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  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • सीहोर में बारिश का नया दौर शुरू जावर और रेहटी सबसे ज्यादा भीगे बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ाएगा बरसात

    सीहोर में बारिश का नया दौर शुरू जावर और रेहटी सबसे ज्यादा भीगे बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ाएगा बरसात


    सीहोर । सीहोर जिले में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। रविवार और सोमवार के दौरान जिले के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई जिससे उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली और मौसम सुहाना हो गया। बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज होंगी तथा 22 जुलाई से जिले में भारी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।

    भू अभिलेख कार्यालय के अनुसार 20 जुलाई को जिले में औसतन 0.28 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। सबसे अधिक बारिश जावर और रेहटी क्षेत्र में हुई जहां क्रमशः 0.98 इंच और 0.93 इंच पानी गिरा। इसके अलावा इछावर में 0.20 इंच आष्टा में 0.12 इंच और बुधनी में 0.04 इंच वर्षा दर्ज की गई। वहीं सीहोर शहर श्यामपुर और भैरूंदा क्षेत्र में बारिश नहीं हुई हालांकि दिनभर बादल छाए रहने से मौसम ठंडा बना रहा।

    मानसून सीजन की शुरुआत एक जून से अब तक जिले में कुल औसतन 14.30 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि के 17.71 इंच की तुलना में कम है। जिले की सामान्य औसत वर्षा 45.21 इंच मानी जाती है। ऐसे में अभी भी सामान्य बारिश के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अच्छी वर्षा की जरूरत बनी हुई है।

    क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार सबसे अधिक बारिश आष्टा क्षेत्र में दर्ज की गई है जहां अब तक 19.76 इंच पानी गिर चुका है। इसके बाद जावर में 17.87 इंच भैरूंदा में 15.31 इंच इछावर में 14.88 इंच और रेहटी में 14.60 इंच वर्षा दर्ज की गई है। दूसरी ओर सीहोर शहर में अब तक 12.94 इंच और बुधनी में 11.48 इंच बारिश हुई है जबकि श्यामपुर सबसे पीछे है जहां केवल 7.73 इंच वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो रहा है। इसके साथ मानसून ट्रफ मध्य प्रदेश के मध्य हिस्से से गुजर रही है। इस वजह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से पर्याप्त नमी प्रदेश में पहुंच रही है। इसी मौसम प्रणाली के प्रभाव से मालवा और मध्य क्षेत्र में वर्षा की गतिविधियां लगातार बढ़ने की संभावना है।

    मौसम वैज्ञानिकों ने अगले 24 से 48 घंटों तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। वहीं 22 और 23 जुलाई से जिले में भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन और मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने तथा आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है। यदि मौसम प्रणाली पूरी तरह सक्रिय रहती है तो आने वाले दिनों में जिले में झमाझम बारिश से जलस्तर बढ़ने और खरीफ फसलों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • एमपी में अगले 24 घंटे भारी, 23 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; नदियां उफान पर, प्रशासन अलर्ट

    एमपी में अगले 24 घंटे भारी, 23 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; नदियां उफान पर, प्रशासन अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरे शबाब पर है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के 23 जिलों में भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की है क्योंकि कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर दमोह बैतूल देवास आलीराजपुर उमरिया सिवनी छिंदवाड़ा और अनूपपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रतलाम उज्जैन धार शाजापुर सीहोर विदिशा गुना नर्मदापुरम नरसिंहपुर जबलपुर मंडला बालाघाट डिंडौरी और पन्ना में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल ग्वालियर मुरैना दतिया शिवपुरी रीवा सतना सीधी सिंगरौली खंडवा खरगोन हरदा और अन्य कई जिलों में भी तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    बालाघाट जिले से सोमवार सुबह सामने आए वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। किरनापुर और लांजी के बीच बहने वाली बाघ नदी में तेज बहाव के कारण कार जेसीबी और लोडर जैसी मशीनें पानी में बहती दिखाई दीं। बताया जा रहा है कि यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 150 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि निर्माण कंपनी की ओर से घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। छिंदवाड़ा में लगभग 3 इंच बारिश हुई जबकि उज्जैन और बालाघाट में सवा दो इंच तथा उमरिया और खजुराहो में करीब 2 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। टीकमगढ़ सिवनी श्योपुर ग्वालियर भोपाल मंडला और कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    बारिश के बीच पांढुर्णा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं सीहोर में घने बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया। कई शहरों में बाजारों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 163.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हुई है जबकि पूर्वी हिस्से में अब भी बारिश का आंकड़ा औसत से कम बना हुआ है। विभाग का मानना है कि जुलाई में मानसून और अधिक सक्रिय रहेगा तथा इसी महीने प्रदेश में कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होने की संभावना है।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बारिश के दौरान नदी नालों को पार करने का प्रयास न करें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।

  • बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट

    बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट


    इंदौर । इंदौर में मानसून ने जुलाई की शुरुआत से ही जोरदार दस्तक दी है। पिछले दो दिनों में शहर में करीब पांच इंच बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। बुधवार को करीब ढाई इंच बारिश के बाद गुरुवार रात फिर तेज बारिश हुई और शुक्रवार सुबह तक शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भरा रहा। लगातार हो रही बारिश के बीच अधूरे सड़क और ड्रेनेज निर्माण कार्यों ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

    बारिश के बाद एमबी रोड, रिंग रोड, नेहरू नगर, अटल द्वार, निपानिया, स्टार चौराहा और द्वारकापुरी समेत कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। कई स्थानों पर ड्रेनेज लाइन, स्टॉर्म वॉटर लाइन और पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के बाद सड़कें समय पर दुरुस्त नहीं की गईं। कहीं केवल मिट्टी और गिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया, जो बारिश में दलदल में बदल गई। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सत्यसांई चौराहे के पास तेज बारिश के दौरान एक बड़ा पेड़ का हिस्सा सड़क पर गिर गया। हालांकि इस हादसे में एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। वहीं कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालक गड्ढों और फिसलन के कारण गिरकर घायल हो गए। बारिश के पानी में गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

    एमआर-11 मार्ग पर निर्माण कार्य के चलते बनाए गए डायवर्शन मार्ग भी बारिश में खतरनाक साबित हो रहे हैं। देवास नाका और निपानिया चौराहे के आसपास खुदाई के बाद सड़क की ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। मानसरोवर क्षेत्र में हाल ही में बनी सड़क पहली ही बारिश में उखड़ने लगी है, जबकि महालक्ष्मी नगर से निपानिया तक की सीमेंटेड सड़क भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सड़क किनारे पक्के फुटपाथ नहीं होने से पूरा इलाका कीचड़ और दलदल में बदल गया है।

    हाल ही में बनाई गई स्टॉर्म वॉटर लाइन भी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। स्टार चौराहे पर घंटों तक पानी जमा रहा। वहीं जंजीरवाला चौराहे और रॉयल पार्क क्षेत्र में अधूरे निर्माण कार्यों के कारण हर बारिश में जलभराव की समस्या सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं।

    मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत रेडिसन चौराहे से रोबोट चौराहे तक चल रहे निर्माण कार्य ने भी ट्रैफिक और सड़क व्यवस्था को प्रभावित किया है। मुख्य सड़क संकरी होने और सर्विस रोड की खराब स्थिति के कारण बारिश के दौरान आवागमन और मुश्किल हो गया है। वहीं द्वारकापुरी क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। कई परिवारों ने घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए मुख्य दरवाजों के सामने सीमेंट की छोटी दीवारें तक बना ली हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर शहर की अधूरी परियोजनाओं और कमजोर आधारभूत ढांचे की पोल खोल दी है।

  • क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया डिलीवरी बॉय ने उठाया खौफनाक कदम इंदौर में दो युवकों की मौत से सनसनी

    क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया डिलीवरी बॉय ने उठाया खौफनाक कदम इंदौर में दो युवकों की मौत से सनसनी


    इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच एक युवा डिलीवरी बॉय की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंदन नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से आर्थिक परेशानियों और क्रेडिट कार्ड के कर्ज को लेकर तनाव में था। वहीं शहर के आजाद नगर क्षेत्र में भी एक 21 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। दोनों मामलों की पुलिस जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार चंदन नगर के व्यास नगर निवासी लखन कोटे ने बुधवार को अपने घर में जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर उसकी पत्नी ने परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी जिसके बाद परिजन उसे तत्काल एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन गुरुवार तड़के उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि लखन पार्सल डिलीवरी का काम करने के साथ साथ रेपिडो चलाकर भी परिवार का खर्च उठाता था। पिछले कुछ समय से आमदनी कम हो गई थी जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे थे। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज लिया था। परिजनों के अनुसार वह समय पर भुगतान नहीं कर पा रहा था और इसी कारण मानसिक तनाव में रहने लगा था। हालांकि उसने कितना कर्ज लिया था इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    लखन की शादी करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। परिवार में उसके माता पिता पत्नी और बड़ा भाई हैं। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है इसलिए आत्महत्या के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस आर्थिक लेनदेन और अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

    इधर आजाद नगर थाना क्षेत्र के इदरीश नगर में रहने वाले 21 वर्षीय अनोज एड्रयू ने भी अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। उसका शव कुछ परिचित लोग अस्पताल लेकर पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि शव अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल इस मामले में भी जांच जारी है और आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीरता की ओर संकेत करती हैं। पुलिस दोनों मामलों में सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम

    शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम


    इंदौर  इंदौर में मानसून की दस्तक के बावजूद बारिश की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है। जून का महीना समाप्ति की ओर है लेकिन अब तक शहर में करीब 4 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। अच्छी बारिश का आखिरी दौर 24 जून को देखने को मिला था जब शहर के अलग अलग हिस्सों में आधा इंच से लेकर करीब 2 इंच तक पानी बरसा था। इसके बाद मौसम में लगातार बदलाव तो देखने को मिला लेकिन तेज बारिश नहीं हो सकी।

    पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद आसमान में बादल छा रहे हैं और बारिश जैसे हालात बन रहे हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी या रिमझिम तक ही मौसम सीमित रह गया। मंगलवार सुबह भी धूप और बादलों की आवाजाही का सिलसिला जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार शाम के समय हल्की बारिश होने की संभावना है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

    कम बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले सात दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है जो सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक है। वहीं रात का तापमान भी लगातार 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। सामान्य से अधिक तापमान के कारण दिन में उमस और रात में गर्मी लोगों को परेशान कर रही है।

    इस वर्ष 24 जून को मध्य प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था और इंदौर सहित प्रदेश के 15 जिलों में इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह आगे बढ़ने के बजाय एक क्षेत्र में ही ठहर गया। इसी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दोबारा सक्रिय होकर आगे बढ़ने के बाद ही व्यापक वर्षा का दौर शुरू होगा।

    बारिश की कमी का असर केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के उत्तरी क्षेत्रों खासकर ग्वालियर चंबल सागर और रीवा संभाग में भी तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। इन इलाकों में भी लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

    यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून के महीने में इंदौर में तापमान में अच्छी गिरावट देखने को मिलती रही है और औसतन पर्याप्त वर्षा भी दर्ज होती रही है। पिछले वर्ष जून में शहर में लगभग साढ़े पांच इंच बारिश हुई थी जबकि वर्ष 1980 में जून के महीने में 17 इंच से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बना था। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में करीब 5 इंच बारिश दर्ज की गई थी जो आज भी एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि मानसून सक्रिय होता है तो बारिश की रफ्तार तेज हो सकती है। फिलहाल शहरवासियों को हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल

    मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी भोपाल, सीहोर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मजदूर राधेश्याम और गृहिणी केनू शामिल हैं। केनू अपने पीछे तीन साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उधर बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में चंपा नदी उफान पर होने के कारण सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया। सिप्लाई गांव के राजेश बिहारे और दद्दू धुर्वे बाइक सहित नदी के रपटे से बह गए थे। रातभर चले तलाश अभियान के बाद मंगलवार सुबह दोनों के शव रपटे से करीब एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिले।

    पांढुर्णा जिले में सोमवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह मुंगणापार-मोहगांव मार्ग पर एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और आसपास के आठ गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। प्रशासन ने पेड़ हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम शुरू कर दिया है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कुल 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में हल्की बारिश की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और शुरुआती दौर में 15 जिलों तक इसकी आधिकारिक पहुंच दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह एक ही क्षेत्र में ठहर गया। इसी कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर भी बना रहा। फिलहाल मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 124.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जबकि अभी तक केवल 75.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 68 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 11 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, आकाशीय बिजली के समय खुले स्थानों में नहीं जाने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून पर लगा ब्रेक 43 जिलों में बारिश की चेतावनी ग्वालियर चंबल को करना होगा सबसे ज्यादा इंतजार

    मध्य प्रदेश में मानसून पर लगा ब्रेक 43 जिलों में बारिश की चेतावनी ग्वालियर चंबल को करना होगा सबसे ज्यादा इंतजार


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद उसकी रफ्तार फिलहाल थम गई है। दक्षिण पूर्वी हिस्से के 15 जिलों तक पहुंचने के बाद पिछले तीन दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में परिस्थितियां अनुकूल बनने की संभावना जताई है। इसके साथ ही शनिवार को प्रदेश के 43 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसून ने 24 जून को मध्य प्रदेश में प्रवेश किया था। इसके बाद आलीराजपुर इंदौर धार हरदा बैतूल खंडवा बुरहानपुर खरगोन छिंदवाड़ा पांढुर्णा सिवनी बालाघाट मंडला डिंडोरी और बड़वानी सहित 15 जिलों में इसकी आधिकारिक एंट्री दर्ज की गई। इसके बाद मानसून की प्रगति धीमी पड़ गई। विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून सबसे पहले भोपाल और उज्जैन संभाग की ओर आगे बढ़ सकता है जबकि ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में इसकी दस्तक सबसे आखिर में होने की संभावना है।

    शनिवार के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर झाबुआ आलीराजपुर धार बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन रतलाम आगर मालवा शाजापुर देवास नर्मदापुरम बैतूल हरदा जबलपुर कटनी नरसिंहपुर छिंदवाड़ा पांढुर्णा सिवनी बालाघाट मंडला डिंडोरी रीवा सतना सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर शहडोल उमरिया अनूपपुर सागर पन्ना दमोह और छतरपुर में बारिश की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा ग्वालियर श्योपुर मुरैना भिंड दतिया शिवपुरी गुना अशोकनगर नीमच मंदसौर निवाड़ी और टीकमगढ़ जिलों में भी कहीं कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। सिवनी में करीब दो इंच बारिश दर्ज की गई जबकि उज्जैन में डेढ़ इंच से अधिक पानी गिरा। शाजापुर के शुजालपुर और अकोदिया सहित कई क्षेत्रों में अच्छी वर्षा हुई। दतिया इंदौर राजगढ़ शिवपुरी मंडला रीवा सागर बालाघाट खंडवा आगर मालवा और मंदसौर सहित अनेक जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहा।

    बारिश के बीच कुछ स्थानों पर हादसे भी हुए। बालाघाट जिले में आकाशीय बिजली गिरने से दो बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हो गई जबकि छह लोग झुलस गए। वहीं देवास जिले के खटांबा गांव में आंधी और बारिश के दौरान एक गैलरी गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई और तीन लोग घायल हो गए।

    लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। खरगोन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा जबकि खंडवा सागर छिंदवाड़ा बैतूल सिवनी उमरिया धार और नर्मदापुरम में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। पांच बड़े शहरों में भोपाल और इंदौर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस उज्जैन का 33.5 डिग्री जबलपुर का 36.7 डिग्री जबकि ग्वालियर सबसे गर्म रहा जहां अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग का कहना है कि यदि अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो अगले दो से तीन दिनों में मानसून एक बार फिर सक्रिय होगा और प्रदेश के शेष हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा।

  • आज साल का सबसे लंबा दिन, 13 घंटे 50 मिनट तक चमका सूरज; भिंड में सबसे ज्यादा दिन का उजाला

    आज साल का सबसे लंबा दिन, 13 घंटे 50 मिनट तक चमका सूरज; भिंड में सबसे ज्यादा दिन का उजाला



    मध्यप्रदेश । 21 जून खगोल विज्ञान और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है। इस अवसर पर नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने लोगों को इस खगोलीय घटना की वैज्ञानिक जानकारी दी और इससे जुड़े भ्रमों को दूर किया।

    उन्होंने बताया कि ग्रीष्म संक्रांति के दिन पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर लगभग 23.5 डिग्री झुका रहता है। इसी कारण सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा पर पड़ती हैं और दिन की अवधि वर्ष में सबसे अधिक हो जाती है। यही वजह है कि 21 जून को सूरज सबसे अधिक समय तक आकाश में दिखाई देता है और रात सबसे छोटी होती है।

    अब शुरू होगा दक्षिणायन
    विशेषज्ञों के अनुसार 21 जून के बाद सूर्य की स्थिति धीरे-धीरे दक्षिण की ओर खिसकने लगती है, जिसे दक्षिणायन कहा जाता है। इसके साथ ही दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। यह प्रक्रिया आगामी छह महीनों तक जारी रहती है और मौसम में भी धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देने लगता है।

    जीरो शैडो डे को लेकर भ्रम
    कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि “जीरो शैडो डे” केवल उन क्षेत्रों में संभव होता है जो कर्क रेखा या उसके आसपास स्थित हैं। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में यह घटना अप्रैल और मई के दौरान देखी जा चुकी है। वहीं दिल्ली और जम्मू जैसे कर्क रेखा के उत्तर में स्थित शहरों में जीरो शैडो डे की घटना नहीं होती।

    मध्य प्रदेश में कहां रहा सबसे लंबा दिन?
    मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में भौगोलिक स्थिति के कारण अंतर देखने को मिला। प्रदेश में सबसे पहले सूर्योदय सिंगरौली में सुबह 5:12 बजे हुआ, जबकि सबसे देर से सूर्यास्त नीमच में शाम 7:22 बजे दर्ज किया गया।

    सबसे लंबे दिन का रिकॉर्ड भिंड के नाम रहा, जहां दिन की अवधि 13 घंटे 50 मिनट रही। वहीं भोपाल में 13 घंटे 34 मिनट, ग्वालियर में 13 घंटे 47 मिनट और मुरैना में 13 घंटे 48 मिनट का दिन दर्ज किया गया।

    प्रमुख शहरों में दिन की अवधि
    भोपाल – 13 घंटे 34 मिनट
    इंदौर – 13 घंटे 32 मिनट
    जबलपुर – 13 घंटे 33 मिनट
    ग्वालियर – 13 घंटे 47 मिनट
    मुरैना – 13 घंटे 48 मिनट
    भिंड – 13 घंटे 50 मिनट (सबसे लंबा दिन)
    रीवा – 13 घंटे 40 मिनट
    सिंगरौली – 13 घंटे 38 मिनट
    नीमच – 13 घंटे 38 मिनट (सबसे देर से सूर्यास्त)
    प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत संगम

    ग्रीष्म संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी और सूर्य के बीच संतुलन का अद्भुत उदाहरण भी है। यह दिन हमें ब्रह्मांड की जटिल लेकिन आकर्षक व्यवस्थाओं को समझने का अवसर देता है। 21 जून के बाद दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे और दिसंबर में वर्ष की सबसे लंबी रात का दौर आएगा।

  • मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं

    मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून अब 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून की इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बोवनी प्रभावित होने लगी है। प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तो देखने को मिली हैं, लेकिन बारिश की मात्रा खेती के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच मध्य प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी यानी करीब 1.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल लगभग 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 13 जिलों में आधा इंच यानी 12.5 मिमी से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन शामिल हैं। वहीं आलीराजपुर ऐसा जिला है जहां अब तक बारिश का आंकड़ा शून्य है।

    कम बारिश और मानसून की देरी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ का कहना है कि सफल बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक है। इतनी बारिश होने पर मिट्टी में पर्याप्त नमी बनती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बोवनी करने से बचें।

    दरअसल, मानसून के समय पर आने की उम्मीद में कई किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बोवनी कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से उनके बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि पर्याप्त नमी नहीं मिली तो किसानों को दोबारा बोवनी करनी पड़ सकती है, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ेंगी। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी अच्छी बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हुआ। बैतूल में तापमान एक दिन में करीब 10 डिग्री तक नीचे आ गया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 28 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी और बारिश दोनों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मानसून की वास्तविक एंट्री पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही खरीफ सीजन और जल संसाधनों की स्थिति तय करेगा।