Tag: Manipur

  • 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बैंक बंद, सिर्फ 29 को होगा कामकाज; ATM और नेट बैंकिंग सेवाएं जारी

    24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बैंक बंद, सिर्फ 29 को होगा कामकाज; ATM और नेट बैंकिंग सेवाएं जारी

    नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकों के लिए लंबी छुट्टियों की घोषणा की है। 24 दिसंबर बुधवार को देश के तीन राज्यों- नागालैंड मेघालय और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन क्रिसमस ईव के अवसर पर इन राज्यों में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा 25 दिसंबर गुरुवार को क्रिसमस के मौके पर देशभर के बैंकों में कामकाज नहीं होगा।जानकारी के अनुसार 26 दिसंबर शुक्रवार को नागालैंड मेघालय और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे। वहीं 27 दिसंबर शनिवार को महीने के चौथे शनिवार के चलते देशभर के बैंकों में कामकाज नहीं होगा। 28 दिसंबर रविवार को भी सभी राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। केवल 29 दिसंबर सोमवार को बैंकों में सामान्य कामकाज होगा।

    31 दिसंबर बुधवार को न्यू ईयर ईव के अवसर पर मिजोरम और मणिपुर में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा 30 दिसंबर मंगलवार को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे। इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अलग-अलग राज्यों और शहरों में बैंकों में कामकाज की स्थिति अलग-अलग दिन प्रभावित होगी।RBI की सूची के अनुसार 24 से 31 दिसंबर तक अधिकांश दिनों में विभिन्न राज्यों और शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दौरान केवल 29 दिसंबर को ही बैंकों में सामान्य कामकाज होगा। इसलिए ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन और जरूरी कामकाज में असुविधा से बचने के लिए पूर्व योजना बनाने की सलाह दी जा रही है।

    हालांकि बैंकों के बंद रहने के बावजूद एटीएम मोबाइल बैंकिंग नेट बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। ग्राहक ATM मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए पैसे निकालने चेक बैलेंस देखने और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस अवधि में शाखाओं में जाकर ड्राफ्ट चेक या अन्य काउंटर सेवाओं का उपयोग संभव नहीं होगा।विशेष रूप से क्रिसमस और न्यू ईयर के अवसर पर यह छुट्टियां बैंक कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे जरूरी बैंकिंग कार्य जैसे पैसे जमा करना चेक क्लियरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सेवाओं को पहले निपटा लें।

    RBI की घोषणा के अनुसार यह छुट्टियों का शेड्यूल सालाना बैंक हॉलिडे कैलेंडर के तहत जारी किया गया है। इस दौरान राज्यों और शहरों में छुट्टियों की सूची अलग-अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहक अपनी संबंधित शाखा से भी छुट्टियों की पुष्टि कर सकते हैं।इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं में रुकावट होने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग और ATM सेवाएं निरंतर उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक अपने जरूरी कामकाज के लिए इन विकल्पों का लाभ उठा सकते हैं।

  • मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी

    मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी


    नई दिल्ली । मणिपुर में मंगलवार रात हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर राज्य में तनाव का माहौल बन गया है। बिष्णुपुर जिले के बाहरी इलाकों में खासकर चूड़ाचांदपुर जिले की सीमा से लगे तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों के पास कई बार गोलीबारी हुई जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। अधिकारियों के मुताबिक गोलीबारी के कारणों और इसके मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    घटना के बाद सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर भेजा गया और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में ताजा गोलीबारी ने पहले से भड़क चुके जातीय संघर्ष को और उग्र बना दिया है। मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी हिंसा के बाद यह पहली बार नहीं है जब गोलीबारी की घटना सामने आई है।

    इस बीच राज्य में सरकार गठन की कवायद भी जारी है। बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर में स्थिरता लाने के लिए राज्य के बीजेपी विधायकों के साथ कई दौर की बातचीत की है। इनमें कुकी और मैतेई समुदाय के बीजेपी विधायक भी शामिल हैं। मणिपुर विधानसभा के स्पीकर सत्यब्रत और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत 34 विधायक हाल ही में पार्टी नेतृत्व से मिलने के लिए एक साथ बैठे थे। यह मुलाकातें हिंसा के बाद पहली बार हुई थीं जब दोनों समुदायों के विधायक एक साथ बातचीत में शामिल हुए थे।

    राज्य में जातीय हिंसा के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है और सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बीजेपी नेतृत्व का उद्देश्य मणिपुर में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करते हुए राज्य में एक मजबूत और समावेशी सरकार का गठन करना है।बीजेपी के नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली और समझौते के आधार पर ही राज्य में शांति की स्थिति बहाल की जा सकती है। हालांकि मणिपुर में संघर्ष की जड़ें गहरी हैं और हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कई बार सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा चुकी है। मणिपुर में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राज्य के लिए आगामी समय में स्थिरता लाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी

    बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक माहौल में भी गर्माहट बढ़ गई है। नेताओं ने भारत के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इस बीच नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के चुनावी प्रक्रिया में दखल दिया तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा और वे एक-दूसरे से अलग-थलग हो जाएंगे।

    यह बयान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर आया है जिन्हें “सेवल सिस्टर्स” के नाम से जाना जाता है। इनमें अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघालय नगालैंड मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। हसनत का यह बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

    हसनत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ विदेशी एजेंटों को समर्थन देने वालों को बांग्लादेश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका आरोप था कि शेख हसीना और उनके समर्थक अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए भारत का समर्थन लेते हैं जिससे बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

    हसनत ने आगे कहा “यदि भारत ने उन ताकतों को शरण दी जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं तो इसका परिणाम गंभीर होगा और यह पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा करेगा।” बांग्लादेश के इस वरिष्ठ नेता का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाकर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए वरना दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    यह बयान बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध को भी दर्शाता है। हालांकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल बना रहे।