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  • अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख

    अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी के जाट समाज को निशाना बनाए जाने के आरोप के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती भी उनके समर्थन में उतर आई हैं। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को अहंकारी और अशोभनीय बताते हुए उनसे तुरंत माफी मांगने की मांग की है।

    जयंत बोले- राजनीतिक लड़ाई में मेरा नाम लेते, समाज को क्यों घसीटा?

    जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के बीच अखिलेश ने पूरे जाट समाज को निशाना बनाया। जयंत ने कहा कि अगर अखिलेश को उनसे कोई शिकायत थी तो सीधे उनका नाम लेकर बात करनी चाहिए थी। पूरे समाज को इस विवाद में घसीटना उचित नहीं है।

    जयंत ने अखिलेश के रवैये को अहंकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने इस तरह के राजनीतिक अहंकार को करीब से देखा है और यही किसी के राजनीतिक पतन की वजह बनता है।

    मायावती ने जयंत का किया समर्थन

    मायावती ने भी X पर पोस्ट कर जयंत चौधरी का समर्थन किया। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को न केवल जयंत और राष्ट्रीय लोकदल का अपमान बताया, बल्कि इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और जाट समाज का भी अपमान करार दिया।

    मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।

    1993 के सपा-बसपा गठबंधन का भी किया जिक्र

    मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए 1993 के सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के इसी अहंकारी रवैये के कारण गठबंधन टूट गया था और इसके बाद स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ।

    मायावती का कहना है कि बाद में दोनों दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन जरूर हुआ, लेकिन अखिलेश यादव के रवैये में भी कथित तौर पर वही अहंकार दिखाई दिया। उन्होंने सपा पर राजनीतिक जरूरत के हिसाब से रुख बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी काम निकलने के बाद ‘गिरगिट की तरह रंग बदलती है।’

    PDA में पंडितों को शामिल करने पर भी साधा निशाना

    मायावती ने अखिलेश यादव के PDA में ‘P’ को पंडितों से जोड़ने वाले बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अब पंडित समाज को अपना हितैषी बताने की कोशिश कर रही है, जबकि उनके मुताबिक पार्टी ने कभी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों या ब्राह्मण समाज के हित में वास्तविक रूप से काम नहीं किया।

    क्या था अखिलेश का ‘चवन्नी’ वाला बयान?

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों और राजनीतिक साथियों का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए आरएलडी और जयंत चौधरी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग पार्टी का साथ छोड़कर चले गए।

    अखिलेश ने इसी संदर्भ में कहा था कि ‘हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।’ इसी बयान को लेकर अब जयंत चौधरी और मायावती ने सपा प्रमुख पर हमला बोला है।

  • पहली बार यूपी में नेताओं को दी गई बुलेट प्रूफ जैकेट, 11 मंत्रियों समेत 52 नाम शामिल; जानिए किसे मिली कौन सी सुरक्षा

    पहली बार यूपी में नेताओं को दी गई बुलेट प्रूफ जैकेट, 11 मंत्रियों समेत 52 नाम शामिल; जानिए किसे मिली कौन सी सुरक्षा


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती समेत 52 नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं को इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सूची में सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ विपक्ष के प्रमुख चेहरे और अलग-अलग दलों से जुड़े कई नेता भी शामिल हैं।

    जानकारी के मुताबिक सुरक्षा मुख्यालय की ओर से इन बुलेट प्रूफ जैकेट की खरीद की गई है। एक जैकेट की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये बताई जा रही है। पहले चरण में आठ नेताओं को जैकेट दी गई थी जबकि दूसरे चरण में 44 और नेताओं को यह सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इस तरह कुल 52 नेता अब बुलेट प्रूफ जैकेट पाने वालों की सूची में शामिल हो गए हैं। इनमें प्रदेश सरकार के 11 कैबिनेट मंत्री भी बताए जा रहे हैं।

    जिन प्रमुख नामों को जैकेट दी गई है उनमें मंत्री संजय निषाद नंद गोपाल गुप्ता नंदी ओम प्रकाश राजभर और अपर्णा यादव शामिल हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित भाजपा नेताओं संगीत सोम और सुरेश राणा का नाम भी सूची में बताया गया है। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट देने का फैसला किया गया। सुरक्षा मुख्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक पहले बुलेट प्रूफ जैकेट सुरक्षा मानकों में शामिल नहीं थी लेकिन अब इसे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।

    इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में कई नेताओं को पहले से ही अलग-अलग श्रेणियों की सुरक्षा उपलब्ध है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 98 नेताओं और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को विभिन्न सुरक्षा श्रेणियां मिली हुई हैं। इनमें सबसे अधिक लोगों को Y श्रेणी की सुरक्षा हासिल है जबकि कुछ लोगों को Y प्लस और एस्कॉर्ट के साथ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की गई है।

    राज्य की सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणियों में शामिल Z प्लस सुरक्षा पाने वालों में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा अखिलेश यादव और मायावती भी शामिल बताए गए हैं। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्व सांसद मुरली मनोहर जोशी और विनय कटियार समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं को भी इस श्रेणी में सुरक्षा दी गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश राणा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का नाम भी Z प्लस सुरक्षा सूची में बताया गया है।

    वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा को Z श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी समेत कई नेताओं को भी इसी स्तर की सुरक्षा हासिल है। दूसरी ओर ओम प्रकाश राजभर बेबी रानी मौर्य लक्ष्मी नारायण चौधरी और बलदेव सिंह औलख समेत कई नेताओं को Y प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।

    मंत्री संजय निषाद को Y श्रेणी की सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ मिली हुई है। उनके अलावा कई सांसद विधायक पूर्व राज्यपाल और अन्य राजनीतिक हस्तियों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। बुलेट प्रूफ जैकेट के मामले में मंत्री संजय निषाद ने बताया कि उन्हें अभी इसे पहनने का प्रशिक्षण नहीं मिला है।

    कुल मिलाकर चुनावी वर्ष से पहले उत्तर प्रदेश में नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। हालांकि बुलेट प्रूफ जैकेट बांटने के फैसले की विस्तृत वजह सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह कदम सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा है या चुनाव से पहले संभावित खतरे को देखते हुए एहतियाती व्यवस्था इसका स्पष्ट जवाब आने वाले समय में ही सामने आएगा।

  • UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल

    UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से PDA फॉर्मूले में ‘P’ का अर्थ पंडित बताए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के अनुसार अपने सामाजिक समीकरण की व्याख्या बदलती रहती है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में PDA को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले PDA में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताती थी, जबकि इसके साथ दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ा जाता था। अब अखिलेश यादव की ओर से ‘P’ को पंडित बताए जाने को उन्होंने चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा है। मायावती का कहना है कि ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा की ओर बढ़ता जुड़ाव देखकर सपा ने अपने राजनीतिक संदेश में बदलाव किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए सपा अपनी राजनीतिक भाषा और समीकरण में परिवर्तन करती है।

    उत्तर प्रदेश में लंबे समय से जातीय और सामाजिक गठजोड़ चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की रणनीति के तौर पर सामने आया था। अब इसमें पंडित शब्द को शामिल किए जाने से सपा की रणनीति को लेकर विपक्षी दलों को हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है।

    मायावती ने इस दौरान बसपा की राजनीतिक विचारधारा को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति, समुदाय या वर्ग के हित तक सीमित नहीं है। बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करने का दावा करती है और उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मायावती ने अपनी पार्टी की पिछली सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकारों के दौरान भी सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई गई थीं।

    बसपा प्रमुख ने लोगों से जाति आधारित राजनीतिक नारों और चुनावी समीकरणों को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की। उनका कहना है कि चुनाव के समय अलग-अलग समुदायों को आकर्षित करने के लिए राजनीतिक दल अपनी भाषा और रणनीति बदल सकते हैं, लेकिन इससे समाज की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता। मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक समीकरण बदलने के बजाय सभी वर्गों के व्यापक हित पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए अखिलेश यादव के बयान और मायावती की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय संतुलन और सामाजिक गठबंधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में PDA की परिभाषा और इसके दायरे को लेकर सपा, बसपा तथा अन्य दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है। मायावती का ताजा हमला इसी व्यापक राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा रहा है।

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान

    जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान


    लखनऊ। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगने के बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बजाय संस्थानों को नियमानुसार नियमित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर देना चाहिए।

    मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण का हवाला देकर भवनों को गिराने की प्रक्रिया पर रोक लगाना उचित कदम है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में जनहित और शिक्षा दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

    छात्रों के भविष्य का भी रखें ध्यान
    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अध्ययन कर रहे छात्रों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को पहले नियमों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ है, तो उन्हें ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। मायावती ने उम्मीद जताई कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।

    अंतरिम राहत के बाद अंतिम सुनवाई बाकी
    उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए 38 भवनों को गिराने की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय तक रोक लगा दी थी। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के अनुसार, यूनिवर्सिटी की ओर से दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

  • पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में पेपर लीक की घटनाओं, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या से जोड़ते हुए केंद्र और संबंधित संस्थाओं से समयबद्ध तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण होने से स्थिति और जटिल बनती है तथा इसका सीधा असर आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं पर पड़ता है।

    मायावती ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की उम्मीदों को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि युवाओं के मन में गंभीर चिंता और असंतोष है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी और भरोसेमंद कार्रवाई के जरिए छात्रों का विश्वास बहाल करे।

    उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों का दायरा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक जनचर्चा का विषय बन गया है। उनके अनुसार, जब ऐसे मामलों पर राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से सक्रिय होते हैं तो मूल मुद्दे से ध्यान भटकने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम रखते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    बसपा प्रमुख ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवाद हों या भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियां, इन सभी के पीछे भ्रष्टाचार की समस्या एक साझा कारण के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।

    मायावती ने भ्रष्टाचार को देश की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह समाज और प्रशासन को भीतर से कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही सुशासन की सबसे बड़ी आधारशिला है। इसी संदर्भ में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के सुशासन और जवाबदेह प्रशासन संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनकी भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

    उन्होंने सरकार, प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें और जनता से जुड़े गंभीर मामलों में त्वरित तथा निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत सुधारों की भी आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    मायावती ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाने के बजाय संवाद और सहमति से समाधान खोजने का प्रयास होना चाहिए। उनका मानना है कि सड़क से लेकर संसद तक टकराव का माहौल बनने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से संयम बरतने तथा शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य, सार्वजनिक विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विषय पर संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।

  • मायावती का सख्त संदेश- मैं आयरन लेडी, लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त; 2027 फतह के लिए BSP को दिया जीत का मंत्र

    मायावती का सख्त संदेश- मैं आयरन लेडी, लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त; 2027 फतह के लिए BSP को दिया जीत का मंत्र



    लखनऊ। लखनऊ में रविवार को आयोजित बहुजन समाज पार्टी की अहम बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को सख्त संदेश दिया। तीन घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में मायावती ने साफ कहा कि चुनाव की तैयारी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संगठन को पहले से ज्यादा सक्रिय, मजबूत और मुस्तैद रहना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि विरोधी दलों की हर चाल का मजबूती से जवाब देने के लिए अभी से मैदान में उतरना होगा।

    बैठक में मायावती ने खुद को “आयरन लेडी” बताते हुए कहा कि बसपा को 2007 की तरह फिर से सत्ता में लाने के लिए कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ जुटना होगा। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि बसपा ही सर्वसमाज को सम्मान और सुरक्षा देने वाली पार्टी है, इसलिए लोगों को फिर से पार्टी और उसके नेतृत्व पर भरोसा जताना चाहिए। उन्होंने कहा कि बसपा हमेशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करती रही है और यही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है।

    मायावती ने मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं, जिनसे बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों को फायदा मिल रहा है, जबकि आम जनता लगातार परेशान हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय राजनीतिक दल बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद जनहित के मुद्दों को भूल जाते हैं। इसी वजह से जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती है।

    बैठक के दौरान संगठन की समीक्षा करते हुए मायावती ने सभी जिलाध्यक्षों और प्रभारियों से बूथ कमेटियों को जल्द से जल्द मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जमीनी संगठन सबसे जरूरी होता है। साथ ही पार्टी के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने और सभी वर्गों में जनाधार बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने संकेत दिए कि आगामी चुनाव में टिकट उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनकी छवि साफ होगी और जिनका क्षेत्र में मजबूत जनाधार होगा।

    बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को विपक्षी दलों की “भ्रामक राजनीति” और “साजिशों” से सतर्क रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि जनता को यह बताना जरूरी है कि कई दल चुनाव के समय खुद को जनहितैषी दिखाते हैं, लेकिन बाद में अपने वादों से मुकर जाते हैं। मायावती ने कहा कि देश और प्रदेश का भला बांटने वाली राजनीति से नहीं हो सकता।

    बैठक में शामिल नेताओं के मुताबिक, मायावती ने 2027 के चुनाव को मिशन मोड में लड़ने का आह्वान किया और कहा कि “हाथी पर बटन दबाना है, सत्ता में वापस आना है” का नारा हर गांव और बूथ तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कांशीराम के सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के मिशन को याद करते हुए कहा कि बसपा उसी विचारधारा पर लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में पार्टी फिर से मजबूत होकर उभरेगी।

  • लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर

    लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ में मॉल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को अहम निर्देश दिए। बैठक में आकाश आनंद और आनंद कुमार समेत प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में जनता विरोधी नीतियों और छलावे की राजनीति के कारण आम लोगों का आत्मसम्मान के साथ जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए और जनता तक पार्टी की नीतियों को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

    मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के पक्ष में जनरुझान बढ़ रहा है और पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को “हाथी पर बटन दबाना है” के संदेश के साथ पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में जुटना होगा।

    उन्होंने विपक्षी दलों पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता से किए गए वादों को भुला दिया जाता है। ऐसी राजनीति से लोगों का भला नहीं हो रहा है, इसलिए जनता को जागरूक करना जरूरी है।

    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव और कानून व्यवस्था की समस्याओं के कारण आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकारों को रोजगार, रोटी, शांति और सामाजिक सौहार्द जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि बसपा शासनकाल में सर्वजन हिताय की नीति के तहत बेहतर कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन कायम रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को उस समय सम्मान और भागीदारी मिली थी।

    बैठक में संगठनात्मक समीक्षा भी की गई और बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति तय की गई। साथ ही आगामी चुनावों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।

  • भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती पर मायावती का सरकार को संदेश, लोगों की परेशानी पर तुरंत कार्रवाई की अपील

    भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती पर मायावती का सरकार को संदेश, लोगों की परेशानी पर तुरंत कार्रवाई की अपील

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी और हीटवेव की स्थिति के बीच राज्य के कई हिस्सों में बिजली कटौती की समस्या ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

    मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और जनसंख्या वाले राज्य में भीषण गर्मी के समय बिजली की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी है, लेकिन मौजूदा स्थिति में आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब, मध्यम वर्ग, किसान और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिनके दैनिक जीवन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार बिजली कटौती के कारण लोगों में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है, जो कई जगहों पर सार्वजनिक रूप से भी सामने आ रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस समस्या को केवल अस्थायी रूप से नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए और नए पावर प्लांट सहित अन्य संसाधनों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हो सके।

    प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की चेतावनी के बीच स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा जा रहा है कि लोग अनावश्यक रूप से धूप में बाहर न निकलें और पर्याप्त सावधानी बरतें। इसके बावजूद बिजली कटौती ने स्थिति को और अधिक कठिन बना दिया है, क्योंकि पंखे और कूलर जैसे साधनों पर निर्भरता के कारण आम लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

    स्थानीय स्तर पर कई जगहों से बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। गर्मी और बिजली संकट के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और कई क्षेत्रों में लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन और नाराजगी भी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बिजली मांग और उत्पादन के बीच संतुलन बिगड़ने से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिसे सुधारने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम जरूरी हैं।

    कुल मिलाकर, भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली संकट ने जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है, वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर आवाजें तेज हो रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए किस तरह के ठोस कदम उठाती है, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके

  • मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस

    मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस


    नई दिल्ली। Mayawati के लखनऊ स्थित आवास पर कांग्रेस के कुछ दलित नेताओं के पहुंचने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बिना किसी तय कार्यक्रम के पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को मायावती से मुलाकात नहीं मिल सकी, क्योंकि उनके आवास पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

    यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब यूपी की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं के इस अचानक दौरे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।

    क्या हुआ था पूरा मामला?
    कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के कुछ नेता लखनऊ में बैठक के बाद अचानक Mayawati से शिष्टाचार मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि, यह मुलाकात पहले से तय नहीं थी, जिसके चलते उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

    प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने दावा किया कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी और इसका कोई राजनीतिक संदेश नहीं था। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया।

    राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूपी में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। कुछ ही घंटों पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने 2027 चुनाव को लेकर कांग्रेस के साथ सहयोग के संकेत दिए थे। ऐसे में इस घटना ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

    कांग्रेस की सफाई
    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक अचानक लिया गया शिष्टाचार निर्णय था और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को लेकर कोई संदेश देने जैसी बात पूरी तरह गलत है।

  • ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद

    ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालातों को देखते हुए देशवासियों से संयमित जीवनशैली अपनाने की बात कही थी, उस पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग अपनाने, एक साल तक विदेश यात्रा सीमित करने, सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसी अपीलें की थीं। उनका कहना था कि इससे देश की ऊर्जा खपत घटेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।

    इस अपील के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि देश पहले ही कोरोना महामारी के आर्थिक झटकों से उबर रहा है और आम जनता अभी भी रोज़गार और महंगाई के दबाव में जी रही है। ऐसे में सरकार को केवल संयम की अपील करने के बजाय लोगों को वास्तविक आर्थिक राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    मायावती ने अपने बयान में कहा कि देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोग पहले ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और उनके पास अब और ज्यादा आर्थिक बोझ सहने की क्षमता नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के कारण आर्थिक स्थिति और बिगड़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ेगा।

    उन्होंने कोरोना काल को याद करते हुए कहा कि उस समय भी जनता ने भारी कठिनाइयों का सामना किया था और आज भी उसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह केवल सुझाव या अपील देने के बजाय गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ठोस आर्थिक सहायता और राहत योजनाएं लागू करे।

    पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य ऊर्जा बचत और आयात पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर संयम और संसाधनों के बेहतर उपयोग से आर्थिक दबाव को कम किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर इस मुद्दे ने एक बार फिर से देश में आर्थिक नीतियों और जनता पर पड़ने वाले असर को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जहां एक ओर सरकार संयम और बचत पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष गरीब और मध्यम वर्ग की वास्तविक स्थिति को केंद्र में रखकर राहत की मांग कर रहा है।