Tag: Middle East Tensions

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर ग्वालियर की बाजारों में, किराना, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर ग्वालियर की बाजारों में, किराना, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े


    ग्वालियर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष का असर अब ग्वालियर के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। शहर में धीरे-धीरे महंगाई बढ़ रही है, जिससे आम लोगों के घर का बजट प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो रोजमर्रा की चीजों के दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं।
    शहर में एलपीजी गैस की स्थिति भी प्रभावित हुई है। एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। इसके कारण घरेलू गैस की मांग अचानक बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि कुछ लोग सिलेंडर स्टॉक कर रहे हैं, जिसके चलते जरूरतमंदों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है।

    किराना बाजार में भी महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है। व्यापारियों के अनुसार कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 5 से 10 रुपए तक की बढ़ोतरी होने लगी है। उनका कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    किराना व्यापारी गोकुल बंसल के मुताबिक खाने के तेल की कीमत में लगभग 10 रुपए प्रति किलो और एक कनस्तर पर करीब 100 रुपए तक का फर्क आ चुका है। इसके अलावा दाल और चावल के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार में एक वस्तु की कीमत बढ़ने का असर दूसरी चीजों पर भी पड़ता है, इसलिए हालात सामान्य होना जरूरी है।

    ड्राई फ्रूट्स के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। ग्वालियर में अधिकांश ड्राई फ्रूट्स बाहरी राज्यों और विदेशों से आते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। ड्राई फ्रूट्स व्यापारी मानस गोयल के अनुसार पिस्ता की कीमत में करीब 300 से 400 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि डोडी के दाम भी लगभग 100 रुपए प्रति किलो बढ़े हैं।

    उन्होंने बताया कि ईरान से आने वाले कई उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। काली किशमिश और अन्य रेजिन आइटम्स में 100 से 200 रुपए तक का अंतर देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि यह स्थिति दो सप्ताह और बनी रही, तो आम लोगों के लिए ड्राई फ्रूट्स खरीदना मुश्किल हो सकता है।

    इधर गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण लकड़ी की मांग भी बढ़ने लगी है। लकड़ी और कोयला व्यापारियों के मुताबिक लकड़ी की मांग में करीब 10 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। लकड़ी व्यवसायी नेहा गुप्ता ने बताया कि कोयले की मांग फिलहाल स्थिर है, लेकिन गैस की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण होटल, कैटरर्स और मैरिज हॉल में लकड़ी की सप्लाई बढ़ने लगी है।

  • पानी के नीचे छिपी ईरान की ग़दीर मिनी सबमरीन: अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

    पानी के नीचे छिपी ईरान की ग़दीर मिनी सबमरीन: अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चिंता?


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी नौसेना ताकत को और मजबूत करते हुए दो नई मिनी पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल की हैं। ये अत्याधुनिक ग़दीर क्लास पनडुब्बी डिवीजन की पनडुब्बियां हैं, जिन्हें विशेष रूप से समुद्री क्षेत्रों में गुप्त अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।

    इन पनडुब्बियों का उद्घाटन श्रीनगर रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास में किया गया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लास से अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर है।पर स्थित है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग एक तिहाई समुद्री तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में ईरान की सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक इन मिनी पनडुब्बियों में अत्याधुनिक सोनार इवेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इन्हें दुश्मन के सोनार और निगरानी उपकरणों से बचाने में सक्षम बनाती है। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पानी की सतह के नीचे से ही मिसाइल दाग सकती हैं। इसके अलावा ये टॉरपीडो लॉन्च करने और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता भी रखती हैं।

    इन मिजेट पनडुब्बियों का वजन करीब 150 मीट्रिक टन से कम होता है और इनमें लगभग नौ सदस्यों का चालक दल काम करता है। इन्हें विशेष रूप से अरब की खाड़ी जैसे उथले पानी वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए तैयार किया गया है। छोटे आकार और गुप्त संचालन की क्षमता के कारण ये दुश्मन के लिए आसानी से पकड़ में नहीं आतीं और अचानक हमला करने में सक्षम मानी जाती हैं।

    ईरानी नौसेना के अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि देश के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है। उनका दावा है कि ईरान 1990 के दशक से अपने रक्षा उपकरण जैसे टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमानों का निर्माण स्वयं कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्यके आसपास ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल आ सकता है।

    इस स्थिति का असर भारत समेत कई एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन, खाद्य आपूर्ति और उर्वरकों की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। विश्लेषकों के मुताबिक ईरान की ये नई पनडुब्बियां क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं और आने वाले समय में मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरण को और जटिल बना सकती हैं।

  • ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

     
     
     
    नई दिल्ली। ओमान के दक्षिणी शहर सलालाह के पोर्ट पर तेल स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले की सूचना मिली है। ओमानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद पोर्ट के फ्यूल स्टोरेज टैंकों में आग भड़क गई, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने पुष्टि की कि पोर्ट पर मौजूद किसी व्यापारी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा।
    घटना के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को फोन कर इस हमले पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। सुल्तान ने कहा कि ओमान मौजूदा संघर्ष में तटस्थ है और अपनी सुरक्षा व क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
    तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोआन ने मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि ईरान में जारी युद्ध को तुरंत रोकना होगा, वरना पूरा क्षेत्र आग की चपेट में आ सकता है। एर्दोआन ने कहा कि कूटनीति के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है और तुर्किये अभी भी दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
    इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि अमेरिका के सहयोग से चल रहा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, और इस ऑपरेशन की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति पर असर को देखते हुए घोषणा की कि उसके 32 सदस्य देश आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारेंगे। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ा तेल रिलीज होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधा को दूर करने के लिए उठाया गया है।
    28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से केवल 10% तक ही पहुंच पाया है। IEA ने कहा कि आपातकालीन भंडार से तेल सदस्य देशों की परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा।
    1974 में स्थापित IEA के इतिहास में यह छठी बार है जब सदस्य देश मिलकर रणनीतिक भंडार से तेल जारी कर रहे हैं। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के हरिकेन कैटरीना, 2011 के लीबिया युद्ध और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसा कदम उठाया गया था। IEA के 32 सदस्य देशों में अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। भारत इस एजेंसी का सदस्य नहीं है, लेकिन 2017 से यह IEA का एसोसिएट देश है।
    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला, सुल्तान की नाराजगी, मध्यस्थता के प्रयास और 32 देशों द्वारा 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने की योजना के बीच, मिडिल-ईस्ट में तनाव और ऊर्जा संकट गहराता दिखाई दे रहा है।

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  • ट्रम्प का दावा- ईरान की कमर तोड़ी, जंग जल्द खत्म होगी: हमलों से तबाह हुए सैन्य ठिकाने, तेल संकट से दुनिया में मचा हड़कंप

    ट्रम्प का दावा- ईरान की कमर तोड़ी, जंग जल्द खत्म होगी: हमलों से तबाह हुए सैन्य ठिकाने, तेल संकट से दुनिया में मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान उम्मीद से ज्यादा सफल रहा है और यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान में कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकाने तबाह हो चुके हैं और अब वहां हमला करने के लिए लगभग कुछ भी नहीं बचा है। ट्रम्प के मुताबिक शुरुआती सैन्य योजना करीब छह हफ्तों की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने तय समय से पहले ही कई बड़े लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।

    इधर युद्ध के असर से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी International Energy Agency (IEA) ने घोषणा की है कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडार से करीब 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करेंगे। एजेंसी के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol के अनुसार यह फैसला तेल आपूर्ति में आई भारी बाधा को कम करने के लिए लिया गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद फारस की खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। बताया जा रहा है कि युद्ध के बाद इस मार्ग से तेल निर्यात पहले के मुकाबले 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

    दूसरी ओर ईरान ने भी युद्ध के गंभीर मानवीय नुकसान का दावा किया है। ईरान के शिक्षा मंत्री Alireza Kazemi ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 206 छात्र और शिक्षक मारे गए हैं और 161 लोग घायल हुए हैं। वहीं मीनाब शहर के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    युद्ध के कारण तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 21 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की औसत कीमत 3.58 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि डीजल भी तेजी से महंगा हुआ है।

    इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे Strait of Hormuz को बंद भी कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों में सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। स्पेन ने इजराइल से अपना राजदूत वापस बुला लिया है, जबकि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक असर वाला संकट बनता जा रहा है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य  में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की कोई भी कोशिश की गई तो अमेरिका इसका बेहद सख्त जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार कार्रवाई कर सकता है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सत्य सामाजिक पर पोस्ट किए गए संदेश में कहा कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले ठिकानों को नष्ट कर सकता है जिससे ईरान के लिए दोबारा व्यवस्थित होना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचेंगे।

    इससे पहले ट्रंप ने ट्रम्प नेशनल डोरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को खतरे में डालने की अनुमति किसी भी देश को नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और किसी भी आतंकी सरकार को दुनिया की तेल आपूर्ति को बंधक बनाने की इजाजत नहीं देगा।

    ट्रंप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी है और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन और सैन्य एस्कॉर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक और उपकरण हैं जिनकी मदद से समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने पर भी विचार कर रहा है ताकि समुद्री व्यापार बाधित न हो। ट्रंप के अनुसार यदि खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश जहाजों को इस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर सकते हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मार्ग का खुला रहना अमेरिका से ज्यादा एशिया और अन्य ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खास तौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह रास्ता कई देशों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से पूरी होती हैं।

    दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य  फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।

  • अमेरिका-ईरान-इज़रायल टकराव आठवें दिन में, मिसाइल और ड्रोन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

    अमेरिका-ईरान-इज़रायल टकराव आठवें दिन में, मिसाइल और ड्रोन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा


    नई दिल्ली । अमेरिका इज़रायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और यह संघर्ष अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी दौरान इज़रायल ने हमलों का नया दौर शुरू किया जबकि तेहरान के एक प्रमुख वाणिज्यिक हवाई अड्डे पर विस्फोटों की खबरें सामने आईं।

    यह टकराव 28 फरवरी को तेहरान में हुए एक हमले से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में यह केवल हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों तक सीमित था लेकिन अब खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों सहित व्यापक संघर्ष का रूप ले चुका है। यह संकट धीरे धीरे और व्यापक रूप ले रहा है जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता पर असर पड़ रहा है।

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ तब तक कोई समझौता नहीं होगा जब तक वह बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं करता। इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आत्मसमर्पण के बाद ईरान को नया नेतृत्व चुनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जो उनके प्रशासन के लिए स्वीकार्य हो।

    कुवैत की सेना ने बताया कि उसने अपने वायु रक्षा तंत्र के माध्यम से कई संभावित खतरों को रोक दिया। शनिवार सुबह से शुरू हुई हमलों की कई लहरों में 12 ईरानी ड्रोन और 14 बैलिस्टिक या क्रूज़ मिसाइलों को मार गिराया गया। इन हमलों से कई हिस्सों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं लेकिन अधिकारियों के अनुसार केवल मामूली संपत्ति को नुकसान हुआ जो मिसाइलों के मलबे गिरने से हुआ।

    उधर इज़रायल डिफेंस फोर्सेज आईडीएफ ने उत्तरी इज़रायल के निवासियों को सूचित किया कि हालिया ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण से उनका क्षेत्र सीधे खतरे में नहीं है इसलिए बम शेल्टर से बाहर निकल सकते हैं। चेतावनी सायरन भी नहीं बजे।

    हालांकि इसके बाद आईडीएफ ने तेल अवीव मध्य इज़रायल और वेस्ट बैंक के निवासियों के लिए नया अलर्ट जारी किया। इज़रायली सेना ने ईरान की ओर से एक और मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाया जिससे पहले से अस्थिर क्षेत्रीय टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस संघर्ष के बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेल आपूर्ति व्यापार मार्ग और नागरिक सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब अमेरिका इज़रायल और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों और किसी संभावित समझौते पर टिकी हैं।

    क्षेत्रीय देशों ने भी सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी है। कुवैत ने अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय रखा है और इज़रायल लगातार मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। इस बीच आम नागरिकों में भय और अनिश्चितता भी बढ़ रही है क्योंकि किसी भी समय टकराव की सीमा पार करने का खतरा बना हुआ है।

  • पुतिन ईरान वार्ता: ताकत के इस्तेमाल को नकारा, कूटनीतिक समाधान पर जोर

    पुतिन ईरान वार्ता: ताकत के इस्तेमाल को नकारा, कूटनीतिक समाधान पर जोर


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। इस वार्ता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस इस मुश्किल वक्त में ईरान का समर्थन कर सकता है लेकिन पुतिन ने स्पष्ट किया कि तनाव कम करना और मुद्दों का कूटनीतिक हल निकालना ही प्राथमिकता है।

    रूसी विदेश मंत्रालय ने टेलीग्राम पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। मंत्रालय ने बताया कि पुतिन ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई उनके परिवार और देश की सेना और नेताओं की मौत पर संवेदना जताई। साथ ही अमेरिका और इजरायल के हमलों में आम नागरिकों की मौत पर भी दुख व्यक्त किया।

    पुतिन ने इस वार्ता में जोर दिया कि किसी भी तरह के संघर्ष या ताकत के इस्तेमाल से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि रूस की नीतियों के अनुसार सभी विवादों का हल डिप्लोमैटिक प्रक्रिया से ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा पुतिन ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल जीसीसी के देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की बात भी कही।

    ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने रूस की एकजुटता और सहयोग के लिए पुतिन का धन्यवाद किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा कर रहा है और दोनों नेताओं ने यह तय किया कि आने वाले समय में अलग-अलग माध्यमों से संपर्क जारी रहेगा।

    तेल की आपूर्ति इस वार्ता में एक अहम मुद्दा बनकर उभरी है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर रूस से तेल न खरीदने के लिए दबाव डाल रहा है लेकिन हालात ने अमेरिकी चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि बढ़ती तेल कीमतों के बीच आपूर्ति और स्रोत तय करना भारत का अधिकार है। अलीपोव ने कहा “समाधान हमेशा बातचीत से होता है। संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए। आपूर्ति के लिए रूस हमेशा तैयार है।

    इससे पहले 28 फरवरी को रूस ने बिना कारण ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की थी। रूस ने तत्काल राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके अतिरिक्त रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच भी शनिवार को टेलीफोन पर बातचीत हुई। इसमें ईरानी पक्ष ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को रोकने के अपने कदमों की जानकारी दी साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की योजना भी साझा की।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी

    मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस अब खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। इससे ईरान को अमेरिका की सैन्य तैनाती को समझने और संभावित हमले की रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह पहला संकेत है कि मॉस्को उस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान के खिलाफ शुरू किया है।

    दरअसल, रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत पड़ी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा। वहीं ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों के समर्थन के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में रूस का समर्थन उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
    इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल था।

    पुतिन ने बातचीत में तनाव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया
    रूस द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दिए जाने की खबरों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जारी रहेंगे और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा।

    ईरान के लगातार हमले
    वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल जहां ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अब तक इजरायल समेत करीब 12 देशों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं। इन हमलों में ईरान ने खोर्रमशहर-4, खेबर और फतेह जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इजरायल पर दागी गई कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे।

    हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते दबाव और हमलों के बीच ईरान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या टकराव और बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के रुख से ऐसा संकेत नहीं मिल रहा कि वह पीछे हटने को तैयार है।

  • ईरान-इजराइल संघर्ष में बंकरों में कैद यूपी-बिहार के लोग, होली पर घर लौटने से हुए वंचित

    ईरान-इजराइल संघर्ष में बंकरों में कैद यूपी-बिहार के लोग, होली पर घर लौटने से हुए वंचित


    गोरखपुर। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने होली पर घर लौटने की भारतीयों की उम्मीदों को रोक दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के नागरिक जो काम या कारोबार के सिलसिले में खाड़ी देशों में गए थे मिसाइल हमलों के डर से बंकरों में शरण लिए हुए हैं और उड़ानों के रद्द होने से फंसे हुए हैं।

    मिसाइल हमलों की दहशत


    गोरखपुर के रसूलपुर निवासी अब्दुल रहमान ने दुबई से बताया कि एयरपोर्ट के पास छह मिसाइलें देखी गईं जिन्हें एयर डिफेंस ने हवा में मार गिराया। एक मिसाइल पास में गिरी लेकिन कोई क्षति नहीं हुई। धमाकों की खौफनाक आवाजें कमरे तक पहुंच रही थीं और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते रहे। शनिवार देर रात से यह स्थिति जारी है। संदीप कुमार जो मई 2024 में इजराइल गए थे ने बताया कि 2 मार्च को भारत वापसी की फ्लाइट रद्द कर दी गई। यरुशलम और पेटा टिकवा के बीच कार्यरत जनार्दन ने कहा कि रविवार सुबह छह से सात बजे तक लगातार मिसाइलों के धमाके सुनाई दिए।

    छात्र और युवा भी फंसे

    सिद्धार्थनगर के आधा दर्जन छात्र ईरान में धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं जिनसे परिजन संपर्क नहीं कर पा रहे। सीवान के इटहरी गांव निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र प्रसाद तीन साल बाद होली मनाने घर लौटने वाले थे लेकिन दोहा एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द होने की जानकारी मिली। फिलहाल 25 युवकों को एयरपोर्ट के पास अमेरिकी आर्मी बेस कैंप में ठहराया गया है।

    यरुशलम में रिहायशी इलाकों की स्थिति गंभीर

    कुशीनगर के पडरौना निवासी नंदलाल विश्वकर्मा जो वेस्ट बैंक क्षेत्र में हैं ने बताया कि रिहायशी इलाकों में स्थिति गंभीर है। बीच-बीच में सायरन बजता रहता है और लोग नजदीकी बंकरों की ओर भागते हैं। हमलावर अक्सर शब्बात के समय को निशाना बनाते हैं जो यहूदी धर्म का साप्ताहिक विश्राम दिवस है। बंकर छोटे या हल्के हमलों से बचाव कर सकते हैं लेकिन सीधे और बड़े हमलों में पर्याप्त नहीं होंगे।

    दुबई से फंसे नागरिकों का अनुभव
    गोरखपुर के वसीम जो दुबई में कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं ने बताया कि ठहरने के स्थान के पास मिसाइलों के धमाके और उड़ानें दिखाई दे रही हैं। हालांकि ईरान का लक्ष्य मुख्य रूप से मिलिट्री बेस कैंप हैं रिहायशी इलाके सुरक्षित रह रहे हैं।

    खामेनेई की मौत के बाद यूपी में अलर्ट

    ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को शिया बहुल इलाकों और प्रदर्शन संवेदनशील जिलों में पूरी सतर्कता बरतने और अतिरिक्त निगरानी रखने को कहा गया है।

  • तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

    तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026 को अचानक तनावपूर्ण हो गया है जब Israel ने Iran पर एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बताया कि यह हमला पहले से किया गया हमला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था जिसका उद्देश्य देश पर संभावित खतरे को दूर करना है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक नाजुक हो गई है। इजरायल ने देश भर में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि संभावित मिसाइलों या जवाबी हमलों का खतरा बना हुआ है।

    तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
    ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में आज सुबह कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और धुएं का गुबार भी उठता देखा गया। ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी के रिपब्लिक और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट जैसे इलाकों में मिसाइलें गिरीं जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया है लेकिन फिलहाल किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से धुएं के काले बादल उठते हुए देखे गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की गई है। इस हमले की पृष्ठभूमि और विस्तृत रणनीतिक वजहों पर अभी तक पूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

    क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

    विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला उन वर्षों से चल रहे तनावों का नवीनतम चरण है जिसमें इजरायल और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल विकास और सैन्य विवाद शामिल रहे हैं। इजरायल लगातार चेतावनी देता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताएं उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष और मिसाइल दागे जाने जैसे कई घटनाक्रम भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज का हमला इसी तनाव की परिणति भी माना जा रहा है।

    आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान
    इजरायल में आपातकाल के लागू होने के बाद वहां के नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों से निपटने के लिए चेतावनी जारी की गई है। सेना ने एयर राइड सायरन बजाने के साथ सुरक्षा आश्रयों के पास रहने की सलाह दी है और लोगों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को कहा गया है। वहीं ईरान ने भी अपनी एयर स्पेस बंद कर दी है और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव दिख सकता है।