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  • पश्चिम बंगाल से गायब हो गई 15 साल की नेशनल लेवल की शूटर….परिवार ने दर्ज कराया केस

    पश्चिम बंगाल से गायब हो गई 15 साल की नेशनल लेवल की शूटर….परिवार ने दर्ज कराया केस


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 15 साल की नेशनल शूटर (National Shooter) गायब हो गई। इस शूटर का नाम दमयंती सेन (Damayanti Sen) बताया गया है। वह सेंट्रल हावड़ा के उमाचरण भट्टाचार्य लेन की रहने वाली है। दमयंती स्टेट लेवल पर शूटिंग में पूरी तरह से सक्रिय है। इसके अलावा वह नेशनल लेवल के टीम ट्रायल्स में भी चयनित हो चुकी है और इसके लिए जोर-शोर से तैयारी में जुटी है। दमयंती के गायब होने के बाद उसके परिवार ने पुलिस में केस कर दिया है। पुलिस दमयंती की तलाश की जा रही है। फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिली है। परिजनों ने किसी तरह का मनमुटाव होने की बात से भी इनकार किया है।

    घर का सामान खरीदने निकली थी
    जानकारी के मुताबिक दमयंती गुरुवार को घर का सामान खरीदने निकली थी। लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। जब काफी देर हो गई तो घरवालों ने उसे ढूंढना शुरू किया। काफी देर तक दमयंती के दोस्तों वगैरह के यहां पूछा गया। इसके अलावा, उसके शूटिंग के दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां भी पता किया गया। लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद दमयंती के घरवाले पुलिस के पास पहुंचे। इस बीच एक सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। इसमें दमयंती गुरुवार के दिन प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच के बीच घूमती नजर आ रही है। आखिरी बार यहीं पर दयमंत्री को देखा गया था। अधिकारियों ने बताया कि वह लोग पता लगाने में जुटे हैं कि इसके बाद दमयंती कहां गई। जानकारी के मुताबिक जब दमयंती ने घर छोड़ा था तो उसका मोबाइल उसके पास ही था।

    काफी ज्यादा कर रही थी मेहनत
    दमयंती के परिजनों ने बताया कि वह एक फिक्स रूटीन फॉलो करती थी। नेशनल ट्रायल्स में सेलेक्शन के बाद वह इसकी तैयारी में जुटी हुई थी। वह हर रोज सुबह जल्दी उठ जाती थी और पूरी शिद्दत से तैयारी में जुटी रहती थी। दमयंती के घरवालों ने किसी तरह का झगड़ा या मनमुटाव होने की बात से भी इनकार किया है। दमयंती की मां ने एक सोशल मीडिया पोस्ट की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि गुरुवार सुबह 10 बजे, मेरी बेटी दमयंती हावड़ा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच पर देखी गई। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं है। उसने गुलाबी रंग की हाफ टी-शर्ट और हाफ पैंट पहन रखी थी। उन्होंने आगे लिखा है कि अगर किसी दयालु सज्जन को उसके बारे में जानकारी मिलती है तो हमारे दिए गए नंबरों पर संपर्क करें।

    मन में तरह-तरह की आशंकाएं
    शुक्रवार सुबह तक भी दमयंती के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और टीम के साथी शूटर्स के बीच इसको लेकर काफी ज्यादा चिंता थी। हर कोई दमयंती के अचानक गायब होने से हैरान नजर आ रहा है। साथ ही उनके मन में तरह-तरह की आशंकाएं उठ रही हैं। फिलहाल पुलिस में मिसिंग केस दर्ज है और पुलिस का कहना है कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता के साथ देख रही है।

  • MP: RGPV में पेपर चोरी…. परीक्षा से पहले गायब हुए प्रश्नपत्रों के 9 बंडल

    MP: RGPV में पेपर चोरी…. परीक्षा से पहले गायब हुए प्रश्नपत्रों के 9 बंडल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालयों में शामिल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya- RGPV) में एग्जाम से ठीक पहले प्रश्नपत्र चोरी होने का गंभीर मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शुक्रवार को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (School of Biotechnology) के सेकंड ईयर (चौथे सेमेस्टर) के कंप्यूटर विषय का एग्जाम था, लेकिन सुबह 11 बजे एग्जाम शुरू होने से ठीक पहले छात्रों को बताया गया कि परीक्षा रद्द कर दी गई है. थोड़ी देर बाद जानकारी मिली कि प्रश्नपत्र चोरी हो गया है. इसके बाद यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया।

    यूनिवर्सिटी ने पेपर चोरी होने की जानकारी देते हुए परीक्षा अगले आदेश तक स्थगित कर दी है. जानकारी के मुताबिक अलग-अलग प्रश्नपत्रों के करीब 9 बंडल गायब मिले हैं।


    गांधीनगर थाने में दर्ज कराई FIR

    यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए भोपाल के गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के मुताबिक, संबंधित प्रश्नपत्र गुरुवार देर रात चोरी हो गया था. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र कैसे गायब हुआ और इसमें किसकी भूमिका हो सकती है।


    सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

    परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र चोरी की घटना ने विश्वविद्यालय की गोपनीय परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा ‘बीजेपी के राज में चोरी अब व्यवस्था बन चुकी है. पहले वोट चोरी, फिर सीट चोरी, उज्जैन में जमीन चोरी, मंदिरों से चढ़ावा चोरी, और अब प्रश्नपत्र चोरी! भोपाल स्थित RGPV में परीक्षा शुरू होने से पहले गोपनीय प्रश्नपत्रों के 9 सीलबंद लिफाफे चोरी हो गए।

    उमंग सिंघार ने आगे लिखा, मुख्यमंत्री मोहन यादव के राज में अब माफिया और चोर इतने बेखौफ हैं कि छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है. यह केवल प्रश्नपत्र की चोरी नहीं, युवाओं की मेहनत, विश्वास और भविष्य की चोरी है. बीजेपी राज में आखिर बचा क्या है जो चोरी नहीं हो रहा?

  • जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    नई दिल्ली । संगीत और मानवीय संवेदनाओं का रिश्ता बेहद गहरा और रूहानी होता है। अक्सर जिन गीतों को सुनकर लोग झूम उठते हैं या जिन्हें विशुद्ध रूप से रोमांटिक विरह गीत मान लिया जाता है, उनके सृजन के पीछे कभी-कभी किसी रचनाकार की जिंदगी का सबसे बड़ा और असहनीय व्यक्तिगत दर्द छिपा होता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1957 और 1959 के दौर में लिखे गए दो कालजयी गीतों— ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए’ और ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इन गीतों को दशकों से लोग प्रेम की वेदना समझकर गाते आ रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये बोल एक लाचार पिता के अपने कलेजे के टुकड़े से बिछड़ने की तड़प से पैदा हुए थे।

    इस भावुक कर देने वाली कहानी के केंद्र में महान गीतकार पंडित भरत व्यास और उनका परिवार है। भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास स्वभाव से बेहद संवेदनशील और उनका अत्यधिक लाडला था। एक दिन किसी घरेलू बात पर पिता से मामूली नाराजगी के बाद वह गुस्से में बिना बताए घर छोड़कर कहीं चला गया। शुरुआत में लगा कि वह जल्द लौट आएगा, लेकिन जब दिन बीतने लगे तो परिवार की चिंता गहरे डर में बदल गई। बेटे को ढूंढने के लिए भरत व्यास ने हर संभव जतन किए, अखबारों में विज्ञापन दिए, पोस्टर छपवाए और हर धार्मिक स्थल पर मन्नतें मांगीं, लेकिन बेटे का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

    इकलौते बेटे के इस तरह अचानक लापता हो जाने के गम ने पंडित भरत व्यास को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन और एक आत्म-अपराधबोध के जाल में फंस गए, जिसके कारण उन्होंने बाहरी दुनिया और अपने काम से पूरी तरह दूरी बना ली। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे। इसी मानसिक संकट के बीच एक फिल्म निर्माता उनके पास एक गीत लिखवाने की दरख्वास्त लेकर पहुंचे, जिसे भरत व्यास ने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण गुस्से में मना कर दिया। बाद में उनकी पत्नी के समझाने और संबल देने पर वे काम करने के लिए राजी हुए और उन्होंने फिल्म ‘जनम जनम के फेरे’ के लिए एक गीत लिखा।

    अपने इसी मानसिक तनाव और बेटे की तलाश में भटकने के दर्द को उन्होंने पन्नों पर उतारा, जो आगे चलकर ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए, छुपा-छुपा के नखरे दिखाए’ के रूप में सामने आया। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई आवाजों से सजे इस गीत ने रेडियो पर आते ही लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी भरत व्यास का बेटा वापस नहीं लौटा था। इसके बाद साल 1959 में फिल्म ‘रानी रूपमति’ के लिए गीत लिखते समय भी उनके दिल का वह पुराना जख्म फिर हरा हो गया और उन्होंने बेटे को पुकारते हुए ‘आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ जैसा मर्मस्पर्शी गीत लिख डाला।

    सिनेमाई पर्दे पर जब इन गानों को दर्शाया गया, तो दर्शकों ने इसे नायक-नायिका के विरह का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना। हालांकि, इन गीतों के बोलों को यदि एक पिता और लापता बेटे के संदर्भ में ध्यान से पढ़ा जाए, तो रचनाकार की आत्मा का रोना साफ महसूस होता है। इस बेहद दर्दनाक कहानी का अंत सुखद रहा क्योंकि ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ गीत की अभूतपूर्व सफलता और देश भर में गूंजने के कुछ समय बाद, उनका बेटा श्याम सुंदर दास आखिरकार सकुशल अपने पिता के पास वापस लौट आया, जिससे भरत व्यास के जीवन का सबसे लंबा और कठिन इंतजार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।

  • सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी

    सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी


    लखनऊ। संदिग्ध आतंकी कनेक्शन की जांच में घिरे आकिब के खिलाफ अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। एटीएस की पड़ताल में सामने आया है कि वह चार बार सऊदी अरब जा चुका है और अगस्त 2025 में चौथी बार विदेश जाने के बाद से अब तक भारत नहीं लौटा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है, वहीं पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    जांच में सामने आई ट्रैवल हिस्ट्री के मुताबिक, आकिब का पासपोर्ट 9 अप्रैल 2018 को बना था। वह पहली बार 4 अगस्त 2019 को सऊदी अरब गया और 8 फरवरी 2022 को भारत लौटा। इसके बाद 8 अप्रैल 2022 को दोबारा सऊदी गया और 11 अप्रैल 2023 को वापस आया। तीसरी बार वह 20 जून 2023 को गया और 22 जुलाई 2025 को भारत लौटा। हालांकि, महज 10 दिन बाद ही 1 अगस्त 2025 को वह फिर सऊदी चला गया और तब से वहीं पर है।

    एटीएस ने उसकी पूरी यात्रा का ब्योरा खंगाल लिया है और अब उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आकिब के हिरासत में आने के बाद आतंकी मॉड्यूल और संभावित साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

    वीडियो जारी कर दी सफाई, कहा—अगर गलत हूं तो गोली मार देना

    इधर, मामले में तीन दिन पहले मॉड्यूल से जुड़े उवैद और जलाल हैदर की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण और चर्चा में आया। इसी बीच आकिब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।

    वीडियो में उसने पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा करने वालों की इज्जत करता है। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने साथी को पुलिस के सामने सरेंडर कर सच्चाई बताने की सलाह दी थी। आकिब ने अपने ऊपर लगे आतंकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की, केवल गुस्से में अपशब्द कहे थे।

    वीडियो के अंत में उसने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपने ऊपर आतंकवादी का ठप्पा नहीं लगने दूंगा। अगर मैं गलत हूं, तो मेरे माथे पर गोली मार देना।”

    फिलहाल, एजेंसियां उसके ठिकाने और नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं।