Tag: Masjid

  • उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत मास्टर प्लान के अनुसार सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी योजना के तहत सड़क की सीमा में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम की ओर से की जा रही है। शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने का मामला भी इसी कार्रवाई से जुड़ा है। इस मामले में दायर रिट अपील पर सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

    मस्जिद के निर्माण से जुड़े विवाद में पहले 9 सितंबर को एक याचिका दायर की गई थी। मास्टर प्लान की सड़क का हवाला देते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद एडवोकेट अशहर वारसी की ओर से अदालत के फैसले के खिलाफ रिट अपील दायर की गई। सोमवार को इसी अपील पर सुनवाई के दौरान मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने और नगर निगम की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों के पालन का मुद्दा उठाया गया।

    सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शाही मस्जिद का केवल तीन फीट हिस्सा ही हटाया जाए। बताया गया कि इस सीमित हिस्से को हटाने को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी थी। अपीलकर्ता की ओर से मांग रखी गई कि मस्जिद के बाकी हिस्से के संबंध में पहले हुई बातचीत और दिए गए आश्वासनों को ध्यान में रखा जाए।

    इसके साथ ही नगर निगम की ओर से पूर्व में दिए गए टीडीआर और एफएआर से संबंधित आश्वासनों का पूरी तरह पालन कराने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई। अपीलकर्ता ने अदालत से इन आश्वासनों के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान मामला मुख्य रूप से मस्जिद के कितने हिस्से को हटाया जाना है और नगर निगम के पूर्व आश्वासनों का पालन किस तरह सुनिश्चित होगा, इन मुद्दों पर केंद्रित रहा।

    इसी सुनवाई के दौरान नई कमिटी की ओर से भी एक अलग याचिका दायर की गई थी। हालांकि, प्रशासन के साथ बातचीत होने के बाद कमिटी ने अपनी याचिका वापस ले ली। इस तरह नई कमिटी की ओर से दायर याचिका पर आगे कार्यवाही नहीं की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका वापस लेने का फैसला प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान की सड़क चौड़ीकरण योजना पर काम जारी है। इस योजना के तहत सड़क के विस्तार में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। शाही मस्जिद का मामला भी इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आया है और अब इससे संबंधित विवाद हाईकोर्ट में पहुंच चुका है।

    इससे पहले इसी मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक घर का बाधक हिस्सा भी हटाया गया था। यह कार्रवाई रविवार को हुई थी। शाही मस्जिद मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर से जुड़े आश्वासनों के पालन की मांग रखी। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में जारी है।

  • सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद हटाने के बाद जमीन के नीचे मिला कुआं, प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की

    सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद हटाने के बाद जमीन के नीचे मिला कुआं, प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद जमीन के नीचे एक कुएं जैसी संरचना मिलने से प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। मलबा हटाने के दौरान जमीन के भीतर ईंटों से बनी संरचना दिखाई दी, जिसे शुरुआती तौर पर कुआं माना जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रकृति, आकार और गहराई के बारे में अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, संरचना की तकनीकी जांच कराई जाएगी। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिली संरचना वास्तव में कुआं है या किसी अन्य प्रकार का पुराना निर्माण। फिलहाल प्रशासन ने इसे ढक दिया है और मौके पर निगरानी रखी जा रही है।

    कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई अदालत के आदेश के आधार पर की गई थी। एसडीएम सदर सुबोध कुमार के अनुसार, प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के तहत कार्रवाई की और इसके बाद परिसर की सफाई कराई गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।

    मस्जिद हटाए जाने के बाद वहां मौजूद मलबे को भी हटाकर दूसरी जगह भेज दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे को सहारनपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर डाला गया। इसी दौरान जमीन के नीचे ईंटों से बनी संरचना सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने मौके की स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल ढक दिया और तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।

    अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल इस संरचना की वास्तविक बनावट और स्थिति को लेकर है। यह कितनी गहरी है, इसका व्यास कितना है और इसका निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था, इन सभी पहलुओं की जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन जल्द तकनीकी टीम के माध्यम से इसकी जांच कराने की तैयारी में है।

    इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने वाला है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित दल स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाएगा।

    समाजवादी पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी और उसे नहीं हटाने का भरोसा दिया गया था। पार्टी के अनुसार, इसके बाद अदालत के आदेश का हवाला देते हुए मस्जिद को बुलडोजर की मदद से हटा दिया गया।

    प्रशासन और राजनीतिक दलों के दावों के बीच अब जमीन के नीचे मिली संरचना की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इसके बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाते हुए किसी भी तरह की अफवाह से बचने तथा तथ्य सामने आने तक स्थिति को नियंत्रित रखने पर जोर दिया है।

    घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद संरचना की प्रकृति, उसकी गहराई और संभावित पुराने निर्माण से संबंध जैसी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। तब तक इसे लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।