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  • आमिर खान की तीसरी शादी पर धार्मिक विवाद गहराया, गैर-मुस्लिम जीवनसाथी से विवाह को लेकर शाही चीफ मुफ्ती की आपत्ति

    आमिर खान की तीसरी शादी पर धार्मिक विवाद गहराया, गैर-मुस्लिम जीवनसाथी से विवाह को लेकर शाही चीफ मुफ्ती की आपत्ति

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी तीसरी शादी के बाद एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। गैर-मुस्लिम गौरी स्प्रैट से उनके विवाह को लेकर मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है। उन्होंने इस्लामी शरीयत की अपनी व्याख्या के आधार पर कहा है कि किसी मुस्लिम पुरुष का गैर-मुस्लिम महिला से विवाह करना तब तक स्वीकार्य नहीं माना जाता, जब तक संबंधित महिला इस्लाम धर्म स्वीकार न कर ले। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।

    मौलाना इब्राहिम हुसैन का कहना है कि इस्लामी धार्मिक नियमों के अनुसार मुस्लिम पुरुष के लिए गैर-मुस्लिम महिला से विवाह करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में उन्होंने इसे शरीयत के विरुद्ध बताते हुए कहा कि ऐसा विवाह धार्मिक दृष्टि से मान्य नहीं माना जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ऐसे विवाह करते हैं, उन्हें अपने धार्मिक कर्तव्यों और मान्यताओं के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। उनके बयान को कई माध्यमों में फतवा जारी किए जाने के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    मौलाना ने अपने वक्तव्य में केवल अंतरधार्मिक विवाह ही नहीं, बल्कि बार-बार विवाह और तलाक के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति वैवाहिक जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर सकता, तो उसे बार-बार विवाह करने से बचना चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने बयान में सीधे तौर पर आमिर खान का नाम नहीं लिया, लेकिन हाल ही में एक फिल्म अभिनेता द्वारा गैर-मुस्लिम महिला से तीसरी शादी किए जाने का उल्लेख किया, जिसे आमिर खान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच आमिर खान या उनकी टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए इस विवाद पर अभिनेता का पक्ष सामने आना बाकी है। वहीं सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी अधिकार का विषय बता रहे हैं, जबकि कुछ धार्मिक दृष्टिकोण से इस पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार आमिर खान ने 5 जुलाई 2026 को गौरी स्प्रैट से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत निजी समारोह में रजिस्टर्ड विवाह किया था। गौरी स्प्रैट बेंगलुरु की रहने वाली हैं और ब्यूटी एवं वेलनेस क्षेत्र से जुड़ा व्यवसाय संचालित करती हैं। उनकी पिछली शादी से एक पुत्र भी है। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत भारत में अलग-अलग धर्मों के वयस्क नागरिक कानूनी रूप से विवाह कर सकते हैं।

    आमिर खान के निजी जीवन की बात करें तो यह उनका तीसरा विवाह है। उन्होंने पहला विवाह वर्ष 1986 में रीना दत्ता से किया था, जिनसे उनके दो बच्चे हैं। दोनों का वर्ष 2002 में तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2005 में फिल्म निर्माता किरण राव से विवाह किया। दोनों का एक पुत्र है और वर्ष 2021 में उन्होंने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया था। अब गौरी स्प्रैट के साथ उनका नया वैवाहिक जीवन चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल धार्मिक टिप्पणी और सार्वजनिक बहस के बीच सभी की नजर आमिर खान की संभावित प्रतिक्रिया और आगे के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

  • प्यार से हत्या तक क्यों पहुंच रहे रिश्ते एक्सपर्ट ने बताए बदलते समाज और मानसिक तनाव के चौंकाने वाले कारण

    प्यार से हत्या तक क्यों पहुंच रहे रिश्ते एक्सपर्ट ने बताए बदलते समाज और मानसिक तनाव के चौंकाने वाले कारण


    भोपाल । बीते कुछ समय में सामने आए कई चर्चित मामलों ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पति पत्नी और प्रेम संबंधों में हिंसा का स्वरूप पहले से अधिक खतरनाक होता जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के अलग अलग हिस्सों में सामने आए हत्या और गंभीर अपराधों के मामलों ने रिश्तों में बढ़ते तनाव और मानसिक असंतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती सामाजिक परिस्थितियां संवाद की कमी सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और विवाहेतर संबंधों से उपजा तनाव कई बार लोगों को हिंसक सोच की ओर धकेल देता है। हालांकि वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी अपराध को केवल महिला या पुरुष अथवा मानसिक बीमारी से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत और वैज्ञानिक दृष्टि से अनुचित होगा।

    भोपाल के मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार पिछले सात से आठ वर्षों में पुरुषों के साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से जुड़े मामलों में लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां गंभीर आक्रामकता या हत्या जैसे विचारों के साथ महीने में एक या दो मरीज इलाज के लिए आते थे वहीं अब हर महीने पांच से दस ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इनमें केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना और रिश्तों में लगातार बढ़ता तनाव भी प्रमुख कारण बनकर उभर रहा है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि उनके पास आने वाले कई मामलों में मरीज स्वयं स्वीकार करते हैं कि उनके मन में अपने जीवनसाथी को नुकसान पहुंचाने या हत्या करने जैसे विचार आते हैं। एक मामले में युवा महिला ने चिकित्सकों को बताया कि उसे डर है कहीं वह अपने पति की हत्या न कर दे। जांच में सामने आया कि लंबे समय से वह अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पा रही थी और व्यक्तित्व संबंधी समस्याओं से भी जूझ रही थी। उपचार और कपल काउंसलिंग के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया और हिंसक विचार समाप्त हो गए।

    एक अन्य मामले में एक व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसके मन में कई बार पत्नी की हत्या कर जेल जाने तक के विचार आते थे। जांच में उसमें डिप्रेशन और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याएं सामने आईं। विशेषज्ञों ने उसके मानसिक उपचार और व्यवहार नियंत्रण पर काम किया जिसके बाद उसकी स्थिति में सुधार देखा गया।

    डॉ. त्रिवेदी का कहना है कि सोशल मीडिया ने लोगों की अपेक्षाएं और तुलना की प्रवृत्ति बढ़ा दी है। संयुक्त परिवारों की जगह न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ने से भावनात्मक सहारा कम हुआ है। इसके साथ ही रिश्तों में संवाद की कमी और विवाहेतर संबंधों से पैदा होने वाला अविश्वास कई बार मानसिक दबाव को बढ़ा देता है। मनोरंजन के बदलते स्वरूप का भी असर देखने को मिल रहा है जहां अपराध करने वाले किरदारों को भी नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जिससे कुछ लोगों की सोच प्रभावित होती है।

    हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे अधिकांश लोग कभी हिंसक नहीं होते। किसी भी अपराध को केवल मानसिक रोग या किसी एक लिंग से जोड़कर देखना उचित नहीं है। यदि रिश्तों में लगातार तनाव गुस्सा अवसाद या हिंसक विचार महसूस हों तो समय रहते मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की मदद लेना बेहद जरूरी है। सही समय पर काउंसलिंग और उपचार न केवल रिश्तों को बचा सकता है बल्कि किसी बड़ी और दुखद घटना को भी टाल सकता है।

  • निजी रिश्तों के तनाव से जब थम गई थी सुरीली जुगलबंदी, किशोर कुमार ने मिथुन के लिए गाना बंद करने के बाद उन्हीं के लिए रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत

    निजी रिश्तों के तनाव से जब थम गई थी सुरीली जुगलबंदी, किशोर कुमार ने मिथुन के लिए गाना बंद करने के बाद उन्हीं के लिए रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत

    नई दिल्ली ।  भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले महान गायक किशोर कुमार और डिस्को डांसर के नाम से मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा सामने आया है। अपने दौर में हर बड़े अभिनेता की आवाज बनने वाले किशोर कुमार ने एक समय पर मिथुन चक्रवर्ती के लिए फिल्मों में पाश्र्वगायन (प्लेबैक सिंगिंग) करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। इस फैसले के पीछे कोई व्यावसायिक या पेशेवर विवाद नहीं था, बल्कि इसके पीछे पूरी तरह से उनके निजी जीवन से जुड़ी एक भावुक वजह थी, जिसने दोनों दिग्गजों के बीच सालों तक दूरियां बनाए रखीं।

    इस कड़वाहट की मुख्य वजह अभिनेत्री योगिता बाली थीं। महान अभिनेत्री मधुबाला के दुखद निधन के बाद किशोर कुमार ने योगिता बाली से तीसरी शादी की थी, लेकिन उनका यह वैवाहिक रिश्ता ज्यादा समय तक टिक नहीं सका और जल्द ही दोनों अलग हो गए। इसी दौरान फिल्म ‘ख्वाब’ की शूटिंग के समय योगिता बाली और मिथुन चक्रवर्ती एक-दूसरे के करीब आए और दोनों में प्यार हो गया। इसके बाद योगिता बाली और मिथुन चक्रवर्ती ने शादी कर ली। इस शादी से किशोर कुमार काफी आहत हुए थे और उनका दिल टूट गया था, जिसके बाद उन्होंने गुस्से और दुख में मिथुन चक्रवर्ती के लिए कभी भी अपनी आवाज न देने का सख्त फैसला कर लिया।

    सालों तक मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों के लिए गाना न गाने के बाद, समय के साथ दोनों के बीच के व्यक्तिगत घाव धीरे-धीरे भरने लगे। वक्त बीतने के साथ किशोर कुमार की नाराजगी कम हुई और उन्होंने अपने काम को निजी जिंदगी से अलग रखते हुए मिथुन चक्रवर्ती के लिए दोबारा स्टूडियो में कदम रखा। दोनों के बीच की आपसी खटास खत्म होने के बाद किशोर कुमार ने ‘सुरक्षा’ और ‘वक्त की आवाज’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में मिथुन चक्रवर्ती के लिए एक से बढ़कर एक बेहतरीन और यादगार गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया, जिन्हें दर्शकों ने बेहद पसंद किया।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अनोखा और भावुक मोड़ तब आया जब किशोर कुमार ने अपने जीवन का सबसे अंतिम गाना भी मिथुन चक्रवर्ती के लिए ही रिकॉर्ड किया। किशोर कुमार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वे जिस अभिनेता से कभी नाराज थे, उसी के लिए उनका आखिरी गाना इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। उन्होंने फिल्म ‘वक्त की आवाज’ के लिए ‘गुरु-गुरु’ गाना रिकॉर्ड किया था, जो बाद में पर्दे पर मिथुन चक्रवर्ती पर ही फिल्माया गया। इस गाने की रिकॉर्डिंग के कुछ समय बाद ही संगीत की दुनिया का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया।

    हालांकि इस पूरे विवाद और व्यक्तिगत मतभेदों को लेकर न तो कभी किशोर कुमार ने अपने जीवन में खुलकर कोई बयान दिया और न ही मिथुन चक्रवर्ती ने कभी मीडिया के सामने इस पर चर्चा की। दोनों ही कलाकारों ने हमेशा एक-दूसरे के प्रति गहरा पेशेवर सम्मान बनाए रखा। किशोर कुमार सिर्फ एक महान गायक ही नहीं, बल्कि एक बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता और कुशल निर्देशक भी थे, जिन्हें उनके शानदार करियर के दौरान रिकॉर्ड 8 फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजा गया था और साथ ही मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिष्ठित लता मंगेशकर पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

  • मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की शादी की दलील इलाहाबाद HC ने की रद्द, कहा- कानून सबसे ऊपर

    मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की शादी की दलील इलाहाबाद HC ने की रद्द, कहा- कानून सबसे ऊपर


    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के विवाह से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की व्यवस्थाएं बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम जैसे केंद्रीय कानूनों से ऊपर नहीं हो सकतीं। अदालत ने कहा कि देश में विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में भले ही यौवन (प्यूबर्टी) को विवाह योग्य आयु माना गया हो, लेकिन यह प्रावधान बाल विवाह निषेध अधिनियम और पॉक्सो कानून के प्रभाव को समाप्त नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों के साथ यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखता है और किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर इससे छूट नहीं दी जा सकती।

    बुलंदशहर की घटना से जुड़ा मामला
    यह टिप्पणी अदालत ने रूबी और अन्य 18 लोगों की उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का है, जहां 16 वर्षीय मुस्लिम किशोरी का बाल विवाह रुकवाने पहुंची पुलिस और चाइल्डलाइन की रेस्क्यू टीम पर हमला करने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप याचिकाकर्ताओं पर है।

    याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि शरिया कानून के अनुसार लड़की के यौवन प्राप्त करने के बाद, जिसे सामान्यतः 15 वर्ष माना जाता है, उसका विवाह कराया जा सकता है। उनका कहना था कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 उनके व्यक्तिगत कानून पर लागू नहीं होता।

    हाईकोर्ट ने दलील को किया खारिज
    अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के विवाह को वैध माना जाए, तो वैवाहिक संबंधों के चलते पॉक्सो अधिनियम का सीधा उल्लंघन होगा। इसलिए किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर बाल विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

    खंडपीठ ने माना कि इस विषय पर विभिन्न उच्च न्यायालयों के अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं, लेकिन उसने केरल हाईकोर्ट के उस मत से सहमति जताई, जिसमें कहा गया है कि कोई भी पर्सनल लॉ बाल विवाह पर लगे कानूनी प्रतिबंध को समाप्त नहीं कर सकता।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी किया उल्लेख
    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 के एक आदेश का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 संसद में लंबित रहने के दौरान इस विषय पर कुछ कानूनी प्रश्न उठे थे। हालांकि, 17वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक स्वतः समाप्त हो गया और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।

    एफआईआर रद्द करने से किया इनकार
    अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि मामले में नाबालिग के परिजनों और अन्य लोगों द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है। साथ ही पुलिस और चाइल्डलाइन की टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने, उनके साथ अभद्रता और हमला करने के आरोपों की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 1 जुलाई को दिए अपने आदेश में एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

  • आमिर खान की तीसरी शादी बनी चर्चा का केंद्र, गौरी स्प्रैट संग निजी समारोह में परिवार, करीबी दोस्त और कई नामचीन हस्तियां रहीं शामिल

    आमिर खान की तीसरी शादी बनी चर्चा का केंद्र, गौरी स्प्रैट संग निजी समारोह में परिवार, करीबी दोस्त और कई नामचीन हस्तियां रहीं शामिल

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने अपने निजी जीवन की नई शुरुआत करते हुए गौरी स्प्रैट के साथ विवाह कर लिया। मुंबई स्थित उनके आवास पर आयोजित इस निजी समारोह में परिवार के सदस्य, करीबी मित्र और चुनिंदा मेहमान शामिल हुए। लंबे समय से चर्चा में चल रहे इस रिश्ते को आखिरकार दोनों ने आधिकारिक रूप दे दिया। समारोह को पूरी तरह निजी रखा गया, जहां सीमित संख्या में मेहमानों की मौजूदगी में विवाह की सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

    शादी के अवसर पर आमिर खान के परिवार के सदस्य सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल रहे। उनके बेटे जुनैद खान और बेटी आयरा खान ने समारोह में हिस्सा लिया। परिवार के अन्य सदस्य भी इस खास मौके पर मौजूद रहे। शादी के आयोजन को सादगी और गरिमा के साथ संपन्न किया गया, जबकि पूरे समारोह की तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।

    समारोह में देश के कई प्रमुख उद्योगपति, राजनीतिक और फिल्मी जगत की हस्तियां भी शामिल हुईं। फिल्म निर्देशक आशुतोष गोवारिकर अपनी पत्नी के साथ समारोह में पहुंचे। उनके अलावा कई करीबी मित्र और मनोरंजन जगत से जुड़े लोग भी इस खुशी के मौके के साक्षी बने। आयोजन में केवल आमंत्रित मेहमानों को ही शामिल किया गया, जिससे पूरे कार्यक्रम की निजता बरकरार रही।

    बताया जा रहा है कि विवाह विशेष विवाह अधिनियम के तहत संपन्न हुआ। शादी के लिए लगभग 100 से 150 मेहमानों को आमंत्रित किया गया था। भोजन व्यवस्था से लेकर समारोह की अन्य तैयारियों तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोजन का माहौल पारिवारिक और सादगीपूर्ण रखा गया, जहां भव्यता के बजाय निजीपन को प्राथमिकता दी गई।

    आमिर खान के लिए यह तीसरी शादी है। इससे पहले उन्होंने रीना दत्ता से विवाह किया था, जिनसे उनके दो बच्चे जुनैद और आयरा हैं। बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने किरण राव से शादी की, जिनसे उनका एक बेटा आजाद है। वर्ष 2021 में दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया था। अलगाव के बाद भी दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बने रहे।

    गौरी स्प्रैट के साथ रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा चल रही थी। दोनों को कई अवसरों पर साथ देखा गया, जिसके बाद उनके विवाह की अटकलें तेज हो गई थीं। अब इस रिश्ते को विवाह का रूप मिलने के साथ ही इन चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।

    आमिर खान की इस नई शुरुआत को लेकर उनके प्रशंसकों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। फिल्म जगत और उनके करीबियों की ओर से नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दी जा रही हैं। निजी और सादगीपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ यह विवाह वर्ष 2026 की चर्चित सेलिब्रिटी शादियों में शामिल हो गया है।

  • करियर, जिम्मेदारियां और सही साथी की तलाश ने रोक दी शादी, गीता कपूर बोलीं- बीमार पड़ो तो अकेलापन सबसे ज्यादा खलता है

    करियर, जिम्मेदारियां और सही साथी की तलाश ने रोक दी शादी, गीता कपूर बोलीं- बीमार पड़ो तो अकेलापन सबसे ज्यादा खलता है

    नई दिल्ली । मशहूर कोरियोग्राफर और टेलीविजन जज गीता कपूर ने अपनी निजी जिंदगी, शादी और रिश्तों को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि जीवन में कई लोगों से मुलाकात और रिश्ते बनने के बावजूद उन्हें अब तक ऐसा साथी नहीं मिला, जिसके साथ वह पूरी जिंदगी बिताने का फैसला कर पातीं। उनका कहना है कि सही जीवनसाथी की तलाश और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण शादी का फैसला लगातार टलता गया।

    गीता कपूर ने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में उनकी प्राथमिकता परिवार की जिम्मेदारियां निभाना था। वह अपनी मां के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना चाहती थीं और इसी कारण उन्होंने पूरी ऊर्जा अपने काम और आर्थिक मजबूती हासिल करने पर लगाई। इस दौरान शादी का विचार पीछे छूटता चला गया और समय के साथ परिस्थितियां भी बदलती गईं।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कभी नहीं था कि वह शादी या परिवार नहीं चाहती थीं। उनके मन में भी एक सामान्य परिवार बसाने, बच्चों के साथ जीवन बिताने और वैवाहिक जीवन जीने की इच्छा थी। हालांकि जिन लोगों के साथ उनका रिश्ता बना, उनमें उन्हें वह भरोसा और आत्मविश्वास महसूस नहीं हुआ, जो शादी जैसे बड़े फैसले के लिए जरूरी होता है। इसी वजह से उन्होंने कभी जल्दबाजी में विवाह करने का निर्णय नहीं लिया।

    गीता कपूर ने कहा कि उनके मन में हमेशा ऐसे जीवनसाथी की कल्पना रही, जिसमें भगवान शिव जैसे गुण हों। उनका मानना है कि जीवन में कुछ ऐसे लोग जरूर आए, जिनमें उन्हें उन गुणों की झलक दिखाई दी, लेकिन कोई भी व्यक्ति उनकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका। यही कारण रहा कि उन्होंने विवाह का साहस नहीं जुटाया।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ उनकी जिंदगी का नजरिया बदला है। टेलीविजन के विभिन्न डांस रियलिटी शो के जरिए उन्हें कई ऐसे प्रतिभागी मिले, जो उन्हें मां जैसा सम्मान और स्नेह देते हैं। यही अपनापन उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इसके अलावा वह अपनी मां की देखभाल को भी अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानती हैं और उसी में उन्हें संतोष मिलता है।

    गीता कपूर ने स्वीकार किया कि वर्तमान में वह अपने जीवन से संतुष्ट हैं, लेकिन भविष्य में एक ऐसे साथी की जरूरत महसूस हो सकती है जो उन्हें समझ सके और मुश्किल समय में उनका साथ निभाए। उनका कहना है कि जीवन में खुशियों के दौरान अकेलेपन का एहसास कम होता है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में किसी अपने का साथ सबसे अधिक मायने रखता है।

    उन्होंने कहा कि बीमारी या परेशानी के समय जब आसपास कोई अपना मौजूद नहीं होता, तब अकेलापन सबसे ज्यादा महसूस होता है। ऐसे क्षण यह एहसास कराते हैं कि जीवन में भावनात्मक सहारा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पेशेवर सफलता या आर्थिक स्थिरता। गीता कपूर ने उम्मीद जताई कि यदि भविष्य में उन्हें ऐसा साथी मिला, जो उन्हें समझे और उनका साथ निभा सके, तो वह उस संभावना पर जरूर विचार करेंगी। उनके इस स्पष्ट और संतुलित बयान को सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा मिल रही है।

  • न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज

    न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज


    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत पर दशकों तक राज करने वाली दिग्गज गायिका अलका याग्निक की सुरीली आवाज से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अलका याग्निक ने साल १९८९ में बिजनेसमैन नीरज कपूर से शादी की थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि शादी के करीब ३७ साल बीत जाने के बाद भी यह कपल एक-दूसरे से अलग रहता है। अमूमन फिल्म इंडस्ट्री में अलग रहने का मतलब मनमुटाव या तलाक माना जाता है, मगर इस जोड़े के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है। दोनों के बीच आज भी अटूट प्यार और आपसी समझ कायम है। दरअसल, अलका याग्निक के पति नीरज कपूर मूल रूप से मेघालय की राजधानी शिलांग के रहने वाले हैं और वहीं रहकर अपना पूरा बिजनेस संभालते हैं, जबकि अलका अपने काम के सिलसिले में मुंबई में रहती हैं।

    इस अनोखे रिश्ते की शुरुआत एक पारिवारिक जुड़ाव से हुई थी। नीरज कपूर की आंटी और अलका याग्निक की मां बचपन में क्लासमेट हुआ करती थीं। इसी पारिवारिक कनेक्शन के चलते नीरज जब मुंबई आए, तो उनकी पहली मुलाकात अलका से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई। उस दौर में दोनों के बीच रात-रात भर फोन पर बातें हुआ करती थीं और जब घर पर फोन का भारी-भरकम बिल आया, तब जाकर अलका की मां को इस अफेयर की भनक लगी। अलका उस समय तक यह पूरी तरह तय कर चुकी थीं कि वह जीवनसाथी के रूप में सिर्फ नीरज को ही चुनेंगी। हालांकि, जब दोनों ने अपने परिवारों के सामने शादी की इच्छा जताई, तो अलका के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ खड़े हो गए।

    घरवालों के विरोध की सबसे बड़ी वजह दोनों के करियर और अलग-अलग शहर थे। नीरज शिलांग में पूरी तरह सेटल थे और अलका उस दौर में अपने सिंगिंग करियर के पीक पर थीं, जिसके कारण उनका मुंबई में रहना बेहद जरूरी था। माता-पिता का मानना था कि एक पार्टनर मुंबई में और दूसरा शिलांग में रहेगा, तो इतनी दूरी के बीच शादी का चलना नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि, अलका और नीरज के दृढ़ निश्चय के आगे आखिरकार दोनों परिवारों को झुकना पड़ा और साल १९८९ में दोनों पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। शादी के शुरुआती दिनों में दोनों ने एक बीच का रास्ता निकाला था, जिसके तहत तय हुआ था कि अलका एक महीने के लिए शिलांग जाएंगी और नीरज अगले महीने मुंबई आएंगे।

    शादी के तुरंत बाद अलका याग्निक का करियर इतनी तेजी से चमका कि उनके लिए एक दिन के लिए भी मुंबई छोड़ना पूरी तरह नामुमकिन हो गया। साल १९९० में उनकी बेटी सायशा का जन्म हुआ और उसके ठीक बाद जनवरी १९९१ में उनका गाना ‘एक दो तीन’ ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। इस सफलता ने अलका को बॉलीवुड की सबसे व्यस्त गायिका बना दिया। अलका बताती हैं कि उनके पति अक्सर मजाक में उन्हें चिढ़ाते हैं कि वह अलका के करियर के लिए तो बहुत लकी साबित हुए, लेकिन अपने खुद के वैवाहिक जीवन के लिए अनलकी रहे। खुद अलका भी मानती हैं कि पूरी जिंदगी अलग-अलग शहरों में रहने की वजह से जब भी वे लंबे समय बाद मिलते हैं, तो एक-दूसरे के तौर-तरीकों को दोबारा समझने में दो-चार दिन का समय लग जाता है, लेकिन इस दूरी ने उनके रिश्ते के विश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

  • साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी की लाडली ने झेले जिंदगी के सबसे कड़े इम्तिहान: पहले पति की अचानक मौत और दूसरी शादी के टूटने की भावुक दास्तान

    साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी की लाडली ने झेले जिंदगी के सबसे कड़े इम्तिहान: पहले पति की अचानक मौत और दूसरी शादी के टूटने की भावुक दास्तान

    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार परिवारों में से एक, मेगास्टार चिरंजीवी के ‘कोनिडेला परिवार’ को हमेशा उनकी एकजुटता और सफलता के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसी परिवार के मुख्य स्तंभ और ग्लोबल स्टार राम चरण की छोटी बहन श्रीजा कोनिडेला की व्यक्तिगत जिंदगी स्क्रीन पर दिखने वाली चमक-दमक से बिल्कुल उलट, भारी भावनात्मक संघर्षों और दुखों से भरी रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए उनके कुछ भावुक बयानों के बाद, एक बार फिर उनकी जिंदगी के वे कड़वे पन्ने चर्चा में आ गए हैं, जिन्होंने उन्हें कम उम्र में ही गहरे मानसिक दर्द से गुजरने पर मजबूर कर दिया था।

    श्रीजा की जिंदगी का पहला बड़ा और विवादास्पद मोड़ तब आया जब वे महज 19 वर्ष की थीं। साल 2007 में उन्होंने अपने तत्कालीन बॉयफ्रेंड सिरीश भारद्वाज के साथ शादी करने के लिए अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर घर से भागने का फैसला किया था। उस दौर में इस हाई-प्रोफाइल कदम ने पूरे दक्षिण भारतीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भारी तहलका मचा दिया था। सुरक्षा कारणों से इस युवा जोड़े को कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा था। इस शादी से श्रीजा ने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही वर्षों में उनके रिश्ते में कड़वाहट आ गई और उन्होंने सिरीश पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी रूप से दूरी बना ली। बाद में, सिरीश भारद्वाज के अचानक हुए निधन ने श्रीजा को जिंदगी का पहला बड़ा झटका और दर्द दिया।

    इस दर्दनाक दौर से उबरने में उनके पिता चिरंजीवी और भाई राम चरण ने उनका पूरा साथ दिया और उन्हें वापस परिवार में ससम्मान शामिल किया। जीवन को एक नया मौका देने के उद्देश्य से, कोनिडेला परिवार ने साल 2016 में बेहद भव्य स्तर पर श्रीजा की दूसरी शादी का आयोजन किया। उनकी यह शादी उनके बचपन के दोस्त और बिजनेसमैन कल्याण देव के साथ हुई थी, जिसमें देश भर की बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी। शादी के बाद दोनों के घर एक बेटी का जन्म हुआ और कुछ समय तक सब कुछ बेहद सामान्य और खुशहाल नजर आ रहा था, जिससे प्रशंसकों को लगा कि श्रीजा की जिंदगी में अब स्थिरता आ चुकी है।

    हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और श्रीजा की यह दूसरी शादी भी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के बीच वैचारिक मतभेद इस कदर बढ़ गए कि उन्होंने एक-दूसरे से पूरी तरह दूरी बना ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से एक-दूसरे की तस्वीरें हटाने और उपनाम बदलने के बाद इस रिश्ते के टूटने की आधिकारिक पुष्टि भी हो गई। अपनी दूसरी शादी का भी इस तरह दर्दनाक और असमय अंत देखना श्रीजा के लिए एक बहुत बड़ा मानसिक आघात था, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर कर रख दिया था।

    मौजूदा समय में, दो शादियों के बेहद कड़वे और दर्दनाक अनुभवों से गुजरने के बाद श्रीजा पूरी तरह से एकांत में अपनी दोनों बेटियों की परवरिश कर रही हैं। एक सिंगल मदर के रूप में अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी श्रीजा ने हाल ही में अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए बताया था कि कैसे जीवन की इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें अंदर से मजबूत बनाया है। मुश्किल समय में उनका पूरा परिवार, विशेषकर उनके भाई राम चरण, एक मजबूत ढाल की तरह उनके साथ खड़े हैं, ताकि वे अपने जीवन के इस सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से बाहर निकलकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत कर सकें।

  • विवाह, तलाक और लिव-इन संबंधों पर एक कानून: असम UCC बिल ने कानूनी ढांचे में किए बड़े बदलाव

    विवाह, तलाक और लिव-इन संबंधों पर एक कानून: असम UCC बिल ने कानूनी ढांचे में किए बड़े बदलाव


    नई दिल्ली। असम में पेश किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े नए विधेयक ने सामाजिक और कानूनी व्यवस्था को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से विभिन्न समुदायों के बीच कानूनी समानता स्थापित होगी और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में एकरूपता लाई जा सकेगी।

    इस प्रस्तावित कानून की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें विवाह और तलाक के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार विवाह के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित अधिकारियों के सामने आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार तलाक की प्रक्रिया को भी एक समान कानूनी ढांचे में शामिल करने का प्रयास किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के बीच मौजूद अंतर को कम करना माना जा रहा है।

    प्रस्तावित कानून में एक विवाह व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है और विवाह की न्यूनतम आयु को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं। हालांकि सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न समुदायों के पारंपरिक विवाह समारोहों को बनाए रखने की बात भी कही गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि समानता के साथ सांस्कृतिक विविधता को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।

    उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में भी नए प्रस्ताव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें पुरुष और महिला दोनों के अधिकारों को समान रूप से महत्व देने की बात कही गई है। परिवार के सदस्यों को उत्तराधिकार के मामलों में समान श्रेणी में रखने का विचार लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही वसीयत से संबंधित कानूनी अधिकारों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का प्रयास किया गया है।

    इस विधेयक का एक और महत्वपूर्ण पहलू लिव-इन संबंधों से जुड़ा है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार ऐसे संबंधों को भी एक कानूनी ढांचे के भीतर लाने की कोशिश की गई है। इसके तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण की व्यवस्था प्रस्तावित है। साथ ही ऐसे संबंधों से जुड़े बच्चों और साथी के अधिकारों को लेकर भी प्रावधान जोड़े गए हैं ताकि सामाजिक और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    प्रस्तावित कानून में नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड का भी प्रावधान किया गया है। कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी करने या गलत जानकारी देने जैसी स्थितियों पर कार्रवाई की व्यवस्था बनाई गई है। फिलहाल इस विधेयक को लेकर अलग-अलग वर्गों में चर्चा जारी है। समर्थकों का मानना है कि इससे समानता और कानूनी स्पष्टता बढ़ेगी, जबकि कुछ लोग इसे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

  • MP: इंदौर में शादी में आए यूपी के कारोबारी की कार से नगदी और हथियार चोरी… आरोपी गिरफ्तार

    MP: इंदौर में शादी में आए यूपी के कारोबारी की कार से नगदी और हथियार चोरी… आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में शादी समारोह में शामिल होने आए एक कारोबारी (Businessman) की कार से नकदी और हथियार चोरी (Cash and weapon theft) होने का मामला अब सुलझ गया है. भंवरकुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी गया सामान भी बरामद कर लिया है।

    जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली निवासी कारोबारी केशव सोनी इंदौर में एक शादी में शामिल होने आए थे. इस दौरान उनकी फॉर्च्यूनर कार का कांच तोड़कर एक अज्ञात बदमाश ने कार में रखा बैग चुरा लिया था. बैग में करीब एक लाख रुपये नकद, लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस रखे हुए थे. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम गठित की. एडिशनल डीसीपी जोन-4 आनंद कलादगी के नेतृत्व में पुलिस ने आसपास लगे 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. जांच के दौरान एक संदिग्ध पल्सर बाइक नजर आई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही।

    पुलिस ने भगवती नगर, मूसाखेड़ी निवासी सलमान खान को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में उसके पास से चोरी गया बैग, नकदी, लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस बरामद कर लिए गए हैं. वारदात में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक भी जब्त कर ली गई है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले से कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है. फिलहाल उससे पूछताछ जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह और किन घटनाओं में शामिल रहा है.