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  • Rainy Season Health Care: बारिश में रोज पिएं अदरक की चाय शरीर रहेगा गर्म पाचन होगा बेहतर और बीमारियां रहेंगी दूर

    Rainy Season Health Care: बारिश में रोज पिएं अदरक की चाय शरीर रहेगा गर्म पाचन होगा बेहतर और बीमारियां रहेंगी दूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं हरियाली और सुहाना माहौल लेकर आता है लेकिन यही मौसम सर्दी खांसी वायरल संक्रमण गले की खराश और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। ऐसे समय में अगर खानपान का सही ध्यान रखा जाए तो कई मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। भारतीय घरों में बरसों से अदरक की चाय को बारिश के मौसम का सबसे भरोसेमंद घरेलू पेय माना जाता है। इसकी गर्म तासीर और औषधीय गुण शरीर को भीतर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं और यही कारण है कि मानसून में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है।

    अदरक में प्राकृतिक रूप से ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में अदरक वाली चाय पीने से मौसमी संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। बारिश के दिनों में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं ऐसे में अदरक का सेवन शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायक माना जाता है।

    बरसात के दौरान सर्दी जुकाम और गले में खराश की समस्या सबसे आम होती है। अदरक की गर्माहट गले को आराम देती है और बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है। अगर चाय में तुलसी या काली मिर्च भी मिला दी जाए तो इसका असर और अधिक प्रभावी हो सकता है। यही वजह है कि कई लोग हल्की सर्दी महसूस होते ही सबसे पहले अदरक की चाय का सहारा लेते हैं।

    बारिश के मौसम में पाचन तंत्र भी अक्सर कमजोर पड़ जाता है। बाहर का भोजन या दूषित पानी पेट खराब होने की वजह बन सकता है। अदरक पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और गैस अपच तथा पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है। भोजन के बाद एक कप हल्की अदरक वाली चाय शरीर को आराम देने के साथ पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बना सकती है।

    अदरक की चाय शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने और ठंड महसूस होने की स्थिति में शरीर को गर्म रखने में भी सहायक मानी जाती है। बारिश में भीगने के बाद एक कप गर्म अदरक की चाय शरीर को तुरंत सुकून देती है और थकान कम करने में मदद करती है। इसके अलावा इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में भी भूमिका निभाते हैं।

    हालांकि अदरक की चाय का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अत्यधिक सेवन से कुछ लोगों को एसिडिटी या पेट में जलन की शिकायत हो सकती है। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर ब्लड थिनर दवाओं या किसी गंभीर बीमारी की समस्या है उन्हें नियमित रूप से अधिक मात्रा में अदरक लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।

    बरसात के मौसम में केवल अदरक की चाय पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित भोजन स्वच्छ पानी पर्याप्त नींद और साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि अदरक की चाय को स्वस्थ जीवनशैली के साथ शामिल किया जाए तो यह मानसून के दौरान शरीर को ऊर्जा देने रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और मौसमी बीमारियों से बचाव में उपयोगी साबित हो सकती है।:

  • मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने गंदा पानी जमा होने और मच्छरों के तेजी से पनपने के कारण डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया टाइफाइड वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपकी और पूरे परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सबसे पहले साफ और सुरक्षित पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं क्योंकि दूषित पानी से टाइफाइड हेपेटाइटिस ए और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाहर खुले में मिलने वाले पेय पदार्थों और बर्फ का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

    बारिश के मौसम में ताजा और गर्म भोजन खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें तथा भोजन बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।

    मच्छरों से बचाव भी मानसून में बेहद जरूरी है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि यही डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल होता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी फायदेमंद रहता है।

    बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े पहनकर नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक नमी रहने से सर्दी जुकाम फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि गीले जूते और मोजे संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। मौसमी फल हरी सब्जियां दालें और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और नियमित व्यायाम या योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद भी शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है।

    यदि तेज बुखार लगातार सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में शुरुआती इलाज गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

    बरसात का मौसम आनंद और राहत लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छता संतुलित खानपान और समय पर सावधानी अपनाकर आप मानसून का भरपूर आनंद ले सकते हैं और खुद को कई मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।

  • तेज बुखार और ठंड लगने को न करें नजरअंदाज जानिए मलेरिया टेस्ट कराने का सही समय और जरूरी जांच

    तेज बुखार और ठंड लगने को न करें नजरअंदाज जानिए मलेरिया टेस्ट कराने का सही समय और जरूरी जांच


    नई दिल्ली । मानसून के साथ हर साल मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। इनमें मलेरिया सबसे गंभीर संक्रामक रोगों में शामिल है। कई लोग तेज बुखार ठंड लगना और शरीर दर्द जैसी शुरुआती परेशानियों को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर घरेलू इलाज करते रहते हैं। यही लापरवाही बीमारी को गंभीर रूप दे सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और उचित उपचार मलेरिया से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक रोक सकता है।

    मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह संक्रमण शरीर में प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं इसलिए कई बार मरीज सही समय पर जांच नहीं करा पाते। यदि किसी व्यक्ति को बार बार तेज बुखार आ रहा हो ठंड लग रही हो अत्यधिक पसीना आ रहा हो सिर और शरीर में तेज दर्द हो या लगातार कमजोरी महसूस हो रही हो तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि बुखार 24 से 48 घंटे के भीतर ठीक नहीं हो रहा है या बुखार की दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है तो मलेरिया की जांच कराना जरूरी हो जाता है। खासकर ऐसे लोग जो मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं या हाल ही में ऐसे स्थानों की यात्रा करके लौटे हैं उन्हें किसी भी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए।

    समय पर जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ मामलों में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम नामक परजीवी से होने वाला मलेरिया बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इलाज में देरी होने पर संक्रमण दिमाग किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। गंभीर एनीमिया सांस लेने में परेशानी और मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियां भी विकसित हो सकती हैं। इसलिए बिना जांच के स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर ही उपचार शुरू करना चाहिए।

    मलेरिया की पुष्टि के लिए कई तरह की जांच उपलब्ध हैं। सबसे सामान्य जांच माइक्रोस्कोपी है जिसमें रक्त की स्लाइड के माध्यम से परजीवी की पहचान की जाती है। जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती वहां रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट यानी आरडीटी का उपयोग किया जाता है जो कम समय में परिणाम दे देता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में क्वांटिटेटिव बफी कोट टेस्ट और पीसीआर जांच भी कराई जाती है जो संक्रमण की अधिक सटीक पहचान करने में मदद करती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच होने से मरीज को सही दवा जल्दी मिल जाती है और बीमारी के गंभीर रूप लेने की संभावना काफी कम हो जाती है। साथ ही बिना जरूरत एंटीबायोटिक या मलेरिया की दवा लेने से भी बचा जा सकता है जिससे दवा प्रतिरोध जैसी समस्याएं नहीं बढ़तीं।

    मलेरिया से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले और टंकियों की नियमित सफाई करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। यदि परिवार में किसी को लगातार बुखार आ रहा हो तो घरेलू इलाज में समय गंवाने के बजाय तुरंत जांच कराना ही सबसे सुरक्षित कदम है।