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  • उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

    उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

    उज्जैन: में श्रद्धालुओं और शहरवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बढ़ाने की दिशा में नई शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को महाकाल लोक स्थित अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने शक्ति पथ से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रों का वाचन किया और डमरू वादन भी हुआ।

    उज्जैन में शुरू की गई यह सेवा श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को शहर के प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जाएगी। पहले चरण में धार्मिक पर्यटन के लिए 10 इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन बसों के जरिए यात्रियों को एक ही निर्धारित मार्ग पर उज्जैन के कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को पूरा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि करीब 21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक बस सेवा बंद हो गई थी। अब इस कमी को दूर करने के लिए परिवहन व्यवस्था को दोबारा विस्तार दिया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत शहर के भीतर नगरीय बस सेवाओं के साथ दूसरे शहरों और राज्यों तक बस कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना भी बताई गई है। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए 10 बसों से शुरुआत की गई है। आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ यात्रियों को अन्य मार्गों पर भी सुविधा मिल सकती है। प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के जरिए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है।

    उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा। यहां से बस महाकाल लोक पहुंचेगी। इसके बाद यात्रियों को हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर और सिद्धवट मंदिर तक ले जाया जाएगा।

    इसके बाद मार्ग में अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन शामिल होंगे। यात्रा पूरी होने के बाद बस दोबारा मेघदूत वन पार्किंग पहुंचकर निर्धारित चक्र पूरा करेगी।

    उज्जैन दर्शन सेवा के लिए यात्रियों को 200 रुपये शुल्क देना होगा। भुगतान के लिए यूपीआई की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बसों को इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित रखा गया है, जिससे इनके संचालन के दौरान सीधे तौर पर ईंधन आधारित उत्सर्जन नहीं होगा। इससे धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।

    उज्जैन में पहले चरण में 10 ई-बसों से सेवा शुरू की गई है। शहर के लिए कुल 100 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जा रही है और इनके लिए मक्सी रोड स्थित पुराने डिपो में चार्जिंग से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में बसों की संख्या बढ़ने के साथ शहर के अन्य निर्धारित मार्गों पर भी ई-बस सेवा का विस्तार किया जाना है।

    इस नई सेवा से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को एक ही बस रूट के जरिए कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। वहीं स्थानीय नागरिकों के लिए भी शहर में सार्वजनिक परिवहन का एक आधुनिक माध्यम उपलब्ध होगा। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से धार्मिक पर्यटन और शहरी परिवहन व्यवस्था को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

  • सुरेश रैना ने पत्नी संग किए बाबा महाकाल के दर्शन, तड़के भस्म आरती में शामिल होकर लिया आशीर्वाद

    सुरेश रैना ने पत्नी संग किए बाबा महाकाल के दर्शन, तड़के भस्म आरती में शामिल होकर लिया आशीर्वाद


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना रविवार, 27 सितंबर को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और सुबह आयोजित होने वाली दिव्य भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान रैना पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचान बनाने वाले रैना ने महाकाल के दरबार में पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    सुरेश रैना रविवार तड़के अपनी पत्नी के साथ महाकाल मंदिर पहुंचे। दोनों ने मंदिर में होने वाली प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल की आराधना की। इस दौरान उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर आरती के दर्शन किए। बताया गया कि रैना ने लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर इस धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया और बाबा महाकाल की भक्ति में समय बिताया।

    महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल के भक्तों के लिए भस्म आरती के दर्शन को विशेष पुण्यदायी और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। सुरेश रैना भी अपनी पत्नी के साथ इसी धार्मिक आयोजन में शामिल हुए और भगवान के समक्ष पूजा-अर्चना की।

    आरती के दौरान रैना का पूरा ध्यान धार्मिक अनुष्ठान पर केंद्रित रहा। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। सुबह के समय मंदिर परिसर में होने वाले इस आयोजन में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं। रैना की उज्जैन यात्रा भी इसी धार्मिक आस्था और दर्शन से जुड़ी रही।

    भस्म आरती संपन्न होने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से सुरेश रैना का स्वागत और सम्मान किया गया। मंदिर में उनके आगमन के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया गया। इस तरह उनकी मंदिर यात्रा का समापन भगवान महाकाल के दर्शन और मंदिर समिति की ओर से किए गए सम्मान के साथ हुआ।

    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों और विशेष आरतियों के दौरान मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिलती है। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल है, जिसमें भाग लेने के लिए श्रद्धालु पहले से दर्शन की व्यवस्था करते हैं।

    सुरेश रैना की उज्जैन यात्रा के दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं। दोनों ने एक साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में हिस्सा लिया। क्रिकेट से जुड़े अपने सार्वजनिक जीवन के अलावा रैना की यह यात्रा धार्मिक आस्था से जुड़ी रही। भगवान महाकाल के दरबार में पहुंचकर उन्होंने पूजा-अर्चना की और आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताया।

  • उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार, 27 सितंबर को उज्जैन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे शहर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का भूमिपूजन, लोकार्पण और अन्य गतिविधियां निर्धारित हैं। इसके साथ ही वे सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों की सौगात देंगे। उज्जैन में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री भोपाल के लिए रवाना होंगे, जहां शाम को भी उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्यमंत्री का उज्जैन दौरा सुबह से ही शुरू हो गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 7 बजे दशहरा मैदान पहुंचे। यहां सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 7:55 बजे मुख्यमंत्री वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचे। सुबह के कार्यक्रम पूरे होने के बाद दिन के अन्य आयोजनों की तैयारियां की गईं।

    मुख्यमंत्री का अगला प्रमुख कार्यक्रम महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। निर्धारित समय के अनुसार, वे सुबह 10:45 बजे महाकाल मंदिर के पार्किंग परिसर में अन्न क्षेत्र के सामने पहुंचेंगे। इसके बाद सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान विकास कार्यों से जुड़े भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन करेंगे और तैयार कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इसके अलावा, सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा। इस आयोजन में प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुनने का कार्यक्रम भी शामिल है। धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    महाकाल मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:40 बजे वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। यहां से आगे के कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी करेंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शाजापुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन सहभागिता निर्धारित है।

    दोपहर 2:20 बजे मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से उज्जैन हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे के बीच हेलीकॉप्टर से भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। राजधानी पहुंचने के बाद उनका अगला कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में निर्धारित है। दोपहर 3:25 बजे वे कार से पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे और 3:30 बजे स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां का कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री का दिन का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। शाम 6:30 बजे वे भोपाल के रविंद्र भवन पहुंचेंगे। यहां निर्धारित स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे कार से वापस अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    इस प्रकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 सितंबर का कार्यक्रम उज्जैन और भोपाल के बीच निर्धारित है। उज्जैन में विकास कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और धार्मिक नगरी से जुड़े आयोजनों में भाग लेने के बाद वे राजधानी में शाम के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पूरे दिन के दौरे में धार्मिक, विकासात्मक, कृषि और संगठनात्मक गतिविधियां उनके कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।

  • उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने नीलगंगा रोड क्षेत्र में पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर आवागमन को सुगम बनाना और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान इन कार्यों की प्रगति और उनकी गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को देखा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन शहर के मध्य स्थित बाबा महाकाल के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण शहर के विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ आने वाले समय में श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में प्रमुख मार्गों का विकास और उनका बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। चौड़े और व्यवस्थित मार्ग श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने में मदद करेंगे और उज्जैन आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभाएंगे।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों से संबंधित अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि काम केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण और अन्य अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने की दिशा में कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनका उद्देश्य आयोजन के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।

    मुख्यमंत्री ने मार्ग चौड़ीकरण के लिए प्रशासन के साथ स्वेच्छा से सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने सहयोग करने वाले लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हुए कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। शहर के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में नागरिक सहयोग की भूमिका को उन्होंने सराहा।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित नजर रखने और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार काम पूरा कराने पर जोर दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण कार्यों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

    सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में अधोसंरचना विकास पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सड़क, मार्ग चौड़ीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण का उद्देश्य भी चल रहे कार्यों की स्थिति जानना और उन्हें तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ाना रहा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने निर्माण कार्यों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है। उज्जैन में जारी विकास कार्यों से आने वाले समय में शहर की यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • उज्जैन में अंतिम राजसी सवारी को लेकर तैयारी पूरी, दो हजार जवानों और अधिकारियों की तैनाती के बीच निकलेगी पालकी

    उज्जैन में अंतिम राजसी सवारी को लेकर तैयारी पूरी, दो हजार जवानों और अधिकारियों की तैनाती के बीच निकलेगी पालकी

    उज्जैन।  में श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी के क्रम में भाद्रपद माह की दूसरी, अंतिम और प्रमुख राजसी सवारी सोमवार 7 सितंबर को शाम चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से निकलेगी। यह श्रावण-भादों माह की छठी और अंतिम राजसी सवारी होगी। सवारी को लेकर प्रशासन और पुलिस स्तर पर तैयारियां की गई हैं। राजसी सवारी के दौरान करीब दो हजार जवानों सहित अधिकारी तैनात रहेंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की पालकी शाम चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होगी। इसके बाद पालकी महाकाल रोड, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी और हरसिद्धि पाल होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर मां शिप्रा के तट पर पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर और गजराज पर आरूढ़ भगवान श्री मनमहेश का पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके साथ ही आरती भी होगी।

    भाद्रपद माह की दूसरी और अंतिम सवारी को प्रमुख राजसी सवारी के रूप में निकाला जाएगा। इस दौरान भगवान श्री महाकालेश्वर अपने भक्तों को छह अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देंगे। राजसी सवारी के दौरान निकलने वाले इन स्वरूपों में भगवान के अलग-अलग रथ और पालकी शामिल रहेंगी।

    रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर विराजित होंगे, जबकि हाथी पर श्री मनमहेश का स्वरूप रहेगा। गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव और नंदी रथ पर श्री उमा-महेश विराजित रहेंगे। डोल रथ पर श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद तथा छठी सवारी में श्री सप्तधान के मुखारविंद शामिल रहेंगे। इस तरह राजसी सवारी के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर के छह स्वरूपों के दर्शन प्राप्त होंगे।

    राजसी सवारी के नगर भ्रमण से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। पूजन के बाद भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर को रजत पालकी में विराजित किया जाएगा। इसके पश्चात पालकी मंदिर से बाहर निकलकर नगर भ्रमण के लिए रवाना होगी।

    सवारी के दौरान निर्धारित मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम रहेंगे। करीब दो हजार पुलिस जवानों के साथ अधिकारी भी तैनात रहेंगे। राजसी सवारी के दौरान व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

    सवारी के मंदिर से निकलने से पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की पालकी को सलामी दी जाएगी। इसके साथ ही भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा। इसके बाद राजसी सवारी अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ेगी।

    राजसी सवारी के रामघाट पहुंचने पर मां शिप्रा के तट पर भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर और गजराज पर विराजित भगवान श्री मनमहेश का पूजन-अर्चन और आरती की जाएगी। इसके साथ ही भाद्रपद माह की दूसरी और अंतिम प्रमुख राजसी सवारी का महत्वपूर्ण धार्मिक क्रम पूरा होगा। सवारी के दौरान भगवान के छह स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

  • महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    मध्य प्रदेश। के उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में सोमवार को श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया और कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लोगों के बीच फैली अफवाह को इस स्थिति की वजह बताया जा रहा है।

    घटना महाकाल परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में उस समय हुई, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मौजूद थे। अचानक कुछ लोगों के बीच अफवाह फैलने के बाद भीड़ में हलचल बढ़ गई। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में आगे निकलने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की कोशिश शुरू हो गई, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

    भगदड़ जैसी स्थिति बनने के दौरान कई श्रद्धालु गिर गए और उन्हें चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही मंदिर प्रबंधन और प्रशासन भी सक्रिय हो गया तथा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई।

    उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बनने के बाद लोगों के घायल होने की खबर है। उन्होंने बताया कि दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    प्रारंभिक तौर पर अफवाह को घटना की वजह माना जा रहा है, हालांकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। भीड़ के बीच किसी भी तरह की अफवाह तेजी से फैलने पर ऐसी परिस्थितियां गंभीर रूप ले सकती हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को संयम बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है।

    घटना के बाद महाकाल परिसर में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिसर में सामान्य स्थिति बनाए रखना है।

    नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकाल परिसर का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी अफवाह या अचानक पैदा हुई स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और सुरक्षा कर्मचारियों को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।

    फिलहाल घटना में घायल श्रद्धालुओं की स्थिति और घायलों की कुल संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। जैसे-जैसे आधिकारिक स्तर पर और तथ्य सामने आएंगे, घटना की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

    इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से परिसर में निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा श्रृंगार किया गया। शनिवार तड़के हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया, सफेद और हरे रंगों से सजाया गया। इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंदिर के कपाट तड़के 2.30 बजे खोले गए। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत से अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न हुई।

    पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक और पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार शुरू हुआ। इस दौरान भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों के साथ भगवान का अलंकरण किया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के कारण इस बार श्रृंगार में तिरंगे के रंगों को प्रमुखता दी गई। बाबा महाकाल के मस्तक पर केसरिया, सफेद और हरे रंग का तिरंगा त्रिपुंड लगाया गया। इसके साथ रजत मुकुट पर भारत के तिरंगे का प्रतीक भी सजाया गया।

    श्रृंगार के दौरान भगवान के दोनों ओर हाथी के आभूषण लगाए गए। इसके अलावा रंग-बिरंगी पुष्प मालाओं से भी बाबा महाकाल का अलंकरण किया गया। भस्म आरती की धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजन और श्रृंगार की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

    भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को विभिन्न रजत आभूषणों से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इसके साथ पुष्प मालाओं और सुगंधित फूलों से भी भगवान का श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया और फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए इस विशेष श्रृंगार में धार्मिक परंपरा के साथ तिरंगे रंगों की झलक देखने को मिली।

    मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के बीच श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन किए।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने नंदी के कान के समीप अपनी मनोकामना व्यक्त की और आशीर्वाद मांगा।

    आरती के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे रंगों में सजे बाबा महाकाल के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए इस दिन के धार्मिक आयोजन की खास झलक रहे।

  • उज्जैन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किए महाकालेश्वर के दर्शन, सुख-शांति के लिए की विशेष प्रार्थना

    उज्जैन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किए महाकालेश्वर के दर्शन, सुख-शांति के लिए की विशेष प्रार्थना

    मध्य प्रदेश।  विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया और मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।

    उज्जैन की धार्मिक पहचान भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी हुई है। इसी आस्था के केंद्र में विधानसभा अध्यक्ष के पहुंचने पर मंदिर परिसर में निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार उनका स्वागत किया गया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने उनका स्वागत और सत्कार किया।

    मंदिर पहुंचने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने पूजा की विभिन्न प्रक्रियाओं में हिस्सा लेते हुए प्रदेश और देशवासियों के कल्याण की कामना की। पूजन के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए भगवान महाकाल से प्रार्थना की।

    दर्शन के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बाबा महाकाल के दर्शन करने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि मध्य प्रदेश और देश में सुख-समृद्धि बनी रहे तथा सभी प्रदेशवासियों का कल्याण हो।

    उन्होंने उज्जैन को आस्था और धार्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण नगरी बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी में आकर दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

    नरेंद्र सिंह तोमर का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब उज्जैन लगातार धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। महाकालेश्वर मंदिर में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष के मंदिर दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त रखी गई थी। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस तथा सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। अधिकारियों और कर्मचारियों ने निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्थाओं को संभाला।

    दर्शन और पूजन के दौरान मंदिर की सामान्य व्यवस्थाओं को भी बनाए रखा गया। श्रद्धालुओं की आवाजाही तथा धार्मिक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित होती रहीं। मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारी और कर्मचारी भी इस दौरान मौजूद रहे।

    पूजन कार्यक्रम पूरा होने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर मंदिर परिसर से रवाना हो गए। उनके दौरे के दौरान मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और प्रदेश तथा देश की खुशहाली की कामना पर जोर रहा।

    महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने एक बार फिर प्रदेशवासियों के कल्याण और देश में सुख-समृद्धि की कामना दोहराई। उनका यह धार्मिक दौरा उज्जैन की धार्मिक परंपरा और जनप्रतिनिधियों की आस्था से जुड़ा कार्यक्रम रहा।

  • उज्जैन में महाकाल का भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ शृंगार, राजा स्वरूप में सजे

    उज्जैन में महाकाल का भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ शृंगार, राजा स्वरूप में सजे

    उज्जैन । श्रावण मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर आज तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और दिव्य शृंगार के साथ संपन्न हुई।


    बुधवार तड़के करीब 2ः30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया। उनकी आज्ञा प्राप्त करने के बाद चांदी का द्वार खोला गया और गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद पुजारियों ने भगवान का शृंगार उतारकर विधि-विधान से पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया शुरू की।

    भगवान महाकाल का पहले पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया। अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक शृंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल राजा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते नजर आए। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। पुष्पों और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान के साथ भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती की इस परंपरा के बाद बाबा महाकाल के साकार स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए। भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर बाबा महाकाल से मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।


    महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार, महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को महाकाल की दैनिक पूजा परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। बाबा महाकाल के दर्शन होते ही श्रद्धालु ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाने लगे। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य राजा स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

  • सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती का आयोजन हुआ। सावन के पहले ही दिन बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटे। पूरा महाकाल धाम हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

    नियमों के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के बाद भगवान को भस्म अर्पित की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग चंदन त्रिपुंड रजत चंद्र और सुगंधित गुलाब के पुष्पों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट रजत शेषनाग मुकुट रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाला और आकर्षक पुष्पहार पहनाए गए। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का भी विधि विधान से पूजन किया गया। प्रथम घंटा बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और इस दिव्य दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    सावन के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर समिति के अनुसार पूरे सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजन अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। सावन के पहले दिन बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भस्म आरती ने श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की और पूरे महाकाल धाम को शिवमय बना दिया।