बीच बदलता नजर आ सकता है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। दिन का तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है जबकि रात में तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने के आसार हैं। ऐसे मौसम में सुबह और शाम के समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि लगातार बादल और बारिश के कारण कई इलाकों में उमस की स्थिति भी बनी रह सकती है।

    सोमवार को बारिश का दौर रहने के कारण शहर में लोगों को आवाजाही के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को गीली सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता रखनी चाहिए। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने और सड़क पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। निचले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    भोपाल में बारिश के साथ तापमान में राहत मिलने की संभावना है। गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों के लिए बादल और बारिश राहत लेकर आ सकते हैं। हालांकि लगातार बारिश होने पर शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात संबंधी परेशानी भी सामने आ सकती है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से जल निकासी व्यवस्था पर नजर रखना जरूरी होगा।

    आने वाले दिनों में भी मौसम पूरी तरह स्थिर रहने की संभावना नहीं है। गुरुवार को बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि शुक्रवार को बारिश के साथ गरज चमक और तूफानी गतिविधि की आशंका भी जताई गई है। इसके बाद शनिवार को हल्की बारिश और रविवार को कुछ समय के लिए बारिश की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में अगले सप्ताह के दौरान भोपाल के मौसम में बादलों और बारिश का असर लगातार बना रहने की संभावना है।

    मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचें और गरज चमक के समय पेड़ या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों। घर से बाहर निकलते समय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा की योजना बनाना बेहतर रहेगा। किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए भी स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

    कुल मिलाकर भोपाल में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने के संकेत हैं। सोमवार से बारिश की संभावना बढ़ने के साथ तापमान में राहत बनी रह सकती है। हालांकि बारिश के कारण जलभराव और यातायात जैसी स्थानीय समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए लोगों के लिए बारिश का आनंद लेने के साथ जरूरी सावधानी बरतना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।

  • आधे मानसून में ही पिछड़ी बारिश, प्रदेश के 49 जिले प्रभावित; तीन दिन का अलर्ट बढ़ाएगा राहत की उम्मीद

    आधे मानसून में ही पिछड़ी बारिश, प्रदेश के 49 जिले प्रभावित; तीन दिन का अलर्ट बढ़ाएगा राहत की उम्मीद


    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक केवल 16.3 इंच वर्षा हुई है, जबकि इस समय तक करीब 20 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी लगभग 3.7 इंच पानी की कमी दर्ज की गई है। इसका असर खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 49 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। केवल छह जिलों में ही औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में सामान्य से 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि इंदौर में 2 प्रतिशत, उज्जैन में 14 प्रतिशत और जबलपुर में 29 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। राहत की बात केवल ग्वालियर के लिए है, जहां अब तक सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।

    भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई है। इससे साफ है कि पूरे प्रदेश में मानसून का वितरण संतुलित नहीं रहा है।

    हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिली। सीधी जिले में सबसे अधिक करीब 3 इंच वर्षा दर्ज की गई। ग्वालियर में 2.3 इंच, दतिया में 2 इंच, रीवा में 1.8 इंच, सतना में 1.2 इंच और शिवपुरी में लगभग 1 इंच बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, धार, नर्मदापुरम, पन्ना, श्योपुर, शाजापुर, मंडला, टीकमगढ़, बालाघाट और छतरपुर सहित 20 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए राहत भरी संभावना जताई है। विभाग के अनुसार प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, खरगोन, झाबुआ, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, सागर और कई अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से तेज बारिश होने की संभावना है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। यदि यह मौसम प्रणाली मजबूत बनी रही तो अगले कुछ दिनों में लगातार अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे अब तक की बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगस्त का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि इस दौरान अच्छी वर्षा होती है तो खरीफ फसलों को बड़ा फायदा मिलेगा।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • सीहोर में बारिश का नया दौर शुरू जावर और रेहटी सबसे ज्यादा भीगे बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ाएगा बरसात

    सीहोर में बारिश का नया दौर शुरू जावर और रेहटी सबसे ज्यादा भीगे बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ाएगा बरसात


    सीहोर । सीहोर जिले में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। रविवार और सोमवार के दौरान जिले के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई जिससे उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली और मौसम सुहाना हो गया। बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज होंगी तथा 22 जुलाई से जिले में भारी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।

    भू अभिलेख कार्यालय के अनुसार 20 जुलाई को जिले में औसतन 0.28 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। सबसे अधिक बारिश जावर और रेहटी क्षेत्र में हुई जहां क्रमशः 0.98 इंच और 0.93 इंच पानी गिरा। इसके अलावा इछावर में 0.20 इंच आष्टा में 0.12 इंच और बुधनी में 0.04 इंच वर्षा दर्ज की गई। वहीं सीहोर शहर श्यामपुर और भैरूंदा क्षेत्र में बारिश नहीं हुई हालांकि दिनभर बादल छाए रहने से मौसम ठंडा बना रहा।

    मानसून सीजन की शुरुआत एक जून से अब तक जिले में कुल औसतन 14.30 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि के 17.71 इंच की तुलना में कम है। जिले की सामान्य औसत वर्षा 45.21 इंच मानी जाती है। ऐसे में अभी भी सामान्य बारिश के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अच्छी वर्षा की जरूरत बनी हुई है।

    क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार सबसे अधिक बारिश आष्टा क्षेत्र में दर्ज की गई है जहां अब तक 19.76 इंच पानी गिर चुका है। इसके बाद जावर में 17.87 इंच भैरूंदा में 15.31 इंच इछावर में 14.88 इंच और रेहटी में 14.60 इंच वर्षा दर्ज की गई है। दूसरी ओर सीहोर शहर में अब तक 12.94 इंच और बुधनी में 11.48 इंच बारिश हुई है जबकि श्यामपुर सबसे पीछे है जहां केवल 7.73 इंच वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो रहा है। इसके साथ मानसून ट्रफ मध्य प्रदेश के मध्य हिस्से से गुजर रही है। इस वजह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से पर्याप्त नमी प्रदेश में पहुंच रही है। इसी मौसम प्रणाली के प्रभाव से मालवा और मध्य क्षेत्र में वर्षा की गतिविधियां लगातार बढ़ने की संभावना है।

    मौसम वैज्ञानिकों ने अगले 24 से 48 घंटों तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। वहीं 22 और 23 जुलाई से जिले में भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन और मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने तथा आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है। यदि मौसम प्रणाली पूरी तरह सक्रिय रहती है तो आने वाले दिनों में जिले में झमाझम बारिश से जलस्तर बढ़ने और खरीफ फसलों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • एमपी में अगले 24 घंटे भारी, 23 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; नदियां उफान पर, प्रशासन अलर्ट

    एमपी में अगले 24 घंटे भारी, 23 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; नदियां उफान पर, प्रशासन अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरे शबाब पर है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के 23 जिलों में भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की है क्योंकि कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर दमोह बैतूल देवास आलीराजपुर उमरिया सिवनी छिंदवाड़ा और अनूपपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रतलाम उज्जैन धार शाजापुर सीहोर विदिशा गुना नर्मदापुरम नरसिंहपुर जबलपुर मंडला बालाघाट डिंडौरी और पन्ना में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल ग्वालियर मुरैना दतिया शिवपुरी रीवा सतना सीधी सिंगरौली खंडवा खरगोन हरदा और अन्य कई जिलों में भी तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    बालाघाट जिले से सोमवार सुबह सामने आए वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। किरनापुर और लांजी के बीच बहने वाली बाघ नदी में तेज बहाव के कारण कार जेसीबी और लोडर जैसी मशीनें पानी में बहती दिखाई दीं। बताया जा रहा है कि यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 150 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि निर्माण कंपनी की ओर से घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। छिंदवाड़ा में लगभग 3 इंच बारिश हुई जबकि उज्जैन और बालाघाट में सवा दो इंच तथा उमरिया और खजुराहो में करीब 2 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। टीकमगढ़ सिवनी श्योपुर ग्वालियर भोपाल मंडला और कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    बारिश के बीच पांढुर्णा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं सीहोर में घने बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया। कई शहरों में बाजारों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 163.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हुई है जबकि पूर्वी हिस्से में अब भी बारिश का आंकड़ा औसत से कम बना हुआ है। विभाग का मानना है कि जुलाई में मानसून और अधिक सक्रिय रहेगा तथा इसी महीने प्रदेश में कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होने की संभावना है।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बारिश के दौरान नदी नालों को पार करने का प्रयास न करें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।