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  • Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत

    Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत


    भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मानसून ट्रफ चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र से बने मजबूत मौसम सिस्टम के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। अगले 24 घंटे में खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने डिंडौरी और बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 4 से 8 इंच तक बारिश की आशंका जताई है। इसके अलावा विदिशा सागर रायसेन नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा नरसिंहपुर दमोह सिवनी जबलपुर मंडला कटनी उमरिया शहडोल अनूपपुर रीवा मऊगंज सीधी और छतरपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    राजधानी भोपाल में रविवार रात तेज बारिश हुई। वहीं विदिशा जिले के लटेरी में करीब एक घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बाद मुख्य बाजार में पानी भर गया। सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अशोकनगर में बारिश ने एक परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा दिया। ईसागढ़ के नरसूखेड़ी गांव के पास पुलिया पार करते समय करीब 30 वर्षीय अजय मराठा बाइक समेत तेज बहाव में बह गया। काफी तलाश के बाद सोमवार सुबह उसका शव झाड़ियों में फंसा मिला।

    सीधी में भी बारिश के दौरान हादसा सामने आया जहां प्रसिद्ध बढ़ौरा शिव मंदिर के पास एक महिला की पुल से गिरने के बाद मौत हो गई। दूसरी ओर रीवा के जवा जनपद की रौली गांव में बाढ़ ने अंतिम यात्रा का रास्ता भी रोक दिया। संजय गांधी अस्पताल रीवा में मोतीलाल तिवारी के निधन के बाद जब उनका शव गांव ले जाया जा रहा था तो रास्ते में तेज बहाव के कारण आगे जाना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने दो ड्रमों को आपस में बांधकर उनके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराया। इसके बाद शव गांव पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में 27 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी हिस्से के साथ अब पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगह तेज बारिश होने की संभावना है। भोपाल सीहोर राजगढ़ इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर सतना सिंगरौली मैहर पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश की कमी के बाद जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी थी लेकिन मानसून के दो बार ब्रेक लेने से बारिश का आंकड़ा फिर पीछे चला गया। अब अगस्त के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम ने प्रदेश के कई हिस्सों में राहत दी है। हालांकि लगातार भारी बारिश के कारण नदी नालों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और तेज बहाव वाले रास्तों व पुलियाओं को पार करने से बचने की सलाह दी गई है। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का असर देखने को मिलेगा।
  • MP Weather Update: आधा मानसून बीता फिर भी 3 इंच बारिश कम, अगले सप्ताह भारी बारिश के आसार; डैमों का जलस्तर भी बढ़ा

    MP Weather Update: आधा मानसून बीता फिर भी 3 इंच बारिश कम, अगले सप्ताह भारी बारिश के आसार; डैमों का जलस्तर भी बढ़ा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून का आधे से ज्यादा सीजन गुजर चुका है लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में अब तक औसतन 24.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि इस अवधि तक करीब 27.4 इंच पानी गिरना चाहिए था। इस हिसाब से प्रदेश में सामान्य कोटे की लगभग 65 प्रतिशत बारिश ही हुई है और करीब 3 इंच बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाला सप्ताह बारिश के लिहाज से बेहतर रह सकता है। यदि अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहता है तो कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर तक पहुंच सकता है।

    अगस्त के तीसरे सप्ताह में मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ के साथ डिप्रेशन और निम्न दबाव क्षेत्र बनने से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। डिंडौरी और सिवनी समेत कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा जबकि कई इलाकों में झरने भी तेज बहाव के साथ बहते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    प्रदेश के संभागों की स्थिति देखें तो भोपाल शहडोल रीवा और जबलपुर संभाग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। इसके उलट इंदौर उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पूर्वी हिस्से के भी कई जिलों में कमी है लेकिन कुछ क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश ने स्थिति में सुधार किया है।

    जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उमरिया और डिंडौरी में अब तक 34 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके मुकाबले मुरैना प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां करीब 12 इंच पानी ही गिरा है। भिंड में भी लगभग 22 इंच बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर अनूपपुर सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भोपाल गुना ग्वालियर खंडवा खरगोन और राजगढ़ समेत 15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की शुरुआत इस साल कुछ देरी से हुई थी। मध्य प्रदेश में मानसून 24 जून को पहुंचा था और इसके बाद करीब नौ दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय हो गया। जून में बारिश की कमी करीब 30 प्रतिशत रही थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत में बारिश ने जोर पकड़ा और आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद कुछ समय मानसून कमजोर रहा लेकिन जुलाई के तीसरे और चौथे सप्ताह तथा अगस्त में कई दौर में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश का सीधा असर प्रदेश के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। कई बड़े बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। बरगी और जौहिला समेत कुछ बांधों के गेट खोले गए हैं। बरगी बांध के 13 गेट खुलने से निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ी है। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के कुछ बांधों में अभी अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ है।

    आने वाला सप्ताह मध्य प्रदेश के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो फिलहाल पीछे चल रहे जिलों के आंकड़े में सुधार हो सकता है। खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के उन इलाकों को बारिश की जरूरत है जहां सामान्य से काफी कम पानी गिरा है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रदेश के लिए मानसून के लिहाज से राहत देने वाले साबित हो सकते हैं।

  • आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान

    आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान


    भोपाल । सोमवार 17 अगस्त से वर्षा मघा नक्षत्र में प्रवेश करेगी और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव 31 अगस्त तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिष मठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम के अनुसार सिंह राशि में आने वाला मघा नक्षत्र बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में मध्यप्रदेश समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश के योग बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि मघा नक्षत्र में वर्षा के स्वामी मंगल माने जाते हैं और इसके चलते बारिश का स्वरूप कई जगह अलग अलग हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में खंड वर्षा देखने को मिल सकती है जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने के योग बन सकते हैं।

    ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मघा नक्षत्र का वाहन चातक यानी पपीहा माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र को वर्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभाव से कई स्थानों पर पर्याप्त बारिश होने के साथ कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा भी हो सकती है। खास बात यह है कि जिन क्षेत्रों में अब तक अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है वहां भी इस अवधि में वर्षा के योग बनने की बात कही गई है। ऐसे में मघा नक्षत्र का यह दौर किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मघा नक्षत्र को लेकर प्रचलित लोक कहावत ‘मघा देगा अघा’ भी बारिश की इसी विशेषता की ओर संकेत करती है। इसका अर्थ माना जाता है कि मघा नक्षत्र में होने वाली बारिश से तालाब ताल तलैया और अन्य जलस्रोत पानी से भर सकते हैं। पंडित विनोद गौतम ने एक अन्य लोक कहावत ‘मघा न बरसे भरे ना खेत माता न परसे भरे ना पेट’ का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय लोक परंपरा में मघा की बारिश का संबंध सीधे खेती और जल उपलब्धता से जोड़ा गया है। इस दौरान होने वाली बारिश का असर खेतों और जलस्रोतों पर दिखाई देने की मान्यता है।

    हालांकि बारिश के स्वरूप को लेकर ज्योतिषीय अनुमान एक समान नहीं होते। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य रह सकती है जबकि कुछ जगहों पर तेज वर्षा के दौर बन सकते हैं। इसलिए मघा नक्षत्र के दौरान अलग अलग स्थानों पर बारिश की स्थिति में अंतर रहने की संभावना बताई गई है। मौसम की वास्तविक स्थिति के लिए वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान और मौसम विभाग की चेतावनियों को प्राथमिक आधार माना जाना चाहिए।

    पंडित गौतम ने 28 अगस्त को होने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार एक पखवाड़े के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना ज्योतिषीय दृष्टि से प्राकृतिक घटनाओं और भूकंप जैसी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण के प्रभाव से देश और दुनिया में प्राकृतिक घटनाओं की आशंका के योग बताए हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और परंपरागत गणनाओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मौसम या भूकंप पूर्वानुमान नहीं माना जाता है।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त से शुरू हो रहा मघा नक्षत्र 31 अगस्त तक बारिश के लिहाज से चर्चा में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में कई स्थानों पर अच्छी और कहीं तेज बारिश के योग बन सकते हैं। वहीं किसानों और आम लोगों के लिए वास्तविक बारिश की स्थिति जानने के लिए स्थानीय मौसम विभाग के अपडेट और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखना अधिक उपयोगी रहेगा।

  • मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता, पूर्वी हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी; सतना में सड़क पर चढ़ा नदी का पानी

    मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता, पूर्वी हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी; सतना में सड़क पर चढ़ा नदी का पानी


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में शुक्रवार को बारिश का एक और दौर शुरू हो गया है और प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग के कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश हो सकती है और कुछ स्थानों पर 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच या उससे अधिक पानी गिरने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी बारिश का यह सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।

    जिन जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है उनमें सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर रीवा और सतना समेत कई जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा प्रभावी रह सकती हैं जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी मानसून सक्रिय बना रहेगा।

    भारी बारिश का असर कई इलाकों में दिखाई देने लगा है। खरगोन जिले के गोगांवा क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद साटक जलाशय पूरी क्षमता से भर गया और ओवरफ्लो हो गया। करीब 18.38 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता वाला यह जलाशय स्पिलवे के ऊपर से बह रहा है। लंबे अंतराल के बाद जलाशय के इस तरह भरने से आसपास के इलाकों में भी लोगों की नजर जलस्तर पर बनी हुई है। साटक जलाशय इससे पहले भी बारिश के मजबूत दौर के दौरान ओवरफ्लो हो चुका है।

    सतना जिले में भी लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। खासतौर पर तराई क्षेत्र में पहाड़ी इलाकों से तेजी से पानी नीचे आने के कारण हालात प्रभावित हुए हैं। धारकुंडी आश्रम के पास झरना तेज बहाव के साथ बह रहा है और पानी आश्रम परिसर तक पहुंच गया है। कोटर नगर परिषद कार्यालय परिसर और आसपास की दुकानों में भी पानी भरने की स्थिति सामने आई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्ड में पानी पहुंचने के बाद प्रसूताओं को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। वहीं बिरसिंहपुर सेमरिया मार्ग पर मऊ नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की जानकारी सामने आई है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम भी माना जा रहा है। उपलब्ध मौसम रिपोर्टों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र आगे बढ़कर डिप्रेशन में तब्दील हुआ है और इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ सक्रिय रहने की संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    प्रदेश में बारिश का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है हालांकि कई हिस्से अभी सामान्य बारिश से पीछे चल रहे हैं। ऐसे में यह नया मानसूनी दौर उन जिलों के लिए राहत लेकर आ सकता है जहां बारिश की कमी बनी हुई है। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में पहले से पर्याप्त बारिश हो चुकी है वहां तेज बारिश से जलभराव नदी नालों के जलस्तर में वृद्धि और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए नदी नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान पुलिया या रपटे पर पानी बहने की स्थिति में उसे पार करने से बचना चाहिए। प्रशासन की ओर से भी संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर और बारिश की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल एमपी में मानसून का यह नया दौर आने वाले कुछ दिनों तक मौसम को सक्रिय बनाए रख सकता है।

  • मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप

    मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच लगातार बारिश ने कई इलाकों में हालात बिगाड़ दिए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, वहीं निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है। कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और नदी किनारे स्थित मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों में भी पानी पहुंचने की तस्वीरें सामने आई हैं। बारिश के बढ़ते असर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

    विदिशा समेत कई जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। बेतवा नदी में पानी बढ़ने के बाद नदी किनारे के घाट और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचने की स्थिति बनी। कई धार्मिक स्थलों और मंदिरों के आसपास भी जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई। नदी के उफान को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका बनी रहती है इसलिए स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। कई जगह सड़क और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। ग्रामीण इलाकों में बारिश का पानी खेतों और बस्तियों तक पहुंचने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए टीमों को तैयार रखना पड़ रहा है। जलभराव वाले स्थानों पर बिजली व्यवस्था और यातायात को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

    प्रदेश में बारिश के साथ बाढ़ का खतरा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई नदियों का जलस्तर आसपास के जिलों में होने वाली बारिश और बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर भी निर्भर करता है। ऐसे में किसी एक इलाके में बारिश कम होने के बावजूद नदी का पानी बढ़ सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पुलों पर पानी होने की स्थिति में उसे पार नहीं करने और नदी किनारे पिकनिक या धार्मिक गतिविधियों के लिए जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे स्थानों से दूर रखना जरूरी है।

    मौसम विभाग की बारिश संबंधी चेतावनियों के बीच आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर ध्यान देने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की जरूरत है। फिलहाल मध्य प्रदेश में बारिश ने जहां किसानों को राहत दी है वहीं नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरे की स्थिति भी पैदा कर दी है। प्रशासन की निगरानी और लोगों की सतर्कता ही संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • मानसून फिर दिखाएगा अपना असर, 11 अगस्त को MP समेत कई राज्यों में बारिश के आसार, जलभराव से बढ़ सकती है परेशानी

    मानसून फिर दिखाएगा अपना असर, 11 अगस्त को MP समेत कई राज्यों में बारिश के आसार, जलभराव से बढ़ सकती है परेशानी


    मध्य प्रदेश11 अगस्त 2026 को देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने के आसार हैं। मौसम के बदलते मिजाज के बीच मध्य भारत समेत कई राज्यों में बादल छाए रहने और बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है जबकि कई स्थानों पर तेज बौछारों के साथ गरज चमक की स्थिति भी बन सकती है। लगातार बारिश वाले इलाकों में निचले क्षेत्रों में जलभराव की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मध्य प्रदेश में भी मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रहने की संभावना है। राजधानी भोपाल समेत इंदौर उज्जैन जबलपुर और ग्वालियर सहित कई शहरों में बादल छाए रहने के साथ बारिश हो सकती है। कुछ जिलों में गरज चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के कारण कई स्थानों पर तापमान में गिरावट आ सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि लगातार बारिश होने की स्थिति में सड़कों पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।

    उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी मौसम करवट ले सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है जबकि पश्चिमी हिस्सों में भी बादल छाए रह सकते हैं। राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। बारिश के कारण तापमान में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

    बिहार झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी मानसून के सक्रिय रहने का अनुमान है। कई इलाकों में बारिश के साथ गरज चमक हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने से स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। लोगों को निचले इलाकों और पानी से भरे रास्तों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान भूस्खलन सड़क बाधित होने और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

    महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बारिश का प्रभाव देखने को मिल सकता है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना बनी रह सकती है। दक्षिण भारत में भी मानसूनी गतिविधियां कई इलाकों में जारी रह सकती हैं। केरल कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश होने के आसार हैं।

    बारिश का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका प्रभाव यातायात बाजार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ता है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। किसानों के लिए बारिश राहत लेकर आ सकती है क्योंकि इससे खरीफ फसलों को पर्याप्त पानी मिल सकता है लेकिन अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान का खतरा भी बढ़ सकता है।

    कुल मिलाकर 11 अगस्त को देश के कई हिस्सों में मानसून का असर दिखाई देने की संभावना है। कहीं हल्की बारिश तो कहीं तेज बौछारों के साथ गरज चमक देखने को मिल सकती है। मौसम की स्थानीय स्थिति तेजी से बदल सकती है इसलिए घर से निकलने से पहले अपने क्षेत्र का ताजा मौसम अपडेट देखना और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना बेहतर रहेगा।

  • भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग

    भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग


    भोपाल भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। रविवार को शहर में बादल छाए रहने के बाद सोमवार से बारिश का दौर बढ़ने के आसार हैं। मौसम के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 10 अगस्त को भोपाल में रुक रुककर बारिश हो सकती है। इसके बाद मंगलवार को भी बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि बुधवार को हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। यानी राजधानी में आने वाले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ रहने के बजाय बादलों और बारिश के बीच बदलता नजर आ सकता है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। दिन का तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है जबकि रात में तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने के आसार हैं। ऐसे मौसम में सुबह और शाम के समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि लगातार बादल और बारिश के कारण कई इलाकों में उमस की स्थिति भी बनी रह सकती है।

    सोमवार को बारिश का दौर रहने के कारण शहर में लोगों को आवाजाही के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को गीली सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता रखनी चाहिए। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने और सड़क पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। निचले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    भोपाल में बारिश के साथ तापमान में राहत मिलने की संभावना है। गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों के लिए बादल और बारिश राहत लेकर आ सकते हैं। हालांकि लगातार बारिश होने पर शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात संबंधी परेशानी भी सामने आ सकती है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से जल निकासी व्यवस्था पर नजर रखना जरूरी होगा।

    आने वाले दिनों में भी मौसम पूरी तरह स्थिर रहने की संभावना नहीं है। गुरुवार को बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि शुक्रवार को बारिश के साथ गरज चमक और तूफानी गतिविधि की आशंका भी जताई गई है। इसके बाद शनिवार को हल्की बारिश और रविवार को कुछ समय के लिए बारिश की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में अगले सप्ताह के दौरान भोपाल के मौसम में बादलों और बारिश का असर लगातार बना रहने की संभावना है।

    मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचें और गरज चमक के समय पेड़ या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों। घर से बाहर निकलते समय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा की योजना बनाना बेहतर रहेगा। किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए भी स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

    कुल मिलाकर भोपाल में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने के संकेत हैं। सोमवार से बारिश की संभावना बढ़ने के साथ तापमान में राहत बनी रह सकती है। हालांकि बारिश के कारण जलभराव और यातायात जैसी स्थानीय समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए लोगों के लिए बारिश का आनंद लेने के साथ जरूरी सावधानी बरतना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।

  • MP Weather Update: भोपाल में बारिश का दौर जारी, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

    MP Weather Update: भोपाल में बारिश का दौर जारी, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट


    भोपाल ।  भोपाल में शनिवार 8 अगस्त को मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आ सकता है। मानसून की सक्रियता के बीच राजधानी में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के भोपाल केंद्र ने पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए 8 अगस्त को गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई है। ऐसे में भोपाल और आसपास के इलाकों में लोगों को मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। शुक्रवार को भी राजधानी में मौसम नम रहा और वातावरण में नमी बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल क्षेत्र में बादलों की आवाजाही के बीच तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।

    8 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। दिन के दौरान कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है जबकि कहीं कहीं गरज चमक के साथ तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। मानसून के दौरान स्थानीय स्तर पर बनने वाले बादल कई बार कुछ ही समय में मौसम का रुख बदल देते हैं। यही वजह है कि शहर के एक हिस्से में बारिश हो सकती है जबकि दूसरे हिस्से में कुछ समय तक केवल बादल छाए रह सकते हैं। राजधानी के निचले इलाकों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मौसम विभाग की चेतावनी केवल 8 अगस्त तक सीमित नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 9 अगस्त को भी गरज चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है जबकि 10 और 11 अगस्त को भारी बारिश के साथ गरज चमक को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इसका असर भोपाल सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का दौर और सक्रिय होने की संभावना बनी हुई है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी राहत बनी रह सकती है। राजधानी में इन दिनों उमस और बादलों के बीच मौसम का असर लगातार बदल रहा है। शुक्रवार को भोपाल के अरेरा हिल्स क्षेत्र में तापमान 26 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया जबकि हवा की रफ्तार और नमी भी बनी रही। मौसम में नमी अधिक होने के कारण बारिश के बाद वातावरण ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि बारिश रुकने के बाद उमस बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    शनिवार को घर से बाहर निकलने वाले लोगों को मौसम पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। खासकर गरज चमक के दौरान खुले मैदानों पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़क पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी क्योंकि तेज बारिश के बाद सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। वहीं बारिश के कारण यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

    कुल मिलाकर 8 अगस्त को भोपाल में मौसम सुहाना रहने के साथ बारिश के आसार हैं। बादलों की आवाजाही और गरज चमक राजधानी के मौसम को प्रभावित कर सकती है। मौसम विभाग की अगले कुछ दिनों की चेतावनी को देखते हुए यह साफ है कि भोपाल में मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • 21 जुलाई का मौसम देगा राहत या बढ़ाएगा मुश्किलें देश के कई राज्यों में भारी बारिश और गरज चमक का अलर्ट जारी

    21 जुलाई का मौसम देगा राहत या बढ़ाएगा मुश्किलें देश के कई राज्यों में भारी बारिश और गरज चमक का अलर्ट जारी


    मध्यप्रदेश । 21 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पूर्वी भारत और पश्चिमी तटीय राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। लगातार सक्रिय बने मानसूनी सिस्टम के कारण कई राज्यों में जलभराव बाढ़ और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर में पूरे दिन बादल छाए रहने और रुक रुक कर बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस से राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। सुबह और शाम के समय तेज हवा के साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने से नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए यह बारिश फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव से नुकसान की आशंका भी बनी रहेगी।

    महाराष्ट्र गुजरात गोवा कर्नाटक और केरल में भी मानसून पूरी मजबूती के साथ सक्रिय रहेगा। पश्चिमी घाट के आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क मार्ग प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के कई हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। यात्रियों और श्रद्धालुओं को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र मानसून को लगातार मजबूती दे रहा है। इसके प्रभाव से आने वाले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कई राज्यों में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है इसलिए खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। किसानों को भी मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर 21 जुलाई का दिन देश के कई हिस्सों में बारिश राहत और सतर्कता तीनों का संदेश लेकर आएगा। जहां एक ओर गर्मी और उमस से राहत मिलेगी वहीं दूसरी ओर भारी बारिश वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा।