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  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त


    मुम्बई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया।

    पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।”

    दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

  • J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी

    J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency- NIA) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अनंतनाग जिले (Anantnag district) में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में छापेमारी की है। यह कार्रवाई ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी है, जिसमें शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल हैं—जैसे डॉक्टर, तकनीशियन और अन्य लोग—जो पारंपरिक आतंकवादी प्रोफाइल से अलग हैं। एनआईए की टीम ने कॉलेज परिसर में तलाशी ली और खास तौर पर एक डॉक्टर के लॉकर से राइफल बरामद होने के संबंध में साक्ष्य जुटाए।

    यह मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें आम आतंकवादियों के बजाय समाज के सम्मानित वर्ग के लोग शामिल थे। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेजों और अन्य सबूतों की खोज की, ताकि इस नेटवर्क के गहरे संबंधों और संरचना का पता लगाया जा सके।

    जांच की शुरुआत और लाल किले विस्फोट
    इस जांच की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब दिल्ली के लाल किले के पास एक कार बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इस हमले के बाद ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसमें डॉक्टरों का एक समूह शामिल था। इस मामले में प्रमुख आरोपी डॉ. आदिल अहमद रदर है, जो पहले GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रह चुका था। उसकी गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हुई, जहां वह एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था।

    डॉ. रदर के लॉकर से AK-56 राइफल और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसके बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया। अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरीदाबाद से बड़ी मात्रा में विस्फोटक जब्त किए गए हैं।


    जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

    जांच में यह भी पता चला कि डॉ. आदिल अहमद रदर कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोरा का रहने वाला है और उसने श्रीनगर के GMC से MBBS की डिग्री हासिल की थी। एनआईए के दावे के मुताबिक, वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा था और दिल्ली में हुए विस्फोट में उसकी भूमिका थी।

    मॉड्यूल में अन्य डॉक्टर भी शामिल थे, जिनमें डॉ. मुजामिल अहमद गनाई और डॉ. शाहीन सईद का नाम सामने आया है। एनआईए ने बताया कि यह समूह पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और वैश्विक कॉफी चेन जैसी जगहों पर हमले की साजिश रच रहा था। उनका लक्ष्य इजराइल-गाजा संघर्ष से प्रेरित होकर ऐसे हमले करना था। कुछ सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की भी योजना बनाई थी।


    आतंकवाद का नया चेहरा

    यह मामला आतंकवाद के एक नए रूप को दर्शाता है, जहां समाज के प्रतिष्ठित पेशेवर कट्टरपंथी विचारधारा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और अपनी शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति का गलत उपयोग कर रहे हैं। एनआईए की यह छापेमारी मॉड्यूल के बचे हुए सदस्यों और उनके नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जांच अभी जारी है और भविष्य में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह के मॉड्यूल समाज के लिए अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि ये सामान्य जीवन में घुलमिलकर काम करते हैं और अपनी पहचान छुपाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तेज कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है।

  • इंडिगो पर बड़ा एक्शन… DGCA ने लगाया 22.2 करोड़ का जुर्माना, अब शेयरों पर निवेशकों की नजर

    इंडिगो पर बड़ा एक्शन… DGCA ने लगाया 22.2 करोड़ का जुर्माना, अब शेयरों पर निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली।
    बीते दिसंबर महीने में इंडिगो एयरलाइन (Indigo Airlines) की ओर से की गई मनमानी पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन (Big Action) लिया है। दरअसल, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिसंबर में बड़े पैमाने पर हुई दिक्कतों के लिए इंडिगो एयरलाइन पर ₹22.2 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इस खबर के बाद अब सोमवार को इंडिगो के शेयर (Share) पर निवेशकों (Investors) की नजर रहेगी। बता दें कि डीजीसीए ने 68 दिनों के लिए हर दिन ₹3 लाख का जुर्माना और इसके अलावा ₹1.80 करोड़ का एक बार का सिस्टमैटिक पेनल्टी लगाया है। इस तरह, इंडिगो पर लगाया गया कुल जुर्माना ₹22.2 करोड़ हो गया है।


    परफॉर्मेंस

    इंडिगो के शेयर की बात करें तो बीएसई पर 4738.70 रुपये पर है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर में मामूली तेजी आई थी। अब सोमवार को शेयर का कैसा परफॉर्मेंस रहेगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन सरकार की कार्रवाई से निवेशक सहमे हुए हैं। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 6,225.05 रुपये है। वहीं, शेयर के 52 हफ्ते का लो 3,946.40 रुपये है।


    इंडिगो पर सरकार की कार्रवाई

    दरअसल, डीजीसीए ने दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो संकट की उड़ानों में व्यवधान की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर उस पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही एक अधिकारी को कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। नियामक ने एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को भी इस मामले में आगाह किया है। बता दें कि 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द रही थीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई थी। इसके बाद भी कई दिन तक बड़े पैमाने पर व्यवधान था लेकिन डीजीसीए ने अपनी कार्रवाई के लिए सिर्फ इन्हीं तीन दिनों को आधार बनाया है। जांच समिति ने 26 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

    नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को आगाह करके छोड़ दिया है जबकि मुख्य परिचालन अधिकारी इसिडर पोरक्रस को विंटर शिड्यूल और फ्लाइट ड्यूटी से संबंधित नये नियमों के असर के आकलन में विफल रहने के लिए चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर) जैसन हर्टर को मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई भी जिम्मेदारी का पद न देने का आदेश दिया गया है। इंडिगो से 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने के लिए भी कहा गया है। कंपनी जैसे-जैसे डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप लक्ष्यों को हासिल करती जाएगी, बैंक गारंटी की राशि उसे वापस मिलती जाएगी।

  • ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

    ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


    रायपुर।
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) ने बुधवार को बताया उसने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी’ (‘Mahadev Online Betting’) ऐप के मुख्य प्रवर्तकों में से एक सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) सहित विभिन्न आरोपियों की लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया है। जिसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने PMLA के तहत एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- GZCO के नाम पर रखी गई 74.28 करोड़ रुपए से अधिक की बैंक जमा राशि को जब्त किया।


    दोनों कंपनियों से बड़े पैमाने पर बनाई अपराध की आय

    इस बारे में एक बयान जारी करते हुए ईडी ने बताया कि, ये दोनों कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की आय (PoC) को छिपाने और बेदाग निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा ईडी ने बताया कि साथ ही Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की भी 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। इन जब्त की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स भी शामिल हैं, जिन्हें कैश से खरीदना पाया गया।


    अपराध की आय को बेनामी खातों के जरिए निकाला गया

    ईडी की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने भारी मात्रा में नगदी उत्पन्न की, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से निकाला गया। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया।


    सारे ग्राहक खो देते थे लगाए गई पूरी रकम

    इस दौरान इन अवैध सट्टेबाजी खेलों के ऐप्स/वेबसाइटों को इस तरह से तैयार किया गया था कि सभी ग्राहक अंततः पैसे खो देते थे। जिसके चलते इनके संचालकों के पास हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा हो गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा, बैंक अकाउंट खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए KYC का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी से मिले पैसे को उनके सोर्स को छिपाने के लिए लेयरिंग की गई। इन सभी ट्रांजैक्शन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स नेट में लाया गया।


    FPI के नाम पर वापस भारत आया अपराध की कमाई का पैसा

    जांच में पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो-एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किया गया और बाद में विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय स्टॉक मार्केट में वापस लाकर इन्वेस्ट किया गया। ED द्वारा की गई जांच में एक सोफिस्टिकेटेड कैशबैक स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये FPI एंटिटी भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थीं और बदले में, इन कंपनियों के प्रमोटरों को इन्वेस्टमेंट का 30% से 40% कैश में वापस देना होता था।


    गगन गुप्ता ने दो कंपनियों से लिया 98 करोड़ का फायदा

    जांच के दौरान एक आरोपी गगन गुप्ता को सालासर टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और टाइगर लॉजिस्टिक लिमिटेड जैसी एंटिटी से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपए का लाभ मिलना पाया गया। बता दें कि अब तक इस मामले की जांच के दौरान ED ने 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली है। साथ ही जांच के दौरान लगभग 2,600 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच भी की है। इसके अलावा, ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अब तक दायर की गई पांच प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। महादेव ऐप का प्रचार सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था। ये दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उनका विदेश से प्रत्यर्पण कराने की कोशिश की जा रही है। उनके संयुक्त अरब अमीरात में होने का पता चला था।

  • ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त

    ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त


    नई दिल्ली।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पंजाब (Punjab) में PACL से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को PACL और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना (Ludhiana, Punjab) में स्थित 3436.56 करोड़ रुपये की 169 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पता चला है कि “लाखों निवेशकों से जुटाए गए फंड का एक हिस्सा PACL के नाम पर इन 169 अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया था, जिनकी मौजूदा कीमत 3436.56 करोड़ रुपये है।”

    प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल ऑफिस ने इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जब्त किया है। यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा PACL लिमिटेड, PGF लिमिटेड, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई जांच के बाद की गई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह मामला PACL द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई गई धोखाधड़ी वाली पोंजी स्कीम और सामूहिक निवेश योजनाओं से संबंधित है। इन योजनाओं के जरिए PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धोखे से भोले-भाले निवेशकों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाए और उसका गबन कर लिया। ईडी ने इस मामले में अब तक 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देश बार में स्थित पर्ल ग्रुप की घरेलू संपत्तियां और विदेशी संपत्तियां दोनों शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में अब तक एक अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

  • फर्जी बैंक गारंटी से टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई… रिलायंस पावर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    फर्जी बैंक गारंटी से टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई… रिलायंस पावर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल


    नई दिल्ली।
    एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (Enforcement Directorate- ED) ने शनिवार को रिलायंस पावर लिमिटेड (Reliance Power Limited) और 10 अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering.) के एक मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह मामला 68 करोड़ रुपए से ज्यादा की फर्जी बैंक गारंटी के जरिए एक बड़ा सरकारी टेंडर हासिल करने से जुड़ा हुआ है. यह चार्जशीट दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दाखिल की गई है.

    इस चार्जशीट में रिलायंस पावर के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल, रिलायंस NU BESS लिमिटेड, रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड, रिलायंस ग्रुप के एग्जीक्यूटिव पुनीत नरेंद्र गर्ग और ट्रेड फाइनेंसिंग कंसल्टेंट अमर नाथ दत्ता का नाम शामिल किया गया है. इसके अलावा बायोथेन केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, रविंदर पाल सिंह चड्ढा और मनोज भैयासाहेब पोंगडे को भी आरोपी बनाया गया है.

    ED इससे पहले इस केस में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें ओडिशा की शेल कंपनी बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके MD पाठा सारथी बिस्वाल का नाम था. जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क कमीशन के बदले फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में शामिल था. यह मामला 68.2 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी से जुड़ा है, जो रिलायंस पावर की लिस्टेड कंपनी रिलायंस NU BESS लिमिटेड की तरफ से सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से टेंडर हासिल करने के लिए जमा की गई थी. ED का दावा है कि रिलायंस ग्रुप के अधिकारियों को पता था कि बैंक गारंटी फर्जी थी।

    जांच एजेंसी के अनुसार, SBI की एक नकली ईमेल ID के जरिए SECI को जाली एंडोर्समेंट भेजे गए. जब SECI को धोखाधड़ी का शक हुआ, तो एक दिन के भीतर IDBI बैंक से असली बैंक गारंटी जुटाने की कोशिश की गई, लेकिन तय समयसीमा के बाद जमा होने के कारण SECI ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. ED का आरोप है कि जब रिलायंस NU BESS लिमिटेड L-2 बिडर के तौर पर सामने आई और टेंडर हाथ से फिसलता दिखा, तो कोलकाता में SBI ब्रांच से एक और नकली विदेशी बैंक गारंटी का एंडोर्समेंट कराने की कोशिश की गई. इसके लिए एक बैंक के नाम पर फर्जी गारंटी तैयार की गई.

    जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी गारंटी को असली दिखाने के लिए sbi.co.in से मिलता-जुलता एक नकली डोमेन s-bi.co.in इस्तेमाल किया गया. इसी डोमेन से SBI के नाम पर फर्जी ईमेल और एंडोर्समेंट लेटर भेजे गए. ED ने यह भी आरोप लगाया है कि फर्जी बैंक गारंटी के इंतजाम के लिए जरूरी फंडिंग जुटाने को रिलायंस की दूसरी सब्सिडियरी रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड से बिस्वाल ट्रेडलिंक को फर्जी ट्रांसपोर्टेशन सर्विस के नाम पर 6.33 करोड़ रुपए भेजे गए. इस मामले में ED ने अब तक करीब 1000 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है. जांच में 5.15 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है।

    इस केस में बिस्वाल के साथ-साथ रिलायंस पावर के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल और अमर नाथ दत्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. रिलायंस पावर ने स्टॉक मार्केट को दिए अपने बयान में कहा है कि कंपनी, उसकी सब्सिडियरी और कर्मचारी पूरी तरह से निर्दोष हैं. वे थर्ड पार्टी द्वारा किए गए फ्रॉड, जालसाजी और साजिश के शिकार हैं. कंपनी का कहना है कि ED का यह केस उसी FIR पर आधारित है, जो खुद कंपनी ने दर्ज कराई थी. जांच एजेंसी के आरोपों की अभी तक न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है. यह मनी लॉन्ड्रिंग केस दिल्ली पुलिस की नवंबर 2024 में दर्ज FIR से निकला है।