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  • बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन

    बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन


    नई दिल्ली । जैसे-जैसे फरवरी का महीना नजदीक आता है, देश के करोड़ों नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों की निगाहें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिक जाती हैं। 1 फरवरी 2026 को मोदी सरकार का तीसरा पूर्ण बजट पेश किया जाएगा, जो केवल आंकड़ों का हिसाब-किताब नहीं बल्कि आम आदमी की जेब और उसकी बचत का भविष्य तय करेगा।

    मौजूदा टैक्स सिस्टम का अंतिम बजट

    इस बार का यूनियन बजट 2026-27 खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह मौजूदा इनकम टैक्स कानून के तहत पेश होने वाला आखिरी पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए ‘Income Tax Act 2025’ को लागू करने की तैयारी कर रही है, जो करीब 60 साल पुराने टैक्स कानूनों को बदलने वाला है। ऐसे में, यह बजट न केवल वर्तमान टैक्स व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अहम कदम होगा, बल्कि आने वाली टैक्स व्यवस्था की नींव भी रखेगा। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से टैक्सपेयर्स को किन प्रमुख राहतों की उम्मीद है

    पुराने टैक्स रिजीम का दर्द: क्या मिलेगा राहत

    पिछले साल, यानी बजट 2025 में, सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बना दिया था। इसमें 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करने और बेसिक छूट सीमा को 4 लाख रुपये तक बढ़ाने जैसे फैसले किए गए थे। हालांकि, इसका फायदा उन लोगों को कम हुआ जिन्होंने ‘ओल्ड टैक्स रिजीम पुराना टैक्स सिस्टम अपनाया है। पुराने सिस्टम में टैक्स देने वाले लोग पीएफ होम लोन और इंश्योरेंस जैसी योजनाओं के जरिए अपनी बचत पर जोर देते हैं।

    इन लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि बेसिक छूट सीमा जो अभी 2.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है उसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जाए। इसके अलावा, धारा 80C के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की छूट अब महंगाई के दौर में नाकाफी हो चुकी है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपये किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई स्वास्थ्य बीमा और अन्य आवश्यक खर्चों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत मिल सके।

    घर और इलाज पर राहत मिडिल क्लास की बड़ी जरूरत

    महंगाई के इस दौर में घर खरीदना और बीमारी का इलाज कराना मिडिल क्लास के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। टैक्सपेयर्स का मानना है कि राहत केवल टैक्स स्लैब बदलने से नहीं मिलेगी बल्कि जरूरी खर्चों पर छूट देने से ही असली फायदा होगा। खासतौर पर होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट अब घर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए बहुत कम लगती है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार होम लोन ब्याज छूट को बढ़ाकर अधिक लाभकारी बनाएगी।इसके अलावा मिडिल क्लास की यह भी मांग है कि अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम को भविष्य के लिए स्थायी बनाना चाहती है तो इसमें स्वास्थ्य बीमा और होम लोन पर टैक्स छूट की सुविधा भी शामिल की जाए। इससे बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मिडिल क्लास को राहत मिलेगी।

    आसान नियम और सरल टैक्स प्रक्रिया

    टैक्सपेयर्स केवल टैक्स कम करने की उम्मीद नहीं कर रहे, बल्कि वे जटिल प्रक्रियाओं से भी राहत चाहते हैं। कई बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर टीडीएस मैचिंग में समस्याएं आती हैं। नए से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाए।इसके अलावा ईयर की जगह टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट लाने की चर्चा भी हो रही है जो प्रक्रिया को और भी सरल बनाएगा। साथ ही टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी जटिलताओं को दूर किया जाएगा। फिलहाल शेयर बाजार म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू हैं जिससे भ्रम पैदा होता है। लोग चाहते हैं कि सभी एसेट्स के लिए एक जैसी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू हो।

    टैक्स स्लैब में बदलाव: क्या मिलेगा राहत

    मिडिल क्लास उम्मीद कर रहा है कि टैक्स स्लैब में भी कुछ बदलाव किए जाएं ताकि उनकी टैक्स भार को हल्का किया जा सके। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयकर स्लैब की सीमा को बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा होगा। खासकर उन लोगों को जिनकी आय 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच है उन्हें राहत की जरूरत है। इस स्लैब को बढ़ाकर टैक्स रेट को कम किया जा सकता है।

    भविष्य की टैक्स व्यवस्था क्या है नई उम्मीदें

    वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले बजट 2026 में सबसे बड़ी उम्मीद यही होगी कि नए टैक्स कानूनों का खाका तैयार किया जाएगा ताकि टैक्सपेयर्स को आने वाले समय में सटीक और सही जानकारी मिल सके। नए टैक्स कानूनों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और अधिक पारदर्शी सटीक और आसान बनाना होगा ताकि आम नागरिक को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बजट 2026 के जरिए मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद है कि सरकार उनके लिए टैक्स राहत, आसान नियम, और आवश्यक खर्चों पर छूट की सुविधाएं प्रदान करेगी। इस बजट का असर सीधे-सीधे लाखों लोगों की जेब और जीवनशैली पर पड़ेगा, इसलिए इस बार के बजट में टैक्सपेयर्स को खास राहत मिलने की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

  • AAP सांसद ने राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स को दी बधाई, मोदी सरकार की भी तारीफ

    AAP सांसद ने राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स को दी बधाई, मोदी सरकार की भी तारीफ

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने नए लेबर कोड के तहत गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी करने के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह गिग वर्कर्स की कड़ी मेहनत को “मान्यता, सुरक्षा और सम्मान” देने की दिशा में पहला कदम है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025’ नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें गिग वर्कर्स को अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स और सुरक्षा पाने के लिए योग्य होने के नियम गए हैं।
    राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दी बधाई

    राघव चड्ढा ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy, Blinkit, आदि प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन इस देश के लोगों और सरकार ने सुनी। यह एक छोटी जीत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण जीत है।”

    राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, यहां तक ​​कि कई बार संसद में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है।
    केंद्र सरकार के कदम का भी किया स्वागत

    ‘आप’ सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, “ये ड्राफ्ट नियम सिर्फ इसलिए नहीं बनाए गए कि मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप सभी ने भी अपनी आवाज उठाई। कंपनियों और प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।”

    राघव चड्ढा ने कहा कि नए नियमों के तहत, गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें एक यूनिक पहचान दी जाएगी। हाल ही में संसद सत्र में ‘आप’ के राज्यसभा सांसद ने भारत के गिग वर्कर्स के ‘दुख-दर्द” के बारे में बात की थी, जो बहुत ज्यादा दबाव में और कभी-कभी खराब मौसम की स्थिति में काम करते हैं।

    राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और दूसरे ऐप-बेस्ड डिलीवरी और सर्विस बिजनेस पर रेगुलेशन की मांग की थी, खासकर गिग वर्कर्स के फायदों की जरूरत पर जोर दिया था।

    उन्होंने संसद में अपने भाषण में गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और सही वेतन की मांग की थी। पहली बार, ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लैटफॉर्म वर्कर्स’ की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में दिए गए हैं, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुआ है।
    क्या होंगे फायदे

    यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के लिए जीवन बीमा और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मैटरनिटी बेनिफिट्स, बुढ़ापा सुरक्षा वगैरह से जुड़े मामलों पर सही सोशल सिक्योरिटी उपायों को बनाने का प्रावधान करता है। यह कोड कल्याणकारी योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान करता है। यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान करता है।

    इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 26.08.2021 को असंगठित श्रमिकों, जिसमें प्लैटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक आदि शामिल हैं, का एक व्यापक नेशल डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का मकसद असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21.10.2024 को ई-श्रम- ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ भी लॉन्च किया है, जिसमें अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल यानी ई-श्रम पर इंटीग्रेट किया गया है।

  • PMAY 2.0 से साकार हो रहा अपने घर का सपना…. मोदी सरकार अब होम लोन पर देगी बड़ा तोहफा

    PMAY 2.0 से साकार हो रहा अपने घर का सपना…. मोदी सरकार अब होम लोन पर देगी बड़ा तोहफा


    नई दिल्ली।
    घर खरीदना (Buying Home) हर किसी का सपना होता है लेकिन इस सपने को साकार कर पाना इतना आसान भी नहीं है। इस सपने को साकार करने के लिए केंद्र सरकार (Central government) की प्रधानमंत्री आवास योजना (Prime Minister’s Housing Scheme- PMAY) 2.0 काफी अहम भूमिका निभाती है। योजना के तहत, योग्य कर्जदार 25 लाख रुपये तक के होम लोन पर 1.8 लाख रुपये तक की इंटरेस्ट सब्सिडी पा सकते हैं। यह सब्सिडी पांच सालाना किस्तों में दी जाती है और सीधे कर्जदार के लोन अकाउंट में जमा की जाती है, जिससे बकाया मूलधन और EMI कम हो जाती है।


    किस-किस कैटेगरी के लिए योजना

    यह योजना तय इनकम कैटेगरी के लोगों के लिए है। सालाना 3 लाख रुपये तक कमाने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवार, 3 लाख से 6 लाख रुपये के बीच इनकम वाले कम इनकम ग्रुप (LIG) के कर्जदार और सालाना 6-9 लाख रुपये कमाने वाले मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) के खरीदार, अन्य शर्तों के अधीन, इसके लिए योग्य हैं। सीधी सब्सिडी के अलावा टैक्स इंसेंटिव भी री-पेमेंट का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24(b) के तहत, कर्ज लेने वाले होम लोन के ब्याज पर हर साल 2 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके अलावा, सेक्शन 80C प्रिंसिपल रीपेमेंट पर 1.5 लाख रुपये तक की कटौती की अनुमति देता है, जिससे समय के साथ कर्ज लेने की असल लागत कम होती है।


    योजना के बारे में

    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 भारत के प्रमुख शहरी आवास मिशन का दूसरा चरण है, जिसका लक्ष्य शहरों और कस्बों में सभी के लिए आवास हासिल करना है। योजना में विधवाओं, अकेली महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और SC/ST और अल्पसंख्यक समुदायों को प्राथमिकता दी जाती है। यह योजना बुनियादी सुविधाओं के साथ किफायती आवास को बढ़ावा देती है, जिससे राज्यों को घर के आकार के नियमों में लचीलापन मिलता है। आवेदकों के पास भारत में कहीं भी पक्का घर नहीं होना चाहिए और उन्हें निर्धारित आय सीमा के भीतर आना चाहिए।

  • परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश की राह खुलेगी, संसद में पेश हुआ SHANTI बिल; मोदी सरकार के लक्ष्यों पर नजर

    परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश की राह खुलेगी, संसद में पेश हुआ SHANTI बिल; मोदी सरकार के लक्ष्यों पर नजर


    नई दिल्ली
    /भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी है। मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नाभिकीय ऊर्जा का सतत दोहन तथा उन्नयन विधेयक, 2025 या SHANTI बिल पेश किया। इस बिल के माध्यम से सरकार ने देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है, जिसे 1962 के बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। इस बिल को लोकसभा की पूरक कार्यसूची में शामिल कर राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में पेश किया।

    सरकार का कहना है कि SHANTI बिल का मुख्य उद्देश्य नाभिकीय ऊर्जा के सुरक्षित और सतत उपयोग को बढ़ाना है, ताकि इसका लाभ न केवल विद्युत उत्पादन में बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, जल शुद्धिकरण, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी मिल सके। बिल में निजी कंपनियों -घरेलू और विदेशी को नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश की अनुमति देने की बात की गई है। इससे 2047 तक भारत में 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य संभव हो सकेगा, विशेष रूप से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर SMR के माध्यम से।

    बिल में प्रमुख प्रावधान

    SHANTI बिल पुराने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक नाभिकीय क्षति दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त कर एक नया, एकीकृत कानून बनाने जा रहा है। इसमें शामिल प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक की स्थापना।दायित्व नियमों में संशोधन, ताकि निजी निवेशकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बने। किसी भी विवाद या दुर्घटना के निपटारे के लिए विशेष ट्रिब्यूनल की व्यवस्था।परमाणु दुर्घटना या क्षति पर दावे प्रस्तुत करने का प्रावधान। सरकार का यह भी कहना है कि बिल विकसित भारत 2047 के विजन का हिस्सा है और यह परमाणु प्रौद्योगिकी को स्वच्छ, स्थिर और आधारभूत ऊर्जा स्रोत के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। SHANTI बिल के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और यह भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य -2070 में योगदान देने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

    विपक्ष का रुख

    कांग्रेस ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया है। उनका कहना है कि यह विधेयक नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र में मानकों का उल्लंघन कर रहा है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार को इसे पेश नहीं करना चाहिए था और इस पर व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

    सरकार के लक्ष्य 
    SHANTI बिल के जरिए सरकार तीन बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है: निजी निवेश को प्रोत्साहित करना: घरेलू और विदेशी कंपनियों के लिए नए अवसर। सतत और सुरक्षित ऊर्जा उत्पादन: स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और पर्यावरण में परमाणु ऊर्जा का बहुआयामी उपयोग। पर्यावरण और जलवायु अनुकूल विकास: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में योगदान।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिल को पारित किया जाता है, तो यह न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि नवाचार और औद्योगिक विकास को भी गति देगा।SHANTI बिल के साथ भारत की परमाणु ऊर्जा नीति में एक नया युग शुरू हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण तीनों का संतुलित मिश्रण होगा।

  • मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर, किसानों को भी राहत

    मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर, किसानों को भी राहत


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन अहम फैसले लिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों का ऐलान करते हुए कहा कि सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसके साथ ही कोल (कोयला) सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक बड़ा रिफॉर्म किया गया और किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया गया।

    डिजिटल जनगणना का ऐतिहासिक फैसला

    अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2027 की जनगणना पहली बार डिजिटल रूप में आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह जनगणना दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में 1 अप्रैल से सितंबर 2026 तक हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस होगा, और दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी। इस बार डिजिटल जनगणना में डेटा कलेक्शन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो हिंदी, इंग्लिश और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इस कदम से जनगणना प्रक्रिया में तेजी आएगी और डेटा संग्रहण को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।

    कोल सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

    मंत्री ने बताया कि कोल सेतु नामक योजना के तहत भारत अब कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है। इससे भारत की कोयला आयात पर निर्भरता खत्म हो रही है, जिससे 60 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। 2024-25 में भारत ने 1 बिलियन टन कोल प्रोडक्शन का लक्ष्य हासिल किया है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।

    किसानों के लिए राहत: एक और बड़ा फैसला

    सरकार ने किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया है, हालांकि इसके विवरण का अभी खुलासा नहीं किया गया है। इससे किसानों को फसल उगाने और उनकी आय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों की बेहतरी के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 2027 की डिजिटल जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है, जो जनगणना प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगा। साथ ही कोल सेक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए कदम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को नया आयाम मिलेगा। किसानों से जुड़े फैसले ने भी उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाया है।