मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, संरचना की तकनीकी जांच कराई जाएगी। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिली संरचना वास्तव में कुआं है या किसी अन्य प्रकार का पुराना निर्माण। फिलहाल प्रशासन ने इसे ढक दिया है और मौके पर निगरानी रखी जा रही है।
कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई अदालत के आदेश के आधार पर की गई थी। एसडीएम सदर सुबोध कुमार के अनुसार, प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के तहत कार्रवाई की और इसके बाद परिसर की सफाई कराई गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।
मस्जिद हटाए जाने के बाद वहां मौजूद मलबे को भी हटाकर दूसरी जगह भेज दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे को सहारनपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर डाला गया। इसी दौरान जमीन के नीचे ईंटों से बनी संरचना सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने मौके की स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल ढक दिया और तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।
अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल इस संरचना की वास्तविक बनावट और स्थिति को लेकर है। यह कितनी गहरी है, इसका व्यास कितना है और इसका निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था, इन सभी पहलुओं की जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन जल्द तकनीकी टीम के माध्यम से इसकी जांच कराने की तैयारी में है।
इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने वाला है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित दल स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाएगा।
समाजवादी पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी और उसे नहीं हटाने का भरोसा दिया गया था। पार्टी के अनुसार, इसके बाद अदालत के आदेश का हवाला देते हुए मस्जिद को बुलडोजर की मदद से हटा दिया गया।
प्रशासन और राजनीतिक दलों के दावों के बीच अब जमीन के नीचे मिली संरचना की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इसके बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाते हुए किसी भी तरह की अफवाह से बचने तथा तथ्य सामने आने तक स्थिति को नियंत्रित रखने पर जोर दिया है।
घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद संरचना की प्रकृति, उसकी गहराई और संभावित पुराने निर्माण से संबंध जैसी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। तब तक इसे लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
