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  • मुरैना में चौथी मंजिल से कूदी महिला, पति की समझाइश और बच्चे की पुकार भी नहीं रोक सकी, गंभीर हालत में दिल्ली रेफर

    मुरैना में चौथी मंजिल से कूदी महिला, पति की समझाइश और बच्चे की पुकार भी नहीं रोक सकी, गंभीर हालत में दिल्ली रेफर

    मध्य प्रदेश: के मुरैना शहर में सोमवार तड़के एक महिला द्वारा चौथी मंजिल से छलांग लगाने का मामला सामने आया है। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के नैनागढ़ रोड स्थित एक मकान में सुबह करीब चार बजे हुई। महिला को रोकने के लिए उसके पति, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्यों ने काफी कोशिश की, लेकिन वे उसे समझाने में सफल नहीं हो सके। चौथी मंजिल से गिरने के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक होने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    छत पर पहुंचकर रेलिंग के पास खड़ी हुई महिला

    जानकारी के अनुसार, सोमवार तड़के महिला मकान की चौथी मंजिल पर पहुंच गई और रेलिंग के पास से नीचे कूदने की कोशिश करने लगी। यह देखकर नीचे मौजूद परिजनों ने उसे रोकने का प्रयास किया। पति लगातार उसे समझाकर नीचे उतरने के लिए कहता रहा। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उसे शांत करने और ऐसा कदम नहीं उठाने की अपील की।

    इस दौरान महिला का बच्चा उसे लगातार ‘मम्मी-मम्मी’ कहकर पुकारता रहा। बच्चे की आवाज और पति की समझाइश के बावजूद महिला ने छलांग लगा दी। घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वे उसे बचा नहीं सके।

    मोहल्ले के लोगों ने भी समझाने की कोशिश की

    महिला के छत पर होने और परिजनों की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी महिला को समझाने और नीचे आने के लिए मनाने का प्रयास किया। काफी कोशिशों के बाद भी महिला नहीं मानी और चौथी मंजिल से नीचे कूद गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    महिला के गिरने से गंभीर रूप से घायल होने के बाद परिजन उसे तत्काल कार से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में उसका उपचार जारी है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

    घटना का वीडियो आया सामने

    इस घटना के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में महिला को रोकने के लिए की जा रही कोशिशों और बच्चे की आवाज सुनाई देने की बात सामने आई है। घटना से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। हालांकि, वीडियो से महिला के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं होती।

    महिला ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी वजह फिलहाल सामने नहीं आई है। किन परिस्थितियों में वह चौथी मंजिल पर पहुंची और छलांग लगाने का फैसला किया, यह अभी स्पष्ट नहीं है। घटना के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल सबसे अहम बात महिला की गंभीर हालत और उसका इलाज है। उपलब्ध जानकारी में महिला की पहचान, उसकी उम्र और घटना के पीछे की परिस्थितियों से जुड़ा विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

  • मुरैना में 1500 करोड़ की ग्लास फैक्ट्री से रोजगार की उम्मीद, 2000 युवाओं को मिल सकता है काम, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा

    मुरैना में 1500 करोड़ की ग्लास फैक्ट्री से रोजगार की उम्मीद, 2000 युवाओं को मिल सकता है काम, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा

    मध्य प्रदेश। के मुरैना जिले में औद्योगिक निवेश और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश से ग्लास फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। इस परियोजना से लगभग 2000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना के दौरे के दौरान विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    ग्लास फैक्ट्री को जिले में निवेश और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, इससे 2000 लोगों को रोजगार मिलने की बात फिलहाल एक संभावना है। वास्तविक रोजगार के अवसर परियोजना की प्रगति और संचालन से जुड़ी परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। सरकार का जोर इस बात पर है कि जिले में उद्योगों का विस्तार होने के साथ स्थानीय युवाओं को भी काम के अवसर मिलें।

    मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और संबंधित अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में जिले में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर जोर दिया। जानकारी के अनुसार, जिले में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित की गई है। इनमें से कुछ उद्योगों ने निर्धारित समय के अनुसार निर्माण कार्य पूरा कर उत्पादन भी शुरू कर दिया है। सरकार का उद्देश्य नए निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।

    स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की योजना पर भी जोर दिया गया। इसके तहत उद्यमियों और अधिकारियों को पहले से यह आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले समय में उद्योगों को कितने कर्मचारियों की जरूरत होगी और उनके पास किस तरह का कौशल होना चाहिए। इस जानकारी के आधार पर युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। इसके अलावा चंबल एक्सप्रेसवे के आसपास आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की पहल पर भी चर्चा हुई। इस योजना के माध्यम से ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में उद्योग तथा कारोबार से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की संभावना है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मुरैना के लिए कई परियोजनाओं का उल्लेख किया गया। जिले में 75 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक कॉलेज बनाने की तैयारी है। इसके साथ निजी क्षेत्र में स्थापित नए मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण भी किया गया। इन परियोजनाओं का संबंध जिले में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से है।

    खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मुरैना में फूड पार्क विकसित करने की जरूरत बताई। इसका उद्देश्य कृषि उपज से खाद्य उत्पाद तैयार करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को गति देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी एनडीडीबी की मदद से प्रयास किए जा रहे हैं।

    खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार राशि की भी घोषणा की गई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दो-दो लाख रुपये देने की बात कही गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए एक-एक लाख रुपये की राशि घोषित की गई। राज्य स्तर के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

    दौरे के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की समीक्षा भी की गई। जहां आवश्यक समझा गया, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कलेक्टरों से विधानसभा क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करने को भी कहा गया। इसके अलावा घड़ियाल अभयारण्य सहित जिले की पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा हुई। मेडिकल टूरिज्म, वेलनेस सेंटर और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

  • मुरैना में ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और सवारी की मौत

    मुरैना में ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और सवारी की मौत

    मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बानमौर चौराहे के पास गुरुवार को ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और उसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। पीछे से आए तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर लगने से ई-रिक्शा आगे चल रहे ट्रक से जा भिड़ा। हादसे के बाद टक्कर मारने वाला चालक अपना ट्रक छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक जब्त कर चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, हादसा गुरुवार सुबह बानमौर थाना क्षेत्र में हुआ। गंगाराम पुरा निवासी भूरा श्रीवास ई-रिक्शा लेकर जा रहा था। उसके साथ रिश्तेदार गिर्राज श्रीवास भी सवार था। दोनों का ई-रिक्शा जब आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बानमौर नगर के मुख्य चौराहे पर पहुंचा, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसे टक्कर मार दी।

    टक्कर के कारण ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से जा भिड़ा। इसी दौरान पीछे से टक्कर मारने वाले ट्रक ने ई-रिक्शा को कुचल दिया। हादसे में चालक भूरा श्रीवास और सवारी गिर्राज श्रीवास की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    दुर्घटना के बाद बानमौर चौराहे पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रक चालक वाहन को बीच रास्ते में छोड़कर मौके से भाग निकला। घटना की सूचना मिलने पर बानमौर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए नूराबाद चिकित्सालय भेजे।

    पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर थाना परिसर में सुरक्षित रखवा दिया है। फरार चालक की तलाश की जा रही है। हादसे की जानकारी मिलने पर मृतकों के परिजन भी घटनास्थल पर पहुंच गए। दुर्घटना के कारण मुरैना से ग्वालियर की ओर जाने वाले मार्ग पर कुछ देर तक यातायात बाधित रहा।

  • मुरैना में जन्माष्टमी पर मातम: मंदिर से लौट रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने रौंदा, सास-बहू सहित एक अन्य की मौत

    मुरैना में जन्माष्टमी पर मातम: मंदिर से लौट रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने रौंदा, सास-बहू सहित एक अन्य की मौत


    मुरैना। जन्माष्टमी की खुशी मातम में बदल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर शनिवार तडक़े तेज रफ्तार कंटेनर ने तीन महिलाओं को कुचल दिया। तीनों महिलाएं घिरोना हनुमान मंदिर में श्रीकृष्ण जन्म के दर्शन कर घर लौट रही थीं। हादसे में तीनों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार हादसा तडक़े करीब 4 बजे का है। हरफूल का पुरा गांव की रहने वाली महिलाएं रात में घिरोना हनुमान मंदिर में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। दर्शन के बाद तीनों पैदल ही हाईवे किनारे से अपने घर लौट रही थीं। तभी दिल्ली की ओर जा रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सास-बहू गंभीर रूप से घायल हो गईं। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
    सिविल लाइन थाना पुलिस ने घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
    इन महिलाओं की हुई मौत –
    मृतकों की पहचान कमला कुशवाहा पत्नी फूल सिंह (50), कमला कुशवाहा पत्नी बालकिशन (50) और पूनम कुशवाहा पत्नी धर्मवीर (28) के रूप में हुई है। तीनों हरफूल का पुरा, थाना सिविल लाइन की निवासी थीं।
    बताया जा रहा है कि पूनम अपनी दो सास के साथ मंदिर गई थी। हादसे के बाद कंटेनर चालक नियंत्रण खो बैठा और सडक़ किनारे बनी कुछ दुकानों में जा घुसा। इससे दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
    ग्रामीणों ने कंटेनर को घेर लिया और चालक को पकडक़र पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कंटेनर को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है।
    तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। गांव में एक साथ तीन अर्थियां उठने से पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
    सरपंच राजपाल सिंह कुशवाहा ने बताया कि तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से 3 महिलाओं की मौत हुई है। जिसमें सास-बहु है। यह बहुत ही दर्दनाक हादसा है। ग्रामीणों ने चालक को पकड़ लिया है। पुलिस को चाहिए कि वाहनों की रफ्तार को कंट्रोल मे करवाएं।
    नगर पुलिस अधीक्षक दीपाल चंदोरिया ने बताया कि थाना सिविल लाइन मे ट्रक की चपेट मे आने से तीन महिलाओं की मौत हो गई है। एक की मौके पर मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और चालक को भी पकड़ लिया है। मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
  • मुरैना में खाद संकट गहराया, टोकन व्यवस्था के बीच घंटों लाइन में इंतजार को मजबूर किसान

    मुरैना में खाद संकट गहराया, टोकन व्यवस्था के बीच घंटों लाइन में इंतजार को मजबूर किसान

    मध्य प्रदेश। के मुरैना जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। गल्ला मंडी स्थित वितरण केंद्र पर बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन सीमित उपलब्धता और टोकन प्रणाली के कारण उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

    किसानों का कहना है कि उनकी फसल खेतों में तैयार खड़ी है और समय पर खाद नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उनका आरोप है कि खाद प्राप्त करने के लिए पहले पंजीकरण कराना पड़ता है, उसके बाद टोकन मिलने का इंतजार करना होता है और निर्धारित तिथि पर भी घंटों लंबी कतार में खड़े रहने के बावजूद कई बार खाद नहीं मिल पाती। इस पूरी प्रक्रिया ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें अपने गांव से काफी दूर स्थित गोदामों के लिए टोकन आवंटित किए जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और आर्थिक दोनों तरह का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। कई किसान लगातार कई दिनों तक वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

    वितरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों का कहना है कि कई घंटे इंतजार करने के बाद भी सभी को खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे खेती के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक उर्वरक समय पर नहीं मिलने की चिंता लगातार बढ़ रही है। किसानों का मानना है कि वितरण व्यवस्था में सुधार किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।

    प्रदेश सरकार समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होने का दावा करती रही है, लेकिन मुरैना के वितरण केंद्रों पर दिखाई दे रही स्थिति अलग तस्वीर पेश कर रही है। बड़ी संख्या में किसानों की भीड़, सीमित वितरण और लंबा इंतजार यह संकेत दे रहे हैं कि जमीनी स्तर पर व्यवस्था अभी भी पूरी तरह सुचारु नहीं हो सकी है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ेगा।

    कुछ किसानों ने खाद की कालाबाजारी और वितरण में अनियमितताओं की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन को वितरण प्रक्रिया की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि सभी पात्र किसानों को निर्धारित समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही ई-टोकन प्रणाली को अधिक प्रभावी और सरल बनाने की भी मांग उठ रही है।

    हाल के समय में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों का असंतोष सामने आता रहा है। इससे पहले भी उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन देखने को मिले थे। किसानों का कहना है कि खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में यदि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई तो इसका व्यापक असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

    फिलहाल मुरैना में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने की है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा और टोकन प्रणाली में आवश्यक सुधार कर उनकी परेशानियों को कम किया जाएगा।

  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।

  • कूनो से निकलकर मुरैना के गांव तक पहुंचा चीता, बकरियों के शिकार की आशंका से ग्रामीणों में बढ़ी चिं

    कूनो से निकलकर मुरैना के गांव तक पहुंचा चीता, बकरियों के शिकार की आशंका से ग्रामीणों में बढ़ी चिं

     मध्य प्रदेश । कूनो के कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर एक चीते के मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र स्थित जादेरू गांव के आसपास पहुंचने की सूचना ने स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। गांव और आसपास के इलाकों में चीते की मौजूदगी की खबर फैलते ही लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। वन विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है और ग्रामीणों को आवश्यक सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं।

    स्थानीय लोगों के अनुसार चीते को खेतों, झाड़ियों और जंगल से लगे क्षेत्रों में घूमते हुए देखा गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान उसने गांव की दो बकरियों का शिकार भी किया है। हालांकि वन विभाग ने कहा है कि इन दावों की जांच की जा रही है और तथ्यात्मक पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से संबंधित सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।

    चीते की मौजूदगी की सूचना मिलते ही कूनो नेशनल पार्क की विशेष ट्रैकिंग टीम को क्षेत्र में तैनात कर दिया गया। विशेषज्ञों और वनकर्मियों की यह टीम आधुनिक ट्रैकिंग तकनीकों की सहायता से चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार उसका मूवमेंट रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह सुरक्षित रहे और किसी प्रकार का मानव-वन्यजीव संघर्ष पैदा न हो।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी चीते का पार्क की निर्धारित सीमा से बाहर निकलना असामान्य नहीं माना जाता। जब किसी क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो वे नए इलाकों की तलाश में लंबी दूरी तय कर सकते हैं। ऐसे कई मामलों में जानवर कुछ समय तक बाहरी क्षेत्रों में घूमने के बाद पुनः अपने मूल आवास की ओर लौट जाते हैं। इसी कारण वन विभाग स्थिति को प्राकृतिक व्यवहार के रूप में देख रहा है, हालांकि सुरक्षा के लिहाज से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।

    घटना के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों के लिए विशेष सलाह जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे किसी भी स्थिति में चीते के नजदीक जाने या उसकी तस्वीर लेने के लिए पीछा करने का प्रयास न करें। बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बचने और सुबह-शाम के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को अपने मवेशियों और पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में पालतू पशुओं के शिकार की पुष्टि होती है तो प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है।

    क्षेत्र में वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और गांवों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि चीते की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की सुरक्षा भी पूरी तरह सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूकता, सतर्कता और वैज्ञानिक प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और वन विभाग स्थिति को नियंत्रित एवं सामान्य बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सके।

  • खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    मध्य प्रदेश । मुरैना जिले में चंबल की प्रतिबंधित रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून और प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-44 पर नहर के समीप अवैध रेत के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने उतरी परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त चेकिंग टीम पर हमला करने और उन्हें वाहन से कुचलने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस जानलेवा हमले के दौरान मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बेहद बाल-बाल बचे।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले संदिग्ध और ओवरलोड वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम को अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली आती हुई दिखाई दी। आरटीओ के कर्मचारियों ने जब नियमानुसार उस वाहन को रुकने का इशारा किया, तो ट्रैक्टर चालक ने वाहन की रफ्तार धीमी करने के बजाय उसे सीधे चेकिंग कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मोड़ दिया और उन्हें कुचलने का प्रयास किया।

    वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और आरटीओ अमले ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। शासकीय टीम को निशाना बनाने के तुरंत बाद आरोपी चालक बेहद लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली को दौड़ाते हुए मौके से फरार हो गया। इस अप्रत्याशित हमले से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में सघन नाकाबंदी लागू की गई।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के संबंध में सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और अवैध खनिज परिवहन की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात माफियाओं के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा हाईवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावर ट्रैक्टर और उसके चालक की सटीक पहचान की जा सके।

    मुरैना और चंबल संभाग में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक टीमों पर खनन माफियाओं द्वारा हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और राजस्व टीम को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और दावा किया है कि सरकारी अमले पर हमला करने वाले तत्वों को जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल

    मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो युवकों ने खुद पर चली गोलियों को गैंगवार और हमले का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच और CCTV फुटेज ने पूरी सच्चाई उजागर कर दी।

    घटना मंगलवार को गर्ल्स स्कूल रोड इलाके में हुई, जब अचानक गोलियों की आवाज सुनकर इलाके में हड़कंप मच गया। स्कूटर पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए और दोनों को तीन-तीन गोलियां लगीं। शुरुआत में मामला किसी आपसी रंजिश या गैंगवार जैसा दिखाई दिया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कहानी पूरी तरह बदल गई।

    पुलिस के अनुसार घायल युवकों की पहचान गोपालपुरा निवासी राहुल सिकरवार और पुराना चुंगी नाका निवासी निखिल तिवारी के रूप में हुई है। दोनों एक स्कूटर पर सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे बैठे युवक ने अपनी अवैध पिस्टल निकाली और चलते वाहन पर ही उसे लोड करने लगा।

    जांच में सामने आया कि जैसे ही स्कूटर एक स्पीड ब्रेकर से गुजरा, जोरदार झटका लगने से युवक का संतुलन बिगड़ गया और पिस्टल से लगातार कई राउंड फायर हो गए। अचानक हुई फायरिंग में दोनों युवक खुद ही गोलियों की चपेट में आ गए।

    पुलिस ने जब सड़क किनारे लगे CCTV कैमरों की फुटेज देखी तो पूरी घटना साफ हो गई। फुटेज में स्कूटर के झटके के बाद गोली चलने और दोनों युवकों के घायल होने की घटना कैद हो गई। इसके बाद पुलिस को समझ आ गया कि यह किसी गैंगवार का मामला नहीं बल्कि लापरवाही और अवैध हथियार के इस्तेमाल का मामला है।

    इस घटना ने एक बार फिर चंबल क्षेत्र में अवैध हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल और युवाओं में हथियारों के क्रेज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस्तेमाल की गई पिस्टल प्रतिबंधित श्रेणी की और बेहद खतरनाक मानी जा रही है। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जारी है। उनकी हालत स्थिर होने के बाद पुलिस आधिकारिक बयान दर्ज करेगी। इसके बाद आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह

    MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह


    मुरैना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना (Morena) जिले के खड़ियाहार गांव (Khadiyahar village) में भक्ति की अनोखी मिसाल देखने को मिली. 42 साल की रेखा तोमर (Rekha Tomar) ने भगवान ठाकुर जी (Bhagwan Thakur ji) को अपना दूल्हा मानकर वैदिक रीति से विवाह रचा लिया. पूरे गांव में भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारे गूंजे. इस आयोजन को ग्रामीणों ने आस्था और समर्पण का दुर्लभ उदाहरण बताया।

    मुरैना जिले के एक छोटे से गांव खड़ियाहार में 42 वर्षीय रेखा तोमर ने भगवान श्री ठाकुर जी को अपना जीवनसाथी मानते हुए पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह रचा लिया. यह घटना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस आस्था की अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को पूरी तरह ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है. गांव में हुए इस आयोजन ने हर किसी को चौंकाया भी और भावुक भी किया.

    इस अनोखे विवाह की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है. ग्रामीणों के मुताबिक, यह आयोजन पूरी तरह पारंपरिक हिंदू रीति से किया गया, जिसमें विवाह की हर रस्म को विधिवत निभाया गया. रेखा तोमर लंबे समय से ठाकुर जी की भक्ति में लीन थीं और उन्होंने पहले ही यह संकल्प लिया था कि वह अपना जीवन प्रभु को समर्पित करेंगी. यही संकल्प इस विवाह का आधार बना. भक्ति के इस रूप ने एक बार फिर यह साबित किया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती और यह व्यक्ति को अलग पहचान देती है.

    वैदिक रीति से संपन्न हुआ विवाह

    ग्राम खड़ियाहार के प्राचीन देवालय में यह विवाह संपन्न हुआ. मंदिर के पुजारी रामदुलारे बाबा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक रस्में पूरी कराईं. लग्न पत्रिका का वाचन हुआ. पूजन और पैर पूजाई जैसी परंपराएं निभाई गईं. पूरा आयोजन एक पारंपरिक शादी की तरह ही आयोजित किया गया, जिसमें हर विधि का पालन किया गया.


    भाई ने किया कन्यादान, भावुक हुआ माहौल

    इस विवाह का सबसे भावुक पल तब आया, जब रेखा तोमर के भाई सुरेंद्र ने उनका कन्यादान किया. परिवार के लिए यह क्षण आस्था और भावना का संगम था. ग्रामीणों ने भी इस दृश्य को श्रद्धा के साथ देखा. यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक अलग अनुभव लेकर आया.


    भजन-कीर्तन से गूंजा पूरा गांव

    विवाह के दौरान पूरे गांव में भक्ति का माहौल रहा. भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन में शामिल हुए. लोगों ने इसे आस्था और समर्पण की अनोखी मिसाल बताया. गांव के कई प्रमुख लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने इसे दुर्लभ आयोजन माना.


    कौन हैं रेखा तोमर

    रेखा तोमर, पिता लाखन सिंह, लंबे समय से धार्मिक प्रवृत्ति की रही हैं. ग्रामीणों के अनुसार, वह अधिकतर समय पूजा-पाठ और भजन में व्यतीत करती थीं. उनका यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि वर्षों की भक्ति और साधना का परिणाम था. उन्होंने सामाजिक जीवन से अलग हटकर आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी.


    ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं

    धार्मिक मान्यताओं में ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं है. इतिहास और भक्ति परंपरा में कई उदाहरण मिलते हैं, जहां भक्त ने ईश्वर को अपना सर्वस्व मान लिया. ऐसे आयोजन समाज में आस्था और विश्वास को मजबूत करते हैं. हालांकि, यह व्यक्तिगत आस्था का विषय होता है और हर व्यक्ति इसे अपने तरीके से समझता है।