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  • मोदी सरकार की गजब की बीमा स्कीम…. सिर्फ 20 रुपये प्रीमियम और 2 लाख रुपये का कवर

    मोदी सरकार की गजब की बीमा स्कीम…. सिर्फ 20 रुपये प्रीमियम और 2 लाख रुपये का कवर


    नई दिल्ली।
    आप बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) लेते हैं, तो हजारों रुपये का प्रीमियम आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोदी सरकार सिर्फ 20 रुपये सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कवर देती है. जी हां, ये सच है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana) खासी पॉपुलर है, जो एक एक्सीडेंटल बीमा स्कीम है. सरकार ने निम्न आय वर्ग वालों को बीमा का लाभ देने के लिए PMSBY की शुरुआत की थी।

    PMSBY मोदी सरकार की पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर स्कीम है, इसमें सालाना प्रीमियम देना होता है, जो सिर्फ 20 रुपये का है और 2 लाख रुपये की Insurance Cover मिल जाता है. किसी भी दुर्घटना में मृत्यु होने या फिर विकालांग होने पर सरकार तय कवरेज मुहैया कराती है।


    बीमा योजना का ये नियम जान लें

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में बीमाधारक व्यक्ति की अगर एक्‍सीडेंट में मृत्यु हो जाती है या फिर वो पूरी तरह से विकलांग हो जाता है, तो फिर दो लाख रुपये का कवर दिया जाता है. वहीं अगर व्यक्ति किसी दुर्घटना के दौरान आंशिक विकलांग होता है, तो भी सरकार एक लाख रुपये का कवर देती है।


    ये है बीमा योजना की ऐज लिमिट

    आज के समय में 20 रुपये में सिर्फ एक प्याली चाय आती है, लेकिन आप इस एक चाय का पैसा बचाकर 2 लाख रुपये का बीमा करा सकते हैं और भी सरकार की गारंटी के साथ. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का लाभ लेना संकट के समय परिवार को आर्थिक रूप से मदद कर सकता है. इस स्कीम को सालाना आधार पर रिन्यू किया जाता है. इस योजना का लाभ 18 से 70 साल तक की उम्र के लोग ले सकते हैं।


    PMSBY में ऑटो डेबिट की सर्विस

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए आपके पास एक्टिव बैंक खाता होना अनिवार्य है. एक से ज्यादा बैंक खाते होने पर भी सिर्फ एक ही बैंक से इस योजना के तहत बीमा कवर ले सकते हैं. हर साल 1 जून को या इससे पहले ‘ऑटो डेबिट’ सुविधा के जरिए आपके बैंक खाते से 20 रुपये के प्रीमियम की कटौती की जाएगी. बैंक खाते से बीमा प्रीमियम का पैसा सीधे डेबिट होता है. इसलिए अपने बैंक खाते में कम से कम 20 रुपये की राशि जरूर रखें. PMSBY के तहत एनरोलमेंट पीरियड 1 जून से 31 मई तक होता है।

    सरकार ने अब तक किया इतना पेमेंट
    PMSBY Scheme को मोदी सरकार ने 9 मई 2015 को लॉन्च किया था. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसकी शुरुआत से मई 2024 तक ही सरकार को कुल 1,80,812 दावे प्राप्त हुए और 1,37,404 दावों का क्लेम सेटलमेंट किया गया था. इस पर सरकार ने 2,728.85 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किया. वहीं जून 2024 से बीते साल 16 अप्रैल 2025 तक योजना में 36.86 करोड़ नए नामांकन जोड़े गए. इस अवधि में 33,906 दावों में से 19,024 का सेटलमेंट हुआ और सरकार ने 377.73 करोड़ रुपये की राशि क्लेम पेमेंट में खर्च की थी।

  • 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' से छात्रों तक पहुंचेगी मोदी सरकार, हर दिन कैंपस में केंद्रीय मंत्री करेंगे संवाद

    'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' से छात्रों तक पहुंचेगी मोदी सरकार, हर दिन कैंपस में केंद्रीय मंत्री करेंगे संवाद


    नई दिल्ली।
    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार छात्रों और युवाओं के साथ सीधे संवाद बढ़ाने के लिए एक नई पहल पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ नाम से देशव्यापी कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी विश्वविद्यालय के कैंपस में पहुंचकर छात्रों से आमने-सामने बातचीत कर सकता है।

    सरकार की कोशिश इस पहल के जरिए केवल योजनाओं और नीतियों की जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं, सुझावों और चिंताओं को सीधे सुनना भी है। कैंपस में मंत्री युवाओं से शिक्षा, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, परीक्षा व्यवस्था और देश से जुड़े दूसरे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

    हर दिन एक यूनिवर्सिटी में पहुंचेगा मंत्री

    प्रस्तावित योजना के तहत अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार और युवा वर्ग के बीच संवाद को ज्यादा प्रत्यक्ष बनाना है।

    अभी आमतौर पर छात्रों और केंद्र सरकार के बीच संवाद मंत्रालयों, आधिकारिक कार्यक्रमों या डिजिटल माध्यमों तक सीमित रहता है। ऐसे में मंत्रियों के सीधे विश्वविद्यालयों में पहुंचने से छात्रों को अपनी समस्याएं सरकार के प्रतिनिधियों के सामने रखने का अवसर मिल सकता है।

    प्रह्लाद जोशी और मनसुख मांडविया को समन्वय की जिम्मेदारी

    सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को इस प्रस्तावित अभियान के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों मंत्री विश्वविद्यालयों और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के साथ मिलकर इसकी रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।

    बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी चर्चा हुई है। हालांकि, कार्यक्रम के अंतिम स्वरूप और इसे कब से शुरू किया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    परीक्षा विवादों के बीच छात्रों तक पहुंचने की कवायद

    सरकार की यह पहल ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। NEET समेत कई परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन और राजनीतिक विवाद सामने आए हैं।

    ऐसे माहौल में केंद्रीय मंत्रियों का सीधे विश्वविद्यालय परिसरों में जाकर छात्रों से बातचीत करना सरकार की युवा वर्ग के साथ संवाद बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे छात्रों की शिकायतों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का रास्ता भी बन सकता है।

    देशभर के विश्वविद्यालयों तक पहुंचने की तैयारी

    देश में केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की बड़ी संख्या है। ऐसे में अगर ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में अलग-अलग राज्यों के विश्वविद्यालयों में केंद्रीय मंत्रियों की नियमित यात्राएं देखने को मिल सकती हैं।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अभियान में केवल केंद्रीय विश्वविद्यालयों को शामिल किया जाएगा या निजी और राज्य विश्वविद्यालयों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा। योजना के अंतिम स्वरूप के सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि सरकार इसे कितने बड़े स्तर पर लागू करती है।

  • तेल-गैस की खोज के लिए 80,000 करोड़ का पैकेज… मोदी सरकार कर रही समुद्र मंथन की तैयारी….

    तेल-गैस की खोज के लिए 80,000 करोड़ का पैकेज… मोदी सरकार कर रही समुद्र मंथन की तैयारी….


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) से उपजे तेल और गैस संकट से भारत (India) ने सबक लिया है। मोदी सरकार (Modi government) तेल-गैस की खोज के लिए अब ‘समुद्र मंथन’ की तैयारी कर रही है। इसके तहत भारत सरकार का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय डीपवॉटर यानी गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए 80,000 करोड़ रुपये का एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रहा है। इस पैकेज के तहत विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का आधा हिस्सा सरकार वहन करेगी।

    यह पहल ‘National Deepwater Exploration Mission’ यानी ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम का हिस्सा है। खास बात यह है कि यह योजना पिछले दशक में की गई अन्य सुधारों से कहीं आगे जाती है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर एक्प्लोरेशन लागत की फाइनेंसिंग की जाएगी। पिछली नीतियां वैश्विक तेल कंपनियों से बड़ा निवेश नहीं जुटा पाई थीं।

    भारत ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम के तहत 18 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी भी कर रहा है। बोली लगाने की आखिरी तारीख 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है, और सरकार को उम्मीद है कि तब तक प्रोत्साहन पैकेज को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।


    कैसे काम करेगी योजना?

    प्रस्ताव के अनुसार, सरकार डीपवॉटर खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक रिइम्बर्समेंट करेगी। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अन्य मंत्रालयों के साथ चर्चा के दौर में है और कैबिनेट के सामने पेश किए जाने से पहले इसमें बदलाव संभव है।

    हर कुएं के लिए वित्तीय सहायता की एक सीमा तय की जाएगी, ताकि लागत बढ़ने पर नियंत्रण रखा जा सके। सरकार 3D भूकंपीय सर्वेक्षणों के लिए भी आंशिक वित्तपोषण कर सकती है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य एक्स्प्लोरिंग के रिस्क को कम करना और ऐसी वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना है, जिनके पास डीपवॉटर की विशेषज्ञता और उन्नत तकनीकें मौजूद हैं।


    इतनी अधिक लागत क्यों?

    उच्च लागत और भारत में खोज की मामूली सफलता दर लंबे समय से विदेशी कंपनियों को दूर रखती रही है। भूवैज्ञानिक जटिलताओं के आधार पर एक सिंगल डीपवॉटर कुएं की ड्रिलिंग में 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है, जबकि अल्ट्रा-डीपवॉटर कुएं की लागत इससे कुछ सौ करोड़ अधिक होती है।


    किन कंपनियों को मिलेगा लाभ?

    ये प्रोत्साहन सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के लिए उपलब्ध होंगे। ओएनजीसी ने शनिवार को ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत अपना पहला डीपवॉटर खोजी कुआं खोदना शुरू कर दिया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


    विदेशी कंपनियां क्यों नहीं आ पाईं?

    भारत मौजूदा व्यवस्था में, कंपनियों को ब्लॉक मिलने के बाद न्यूनतम कार्य कार्यक्रम पूरा करना होता है, जिसमें भूकंपीय सर्वेक्षण और खोजी कुएं शामिल होते हैं। अगर भूकंपीय आंकड़े कमर्शियल एक्सप्लोरेशन की कम संभावना दिखाते हैं, तो कंपनियां अक्सर ड्रिलिंग नहीं करना चुनती हैं। कई बार वे जोखिम भरे कुएं में सैकड़ों करोड़ निवेश करने के बजाय ब्लॉक वापस कर देती हैं, क्योंकि नियमों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी है।


    जोखिम कम करने की कोशिश

    यह प्रोत्साहन योजना पुरानी व्यवस्था से बड़ा बदलाव है, क्योंकि इसमें सरकार सीधे तौर पर खोज के जोखिम को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, सरकार अन्वेषणकर्ताओं के लिए उपलब्ध भूवैज्ञानिक डेटा की गुणवत्ता में भी सुधार कर रही है। इसके लिए ऑफशोर 2D भूकंपीय डेटा अधिग्रहण में भारी निवेश किया गया है और अब पुराने डेटासेट को उन्नत तकनीकों से दोबारा प्रोसेस करने के लिए निजी कंपनियों को लाने की योजना है।

  • मॉनसून सत्र 20 जुलाई से….. मोदी सरकार अधिक संख्याबल के साथ पहुंचेगी संसद

    मॉनसून सत्र 20 जुलाई से….. मोदी सरकार अधिक संख्याबल के साथ पहुंचेगी संसद


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi government) द्वारा लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक फेल हो गया। वजह थी सरकार के पास पर्याप्त दो-तिहाई बहुमत नहीं था। तब से लेकर अब तक भारतीय राजनीति में काफी कुछ बदलाव हुआ है। दल-बदल और पार्टियों की टूट के बाद मोदी सरकार की ताकत में वृद्धि हुई है। अब, जबकि संसद (Parliament) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) 20 जुलाई से शुरू होने वाला है, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) मजबूत स्थिति में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ताकतवर होकर संसद पहुंच रही मोदी सरकार की नजर कुछ ऐसे फैसलों पर है, जिन्हें वह पिछले काफी समय से करना चाहती थी, लेकिन संसद में संख्या बल न होने की वजह से अभी तक फेल होती आ रही थी।

    अप्रैल में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के पटल पर खड़े होकर विपक्षी नेताओं से एक बात कही थी। उन्होंने कहा कि था कि आज अगर आप इसका समर्थन करते हैं, तो इसका श्रेय आपको भी जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर इसका श्रेय केवल एनडीए सरकार को ही जाएगा। उस समय एनडीए को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पिछले तीन महीनों में एनडीए को कई विधायकों और सांसदों का समर्थन मिला है। फिर चाहे वह राज्यसभा हो या लोकसभा भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत की है। लेकिन क्या भाजपा और उसका गठबंधन इतना मजबूत है कि वह आसानी से संविधान संशोधन कर सके?


    मोदी सरकार के लिए क्यों आसान नहीं है संवैधानिक संशोधन

    अप्रैल में जब एनडीए सरकार द्वारा लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक फेल हुआ था, तब उसे 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन पक्ष में केल 298 वोट ही पड़े थे। चूंकि किसी भी संविधान संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इसलिए 352 के आंकड़े को छूने के लिए केंद्र सरकार 54 वोट पीछे रह गई।

    वर्तमान स्थिति की बात करते हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद, उद्धव ठाकरे के सांसद इन सब को मिलाकर एनडीए गठबंधन अभी 320 के पार पहुंच गया है। लेकिन इसके बाद भी वह पूर्ण रूप से भरे सदन के दो-तिहाई बहुमत के करीब नहीं पहुंच पाया है।

    राज्यसभा की बात करें, तो भले ही भाजपा ने आम आदमी पार्टी के सांसदों को तोड़ लिया हो। लेकिन अभी भी उसकी स्थिति मजबूत नहीं है। ऐसी स्थिति में भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वह बाकी बची संख्या को कहां से लाएगी?


    तीन संवैधानिक संशोधनों पर भाजपा की नजर
    1. पीएम-सीएम को हटाने वाले विधेयक पर होगा फैसला?

    भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार 130वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य मंत्री को हटाने का प्रस्ताव लेकर आई थी। लेकिन बहुमत न होने की वजह से केंद्र ने इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक मॉनसून सत्र के ठीक पहले यह समिति अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है, जिसके बाद यह विधेयक एक बार फिर से संसद में पेश किया जा सकता है।

    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब जेल से सरकार चला रहे थे। उस वक्त भारतीय जनता पार्टी ने इसे एक बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था। इसी घटनाक्रम के बाद सरकार यह बिल लेकर आई थी। इसके अनुसार अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य मंत्री 5 साल तक सजा वाले किसी मामले में 30 दिनों तक जेल में रहता है। तो उसका पद अपने आप ही समाप्त हो जाएगा।

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई बार जेल से सरकार चलाने के लिए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने इस बिल को जवाबदेही तय करने वाला करार दिया था। उनसे जब सवाल पूछा गया कि अगर किसी पर झूठा मामला होता है तब क्या होगा। इसका जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा था कि अगर मामला झूठा होता है, तो अदालतें जमानत देगीं। लेकिन यदि जमानत नहीं मिलती है, तो फिर पद छोड़ना होगा।


    2. वन नेशन, वन इलेक्शन पर नजर

    भारतीय जनता पार्टी के कोर मुद्दों में से एक वन नेशन, वन इलेक्शन को भी इस मॉनसून सत्र में देखा जा सकता है। पिछले वर्ष लाया गया यह 129वां संविधान संसोधन विधेयक इस वक्त 39 सदस्यीय संसदीय समिति के पास विचाराधीन पड़ा हुआ है। पीएम मोदी का मत है कि देश में हर समय होने वाले चुनाव विकास के बाधक हैं। इसलिए एक देश एक चुनाव पर सहमति बनाकर सभी को इसके लिए राजी रहना चाहिए। हालांकि, अन्य मुद्दों की तरफ विपक्ष और अन्य लोग इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरते हुए नजर आते हैं। वर्तमान में यह विधेयक भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति के पास है। इसका कार्यकाल बढ़ा दिया गया है।


    3. महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक

    अप्रैल में एनडीए सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लेकर आई थी। लेकिन दो-तिहाई बहुमत न होने की वजह से सदन में यह बिल पास नहीं हो पाया था। सरकार का तर्क है कि 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को जल्दी लागू करने के लिए 2029 चुनाव के पहले परिसीमन करवाना अनिवार्य है। लेकिन विपक्ष की इस पर अलग राय है। विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में परिसीमन लागू कर लोकसभा की सीटों को अपने हिसाब से बांटना चाहती है।

    दक्षिण भारत के राज्यों में भी इस विधेयक को लेकर अपना डर है। उनका कहना है कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों को लाभ मिलेगा। क्योंकि उनकी जनसंख्या अधिक है। हालांकि, सरकार ने उनको भरोसे में लेने की कोशिश की लेकिन विपक्ष मानने को तैयार नहीं है।

    विपक्ष का आरोप है कि अगर सरकार को महिला आरक्षण कि इतनी ही चिंता है तो क्यों न इसे वर्तमान सीट संख्या पर ही लागू कर दिया जाए?

  • MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!

    MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister Digvijay Singh) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार (Central government) पर अपनी सरकार के फैसले को अपनाने का जिक्र किया और बताया कि मोदी सरकार (Modi government) उनके मुख्यमंत्री काल के ‘पालक-शिक्षक संघ’ (Parent-Teacher Association- PTA) मॉडल को देश के 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने साल 1993 से 2003 के बीच मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने के दौरान लिया था। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को धन्यवाद भी दिया। इस दौरान उन्होंने पूरे देश में लाखों सरकारी स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई।

    इस बारे में ‘एक्स’ पर शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘मेरे मुख्यमंत्री काल का पालक शिक्षक संघ (PTA) का मॉडल जिसे अब केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। धन्यवाद। मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल 1993-2003 में मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि में हासिल की थी मुझे उस पर गर्व है। अब BJP सरकार मेरे मॉडल को स्वीकार कर लागू कर रही है मुझे प्रसन्नता है। देर से आए दुरुस्त आए। ‘


    सरकारी स्कूल बंद करने के फैसले पर जताई आपत्ति

    आगे उन्होंने केंद्र सरकार के एक फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, ‘देश के शासकीय स्कूलों में सुधार आवश्यक है। पूरे देश में लाखों शासकीय स्कूल बंद किए जा रहे हैं। ये उचित नहीं है। अब शासकीय स्कूलों में वही बच्चे पढ़ रहे हैं जो निजी स्कूलों में फीस नहीं दे पा रहे हैं। शासकीय स्कूलों में छात्रों के पालकों को व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी जाना चाहिए। इन शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है। जय सिया राम।’


    पोस्ट के साथ शेयर किया कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक

    अपनी पोस्ट के साथ दिग्विजय सिंह ने अपनी पार्टी के एक कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक भी शेयर किया था, जिसमें उसने केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि, ‘पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी का पालक-शिक्षक संघ (PTA) का वो मॉडल जिसे केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि आदरणीय दिग्विजय सिंह जी के 10 वर्षीय मुख्यमंत्री काल 1993-2003 में हासिल की, ये अभूतपूर्व हैं।’ अपनी पोस्ट के अंत में उस शख्स ने बताया कि ‘दिग्विजय सिंह जी वर्तमान में शिक्षा, महिला, बाल और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं।’


    शिक्षक-पालक संघ खुद लेगा इतने लाख रुपए तक के फैसले

    पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जिस कार्यकर्ता की पोस्ट के लिंक को शेयर किया, उसने इस खबर से जुड़ा एक न्यूज आर्टिकल भी शेयर किया था, जिसमें केंद्र सरकार के इस फैसले की जानकारी दी गई थी। इसमें बताया गया कि ‘देश के लगभग 15 लाख स्कूलों का प्रबंधन अब सीधे तौर पर अभिभावकों के हाथों में होगा। नए नियमों के मुताबिक, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को 30 लाख रुपए तक के निर्माण कार्य बिना लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के खुद कराने की वित्तीय शक्ति दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इन सुधारों को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 और शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) 2009 के तहत अंतिम रूप दिया है, जिससे अब स्कूल केवल सरकारी संस्थान न रहकर ‘सामुदायिक संपत्ति’ के रूप में विकसित होंगे।’

  • मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना

    मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हुगली जिले के सेरामपुर में आयोजित रैली में केंद्र सरकार BJP-RSS और ममता बनर्जी की TMC पर एक साथ तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ 36 केस दर्ज किए गए और ED ने 55 घंटे पूछताछ की लेकिन ममता बनर्जी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि इसका कारण यह है कि ममता बनर्जी BJP से सीधे तौर पर मुकाबला नहीं करतीं इसलिए उन्हें केंद्र से राहत मिलती है। रैली में राहुल ने कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। एक ओर कांग्रेस है जो संविधान एकता और भाईचारे की बात करती है जबकि दूसरी ओर BJP है जो उनके अनुसार नफरत और हिंसा फैलाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP समाज में विभाजन पैदा करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं।

    कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि इसका उद्देश्य देश में प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाना था। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्राओं को भारत तोड़ो यात्रा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश को बांटने की राजनीति कर रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी पर हमला जारी रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में उन्होंने देश के हितों से समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में कृषि छोटे उद्योग ऊर्जा क्षेत्र और देश का डेटा प्रभावित हुआ। राहुल ने यह भी कहा कि कोई भी मजबूत प्रधानमंत्री दबाव में आकर ऐसा फैसला नहीं लेता।

    ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए राहुल ने अपने खिलाफ कार्रवाई का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उन पर कई राज्यों में केस चल रहे हैं उनसे लंबी पूछताछ हुई यहां तक कि उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई। इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ न तो ED और न ही CBI ने कोई ठोस कार्रवाई की।

    बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नौकरी पाने के लिए TMC से जुड़ाव जरूरी हो गया है। उन्होंने हिंदुस्तान मोटर्स की बंद फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जो बंगाल कभी औद्योगिक रूप से मजबूत था वह अब पिछड़ गया है।

    इसके अलावा उन्होंने शारदा और रोज वैली जैसे पोंजी घोटालों कोयला तस्करी और अवैध खनन का मुद्दा उठाया। राहुल ने आरोप लगाया कि राज्य में हर काम के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है जिससे आम जनता परेशान है।

  • बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम

    बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम



    कोलकाता। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम 2024 में अधिसूचित CAA नियमों के तहत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समिति का काम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदन की जांच और मंजूरी देना है। यह सुनिश्चित करेगी कि सभी आवेदन पूरी तरह से सही हों और आवेदक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के अनुसार पात्र हों।

    समिति में शामिल अधिकारी
    केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार समिति का गठन इस प्रकार हुआ है:
    अध्यक्ष: डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल, जनगणना कार्य निदेशालय, पश्चिम बंगाल

    प्रमुख सदस्य:
    सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) का उप सचिव स्तर का अधिकारी
    क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRRO) द्वारा नामित अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), पश्चिम बंगाल का अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    पश्चिम बंगाल के पोस्ट मास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित डाक अधिकारी

    विशेष आमंत्रित सदस्य:
    पश्चिम बंगाल सरकार का प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कार्यालय का प्रतिनिधि
    रेलवे के क्षेत्रीय मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का प्रतिनिधि

    नागरिकता पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
    नियम 11A के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के लोग जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, नागरिकता के लिए पात्र हैं। इन आवेदकों को अपना आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करना होगा।

    राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और मतुआ समुदाय
    यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में संवेदनशील है।

    मतुआ समुदाय: बांग्लादेश से आए लाखों मतुआ और बंगाली हिंदू लंबे समय से भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और यह उनका बड़ा वोट बैंक है।

    टीएमसी का रुख: सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि CAA लागू होने से मतुआ समुदाय के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने समुदाय से CAA शिविरों से दूर रहने की अपील की है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल में CAA लागू नहीं होने देंगी।

    गृह मंत्रालय का उद्देश्य इस सशक्त समिति के माध्यम से पश्चिम बंगाल में CAA से जुड़ी भ्रम और लंबित आवेदनों के गतिरोध को दूर करना है।

  • अमेरिका ने ट्रेड डील पर ऐसे बदला रुख, अजीत डोभाल ने दिया था रूबियो को सख्त संदेश : रिपोर्ट

    अमेरिका ने ट्रेड डील पर ऐसे बदला रुख, अजीत डोभाल ने दिया था रूबियो को सख्त संदेश : रिपोर्ट


    नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हाल ही में सामने आए दावों पर नई रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने वाशिंगटन को साफ संकेत दिया कि वह ट्रंप प्रशासन के दौरान किसी जल्दबाजी में समझौता नहीं करेगी और जरूरत पड़ी तो इंतजार भी कर सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो को स्पष्ट संदेश दिया: “बुली करने की नीति बंद करें।” इसके बाद अमेरिका ने अपनी स्थिति पर फिर से विचार किया और अधिक सौहार्दपूर्ण रुख अपनाया।

    अजीत डोभाल की रणनीति
    सितंबर 2025 में हुई अहम बैठक में डोभाल और रुबियो आमने-सामने थे। इस दौरान भारत ने साफ कर दिया कि वह अमेरिकी दबाव में समझौता नहीं करेगा। उस समय अमेरिकी उत्पादों पर 50% तक की ऊंची टैरिफ दरें लागू की गई थीं। डोभाल ने रुबियो से कहा कि भारत ट्रंप या उनके सहयोगियों के दबाव में नहीं आएगा और पूरे राष्ट्रपति कार्यकाल तक डील पर जल्दबाजी नहीं करेगा।
    बैठक के बाद अमेरिका ने अपने रुख में नरमी दिखाई। राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर में पीएम मोदी को जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी, जिसे भारतीय रणनीति का असर माना गया।

    ट्रंप टीम ने मोदी पर लगाए आरोप
    ट्रंप और उनके सहयोगियों ने मोदी पर कड़े आरोप लगाए। विशेष रूप से पीटर नवारो ने भारत को पाकिस्तान युद्ध और रूस-यूक्रेन विवाद में झूठे दावे करने का आरोप लगाया। नवारो ने मोदी की संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों पर भी सवाल उठाए।

    भारत ने ट्रंप के दावों को ठुकराया
    मई 2025 में भारत-पाक युद्ध के दौरान हुई सीजफायर को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत किया, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हुए। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी होने की घोषणा कर दी, लेकिन मोदी सरकार ने सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि डील पर फरवरी 2025 से चर्चा जारी थी और अब इसे अंतिम रूप दिया गया।

    ट्रंप की एकतरफा घोषणा और विपक्षी सवाल
    ट्रंप की बिना औपचारिक प्रक्रिया के घोषणा से भारत में विपक्ष और विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। डील के विवरण सार्वजनिक नहीं होने के कारण आलोचना की जा रही है। हालांकि अजीत डोभाल की रणनीति ने स्पष्ट किया कि भारत ने कोई ऐसी शर्त स्वीकार नहीं की जो देशहित के खिलाफ हो।

    पूरे कार्यकाल तक इंतजार का मतलब
    ट्रंप का राष्ट्रपति कार्यकाल जनवरी 2025 से शुरू हुआ। भारत की रणनीति के मुताबिक, बिना शर्त डील के लिए इंतजार करना पड़ता तो यह समझौता 2029 तक स्थगित रह सकता था।

  • Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील

    Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) में जल्द ही बड़ी ट्रेड डील (Big Trade Deal) होने के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S. Jaishankar) की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान डील पर बड़ा फैसला आ सकता है। इसी बीच एक सर्वे से पता चला है कि भारतीय चाहते हैं कि भारत सरकार टैरिफ का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को टैरिफ से ही दे।

    एक सर्वे के अनुसार, उत्तर देने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार से जवाबी टैरिफ लगाने की अपील की है। सर्वे से पता चला है कि सिर्फ 6 प्रतिशत ही मानते हैं कि भारत सरकार को ट्रंप की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए। जबकि, 34 फीसद उत्तरदाता जीएसटी में कमी और ऐसे ही उपाय करने के पक्ष में हैं।


    भारत और ईयू में हुई बड़ी डील

    भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय संघ से लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता हो जाएगा।

    करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक इकाई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) महत्वाकांक्षी भारत के लिए है और इससे देश के विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • KCC: पैसे की कमी से खेती पर न लगे ब्रेक… बड़े काम की है मोदी सरकार की ये योजना

    KCC: पैसे की कमी से खेती पर न लगे ब्रेक… बड़े काम की है मोदी सरकार की ये योजना


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central government) की कई योजनाएं हैं जिसके तहत लोगों को क्रेडिट कार्ड (Credit Card) मुहैया कराया जाता है। ऐसी ही एक योजना किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) (केसीसी) है। इस योजना के तहत किसानों को अलग-अलग फसल के लिए बैंक की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है। सरकार का मकसद है कि पैसे की कमी की वजह से किसानों की खेती या अन्य गतिविधियों पर ब्रेक ना लगे।

    कब हुई थी शुरुआत
    वैसे तो इसकी शुरुआत साल 1998 में हुई थी लेकिन समय के साथ इसे मोडिफाई किया गया। साल 2019 में, केसीसी योजना को इससे जुड़ी गतिविधियों, जैसे पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की वर्किंग कैपिटल आवश्यकताओं को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया था। आइए किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट समेत अन्य डिटेल से जान लेते हैं।


    कितनी है लिमिट

    लाभार्थी को संशोधित ब्याज सहायता योजना के अंतर्गत भारत सरकार बैंकों को 7% प्रति वर्ष की दर से 3 लाख रुपये तक के शार्ट टर्म वर्किंग कैपिटल लोन प्रोवाइड करने के लिए 1.5% की ब्याज सहायता प्रदान करती है। इसके अलावा, समय पर लोन चुकाने पर किसानों को 3% का त्वरित री-पेमेंट प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इसलिए, किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर 4% है। केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने केसीसी के माध्यम से लिए गए लोन को संशोधित ब्याज छूट योजना (एमआईएसएस)के अंतर्गत लोन की सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। प्रोसेसिंग चार्ज की बात करें तो 3 लाख रुपये तक के लोन पर शून्य है।


    क्या-क्या दस्तावेज हैं जरूरी

    योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड अनिवार्य है। पहचान पत्र, पता प्रमाण, भूमि दस्तावेज, फोटो और बैंक खाता विवरण होना जरूरी है। एक स्व-घोषणा पत्र भी देना होगा कि अन्य बैंक से डिफॉल्ट नहीं है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया fasalrin.gov.in या jansamarth.in पर है। वहीं, ऑफलाइन अप्लाई करने के लिए बैंक ब्रांच जाना होगा।