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  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा समझौते की उम्मीद लेकिन सैन्य विकल्प तैयार

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा समझौते की उम्मीद लेकिन सैन्य विकल्प तैयार


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का ताजा बयान वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ गहरी और गंभीर बातचीत में जुटा हुआ है लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता भी खुला रखा गया है। इस दोहरे रुख ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन मध्य पूर्व के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

    इजरायली मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान के साथ संघर्ष विराम की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए कई चैनलों के जरिए संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस कूटनीतिक पहल की अगुवाई उनके करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner कर रहे हैं जो अलग अलग देशों के माध्यम से बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार बातचीत दो स्तरों पर चल रही है। एक तरफ पाकिस्तान मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद कायम कर रहे हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी प्रतिनिधि सीधे ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के संपर्क में हैं। इन प्रयासों का मकसद किसी ऐसे समझौते तक पहुंचना है जिससे तनाव कम हो सके और टकराव टाला जा सके।

    हालांकि अब तक की बातचीत से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है लेकिन ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि तय समय सीमा से पहले समझौता हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि मंगलवार तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसी के साथ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    ट्रंप का बयान खास तौर पर उस समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ट्रंप ने ईरान से इसे तुरंत खोलने की मांग दोहराई है।

    उन्होंने यहां तक कहा कि अगर ईरान तय समय सीमा तक इस मुद्दे पर सहमति नहीं देता तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है।

    कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है जहां एक ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश हो रही है वहीं दूसरी ओर युद्ध जैसे हालात बनने का खतरा भी बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या फिर यह तनाव किसी बड़े टकराव में बदल जाएगा।

  • ट्रंप की धमकी के बाद एक्शन: दुबई के पास तेल टैंकर पर ड्रोन हमला

    ट्रंप की धमकी के बाद एक्शन: दुबई के पास तेल टैंकर पर ड्रोन हमला


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में वेस्ट एशिया का संकट एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। ईरान ने कुवैत के एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। यह हमला दुबई के पास समुद्री क्षेत्र में हुआ जिसकी पुष्टि स्थानीय अधिकारियों और कुवैती सूत्रों ने की है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी तरह की जनहानि या तेल रिसाव की सूचना नहीं मिली है।

    दुबई मीडिया ऑफिस के अनुसार आपातकालीन टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। टैंकर में आग जरूर लगी थी लेकिन उसे समय रहते बुझा दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न तो कोई व्यक्ति घायल हुआ और न ही समुद्र में तेल का रिसाव हुआ।

    इस घटना से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को दोबारा नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान की तेल सुविधाओं को निशाना बना सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद ही टैंकर पर हमले की खबर सामने आई जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक कुवैत का यह टैंकर दुबई से करीब 31 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम में हमले का शिकार हुआ। ब्रिटेन की मैरीटाइम एजेंसी के अनुसार हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी जिसे बाद में काबू में कर लिया गया।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे तेल टैंकरों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है।

    दूसरी ओर चीन ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए अमेरिका और इजरायल से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सभी पक्ष संयम बरतें और क्षेत्र में शांति बनाए रखने का प्रयास करें।

    चीन ने संघर्ष के दौरान ईरान के परमाणु संयंत्रों और ऐतिहासिक स्थलों को हुए नुकसान पर भी दुख जताया है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर पूरी मानवता की अमूल्य संपत्ति है और इस तरह का नुकसान बेहद चिंताजनक है।

    कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को गंभीर जोखिम में डाल दिया है। होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर पहले से मौजूद संकट के बीच इस तरह के हमले आने वाले दिनों में हालात को और जटिल बना सकते हैं।

  • ईरानी हमलों से अमेरिकी सैनिकों में हड़कंप, कई ठिकानों को छोड़ा, दूरदराज से लड़ना पड़ रहा युद्ध

    ईरानी हमलों से अमेरिकी सैनिकों में हड़कंप, कई ठिकानों को छोड़ा, दूरदराज से लड़ना पड़ रहा युद्ध


    तेहरान। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद सेना का बड़ा हिस्सा अब अपने ठिकानों से हटकर दूरदराज से ही युद्ध लड़ रहा है। हालांकि, लड़ाकू पायलट और कुछ क्रू अभी भी सैन्य ठिकानों पर हैं और ईरान पर हवाई हमले जारी रखे हुए हैं।

    ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने नागरिकों से अमेरिकी सैनिकों की नई जगहों की जानकारी देने की अपील की है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि खतरे के बावजूद पेंटागन युद्ध जारी रखने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि ईरान के 7 हजार से अधिक ठिकानों पर अमेरिकी हमले किए गए हैं।

    युद्ध की शुरुआत और सैनिकों का स्थानांतरण

    युद्ध शुरू होने पर करीब 40 हजार अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में थे। सेंट्रल कमांड ने हजारों सैनिकों को अलग-अलग जगहों पर भेज दिया, कुछ को यूरोप तक भेजा गया। कई सैनिक पश्चिम एशिया में हैं, लेकिन अब अपने मूल ठिकानों पर नहीं हैं।

    ईरान ने दिया जबरदस्त जवाब
    ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों का कड़ा जवाब दिया। अपने सर्वोच्च नेता और दर्जनों अन्य नेताओं के मारे जाने के बावजूद, ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, दूतावासों और तेल-गैस के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया। होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक प्रभाव महसूस हो रहा है।

    अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान

    क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले 13 अमेरिकी ठिकानों में कई पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुवैत स्थित ठिकानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। पोर्ट शुएबा में हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर भी हमले हुए। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस में मिसाइलों और ड्रोन हमलों से संचार उपकरण और रीफ्यूलिंग टैंकर क्षतिग्रस्त हुए।

    सुरक्षा और योजना में कमी की स्वीकारोक्ति

    पेंटागन के ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्वीकार किया कि भारी हवाई हमलों के बावजूद ईरान के पास अब भी कुछ क्षमता बची हुई है। सुरक्षा की कई परतें अमेरिका को अपने सैनिकों और हितों की रक्षा में सक्षम बना रही हैं, लेकिन बेहतर योजना की कमी के कारण अमेरिकी सैनिकों को अतिरिक्त कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने युद्ध शुरू होने से पहले ईरान की ताकत का गलत आकलन किया और क्षेत्रीय दूतावासों पर कर्मचारियों की संख्या कम नहीं की। इस कारण सैनिकों को नए ठिकानों में भेजना युद्ध संचालन को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।

    सैनिकों का होटल में इकट्ठा होना

    कुछ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों और उपकरणों को अस्थायी जगहों पर भेजने से संचालन मुश्किल हो गया। पूर्व अमेरिकी वायुसेना विशेष ऑपरेशंस विशेषज्ञ जे. ब्रायंट ने कहा कि हमारे पास तेजी से ऑपरेशन सेंटर बनाने की क्षमता है, लेकिन सभी उपकरणों को किसी होटल की छत पर इकट्ठा करना व्यावहारिक नहीं है।

  • अरब सागर में तनाव चरम पर ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी से ईरान पर बढ़ा दबाव और युद्ध की आहट

    अरब सागर में तनाव चरम पर ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी से ईरान पर बढ़ा दबाव और युद्ध की आहट


    नई दिल्ली: 
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है और इस टकराव में अब ब्रिटेन की एंट्री ने हालात को और गंभीर बना दिया है अरब सागर के नजदीक ईरान के आसपास ब्रिटेन की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी HMS Anson की तैनाती ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो संघर्ष का दायरा वैश्विक स्तर तक पहुंच सकता है यह तैनाती सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह पनडुब्बी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से रवाना होकर अब उत्तरी अरब सागर के गहरे पानी में अपनी स्थिति बना चुकी है इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके हथियार हैं जिनमें टॉमहॉक ब्लॉक IV क्रूज मिसाइल शामिल हैं जिनकी मारक क्षमता लगभग 1600 किलोमीटर तक है यह मिसाइलें बेहद सटीक मानी जाती हैं और इन्हें दूर बैठे लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए जाना जाता है इसके अलावा इस पनडुब्बी में स्पीयरफिश टॉरपीडो भी मौजूद हैं जो समुद्री युद्ध में बेहद घातक साबित हो सकते हैं

    HMS Anson की सबसे बड़ी खासियत इसकी परमाणु ऊर्जा प्रणाली है जिससे यह बिना रुके महीनों तक समुद्र में रह सकती है इसे बार बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती और यह पूरी तरह गुप्त तरीके से काम करती है इसकी लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि यह साइलेंट मोड में रहकर ऑपरेशन करती है और दुश्मन के लिए यह एक अदृश्य खतरे की तरह होती है

    इस तैनाती का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इससे पहले ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कोशिश की थी जो अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त बेस है हालांकि इस हमले में ईरान की मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं लेकिन इस घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया है और यह संकेत दिया है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत कर रहा है

    ब्रिटेन ने पहले अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति दी थी जो पहले केवल रक्षात्मक कार्यों तक सीमित थी लेकिन अब इस अनुमति का दायरा बढ़ा दिया गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि अगर जरूरत पड़ी तो ब्रिटेन भी आक्रामक भूमिका में आ सकता है इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका और ब्रिटेन दोनों एक साथ ईरान पर दबाव बनाते नजर आ रहे हैं

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि HMS Anson की तैनाती एक रणनीतिक संदेश है और यह संकेत देती है कि पश्चिमी देश किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार हैं अंतिम निर्णय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद लिया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी

    इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह तनाव आगे जाकर एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है या फिर कूटनीति के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जाएगा आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी लेकिन फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    अरब सागर में ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी की तैनाती से ईरान के खिलाफ तनाव बढ़ा, डिएगो गार्सिया हमले के बाद हालात और गंभीर

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    Iran Tension, UK Navy, Nuclear Submarine, Middle East Conflict, Global War Risk

  • मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक स्वदेश लौटे 2.44 लाख भारतीय, 5 नागरिकों की हुई मौत

    मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक स्वदेश लौटे 2.44 लाख भारतीय, 5 नागरिकों की हुई मौत


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संघर्ष के बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को कहा कि 28 फरवरी से अब तक लगभग 2.44 लाख लोग क्षेत्र से भारत लौट (Return to India) चुके हैं। पश्चिम एशिया की स्थिति पर विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने बताया कि इस संघर्ष में अब तक पांच भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जबकि एक व्यक्ति लापता है। उन्होंने कहा कि हाल में ओमान के सोहार शहर में हुई एक घटना में मारे गए दो भारतीयों के पार्थिव शरीर मंगलवार को भारत लाए गए और ये जयपुर में उनके परिजनों को सौंप दिए गए।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कल मैंने बताया था कि छात्रों समेत लगभग 650 भारतीय नागरिक ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे थे, ताकि वहां से स्वदेश लौट सकें। अब लगभग 50 और भारतीय आर्मेनिया पहुंचे हैं तथा कुछ अन्य अजरबैजान गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान गए 284 तीर्थयात्री भी सफलतापूर्वक आर्मेनिया पहुंच गए हैं। इनमें से 130 तीर्थयात्री आज दिल्ली पहुंचेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय है और भारतीय नागरिकों की सहायता कर रहा है।

    जायसवाल ने बताया कि फोन और ईमेल की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। ‘ब्रिक्स’ के रुख पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है। ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया का एक प्रभावशाली समूह है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत अध्यक्ष है। इस संघर्ष में ब्रिक्स के कई सदस्य देश सीधे तौर पर जुड़े हैं, इसलिए विभिन्न देशों के रुख में अंतर को पाटना चुनौतीपूर्ण रहा है। फिर भी हम सभी पक्षों के संपर्क में हैं।’

    अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था तथा जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कुछ खाड़ी देशों पर हमले किए और अमेरिका व इजरायल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया। यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कालास के निमंत्रण पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा के बारे में जायसवाल ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की।

    जायसवाल ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत से ही भारत का रुख रहा है कि संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाए। हमने सभी देशों से संयम बरतने तथा संघर्ष को और न बढ़ाने की अपील की है। वहीं, महाजन ने कहा कि विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है तथा वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय किया जा रहा है तथा क्षेत्र में भारतीय मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। महाजन ने बताया कि 16 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से भारत के लिए लगभग 65 उड़ानें संचालित हुईं, जबकि मंगलवार को करीब 70 उड़ानों के संचालन की उम्मीद है। ओमान से भी भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए उड़ानें जारी हैं।

  • जंग के बीच भारत पहुंचा पहला LPG जहाज: शिवालिक में 32.4 लाख सिलेंडर के बराबर गैस, नंदा देवी और जग लाडकी कल मुंद्रा पोर्ट पर

    जंग के बीच भारत पहुंचा पहला LPG जहाज: शिवालिक में 32.4 लाख सिलेंडर के बराबर गैस, नंदा देवी और जग लाडकी कल मुंद्रा पोर्ट पर


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत को राहत देने वाला पहला LPG कैरियर जहाज शिवालिक कतर से 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सोमवार शाम पहुंच गया। यह मात्रा लगभग 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों के बराबर है। जहाज 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर रवाना हुआ था। शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि कल नंदा देवी नामक जहाज भी लगभग 46 हजार टन LPG लेकर और जग लाडकी जहाज 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचेंगे।

    भारत सरकार ने फारस की खाड़ी में सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षा की पुष्टि की। वर्तमान में 22 भारतीय झंडा वाले जहाज वहां सक्रिय हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुंद्रा पोर्ट पर शिवालिक जहाज के लिए सभी दस्तावेजी और बर्थिंग व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान से जमीन मार्ग के जरिए 90 भारतीय नागरिक सुरक्षित अजरबैजान पहुंचे हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों को वीजा और इमिग्रेशन सहायता प्रदान की।

    वहीं, मिडिल-ईस्ट में सैन्य तनाव के बीच ब्रिटेन, जर्मनी और ग्रीस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान में भाग नहीं लेंगे। इजराइल ने ईरान के तेहरान में एयरस्ट्राइक कर एक विमान नष्ट करने का दावा किया है, जिसका इस्तेमाल ईरानी नेतृत्व और सीनियर अधिकारियों द्वारा किया जाता था।

    यह भारत के लिए जंग के बीच ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में पहला बड़ा कदम है, जिससे घरेलू LPG और कच्चा तेल की निरंतर आपूर्ति बनी रहेगी।

  • ईरान तैयार नागरिक इलाकों पर हमलों की जांच में सहयोग देने को, अराघची ने कहा वैध सैन्य कार्रवाई

    ईरान तैयार नागरिक इलाकों पर हमलों की जांच में सहयोग देने को, अराघची ने कहा वैध सैन्य कार्रवाई


    नई दिल्ली । तेहरान ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच स्पष्ट किया है कि वह नागरिक क्षेत्रों पर हमलों से जुड़े आरोपों की जांच में सहयोग करने को तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघचीने कहा कि उनकी सरकार किसी भी स्वतंत्र जांच का समर्थन करेगी और यह साबित करने को तैयार है कि ईरानी सैन्य कार्रवाई केवल वैध सैन्य लक्ष्यों के खिलाफ है।

    अराघची ने अल अरबी अल जदीद वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान ने जानबूझकर किसी भी आवासीय या नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया है। यदि किसी घटना में नागरिकों को नुकसान हुआ है तो तथ्यों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के कुछ ठिकानों पर हाल में हुए हमले पड़ोसी देशों से किए गए थे और जवाबी कार्रवाई करते समय कोशिश होगी कि आबादी वाले क्षेत्रों को नुकसान न पहुंचे।

    हाल के दिनों में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमलों के बाद मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार संघर्ष बढ़ने से मध्य पूर्व की सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा बाजार और मानवीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी क्षेत्रीय पहल का स्वागत करेगा जिससे युद्ध का न्यायसंगत अंत हो सके हालांकि अब तक कोई ठोस प्रस्ताव “मेज पर” नहीं आया है।

    इसके अलावा ईरानी अधिकारियों ने कहा कि हाल के इजरायली हमले में अयातुल्ला अली खामेनेईघायल हुए थे लेकिन उनकी चोट जानलेवा नहीं है। खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति और स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें फैल रही थीं। उनका पहला सार्वजनिक संबोधन 12 मार्च को सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित किया गया जिसमें उद्घोषक ने उनका संदेश पढ़ा।ईरान की यह पेशकश क्षेत्रीय तनाव कम करने और युद्ध अपराध की संभावित जांच में सहयोग देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

  • अमेरिका ने भारत को दी 30 दिन की रूसी तेल खरीदने की छूट, कहा मुश्किल समय में जिम्मेदार साथी

    अमेरिका ने भारत को दी 30 दिन की रूसी तेल खरीदने की छूट, कहा मुश्किल समय में जिम्मेदार साथी


    नई दिल्ली । पश्चिमी एशिया में ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट पैदा कर दिया है। इस समय अमेरिकी प्रशासन ने भारत के लिए एक राहत भरा फैसला लिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लैविट ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत को 30 दिनों के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी गई है।

    कैरोलाइन लैविट ने बताया कि भारत एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है और मुश्किल समय में हमेशा जिम्मेदारी से कदम उठाता है। इस शॉर्ट टर्म फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के कारण बढ़ती वैश्विक तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर न डालें।

    व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस छूट से रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले से समुद्र में मौजूद जहाजों में था। नेशनल सिक्योरिटी टीम और ट्रेजरी सेक्रेटरी की जांच के बाद ही यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया।

    28 फरवरी से बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज की खाड़ी में युद्ध की घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। ऐसे कठिन दौर में अमेरिका का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वैश्विक तेल संकट और तेल निर्यातकों की बदलती स्थिति के बीच भारत के लिए समयबद्ध राहत साबित होगा। भारत ने पहले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाई थी लेकिन यह छूट अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संकट के मद्देनजर अस्थायी उपाय के रूप में दी गई है।

  • गुब्बारे वाले टैंक और हेलीकॉप्टर की पेंटिंग: ईरान की डमी वॉरफेयर से उलझा इजरायल, करोड़ों की मिसाइलें बेकार?

    गुब्बारे वाले टैंक और हेलीकॉप्टर की पेंटिंग: ईरान की डमी वॉरफेयर से उलझा इजरायल, करोड़ों की मिसाइलें बेकार?

    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र में ईरान ने एक नई रणनीति अपनाई है। दावा किया जा रहा है कि उसने जमीन पर गुब्बारे वाले टैंक और विमानों की डमी पेंटिंग तैनात कर दी हैं जिससे इजरायल की महंगी मिसाइलें और रडार बेकार हो रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि इजरायल ने कई लक्ष्यों को नष्ट किया लेकिन वे असली हथियार नहीं बल्कि जमीन पर बनी पेंटिंग और डमी टैंक थे।

    एक इजरायली मिसाइल की कीमत लगभग 3 मिलियन डॉलर यानी करीब 25 करोड़ रुपये होती है। वीडियो देखने वाले यूजर्स का कहना है कि अगर ये असली हेलीकॉप्टर या टैंक होते तो मिसाइल से मारे जाने के बाद उनके पंख या अन्य हिस्से उड़ते। लेकिन वीडियो में ये डमी स्थिर दिखाई दिए।

    अखबारों और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने चीन से लगभग 9 लाख गुब्बारे वाले टैंक और मिसाइल लॉन्चर मंगवाए हैं। इन डमी टैंकों को लकड़ी रबर और थर्मल पेंट से तैयार किया गया है ताकि वे ऊपर से वास्तविक हथियारों जैसे दिखें। यह ऑप्टिकल इल्यूजन आधुनिक रडार और थर्मल सेंसर को भ्रमित करता है और दुश्मन को असली निशाना पहचानने में कठिनाई होती है।

    हालांकि कई रक्षा विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह सत्य मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि आधुनिक मिसाइलों के थर्मल सेंसर और शैडो डिटेक्शन को केवल पेंटिंग और गुब्बारे से धोखा देना लगभग असंभव है। ईरान ने अपने असली लड़ाकू विमानों और टैंकों को अंडरग्राउंड सुरंगों में सुरक्षित रखा और ऊपर केवल नकली डमी रखी हैं।

    धोखे की यह रणनीति युद्ध में नई नहीं है लेकिन ईरान ने इसे आधुनिक तकनीक के दौर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। इस चालाकी से इजरायल और अमेरिका के महंगे हथियार बेकार होने के साथ साथ उनके आर्थिक और रणनीतिक नुकसान की आशंका बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति न केवल दुश्मन को भ्रमित करने के लिए बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा भी है। कम खर्च में दुश्मन की मिसाइलें बेकार करना और अपने असली हथियारों को सुरक्षित रखना ईरान के लिए सस्ता लेकिन प्रभावी तरीका साबित हो रहा है।

  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    नई दिल्ली। समाजसेवी अन्ना हजारे ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भारत से शांति और संवाद की पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वर्तमान समय में दुनिया अत्यंत चिंताजनक परिस्थितियों से गुजर रही है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष से सामान्य नागरिकों का जीवन असुरक्षित हो रहा है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और परिवारों पर इसका असर पीड़ादायक है।

    अन्ना हजारे ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा अहिंसा और शांति की रही है। हमारे देश ने विश्व को संवाद और शांति का मार्ग दिखाने का प्रयास किया है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र की ओर से मानवता और शांति का संदेश देना अत्यंत आवश्यक है।

    उन्होंने पत्र में लिखा, “आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद की जरूरत है। युद्ध से केवल विनाश होता है, जबकि संवाद से समाधान और स्थिरता की राह निकलती है। इसलिए मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि भारत तटस्थ और जिम्मेदार भूमिका निभाते हुए वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा दे।”

    अन्ना हजारे ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसलिए इस संवेदनशील समय में यदि भारत मानवता और शांति के पक्ष में आगे आता है, तो यह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानवता के हित और निरपराध नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत को शांति का मार्ग आगे बढ़ाना चाहिए।

    पिछले एक हफ्ते में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले किए, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई उच्च सैन्य अधिकारी मारे गए। बदले में ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। यह संघर्ष अब भी जारी है और वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर रहा है।

    अन्ना हजारे का पत्र इस बात पर जोर देता है कि इस जटिल वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका न केवल तटस्थ बल्कि सक्रिय रूप से शांति और संवाद को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत यदि इस समय जिम्मेदार पहल करता है, तो यह न केवल वैश्विक स्थिरता के लिए बल्कि मानवता के हित में भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।