Tag: MP Government

  • मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता 60% हुआ, जनवरी से मिलेगा फायदा और तीन किस्तों में आएगा 9 महीने का एरियर

    मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता 60% हुआ, जनवरी से मिलेगा फायदा और तीन किस्तों में आएगा 9 महीने का एरियर


    भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है। केंद्र सरकार के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने भी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनर्स की महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारी अधिकारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा। वहीं जनवरी से सितंबर तक के 9 महीने के एरियर का भुगतान तीन बराबर मासिक किस्तों में किया जाएगा। कर्मचारियों को बढ़े हुए भत्ते का नकद लाभ अक्टूबर के वेतन के साथ नवंबर में मिलने लगेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने के वेतन का भुगतान नवंबर में किया जाएगा और इसी वेतन के साथ बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि भी नकद दी जाएगी। सरकार ने पेंशनर्स के लिए भी महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। पेंशनर्स के लिए यह बढ़ोतरी जुलाई 2026 से लागू होगी। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    इस बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं पेंशनर्स की महंगाई राहत में भी 2 प्रतिशत का इजाफा होगा। हालांकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में मध्यप्रदेश के कर्मचारी अभी भी पीछे रहेंगे। केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 63 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बढ़ोतरी की मांग तेज हो गई थी। राज्य सरकार के नए फैसले के बावजूद प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी केंद्रीय कर्मचारियों से 3 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता प्राप्त करेंगे।

    महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को लेकर पेंशनर्स संगठनों की ओर से भी लगातार आवाज उठाई जा रही थी। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर लंबित महंगाई राहत जारी करने की मांग की थी। एसोसिएशन ने 1 जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत और 1 जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत महंगाई राहत का भुगतान जल्द करने की मांग रखी थी। संगठन के मुताबिक कुल 5 प्रतिशत महंगाई राहत लंबित थी।

    एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि महंगाई राहत पेंशनर्स के लिए बढ़ती कीमतों के असर को कम करने का महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक लगातार बढ़ते खर्च के बीच पेंशनर्स को मिलने वाली राहत उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।

    सरकार के ताजा फैसले से कर्मचारियों और पेंशनर्स को कुछ आर्थिक राहत जरूर मिलेगी। अब कर्मचारियों की नजर एरियर की तीन किस्तों के भुगतान और बढ़े हुए भत्ते के वेतन में शामिल होने पर रहेगी। वहीं केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते के बीच बना अंतर भी कर्मचारियों के लिए आगे मांग का विषय बना रह सकता है।

  • अनूपपुर को मिलेगी आधुनिक जिला अदालत की सौगात, ₹44.85 करोड़ स्वीकृत, हाईकोर्ट ने निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश

    अनूपपुर को मिलेगी आधुनिक जिला अदालत की सौगात, ₹44.85 करोड़ स्वीकृत, हाईकोर्ट ने निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में लंबे समय से किराए के भवन में संचालित हो रही जिला अदालत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने जिला अदालत के नए भवन के निर्माण के लिए 44.85 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दे दी है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने स्वीकृति की जानकारी मिलने के बाद भवन निर्माण का काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे जिला अदालत के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
    अनूपपुर जिला अदालत के भवन निर्माण का मामला गुरुवार को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ के समक्ष मामले से जुड़ी जानकारी रखी गई। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने भवन निर्माण के लिए 44.85 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दे दी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने के निर्देश जारी किए। लंबे समय से किराए के भवन में संचालित हो रही अदालत के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    इस मामले में शहडोल निवासी अधिवक्ता वासुदेव चटर्जी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि अनूपपुर की जिला अदालत लंबे समय से किराए के भवन में चल रही है। अदालत के लिए स्थायी भवन की आवश्यकता को देखते हुए यह मामला हाईकोर्ट के सामने उठाया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता को मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से चर्चा करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद राज्य सरकार की ओर से अदालत को वित्तीय स्वीकृति की जानकारी दी गई। सरकार के इस कदम के बाद हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
    सुनवाई के दौरान प्रदेश की अन्य जिला अदालतों के भवन निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। खंडपीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश में जिला अदालतों के लंबित निर्माण कार्यों से संबंधित याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष प्रस्तुत की जाएं। इन निर्माण कार्यों से जुड़ी याचिकाओं पर पहले से ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई चल रही है। ऐसे में संबंधित याचिकाओं को उसी बेंच के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया है ताकि मामलों की सुनवाई निर्धारित व्यवस्था के तहत हो सके।
    अनूपपुर जिला अदालत के भवन के लिए वित्तीय मंजूरी मिलने और हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब निर्माण कार्य शुरू होने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। स्थायी भवन उपलब्ध होने से अदालत के संचालन के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने की वास्तविक तारीख और परियोजना पूरी होने की समयसीमा को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार को जल्द निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए हैं और जिला अदालतों के लंबित भवन निर्माण से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट कर दी है।

  • MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस

    MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की रजिस्ट्री को लेकर सरकार (Government) और पटवारियों (Patwaris) के बीच टकराव बढ़ गया है। सरकार ने कार्रवाई तेज करते हुए देवास और आगर-मालवा (Dewas and Agar-Malwa) में 27 प्रोबेशनरी पटवारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, अलग-अलग जिलों में कई पटवारियों को सेवा समाप्ति से पहले कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में पटवारियों को नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई है। गुना में चार पटवारियों को सेवा समाप्ति के नोटिस दिए गए हैं, जबकि पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष समेत चार पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसको लेकर अब पटवारी संघ ने भी नोटिस वापस नहीं लेने पर काम बंद करने की चेतावनी दी हैं।


    रजिस्ट्री में अड़ंगेबाजी का आरोप

    सरकार की कार्रवाई को स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री के काम में कथित देरी और अड़ंगेबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार की ओर से हालांकि कार्रवाई की वजह काम में लापरवाही और अनियमितता बताई जा रही है। कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को प्रदेशभर में पटवारियों ने जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर नोटिस और कार्रवाई वापस लेने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं रुकी तो ऑनलाइन राजस्व कार्य से दूरी बनाकर आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।


    नामांतरण के लिए 8 हजार मांगने वाले पटवारी पर मुकदमे की मंजूरी

    इधर, सीहोर जिले की जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ भी अभियोजन चलाने की मंजूरी दी गई है। उन पर भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त में शिकायत के अनुसार पटवारी ने नामांतरण के लिए 10 हजार रुपए की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के दौरान हुई बातचीत डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज की गई, जिसमें 8 हजार रुपए में बात तय होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पंच साक्षियों की मौजूदगी में रिकॉर्डिंग का पंचनामा तैयार कर ट्रैप की कार्रवाई की गई। एफएसएल जांच में रिकॉर्ड की गई आवाज पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर की होने की पुष्टि हुई। इन तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. ने अभियोजन की मंजूरी दी है।


    भोपाल में भी रिश्वत के आरोपी पटवारी पर कार्रवाई

    भोपाल में पटवारी मंगलेश खंडेलवाल के खिलाफ भी अभियोजन की स्वीकृति जारी की गई है। उन पर कोलार क्षेत्र में मकान के फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू कराने के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। एसडीएम के प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद भोपाल कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने पटवारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी है।

  • जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील

    जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार का नया बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 कनाडा से भारत पहुंचने की तैयारी में है। सरकार ने इसे मुख्यमंत्री राज्यपाल और दूसरे वीआईपी के इस्तेमाल के लिए खरीदा है। लेकिन करीब 350 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह विमान आने के बाद तुरंत नियमित उड़ान भरने की स्थिति में नहीं होगा। इसे भारत में जरूरी औपचारिकताओं से गुजरना होगा और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित पायलटों से लेकर हैंगर और रखरखाव तक की व्यवस्था करनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि यह जेट प्रदेश के हर एयरपोर्ट या हवाई पट्टी पर उतर भी नहीं सकेगा।

    सरकार के अपने विमान की जरूरत उस समय ज्यादा महसूस हुई जब 6 मई 2021 को राज्य का बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी ग्वालियर एयरबेस पर क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया था। यह विमान करीब 65 करोड़ रुपये में खरीदा गया था लेकिन बीमा नहीं होने के कारण सरकार को नुकसान की भरपाई नहीं मिल सकी। अब इसे करीब 7 करोड़ रुपये की रिजर्व कीमत पर बेचने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद से मुख्यमंत्री और दूसरे वीआईपी के लिए सरकार को निजी विमान किराए पर लेने पड़ रहे हैं।

    विधानसभा में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर करीब 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025 में नवंबर तक ही यह खर्च 90 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया था। विमानन विभाग का तर्क है कि लगातार बढ़ रहे किराये के खर्च को कम करने के लिए अपना जेट खरीदना जरूरी है। हालांकि जेट खरीदने के बाद भी सरकार को इसके संचालन पर हर साल बड़ी रकम खर्च करनी होगी।

    चैलेंजर 3500 की खरीद को लेकर अलग अलग समय पर अलग कीमतें सामने आई हैं। वर्ष 2022 में सरकार करीब 120 करोड़ रुपये के जेट पर विचार कर रही थी। बाद में कीमत और डिलीवरी से जुड़े कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मार्च 2024 में नए टेंडर में बॉम्बार्डियर और एम्ब्रेयर ने हिस्सा लिया। जुलाई 2024 में कैबिनेट ने बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 खरीदने की मंजूरी दी और उस समय कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई। अब टैक्स ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्च जोड़ने के बाद कुल अनुमान करीब 350 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

    सिर्फ खरीद कीमत ही पूरी तस्वीर नहीं है। विमान को चलाने में क्रू हैंगर बीमा मेंटेनेंस और ईंधन समेत कई खर्च होते हैं। अनुमान के मुताबिक 450 घंटे सालाना उड़ान पर इसका कुल खर्च करीब 30 से 33 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी प्रति उड़ान घंटे लागत किराए के विमान की तुलना में ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि यदि किराए के विमान पर लगने वाला स्टैंडिंग चार्ज पूरी तरह समाप्त हो जाता है तो सरकार के कुल खर्च में कुछ राहत मिल सकती है।

    जेट के साथ सरकार ने एयरबस ACH160 हेलिकॉप्टर भी खरीदा है। हेलिकॉप्टर की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई गई थी जबकि टैक्स और अन्य शुल्क जोड़ने पर खर्च करीब 225 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह जेट और हेलिकॉप्टर के बाद हवाई ढांचे को तैयार करने का खर्च भी सरकार के सामने है।

    चैलेंजर 3500 को चलाने के लिए सरकार को पायलटों की ट्रेनिंग और जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विदेश में प्रशिक्षण लेने गए प्रदेश के दो पायलट पहली कोशिश में टेस्ट पास नहीं कर सके। फिलहाल उन्हें को पायलट का प्रमाणपत्र मिला है। इसलिए शुरुआत में बॉम्बार्डियर का एक प्रशिक्षित पायलट विमान उड़ाएगा। सरकारी पायलटों को उसके साथ निर्धारित उड़ान अनुभव पूरा करने के बाद स्वतंत्र रूप से जेट उड़ाने की अनुमति मिल सकेगी।

    सबसे बड़ी चुनौती रनवे को लेकर है। विभाग के आकलन के अनुसार जेट के लिए कम से कम करीब 1800 मीटर और बेहतर संचालन के लिए लगभग 2100 मीटर लंबा रनवे जरूरी माना जा रहा है। प्रदेश के सभी एयरपोर्ट और हवाई पट्टियां इस जरूरत को पूरा नहीं करतीं। मौजूदा आकलन के अनुसार करीब 10 स्थानों पर यह जेट उतर सकता है। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर खजुराहो रीवा और दतिया के एयरपोर्ट के अलावा मंदसौर सिवनी और मंडला की हवाई पट्टियां शामिल हैं।

    सरकार कई अन्य हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए जिलों से जमीन की जानकारी मांगी गई है। सरकारी जमीन मिलने पर एक पट्टी के विस्तार में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये जबकि निजी जमीन अधिग्रहण की स्थिति में 30 से 40 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर हवाई पट्टियों के विस्तार पर करीब 300 से 400 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

    ऐसे में जेट हेलिकॉप्टर और रनवे विस्तार को जोड़कर पूरी योजना का अनुमानित खर्च करीब 875 से 975 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें हेलिपैड नेटवर्क का खर्च शामिल नहीं है। इसलिए सरकार के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अपना जेट खरीदने से किराए का खर्च कितना बचेगा बल्कि यह भी है कि विमान को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए अगले कई वर्षों में कितना अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। अंतिम फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जेट का कितना नियमित इस्तेमाल करती है और मौजूदा किराये तथा स्टैंडिंग चार्ज में वास्तविक रूप से कितनी कमी आती है।

  • धान परिवहन में 43.03 करोड़ की कथित गड़बड़ी 28 जिलों तक पहुंचा मामला हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

    धान परिवहन में 43.03 करोड़ की कथित गड़बड़ी 28 जिलों तक पहुंचा मामला हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में धान के परिवहन और आपूर्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। जबलपुर में सामने आई कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचने का दावा किया गया है। याचिका में करीब 43.03 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के 28 जिलों से संबंधित जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट की एक प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए ताकि वह उसमें सामने आए तथ्यों का अध्ययन कर अपना पक्ष रख सकें। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

    यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धान के परिवहन और आपूर्ति की निगरानी के लिए पहले से GPS व्यवस्था के दिशा निर्देश मौजूद हैं। इसके बावजूद परिवहन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियां होने का आरोप लगाया गया है। याचिका में पूरे प्रदेश में मामले की जांच कराने की मांग की गई है।

    मामले की शुरुआत जबलपुर में जिला प्रशासन की कार्रवाई से हुई बताई गई है। उपलब्ध अदालती रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर प्रशासन की जांच में 43.03 करोड़ रुपए से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने का दावा किया गया था। इसके बाद FIR दर्ज होने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी अदालत के सामने रखी गई। याचिका में यह भी कहा गया कि गड़बड़ी केवल जबलपुर तक सीमित नहीं हो सकती है और दूसरे जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच जरूरी है।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जिन वाहनों के जरिए धान को निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जाना था उनकी निगरानी व्यवस्था का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हुआ। याचिका में दावा किया गया कि कुछ मामलों में धान निर्धारित स्थान तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही बेच दिए जाने की आशंका है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों से स्पष्ट होगी।

    याचिका में एथनोल के लिए आवंटित धान के परिवहन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजे जाने वाले धान को रास्ते में ही दूसरी जगह बेचने की कथित अनियमितता सामने आई। इसी आधार पर पूरे प्रदेश में जांच की मांग की गई है। पहले की सुनवाई में राज्य की ओर से कार्रवाई शुरू होने और FIR दर्ज होने की जानकारी भी अदालत को दी गई थी।

    धान की खरीद से लेकर मिलिंग और आपूर्ति तक की प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था होती है। इसमें रिलीज ऑर्डर परिवहन से जुड़े दस्तावेज और परिवहन वाहनों की जानकारी दर्ज करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। याचिका में आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के बावजूद कथित गड़बड़ियां हुईं। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को अलग अलग जिलों में हुई जांच और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को विस्तृत रिपोर्ट के रूप में अदालत के सामने रखना होगा।

    अदालत ने जांच रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। इससे याचिकाकर्ता पक्ष रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों का अध्ययन कर अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकेगा। अब 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और उसमें सामने आए तथ्यों पर आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

  • मध्यप्रदेश में बदले अफसरों के विभाग और पद, 16 IAS का ट्रांसफर, सागर से मंत्रालय तक हुआ बड़ा बदलाव

    मध्यप्रदेश में बदले अफसरों के विभाग और पद, 16 IAS का ट्रांसफर, सागर से मंत्रालय तक हुआ बड़ा बदलाव


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 सितंबर 2026 को 16 IAS अफसरों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। जारी आदेश के मुताबिक 11 अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है जबकि 5 IAS अधिकारियों को उनके मौजूदा पद पर बनाए रखते हुए अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस फेरबदल में सबसे अहम बदलाव सागर संभाग के आयुक्त पद पर हुआ है जहां दिलीप कुमार को नया संभागायुक्त बनाया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी अनिल सुचारी संभाल रहे थे जिन्हें अब मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है।

    दिलीप कुमार वर्ष 2008 बैच के IAS अधिकारी हैं और इससे पहले आयुक्त उद्योग तथा प्रबंध संचालक लघु उद्योग निगम भोपाल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें सागर संभाग का आयुक्त बनाया गया है। उनके सामने संभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के साथ विकास कार्यों और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी होगी। वहीं वर्ष 2006 बैच के IAS अधिकारी अनिल सुचारी को मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पद को सचिव मध्यप्रदेश शासन के समकक्ष घोषित किया गया है।

    तबादला सूची में अनुभा श्रीवास्तव की जिम्मेदारी भी बदली गई है। वर्ष 2009 बैच की IAS अधिकारी अनुभा श्रीवास्तव को प्रमुख राजस्व आयुक्त तथा आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर की जिम्मेदारी से हटाकर राजस्व विभाग मंत्रालय भोपाल में सचिव बनाया गया है। इसी बैच के सतेन्द्र सिंह को भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। वे पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के रूप में काम करेंगे। इसके साथ ही उन्हें अनुसूचित जाति कल्याण और अनुसूचित जाति विकास से जुड़े कई अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे गए हैं।

    नेहा मारव्या सिंह को अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है जबकि निधि निवेदिता को प्रमुख राजस्व आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। अनुराग वर्मा को राज्य नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं मयंक अग्रवाल को विकसित भारत रोजगार गारंटी आजीविका मिशन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। उन्हें समग्र नर्मदा मिशन के मिशन संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में भी बदलाव किया गया है। संदीप जीआर को विभाग में विकास आयुक्त सह आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। अवि प्रसाद को मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं नेहा जैन को स्मार्ट सिटी उज्जैन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है और उन्हें नगर निगम उज्जैन के अपर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

    इसके अलावा रघुराज एमआर तरुण राठी कुमार पुरुषोत्तम शीतला पटले और अनिशा श्रीवास्तव को उनके मौजूदा पदों पर बरकरार रखते हुए अलग अलग विभागों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से प्रदेश के राजस्व महिला एवं बाल विकास उद्योग श्रम आदिवासी कल्याण स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन से जुड़े विभागों में कामकाज की जिम्मेदारियां नए सिरे से तय हुई हैं।

  • MP सरकार को बड़ा झटका…. दिल्ली HC ने दिया वकील को 78 लाख का भुगतान करने का आदेश

    MP सरकार को बड़ा झटका…. दिल्ली HC ने दिया वकील को 78 लाख का भुगतान करने का आदेश


    नई दिल्ली।
    दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) को आदेश दिया कि वह वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी (Anoop George Chaudhari) को एक मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पेश होने के बदले 78 लाख 65 हजार रुपए और उस पर 9% सालाना की दर से ब्याज का भुगतान भी करे। उच्च न्यायालय ने राज्य के इस दावे को खारिज कर दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता असल में सिर्फ दो बार पेश हुए थे।

    जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल व अन्य (2020) मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के आदेश का हवाला दिया और वरिष्ठ अधिवक्ता की मौजूदगी को नोट किया। पीठ ने कहा कि कार्यवाही के रिकॉर्ड में दिख रही पेशी को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए थे। ऐसे में ना ही इसमें कोई शक रह जाता है और इस रिकॉर्ड के महत्व को कम करके भी नहीं आंका जा सकता।

    अदालत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में पेशी दर्ज करना कोई अनौपचारिक या सामान्य काम नहीं है। उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के आदेश IV नियम 1(बी) के तहत किसी पार्टी के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के अलावा कोई अन्य वकील किसी मामले में अदालत के सामने पेश नहीं हो सकता, बहस नहीं कर सकता। अदालत को संबोधित नहीं कर सकता, जब तक कि उसे ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ ने निर्देश न दिया हो या अदालत ने अनुमति न दी हो।

    पीठ ने कहा कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में किसी पक्षकार पर अपनी पेशी थोप नहीं सकता। उसकी पेशी केवल उस पार्टी के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के माध्यम से और उनके निर्देशों पर ही दर्ज की जा सकती है। पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता की पेशी राज्य के स्थाई वकील व राज्य के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के साथ चौदह तारीखों पर दर्ज की गई, इसलिए यह निष्कर्ष निकला कि ऐसी हर तारीख पर उनकी पेशी राज्य के ही अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा कराई गई।

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर CM मोहन यादव का बड़ा फोकस, 5,039 प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास के दिए निर्देश

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर CM मोहन यादव का बड़ा फोकस, 5,039 प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास के दिए निर्देश


    खजुराहो। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की वर्तमान प्रगति के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि विकास की इस बड़ी परियोजना में प्रभावित परिवारों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास की प्रक्रिया संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ पूरी की जाए और पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में सिंचाई के साथ पेयजल और ऊर्जा की उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। उन्होंने पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि परियोजना से प्रभावित गांवों में अधिकारी घर-घर जाकर परिवारों की समस्याओं और वास्तविक जरूरतों की जानकारी लें। खासकर जनजातीय परिवारों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनकर उनका समाधान करने पर जोर दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नए पुनर्वास स्थलों पर केवल मकान उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। वहां स्कूल आंगनवाड़ी केंद्र स्वास्थ्य सुविधाएं सामुदायिक भवन और दूसरी जरूरी मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की जानी चाहिए। सरकार का उद्देश्य है कि विस्थापित परिवारों को नए स्थान पर बेहतर जीवन और रोजगार के अवसर मिलें और वे विकास की मुख्यधारा से जुड़े रहें।

    बैठक में पन्ना की रूंझ-मझगांव परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए स्वीकृत अतिरिक्त राशि का भुगतान जल्द करने के निर्देश भी दिए गए। जिन लोगों के पास उम्र से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं उनके लिए मेडिकल परीक्षण के आधार पर आयु निर्धारण की व्यवस्था अपनाने को कहा गया ताकि मुआवजे और पुनर्वास लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    परियोजना की निगरानी को लेकर मुख्यमंत्री ने जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को नियमित मॉनिटरिंग और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर की परियोजना में लगातार निगरानी जरूरी है ताकि निर्माण और पुनर्वास से जुड़े काम अनावश्यक रूप से लंबित न हों। प्रभावित इलाकों में जन चौपाल और जागरूकता यात्राएं आयोजित करने पर भी जोर दिया गया ताकि ग्रामीणों को परियोजना के लाभों की जानकारी मिल सके और उनकी आशंकाओं का समाधान किया जा सके।

    केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश में करीब 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं 44 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा मिलने का अनुमान है। परियोजना के तहत 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रावधान भी बताया गया है। परियोजना का प्रत्यक्ष लाभ पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी सागर विदिशा रायसेन शिवपुरी और दतिया समेत कई जिलों के करीब 1,382 गांवों को मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना के कारण छतरपुर और पन्ना जिलों में कुल 5,039 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इनमें पन्ना के 1,321 और छतरपुर के 3,718 परिवार शामिल हैं। बताया गया कि सभी प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के विशेष पैकेज का विकल्प चुना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि इन परिवारों का पुनर्वास सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को सिर्फ पानी पहुंचाने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने पेयजल संकट कम होने ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है। बैठक में वन मंत्री दिलीप अहिरवार सांसद वीडी शर्मा समेत कई विधायक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रमुख सचिव जल संसाधन संदीप यादव ने परियोजना की प्रगति और अब तक हुए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।

  • 32 IAS अफसरों का फेरबदल, चर्चित नामों को मिली नई कमान; सृष्टि देशमुख रीवा तो अभिषेक चौधरी ग्वालियर पहुंचे

    32 IAS अफसरों का फेरबदल, चर्चित नामों को मिली नई कमान; सृष्टि देशमुख रीवा तो अभिषेक चौधरी ग्वालियर पहुंचे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार 21 अगस्त को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के 32 अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस प्रशासनिक बदलाव में जिला पंचायत CEO नगर निगम आयुक्त अपर कलेक्टर और SDM स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। लंबे समय से अलग अलग मैदानी पदों पर काम कर रहे कई अधिकारियों को अब नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे प्रदेश के कई जिलों और नगर निगमों में प्रशासनिक नेतृत्व का चेहरा बदल गया है।

    इस तबादला सूची में कुछ चर्चित IAS अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। 2019 बैच की IAS सृष्टि देशमुख गौड़ा को खंडवा के अपर कलेक्टर पद से हटाकर जिला पंचायत रीवा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। उनके सामने अब ग्रामीण विकास और पंचायत स्तर की योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। इसी फेरबदल में उनके पति IAS डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा को भी खंडवा से स्थानांतरित किया गया है। उन्हें जिला पंचायत खंडवा के CEO पद से हटाकर नगर निगम सतना का आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के CEO का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

    ग्वालियर नगर निगम में भी बड़ा बदलाव हुआ है। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को अब ग्वालियर से हटाकर जिला पंचायत सिंगरौली का CEO बनाया गया है। वहीं 2018 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक चौधरी को जिला पंचायत धार के CEO पद से स्थानांतरित कर ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। इस बदलाव के बाद ग्वालियर नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में नया नेतृत्व देखने को मिलेगा। ग्वालियर में नगर निगम से जुड़ी विकास योजनाओं शहर की व्यवस्थाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी अब अभिषेक चौधरी के पास होगी।

    इंदौर नगर निगम को भी नया आयुक्त मिला है। 2022 बैच के IAS अधिकारी विशाल धाकड़ को कुक्षी में SDM के पद से स्थानांतरित कर नगर पालिक निगम इंदौर का आयुक्त बनाया गया है। वहीं अक्षय कुमार तेम्रवाल को जिला पंचायत दतिया के CEO पद से हटाकर भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। इन बदलावों से प्रदेश के प्रमुख नगरीय निकायों में भी प्रशासनिक स्तर पर नई टीम सामने आएगी।

    जिला पंचायत CEO स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। जगदीश कुमार गोमे को सिंगरौली से हटाकर सागर जिला पंचायत का CEO बनाया गया है। नवीत कुमार धुर्वे को टीकमगढ़ से स्थानांतरित कर देवास जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है। ऐश्वर्य वर्मा को डिंडोरी के शहपुरा में SDM पद से हटाकर सीधी जिला पंचायत CEO बनाया गया है। आशीष को सेंधवा से हटाकर खंडवा जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है। कार्तिकेय जायसवाल को वारासिवनी से श्योपुर जिला पंचायत CEO बनाया गया है। वहीं अर्पित गुप्ता और तनुश्री मीणा को भी क्रमशः बड़वानी और बालाघाट जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी मिली है।

    इस तबादला सूची में 2024 बैच के प्रशिक्षु IAS अधिकारियों को भी मैदानी प्रशासन में नई जिम्मेदारी दी गई है। इन अधिकारियों को सहायक कलेक्टर पद से हटाकर अलग अलग क्षेत्रों में SDM बनाया गया है। आशीष कुमार को बीना अनिकेत शांडिल्य को बैहर आकाश अग्रवाल को मझौली पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर कुलदीप पटेल को बिछिया जामदार फरहान इरफान को शहपुरा ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा SDM की जिम्मेदारी दी गई है।

    सरकार के इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और नगर निकायों में अधिकारियों की भूमिका बदल गई है। अब नई पदस्थापना के बाद अधिकारियों के सामने अपने अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को गति देने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती होगी। खास तौर पर ग्वालियर सतना इंदौर भोपाल रीवा सिंगरौली और खंडवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए बदलाव पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। नई जिम्मेदारियों के साथ इन अधिकारियों का कामकाज आने वाले समय में इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के असर को तय करेगा।

  • मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: महिलाओं-किसानों को बड़ी सौगात, 1.46 लाख करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी

    मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: महिलाओं-किसानों को बड़ी सौगात, 1.46 लाख करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार 18 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। मंत्रालय में हुई इस बैठक में महिला कल्याण से लेकर किसानों स्वास्थ्य शिक्षा नर्मदा संरक्षण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सड़क विकास और खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में विकास और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए करीब 1 लाख 46 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन फैसलों को अगले पांच वर्षों के विकास और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कैबिनेट के फैसलों में महिलाओं और बेटियों से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिखाई दिया। सरकार ने लाड़ली बहना योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रुपये का प्रावधान मंजूर किया है। यह योजना मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। लंबे समय के लिए वित्तीय प्रावधान तय होने से योजना के आगामी संचालन के लिए बजटीय आधार मजबूत होगा।

    इसी तरह बेटियों के भविष्य और शिक्षा से जुड़ी लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 16 हजार 326 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए भी अगले पांच वर्षों में 2 हजार 137 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन तीनों योजनाओं को मिलाकर महिला कल्याण और बेटियों से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 1.32 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय प्रावधान किया गया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र को भी कैबिनेट से बड़ा बजट मिला है। सरकार ने स्वास्थ्य योजनाओं और संबंधित कार्यों के लिए 11 हजार 835 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने मौजूदा सुविधाओं के विस्तार और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में किया जाएगा। सरकार की कोशिश प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा प्रभावी और सुलभ बनाने की है।

    किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। कृषि शिक्षा अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के लिए 870 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके जरिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीक अनुसंधान प्रशिक्षण और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने से जुड़े कामों को बढ़ावा देने की योजना है। कैबिनेट में डिंडौरी जिले की उपलब्धि का भी उल्लेख हुआ जहां प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत किए गए कार्यों के मामले में देश में बेहतर प्रदर्शन की जानकारी दी गई। सरकार अब इस मॉडल को दूसरे जिलों तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगी।

    बैठक का एक बड़ा फैसला नर्मदा संरक्षण से जुड़ा रहा। सरकार ने नर्मदा नदी को निर्मल और अविरल बनाए रखने के उद्देश्य से नमन मिशन के गठन को मंजूरी दी है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का राज्य अनुदान दिए जाने की जानकारी सामने आई है। मिशन के तहत नदी के प्रदूषण को रोकने घाटों की साफ सफाई जल गुणवत्ता और नर्मदा के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाए रखने जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।

    विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अगले पांच वर्षों के लिए 492 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी दी गई है। सरकार का जोर तकनीकी विकास नवाचार और विज्ञान आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर रहेगा। वहीं प्रदेश में सड़क परियोजनाओं के प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में 35 नए पदों को मंजूरी दी गई है।

    खेल प्रतिभाओं को कम उम्र में पहचानने के लिए 5 से 15 वर्ष के बच्चों का टैलेंट सर्च कार्यक्रम चलाने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके जरिए प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी खेल प्रतिभा के अनुसार प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर देने की तैयारी है।

    कुल मिलाकर 18 अगस्त की मोहन कैबिनेट बैठक में सरकार ने महिला कल्याण किसानों स्वास्थ्य पर्यावरण विज्ञान तकनीक सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया है। अगले पांच वर्षों के लिए किए गए इन वित्तीय प्रावधानों से सरकार ने विकास और जनकल्याण का एक व्यापक रोडमैप सामने रखने की कोशिश की है।