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  • मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद

    मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी जुकाम खांसी और गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या अचानक ठंडी और गर्म जगह के बीच जाना भी परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि केवल बारिश में भीगना ही सर्दी जुकाम का सीधा कारण नहीं होता बल्कि वायरल संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देकर संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले शरीर को गीला होने से बचाना जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो घर पहुंचने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से असहजता बढ़ सकती है और शरीर को ठंड महसूस हो सकती है। बारिश के दिनों में बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना भी उपयोगी आदत है।

    मानसून के दौरान हाथों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचें क्योंकि वायरस और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कण हाथों के जरिए शरीर तक पहुंच सकते हैं। अगर आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उसके बेहद करीब जाने से बचना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

    खानपान भी मानसून में सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौसम में ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीते रहें और डाइट में फल सब्जियां दालें और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। बहुत ज्यादा तला भुना या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना भी बेहतर है।

    मानसून में पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। लगातार कम नींद और खराब दिनचर्या से शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और बहुत ज्यादा ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।

    अगर सर्दी जुकाम हो भी जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन मददगार हो सकता है। गले में खराश या नाक बंद होने जैसी परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द या लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मानसून में थोड़ी सावधानी और अच्छी स्वच्छता की आदतें अपनाकर सर्दी जुकाम समेत कई संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • मलेरिया से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें, मच्छरों की रोकथाम से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें

    मलेरिया से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें, मच्छरों की रोकथाम से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें मलेरिया भी एक प्रमुख बीमारी है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। मलेरिया से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि मच्छरों की संख्या को नियंत्रित किया जाए और उनके काटने से खुद को सुरक्षित रखा जाए। खासकर बरसात में घर के आसपास जमा पानी पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर मलेरिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचाव करना है। शाम और रात के समय जब मच्छरों की गतिविधि बढ़ सकती है तब पूरी बांह के कपड़े पहनना बेहतर रहता है। घर में खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली लगाई जा सकती है। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल भी उपयोगी है। जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या अन्य मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    घर और आसपास पानी जमा न होने देना मलेरिया की रोकथाम का दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है। गमलों की प्लेटों कूलर की टंकियों बाल्टियों पुराने टायरों छतों और अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें। पानी की टंकियों और ऐसे सभी बर्तनों को ढककर रखें जिनमें पानी जमा रहता है। कूलर का पानी भी नियमित रूप से बदलें और उसकी सफाई करें। अगर आसपास किसी जगह लंबे समय से पानी जमा है तो उसे हटाने या संबंधित स्थानीय निकाय को इसकी सूचना देने की कोशिश करें।

    मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी जरूरी है। बुखार ठंड लगना सिरदर्द शरीर में कमजोरी पसीना आना और बदन दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में मतली या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर मलेरिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे लक्षण होने पर स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करके आवश्यक जांच करानी चाहिए।

    मलेरिया के इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर तेज बुखार लगातार कमजोरी बेहोशी सांस लेने में परेशानी दौरे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। बच्चों गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है इसलिए इनके मामले में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    मलेरिया से बचाव केवल व्यक्तिगत सावधानी तक सीमित नहीं है। पूरे समुदाय को मिलकर मच्छरों के प्रजनन स्थल कम करने होंगे। घर के आसपास सफाई रखना नालियों में पानी जमा न होने देना और लंबे समय तक खुले में पानी न छोड़ना सामूहिक रूप से बीमारी के खतरे को कम कर सकता है। बारिश के मौसम में साफ सफाई और मच्छर नियंत्रण को लेकर जागरूकता सबसे जरूरी हथियार है।

    ध्यान रखें कि मलेरिया से बचने का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों के काटने से सुरक्षा और मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। यदि बुखार या मलेरिया से जुड़े लक्षण दिखाई दें तो खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह और जांच कराना बेहतर है। सही समय पर पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

  • मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं बदलता मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान तापमान में उतार चढ़ाव नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने के कारण संक्रमण फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं। यही वजह है कि इन दिनों वायरल बुखार सर्दी जुकाम खांसी गले में खराश सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। खासतौर पर बच्चे बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर को तापमान के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है और संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

    वायरल बुखार होने पर आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ना थकान कमजोरी सिरदर्द बदन दर्द ठंड लगना भूख कम लगना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में खांसी और नाक बहने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि हर बुखार वायरल ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में भी बुखार हो सकता है इसलिए लगातार तेज बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर में किसी व्यक्ति को सर्दी खांसी या बुखार हो तो उसके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचना और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना भी संक्रमण के प्रसार को कम कर सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से बचना चाहिए। गीले कपड़े तुरंत बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहतर होता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और आसपास की खाली जगहों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। इससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

    अगर बुखार हो जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि हर बुखार का कारण बैक्टीरियल संक्रमण नहीं होता। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे बहुत तेज हो जाए या उसके साथ सांस लेने में परेशानी लगातार उल्टी अत्यधिक कमजोरी बेहोशी त्वचा पर दाने या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर बारिश और बदलते मौसम में वायरल बुखार से बचाव के लिए साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद सुरक्षित पानी और आसपास की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मानसून का मौसम स्वस्थ रहते हुए बिताया जा सकता है।

  • मासूमों पर कहर बन रहा Chandipura Virus समय रहते पहचान और बचाव ही है सबसे बड़ा हथियार

    मासूमों पर कहर बन रहा Chandipura Virus समय रहते पहचान और बचाव ही है सबसे बड़ा हथियार


    नई दिल्ली। बरसात के मौसम में वायरल संक्रमण और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे समय में Chandipura Virus ने एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। देश के कुछ राज्यों में इस वायरस के मामले सामने आने के बाद खासतौर पर छोटे बच्चों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस सामान्य संक्रमण की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह सीधे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर डालता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार Chandipura Virus किसी खास उम्र के बच्चों को चुनकर हमला नहीं करता लेकिन पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों का शरीर और उनका नर्वस सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही वजह है कि उनका शरीर इस संक्रमण से होने वाले नुकसान का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाता। इस उम्र में दिमाग की सुरक्षा करने वाली ब्लड ब्रेन बैरियर नामक परत भी पूरी तरह मजबूत नहीं होती। ऐसे में वायरस आसानी से दिमाग तक पहुंच सकता है और वहां सूजन पैदा कर गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

    डॉक्टर बताते हैं कि बचपन के शुरुआती वर्षों में मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से होता है। यदि इसी दौरान कोई गंभीर संक्रमण दिमाग को प्रभावित कर दे तो बच्चे के बोलने चलने सीखने और मानसिक विकास पर स्थायी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि Chandipura Virus को बच्चों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है और इसके लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है।

    इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं। तेज बुखार सिरदर्द उल्टी शरीर में कमजोरी और बेचैनी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई मामलों में कुछ ही घंटों के भीतर बच्चे को दौरे पड़ना बेहोशी आना या मानसिक भ्रम जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार Chandipura Virus मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई और कुछ अन्य कीटों के काटने से फैलता है। बरसात के मौसम में इन कीटों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी अधिक हो जाता है। इसलिए बच्चों को साफ और सुरक्षित वातावरण में रखना बेहद जरूरी है।

    बचाव के लिए घर और आसपास साफ सफाई बनाए रखना सबसे जरूरी कदम माना जाता है। बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाना मच्छरदानी का उपयोग करना और कीटों से बचाव के लिए आवश्यक उपाय अपनाना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल इस वायरस का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान और अस्पताल में उचित उपचार ही मरीज की जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ उल्टी बेहोशी दौरे या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और समय पर उपचार से इस वायरस से होने वाले गंभीर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए बरसात के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है।

  • मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, सही खानपान और साफ-सफाई से रहें सर्दी-खांसी से सुरक्षित

    मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, सही खानपान और साफ-सफाई से रहें सर्दी-खांसी से सुरक्षित


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं यह बच्चों की सेहत के लिए कई चुनौतियां भी साथ लाता है। इस मौसम में तापमान और नमी में लगातार बदलाव होने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सर्दी जुकाम खांसी बुखार वायरल संक्रमण और गले की परेशानी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती इसलिए उन्हें विशेष देखभाल और सही दिनचर्या की जरूरत होती है।

    मानसून के दौरान बच्चों को भीगने से बचाना सबसे जरूरी है। यदि बच्चा बारिश में भीग जाए तो घर पहुंचते ही उसके गीले कपड़े बदल दें और शरीर को अच्छी तरह सुखाकर साफ और सूखे कपड़े पहनाएं। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से शरीर का तापमान कम हो सकता है जिससे सर्दी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    इस मौसम में बच्चों के खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। ताजा और घर का बना पौष्टिक भोजन ही खिलाएं। मौसमी फल हरी सब्जियां दाल दूध दही और प्रोटीन से भरपूर आहार बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत बनाने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा ठंडी चीजें आइसक्रीम कोल्ड ड्रिंक या बाहर का खुला और तला हुआ भोजन देने से बचें क्योंकि इससे गले में संक्रमण और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

    बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना भी जरूरी है। कई बार बारिश के मौसम में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद आवश्यक होता है। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिलाएं ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम हो सके।

    साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बच्चों को बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। खाने से पहले और शौचालय के बाद हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। उनके खिलौनों कपड़ों और आसपास के वातावरण को भी नियमित रूप से साफ रखें।

    यदि मौसम ठंडा हो तो बच्चों को हल्के लेकिन आरामदायक गर्म कपड़े पहनाएं। रात में सोते समय शरीर ढका रहे इसका ध्यान रखें। कमरे में नमी ज्यादा होने पर उचित वेंटिलेशन बनाए रखें ताकि फफूंद और बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम हो।

    बच्चों की पर्याप्त नींद भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। समय पर सोना और पर्याप्त आराम करना शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है। साथ ही हल्की शारीरिक गतिविधियां और घर के अंदर खेलने के अवसर भी बच्चों को सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    अगर बच्चे को लगातार बुखार तेज खांसी सांस लेने में तकलीफ या बार बार उल्टी जैसी परेशानी हो तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    बरसात का मौसम सावधानी और सही देखभाल का मौसम है। यदि माता पिता बच्चों के खानपान साफ सफाई कपड़ों और दिनचर्या पर थोड़ा अतिरिक्त ध्यान दें तो सर्दी जुकाम और वायरल संक्रमण जैसी अधिकांश मौसमी बीमारियों से आसानी से बचाव किया जा सकता है। छोटी छोटी आदतें ही बच्चों को पूरे मानसून में स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार बनती हैं।

  • डेंगू मच्छर से बचाव के लिए बरसात में रखें विशेष सावधानी जानिए कैसे करें खुद और परिवार की सुरक्षा

    डेंगू मच्छर से बचाव के लिए बरसात में रखें विशेष सावधानी जानिए कैसे करें खुद और परिवार की सुरक्षा


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इनमें डेंगू सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है। हर साल मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसका सबसे बड़ा कारण घरों और आसपास जमा होने वाला साफ पानी है जहां एडीज मच्छर आसानी से पनपता है। यही मच्छर डेंगू वायरस फैलाने का काम करता है। ऐसे में थोड़ी सी सतर्कता और सही आदतें अपनाकर इस बीमारी से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। यह सुबह और शाम के समय सबसे ज्यादा काटता है। इसलिए केवल रात में ही नहीं बल्कि दिन में भी मच्छरों से बचाव करना जरूरी है। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और बच्चों को भी फुल स्लीव्स के कपड़े पहनाएं ताकि मच्छरों के काटने का खतरा कम हो सके।

    घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर गमले टायर बाल्टी पानी की टंकी और पुराने बर्तनों में जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें या बदलें। यदि पानी लंबे समय तक जमा रहेगा तो मच्छर तेजी से अंडे देंगे और उनकी संख्या बढ़ जाएगी। घर की छत बालकनी और आंगन की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है।

    मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही मच्छर भगाने वाली क्रीम स्प्रे या इलेक्ट्रिक वेपराइजर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाना भी एक प्रभावी उपाय माना जाता है जिससे मच्छर घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते।

    यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द शरीर और जोड़ों में तेज दर्द कमजोरी या त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दें तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक जांच कराएं। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से डेंगू के गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    डेंगू होने पर पर्याप्त मात्रा में पानी नारियल पानी नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा लेने से बचें क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही दवा का सेवन करें।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। यदि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास सफाई बनाए रखे तथा पानी जमा न होने दे तो डेंगू के मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। बरसात के मौसम में थोड़ी सी जागरूकता और नियमित सावधानी न केवल आपको बल्कि पूरे समाज को इस खतरनाक बीमारी से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • क्या अब डेंगू से नहीं जाएगी जान भारत की पहली QDENGA वैक्सीन पर जानिए कैसे करती है काम और कितनी है प्रभावी

    क्या अब डेंगू से नहीं जाएगी जान भारत की पहली QDENGA वैक्सीन पर जानिए कैसे करती है काम और कितनी है प्रभावी


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम अपने साथ राहत लेकर आता है लेकिन इसी दौरान डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। हर वर्ष लाखों लोग डेंगू की चपेट में आते हैं और कई मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसे समय में भारत के लिए बड़ी राहत की खबर यह है कि देश में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए QDENGA वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। विशेषज्ञ इसे डेंगू के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं क्योंकि यह बीमारी के गंभीर रूप और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम करने की क्षमता रखती है।

    QDENGA जापान की दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित एक लाइव एटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसमें डेंगू वायरस के कमजोर स्वरूप का उपयोग किया जाता है ताकि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ सुरक्षा विकसित कर सके। बाद में यदि वास्तविक डेंगू वायरस शरीर पर हमला करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र तेजी से सक्रिय होकर गंभीर संक्रमण की आशंका को कम करने में मदद करता है।

    इस वैक्सीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकारों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विकसित की गई है। पहले उपलब्ध कुछ वैक्सीन में टीकाकरण से पहले यह जांच जरूरी होती थी कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं। लेकिन QDENGA के लिए ऐसी जांच आवश्यक नहीं है जिससे बड़े स्तर पर टीकाकरण करना अधिक आसान हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह वैक्सीन 6 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए उपयुक्त मानी गई है। इसे दो डोज में लगाया जाता है और दोनों डोज के बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाता है। पहली डोज शरीर में प्रारंभिक प्रतिरक्षा तैयार करती है जबकि दूसरी डोज लंबे समय तक सुरक्षा को मजबूत बनाती है।

    क्लिनिकल परीक्षणों में इस वैक्सीन के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। अध्ययनों के अनुसार इससे डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 84 प्रतिशत तक कम देखा गया जबकि संक्रमण का जोखिम भी काफी हद तक घटा। हालांकि यह वैक्सीन संक्रमण की पूरी तरह गारंटी नहीं देती लेकिन गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    भारत में इसकी कीमत का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है लेकिन शुरुआती अनुमान के अनुसार इसकी एक डोज की कीमत लगभग चार से पांच हजार रुपये के बीच हो सकती है। शुरुआत में यह निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध होने की संभावना है। भविष्य में इसे सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर निर्णय बाद में लिया जाएगा।

    अच्छी बात यह भी है कि भारत की दवा कंपनी जायडस लाइफसाइंसेज के साथ हुए समझौते के तहत भविष्य में इस वैक्सीन का निर्माण भारत में भी किया जाएगा। इससे इसकी उपलब्धता बढ़ने और कीमत कम होने की संभावना जताई जा रही है।

    हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि केवल वैक्सीन ही डेंगू की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। मच्छरों की रोकथाम साफ सफाई घर और आसपास पानी जमा न होने देना पूरी बाजू के कपड़े पहनना मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना तथा बुखार आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आज भी उतना ही जरूरी है।

    डेंगू के खिलाफ यह वैक्सीन भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जरूर है लेकिन इसके साथ जागरूकता और बचाव के उपाय अपनाना भी आवश्यक है। यदि टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए तो आने वाले वर्षों में डेंगू से होने वाले गंभीर मामलों और मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

  • बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से

    बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। ऐसे में यदि खानपान स्वच्छता और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी कई समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए इस मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो जाता है।

    बारिश के दिनों में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और साफ पानी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और कटे हुए फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। घर का ताजा और गर्म भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

    मानसून के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें हरी सब्जियां मौसमी फल दालें सूखे मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हो। विटामिन सी से भरपूर फल शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायता करते हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनकर रहने से फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें और उन्हें पूरी तरह सुखाकर ही जूते पहनें।

    मच्छरों से बचाव मानसून में सबसे जरूरी सावधानियों में से एक है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि यही मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले सुरक्षित उत्पादों का इस्तेमाल करें। यदि तेज बुखार शरीर दर्द या लगातार कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बाहर निकलना संभव न हो तो घर के अंदर हल्का व्यायाम योग या प्राणायाम किया जा सकता है। इससे शरीर सक्रिय रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। मानसिक तनाव कम करने के लिए भी नियमित दिनचर्या बनाए रखना लाभदायक होता है।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    मानसून का मौसम आनंद और ताजगी लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यदि संतुलित आहार स्वच्छता नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा सलाह को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो बारिश के पूरे मौसम का आनंद बिना किसी बीमारी के लिया जा सकता है। सावधानी ही इस मौसम में स्वस्थ रहने की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर

    बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। वातावरण में बढ़ी नमी बैक्टीरिया वायरस और फंगस को तेजी से पनपने का मौका देती है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि खानपान और साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत की सुरक्षा करना भी बेहद जरूरी है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और शुद्ध पानी का सेवन करना चाहिए। बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से जितना हो सके बचें क्योंकि इनमें संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही खाएं। लंबे समय तक रखा हुआ खाना दोबारा खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं। पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

    इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना भी बेहद आवश्यक है। रोजाना मौसमी फल हरी सब्जियां दालें दूध दही और प्रोटीन युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरा आंवला नींबू और अमरूद इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और विषैले तत्व बाहर निकल सकें।

    बरसात के दौरान मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले टायर और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी सुरक्षित रहता है।

    बरसात में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनने से फंगल संक्रमण हो सकता है इसलिए पैरों की सफाई और सूखापन बनाए रखना जरूरी है। यदि त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लें।

    हाथों की स्वच्छता भी संक्रमण से बचाव का सबसे आसान तरीका है। खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। बच्चों को भी यही आदत सिखाएं क्योंकि वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

    यदि लगातार बुखार तेज सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या कमजोरी जैसी समस्या महसूस हो तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और इलाज गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

    बरसात का मौसम प्रकृति की खूबसूरती और ठंडक का एहसास कराता है लेकिन थोड़ी सी सावधानी आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है। संतुलित आहार स्वच्छता पर्याप्त आराम और नियमित व्यायाम अपनाकर आप पूरे मानसून स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं।

  • मलेरिया से बचाव के लिए जानिए जरूरी सावधानियां और घरेलू सुरक्षा उपाय जो रखेंगे पूरे परिवार को सुरक्षित

    मलेरिया से बचाव के लिए जानिए जरूरी सावधानियां और घरेलू सुरक्षा उपाय जो रखेंगे पूरे परिवार को सुरक्षित


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इनमें मलेरिया सबसे प्रमुख बीमारियों में शामिल है। यह बीमारी संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह गंभीर रूप भी ले सकती है। ऐसे में बरसात के मौसम में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर मलेरिया से बचाव किया जा सकता है।

    मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का सबसे बड़ा कारण होता है। कूलर गमले टायर बाल्टी और छत पर रखे बर्तनों का पानी नियमित रूप से बदलें। यदि कहीं लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो उसे तुरंत साफ करें।

    घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाना भी मच्छरों को अंदर आने से रोकने का अच्छा उपाय है। रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। बच्चों बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से मच्छरों से बचाकर रखना चाहिए क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है।

    शाम के समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी लाभदायक माना जाता है। हल्के रंग के पूरे बाजू के कपड़े और लंबे पायजामे पहनने से मच्छरों के काटने की संभावना कम हो जाती है। आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का भी उपयोग किया जा सकता है।

    घर और आसपास की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। नालियों की नियमित सफाई करें और कचरा खुले में जमा न होने दें। स्वच्छ वातावरण न केवल मलेरिया बल्कि डेंगू चिकनगुनिया जैसी कई बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।

    स्वस्थ शरीर संक्रमण से लड़ने में अधिक सक्षम होता है। इसलिए संतुलित आहार लें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और ताजे फल तथा हरी सब्जियों का सेवन करें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

    यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार ठंड लगना सिरदर्द शरीर में दर्द अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें और जांच कराएं। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही इलाज कराना चाहिए। अधूरा उपचार बीमारी को जटिल बना सकता है। साथ ही यदि परिवार के किसी सदस्य को मलेरिया हो जाए तो घर के अन्य लोगों को भी मच्छरों से बचाव के उपाय और अधिक सावधानी से अपनाने चाहिए।

    बरसात के मौसम में थोड़ी सी सतर्कता और नियमित स्वच्छता की आदत मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास सफाई बनाए रखे तथा मच्छरों को पनपने का अवसर न दे तो मलेरिया के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।