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  • सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ रही दोनों कीमती धातुओं के भाव में अचानक बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई। वहीं, सोने की कीमत में 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई और यह 1,38,419 रुपये पर पहुंच गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस रह गई, जबकि स्पॉट सिल्वर में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका भाव 49.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।

    इस गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। महंगी ऊर्जा के कारण दुनिया भर में महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना भी बाजार की चिंता का हिस्सा बनी हुई है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने और चांदी जैसी संपत्तियों का आकर्षण प्रभावित होता है। इन धातुओं से नियमित ब्याज या निश्चित आय नहीं मिलती। इसके विपरीत, फिक्स्ड इनकम और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न की संभावना पेश करते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में निवेश करना पसंद कर सकते हैं। इसी बदलाव ने सोने-चांदी पर बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।

    वैश्विक शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। बाजार में नुकसान झेल रहे बड़े निवेशकों और संस्थागत कारोबारियों ने नकदी जुटाने तथा घाटे की भरपाई के लिए सोने-चांदी जैसी आसानी से बेची जा सकने वाली संपत्तियों में बिकवाली की। बाजार में इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहा जाता है।

    चीन से जुड़ी गतिविधियों ने भी दबाव बढ़ाया है। दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोने की बिक्री किए जाने की खबरों ने बाजार की धारणा प्रभावित की। चांदी में गिरावट सोने से अधिक रही, क्योंकि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और शेयर बाजार की अस्थिरता ने इसकी कीमतों को ज्यादा प्रभावित किया।

    कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा पुराने रिकॉर्ड से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। मौजूदा भाव के आधार पर यह अपने शिखर से 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुकी है। वर्ष 2025 में चांदी ने करीब 170 प्रतिशत का रिटर्न दिया था। इसी तरह जनवरी 2026 में सोने का भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह अपने उच्चतम स्तर से 42,321 रुपये नीचे आ चुका है। इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,40,054 रुपये रह गई है।

    हालांकि, घरेलू बाजार में आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिलने की उम्मीद है। नवंबर में धनतेरस, दिवाली और शादी-विवाह के सीजन के कारण आभूषणों तथा भौतिक सोने की खरीदारी बढ़ सकती है। 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण बाजार को त्योहारी खरीदारी से विशेष उम्मीद है।

    इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार अपने भंडार में सोना शामिल कर रहे हैं। उनकी खरीदारी से सोने की दीर्घकालिक मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों की स्थिति पर निर्भर करेगी। त्योहारी मांग और औद्योगिक खपत से सुधार की संभावना जरूर है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।

  • अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर

    अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर होते भाव ने कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। चांदी करीब 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि सोने की कीमतों में भी पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। महीनेभर के आंकड़ों के अनुसार चांदी लगभग 40 हजार रुपये और सोना आठ हजार रुपये से अधिक सस्ता हो गया है।

    चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार में सबसे ज्यादा असर दिखाया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा सौदों में शुक्रवार को 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भाव 1.80 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 1,79,600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर चांदी का कारोबार पिछली बार दिसंबर 2025 में देखने को मिला था।

    महीने के शुरुआती और अंतिम कारोबारी दिनों की तुलना करें तो चांदी में बड़ी गिरावट सामने आती है। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर को चांदी की कीमत 2,20,829 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं 30 अक्टूबर को इसका भाव घटकर 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। इस तरह एक महीने में चांदी 39,485 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। अन्य कारोबार आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में इसकी कुल गिरावट करीब 45 हजार रुपये तक पहुंची।

    सोने की कीमतों में भी लगातार कमजोरी बनी हुई है। शुक्रवार को सोना 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 1,38,249 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह मार्च 2026 के बाद का सबसे कम भाव बताया गया है। सोने में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में इसकी कीमत करीब 5,400 रुपये घटी थी, जबकि अक्टूबर में 10,787 रुपये प्रति 10 ग्राम की अतिरिक्त गिरावट सामने आई।

    महीने के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोने की कीमत 1 अक्टूबर को 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 30 अक्टूबर को यह घटकर 1,40,054 रुपये रह गई। इस तरह अक्टूबर में सोना 8,084 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। लगातार दो महीनों से जारी गिरावट ने सोने के बाजार में तेजी के पिछले रुख को कमजोर किया है।

    दोनों धातुओं की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से भी काफी नीचे आ चुकी हैं। चांदी का सर्वकालिक उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम रहा है। मौजूदा कीमतों के आधार पर इसमें रिकॉर्ड स्तर से करीब 57 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है। वर्ष 2025 में चांदी ने लगभग 170 प्रतिशत की तेजी दर्ज की थी, लेकिन हालिया गिरावट ने उस बढ़त का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है। इसी तरह सोने का सर्वकालिक उच्च स्तर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है। मौजूदा भाव इससे 42,321 रुपये नीचे है।

    कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हुई है। सितंबर में अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) प्राइस इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मार्च के बाद सबसे अधिक थी। सालाना महंगाई दर भी बढ़कर 3.6 प्रतिशत पहुंच गई।

    ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है। निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां उन्हें ब्याज या अन्य रिटर्न मिलने की संभावना हो।

    इसके अलावा मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमले से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी दर्ज की गई। इससे वैश्विक महंगाई लंबे समय तक बने रहने की आशंका पैदा हुई है।

    अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती भी सोने-चांदी पर दबाव का एक कारण मानी जा रही है। तीसरी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत रही, जो अनुमान से बेहतर बताई गई। मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में निवेश के कारण डॉलर को भी समर्थन मिला है।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा है। हालांकि महंगाई के दबाव के चलते दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी आशंका के बीच निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है और सोने-चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।

  • दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    नई दिल्ली । दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.59 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में करीब 1.96 प्रतिशत की गिरावट आई। कारोबार के दौरान चांदी 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। वैश्विक बाजार में कमजोर रुख और अमेरिका की आर्थिक परिस्थितियों को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले कारोबारी बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 843 रुपये नीचे आकर 1,41,753 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें लगभग 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी का भाव पिछले बंद स्तर 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 1,85,723 रुपये पर आ गया। इसमें 3,730 रुपये यानी करीब 1.96 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों का असर सोने-चांदी की मांग पर पड़ रहा है।

    बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अमेरिका में महंगाई के आंकड़े हैं। सितंबर में अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उपलब्ध बाजार अनुमानों के अनुसार, इस संभावना को 80 प्रतिशत से अधिक माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों का रुझान उन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज मिलता है। सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग प्रभावित होती है।

    तकनीकी स्तरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमत इस दायरे से नीचे जाती है तो इसमें 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है। चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है।

    चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल बने रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई और अब यह अपने रिकॉर्ड स्तर के आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।

    इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल सकते हैं।

    अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 8 और 9 दिसंबर को होने वाली बैठक पर है। साथ ही महंगाई और रोजगार से जुड़े आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत महंगाई के मजबूत आंकड़े आने पर गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । लगातार कई दिनों तक गिरावट का सामना करने के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी लौटी। पिछले सप्ताह सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की। हालांकि, बाजार में आई इस तेजी को फिलहाल गिरावट के बाद की रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है। आगे कीमतों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है।

    घरेलू वायदा बाजार में सोने के दिसंबर अनुबंध का भाव लगभग 0.50 प्रतिशत यानी 761 रुपये बढ़कर 1,42,733 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने पिछले बंद भाव 1,42,024 रुपये प्रति 10 ग्राम से 864 रुपये की बढ़त हासिल करते हुए 1,42,888 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। यह तेजी लगभग 0.60 प्रतिशत रही।

    चांदी के दिसंबर वायदा अनुबंध में भी मजबूती दर्ज की गई। इसका भाव करीब 0.49 प्रतिशत यानी 968 रुपये बढ़कर 1,96,687 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने पिछले बंद स्तर 1,95,719 रुपये से 1,467 रुपये की छलांग लगाई और 1,97,186 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान चांदी में 0.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद दोनों धातुओं में आई खरीदारी को बाजार की अहम गतिविधि माना जा रहा है। उस दौरान सोने की कीमत लगभग 4 प्रतिशत और चांदी की कीमत 7 प्रतिशत से अधिक टूट गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव का असर दिखाई दिया था। स्पॉट गोल्ड जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया था।

    अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स में सोमवार सुबह सोना लगभग 0.48 प्रतिशत बढ़कर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। सत्र के दौरान इसने 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर भी छुआ। चांदी लगभग 0.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 54.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची और कारोबार के दौरान 54.47 डॉलर प्रति औंस का स्तर दर्ज किया।

    बाजार में सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया गिरावट के बाद इस स्तर के आसपास खरीदारी लौटने से कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। ब्याज दरों को लेकर संकेत सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

    इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई महंगाई आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है।

    चांदी ने हालिया कारोबार में सोने की तुलना में बेहतर रिकवरी दिखाई है, लेकिन तकनीकी संकेतों के अनुसार इसमें अभी पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है। घरेलू बाजार में चांदी के लिए 2 लाख से 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का क्षेत्र प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 1.92 लाख से 1.94 लाख रुपये का स्तर समर्थन दे सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा था। तेल महंगा रहने से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती टलने का जोखिम रहता है। ऐसे में निवेशकों की नजर डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा बाजार की चाल पर भी बनी हुई है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना 3.5 प्रतिशत और चांदी 7.8 प्रतिशत फिसली

    सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना 3.5 प्रतिशत और चांदी 7.8 प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर घरेलू वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा। सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि चांदी 7.8 प्रतिशत फिसल गई। सोने का यह जून के बाद सबसे कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया जा रहा है। वहीं, चांदी की कीमत नवंबर 2025 के बाद के निचले स्तर तक पहुंच गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंका ने कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित किया है। आम तौर पर सोने को आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में महंगाई और मौद्रिक नीति से जुड़े जोखिमों ने इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। सोना निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं।

    घरेलू बाजार में भी गिरावट का असर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर वायदा सोने का भाव गिरकर करीब 1,42,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 1,42,079 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गई। यह पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में लगभग 1,230 रुपये यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट थी।

    चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक कमजोरी दर्ज की गई। दिसंबर वायदा चांदी का भाव करीब 1,95,408 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इसमें 4,191 रुपये यानी लगभग 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली के कारण चांदी का भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतें नीचे आईं। कॉमेक्स पर सोना करीब 1.24 प्रतिशत गिरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 3,989.10 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगभग 1.9 प्रतिशत गिरकर 53.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 116.7 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं, जिससे सोने और चांदी जैसी ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है।

    इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड ने भी सोने की मांग को कमजोर किया है। बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और दिसंबर में संभावित ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है, हालांकि मौद्रिक नीति के वास्तविक फैसले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।

    आने वाले दिनों में अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। फेडरल रिजर्व महंगाई के आकलन में इस सूचकांक पर विशेष ध्यान देता है। इसके साथ यूरोपीय केंद्रीय बैंक की बैठक, चीन के आर्थिक आंकड़े और वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियां भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि महंगाई ऊंची रहती है और ब्याज दरें लंबे समय तक सख्त बनी रहती हैं, तो सोने-चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव या बड़ी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से दोबारा समर्थन मिल सकता है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 6,799 रुपये टूटी, दो लाख के नीचे पहुंचा भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 6,799 रुपये टूटी, दो लाख के नीचे पहुंचा भाव

    नई दिल्ली । कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के भाव में एक बार फिर बड़ी कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। घरेलू वायदा बाजार में चांदी की कीमत गिरकर दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे आ गई, जबकि सोना भी अपने पिछले बंद स्तर से काफी नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर में डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,43,309 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह 1,251 रुपये यानी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,058 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से इसका भाव 1,41,806 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर सोने में पिछले बंद भाव के मुकाबले 1,503 रुपये यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ सुधार हुआ। कारोबार के दौरान सोना 629 रुपये यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ था।

    चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 1,99,599 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। शुक्रवार को यह 3,012 रुपये यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 1,96,587 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। दिन के कारोबार में गिरावट तेज हुई और इसका भाव 6,799 रुपये यानी 3.40 प्रतिशत फिसलकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस गिरावट के साथ चांदी दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई। हालांकि, बाद में कुछ खरीदारी लौटने से कीमत में आंशिक सुधार हुआ और चांदी 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।

    बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजहों में महंगी ऊर्जा और उससे बढ़ने वाली महंगाई की चिंता शामिल है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने के कारण निवेशकों को आशंका है कि महंगाई पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से सोने जैसी ऐसी संपत्तियों पर दबाव पड़ता है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होने से भी निवेशकों का रुझान प्रभावित हुआ है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.65 प्रतिशत टूटकर 4,034 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, चांदी करीब 1.30 प्रतिशत गिरकर 54.29 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही। वैश्विक बाजार में सोने का भाव 4,000 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचने से कीमती धातुओं में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।

    हालांकि, डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आने पर सोने-चांदी को कुछ समर्थन मिल सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, चीन की अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।

    इस साल सोने ने घरेलू वायदा बाजार में 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जबकि चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंची थी। मौजूदा भाव की तुलना में दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। विशेष रूप से चांदी की कीमत अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है। आगे कीमतों की दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

  • दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    नई दिल्ली । दशहरे के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देश के सर्राफा बाजार बंद हैं। ऐसे में सोने की खरीदारी करने वाले लोगों को पिछले कारोबारी सत्र के भाव और उपलब्ध शहरवार दरों के आधार पर कीमतों का अंदाजा लगाना होगा। सोने की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। घरेलू वायदा बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जबकि दिल्ली के सर्राफा बाजार में पिछले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में तेजी आई थी। अलग-अलग शहरों में 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव में भी अंतर देखने को मिल रहा है।

    उपलब्ध दरों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 1,48,190 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई और कोलकाता में इसका भाव 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,090 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। ये दरें शहरवार उपलब्ध कीमतों पर आधारित हैं। स्थानीय दुकानों पर कर, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

    22 कैरेट सोने की बात करें तो दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, जयपुर, चंडीगढ़ और कई अन्य शहरों में इसकी कीमत 1,35,850 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,700 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में इसकी कीमत 1,35,750 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए 22 कैरेट सोना महत्वपूर्ण विकल्प होता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर गहने बनाने में किया जाता है।

    18 कैरेट सोने की कीमत भी शहर के अनुसार अलग-अलग है। दिल्ली में इसका भाव 1,11,180 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि मुंबई और कोलकाता में यह 1,11,030 रुपये दर्ज किया गया है। इंदौर, भोपाल और पटना में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,080 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। चेन्नई में इसका भाव 1,11,550 रुपये प्रति 10 ग्राम है। खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा कारोबारी से ताजा दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    वायदा बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव 618 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर करीब 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह 1,47,918 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, पिछले सोमवार के कारोबार के अन्य आंकड़ों में दिसंबर आपूर्ति वाले सोने के वायदा अनुबंध में 436 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी और इसका भाव 1,48,354 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अलग-अलग समय के आंकड़ों में यह अंतर बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये बढ़कर 1,50,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी। इससे पहले इसका भाव 1,49,900 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में बदलाव दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों में हाजिर सोने का भाव करीब 4,175.57 डॉलर प्रति औंस और एक अन्य कारोबारी अपडेट में 4,145 डॉलर प्रति औंस बताया गया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी मौसम में खुदरा मांग बढ़ने से घरेलू सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। दिवाली और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल जैसे कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दशहरे के दिन खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को बाजार खुलने पर ताजा भाव की जानकारी लेनी चाहिए।

  • दशहरे पर एनएसई और बीएसई बंद, एमसीएक्स में शाम से शुरू होगा कारोबार, जानें निवेशकों के लिए पूरा शेड्यूल

    दशहरे पर एनएसई और बीएसई बंद, एमसीएक्स में शाम से शुरू होगा कारोबार, जानें निवेशकों के लिए पूरा शेड्यूल

    नई दिल्ली । दशहरा यानी विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार बंद है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने इस दिन को अपने वार्षिक अवकाश कैलेंडर में शामिल किया है। इसके चलते निवेशक आज शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। इक्विटी बाजार के साथ डेरिवेटिव्स और अन्य संबंधित कारोबारी खंडों में भी गतिविधियां स्थगित रहेंगी।

    शेयर बाजार में यह अवकाश ऐसे समय आया है, जब पिछले कारोबारी दिन यानी सोमवार को प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। निजी बैंकिंग शेयरों में कमजोरी, कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाया। सोमवार को निफ्टी 50 में करीब 257.20 अंकों की गिरावट आई और यह 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 876.37 अंक टूटकर 73,852.90 पर आ गया।

    सोमवार की बिकवाली का असर बाजार के अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों पर देखने को मिला। हालांकि, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स ने इस रुझान से अलग प्रदर्शन किया और 2.41 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। इसके बाद दशहरा अवकाश के कारण निवेशकों को घरेलू शेयर बाजार में अगली कारोबारी गतिविधियों के लिए एक दिन इंतजार करना होगा।

    एनएसई और बीएसई में आज केवल सामान्य शेयर कारोबार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में भी ट्रेडिंग बंद है। सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी कोई कारोबारी सत्र नहीं होगा। इन सभी गतिविधियों के लिए नियमित कारोबार दोबारा शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा।

    हालांकि, कमोडिटी बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए शाम को ट्रेडिंग का अवसर उपलब्ध रहेगा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सुबह का सत्र बंद रहेगा। इस एक्सचेंज पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा, लेकिन शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू हो जाएगी। इस तरह सोना, चांदी, कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी से जुड़े वायदा अनुबंधों में निवेशक शाम के सत्र के दौरान कारोबार कर सकेंगे।

    एमसीएक्स का शाम का सत्र रात 11:30 बजे तक या कुछ अनुबंधों के लिए रात 11:55 बजे तक चल सकता है। वास्तविक कारोबारी समय संबंधित अनुबंध और एक्सचेंज के निर्धारित कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। इसलिए कमोडिटी बाजार में सक्रिय निवेशकों के लिए ट्रेडिंग से पहले अपने संबंधित अनुबंध का समय देखना जरूरी है।

    घरेलू शेयर बाजार बंद रहने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना, चांदी और कच्चे तेल जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में एमसीएक्स का शाम का सत्र वैश्विक बाजारों में होने वाले बदलावों के अनुसार कारोबार करने का अवसर देता है। हालांकि, निवेशकों को बाजार की परिस्थितियों और संबंधित अनुबंधों की शर्तों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए।

    दशहरा अवकाश के बाद एनएसई और बीएसई में नियमित कारोबार बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इसके बाद निवेशक सामान्य कारोबारी समय के अनुसार शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे।

    वर्ष 2026 में दशहरे के बाद शेयर बाजार के प्रमुख अवकाशों में 10 नवंबर को दिवाली बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर को प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव जी और 25 दिसंबर को क्रिसमस शामिल हैं। एमसीएक्स में दिवाली बलिप्रतिपदा और गुरु नानक जयंती पर सुबह का सत्र बंद रहने, जबकि शाम का सत्र चालू रहने का कार्यक्रम है। क्रिसमस के दिन कमोडिटी एक्सचेंज पर पूरे दिन कारोबार बंद रहेगा।

  • सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव

    सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान सोना प्रति 10 ग्राम 4,500 रुपये सस्ता हुआ, जबकि चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 13,500 रुपये तक गिर गई। हालांकि, शुक्रवार को दिल्ली के हाजिर सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव स्थिर रहे। दूसरी ओर, वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। रुपये की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। पूरे सप्ताह के हिसाब से इसकी कीमत में 4,500 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत में मामूली सुधार हुआ और यह 0.30 प्रतिशत बढ़कर 4,183.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    वायदा बाजार में सोने की कीमतों का रुख हाजिर बाजार से अलग रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध शुक्रवार को 876 रुपये या 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,48,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान ताजा खरीदारी और हाजिर मांग में सुधार को इस तेजी से जोड़कर देखा गया। न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में भी सोने की कीमत 0.01 प्रतिशत बढ़कर 4,171.84 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।

    चांदी की कीमतों में भी सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय गिरावट रही। दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी का भाव 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहा। हालांकि, साप्ताहिक आधार पर इसकी कीमत 13,500 रुपये यानी करीब 6 प्रतिशत कम हुई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में चांदी 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 57.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा अनुबंध शुक्रवार को 2,217 रुपये या 1.05 प्रतिशत बढ़कर 2,12,877 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। कारोबारियों की ओर से सौदों का आकार बढ़ाए जाने के बीच कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में भी चांदी 0.31 प्रतिशत चढ़कर 57.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी सीमित रहने की एक प्रमुख वजह भारतीय रुपये की मजबूती रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और सात पैसे की बढ़त के साथ 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से मिले समर्थन के बीच रुपये की मजबूती का असर आयात लागत पर भी पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से विदेशों से खरीदे जाने वाले सोने और चांदी की लागत कम हो सकती है, जिससे घरेलू कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक फिसलने के बाद दोनों धातुओं में नुकसान की भरपाई करने की कोशिश दिखाई दी। हालांकि, रुपये की लगातार मजबूती ने इस सुधार को सीमित रखा।

    आगे के रुझान को लेकर कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमतों में हल्की तेजी के साथ सीमित दायरे में कारोबार हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के अनुसार सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

  • सोने की कीमतों में 1,443 रुपये की गिरावट, चांदी भी 1,552 रुपये फिसली, जानें घरेलू बाजार में भाव और आगे के अहम स्तर

    सोने की कीमतों में 1,443 रुपये की गिरावट, चांदी भी 1,552 रुपये फिसली, जानें घरेलू बाजार में भाव और आगे के अहम स्तर

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना 1,443 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में 1,552 रुपये प्रति किलोग्राम तक की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में हल्की तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें नीचे रहीं। इसके पीछे रुपये की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली को प्रमुख कारण बताया गया।

    एमसीएक्स पर 4 दिसंबर को डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,51,499 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,51,596 रुपये पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से भाव गिरकर 1,50,056 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सोने में 1,443 रुपये यानी करीब 0.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1,50,000 से 1,50,700 रुपये का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर है।

    चांदी में भी कारोबार के दौरान दबाव बना रहा। एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,25,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। सोमवार को यह 2,25,494 रुपये पर खुली, जो पिछले बंद भाव से करीब 0.11 प्रतिशत कम था। इसके बाद कीमत और नीचे आई तथा चांदी 2,24,203 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस दौरान इसमें 1,552 रुपये यानी लगभग 0.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ समर्थन दे सकती है, लेकिन रुपये की मजबूती निकट भविष्य में इसकी कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।

    वैश्विक बाजार में तस्वीर कुछ अलग रही। कॉमेक्स पर सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि चांदी का भाव करीब 61.1 डॉलर प्रति औंस रहा। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह रुपये में संभावित मजबूती की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों से रुपये को समर्थन मिलने की संभावना के बीच निवेशक इस घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। रुपया मजबूत होने पर आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ सकते हैं।

    आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति शामिल हैं। बाजार में दिसंबर के दौरान ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद भी बनी हुई है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी ऐसी संपत्तियों का आकर्षण घटा सकती हैं, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसलिए आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी ने 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को भी आर्थिक जोखिमों में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय में सोने की सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मांग को समर्थन दे सकती है।

    तकनीकी स्तरों के लिहाज से सोने के लिए 1.50 लाख रुपये के आसपास का भाव अहम माना जा रहा है। यह स्तर टूटने पर कीमत 1.48 लाख रुपये तक जा सकती है, जबकि ऊपर की ओर 1.52 लाख से 1.53 लाख रुपये का दायरा प्रमुख प्रतिरोध स्तर है। चांदी के लिए 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण है। कीमतों में मजबूती आने पर इसका भाव 2.28 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।