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  • उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन

    उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष स्नान कराया गया। इस दिव्य अनुष्ठान के बाद भगवान महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत कर भक्तों को दिव्य दर्शन कराए गए।

    भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटानाद के साथ हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान के मस्तक पर भांग चंदन तथा त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। जटाधारी बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप में किया गया जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न इस विशेष अनुष्ठान का सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं।

    भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और आकर्षक आभूषणों से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर विश्व कल्याण और सुख समृद्धि की कामना की गई।

    भस्म आरती के दौरान देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा दिखाई दिया। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन आस्था की जीवंत परंपरा है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिव्य आरती के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

  • महाकाल की भोर हुई दिव्य आराधना से आलोकित भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप ने मोहा मन भांग चंदन और पुष्पों से हुआ राजसी श्रृंगार

    महाकाल की भोर हुई दिव्य आराधना से आलोकित भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप ने मोहा मन भांग चंदन और पुष्पों से हुआ राजसी श्रृंगार


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच पूजन की शुरुआत हुई। सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत अर्पित कर विशेष स्नान कराया गया। प्रथम घंटाल बजने के साथ हरि ओम का जल अर्पित किया गया और पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण छा गया।

    कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को जटाधारी स्वरूप में अलंकृत किया गया। उनके मस्तक पर रजत चंद्र सुशोभित किया गया तथा भांग और चंदन अर्पित कर दिव्य तिलक लगाया गया। गुलाब की सुगंधित मालाओं से भगवान का श्रृंगार किया गया। रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल का स्वरूप भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रहा। इसके बाद परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न होने वाली यह प्राचीन परंपरा महाकाल मंदिर की सबसे विशेष धार्मिक विधियों में मानी जाती है।

    भस्म अर्पित करने के उपरांत भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग ड्रायफ्रूट सुगंधित पुष्प और आकर्षक आभूषण अर्पित किए गए। शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और रंग बिरंगी पुष्पमालाओं से बाबा महाकाल का अलौकिक स्वरूप सजाया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर आरती संपन्न हुई।

    भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु तड़के ही मंदिर पहुंच गए थे। जैसे ही आरती शुरू हुई पूरा मंदिर हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगल की कामना की। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। सोमवार की इस दिव्य आराधना ने एक बार फिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर कर दिया।

  • उज्जैन महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती, राजा स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन

    उज्जैन महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती, राजा स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन


    नई दिल्ली । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और मनोहारी श्रृंगार किया गया। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में पहुंच गए थे।

    आरती की शुरुआत सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम और स्वस्ति वाचन से हुई। इसके बाद परंपरा के अनुसार आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला गया और गर्भगृह के पट खोले गए। पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधिवत पंचामृत पूजन किया तथा कर्पूर आरती अर्पित की।

    पूजन के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात भगवान का भांग, चंदन, सिंदूर और आकर्षक आभूषणों से राजा स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार किया गया। दिव्य स्वरूप के दर्शन करते ही पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।

    श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाएं धारण कराई गईं। साथ ही ड्रायफ्रूट, ताजे फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। नंदी हाल में भी नंदी महाराज का स्नान, पूजन और ध्यान संपन्न कराया गया।

    इसके बाद ज्योतिर्लिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए और सुख, समृद्धि तथा कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में पूरी व्यवस्था सुचारु रही और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आरती का आनंद लिया।

  • उज्जैन में महाकाल की श्रावस मास की सवारी 3 अगस्त को, अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा

    उज्जैन में महाकाल की श्रावस मास की सवारी 3 अगस्त को, अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में विश्वर प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावाण मास की पहली सवारी आगामी 3 अगस्त को निकलेगी। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने मंगलवार रात्रि में प्रशासनिक एवं पुलिस अमले के साथ भगवान महाकाल के सवारी मार्ग का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया।

    कलेक्टर ने सर्वप्रथम पालकी द्वार का का निरीक्षण किया और वहां ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। सवारी मार्ग के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य एवं मरम्मत कार्यों के साथ सड़क, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, पेयजल, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया।

    कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रावण-भादौ मास की सवारियों से पूर्व सभी आवश्यक कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सवारी मार्ग पर स्वच्छता, विद्युत एवं पेयजल व्यवस्था, बैरिकेडिंग सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जाएं, ताकि भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    कलेक्टर सिंह ने रामघाट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, और सवारी मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्यों की शीघ्र लेवलिंग पूर्ण कर मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। ढाबा रोड पर स्थित जीर्ण शीर्ण भवनों एवं निर्माणाधीन भवनों के आसपास सवारी के दौरान कड़ा बीन का उपयोग न करने के सख्त निर्देश दिए गए।

    निर्माणाधीन मकानों के आसपास बेरीकेट्स लगाने तथा साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए ताकि कोई व्यक्ति अंदर प्रवेश ना करें । लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जीर्ण शीर्ण चिन्हित मकानों के आसपास पर्याप्त चेतावनी के साइन बोर्ड लगाए जाने के निर्देश दिए गए। ढाबा रोड पर खुले ट्रांसफार्मरों के आसपास जाली लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिए कि अब कोई नया निर्माण कार्य प्रारंभ न किया जाए तथा जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, उन्हें तेज गति से पूरा किया जाए।

    गोपाल मंदिर पहुंचकर वहां निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि रीगल टॉकीज क्षेत्र के आसपास सवारी के दौरान किसी भी व्यक्ति को खड़ा नहीं होने दिया जाए तथा पर्याप्त बैरिकेडिंग की जाए। निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्रेयांस कूमट, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • रविवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत त्रिनेत्र और त्रिशूल से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    रविवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत त्रिनेत्र और त्रिशूल से हुआ अलौकिक श्रृंगार

     


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और शिव स्तुति के बीच पूरा मंदिर शिवमय वातावरण में डूब गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का राजाधिराज स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर रजत त्रिनेत्र, त्रिपुंड और त्रिशूल सुशोभित किए गए। इसके साथ ही रजत जड़ित आभूषण, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर दिव्य स्वरूप सजाया गया। अलौकिक श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती कर विशेष भोग लगाया गया। गर्भगृह में विराजमान माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना भी की गई। नंदी महाराज का पूजन कर संपूर्ण आराधना संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। इस दिव्य अनुष्ठान का साक्षी बनने के लिए देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में भाग लिया और बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की।

  • सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार

    सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत अर्पित कर विशेष अभिषेक संपन्न हुआ।

    भस्म आरती की शुरुआत मंदिर परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाने के साथ हुई। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर उन्हें हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन तथा त्रिपुंड अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार आरंभ हुआ।

    सोमवार के विशेष अवसर पर भगवान महाकाल को जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। उनके मस्तक पर चंदन और वैष्णव तिलक लगाया गया तथा उन्हें राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव का यह स्वरूप वैराग्य, शक्ति और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। श्रृंगार के दौरान विविध आभूषणों और पूजन सामग्रियों का उपयोग कर बाबा महाकाल की अलौकिक छवि प्रस्तुत की गई।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। Maha Nirvani Akhada की ओर से परंपरानुसार भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और यही भस्म आरती की सबसे विशेष और दिव्य परंपरा मानी जाती है।

    भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल को शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल का मनोहारी स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा आरती के माध्यम से समस्त श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

    भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए। मंदिर परिसर पूरे समय हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता है कि भोर बेला में बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

  • सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, चंदन-आभूषण से सजा राजा स्वरूप

    सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, चंदन-आभूषण से सजा राजा स्वरूप


    मध्‍य प्रदेश। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन शुरू किया।

    इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। जटाधारी भगवान महाकाल को चंदन तिलक, भांग, त्रिपुंड और आभूषण अर्पित कर उन्हें राजा स्वरूप में भव्य रूप से श्रृंगारित किया गया।

    भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक प्रथम घंटा बजाकर की गई, जिसके बाद मंत्रोच्चार के बीच हरिओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती की गई। पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिवत भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। मोगरा और गुलाब की खुशबू से पूरा मंदिर परिसर महक उठा।

    भक्तों ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रही।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जो इस आरती को और भी विशेष बना देता है।

  • उज्जैन बनेगी देश की पहली सर्पमित्र नगरी सांपों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास जारी

    उज्जैन बनेगी देश की पहली सर्पमित्र नगरी सांपों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास जारी


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले को अब देश की पहली सर्पमित्र नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल का ऐलान किया है जिसका मुख्य उद्देश्य सांपों के संरक्षण के साथ-साथ समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। महाकाल की नगरी उज्जैन को सांपों का संरक्षण करने वाली पहली नगरी के रूप में स्थापित किया जा रहा है जहां सांपों के जीवन को बचाने और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे ।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सांप भगवान शिव के गले का हार हैं और इन्हें सुरक्षित करना महाकाल की नगरी का कर्तव्य बनता है। उनका मानना है कि सांपों को लेकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना बेहद जरूरी है ताकि न तो सांप किसी इंसान को नुकसान पहुंचाएं और न ही इंसान सांपों को नुकसान पहुंचाए। उनके इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है।

    प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाना

    उज्जैन में इस पहल के तहत अब तक 100 से ज्यादा विद्यार्थियों को हायर सेकंडरी स्कूलों में सांपों से सुरक्षित और मित्रवत तरीके से व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में सांपों के प्रति डर को कम करना और उनके संरक्षण के महत्व को समझाना है। आगामी चरणों में इस अभियान का विस्तार किया जाएगा जिसमें डॉक्टरों हेल्थ वर्कर्स किसानों और पंचायत सचिवों को भी सांपों के सुरक्षित संरक्षण के तरीके सिखाए जाएंगे।

    यह पहल उज्जैन में सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए जरूरी कदमों को लागू करेगी। सांपों के अलावा इस पहल में अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप न सिर्फ सांपों को बचाया जाएगा बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी बना रहेगा।

    सांपों के संरक्षण के लिए तैयार की गई योजनाएं

    उज्जैन को सर्प संरक्षण के लिए नोडल जिला बनाने का निर्णय लिया गया है जिसका मतलब है कि इस जिले में सांपों के संरक्षण के लिए अलग-अलग योजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन योजनाओं में सांपों के प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना उनकी प्रजनन दर बढ़ाना और उन्हें उपयुक्त वातावरण प्रदान करना शामिल होगा। इसके अलावा किसानों को जागरूक किया जाएगा ताकि वे कृषि कार्यों के दौरान सांपों को नुकसान न पहुंचाएं और उनके प्राकृतिक आवासों में हस्तक्षेप न करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सांपों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदम केवल उनके अस्तित्व को बचाने के लिए नहीं हैं बल्कि इस पहल से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। उनका मानना है कि सांपों और मनुष्यों के बीच मित्रवत संबंध स्थापित करके हम पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं जिससे समग्र पर्यावरण की रक्षा हो सकेगी।

    सांपों के संरक्षण से पर्यावरण संतुलन

    सांपों का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। वे छोटे कीटों और अन्य जीवों का शिकार करते हैं जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बना रहता है। सांपों की उपस्थिति से कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है जिससे कृषि क्षेत्र में कीटों के हमले की संभावना कम होती है और कृषि उत्पादकता भी बढ़ती है। यदि सांपों का संरक्षण सही तरीके से किया जाए तो यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए लाभकारी साबित होगा।

    इसके साथ ही सांपों के संरक्षण से स्थानीय समुदायों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ेगी। लोग अब सांपों को एक खतरनाक प्राणी के रूप में नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से के रूप में देखेंगे। इस तरह की जागरूकता से समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नया दृष्टिकोण विकसित होगा।

    सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल का प्रभाव

    सीएम डॉ. मोहन यादव की यह पहल न केवल सांपों के संरक्षण के लिए है बल्कि यह पूरे राज्य और देश के पर्यावरण के लिए एक बड़ी क्रांतिकारी बदलाव का संकेत देती है। उनके इस कदम से उज्जैन की पहचान एक पर्यावरण मित्र नगरी के रूप में होगी जो सांपों और अन्य वन्य जीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएगी। यह कदम उन लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा जो पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं।

    यह पहल उज्जैन को एक मिसाल बना सकती है जहां समाज और वन्य जीवों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध स्थापित किया जा सकता है जिससे न केवल सांपों का संरक्षण होगा बल्कि पूरे पर्यावरण का संतुलन भी बनाए रखा जा सकेगा।