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  • पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) से लेकर वैश्विक बुलियन बाजार तक दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार का समग्र रुख कमजोर बना रहा।

    घरेलू वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत से ही दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत पिछले बंद स्तर की तुलना में एक प्रतिशत से अधिक टूटकर खुली। दिन के दौरान बिकवाली और तेज हुई, जिससे सोना करीब 1.37 प्रतिशत तक फिसलकर दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में सीमित खरीदारी लौटने से इसमें कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन बाजार की धारणा पूरी तरह सकारात्मक नहीं बन सकी।

    चांदी की कीमतों में भी इसी तरह कमजोरी देखने को मिली। सितंबर डिलीवरी वाला चांदी वायदा शुरुआती कारोबार में करीब एक प्रतिशत गिरावट के साथ खुला और दिन के शुरुआती सत्र में ही निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद के कारोबार में मामूली सुधार हुआ, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा और बड़े निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड में लगभग डेढ़ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्पॉट सिल्वर दो प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो सोना कई वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त मौद्रिक नीति है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं मजबूत हुई हैं। ऐसी स्थिति में निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए आगे भी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या उनमें बढ़ोतरी कर सकता है।

    ऊंची ब्याज दरों की संभावना से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग पर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जिससे निवेशकों का आकर्षण कम होता है और बिकवाली का दबाव बढ़ने लगता है। यही वजह रही कि सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातुओं में भी इस बार कमजोरी देखने को मिली।

    इस बीच कच्चे तेल के बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीदों के बावजूद हालिया मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इसके चलते निवेशक फिलहाल किसी बड़े जोखिम वाले निवेश से बचते हुए आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर रहे हैं। तेल बाजार में आई नरमी ने भी वैश्विक निवेश धारणा को प्रभावित किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से गैर-कृषि रोजगार, बेरोजगारी दर, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े तथा यूरोजोन की मुद्रास्फीति रिपोर्ट निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत संकेत देती है और फेड की सख्त नीति बरकरार रहती है तो कीमती धातुओं पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। वहीं किसी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम या आर्थिक संकेत में बदलाव से बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने की संभावना बनी रहेगी।

  • Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव और निवेशकों की बदली रणनीति का असर सोमवार को घरेलू सर्राफा बाजार में भी देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कीमती धातु दबाव में रही। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की मांग में आई कमी के कारण सोने के भाव नरम बने हुए हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां 24 कैरेट से लेकर 10 कैरेट तक लगभग सभी श्रेणियों के सोने की कीमतों में कमी दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में लगभग 0.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रति 10 ग्राम कीमत में 1,300 रुपये से अधिक की कमी देखने को मिली। वहीं सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतें दबाव में रहीं। दिनभर के कारोबार में भावों में उतार-चढ़ाव देखने के बाद शाम तक कीमतें सुबह के मुकाबले नीचे रहीं। इससे स्पष्ट है कि बाजार में फिलहाल खरीदारी की गति कमजोर बनी हुई है।

    शुद्धता के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोना करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.31 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रही। 18 कैरेट सोने के दाम भी एक लाख रुपये से ऊपर बने रहे। इसके अलावा 20, 16, 14, 12 और 10 कैरेट श्रेणियों में भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका लाभ उन उपभोक्ताओं को मिल सकता है जो निकट भविष्य में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में समान रुख देखने को मिला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, पटना, इंदौर, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोने के भाव में नरमी रही। हालांकि विभिन्न शहरों में स्थानीय करों और बाजार की परिस्थितियों के कारण कीमतों में मामूली अंतर बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर फिलहाल सोने की चाल पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की बदलती धारणा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नरमी के कारण सोने में सुरक्षित निवेश की मांग कुछ कम हुई है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में भी सोना दबाव में बना हुआ है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर लगातार पड़ रहा है।

    इंडियन बुलियन बाजार में दिनभर के दौरान भी कीमतों में कई बार बदलाव दर्ज किया गया। सुबह के मुकाबले दोपहर में कुछ तेजी दिखाई दी, लेकिन कारोबार समाप्त होने तक फिर गिरावट दर्ज हो गई। इससे साफ है कि बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है और निवेशक नई आर्थिक परिस्थितियों का इंतजार कर रहे हैं।

    पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में भी सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल, वैश्विक ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के आधार पर सोने की दिशा तय होगी। ऐसे में निवेशकों और आभूषण खरीदारों को बाजार की चाल पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    नई दिल्ली । लगातार दो कारोबारी सत्रों तक मजबूत बढ़त दर्ज करने के बाद मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार से लेकर हाजिर बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते दोनों धातुओं के भाव कमजोर पड़े।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 वायदा अनुबंध की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखाई देने के बावजूद बाद के सत्रों में दबाव बढ़ता गया और कीमतें लाल निशान में कारोबार करती रहीं। दोपहर तक सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे हालिया तेजी का कुछ हिस्सा कम हो गया। कारोबार के दौरान सोने ने ऊपरी और निचले दोनों स्तरों को छुआ, जो बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। जुलाई वायदा अनुबंध में शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई दी और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद लाभ सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी। कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव भी दर्ज किया गया।

    हाजिर बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में नरमी देखने को मिली। 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम आधार पर महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। इसी प्रकार 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव भी नीचे आए। ज्वेलरी कारोबार और खुदरा बाजार पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है।

    चांदी के हाजिर भाव में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रति किलोग्राम के आधार पर कीमतों में हजारों रुपये की कमी देखने को मिली, जिससे औद्योगिक और निवेश दोनों श्रेणियों के खरीदारों की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। चांदी का उपयोग निवेश के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में भी व्यापक रूप से किया जाता है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का प्रभाव कई क्षेत्रों तक पहुंचता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी दोनों के दाम दबाव में रहे, जिससे भारतीय बाजार में भी नकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश साधनों में नई रणनीति अपनाने और हालिया तेजी के बाद लाभ बुक करने की प्रवृत्ति ने कीमतों को प्रभावित किया है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशक अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में सोने और चांदी की कीमतें आने वाले दिनों में नई दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल मंगलवार का कारोबारी सत्र यह संकेत देता है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद बाजार में संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और निवेशक सावधानीपूर्वक अपने निवेश निर्णय ले रहे हैं।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में कमी आने और शांति समझौते की पुष्टि के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। इस घटनाक्रम का असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोना और चांदी की कीमतों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की बढ़ती सक्रियता और बाजार की बेहतर होती धारणा के बीच दोनों प्रमुख कीमती धातुओं ने शुरुआती कारोबार में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की।

    कमोडिटी बाजार में कारोबारी गतिविधियों की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हजारों रुपये की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में कीमतें लगातार मजबूत बनी रहीं और दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। निवेशकों ने इसे वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलाव और बाजार की स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी आई और शुरुआती घंटों में ही यह तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की नई खरीदारी ने चांदी को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया है। इसके चलते चांदी ने महत्वपूर्ण स्तरों को पार करते हुए नई मजबूती के संकेत दिए हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि से वैश्विक निवेशकों में विश्वास बढ़ा है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की खबर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना फिलहाल एक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यदि कीमतें मौजूदा प्रतिरोध क्षेत्र के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो निकट अवधि में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, प्रमुख समर्थन स्तरों के नीचे फिसलने पर कीमतों में सीमित गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और निवेशक आगे के वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

    चांदी के संबंध में भी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण उत्साहजनक बना हुआ है। प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने की स्थिति में इसमें और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कीमतों का ऊंचे स्तरों पर टिके रहना आवश्यक होगा। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।

    वित्तीय बाजारों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, ऊर्जा बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम सोना एवं चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शांति समझौते से पैदा हुए सकारात्मक माहौल ने निवेशकों को राहत दी है और कीमती धातुओं के बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है।

  • चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है।

    कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया।

    स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

    भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है।

    कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।

    चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।

  • सोना-चांदी बाजार में भूचाल, एक दिन में 11,700 रुपए तक टूटी कीमतें..

    सोना-चांदी बाजार में भूचाल, एक दिन में 11,700 रुपए तक टूटी कीमतें..


    नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली जब मजबूत डॉलर के दबाव ने सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज कराई। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में इन धातुओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

    घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां इसके जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में एक ही दिन में हजारों रुपए की कमजोरी दर्ज हुई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही चांदी दबाव में रही और दिन के दौरान इसमें लगभग चार प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। कीमतों में इस गिरावट ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी और ट्रेडर्स के बीच मुनाफावसूली का दौर तेज हो गया।

    सोने के बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया, हालांकि चांदी की तुलना में सोने में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना हल्की गिरावट के साथ खुला और दिनभर सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। शुरुआती गिरावट के बाद कुछ समय के लिए कीमतों में सुधार की कोशिश जरूर हुई, लेकिन अंततः बाजार दबाव में ही बना रहा। निवेशकों की नजर अब आने वाले वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है, जो सोने की दिशा तय कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स में लगातार मजबूती के चलते अन्य मुद्राओं में खरीदारों के लिए कीमती धातुएं महंगी हो गईं, जिससे मांग में कमी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स पिछले कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ गया है।

    डॉलर इंडेक्स की मजबूती को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की सुरक्षित निवेश रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोने की कीमतें अपने आप दबाव में आ जाती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं में गिरावट का रुझान देखने को मिला।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं। निवेशकों की नजर आने वाले आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों और वैश्विक नीतिगत फैसलों पर रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबे समय तक जारी नहीं रहेगी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना अब भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।

    चांदी में आई तेज गिरावट को औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के संकेतों ने चांदी की मांग को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। वहीं सोने में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..

    गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर एक बार फिर कमोडिटी बाजार में साफ दिखाई दिया है। सप्ताह की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों की कीमतों ने निवेशकों को मिश्रित संकेत दिए, जहां एक ओर सोना दबाव में रहा तो दूसरी ओर चांदी में हल्की मजबूती देखने को मिली।

    घरेलू वायदा बाजार में Gold की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और इसके बाद पूरे सत्र में कीमतें उतार-चढ़ाव के बीच सीमित दायरे में घूमती रहीं। बाजार में स्पष्ट दिशा की कमी के कारण निवेशक सतर्क नजर आए और बड़ी खरीदारी से बचते दिखे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में यह दबाव मुख्य रूप से वैश्विक घटनाक्रमों और निवेशकों की बदलती रणनीति के कारण देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता के चलते सुरक्षित निवेश की मांग तो बनी हुई है, लेकिन साथ ही अनिश्चितता ने बाजार को अस्थिर भी कर दिया है, जिससे कीमतों में स्थिरता नहीं बन पा रही है।

    इसके विपरीत Silver ने शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती दिखाई। चांदी की कीमतों में दिनभर सकारात्मक रुझान बना रहा, हालांकि इसमें तेज उछाल नहीं देखा गया। सीमित बढ़त के बावजूद निवेशकों की रुचि बनी रही और खरीदारी का माहौल थोड़ा बेहतर नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं का रुख समान रूप से अस्थिर रहा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक फिलहाल बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि सोने और चांदी दोनों में स्पष्ट ट्रेंड के बजाय सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में कमोडिटी बाजार पूरी तरह से खबरों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर हो गया है। किसी भी बड़े राजनीतिक या आर्थिक संकेत का सीधा असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    इस बीच वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विभिन्न देशों के बीच जारी मतभेद और कूटनीतिक अस्थिरता का असर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग पर पड़ रहा है, लेकिन साथ ही बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चांदी का बाजार संतुलन की तलाश में नजर आ रहा है। दोनों धातुएं सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं और निवेशक फिलहाल स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम ही इस बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद सोना-चांदी में गिरावट, बाजार में दबाव कायम..

    अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद सोना-चांदी में गिरावट, बाजार में दबाव कायम..


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है, जिसके चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

    सोने के वायदा बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और कीमतें पिछली क्लोजिंग से नीचे स्तर पर खुलीं। दिनभर के कारोबार में भी सोने में बहुत ज्यादा मजबूती नहीं देखी गई और यह सीमित दायरे में ही बना रहा।

    चांदी की कीमतों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में चांदी कमजोर खुली और पूरे सत्र के दौरान दबाव में बनी रही। बाजार में खरीदारी कमजोर रहने के कारण इसमें कोई बड़ी रिकवरी नहीं दिखी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में नरमी दर्ज की गई है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं की मांग पर असर पड़ा है।

    हालांकि भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन बाजार ने इस पर सीमित प्रतिक्रिया दी है। ऊर्जा बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिलती, तब तक सोना और चांदी में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक बड़े फैसलों से बच रहे हैं।

  • सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.

    सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.


    नई दिल्ली। शुक्रवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange यानी MCX पर सोने के भाव 500 रुपये से अधिक बढ़ गए और चांदी के भाव में 9,000 रुपये से भी अधिक की उछाल दर्ज की गई। सुबह के शुरुआती कारोबार में अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 525 रुपये बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इसी तरह मई डिलीवरी वाली चांदी में 9,547 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद भाव 2,77,500 रुपये तक जा पहुंचा। हालांकि दिन के मध्य में थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में तेजी की लहर मजबूत बनी रही।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ को लेकर निवेशकों की चिंताएं और वैश्विक बाजार में सॉलिडिटी की तलाश ने कीमती धातुओं में मांग बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हुए सोने-चांदी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेष रूप से चांदी की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी देखी गई है कि यह फिर से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता रहा तो यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है। सोने में निवेशकों की मजबूत रुचि के कारण एमसीएक्स पर सोने के कारोबार में भी जोरदार तेजी बनी रही।

    इस तेजी का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि ज्वेलरी मार्केट और स्थानीय सोने-चांदी व्यापारियों के भाव में भी असर दिखा। व्यापारियों ने कहा कि खरीदारी में तेजी के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषकर त्योहार और शादी के सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी आम लोगों के बजट को प्रभावित कर सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशक भावों में अचानक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निवेश करें। हालांकि सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोना और चांदी हमेशा आकर्षक रहे हैं, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल रहा है।

    इस बीच, घरेलू वायदा बाजार में एमसीएक्स के आंकड़े बताते हैं कि सोना और चांदी में तेजी की शुरुआत सुबह के शुरुआती कारोबार से ही हुई थी और निवेशकों ने इसी लहर का फायदा उठाया। अप्रैल डिलीवरी वाले सोने का भाव लगातार बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी ने 2,77,500 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया।

    वैश्विक निवेशकों की नजरों में बढ़ते तनाव और टैरिफ अस्थिरता ने सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश का प्रमुख साधन बना दिया है। इसलिए घरेलू बाजार में भी तेजी की यह लहर मजबूत बनी हुई है। निवेशक और व्यापारी इस उछाल का लाभ उठाने की रणनीति बना रहे हैं।

  • डॉलर मजबूत होने और भारी मुनाफावसूली के चलते सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट निवेशकों में बेचैनी का माहौल

    डॉलर मजबूत होने और भारी मुनाफावसूली के चलते सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट निवेशकों में बेचैनी का माहौल


    नई दिल्ली। इस हफ्ते सोने और चांदी के बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की और डॉलर के मजबूत होने के चलते कीमती धातुओं के दाम अचानक नीचे आ गए। एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना करीब 9 प्रतिशत गिरा जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी में 25 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल सोने का भाव 1,49,075 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,91,922 रुपए प्रति किलो रिकॉर्ड किया गया।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर घटकर 1,65,795 रुपए पर आ गया था, जबकि इससे पहले यह 1,75,340 रुपए पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने की वजह से निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू की। डॉलर के मजबूती का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ने फेडरल रिजर्व चेयरमैन के रूप में केविन वार्श के नाम की घोषणा करना बताया गया है। केविन वार्श महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्त रुख रखते हैं और कम ब्याज दरों के पक्ष में नहीं माने जाते।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, वास्तविक बॉन्ड यील्ड बढ़ीं और सोने व चांदी में लीवरेज्ड पोजीशन, जिन्हें करेंसी वैल्यू घटने से बचाव के तौर पर लिया गया था, तेजी से खत्म कर दी गई। इसके चलते बाजार में अरबों डॉलर का मार्केट वैल्यू साफ हुआ और कमजोर निवेशक बाहर हो गए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट लंबी अवधि की मंदी की शुरुआत नहीं है बल्कि एक जरूरी सुधार प्रक्रिया है।लंबी अवधि के बुनियादी कारक अब भी मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण चांदी की आपूर्ति में संरचनात्मक कमी बनी हुई है। यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी के लिए तेजी का नजरिया बरकरार है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के बाद जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी और जोखिम भरे निवेश बाहर हो गए हैं जिससे आगे चलकर बाजार स्थिर तरीके से ऊपर जा सकता है। चांदी की कीमत यदि 3 लाख से 3.10 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर आती है तो वहां से दोबारा खरीदारी शुरू हो सकती है। इसके चलते चांदी संभावित रूप से 3.40 लाख से 3.50 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।इस गिरावट को निवेशकों के लिए मौका भी माना जा रहा है क्योंकि बाजार में स्थिरता आने के बाद धातुओं की कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।